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सुप्रीम कोर्ट ने दीपक प्रकाश से पूछा: विधायक नहीं, MLC नहीं, फिर मंत्री कैसे?

दीपक प्रकाश पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल: विधायक तो नहीं, MLC भी नहीं, तो फिर मंत्री कैसे बने?बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में दीपक प्रकाश की सदस्यता मान्यता प्राप्त नहीं थी।

इस पृष्ठभूमि में, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा, कि कैसे दीपक प्रकाश ने मंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, कि दीपक प्रकाश ने जिस शैक्षिक योग्यता और अनुभव के आधार पर पदभार संभाला है, यह शैक्षिक योग्यता और अनुभव वास्तव में सही है या नहीं?

सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा, निष्पक्ष और तर्कसंगत होकर कहा कि दीपक प्रकाश को विधायक का पद तो दी गई थी, लेकिन वह विधायक के रूप में सेवा करने के कारण के बारे में जानकारी हासिल करना चाहता था। न्यायपालिका (SC) ने आगे सवाल किया, कि क्या यह सच नहीं है कि दीपक प्रकाश 20 अक्टूबर को अपने निवास के संबंध में फॉर्म ‘ए’ प्रस्तुत करने के लिए ज़िम्मेदार थे। लेकिन क्या दीपक प्रकाश ने यह प्रस्तुत किया था, या नहीं इस तथ्य के बारे में जानकारी हासिल करना चाहता था।

सुप्रीम कोर्ट ने इसके अलावा, स्पष्ट रूप से कहा, कि दीपक प्रकाश के मामले में कोई विशिष्ट कानूनी कारण भी नहीं दिया गया था, जिसके कारण उन पर आरोप लगाया गया था। न्यायपालिका (SC) ने स्पष्ट रूप से कहा, कि दीपक प्रकाश के मामले में विशिष्ट कारण के बारे में कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई थी।

क्योंकि दीपक प्रकाश ने न तो विधायक का और न ही MLC का पदभार संभाला था, तो फिर मंत्री कैसे बने? सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा, कि क्या यह सच नहीं है कि दीपक प्रकाश पर कोई कानूनी कारवाई नहीं की गई थी।

बिहार सरकार के साथ-साथ, न्यायपालिका (SC) ने दीपक प्रकाश के साथ भी व्यापक बातचीत की। न्यायपालिका ने स्पष्ट रूप से कहा, कि दीपक प्रकाश के मामले में कोई कानूनी कारण नहीं दिया गया था। न्यायपालिका ने स्पष्ट रूप से कहा, कि दीपक प्रकाश पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने फिर आगे कहा, कि दीपक प्रकाश जैसे मामलों में हमेशा एक कारण के रूप में विशिष्टता होती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा, कि दीपक प्रकाश के मामले में कोई विशिष्ट कारण नहीं दिया गया था।

इस प्रदर्शन के बाद बिहार सरकार से बातचीत करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने फिर स्पष्ट रूप से कहा, कि दीपक प्रकाश जैसे मामलों में हमेशा एक कारण के रूप में विशिष्टता होती है, और कोई भी मामला विशिष्ट कारण के बिना ही नहीं चलता है। न्यायपालिका ने स्पष्ट रूप से कहा, कि दीपक प्रकाश के मामले में विशिष्ट कारण के बारे में कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, कि दीपक प्रकाश का मामला विशिष्ट कारण के बिना नहीं चलता है, और कोई बातचीत भी नहीं हुई।

यह केस रूपक में हमेशा के लिए सार्वजनिक सेवा में नैतिकता और जवाबदेही का प्रतीक है।

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