शराबबंदी के 6 साल हो गए लेकिन तस्कर बाज नहीं आ रहे। ताजा मामला पटना के बिहटा मका है। जहां बाथरूम के सामान के आड़ में लाया जा रहा ट्रक पर लदा भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद किया गया है।
ट्रक के अंदर तहखाना बनाकर शराब लाई जा रही थी । दो अरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है साथ ही ट्रक जप्त की गई है ।
पटना के परेव में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस को ये सफलता मिली थी।
मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र से बड़ी खबर है, जहाँ एक कार में अचानक भीषण आग लग गई। बताया गया कि थाना क्षेत्र के गायघाट चौक के समीप NH57 पर सड़क किनारे खड़ी एक आल्टो कार अचानक से धू-धू कर जलने लगी
गाड़ी में कुछ लोग बैठे भी थे इसी दौरान अचानक आग लग गई। जिसके बाद लोगो ने जैसे तैसे गाड़ी से कूदकर अपनी जान बचाई।
हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है आग लगने सूचना पर पहुचीं गायघाट थाने की दमकल टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू।
पटना 03 मई 2022 : राज्यपाल श्री फागू चौहान एवं मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज इस्कॉन मंदिर के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री का स्वागत इस्कॉन मंदिर प्रबंधन द्वारा फूल माला एवं अंगवस्त्र पहनाकर तथा प्रतीक चिंह भेंटकर किया गया।
मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना एवं राधा कृष्ण की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसे आमलोगों के दर्शनार्थ खोल दिया गया। मंदिर के पट खुलने के पश्चात् मुख्यमंत्री ने आरती पूजन कर राज्य की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे, बिहार विधानसभा अध्यक्ष श्री विजय कुमार सिंहा, शिक्षा मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, भवन निर्माण मंत्री श्री अशोक चौधरी, विधायक श्री नंदकिशोर यादव, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आर०एन० सिंह, इस्कॉन के जय पताका स्वामी गुरू महाराज, लोकनाथ स्वामी महाराज, गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज, महाविष्णु स्वामी महाराज, भक्त पुरुषोत्तम स्वामी महाराज, पटना इस्कॉन के अध्यक्ष कृष्ण कृपा दास सहित अन्य संतगण, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त परामर्शी श्री मनीष कुमार वर्मा, बिहार राज्य नागरिक परिषद् के पूर्व महासचिव श्री अरविंद कुमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं श्रद्धालु उपस्थित थे।
देश भर में ईद की नमाज़ तो दूसरी तरफ परशुराम जयंती के मौके पर जहानाबाद में भव्य शोभायात्रा निकाली गई । जो गांधी मैदान से निकल कर राजाबाजार तक गयी जहां भगवान प्रशुराम का मंदिर निर्माण को लेकर भूमि पूजन किया गया।
जहानाबाद में पहली बार निकाली गई शोभायात्रा गाजे बाजे और घोड़े के साथ लोग मौजूद रहे। शहर से निकली इस शोभायात्रा का शहर में विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के लोग मौजूद रहे।
बताया गया कि परशुराम नगर में मंदिर निर्माण के लिए नीव भी आज ही रखी गई है। परशुराम जयंती भगवान विष्णु के छठे अवतार की जयंती के रूप में मनाई जाती है। यह वैशाख मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को पड़ती है।
ऐसा माना जाता है कि परशुराम का जन्म प्रदोष काल के दौरान हुआ था और इसलिए जिस दिन प्रदोष काल के दौरान तृतीया होती है उस दिन को परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है।
हाजीपुर के तेरसिया में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय के फार्म हाउस पर वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव कार्यक्रम की सफलता के बहाने आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान यह साफ हो गया कि बिहार बीजेपी का निजाम बदल गया है लेकिन यह ताज नित्यानंद राय के लिए कांटों से भरा ताज है इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है
वर्षो बरस बाद यह पहला मौका है जब बीजेपी का कोई कार्यक्रम पार्टी कार्यालय और सुशील मोदी के आवास के बाहर आयोजित हुआ है हालांकि पहले दिन पार्टी के संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया ने कहा था कि यह कार्यक्रम पार्टी का कार्यक्रम नहीं है यह कार्यक्रम नित्यानंद राय जी द्वारा आयोजित है, लेकिन तीसरे दिन आते आते पार्टी के विधायक ,विधान पार्षद,सांसद ,पूर्व विधायक पूर्व विधान पार्षद और पार्टी के पदाधिकारियों को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के फार्म हाउस पर आना है इसकी सूचना आधिकारिक रूप से पार्टी द्वारा दिया गया ऐसा कई विधायकों का कहना है।वैसे भी जिस तरीके से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तीनों दिन मौजूद रहे और संगठन महामंत्री दो दिन पूरे कार्यक्रम के दौरान मौजूद रहे उससे साफ लग रहा था कि नित्यानंद राय का कद काफी बढ़ गया है और बिहार बीजेपी का कमान नित्यानंद के हाथों में आ गया है ।
जितने विधायक और सांसद भोज में शामिल होने आये थे उसमें ऐसे विधायक और सांसद की सक्रियता बढ़ी हुई थी जो नीतीश और सुशील मोदी के चहेते नहीं रहे हैं हालांकि ऐसे विधायक भी आये थे जो सुशील मोदी के खासमखास माने जाते थे। भोज के दौरान विधायक और पार्टी के पदाधिकारियों को जो भाव था उससे भी साफ दिख रहा था कि नित्यानंद राय का कद बिहार बीजेपी में नम्बर वन का हो गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिस तरीके से केंद्रीय नेतृत्व नित्यानंद राय को तवज्जो दे रहा है उसके पीछे मंशा क्या है।
1–नित्यानंद की अघोषित ताजपोशी के पीछे अमित शाह की मंशा क्या है बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की यह लगातार कोशिश जारी है कि बिहार बीजेपी का कमान नित्यानंद राय के हाथों में आ जाये। इसके लिए पहले सुशील मोदी को बिहार से हटाया गया फिर पार्टी के महामंत्री नागेन्द्र जी को हटाया गया और उनकी जगह सीधे गुजरात से लाकर भीखू भाई दलसानिया को पार्टी का संगठन मंत्री बनाया गया फिर भी बिहार बीजेपी के अंदर मोदी की ही चलती रही लेकिन वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव कार्यक्रम के दौरान जिस तरीके से नित्यानंद राय को आगे बढ़ा कर केन्द्रीय नेतृत्व ने साफ संदेश दिया कि नित्यानंद बिहार में मोदी और शाह की पसंद है हालांकि इसका असर दिखने भी लगा है बिहार बीजेपी के अंदर मोदी के खिलाफ जो लोग थे वो रातो रात नित्यानंद के साथ खड़ा हो गये हैं वही नीतीश कुमार के कार्यशैली से बीजेपी के जो विधायक असहज है वो भी इस खेमे में आ गये हैं।
2– सुशील मोदी कैलाशपति मिश्र नहीं हैं सुशील मोदी बिहार की राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी माने जाते हैं आज भी सुशील मोदी ही बीजेपी के ऐसे नेता हैं जिन्हें बगहा से लेकर किशनगंज तक और जमुई से लेकर औरंगाबाद तक पार्टी का कौन कार्यकर्ता है और उस कार्यकर्ता की क्या हैसियत है फिर विधानसभा में किस तरह का जातीय और सामाजिक समीकरण है मोदी को छोड़कर बीजेपी में किसी भी नेता को पता नहीं है साथ ही प्रशासनिक समझ के मामले में बिहार बीजेपी में इनका जोड़ा नहीं है इसलिए इनसे सीधे सीधे पंगा लेना अभी भी मुश्किल है।
वही जब तक बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और लालू की पकड़ मजबूत रहेंगी तब तक सुशील मोदी को बिहार से हिलाना बहुत ही मुश्किल है क्यों कि तीनों के बीच गजब का सामंजस्य है और ये बात बिहार की राजनीति के माहिर से माहिर खेलाड़ी को पता है इसलिए मोदी और शाह की यह कोशिश बहुत जल्द रंग लाने लगेगी ऐसा होता नहीं दिख रहा है ।क्यों कि जब तक बिहार में एनडीए का कमान नीतीश कुमार के हाथों में है तब तक बहुत मुश्किल है बिहार में सुशील मोदी को छोड़ कर दूसरे नेता को स्थापित होना।
3—नीतीश को बिहार से बाहर किये बगैर शाह और मोदी के लिए बिहार सहज नहीं है मोदी और शाह 2015 में बिहार को अजमा चुके हैं उन्हें पता है कि बिहार को साधना कितना मुश्किल है फिर भी उनकी कोशिश जारी है और इसी कड़ी में नित्यानंद का बिहार में स्थापित करने कि कोशिश चल रही है। लेकिन यह तभी सम्भव है जब नीतीश कुमार बिहार से बाहर चले जाये जानकार बता रहे हैं कि मीडिया में नीतीश कुमार के उप राष्ट्रपति बनने को लेकर जो खबरें चली थी वो पूरी तौर पर प्रायोजित था ताकि नीतीश दबाव में आ सके वैसे नीतीश राष्ट्रपति के अलावा किसी दूसरे पद के लिए बिहार छोड़ दे ऐसा सम्भव नहीं है। ऐसे में मई ,जून और जुलाई बिहार की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण है लालू पटना आ रहे हैं ,राज्यसभा और राष्ट्रपति का चुनाव होने वाला है ऐसे में बिहार बीजेपी के सामने बहुत बड़ी चुनौती है ।
पहली चुनौती है नीतीश को साथ रखना दूसरी चुनौती है लालू को काउंटर करना और तीसरी चुनौती है राष्ट्रपति के चुनाव में नीतीश पिछले दो चुनाव की तरह अलग स्टैंड ना ले इन तीनों चुनौती को साधने में अगर नित्यानंद राय सफल रहे तो फिर बिहार बीजेपी का एक नये युग में प्रवेश तय है ।
गोपालगंज – रंगदारी नहीं देने पर फल व्यवसायी को अपराधियों ने जमकर की पीटाई । बेखौफ अपराधियो ने फल व्यसायी से फोन पर 4 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की।
रंगदारी नही देने पर फल व्यवसाई के मैनेजर को पकड़कर जहां उसकी बेरहमी से पिटाई कर अपहरण कर लिया। वहीं व्यसायी के गल्ले से नकद रुपये भी लूट लिये। पिटाई करने का यह वीडियो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया।
घटना कल रविवार को नगर थाना के अरार मोड़ की है।पीड़ित का नाम राकेश सिंह है।यह मांझा थाना के सुधा साह के टोला गाँव के निवासी बताये जाते है।
मुंगेर विश्वविद्यालय द्वारा शनिवार को सत्र 2018-21 स्नातक पार्ट-3 के बीए का रिजल्ट जारी किया गया है । लेकिन इसमें विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आयी है ।
जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा एक विद्यार्थी को स्नातक के तीनों पार्ट को मिलाकर कुल 800 की जगह 868 अंक दे दिया गया है. केकेएम कॉलेज, जमुई के इतिहास ऑनर्स के एक छात्र दिलीप कुमार साह (जिसका रौल नंबर 118040073) को उसके पार्ट-3 के पेपर-5 विषय में कुल 100 अंकों में 555 अंक दे दिया गया है । जिसके कारण ही उसका कुल प्राप्तांक भी 1,130 हो चुका है ।
इतना ही नहीं सबसे आश्चर्य की बात है कि उसे कुल 108.5% प्राप्त हुए हैं. बता दें कि कई तकनीकी कारणों और सही से रिजल्ट प्रकाशन को लेकर ही परीक्षा विभाग अपने दो बार रिजल्ट प्रकाशित करने के दावे की तिथि पर इसे प्रकाशित नहीं कर पाया था । विश्वविद्यालय द्वारा जो रिजल्ट जारी किया गया है, उसे चेकर, मेकर के अतिरिक्त परीक्षा नियंत्रक से लेकर कुलपति और प्रतिकुलपति द्वारा भी अनुमोदित किया गया है । और रिजल्ट जिसके टीआर के वेबकॉपी को विश्वविद्यालय के ऑफिशियल वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया ।
मीडिया में ख़बर आने के बाद परीक्षा विभाग की नींद टूटी और उस विधार्थी के रिजल्ट को सही किया । साथ ही इस मामले में परीक्षा नियंत्रक रामाशीष ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए कहा की काम के काफी प्रेशर और समय पे परीक्षा फल प्रकाशित करने के कारण ये मिस्टेक हुई पर इसे सुधार दिया गया । साथ ही एक अन्य मामला जिसमे भी गलत हुआ था उसे ठीक कर दिया गया । साथ ही कहा की अब आइंदा इस तरह की गलती नहीं होगी ।
जहानाबाद शहर में चोर गिरोह सक्रिय है । अकेले देखकर लोगों का मोबाइल छीन लेना है इनका काम । ऐसा ही एक मामला सोमवार दोपहर बाद अरवल मोड़ के समीप का है, जहां एक महिला मोबाइल से बात करते जा रही थी पीछे से आए एक युवक ने झपट्टा मार लिया ।
महिला जोर जोर से चिल्लाने लगी जिसके बाद लोगों ने मोबाइल चोर को पकड़ लिया और पिटाई करने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी। आरोपी को पुलिस अपने साथ ले गई है मोबाइल चोर जहानाबाद शहर के पचमहला का रहने वाला है पुलिस आरोपी से पूछताछ कर गिरोह के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है।
केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा को लेकर बड़े- बड़े दावें करती है। लेकिन जमीन पर ये दावे फेल होते दिखते हैं। जहानाबाद शहर के ये सरकारी विद्यालय कई सालों से मंदिर के प्रांगण में चल रहा है।
यहां बच्चे ज्यादा गर्मी हो या ठंड भगवान भरोसे ही होते हैं. गौरक्षनी देवी मंदिर के प्रांगण में बच्चों की भीड़ कोई पूजा-पाठ करने नहीं बल्कि शिक्षा ग्रहण करने आती है. स्कूल भवन के अभाव में ये बच्चे कैसे शिक्षा ग्रहण करते होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
इस मंदिर में बड़े पैमाने पर शादी और धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। ऐसे में भारी भीड़ और गाजे – बाजे के साथ बच्चों की पढाई भी बाधित होती है।
जब स्कूल के शिक्षक और प्रधान शिक्षिका से इस बारे में पूछा गया उन्होंने बताया कि विद्यालय की जमीन उपलब्ध ना होने की वजह से यह स्कूल गौरक्षनी स्थित मंदिर में चल रहा है।
कभी शादी तो कभी धार्मिक कर्मकांड होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है. उन्होंने कहा की कई बार अधिकारियों से भवन निर्माण की बात की गई है लेकिन तक इस पर कोई कारवाई नही की गई है.
पटना । प्रशांत किशोर के नई पार्टी के गठन पर सुशील मोदी की प्रतिक्रिया बिहार में कोई भविष्य नहीं है।
बिहार में मुख्यधारा के चार दलों के अलावा किसी नई राजनीतिक मुहिम का कोई भविष्य नहीं है। लोकतंत्र में किसी को भी राजनीतिक प्रयोग करने या दल बनाने की पूरी आजादी है, इसलिए देश में सैंकड़ो दल पहले से हैं। अब इस भीड़ में यदि कोई अतिमहत्वाकांक्षी व्यक्ति एक नई नहर बनाना चाहता है, तो इससे सदाबहार नदियों को क्या फर्क पड़ेगा?
जनता के मन-मस्तिष्क में गहरे स्थापित किसी राजनीतिक दल के लिए चुनावी रणनीति बनाना, नारे-पोस्टर, घोषणापत्र आदि बनाने में किसी पार्टी की मदद करना या इस अभियान को बहुत पेशेवर ढंग से पूरा कर लेना एक बात है, लेकिन करोड़ों लोगों की आकांक्षा पर खरे उतरने वाली राजनीति करना बिल्कुल अलग बात है।
जिनको वर्षों तक अलग-अलग पार्टी के साथ अलग-अलग राज्यों में काम के बावजूद जनता के मुद्दे समझ में नहीं आये, वे अब अकेले क्या तीर मार लेंगे?
पटना विश्वविद्यालय में स्नातक नामांकन के लिए आज से पोर्टल खोल दिया गया है। छात्र फॉर्म चार जून तक भर सकते हैं, लिखित प्रवेश परीक्षा 18 जून को होगी।
एक ही आवेदन पर छात्र सभी कॉलेजों के लिए योग्य होंगे। नोडल संस्थान बीएन कॉलेज के द्वारा इस संबंध में शनिवार को भी बैठक की गयी थी। बैठक में नोडल संस्थान के द्वारा कुछ गाइडलाइन बनायी गयी है।
बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड (BSEB) ने बिहार डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) के लिए अनलाइन रजिस्ट्रेशन एवं आवेदन फीस जमा करने की आखरी तिथी को अब बढ़ा दिया है।
पहले आवेदन और आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 2 मई 2022 थी, जिसे बढ़ा कर अब 5 मई 2022 कर दिया गया है। जिससे रजिस्ट्रेशन के साथ आवेदन शुल्क जमा करने के लिए अभियार्थियों को और वक्त मिल गया है।
वहीं ऑनलाइन भरे गए रजिस्ट्रेशन फॉर्म के आधार पर समिति द्वारा जारी डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड में किसी प्रकार की त्रुटि का सुधार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 6 मई तक किया जा सकता है।
पीएम मोदी जर्मनी, डेनमार्क और फ्रांस का दौरा करेंगे। बर्लिन में भारत-जर्मनी IGC बैठक में शामिल होंगे पीएम मोदी।
जर्मन चांसलर ओलाफ़ स्कॉलज़ के साथ पहली बार मुलाकात। भारत-जर्मनी इंटर-गवर्नमेंटल कंसल्टेशन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, और विदेश मंत्री एस जयशंकर शामिल होंगे।
जर्मनी में पीएम मोदी और जर्मन चांसलर भारत और जर्मनी के टॉप CEOs से राउंडटेबल बैठक करेंगे।
जर्मन चांसलर ने आज पीएम मोदी के स्वागत में डिनर का आयोजन किया है।
बिहार से पलायन नही रुकेगा, अव्वल तो पलायन बिहार के लिए एक अभिशाप नही बल्कि एक वरदान है । रोजगार के लिए पलायन हमेशा बुरा भी नही होता । केरल में बिहार से भी अधिक पलायन है परंतु औसत आमदनी और समृद्धि बहुत अधिक है, जिसमे रेमिटेंस सेंड बैक का बड़ा योगदान है । पलायन का नेचर और रोजगार की प्रकृति अलग है, वहां अधिकांश पलायन मिडिल ईस्ट गल्फ देशों में है। पलायन से केरल में प्रति व्यक्ति आय बढ़ी, बिहार में भी बढ़ी है ।
पलायन का सबसे बड़ा लाभ बिहार में आर्थिक के बजाय #सामाजिक स्तर पर हुआ, बिहार में गरीब गुरबों को सर उठाने का जज़्बा और हिम्मत पलायन के बल पर ही मिला । याद करिये 60 और 70 का दशक जब बिहार के गांवों में छोटी जाती के भूमिहीन मजदूरों के साथ कितना बुरा बर्ताव होता था, उनकी समाजिक स्थिति कितनी बदतर थी । उन्हें दोयम दर्जे का नागरिक बना के रखा गया था । यदि कहूँ की, उन्हें इंसान नही माना जाता था, तो अतिश्योक्ति नही होगी । यही मजदूर जब पंजाब गया तो उसकी आमदनी बढ़ने लगी । जाहिर है इस रास्ते को श्रमिको और मजदूरों ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के माध्यम के साथ अपने आत्म स्वाभिमान को बढ़ाने के माध्यम के रूप में अपनाया, अब वो गांव के बड़े ज़मीदार की दासता से मुक्त था ।
बिहार में कृषि भूमि की औसत जोत पूरे भारत मे सबसे कम है, आबदी की वृद्धि दर सबसे अधिक है । अब भाइयों में बटवारें के पश्चात सिर्फ कृषि आमदनी से छोटे किसानों के बढ़ते परिवार को पालना कठिन होने लगा था । योजना आयोग की 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत मे कृषि क्षेत्र से अविलंब 22 करोड़ अतिरिक्त लोगों को दूसरे क्षेत्र में रोजगार देने की आवश्यकता है । खेती के मजदूरों का पहले बिहार से पंजाब हरियाणा जैसे राज्यो में पलायन हुआ जहाँ कृषि भूमि की जोत बड़ी थी ।
अब बात करें बिहार के #औद्योगिकरण की: तथ्य ये है कि बिहार आजादी के कई वर्षों बाद तक देश का औद्योगिक रूप से अग्रणी एवम सम्पन्न राज्य था । शुरुआती दौर में ही सबसे अधिक चीनी मिलें, सीमेंट कारखाने, जुट मिल आदि बिहार में खुली, डालमिया नगर 3700 एकड़ का औद्योगिक शहर बसा जिसमे 40 से अधिक विभिन्न केमिकल, शुगर, डिस्टिलरी, सीमेंट, पेपर मिल की इकाइयां थी, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद कोल माईनस, बिहार कई प्रदेशो से आगे था, लेकिन ये प्रक्रिया गति पकड़ने के बजाय थमने लगी जिसके अनेक कारण थे:
1) भेदभाव पूर्ण नीति: #फ्रेट_इकुलाइज़ेशन की पॉलिसी ने बिहार में उद्योग लगाने के एडवांटेज को समाप्त कर दिया, कोयला, लौह अयस्क एवं अन्य खनिज बिहार से जिस दाम में मिलेंगे उसी दाम पर जब दक्षिण और पश्चिम के राज्यो में उपलब्ध होंगे तो कोई बिहार में कारखाना क्यों लगाए ।
2) #लैंड_लॉक स्टेट होने के कारण बिहार में उद्योग लगाने में डिसडवांटेज है क्यों कि अगर रॉ मटेरियल इम्पोर्ट करना है या आउटपुट एक्सपोर्ट करना है ऐसे में बंदरगाह से नजदीकी मायने रखती है ।
3) #भूमि की अनुपलब्धता – बिहार में आबादी का घनत्व अधिक है और अधिकांश भूमि कृषि योग्य है । बड़े उद्धयोग को जिस पैमाने पर भूमि की आवश्यकता होती है, बिहार में उसका सही स्थान पर प्रबन्ध कर पाना आज भी एक दुस्कर कार्य है । भूमि की दर भी बिहार में अन्य राज्यो की तुलना में बहुत अधिक है । समृद्ध राज्यो में भी जमीन बिहार से सस्ती उपलब्ध है ।
4) अब कुछ ऐसे कारण जो बिहार के औधोगिक पिछड़ेपन में सबसे अधिक महत्वपूर्ण रहे है – #उद्यमियोंकोहेयदृष्टिसे_देखना – राज्य की जनता और प्रशासन ने कभी भी जोखिम लेकर पूंजी निवेश करने वाले, रोजगार देने वाले, उद्यमी को उसका यथोचित सम्मान नही दिया । जनता नेताओ, प्रशासनिक अधिकारीयों, पुलिस अधिकारीयों का तो सम्मान करती है लेकिन उद्यमियों के राह में बाधाएं हर स्तर पर आते है । सामाजिक कार्यक्रमो में उन्हें उद्योगपति अथवा #व्यापारी कहने के बजाए #समाजसेवी कह कर परिचित कराना पड़ता है । उनकी मेहनत और जोखिम को नजरअंदाज कर उनसे जलने वाले उन्हें हमेशा नीचे लाने को ततपर रहते है । क्या नेता, पुलिस और अफ़सर ही सम्मानयोग्य है, क्या इनमे भरस्टाचार नही, शायद बहुत अधिक, एक उद्यमी का देश की तरक्की में योगदान इनसे अधिक होता है, चाहे राज्य को दिया जाने वाला सेल्स टैक्स (अब GST) हो, या केंद्र को दिया जाने वाला आयकर (हिस्सा राज्य को भी मिलता है) अथवा डायरेक्ट इनडायरेक्ट कर्मचारियों, सप्लायर्स, ट्रांसपोर्टर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, रिटेलर्स के माध्यम से लोगो को दिए जाने वाला रोजगार हो, दूसरी और जो उत्पादन/ट्रेड वो कर रहे है अगर वो न करे तो आम लोगों के लिए वस्तुओं की उपलब्धता कम और महंगी होगी, किसानों की फसल का बेहतर मूल्य न मिले, लेकिन सारे लाभ होने के बाद भी इस राज्य ने उद्यमी को कभी भी सम्मान नही दिया, उसे हमेशा मुनाफ़ाखोर और दूसरे से काम लेकर खुद कमाने वाला के रूप में देखा, उससे लोग जलते , यही मुनाफा जब कोई बाहर की या विदेश की कम्पनी लेती है तो उसके आगे बिहार वाशी नतमस्तक रहते है । अरे मुनाफ़ा व्यापार की प्रगति और निरन्तरता के लिए परमावश्यक है, मुनाफ़ा ही नए निवेश का आधार होता है और उत्तरोत्तर प्रगति की नींव रखता है । आज बिहार में हर जिले में बन्द पड़ी सरकारी और निजी चीनी मिल, फर्टीलाइजर फैक्टरी, पेपर मिल आदि की ऐसी कहानियां बिखरी पड़ी है ।
5) #अपनेघरमेहनत_नहीं: बिहारी श्रमिकों के साथ भी एक तथ्य है कि अपने राज्य में उनकी श्रम शक्ति उस प्रकार प्रभावी नही होती जैसे वो बाहर जा कर क्रियाशील होते है । यहाँ अपने लोगो के बीच वो अपनी प्रथाओं, अस्मिता, राजनीति, तीज त्योहारों और आलस्य उत्सव में मग्न रहते है, जबकि परदेश में उनके साथ ये बधाये नही होती।
6) #लो_एस्पिरेशन- मैंने बिहार के प्रत्येक जिले में छात्रों का सेमीनार लिया है, अक्सर छात्रों से पूछता था कि बताओ अगर तुम्हें अवसर मिले तो तुम किस नौकरी के लिए तैयारी करना चाहोगे? कौन सा जॉब करना है? कई बार छात्रों ने कहा कि टॉवर में गार्ड लगवा दीजिये, उस दौर में शिक्षा मित्र की बहाली आयी थी, तब वेतनमान मात्र 6000 प्रतिमाह था, लेकिन छात्रों में उसका जबरदस्त क्रेज था । आज विधानसभा में चपरासी, गार्ड, स्वीपर और माली की नौकरी के लिए 6 लाख लोगो ने आवेदन कर दिया, जिसमे स्नातकोत्तर और प्रोफेशनल कोर्स किये छात्र है, फैक्ट यही है कि लगातार छात्रों की एस्पिरेशन घटी है, पटना ssc, बैंकिंग और दरोगा-सिपाही बहाली के कोचिंग से भरा है IAS का कोचिंग पटना में एक भी स्तरीय नही । बिहार से आज भी भारी मात्रा में IAS के प्रतिभागी भाग लेते है, दिल्ली, इलाहाबाद में कोचिंग करते है, लेकिन बिहार का रिजल्ट लगातार गिरा है, अधिकांश हिंदी मीडियम से परीक्षा देते है, हिंदी मिडियम का ही रिजल्ट कुल सफल छात्रों में मात्र 2% है । उद्यमिता की बात ही वहाँ कैसे हो जहाँ एस्पिरेशन लेवल नीचे जा रहा हो । उद्यमिता की सबसे बड़ी ड्राइविंग फोर्स साहस और महत्वाकांक्षा होती है । ऊँचे सपनो के आधार पर ही उद्योग की नींव होती है ।
7) #पोस्टप्रोडक्शन के बजाय #प्रीप्रोडक्शन_स्कैम – बिहार में कही भी कोई उद्योग, विश्वविद्यालय लगाने की प्रक्रिया शुरु करेगा तो उस इलाके के राजनीतिज्ञ, अधीकारी, दबंग, जातीय मुखिया और गुंडे इस जुगत में लग जाते है कि कैसे इस इंडस्ट्रीलिस्ट / मारवाड़ी / पैइसावाले से माल टाना जाए । मुर्गी अंडा दे उसके बजाय उसका पेट ही चीर कर सारे अंडे एक साथ निकाल ले ।
8) आज स्थिति ये है कि इस राज्य में #बाहुबल और #राजनैतिक_संरक्षण के बिना उद्योग या कोई बड़ा प्रोजेक्ट लगाना सम्भव नही रह गया है । आप किस जाति के गांव में है, आपका प्रमुख मैनेजर किस जाति का है, भूमिहार का गांव है कि बाबूसाहब का है, बाभन एडवाइजर है कि नही, लाल झंडा का क्षेत्र तो नही न था? ऐसे कितने प्रश्न है जिसे कोई उद्यमी झेलना नही चाहेगा , निवेश ही करना है तो भारत मे विकल्प की कमी नही है ।
9) #रेडटेपब्योरोक्रेशी – माननीय मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी विफलता अपने नौकरशाही में सुधार न ला पाने की है । जिस उद्यमी को सचिवालय का चक्कर लगता है उससे वहाँ के हाल पूछिये । सरकारी फाइल से स्लो कोई चीज़ भगवान ने बनाई नही, और ऊपर से अर्जेंट आदेश वाली फाइल सबकी बनती नही ।
10) #छवि : मुख्यमंत्री एक बार उद्यमियों के सम्मेलन में मुंबई गए थे, अगले दिन वहां के प्रमुख अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापा कि “नीतीश डेयर्स इन्वेस्टर्स” यानी कि मुख्यमंत्री ने निवेशकों को आमंत्रित करने का प्रयास जो किया उसे वहां के उद्यमियों ने डराने के प्रयास के रूप में लिया क्योंकि बिहार में निवेश बिना शर्तों के नहीं होता है जबकि उद्यमी ऐसे राज्यों को खोज रहे होते हैं जहां उनको रेड कारपेट वेलकम मिले कई बार ऐसी परिस्थितियां भी बनी जहां पर उद्यमी निवेश करने के पश्चात स्थानीय अथवा प्रशासनिक समस्याओं में उलझ गया, ऐसे में उच्च स्तर पर उद्यमी की परेशानी को समझने के बजाय सरकारी नियमों एवं वोट की राजनीति के मजबूरियों को महत्व दिया गया। यानी कि उच्चतम स्तर पर शासन की प्रतिबद्धता अपनी छवि और वोट बैंक की मजबूरियों के प्रति दृढ़ हैं जबकि राज्य के औद्योगिककरण के लक्ष्य को लगभग असंभव मानते हुए प्रयासों को छोड़ दिया गया है । यहाँ राजनेता उद्यमी की मदद करने की छवि बनने से डरते है, क्योंकि जनता इसे अच्छा नही मानती ।
11) #शिक्षा स्तर में गिरावट: पहले कर्पूरी फॉर्मूला, फिर परीक्षाओं में व्यापक कदाचार और अब मुखिया द्वारा बहाल अयोग्य शिक्षकों की वजह से बिहार की प्राइमरी, सेकेंडरी समेत पूरी शिक्षा व्यवस्था गर्त में चली गयी है । जिस बिहार की मेधा पर भारत को नाज़ था आज उस मेधा को बिहार में पुष्पित-पल्वित होने का अवसर ही नही मिल रहा । हायर एजुकेशन राजनीति और भ्रस्ट वाइस चांसलरों के भेंट चढ़ गई, बाद में वाइस चांसलर के ऊपर का पायदान भी दूषित हो गया, जब गंगोत्री ही दूषित हो जाये तो गंगा साफ कैसे रहे । खराब शिक्षा व्यवस्था से भविष्य के आन्तरिप्रेन्योर और स्टार्टअप फाउंडर्स की अपेक्षा करना कैसे संभव है ।
अनेको और वजहें है लेकिन मूल बात यहीं है कि बिहार की जनता जब तक औद्योगिकीकरण नही चाहेगी तब तक ये होगा नही, जो प्रदेश अपने #स्थानीय_उद्यमियों को सम्मान न दें, वहाँ बाहर से निवेश ज्यादा आएगा नही सिर्फ लोकल आबादी की खपत को स्थानीय स्तर पर पूरा करने के लिए कोई बिस्किट फैक्टरी लग जायेगी, कोई वाशिंग पॉवडर प्लांट, कोई छोटा सीमेंट कारखाना, उद्देश्य सिर्फ बाहर से लोकल खपत को मंगाने का माल भाड़ा बचाना होगा । बिहार ट्रेडिंग राज्य है, यहाँ ट्रेडर इंडस्ट्रीलिस्ट से ज्यादा कमाता है, यहाँ पढ़ाने वालो से ज्यादा डिग्री बेंचने वाले और दूसरे राज्यो में छात्रों का नामांकन कराने वाले एजेंटों/कंसल्टेंट का टर्नओवर है, और सबसे बड़ा मसला लोगो के दृष्टिकोण का है, उद्यमियों के प्रति व्यहवार का है ।
पलायन को अभी वरदान मानिए- कोशिश यही होनी चाहिये कि पलायन करने वाले श्रमिको को प्रशिक्षित किया जाए ताकि उनकी आमदनी बढ़े, जीवन स्तर बेहतर हो ।
मुख्यमंत्री हमेशा कहते थे कि बिहारी इतना मेधावी है कि अगर चांद पर भी वैकेंसी होगी तो बिहारी वहाँ अप्लाई करेंगे । मेरा सवाल था क्यो? जब महाराष्ट्र और आसाम में ग्रुप 4 की वैकेंसी के लिए आये बिहारी नौजवानों का विरोध हुआ तब मुझे यही लगा कि आखिर हमारे नौजवान चपरासी बनने बिहार से बाहर क्यो जाए? अगर बिहारी नौजवान, अफसर बनते है, उद्यमी बनते है, मैनेजर, प्रोग्रामर, डॉक्टर, साइंटिस्ट बनते है और किसी अन्य राज्य में कार्य करते है, उनका तो विरोध नही होता, कम वेतनमान के सरकारी जॉब पर स्थानीय गरीब यदि अपना हक़ चाहते है तो बुरा क्या, वो आखिर चपरासी बनने बिहार नही आते?
बिहार में #उच्चशिक्षा के लिए भी_पलायन होता है और पूरे देश में सबसे ज्यादा होता है । ये भी नही रुकेगा कोई रोकने की पॉलिसी नही वही समस्या है चाहे राजतंत्र के स्तर पर हो या जनता के स्तर पर, विस्तृत पोस्ट कभी और वैसे औद्योगिकरन कि एक बड़ी रीक़वाइरमेंट ट्रेंड मैनपॉवर के उपलब्धता भी होती है । जिसकी व्यवस्था बिहार में कभी हुई नही और जहाँ स्तरीय शिक्षण संस्थान होंगे उद्योग वही शुरू होते है, जैसे आईटी सेक्टर दक्षिण के राज्यो में बढ़ा क्योंकि तकनीकी संस्थानों की एक सपोर्ट चेन पहले से थी, उद्योगीकरण ने उस चेन को मजबूत कर दिया ।
पॉलिसी स्तर पर कितनी बाधा है, एक उदाहरण से समझे- कोटा में सबसे अधिक और बड़े कोचिंग वहाँ के औद्योगिक क्षेत्र में है यहां पाटलिपुत्र जैसे शहर के बीचों बीच स्थित औद्योगिक क्षेत्र में आप प्रदूषण वाला उद्योग लगा सकते है, पढ़ा नही सकते (हां सरकार वहाँ खुद आईआईटी खोले, इंजीनियरिंग कॉलेज, एटीडीसी ट्रेनिंग सेंटर, CA इंस्टीट्यूट खोल सकती है, लेकिन कोई निजी शैक्षणिक न्यास शिक्षण संस्थान नही खोल सकता, बाकी सत्ता से जोड़े है तो मॉल भी खोल ले । 8 साल पहले बिहटा में विवि स्थापना के लिए एमिटी और सिमेज ने सरकार से जमीन खरीदी, बाजार दर पर अलॉटमेंट हुआ, पेमेंट कर दिया गया, आजतक जमीन मिली नही, पैसा जमा है । अमेटी ने पूरे भारत मे अपना सबसे छोटा विवि बिहार में किराए के भवन में खोल दिया अब वो निश्चिंत है जब तक सरकार जमीन नही देगी उसका काम हो रहा है । वैसे ये पोस्ट मैंने किसी निजी अनुभवों को साझा करने के लिए नही लिखा परन्तु अनुभव से अधिक ऑथेंटिक सुनी बातें नही होती, इसलिए साझा कर रहा हूँ, वैसे इस दिशा में बीस वर्षों में हज़ारो निजी अनुभव है ।
याद है कोलकाता शहर में वो #हाथरिक्शा खींचने वाले, बड़ा बाजार में टोकरी पर बोझा ढोने वाले कुली लगभग सभी बिहार के थे और आज भी है । बिहार आज पूरे देश मे सुरक्षा गार्ड, रिक्शा-ठेला -ऑटो ड्राइवर, छोटे दुकान-फैक्टरी कर्मचारि और अन्य वर्कर्स/ एम्प्लोयी का सबसे बड़ा सप्लायर है । यही #बिहारकासबसेबड़ा_एक्सपोर्ट है और आमदनी का जरिया भी है । जरूरत ये है कि हम अपने प्रोडक्ट को कितना तैयार कर बाहर भेज रहे है, कितना एक्विप कर रहे है, कितना पॉलिश कर रहे है ताकि बाहर उसे अपनी प्रतिभा, मेधा और श्रम का उचित मूल्य मिले ।
आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, रोबोटिक्स का है, इंटरनेट ऑफ थिंग्स का है, बिग डेटा का है । ऐसे में जिन रोजगारों के लिए बिहार से श्रमिक बाहर जाते है वो आने वालों वर्षो में समाप्ति की ओर होंगे । अपनी श्रम शक्ति और मेधा को हमे भविष्य की इन चुनौतीयों के लिए तैयार करना होगा ।
इसलिए पलायन होगा- होने दीजिए, कोशिश यही होनी चाहिये कि पलायन के स्वरूप को बदला जाए ।
औद्योगिकरण के लिये अगर जनता और सरकार के मिज़ाज और व्यहवार में, नीति और नियत में परिवर्तन आ जाये तो सोने पर सुहागा होगा लेकिन ऐसा होगा नही यहां अभी जातिवाद के साथ साथ धर्म की राजनीति होगी ।
मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर पुलिस ने एक बड़े वाहन चोर गिरोह का खुलासा किया है। यह गिरोह मुजफ्फरपुर के शहरी इलाका से बाइक चुराकर नेपाल में बेच दिया करता था।
दरअसल नगर पुलिस को लगातार बाइक चोरी की शिकायत मिल रही थी। डीएसपी टाउन आर एन पासवान ने नगर थानेदार अनिल कुमार के नेतृत्व में एक टीम बनाई और अहियापुर के सोडा गोदाम चौक छीट भगवतीपुर में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान चार युवकों को दबोच लिया। इन सभी से सख्ती से पूछताछ की गई तो कई अहम खुलासे हुए।
इन लोगों की निशानदेही पर पुलिस ने सीतामढ़ी के बथनहा मे तैनात चौकीदार मोहम्मद मुन्ना के पुत्र फैयाज को दबोच लिया। इनके पास से पुलिस ने आधा दर्जन से ज्यादा चोरी की गई भी बाइक को बरामद कर लिया है । कई बाइक का तो इंजन निकाल कर इन लोगों के द्वारा बेच दिया गया है।
पकड़े गए युवकों की पहचान सीतामढ़ी के मोहम्मद फैयाज, अहियापुर के सोडा गोदाम छीट भगवतीपुर के मोहम्मद ताज मोहम्मद तंजीर, जावेद और सोनू के रूप में हुई है। इस गिरोह का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड चौकीदार का पुत्र फैयाज उर्फ लुल्ला है, जो कि इन युवकों से चोरी का बाइक खरीद कर नेपाल में 5 से दस हजार में बेच दिया करता था।
डीएसपी प्रशिक्षु सियाराम यादव ने बताया यह युवक मुजफ्फरपुर के कई इलाकों से बाइक चोरी कर सीतामढ़ी के फैयाज को दे चुका है। और फैयाज नेपाल में जाकर बाइक का पार्ट पार्ट अलग कर बेच दिया करता था। इन लोगों की गिरफ्तारी से बाइक चोरी में कमी आएगी।
जहानाबाद । मामला रेलवे कॉलोनी का है, नाला से हाथ पैर बंधे एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। । शव को देखने से आशंका जताई जा रही है कि अपराधियों ने हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही रेल पुलिस मौके पर पहुंच गई और शव को कब्जे में कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है और छानबीन शुरू की।
स्थानीय लोगो ने बताया कि नाले में एक व्यक्ति का डेड बॉडी पड़ा मिला है देखने से प्रतीत हो रहा है कि किसी ने हत्या कर उसे फेंक दिया है। इधर पुलिस अधिकारी ने आशंका जताते हुए कहा कि हाथ पैर बंधा एक डेड बॉडी बरामद किया है।
शव देखने से यह प्रतीत होता है कि पहले युवक की हत्या की गई होगी फिर उसके बाद सबूत मिटाने के इरादे से शव को पीडब्ल्यू ऑफिस के पीछे रेलवे कॉलोनी के नाले में फेंक दिया है।फिलहाल युवक की पहचान नहीं हो पाई है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन करने में जुटी है।
बीते कुछ सालों में त्योहार के समय हुई घटनाओं ने जहानाबाद की पुलिस को सतर्क कर दिया है। यही वजह है कि पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
ईद को लेकर जिले भर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। पुलिस की गश्ती व्यस्ततम बाजारों में बढ़ गयी है। ऐसे में ईद को लेकर रविवार को एएसपी, एसडीओ और डीएसपी की अगुवाई में पुलिसकर्मियों ने पूरे शहर में फ्लैग मार्च किया।
इस दौरान अम्बेडकर चौक से शुरू होकर मुख्य बाजार, फ़िदा हुसैन रोड, अरवल मोड़ होते हुए फ्लैग मार्च हॉस्पिटल मोड़ पहुंचा। वापसी में दर्धा पुल होते हुए पुलिस लाइन में आकर मार्च समाप्त हो गया। फ्लैग मार्च में सार्जेट मेजर और सभी शहरी इलाकों के थानाध्यक्ष की मौजूदगी रही।
बेगूसराय । बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री का नाम केंद्र में मोदी सरकार के 8 साल पूरा होने पर 26 मई को पूरे देश में हनुमान चालीसा करने की घोषणा का विरोध किया है। इसके साथ ही बिहार में भी लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध की मांग को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कार्रवाई करने की बात कही है।
निजी दौरे पर बेगूसराय पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने केन्द्र की नरेंद्र मोदी के आठ साल पूरे होने पर 26 मई को देश भर में हनुमान चालीसा करने के सवाल पर कहा कि साल पूरे होने पर हनुमान चालीसा होता है तो यह सेंटीमेंट जगाना और धार्मिक भावना जगाना है और यह राष्ट्रीय स्तर पर करना उचित नहीं है देश के हर लोग कोई हनुमान कोई राम कोई अन्य भगवान पर आस्था रखते हैं लेकिन पूरे देश में अभियान चलाकर देश स्तर पर हनुमान चालीसा किया जाता है यह उचित नहीं है भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।
मांझी ने बिहार में यूपी के तर्ज पर लाउडस्पीकर प्रतिबंध के सवाल पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में ही लाउडस्पीकर का मनाक तय कर दिया था ऐसे में मस्जिद हो या मंदिर हो या डीजे हो सभी जगह यह नियम लागू होना चाहिए केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार हो उसको सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करना चाहिए बिहार के मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि वेवजह इस मामले को तूल दिया जा रहा है।
मजदूर दिवस के अवसर पर लालू के बड़े लाल एवं जनशक्ति परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव पहुंचे बिहटा प्रखंड के मखदुमपुर गांव के दलित बस्ती।
सुरेश मांझी के घर पहुंचकर उनके परिवार से बातचीत की। साथ ही घर पर बैठकर उनके घर रोटी और दल का स्वाद चखा।
घर पहुचने पर सुरेश मांझी ने कहा कि आजतक हमने कभी नही देखा था लालू के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव को। आज पहली बार हमारे घर पर अचानक आ पहुंचे और हमारे घर पर बने रोटी भिंडी की भुजिया और प्याज साथ ही खाने से पहले चाय पी। जो खुशी मुझे मिली बता नहीं सकते।
बेतिया में एक बार फिर नेपाल ने दुस्साहस दिखाते हुए नो मेंस लैंड पर अतिक्रमण कर लिया। नरकटियागंज अनुमंडल क्षेत्र स्थित भिखनाठोरी में सितखोली के पास बैरिकेडिंग कर धार्मिक झंडे-बैनर लगाने से दोनो देश के बीच कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही नरकटियागंज एसडीएम धनंजय कुमार मौके पर पहुंचे और बातचीत कर अतिक्रमण हटवाया। । बता दे नेपाल के पूर्व पीएम केपी ओली ने जुलाई 2020 में बयान दिया था कि भगवान राम का जन्म नेपाल में हुआ था। उन्होंने दावा किया था कि जिस अयोध्या में राम का जन्म हुआ था वह वीरगंज के पश्चिम में स्थित भिखनाठोरी गांव है।
उन्होंने यहां मंदिर बनवाने की घोषणा भी की थी। जानकारी मिली है कि नेपाल के स्थानीय लोग पिलर संख्या-436 के समीप सीताखोला के पास मंदिर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। घटना के बाद से एसएसबी के जवान बॉर्डर पर लगातार नजर बनाये हुए हैं। गौरतलब हो कि भिखनाठोरी बॉर्डर पर कई बार विवाद की स्थिति बन चुकी है।
दोनों देशों के लोगों के बीच कई बार मामला मारपीट तक पहुंच चुका है। वर्ष 2005-06 में भी यहां विवाद हुआ था। जिसके बाद पैमाइश के लिए दोनों देशों की सर्वे टीम बुलानी पड़ी थी। इतना ही नहीं पानी को लेकर भी यहां कई बार विवाद हो चुका है।
समस्तीपुर के एक शिक्षक बैजनाथ रजक अपने पढ़ाने के तौर-तरीकों को लेकर एक बार सुर्खियां बटोर रहे है। शिक्षक गीत के माध्यम से लू से बचाव को लेकर बच्चों को जागरूक कर रहे है । शिक्षक की इस अनोखी पहल की जंहा अन्य शिक्षक सराहना कर रहे है वंही बच्चे मनोरंजन के साथ लू से बचाव के गुर सिख रहे है ।
समस्तीपुर के हसनपुर प्रखंड के प्राथमिक कन्या विद्यालय मालदह में कार्यरत ये शिक्षक है बैजनाथ रजक। जो इन दिनों एक बार फिर सुर्ख़ियो में है । इससे पहले वो चर्चा में तब आये थे जब वह बच्चों को विद्यालय के प्रति प्रेरित करने के लिए घर घर जाकर बच्चों और अभिभावकों को गीत के माध्यम से स्कूल आने के लिए जागरूक कर रहे थे ।
शिक्षक बैजनाथ की पहल का काफी असर दिखा था जंहा उनके इस प्रयास से विद्यालय में न सिर्फ छात्रों की उपस्थिति बढ़ी बल्कि बच्चे शिक्षक के गीत के माध्यम से पढ़ाने के तरीकों का भरपूर आनंद लेने लगे ।
वंही शिक्षक बैद्यनाथ रजक इस भीषण गर्मी में बच्चे लू से कैसे बचे और क्या क्या सावधानी बरतें उसे गीत के माध्यम जागरूक कर रहे है । शिक्षक खुद गीत गाकर बच्चे को लू से बचने के उपाय बता रहे हैं और बच्चे भी खूब आनंद ले कर समझ रहे हैं। शिक्षक बैजनाथ का कहना है कि इन दिनों काफी गर्मी पड़ रही है ।
गर्मी के कारण छुट्टी के वक्त बच्चे असहज महसूस कर रहे थे । जिसको लेकर उन्होंने बच्चों को जागरूक करने के लिए गीत माध्यम अपनाया । ताकि बच्चे मनोरंजन के साथ साथ जागरूक हो सके ।
पूर्णिया । आज बिहार के पूर्णिया में एथेनॉल के पहले प्लांट की शुरुआत हुई हो गयी। केंद्र और राज्य की एथेनॉल पॉलिसी 2021 के तहत देश का यह पहला ग्रीनफील्ड ग्रेन बेस्ड इथेनॉल प्लांट है।
पूर्णिया के कृत्यानंद नगर के परोरा में ईस्टर्न इंडिया बायोफ्यूल्स प्रा. लि. (EIBPL) द्वारा 105 करोड़ की लागत से स्थापित ग्रीनफील्ड ग्रेन बेस्ड एथेनॉल प्लांट के शुरु होने से मकई के किसानों को खासा लाभ मिलेगा इस मौके पर सीएम ने कहा कि बिहार इस क्षेत्र में आगे बढ़ेगा ।
नफरत कैसे हमारी आपकी जिंदगी को तबाह कर रहा है उसकी एक बानगी आपको सूनाते हैं कोई छह वर्ष पहले शाम के समय एक कॉल आया उस समय मैं बस में था आवाज सही से नहीं आ रहा था मैंने यह कहते हुए फोन रख दिया कि आवाज नहीं आ रही है नेटवर्क में आते ही फोन करते हैं।
घर पहुंचने के बाद उस नम्बर पर काॅल किये बात हुई तो पता चला फोन करने वाली उस इलाके से आती थी जहां आज भी नक्सलियों की समानांतर सरकार चलती है और आये दिन नक्सली हमला भी होता रहता था किसी और को लगा रही थी गलती से मेरे नम्बर पर काॅल कर दी। बात आयी चली गयी लेकिन कुछ ही दिनों बाद उस इलाके में एक बड़ी नक्सली घटना घटी घटना के चंद मिनट बाद है उसका फोन आया उस समय रात के कोई एक बज रहे होगा संतोष सर अभी अभी बड़ी घटना घटी है नक्सली तीन लोगों को मार दिया है और कई लोगों का साथ लेकर चला गया।वैसे मेरे इलाके में ये समान्य घटना है लेकिन आपके लिए खबर है इस घटना के बाद उससे हमारी बातचीत होने लगी और यू कहे तो नक्सली से जुड़ी खबर के लिए मेरा वो सबसे बड़ा सूत्र बन गयी। एक दिन उसका फोन आया सर पटना आये हैं मुलाकात होगी क्यों नहीं आओं ऑफिस में है काफी देर बातचीत हुई और पटना आने का प्रयोजन पूछा तो पता चला ये पटना में ही रहते थे दो वर्ष पहले बेबी हुई थी इसलिए अपने मायके में रह रही थी, पति अमेरिका में आईटी फील्ड से जुड़ा है बेटी दो वर्ष की हो गयी है अब फिर से पटना रहने आ रहे हैं बेटी बड़ी हो रही है ।
कुछ दिनों के बाद वो अपनी बेबी के साथ पटना सिफ्ट कर गयी पटना में ही पढ़ाई लिखाई हुई थी इसलिए पटना से उसका पुराना रिश्ता था एक दिन उसका फोन आया सर बच्चा का कोई बढ़िया डॉक्टर जो हो उससे जरा दिखवा देते बेबी का तबियत बहुत खराब है बोरिंग रोड में बच्चों का अच्छा डॉक्टर है उसके यहां नम्बर लगवा दिये और फिर जिस समय डॉक्टर समय दिये थे मैं भी पहुंच गया बेबी को देख कर मैं हैरान रह गया क्या हो गया खैर डॉक्टर पूछना शुरु किये क्या हुआ क्या क्या दवा दिए हैं पता चला इनके पति देव वही से पतंजलि का दवा बता रहे थे और वही दवा खिला रही थी स्थिति यह हो गया कि बेबी निमोनिया से इतनी संक्रमित हो गयी थी कि डाँक्टर परेशान हो गया इसी दौरान उसका घर जाना हुआ घर में प्रवेश करने के बाद मुझे पता नहीं क्यों बड़ा अटपटा लगा। अजीब अजीब सी आकृति उसके घर के अलग अलग हिस्से में बना हुआ था पहली बार मुझे एहसास हुआ कि इसका व्यवहार सामान्य नहीं है दो घंटे उसके घर पर रहे होंगे इस दौरान कई बात उसके पति का फोन आया और वो बार बार बेबी को डॉक्टर से दिखाने वाली बात छुपाती रही मैं हैरान था बेबी का हाल इतना बूरा है और ये डॉक्टर के पास ले जाने कि बात क्यों छुपा रही । बाद के दिनों मेंं उससे खुलकर बातचीत होने लगी एक दिन वो बताया कि मेरा पति का गजब का सोच है बेबी को डाँ से मत दिखाओं पटना में ये वैद्य है उससे दिखाओं पतंजलि के दवा का इस्तेमाल करो ।
Editorial
महिलाओं को लेकर अजीब तरह का सोच है इस तरह का कपड़ा मत पहनो वो मत करो शाम होते होते कमरे पर आ जाओ हर समय विडियो काॅल करता है जैसे मुझ पर उसे भरोसा ही नहीं है।मैं खुद नौकरी करता था इतना तंग किया कि नौकरी छोड़ना पड़ा ये सब बताती रहती थी फिर बेबी के स्कूल में नाम लिखाने की बात हुई तो पति का आदेश हुआ कि बेबी का नाम ऐसे स्कूल में लिखाना जहां सिर्फ लड़किया पढ़ती हो पटना के सबसे बेस्ट स्कूल में नाम लिखाई एक दिन पता चला कि बेबी के नाम लिखाने को लेकर बड़ा बवाल हुआ है क्यों कि जिस स्कूल में नाम लिखाई है वहां क्रिस्चन शिक्षिका है और उसका प्रबंधक भी क्रिस्चन है इसलिए आज के आज उसे वहां से हटाओं मेरी बेबी का संस्कार खराब हो जाएगा इतना हंगामा किया कि अंत में उसको बेबी को स्कूल जाना बंद करना पड़ा और फिर उसे कहा कि देखो पटना में कही सरस्वती शिशु मंदिर है वहां बेबी का नाम लिखाओं वो ढूढती रही एक स्कूल मिला भी तो वो उसको पसंद नहीं आया फिर एक स्कूल में नाम लिखायी हालांकि उसका नाम भी क्रिस्चन जैसा ही था फिर वो वीडिओ कांल से पहले स्कूल को देखा स्कूल में क्या क्या है पत्नी उसको दिखायी की देखिए सरस्वती वंदना लिखा है ये देखिए माँ सरस्वती का फोटो लगा हुआ है ये देखिए शिक्षिका के मांग में सिंदूर लगा है गले में मंगल सूत्र है नाम भेल ही क्रिस्चन वाला है लेकिन यहां एक भी शिक्षिका क्रिस्चन नहीं है तब ठीक है यहां नाम लिखा लो ।
एक सप्ताह पहले उसका फोन आया संंतोष सर एक गांड़ी लेना है लेकिन जो गाड़ी मुझे पसंद है वो कह रहा है कि एक माह बाद देंगे एजेंसी वाले को फोन करवाये तो बड़ी मुश्किल है तैयार हुआ तीन अगस्त को अक्षय तृतीया उस दिन गाड़ी लेगे सारा पैसा भुगतान भी कर दिया अभी थोड़ी देर पहले उसका फोन आया संतोष सर गाड़ी आज नहीं दे देगा मैंने पुंछा क्यों रात में उसका फोन आया था कह रहा था तीन मई को ईद भी है इसलिए उस दिन गाड़ी मत निकालो। हद है तीन मई को तो अक्षय तृतीया है उस दिन शुभ माना जाता है ईद है तो क्या हुआ अपना शुभ दिन लोग छोड़ दे संतोष सर आप तो समझते ही किस दिमाग का है आज ही गाड़ी दे दे बोल दीजिए ना गाड़ी आ गया है आज कल खामखां विवाद से मैं बचना चाहता हूं उसको तो कुछ नहीं होगा मेरा तबियत खराब हो जाएगा प्लीज सर आप बोल दीजिएगा तो गांड़ी दे देगा ।
सॉरी सर एक और बात गाड़ी का नम्बर अपने पसंद का मिल सकता है कह रहा था ऐसा नंबर लो जो जोड़ने पर 18 आये शुभ होता है। मैं चुपचाप उसकी बातों को सुनता रहा और मुस्कुराता रहा घृणा और नफरत कभी भी एकतरफा नहीं होता है उसका असर अपने परिवार और आस पास के लोगों को भी होता है पता है वो अपने बेबी को क्या पढ़ता है नानी नाना मौसी पराई होती है वो हमेशा गलत बात समझती है उससे दूरी रखो। दादा दादी जो कहे वो करो मम्मा पूरे दिन किस किस से फोन पर बात करती है कहां कहां जाती है उस पर नजर रखा करो और चुपके से मुझको बताया करो आ रहे हैं अक्टूबर में इस बार साथ लेकर आयेंगे पासपोर्ट अप्लाई कर दिये हैं।
रात 1 बजे तेज आंधी और बारिश में ये स्ट्रक्चर गिरा है। सुल्तानगंज की तरफ से पोल नंबर 4,5,6 के बीच ढलाई का काम चल रहा था। इसके लिए ये स्ट्रक्चर बनाया गया था।
इस सुपर स्ट्रक्चर को केबल पर खड़ा किया गया था। बावजूद इसके ये गिर गया। ये स्ट्रक्चर करीब 100 फीट से ज्यादा का था। गनीमत रही कि कोई इसकी चपेट में नहीं आया।
इस पुल का निर्माण 1710.77 करोड़ रुपए से किया जा रहा है। जो एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन लिमिटेड कंपनी कर रही है।
पटना 29 अप्रैल 2022 बिहार संग्रहालय से पटना संग्रहालय को जोड़ने वाले सब-वे निर्माण को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई है। उपमुख्यमंत्री -सह- मंत्री, नगर विकास एवं आवास विभाग श्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि बिहार संग्रहालय से पटना संग्रहालय को जोड़ने वाले सब-वे का निर्माण 373 करोड़ के अनुमानित व्यय पर होगा। पर्यटकों के लिए अनोखा होगा सब-वे ।
यह सब-वे पर्यटकों के लिए अनोखा और दर्शनीय होगा। उन्होंने कहा कि बिहार संग्रहालय से पटना संग्रहालय को जोड़ने वाले सब-वे के निर्माण के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन कार्यकारी एजेंसी होगा। आज मंत्रिपरिषद की बैठक में इसकी प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
उन्होंने बताया कि बिहार संग्रहालय और पटना संग्रहालय ऐतिहासिक महत्व के दो महत्वपूर्ण स्थल हैं। इनके बीच सड़क मार्ग से आवागमन में व्यस्त यातायात के कारण पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। बिहार सरकार के इस निर्णय से होने वाले निर्माण के बाद राज्य में इन महत्वपूर्ण स्थलों के दर्शन हेतु आने वाले पर्यटकों को सुविधा होगी तथा उनकी संख्या में भी वृद्धि होगी।
राज्य सरकार मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में बिहार के महत्वपूर्ण स्थलों के विकास एवं पर्यटकों की सुविधा के दृष्टिकोण से प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। आने वाले दिनों में इसका लाभ देशी और विदेशी पर्यटकों को मिलेगा।