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बिहार में महागठबंधन टूटा राजद और कांग्रेस हुए जुदा जुदा

राहुल गांधी अभिमन्यु की तरह भारतीय राजनीति के चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं अभी पंजाब,राजस्थान और छत्तीसगढ़ से बाहर निकल भी नही पाये थे कि बिहार में राजद वर्षो पूरानी गठबंधन को नजरअंदाज करते हुए कांग्रेस के परम्परागत सीट कुशेश्वरअस्थान से अपना प्रत्याशी उतार दिया है ।

कहां ये जा रहा है कि राजद कन्हैया को लेकर सहज नहीं है इसलिए उप चुनाव में राजद कांग्रेस के परम्परागत सीट पर उम्मीदवार उतार दिया है हलाकि कल से लगातार दोनों दलों के नेताओं के बीच बातचीत चल रही है लेकिन राजद कांग्रेस से आश्वासन चाहती है कि कन्हैया बिहार की राजनीति में दखल ना दे ।

1–सुविधाभोगी कांग्रेसी सकते में

वैसे बिहार के जो सुविधाभोगी राजनीति करने वाले कांग्रेसी हैं कन्हैया के आने से पहले से ही असहज थे ऐसे में राजद के इस रुख से उनकी बाँछें खिल गयी है, और अब वो मजा ले रहे हैं क्यों कि ऐसा पहली बार हुआ है जब बिहार कांग्रेस के प्रभारी गठबंधन को लेकर लालू प्रसाद से बात करने के बजाय राजद के श्याम रजक जैसे नेता से सीट को लेकर बात कर रहे थे जबकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है बिहार प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता बिहार उप चुनाव को लेकर संगठन के शीर्ष पर बैठे नेता और बिहार प्रभारी की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं ।

2—राहुल आर पार के मूड में है

ऐसे में राहुल के सामने बिहार को लेकर सिर मुड़ाते ही ओले पड़े वाली स्थिति उत्पन्न हो गयी है लेकिन आज सुबह राहुल ने स्पष्ट कर दिया है कि राजद कुशेश्वरअस्थान से उम्मीदवार वापस नहीं लेती है तो दोनों जगह से कांग्रेस चुनाव लड़ेंगी ।राहुल के संकेत के बाद बिहार कांग्रेस के नेता तेजस्वी पर सीधे सीधे हमला शुरु कर दिया है ।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक शकील अहमद शाह ने कहा कि बिहार उपचुनाव में महागठबंधन टूट चुका है तेजस्वी मनमानी पर उतर आये हैं उन्होंने कहा कि बिना पूछें घोषणा कर देने का मतलब है राजद भाजपा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई से भाग रही है और कहीं ना कहीं उसे समर्थन दे रही है।

शकील अहमद खां यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि हम दोनों जगह से चुनाव लड़ेंगे और इसकी घोषणा बहुत जल्द करेंगे उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन बना था तब उस समय स्थिति ज्यादा अच्छी थी और हमारा वोटिंग का स्ट्राइक रेट भी बहुत अच्छा था राजद अपने गिरेबान में झाके क्यों जीतते जीतते हार गये ।

वही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा है कि तारापुर और कुशेश्वरस्थान के लिए कांग्रेस अपना उम्मीदवार की घोषणा कल करेंगी राजद ने गठबंधन धर्म नहीं निभाया और हमसे बिना पूछे राजद ने दोनों सीटों पर कैंडिडेट की घोषणा कर दी है ।

राजद के विधान पार्षद रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि कांग्रेस के जीत का स्ट्राइक रेट कमजोर है इसलिए राजद चुनाव लड़ने का फैसला लिया है ताकि साम्प्रदायिक शक्तियां को रोक सके अब कांग्रेस पर निर्भर करता है कि वो किसके साथ खड़ी रहती हैं।

देखिए आगे आगे होता है क्या लेकिन यह तय हो गया है कि आने वाले समय में अब राजद और कांग्रेस इस उप चुनाव में अलग अलग राह पकड़ लिये तो फिर बिहार की राजनीति की दिशा बदल जायेंगी । हो ना हो विधानसभा उप चुनाव में राजद कही दोनों सीट हार गया तो फिर तेजस्वी चक्रव्यूह में फंस जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी इसलिए लालू प्रसाद किसी भी स्थिति में चुनाव प्रचार अभियान में शामिल होना चाह रहे हैं क्यों कि उन्हें भी पता है कि कांग्रेस से रिश्ता टूटा तो फिर तेजस्वी तभी मजबूत रहेगा जब उप चुनाव का दोनों सीट राजद जीत जाये ।

कन्हैया को बीजेपी पोलिटिकल पंचिंग बैग के रूप में तैयार किया है।

कन्हैया कुमार कम्युनिस्टों की प्याली में तूफान पैदा करने वाले पहले युवा नेता नहीं हैं। मुझे इस संदर्भ में देवी प्रसाद त्रिपाठी (डीपीटी) की याद आती है, जो 1975 से 1976 तक एसएफआई की ओर से जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। जेएनयू जब मैं आया, डीपीटी हम छात्रों के बीच आइकॉन थे। 1983 में ख़बर मिली कि डीपीटी तत्कालीन कांग्रेस महासचिव राजीव गांधी के सलाहकार हो गये। डीपीटी की क्रांतिकारी-वैचारिक छवि ऐसी भरभरा कर गिरी कि छात्रों का किसी भी आइकॉन पर से भरोसा उठ गया। मगर, डीपीटी की महत्वाकांक्षा 1999 में एनसीपी में आने के बाद पूरी हुई। 3 अप्रैल 2012 से 2 अप्रैल 2018 तक डीपीटी राज्यसभा सदस्य रहे।

लोक सभा के पूर्व सदस्य रामराज (अब डॉ. उदितराज) जेएनयू में एसएफआई राजनीति से निकले थे. इनकम टैक्स के एडिशनल कमिश्नर थे, 24 नवम्बर 2003 को पद से इस्तीफा देकर इंडियन जस्टिस पार्टी खड़ी की, फ़रवरी 2014 में बीजेपी ज्वाइन किया, और चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. 2019 में बीजेपी से टिकट मिलने की मनाही के बाद उदित राज ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. प्रश्न है, कांग्रेस में जाकर उदित राज अखिल भारतीय दलित चेहरा क्यों नहीं बन पा रहे? बिहार-बंगाल के चुनावों में पिछड़ों, अनुसूचितों के बीच उन्हें प्रोजेक्ट नहीं किया जा सका, पंजाब, यूपी के दलित पॉकेट में उदित राज का यदि इस्तेमाल नहीं हो रहा, तो कहीं न कहीं पार्टी के भीतर बाधा दौड़ है ।

शकील अहमद ख़ान एसएफआई के छात्र नेता थे जो 1992-93 में जेएनयूएसयू के अध्यक्ष बने, उनका भी राजनीतिक कायान्तरण हुआ और कांग्रेस के एमएलए बन गये। एक और एसएफआई नेता, जेएनयूएसयू के दो बार प्रेसिडेंट रहे बत्ती लाल बैरवा ने कांग्रेस ज्वाइन कर लिया। सैयद नासिर अहमद एसएफआई से 1999 में जेएनयूएसयू के अध्यक्ष थे। नासिर अहमद फिलहाल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा सदस्य है। संदीप सिंह अल्ट्रा लेफ्ट सोच वाली आइसा को प्रतिनिधित्व देते हुए 2007-2008 में जेएनयूएसयू के प्रेसिडेंट चुने गये। क्रांतिकारी भाषण देते थे, अब सुना कि प्रियंका गांधी के भाषण लेखक संदीप सिंह ही हैं। आइसा के ही मोहित के पांडे ने ‘कांग्रेस शरणम गच्छामि’ का रास्ता चुना और प्रियंका के क़रीबी नेताओं में से एक हो गये।

मैं केवल जेएनयू का उदाहरण दे रहा हूँ, जहाँ से इतने सारे लेफ्ट छात्र नेता कांग्रेस में गये, क्या इससे कांग्रेस में ढांचागत परिवर्तन हो गया, या कांग्रेस मज़बूत हो गई? केवल महत्वाकांक्षा की मृगमरीचिका इन्हें मूल विचारधारा से बाहर की ओर खींच ले आती है। यदि डी. राजा, विनय विश्वम, अतुल अंजान या फिर अमरजीत कौर को ये भ्रम है कि कन्हैया कुमार को इन लोगों ने तैयार किया, तो उसका कुछ नहीं किया जा सकता। दरअसल, कन्हैया कुमार को बीजेपी ने एक ऐसे ‘पोलिटिकल पंचिंग बैग’ के रूप में तैयार किया, जिसे तथाकथित राष्ट्रवादी जब चाहें टुकड़े-टुकड़े गैंग बोलकर घूंसे लगा सकते हैं। इससे कन्हैया कुमार का क़द बढ़ता है। जिस दिन ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ बोलना बंद हो जाएगा, कन्हैया की ब्रांडिंग धुमिल पड़ जाएगी। डीपी त्रिपाठी की तरह कन्हैया कुमार का लक्ष्य भी राज्यसभा है, या शायद उससे भी कहीं ज़्यादा. महत्वपूर्ण यह नहीं कि कन्हैया कांग्रेस में आ गये, महत्वपूर्ण यह है कि वहां कितने दिन टिक कर रहते हैं !

( पुष्पमित्र)
ईयू-एशिया न्यूज़ के नई दिल्ली संपादक.)

लालू प्रसाद को बंधक बनाने का आरोप गंभीर, सीबीआई संज्ञान ले – सुशील कुमार मोदी

लालू प्रसाद चारा घोटाला मामले में जमानत पर हैं, इसलिए उन्हें बंधक बनाये जाने के परिवार के बड़े बेटे के आरोप को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

लालू प्रसाद को बंधक बनाने का आरोप गंभीर, सीबीआई संज्ञान ले – सुशील कुमार मोदी

लालू को बंधक बनाये जाने वाले बयान को लेकर बिहार की राजनीति गरमाई

लालू के लाल तेज प्रताप द्वारा लालू के बंधक वाला दिए गए बयान के बाद बिहार के राजनितिक गलियारों में भूचाल आ गया है । इस बयान के बाद एनडीए को एक नया मुद्दा मिल गया है । तेज प्रताप के बयान देने के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष् डॉ संजय जायसवाल ने एक बड़ा बयान दिया है ।

संजय जायसवाल ने कहा कि राजद अब औरंगजेब कि पार्टी बन गई है । क्योकि तेजस्वी यादव अपने पुरे परिवार को समाप्त कर राजद का मालिक बनना चाहते हैं । और आने वाले वक्त में दूसरा कोई नहीं बल्कि तेजस्वी के शादी के बाद उनका जो पुत्र जन्म लेगा वही राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष् बनेगा ।

क्या कहा संजय जयसवाल ने जरा सुनीय …..

लालू के लाल तेज प्रताप द्वारा लालू के बंधक बनाये जाने के बयान को लेकर बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है।तेज प्रताप कल छात्र संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि कुछ लोग राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहते हैं और इसके लिए मेरे पिता लालू जी को बंधक बनाये हुए हैं ।

जरा आप भी लालू प्रसाद को लेकर क्या कहा रहा है तेज प्रताप…

हलाकि तेज प्रताप का बयान सीधे तौर पर तेजस्वी पर हमला माना जा रहा है दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी ने कहा कि लालू को बंधक बनाये जाने पर कहा कि
लालू प्रसाद यादव को बंधक बनाने की बात उनके व्यक्तित्व से नहीं मिलता है। लालू प्रसाद यादव ने कई ऐसे कार्य किए हैं जिससे देश और बिहार के लोगों ने पहचानते हैं, लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे, रेल मंत्री रहे दो प्रधानमंत्री बनाया आडवानी को जेल भेजा है ऐसे विराट व्यक्तित्व को कौन बंधक बना कर रख सकता है

आप भी सुनिए लालू प्रसाद को बंधक बनाये जाने पर क्या कहां तेजस्वी…

कन्हैया को लेकर राजद असहज कहां कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दे कन्हैया को

कन्हैया को लेकर असहज राजद की और से शिवानंद तिवारी ने आखिरकार मौर्चा खोल ही दिया ,कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने पर शिवानंद तिवारी ने कहा है कि कन्हैया कुमार भाषण देने की कला में माहिर है उनके जैसा भाषण कोई नहीं दे सकता।

कांग्रेस जॉइन करते समय कन्हैया कुमार ने कहा था कि कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है, जिसे बचाना है। अगर बड़ा जहाज नहीं बचेगा तो छोटी-छोटी कश्तियों का क्या होगा? इस बयान को उन्होंने ऐतिहासिक करार दिया है।

शिवानंद तिवारी ने कहा कि एक समय वामपंथी कन्हैया कुमार में अपना भविष्य देख रहे थे। अब कांग्रेस उनमें अपना भविष्य देख रही है। कन्हैया कुमार को ही कांग्रेस अपना अध्यक्ष बना दे। पिछले दो साल से ऐसे भी वहां कोई स्थायी अध्यक्ष नहीं है।

शिवानंद तिवारी यही नहीं रुके कांग्रेस पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ मेरी पूरी सहानुभूति है। उन्होंने पंजाब का जिक्र करते हुए सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह की लड़ाई की बात कही शिवानंद तिवारी के इस बयान के बाद कांग्रेस भी शिवानंद तिवारी के सहारे राजद पर सीधे सीधे हमला शुरु कर दिया

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा राष्ट्रीय जनता दल का भविष्य ही इस बात पर निर्भर करता है कि कांग्रेस सहित तमाम सेकुलर पार्टियां कितना अधिक से अधिक कमजोर रहती हैं और खास तौर से कांग्रेस जैसी धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्ध पार्टी की मजबूती से राष्ट्रीय जनता दल ज्यादा भयभीत रहती है।

कन्हैया कुमार एक राजनीतिक रूप से समझदार नौजवान हैं और उसके कांग्रेस में आने से बिहार कांग्रेस और मजबूत हुआ है,कांग्रेस नेता आनंद माधव ने शिवानंद तिवारी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि शिवानंद जी सठिया गए हैं। कन्हैया के बारे में निर्णय कांग्रेस को लेना है, वे अपना खून क्यों जला रहे हैं।

हलाकि इस तरह का बयावबाजी आने वाले समय में और तेज होगी क्यों कि कन्हैया को लेकर राजद का जो कोर ग्रुप है वो सहज नहीं है और उस ग्रुप का मानना है कि कन्हैया के मजबूत होने से राजद और तेजस्वी के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है ।

बिहार विधानसभा उपचुनाव में कुशेश्वरस्थान से कांग्रेस की ओर से अशोक राम का लड़ना तय

बिहार विधानसभा उपचुनाव में कुशेश्वरस्थान से कांग्रेस पार्टी का चुनाव लड़ना तय हो गया है हलाकि पार्टी की ओर से अशोक राम का टिकट तय माना जा रहा है फिर भी कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी प्रत्याशी के चयन के लिए कांग्रेस(Congress) ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

कमेटी से चयनित उम्मीदवार के नामों की सूची दो अक्टूबर तक मांगी गई है। कांग्रेस के बिहार प्रभारी भक्तचरण दास ने इस विधानसभा क्षेत्र की अद्यतन स्थिति की जानकारी देने और उम्मीदवारों के चयन के लिए जो कमेटी बनाई है उसमें आनंद माधव, कपिल देव प्रसाद यादव, कैसर खान, आइपी गुप्ता और अजय पासवान को शामिल किया है।पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष समीर कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के मुताबिक कमेटी को अगले दो दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट सौपनी होगी।

2020 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट से डा. अशोक कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया था। यहां से जदयू ने शशिभूषण हजारी को सिंबल दिया था।

शशिभूषण हजारी ने मुकाबले में उतरे कांग्रेस उम्मीदवार डा. अशोक कुमार को 7222 वोट से पराजित किया। शशिभूषण का इस वर्ष जुलाई महीने में निधन हो गया। जिसके बाद से कुशेश्वरस्थान की यह सीट खाली है।

कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से क्या बिहार की राजनीति बदलेगी

कांग्रेस का मिशन पंजाब जिस तरीके उलझ गया है उसको लेकर भले ही निशाने पर राहुल और प्रियंका है लेकिन कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने के बाद बिहार की राजनीति में जो खामोशी देखी जा रही है वह चौंकाने वाला है। बिहार के कांग्रेसी चुप हैं ,राजद कन्हैया को लेकर सहज नहीं है, चिराग से भी सवाल किये गये तो वो भी टाल गये ,बिहार के वामपंथी भी खुलकर बोलने से बच रहे हैं ।

लेकिन इस तरह के सवाल को नजरअंदाज करने वाले नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया आयी है और कहां कि हमारे रिश्ते भी रहे हैं कहां आते जाते हैं वो उनका फैसला।वही बीजेपी नेता सुशील मोदी जो आजकल छोटी बात पर भी प्रतिक्रिया देने से परहेज नहीं करते हैं उनका बयान सिर्फ इतना ही आया है कि कांग्रेस सत्ता के लिए देश विरोधी ताकतों के साथ।मतलब बिहार की जो वर्तमान राजनीतिक सेटअप है उसमें कन्हैया को लेकर मंथन जरूर चल रहा है ।

1—– क्या कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से बिहार की ठहरी हुई सियासत में बदलाव आ सकती है
मंडल आयोग के लागू होने के बाद बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद और नीतीश कुमार जिस सामाजिक समीकरण के आधार पर सियासत कर रहे हैं उससे यही लग रहा था कि बिहार फिलहाल मंडल ऐरा से बाहर निकल नहीं पायेंगा।

15 वर्षों तक पिछड़ा,दलित और मुस्लिम गठजोड़ से सहारे लालू प्रसाद के नेतृत्व में बिहार की राजनीति चलती रही, फिर नीतीश आये उन्होंने पिछड़ा को अतिपिछड़ा ,दलित को महादलित और मुस्लिम को पसमांदा मुस्लिम में बांट दिया और सवर्ण को साथ लेकर 15 वर्षो से बिहार पर राज कर रहे हैं । हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान जिस तरीके से जनता का मोहभंग नीतीश से हुआ उससे लगा कि बिहार की सियासत एक बार फिर से लालू प्रसाद के परिवार के हाथों में चली जायेगी लेकिन अंतिम चरण के चुनाव में बदलाव के लिए जो वोटर घर से निकले वो मतदान केन्द्र पर पहुंचते पहुंचते रुक गया वजह नीतीश के शासन व्यवस्था से जो वोटर ऊब गया था वो लालू के 15 वर्षो के कार्यकाल को याद करके ठहर गया।

कन्हैया के कांग्रेस में आने से बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि कन्हैया के आने से बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव आ सकता है।हलाकि यह सोचना जल्दबाजी होगा क्यों कि जिस कांग्रेस पार्टी में कन्हैया शामिल हुआ है उसकी बिहार में हैसियत क्या है 1990 के बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी नहीं हुई है धर्मनिरपेक्षता के नाम पर जिस तरीके से राजद के कुशासन के साथ कांग्रेस खड़ी रही उसका नुकसान यह हुआ कि कांग्रेस का परंपरागत वोटर सवर्ण ,दलित और मुसलमान एक एक कर साथ छोड़ते चले गये और आज कांग्रेस के पास कोई जमा पूंजी नहीं बचा है जिसके सहारे कन्हैया बहुत कुछ कर सकता है ।

हालांकि कन्हैया को लेकर इस तरह की राय रखने वाले जानकार का कहना है कि बिहार की सियासत में मुस्लिम वोटर कभी भी पूरी तौर पर राजद के साथ खड़ा नहीं रहा है ,कांग्रेस के साथ भी था ,कुछ हिस्सेदारी रामविलास पासवान की भी रही ,जदयू ने पसमांदा के सहारे मुस्लिम वोटर में बड़ी सेंधमारी की।लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि राजद के पास ना शहाबुद्दीन है, ना तस्लीमुद्दीन है ,ना फातमी है और अब्दुल बारी सिद्दीकी चुनाव हार चुके हैं ऐसे में राजद के पास फिलहाल कोई बड़ा मुस्लिम चेहरा नहीं है।

वहीं जदयू और लोजपा मुस्लिम को लेकर सिम्बॉलिक पॉलिटिक्स में भरोसा करता रहा है ऐसे में कन्हैया के कांग्रेस में आने से बिहार के जो मुस्लिम वोटर का जो वोटिंग ट्रेंड रहा है उसमें बड़ा बदलाव आ सकता है क्योंकि एक तो कन्हैया की छवि मोदी विरोध को लेकर मुस्लिम यूथ में ओवैसी से भी बड़ा है। दूसरा एनआरसी को लेकर कन्हैया खुलकर मुस्लिम के साथ खड़े हुए थे ,गांव गांव में रैली किया था और फिर पटना के गांधी मैदान में रैली करके अपनी ताकत का एहसास भी कराया था ।

वही दूसरी और कन्हैया के वामपंथी होने की वजह से कमजोर ,दलित और गरीबों के बीच इसका सहज प्रवेश रहा है ।साथ ही कन्हैया की भाषण शैली और युवा पीढ़ी के बीच जिस तरह का नेटवर्क सोशल मीडिया से लेकर गांव स्तर तक विकसित किया है इसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है ।अगर ऐसा हुआ तो फिर कन्हैया कांग्रेस का जो पुराना फॉर्मूला रहा है सवर्ण ,दलित और मुसलमानों को जोड़ने में कामयाब हो सकता है क्यों कि बिहार के 30 वर्षों की जो राजनीति रही है उसमें जिस तरीके सवर्ण राजनीति को लालू प्रसाद हो या फिर नीतीश कुमार हो जिस तरीके से समाप्त करने की सियासत को बढ़ाया है उससे सवर्ण मतदाता खासे नाराज हैं वही बिहार भाजपा में भी फिलहाल सवर्ण राजनीति हाशिए पर हैं।

ऐसे में जैसे ही कोई तीसरा विकल्प दिखेगा तो सवर्ण मतदाता रातो रात बदल जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्योंकि 2020 के विधानसभा चुनाव में पहले और दूसरे फेज के चुनाव में ये देखने को भी मिला जहां चिराग के प्रत्याशी मजबूत सवर्ण नेता था वहां जदयू के उम्मीदवार को वोट नहीं किया।

2–कन्हैया के सामने चुनौती भी कम बड़ी नहीं है कागज पर भले ही कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से बड़े बदलाव की बात चल रही है लेकिन जमीन पर कन्हैया के सामने कम बड़ी चुनौती नहीं है। जिस वामपंथ के सहारे कन्हैया यहां तक पहुंचा है उस विचारधारा से जुड़े ऐसे लोग जो कन्हैया के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा था उसको कन्हैया अपने साथ कैसे जोड़े रख सकता है यह पहली चुनौती है।

क्यों कि वामपंथ की वजह से ही इनका प्रवेश गरीब.दलित और कमजोर वर्ग में हो सका है । साथ ही वामपंथी इंटेलीजेंसिया जो इसके साथ खड़ा रहा है और इस वजह से मीडिया और बौद्धिक जगत में कन्हैया की पकड़ मजबूत हुई वो वर्ग कन्हैया के साथ जुड़ा रहे ये भी बड़ी चुनौती कन्हैया के सामने हैं हालांकि बिहार कांग्रेस में अब कोई ऐसा नेता नहीं रहा जिससे कन्हैया को आमने सामने की टक्कर दे सके लेकिन ऐसे नेता का अभी भी भरमार है जो इसका खेल बिगाड़ सकता है ।

दूसरे चरण का चुनाव छिटपुट हिंसा के बीच सम्पन्न

बिहार पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में अपराधियों और उपद्रवियों पर मतदाता का जोश भारी पड़ा छिटपुट हिंसा के बीच चुनाव आज 34 जिलों के 48 प्रखंडों में वोटिंग हुई जिसमें 55 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।
मुंगेर जिले के टेटियाबम्बर के टेटिया पंचायत में दो पक्षों के बीच पथराव हुआ है। इसके बाद कई राउंड फायरिंग हुई है। गोलीबारी में 7 लोग जख्मी हैं। एक की हालत गंभीर है। वहीं, इस मामले में 2 महिला समेत 8 लोगों को हिरासत में लिया गया है। इधर, पटना के पालीगंज में गोलीबारी हुई है।

पटना के पालीगंज में मतदान के अंतिम क्षण में बूथ संख्या 306 एवं 307 पर कुछ असामाजिक ने गोलीबारी की है। गोलीबारी से वहां अफरातफरी का माहौल बन गया और मतदान के लिए आए लोगों में भगदड़ मच गई । ​​​​​​​इधर, भोजपुर जिले के तिलाठ बूथ संख्या 112,114 पर दो मुखिया प्रत्याशी के समर्थक आपस में एक बार फिर भिड़ गए हैं। दोनों तरफ के समर्थकों के बीच मारपीट के बाद फायरिंग भी की गई है। मारपीट में एक का सिर भी फट गया है। बुधवार की सुबह भी दोनों प्रत्याशी के समर्थक भिड़ गए थे। पीरो प्रखंड के तिलाठ पंचायत का है मामला।

एक नजर चुनाव के दौरान क्या खास रहा

  • समस्तीपुर में बूथ पर पिस्टल के साथ युवक गिरफ्तार। चार जिंदा कारतूस भी बरामद।
  • गया के टिकारी में दो जगहों पर मुखिया प्रत्याशियों के बीच झड़प।
  • पूर्णिया जिले के बनमनखी प्रखंड में मतदान केंद्र पर पल्स पोलियो और कोविड-19 टीकाकरण भी।
  • भोजपुर की बूथ संख्या 112, 114 पर दो मुखिया प्रत्याशी समर्थकों के बीच मारपीट के बाद फायरिंग।
  • भोजपुर के लहठान पंचायत के पिटरों गांव में बूथ संख्या 170 पर मतदाता की हार्ट अटैक से मौत।
  • भोजपुर के लहठान पंचायत में बूथ संख्या 170 पर जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे महिला मतदाता।
  • बेतिया के चनपटिया प्रखंड के उतरी घोघा पंचायत की बूथ संख्या 146 पर दो प्रत्याशियों में झड़प।
  • मोतिहारी के फेनहारा की बूथ संख्या 48 पर ASI ने बोगस वोटिंग से रोका तो दबंगों ने पीटा।
  • नालंदा के प्यारेपुर पंचायत के दुर्गापुर गांव में निवर्तमान मुखिया राकेश कुमार के घर छापेमारी। हिरासत में लिए गए।
  • मुजफ्फरपुर के सरैया पंचायत में फारयिंग का मामला सामने आया है। SDPO समेत कई अफसर मौके पर पहुंचे।
  • भोजपुर के छछूडिह गांव में बूथ संख्या -158 के पीठासीन पदाधिकारी को पुलिस ने हिरासत में लिया।
  • मुजफ्फरपुर में बूथ संख्या 325 पर बवाल, सुरक्षाकर्मियों ने लोगों को खदेड़ा।
  • भोजपुर के राजकीय मध्य विद्यालय तिलाठ बूथ संख्या 112,114 पर मतदान से पहले जमकर हंगामा।

कन्हैया का सीपीआई छोड़ना वामपंथ के लिए बड़ा नुकसान है।

बेगूसराय से किसी मित्र ने यह तस्वीर भेजी है गौर से देखिए कौन है, जी है ये कन्हैया है । सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन कन्हैया को जोरदार भाषण देने के लिए पुरस्कृत कर रहे हैं। मतलब कन्हैया का सफर कहां से शुरु हुआ था और कहां पहुंच गया वामपंथ विचार से जुड़े लोगों को इस पर विचार करना चाहिए।

23 वर्षो के पत्रकारिता जीवन में बात राजनीतिक दलों के नेताओं से रिश्तों की करे तो बीजेपी और वामपंथी पार्टियों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं से मेरा बेहद करीबी रिश्ता रहा है। हलाकि मोदी के आने के बाद बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता दोनों के चाल चरित्र और चेहरा में बड़ा बदलाव आ गया है।

मेरा मानना है कि विपक्ष में रहने के दौरान जितना सरल और सहज बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता होते हैं वो सहजता सत्ता में आने के साथ ही रातो रात गुम हो जाती है।

वही वामपंथी आलोचना कभी बर्दास्त नहीं करता है वो हमेशा आक्रमक रहता है, पढ़ाई लिखाई की बात करे तो वामपंथी पढ़ाई लिखाई से लगाव रखता है लेकिन बदलवा में विश्ववास नहीं है।

जो कार्ल मार्क्स जो कह गये वही सत्य है कन्हैया का जाना उसी बदलाव का एक हिस्सा है जिसको वामपंथी स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि कार्ल मार्क्स के आगे भी दुनिया है ।

-पत्रकार संतोष सिंह के वाल से

कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा – कन्हैया कुमार

काफी जद्दोजहद के बीच आज कन्हैया कुमार नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए। उनके साथ गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी भी कांग्रेस से जुड़ गए। पार्टी की सदस्यता लेने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कन्हैया कुमार ने भाजपा और RSS पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश का भविष्य खराब करना चाहते हैं, कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा। आज देश में गांधी की एकता, आंबेडकर की समानता और भगत सिंह के साहस की जरूरत है।
कन्हैया ने कहा कि हमारे देश का नेतृत्व कांग्रेस ही कर सकती है।

कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से लोकतांत्रिक पार्टी है। यह परिवार को छोड़ने के लिए नहीं कहती है। महात्मा गांधी पत्नी के साथ आजादी की लड़ाई लड़े थे। कांग्रेस पार्टी वो पार्टी है, जो गांधी की विरासत को आगे ले जाएगी। सरोजिनी नायडू, आंबेडकर, नेहरू, अशफाक उल्लाह खान, भगत सिंह और मौलाना आजाद के रास्तों पर चलेगी।

यहां समानता और बराबरी कुछ लोगों के लिए सीमित नहीं है। ये भारतीय होने का इतिहास है और इस भारतीय होने के इतिहास को अगर कोई अपने आप में कोई समेटे हुए हैं तो वह देश की सबसे पुरानी पार्टी है।

कन्हैया ने कहा कि मैं कांग्रेस में शामिल हो रहा हूं, क्योंकि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं है, एक विचार है। यह देश की सबसे पुरानी और सबसे लोकतांत्रिक पार्टी है। मैं ‘लोकतांत्रिक’ पर जोर दे रहा हूं… सिर्फ मैं ही नहीं कई लोग सोचते हैं कि देश कांग्रेस के बिना नहीं रह सकता।

मैं कांग्रेस में इसलिए शामिल हो रहा हूं, क्योंकि मुझे ये महसूस होता है कि देश में कुछ लोग सिर्फ लोग नहीं हैं, वे एक सोच हैं। वे देश की सत्ता पर न सिर्फ काबिज हुए हैं, देश की चिंतन परंपरा, संस्कृति, मूल्य, इतिहास, वर्तमान, भविष्य खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

कांग्रेस एक बड़े जहाज की तरह है, अगर इसे बचाया जाता है, तो मेरा मानना है कि कई लोगों की आकांक्षाएं, महात्मा गांधी की एकता, भगत सिंह की हिम्मत और बीआर आंबेडकर के समानता के विचार की भी रक्षा की जाएगी। इसलिए शामिल हुआ हूं।

देश के लाखों-करोड़ों नौजवानों को ये लगने लगा है कि अगर कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा। हम कांग्रेस पार्टी में इसलिए शामिल हुए हैं, क्योंकि कांग्रेस गांधी की विरासत को लेकर आगे चलेगी।

जदयू कार्यकारणी की हुई घोषणा पूराने चेहरे पर ही जताया भरोसा

जदयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (JDU President Lalan Singh) ने पार्टी की नई टीम का गठन कर दिया है। इसमें अधिकांश चेहरे पुराने ही हैं।

राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ने केसी त्‍यागी (KC Tyagi) को फिर राष्‍ट्रीय प्रधान महासचिव (Secretary General) की जिम्‍मेदारी सौंपी है। वहीं उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) भी संसदीय दल के अध्‍यक्ष बने रहेंगे।

गोपालगंज के सांसद डा. आलोक कुमार सुमन को कोषाध्‍यक्ष बनाया गया है। टीम में लंबे अरसे बाद 18 सदस्‍यीय टीम में सांसद रामनाथ ठाकुर को महासचिव बनाया गया है।

इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद मो अली अशरफ फातमी, पूर्व विधायक रामसेवक सिंह, बिहार सरकार के मंत्री संजय झा, विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी, आफाक अहमद खान, प्रवीण सिंह, विधान पार्षद कमरे आलम, हर्षवर्धन सिंह को भी महासचिव बनाया गया है।

कुल नौ महासचिव बनाए गए हैं, जिनमें चार अल्‍पसंख्‍यक हैं। इसके अलावा पांच सचिव बनाए गए हैं। इनमें सांसद आरपी मंडल, पूर्व विधायक विद्यासागर निषाद, रविंद्र प्रसाद सिंह, राज सिंह मान और राजीव रंजन प्रसाद शामिल हैं।

बिहार की राजनीति में बने रहने के लिए कांग्रेस से बेहतर कोई और विकल्प नहीं था ।

कन्हैया कुमार का कांग्रेस में जाना 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान ही तय हो गया था क्यों कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिस तरीके से राजद,भाकपा माले और सीपीआई कन्हैया को हराने के लिए घेराबंदी कर रहा था ऐसे में कन्हैया के सामने कांग्रेस में जाने के अलावे कोई विकल्प नहीं बचा था।

1—बिहार में कन्हैया के सामने कांग्रेस से बेहतर कोई विकल्प नहीं था
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस चाहती थी कि कन्हैया बेगूसराय से महागठबंधन के उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़े और इसके लिए अहमद पटेल कई बार लालू प्रसाद से बात किये इतना ही नहीं बीजेपी के विचारधार से असहमति रखने वाले कई बड़ी हस्ती लालू प्रसाद से जेल में जाकर मिले लेकिन राज्यसभा सांसद मनोज झा का वह तर्क भारी पड़ा जिसमें उनका मनना था कि कन्हैया सांसद बन गया तो फिर तेजस्वी के लिए खतरा हो सकता है इतना ही नहीं कन्हैया महागठबंधन का उम्मीदवार ना हो इसके लिए मनोज झा के साथ भाकपा माले और बिहार सीपीआई के नेता भी शामिल थे ।

2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल और लालू प्रसाद के परिवार बीच पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान जो दूरियां रही उसकी वजह कही ना कही कन्हैया भी रहा क्यों कि कांग्रेस का मानना था कि कन्हैया के महागठबंधन से बाहर रहने से मोदी के खिलाफ गोलबंदी कमजोर होगी और इसका प्रभाव भी देखने को मिल बिहार की चुनावी राजनीति में पहली बार लोकसभा चुनाव में राजद खाता तक नहीं खोल पाया।

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी सीपीआई भले ही महागठबंधन का हिस्सा रहा लेकिन पूरे चुनाव के दौरान टिकट वितरण से लेकर प्रचार अभियान के तक कन्हैया को कैसे चुनावी प्रक्रिया से अलग रखे इसको लेकर मनोज झा के नेतृत्व में होटल मौर्या में वार रुम बना हुआ था इस खेल में भाकपा माले ,सीपीआई और कांग्रेस के भी कुछ सीनियर नेता शामिल थे ।

चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी के बाद राजद के उम्मीदवारों ने चुनावी सभा कराने के लिए सबसे ज्यादा मांग कन्हैया का ही किया था 90 से अधिक ऐसे राजद के उम्मीदवार थे जो कन्हैया का सभा अपने क्षेत्र में करााना चाह रहा था लेकिन ऐसा नहीं हो सका ।

वही दूसरी और बीजेपी की पूरी टीम कन्हैया की पीछे पड़ी हुई है ऐसे में कन्हैया को राजनीति में बने रहने के लिए कांग्रेस से बेहतर विकल्प दूसरा कोई नहीं था क्यों कि बिहार में सीपीआई की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है वही राजद और बीजेपी के साथ खड़ी उन ताकतों के सामने सीपीआई आज की तारीख में खड़े होने की स्थिति में नहीं है ऐसे में कन्हैया के सामने कांग्रेस छोड़कर कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

2—-कन्हैया के साथ आने से बिहार में कांग्रेस मजबूत होगी
आज कांग्रेस की स्थिति 2014 जैसी नहीं है साथ ही आज की तारीख में राहुल पप्पू वाली छवि से बाहर निकल चुका है वही राष्ट्रीय स्तर पर राहुल यह साबित करने में कामयाब रहा है कि वो नरेन्द्र मोदी से मजबूती के साथ लड़ सकता है फिर भी उन्हें ऐसे युवा चेहरे की जरुरत है जो अपने बल पर कुछ वोट जोड़ सके ।

इस लिहाज से कन्हैया बिहार में भी उपयोगी है खास करके बिहार के यूथ का एक हिस्सा और मुस्लिम अभी भी कन्हैया का दिवाना है वही कन्हैया के आने से बिहार कांग्रेस को एक ऐसा चेहरा मिल जायेंगा जो अपने बल पर पांच से दस हजार लोगों की सभा कर सकता है जिसको सूनने के लिए लोग घर से बाहर निकल सकते हैं ।

3–कन्हैया मीडिया ब्वॉय है
भले ही निगेटिव खबर ही क्यों ना चलाये लेकिन मीडिया को आज भी कन्हैया की जरुरत है कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने की खबर आज सभी चैनल का हेडलाइन है बिहार में सीपीआई दफ्तर में मीडिया सुबह से ही स्टोरी करने में लगी हुई है कि कैसे कन्हैया सीपीआई दफ्तर में आना बंद किया तो जिस कमरे में कन्हैया रहता था वहां से AC निकलवा लिया है।
निगेटिव स्टोरी ही क्यों ना चलाये आज से कन्हैया मीडिया में जगह लेता रहेगा ।

कन्हैया आज कांग्रेस में शामिल होंगे

JNU छात्र संघ के पूर्व आध्यक्ष और CPI का फायरब्रांड नेता कन्हैया कुमार अपने साथ गुजरात विधानसभा के सदस्य जिग्नेश मेवानीअंशुल त्रिवेदी,सुशील और पीयूष रंजन झा आज दोपहर तीन बजे कांग्रेस का हाथ थाम लेंगे।

कन्हैया कुमार दिल्ली के केंद्रीय कार्यालय में कांग्रेस की सदस्यता लेंगे। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद रहेंगी।

कन्हैया CPI के टिकट पर 2019 लोकसभा चुनाव भाजपा के गिरिराज सिंह के खिलाफ बेगूसराय सीट से लड़ा था, हालांकि वे हार गए थे।

सदस्यता से पहले भगत सिंह की प्रतिमा पर करेंगे माल्यार्पण
कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने से पहले कन्हैया कुमार दोपहर 2:30 बजे दिल्ली के ITO स्थित शहीद-ए-आजम भगत सिंह पार्क जाएंगे।

यहां वे भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे। इसके बाद वे कांग्रेस मुख्यालय पहुंचेंगे। कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से बिहार की राजनीति बदल सकती है ।

नक्सली उग्रवाद को केंद्र और राज्य को मिलकर लड़ने की जरूरत है ।

वामपंथी उग्रवाद के परिदृश्य के संबंध में आयोजित समीक्षात्मक बैठक मे मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के अभिभाषण का मुख्य बिन्दु ।

बिहार में विगत वर्षो में उग्ररवादी हिसा में गिरावट देखी गई है। नक्सली हिंसा का समाप्त हाेना प्रजातंत्र के सुदृढीकरण तथा समेकित विकास हेतु आवश्यक है। केन्द्र एवं प्रभावित राज्याें की सरकाराें काे इस लक्ष्य के संदर्भ में आगे की रणनीति तैयार करने हेतु इस प्रकार की बैठक नियमित रूप हर वर्ष हाेनी चाहिए।

नक्सली हिंसा देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है और यह विकासोन्मुखी सरकार की नीतियों के सफल क्रियान्वयन में बाधक बनता है। बीते वर्षाें में घटित नक्सली हिंसा की हर घटना ने यही प्रमाणित किया है कि इस संगठन का उद्देश्य गरीबाें का हित करना नहीं है, अपितु अलाेकतांत्रिक और हिंसात्मक तरीकाें का प्रयाेग कर गरीबों काे विकास की मुख्य धारा से वंचित रखना है। इनके कारण गरीब अपने वाजिब हक से तथा क्षेत्र में संचालित विकास याेजनाओं के लाभ, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएँ, संचार के आधुनिक माध्यमों से दूर हाे जाते हैं परंतु इस तथ्य काे भी नकारा नहीं जा सकता कि ऐसे तत्व एवं इनके प्रभाव से इन संगठनाें में शामिल हुए लोग हमारे समाज एवं देश के ही अंश हैं। नक्सली संगठनाें के नेतृत्व एवं संगठनात्मक क्षमता काे निष्प्रभावी करने के लिए इन क्षेत्राें में समावेशी एवं सामाजिक-आर्थिक विकास की योजनाएं कार्यान्वित करनी हाेगी। हमने पुलिस काे अधिक जवाबदेह और जनता के प्रति संवेदनशील बनाया है। यदि लाेगाें की आस्था हमारी व्यवस्था और कार्यप्रणाली में बढ़ेगी ताे समाज में इसके सकारात्मक परिणाम हाेंगे।

2018 में राज्य में सुरक्षा संबंधी व्यय योजना में अच्छादित जिलों की संख्या 22 से घटकर 16 हो गई तथा पुनः वर्ष 2021 में यह संख्या घटकर केवल 10 ( रोहतास कैमूर गया औरंगाबाद नवादा जमुई लखीसराय मुंगेर बांका बेतिया) रह गई है। वर्ष 2018 में अति उग्रवादी प्रभावित जिलों की संख्या 100 थी जो अब घटकर केवल 3 गया जमुई लखीसराय रह गई है ।अति उग्रवाद प्रभावित जिलों की सूची से औरंगाबाद जिले को हटा दिया गया है। औरंगाबाद झारखंड के अति नक्सल प्रभावित पलामू जिले का सीमावर्ती है और पहाड़ एवं जंगलों से आच्छादित है । औरंगाबाद जिला को अति उग्रवाद प्रभावित जिलों की सूची में पुनः शामिल करने की जरूरत है।

सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक आयाम रखने वाली नक्सली उग्रवाद की समस्या के एक छोटे भाग से पुलिस लड़ सकती है । इस बात को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने न्याय के साथ विकास की समावेशी रणनीति बनाई । विकास से वंचित और भटके हुए लोगों को सामाजिक आर्थिक मुख्यधारा में वापस लाने के लिए गंभीर विकासात्मक पहल किए गए हैं । वर्ष 2006 में पंचायती राज व्यवस्था में और वर्ष 2007 में नगर निकायों के चुनाव में वंचित लोगों को आरक्षण महिलाओं को 50% आरक्षण देकर उन्हें क्षेत्र के विकास के निर्णय लेने का हक दिया गया। सभी थानों में विधि व्यवस्था और अनुसंधान के पृथक्करण किया गया है । कानून का राज एवं भयमुक्त शासन स्थापित करना बिहार सरकार की नीति रही है। सांप्रदायिक सौहार्द्र का वातावरण राज्य के सभी जिलों में कायम है ।

महिला सशक्तिकरण के तहत हमने पुलिस में 35% आरक्षण दिया है और इसी का नतीजा है कि आज बिहार पुलिस में 23% से अधिक संख्या में महिलाओं की है । उल्लेखनीय है कि महिलाओं की कमांडो टीम को विशेष टास्क फोर्स एवं आतंकवाद निरोधक दस्ता में सम्मिलित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है । एक अभिनव पहल के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्र के थारू ,संथाल, उरांव और अन्य अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को लेकर बिहार स्वाभिमान बटालियन का गठन बाल्मीकि नगर पश्चिम चंपारण जिला में किया गया है । राज्य सरकार के इस कदम से बगहा एवं बाल्मीकि नगर के जंगल पहाड़ी क्षेत्रों में नक्सलियों का प्रभाव घटा है।

नक्सली उग्रवाद प्रभावित जिलों में लोगों को समाज के मुख्यधारा से जोड़ने के लिए चलाई जा रही विभिन्न विकासोनमुखी एवं कल्याण संबंधी योजनाओं का नियमित अनुश्रवण मुख्य सचिव बिहार सरकार के स्तर से किया जाता है । जिसके फलस्वरूप केंद्र सरकार द्वारा संचार व्यवस्था के लिए पहचान किए गए बीएसएनल के ढाई सौ मोबाइल टावर का अधिष्ठापन कार्य राज्य में सबसे पहले पूर्ण कर उन्हें ऊर्जान्वित किया जा चुका है ।विभिन्न विकास मुखी एवं कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दूरस्थ था एवं ग्रामीण इलाकों में पहुंचने से सकारात्मक माहौल बना है ।

जहां एक तरफ घटनाओं में कमी आना प्रसन्नता का विषय है। वही घटनाओं का पूर्णता समाप्त नहीं होना यह इंगित करता है कि नक्सली हिंसा की संभावना अभी भी बनी हुई है। जिसे समूल समाप्त करने की दिशा में अत्यंत सचेत रहते हुए रणनीति बनाकर अभियानों के साथ-साथ समावेशी विकास हेतु किए जा रहे प्रयासों और में और तीव्रता लाए जाने की आवश्यकता है ।

नक्सली हिंसा से निबटने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव।

1- विशेष आधारभूत संरचना योजना सीआईएस 2021-22 के बाद बंद होने की सूचना मिली है इसे आगे चलाने की आवश्यकता है ।

2- नक्सली हिंसा के विरुद्ध अभियान में यह अत्यंत आवश्यक है कि पुलिस को आधुनिकतम यंत्र एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाए । केंद्र सरकार द्वारा पुलिस अधिकरण योजना के तहत राज्यों को सहयोग किया जाता रहा है ।समय के साथ-साथ इस योजना के स्वरूप एवं आयाम को और विस्तार देने की जरूरत महसूस की जा रही है । इस योजना में केंद्र और राज्य का अनुपात 60:40 रखा गया है । बिहार जैसे सीमित संसाधन वाले राज्य के लिए यह अनुपात 90 : 10 किया जाना चाहिए ।

3- केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नक्सली उग्रवाद से निपटने की राष्ट्रीय नीति के अंतर्गत सुरक्षात्मक कार्यवाहियों के साथ-साथ विकाससोनामुखी कार्यक्रमों को भी अनुसरण किया जा रहा है ।प्रभावित जिलों की विशेष स्थिति के कारण निश्चित ही इस दिशा में संकेतिक पहल करने की आवश्यकता है । हमारा सुझाव होगा कि इन क्षेत्रों के लिए चयनित योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और उन्हें समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त निजी उपलब्ध कराई जाए तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया एवं मापदंडों में संशोधन करने का अधिकार राज्य सरकारों को दिया जाए ।

4- नकली उग्रवाद के विरूद्ध चलाए जा रहे अभियानों में आधुनिक तकनीक का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग आवश्यक हो गया है । आधुनिक हथियार ड्रोन, रोबटिक यंत्र, संचार माध्यमों पर निगरानी आदि तकनीकी सिर्फ सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाती है, संभावित जान के खतरे को भी कम करती है ,जिससे सुरक्षा बलों का मनोबल और भी बढ़ता है । इसके साथ-साथ प्रत्येक राज्य में हेलीकॉप्टर की तैनाती अवश्यम्भावी रूप से की जाए जो सुरक्षा बलों की गतिशीलता को तो बढ़ाता ही है आवश्यकता पड़ने पर बचाव में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। हम चाहेंगे कि गृह मंत्रालय इस पर पुनर्विचार कर बिहार में अलग से हेलीकॉप्टर की स्थाई तैनाती करें ।

5- वर्तमान में बिहार राज्य में 7 . 5 बटालियन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को उपलब्ध कराया गया है । जिसमें सभी बलों की प्रतिनियुक्ति बिहार झारखंड के सीमावर्ती जिलों में की गई है। इन बलों के माध्यम से लगातार अभियान चलाया जा रहा है ।वर्ष 2020 में गृह मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार सीआरपीएफ की दो बटालियन बल बिहार से छत्तीसगढ़ राज्य में भेजी गई है। जिससे बिहार राज्य में प्रतिनियुक्त बलों की संख्या घट गई है। इन बलों के जाने से क्षेत्र में सुरक्षा अंतराल बना है । जिससे अभियान की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है । अत्यंत नक्सल प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा कैंप का निर्माण प्रस्तावित है , जिसके लिए अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों की आवश्यकता है ।अतः मैं गृह मंत्रालय से अनुरोध करना चाहूंगा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की इन दोनों बटालियनओं को बिहार में वापस किया जाए।

6- नक्सली हिंसा के विरुद्ध अभियान हेतु यह भी आवश्यक है कि राज्यों के सुरक्षाबलों को गहन प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रभावी रूप से दक्ष बनाया जाए । केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बिहार के लिए अधिक कोटा निर्धारित किया जाए और निशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए ।

7- इस अवसर पर मैं केंद्र सरकार का ध्यान अभियान के लिए प्रतिनियुक्त केंद्रीय सुरक्षाबलों पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति की नीति के की तरफ भी आकृष्ट करना चाहूंगा । आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सली हिंसा वादियों के खिलाफ या लड़ाई राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त लड़ाई है परंतु इन बलों की प्रतिनियुक्ति पर होने वाले खर्च को उठाने का पूरा भार राज्य सरकार के कोष पर पड़ जाता है ।अतः अनुरोध होगा कि इस खर्च का वाहन केंद्र और राज्य को संयुक्त रूप से करना चाहिए । यह मैं यह स्पष्ट कर देना चाहूंगा कि बिहार सरकार केंद्रीय बलों से संबंधित गृह मंत्रालय को किए जाने वाले भुगतान के प्रति सदस्य जाग रही है और वर्तमान में कोई भुगतान लंबित नहीं है ।

नक्सली उग्रवाद के विरुद्ध अभियान केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त दायित्व है अतः इसका आर्थिक भार भी केंद्र और राज्यों के बीच बैठकर वहन किया जाना चाहिए ।

जातीय जनगणना को लेकर बिहार की सियासी पारा चढ़ा बीजेपी समझौते के मूड में नहीं ।

जातीय जनगणना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार द्वारा दायर हलफनामा को लेकर बिहार की सियासत में तुफान आ गया है कल नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव इस मामले को लेकर देश के 30 बड़े राजनीतिज्ञों को पत्र लिख कर समर्थन मांगा था ।
वही आज मैदान में खुद नीतीश कूद पड़े हैं नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ गृहमंत्री की बैठक में भाग लेने पहुंचे नीतीश कुमार ने आज बैठक समाप्ति के बाद बैठक को लेकर पूछे गये सवालों को नजरअंदाज करते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा कि बिहार के सभी दलों के लोगों ने जातीय जनगणना कराने की मांग की है. केंद्र सरकार फिर से ठीक ढ़ंग से इस पर विचार करें।

उन्होंने जातीय जनगणना को देशहित में बताया.मुख्यमंत्री ने केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामा को लेकर कहा कि वे आर्थिक और समाजिक गणना को लेकर है. इसमें जातीय जनगणना को नहीं जोड़िए. सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि मैं चाहता हूं कि केंद्र सरकार इस पर ठीक ढ़ंग से विचार करें और ये देशहित का मामला है।

CM ने कहा कि 2011 में जो जातीय जनगणना हुई थी, वो जातीय जनगणना थी ही नहीं। वो आर्थिक आधारित जातीय जनगणना थी, जिसमें कई गलतियां थीं, इसलिए उसे प्रसारित नहीं किया गया था। केंद्र सरकार अगर सबका विकास चाहती है तो जातीय जनगणना कराए। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर एक बार फिर मिलकर सभी बातों को साफ कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम राज्य स्तर पर अपने सभी दलों के साथ एक बार फिर से मीटिंग कर इस पर विचार करेंगे।

नीतीश कुमार के इस बयान के थोड़ी देर बाद ही बिहार बीजेपी के सीनियर नेता सुशील मोदी ने जातीय जनगणना को लेकर नीतीश कुमार के मांग को खारिज करते हुए कहा कि तकनीकी व व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना सम्भव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मगर राज्य अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।

श्री मोदी ने कहा कि 1931 की जातीय जनगणना में 4147 जातियां पाई गई थीं, केंद्र व राज्यों के पिछड़े वर्गों की सूची मिला कर मात्र 5629 जातियां है जबकि 2011 में कराई गई सामाजिक-आर्थिक गणना में एकबारगी जातियों की संख्या बढ़ कर 46 लाख के करीब हो गई। लोगों ने इसमें अपना गोत्र,जाति, उपजाति,उपनाम आदि दर्ज करा दिया। इसलिए जातियों का शुद्ध आंकड़ा प्राप्त करना सम्भव नहीं हो पाया।

यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है, लोगों को कोर्ट के फ़ैसले का इंतजार करना चाहिए या जो राज्य चाहे तो वहां अपना पक्ष रख सकते हैं।

जातीय जनगणना का मामला केवल एक कॉलम जोड़ने का नहीं है। इस बार इलेक्ट्रॉनिक टैब के जरिए गणना होनी है। गणना की प्रक्रिया अमूमन 4 साल पहले शुरू हो जाती है जिनमें पूछे जाने वाले प्रश्न,उनका 16 भाषाओं में अनुवाद, टाइम टेबल व मैन्युअल आदि का काम पूरा किया जा चुका है। अंतिम समय में इसमें किसी प्रकार का बदलाव सम्भव नहीं है।

नीतीश कुमार के बयान के बाद सुशील मोदी का जातीय जनगणना के मांग को पूरी तरह खारिज करने के साथ ही यह तय हो गया कि आने वाले समय में जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी और नीतीश के बीच तल्खी बढ़ेगी क्यों कि मांझी और सहनी पहले ही बगावत के मूड में है वही तेजस्वी जिस तरीके से जातीय जनगणना को लेकर नीतीश पर दबाव बना रहे हैं ऐसे में आने वाले समय में बिहार की सियासत किसी और दिशा की और मूड़ जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। क्यों कि नीतीश कुमार जातीय जनगणना को लेकर जितने आगे बढ़ गये वहां से वापसी उनके लिए आत्मघाती हो सकता है ।

इस बीच लालू प्रसाद की बेटी डॉ. रोहिणी आचार्या ने एक ट्टीट करके नीतीश पर सीधे हमला बोला है उन्होंने कहा है कि ‘ बीजेपी का जो यार है.. जातीय जनगणना का विरोधी नीतीश कुमार है’। उन्होंने आगे लिखा है- ‘ भ्रम के जाल में उलझा, नीतीश कुमार कुर्सी का भूखा है।’ डॉ. रोहिणी ने लिखा है कि- ‘ओबीसी समाज के हितों का दुश्मन बीजापी का यार नीतीश कुमार है।’ऐसे में बिहार की सियासी फिजा एक बार फिर गर्माने लगा है ।

जातीय जनगणना की दुहाई देने वाले सुशील मोदी भी पलट गये ।

पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि तकनीकी व व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना सम्भव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मगर राज्य अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।

श्री मोदी ने कहा कि 1931 की जातीय जनगणना में 4147 जातियां पाई गई थीं, केंद्र व राज्यों के पिछड़े वर्गों की सूची मिला कर मात्र 5629 जातियां है जबकि 2011 में कराई गई सामाजिक-आर्थिक गणना में एकबारगी जातियों की संख्या बढ़ कर 46 लाख के करीब हो गई। लोगों ने इसमें अपना गोत्र,जाति, उपजाति,उपनाम आदि दर्ज करा दिया। इसलिए जातियों का शुद्ध आंकड़ा प्राप्त करना सम्भव नहीं हो पाया।

यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है, लोगों को कोर्ट के फ़ैसले का इंतजार करना चाहिए या जो राज्य चाहे तो वहां अपना पक्ष रख सकते हैं।

जातीय जनगणना का मामला केवल एक कॉलम जोड़ने का नहीं है। इस बार इलेक्ट्रॉनिक टैब के जरिए गणना होनी है। गणना की प्रक्रिया अमूमन 4 साल पहले शुरू हो जाती है जिनमें पूछे जाने वाले प्रश्न,उनका 16 भाषाओं में अनुवाद, टाइम टेबल व मैन्युअल आदि का काम पूरा किया जा चुका है। अंतिम समय में इसमें किसी प्रकार का बदलाव सम्भव नहीं है।

राज्यों की अलग-अलग स्थितियां हैं, मसलन 5 राज्यों में OBC है ही नहीं, 4 राज्यों की कोई राजयसूची नहीं है, कुछ राज्यों में अनाथ व गरीब बच्चों को OBC की सूची में शामिल किया गया है। कर्नाटक सरकार ने तो 2015 में जातीय जनगणना कराई थी, मगर आज तक उसके आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जा सके हैं।

झंझारपुर कोर्ट के जज अविनाश का पावर हुआ सीज फैसले को लेकर उठ रहे थे सवाल

पटना हाईकोर्ट ने मधुबनी जिला के झंझारपुर सिविल कोर्ट के एडीजे (प्रथम) अविनाश कुमार का पावर सीज करने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट के महानिबंधक की ओर से जारी आदेश में उनके न्यायिक कार्य करने पर रोक लगा दी गई है। हाल के दिनों में एडीजे प्रथम अविनाश कुमार अपने जारी आदेश से काफी चर्चा में रहे हैं।

कभी डीएम-एसपी तो कभी अधिकारियों को ट्रेनिंग में भेजने की बात करते थे। हाल ही में उन्होंने कपड़ा और नाली साफ करने तथा बच्चों को आधा-आधा लीटर दूध पिलाने सहित अन्य आदेश पारित किये थे। हाईकोर्ट प्रशासन ने अब उनके न्यायिक कार्य करने के अधिकार पर अंकुश लगा दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने भभुआ (कैमूर) सिविल कोर्ट के एडीजे शिव प्रसाद शुक्ला को निलंबित कर दिया है| उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। साथ ही अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित रहने तक उन्हें बगैर अनुमति के मुख्यालय से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया गया है।

हाईकोर्ट प्रशासन ने बिहार ज्यूडिशियल सर्विस (क्लासिफिकेशन कंट्रोल एंड अपील)-2020 के नियम 6 (1) के तहत कार्रवाई की है। निलंबन से संबंधित आदेश पटना हाईकोर्ट के महानिबंधक ने जारी कर दिया है।

अफरशाही से परेशान सीएम ने गृहविभाग के अपर मुख्य सचिव को लगायी फटकार

इन दिनों अफरशाही को लेकर सीएम का तेवर तल्ख होने लगा है आज मुख्यमंत्री पुलिस निगम द्वारा आयोजित थाना भवन, पुलिस लाइन के उद्घाटन एवं शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान यह पता चला कि अभी भी राज्य में 15 से अधिक ऐसा थाना है जिसके पास अपना भवन नहीं यह सूनते हैं सीएम गुस्से से लाल हो गये और गृह विभाग के अपर मुख्‍य सचिव को यहां तक कह दिये कि इनको चीजों की सही समझ नहीं है।

उन्‍होंने अधिकारियों से कहा कि पहले से सुधार हुआ है, लेकिन यह काफी नहीं है। कोई काम पूरा क्‍यों नहीं हुआ, इसे भी देखना होगा। उन्‍होंने कहा कि आखिर क्‍या बात है कि 15 थानों के लिए राज्‍य में अब तक जमीन ही नहीं मिल पाई है। अगर सरकारी जमीन उपलब्‍ध नहीं है तो जमीन खरीदकर भी इस मसला हल हो। जिस निजी जमीन पर थाना चल रहा है, उसी को खरीदने के विकल्‍प पर विचार करें।

अगर जमीन नहीं मिल रही है तो थाने की जगह बदलने की भी कोशिश हो सकती है।सीएम ने कार्यक्रम में मुख्‍य सचिव से लेकर विकास आयुक्‍त सभी का नाम लेकर कहा कि योजनाओं की मानिटरिंग सही तरीके से करें। कमियां दूर होनी चाहिए। योजनाओं में लेटलतीफी नहीं चलेगी।

अगर कोई बाधा है तो उसका निदान भी तत्‍काल होना चाहिए। उन्‍होंने शराबबंदी को लेकर भी अधिकारियों से कहा कि इसकी सही तरीके से निगरानी की जरूरत है।शराबबंदी को लेकर भी सीएम नराज दिखे और अधिकारियों ने कहां कि ये अब नहीं चलेंगा जिस तरीके से रोजाना शराब पहुंच रहा है यह दिखता है कि बड़े पैमाने पर अभी भी शराब की तस्करी चल रही है ।

छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है पंचायत चुनाव

बिहार पंचायत चुनाव 2021 के पहले चरण का चुनाव दोपहर तक छिटपुट घटना को छोड़ दे तो शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है लेकिन कोरोना को लेकर जारी गाइड लाइन का कही भी अनुपालन होता नहीं दिख रहा है दोपहर 12 बजे तक 20 से 25 प्रतिशत मतदान की खबर है सुबह से ही हर बूथ पर वोटर की लंबी कतार देखने को मिल रही है शातिपूर्ण चुनाव सम्पन्ना कराने को लेकर 2300 पुलिस पदाधिकारी और 10,000 से अधिक जिला बल गृह रक्षक बिहार पुलिस सशस्त्र वाहिनी सैप के जवान को चुनाव कार्य में लगाया गया है ।

पहले चरण में 15,328 प्रत्याशियों ने विभिन्न पदों के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। इनमें से 858 पदों पर प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन हो गया है। वहीं, 72 पदों पर किसी भी प्रत्याशी ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया। पहले चरण में ग्राम पंचायत सदस्य के 22,33 पदों को लेकर 8611 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है।

ग्राम कचहरी पंच के 2233 पदों को लेकर 3225 प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र दाखिल किया। मुखिया के 151 पद के लिए 1294 ने नामांकन पत्र दाखिल किया है। सरपंच के 151 पदों के विरुद्ध 772 नामांकन किए गए हैं। पंचायत समिति सदस्य के 195 पदों के लिए 1205 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है।

जिला परिषद के 22 पदों के लिए 221 प्रत्याशी हैं। 11 लाख 48044 वोटर इस चरण में वोटिंग करेंगे। यहां 14000 चुनाव कर्मियों को बूथों पर तैनात किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, 2119 मतदान केन्द्रों में 220 से वेब कास्टिंग की जा रही है।1609 मतदान भवनों में 2119 मतदान केन्द्र बनाए हैं। वोटिंग सुबह 7 बजें से शाम 5 बजे तक होगी।

बिहार न्यूज पोस्ट के खुलासे के बाद सामने आये उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद कहा मेरे परिवार के लोग नहीं हैं शामिल

उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने दी टेंडर विवाद को लेकर दी सफाई ।

बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद ने ‘‘हर घर नल का जल‘‘ स्कीम के अंतर्गत कटिहार जिले में कराये गए कार्यों के संबंध में प्रकाशित खबर के विषय में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरे ऊपर लगाया गया आरोप तथ्यहीन एवं बेबुनियाद है
और राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि सात निश्चय के अन्तर्गत क्रियान्वित ‘‘हर घर नल का जल‘‘ बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है एवं इन योजनाओं के क्रियान्वयन में संबंधित विभागों द्वारा सरकार की मार्गनिर्देशिका के मुताबिक क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया गया
है।

उन्होने कहा कि ‘‘हर घर नल का जल‘‘ स्कीम के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आम आवाम को प्रत्येक घरों में नल संयोजन के द्वारा पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। स्कीम की सफलता से घबराहट में विपक्ष अनर्गल प्रलाप कर रहा है।

उप मुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद ने इस मामले में वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जिन दो कंपनी दीपकिरण इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड एवं जीवनश्री इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का जिक्र किया गया है, उन प्रतिष्ठानों अथवा कंपनियों में मेरे परिवार या ससुराल के कोई सदस्य शामिल नहीं हैं।

प्रसांगिक कार्य कटिहार जिला अंतर्गत क्रियान्वित लगभग 2800 स्कीमों में से भवाड़ा पंचायत के 04 वार्डों में सिर्फ चार स्कीम का कार्य मेरे परिवार की श्रीमती पूजा कुमारी द्वारा किया गया है, जिसका कॉन्ट्रैक्ट सरकार की मार्गनिर्देशिका के अनुसार पी.डब्ल्यू.डी. कोड, निविदा प्रक्रिया एवं नियमों के मुताबिक वर्ष 2019 में ही किया गया है।

जैसा कि मैंने जानकारी ली है, उसके अनुसार उपरोक्त कॉन्ट्रैक्ट नवंबर 2019 में हुआ, जिसके अंतर्गत मात्र 01 करोड़ 87 लाख 08 हजार 766 रूपए का कॉन्ट्रैक्ट हुआ। इस कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत दिए गए कार्य भी एक वर्ष पूर्व सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। संबंधित क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति भी किया जा रहा है।

इस संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि बिहार प्रदेश के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के पूर्व प्रसांगिक चारों स्कीमों के कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके थे। ऐसी स्थिति में मैं किस प्रकार डिप्टी सीएम के पदीय प्रभाव का इस्तेमाल कर सकता हूँ ?
प्रकाशित खबर में जिस प्रकार से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर साजिश के तहत पेश किया गया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं इसका प्रतिकार करता हूँ।

बिहार न्यूज पोस्ट के खुलासे से बिहार की राजनीति में आया भूचाल सीएम ने स्थिति स्पष्ट करने को कहां

बिहार न्यूज पोस्ट के खुलासे के बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है सीएम ने नीतीश कुमार ने बीजेपी से उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद मामले में मीडिया में आयी खबर को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है वही इस मामले को लेकर नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव ने यादव सीएम नीतीश कुमार पर जबरदस्त हमला बोला है मीडिया से बात करते हुए तेजस्वी ने कहा कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए इस मामले मेंं सीएम को पत्र लिखा है जिसमें उप मुख्यमंत्री पर पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को टेंडर मैनेज करके ठेका दिलाया हैं इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करायी जाये

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साथ ही तेजस्वी ने कहा कि नीतीश की आत्मा बंगाल की खाड़ी में डूब गई है क्या भ्रष्टचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा कहां खो गया है बीजेपी के नेता पर कार्रवाई करने को लेकर क्यों चुप हैं नीतीश कुमार।
वही आज बीजेपी के मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी इस मामले पर चुप्पी साध लिया है कहां ये जा रहा है कि इस मामले के सामने आने के बाद पार्टी उप मुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद से दूरी बनाने लगा है ।वही दूसरी और भाकपा माले ने इस मामले को लेकर बड़े आन्दोलन की चेतावनी दिया है ।

पंचायत चुनाव के दौरान मतदान केन्द्रों पर बिना मास्क के पहुंचने पर 50 रुपया भरना पड़ेगा जुर्वाना

उत्तरप्रदेश पंचायत चुनाव के दौरान हुए कोरोना विस्फोट को देखते हुए बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रथम चरण के मतदान से ठीक पहले कोरोना को लेकर कई सख्त आदेश जारी किया है इसमें बिना मास्क लगाये जो वोटर वोट गिराने आयेंगे उन पर 50 रुपया जुर्वाना लगाया जायेंगा।

आयोग ने चुनाव कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वोटरों से भी कोविड प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराये।और इसके लिए आयोग ने वैसे वोटरों पर फाइन लगाने का निर्देश दिया है जो मास्क नही लगाएंगे। हालांकि आयोग की तरफ से सभी बूथों के प्रवेश द्वार पर वैसे वोटरों को मास्क उपलब्ध कराने के निर्देश हैं जो बिना मास्क के वोट डालने पहुंचेंगे। लेकिन मास्क मिलने के बावजूद जो लोग मास्क नाक और मुंह पर लगाये नही दिखें, उन पर प्रशासन फाइन लगाएगा। ये फाइन 50 रुपए का होगा।

साथ ही पंचायत चुनाव में कोरोना पॉजिटिव वोटर भी वोट डाल सकेंगे । राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए अलग से व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। आयोग ने ऐसे वोटरों के लिए टोकन व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। कोविड पॉजिटिव वोटर वोटिग के अंतिम घंटे में मतदान करेंगे।

बूथ पर ऐसे वोटरों के लिए पहले से 100 टोकन होंगे। बूथ पर आनेवाले सभी कोविड पॉजिटिव वोटरों को टोकन नंबर देकर वेटिंग लॉन्ज में बैठने की जगह दी जाएगी । मतदान के आखिरी घंटों में ये अपने टोकन के अनुसार अपना मत डालेंगे। कोविड पॉजिटिव वोटरों के वोटिंग के दौरान बूथ पर मौजूद सभी चुनावकर्मी पीपीई किट में होंगे ।

शरीर का तापमान हुआ ज्यादा तो आखिरी घंटों में डालना होगा वोट कोविड को देखते हुए की गई वोटिंग व्यवस्था में हर बूथ पर थर्मल स्कैनर की व्यवस्था की गई है । बूथ पर प्रवेश के दौरान सभी वोटरों के शरीर का तापमान लिया जाएगा । इस दौरान जिनके शरीर का तापमान ज्यादा होगा , उनका तापमान फिर से आधे घंटे बाद लिया जाएगा । दूसरी बार भी शरीर का तापमान ज्यादा होने पर ऐसे वोटरों को मतदान के आखिरी घंटों में मतदान का करने का मौका दिया जाएगा ।

इस बार पंचायत चुनाव की होगी लाइव वेब कास्टिंग

पंचायत चुनाव 2021 शांतिपूर्ण और निष्पक्ष सम्पन्न हो इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा की तरह ही मतदान और मतगणना की लाइव वेब कास्टिंग होगी। राज्य निर्वाचन आयोग के इस फैसले को राज्य कैबिनेट ने भी मोहर लगा दिया है।

11 चरणों में हो रहे पंचायत चुनाव (Bihar Panchayat Chunav 2021) में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सर्वलान्स पर आयोग काफी भरोसा कर रहे हैं एक और जहां पहली बार मतदाताओं की पहचान के लिए बायोमीट्रिक मशीनों का सहारा लिया जाएगा वही स्ट्रांग रुम में इस तरह के ताले का इस्तमाल किया जा रहा है जिसके खुलने पर जिला से लेकर राज्यनिर्वाचन आयोग तक को सूचना मिल जायेगा।

कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने बताया कि मतदान केंद्रों पर बायोमीट्रिक मशीन लगाने की जिम्मेदारी ब्राडकास्ट इंजीनियरिंग कंसलटेंट इंडिया लि. बेंगलुरू (बीईसीआइएल) को सौंपी गई है। मतदान और मतगणना की लाइव वेबकास्टिंग का कार्य नेशनल इंफोमेटिक सेंटर सर्विस इंक (एनआइसीएसआइ) को सौंपा गया है। बिहार में 11 चरणों में पंचायत चुनाव हो रहे हैं, जिसके लिए करीब 1.13 लाख मतदान केंद्र बनाए जा रहे हैं।

बिहार का एक लाल हार्वर्ड विश्वविद्यालय छात्र संघ का बना अध्यक्ष

देश और दुनिया में बिहार का नाम रोशन करने वाला दूसरा बिहारी भी जीरादेई का ही लाल है जी है एक लाल डाँ राजेन्द्र प्रसाद हुए जो देश के पहले राष्ट्रपति बने और अब दूसरा लाल शरद सागर जो हार्वर्ड विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गये हैं।

हलाकि सागर का बहुत कम वक्त जीरादेई में बीता है लेकिन आज भी उसके दिल और दिमाग पर जीरादेई का अमित छाप मौजूद है । इस चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए नौ उम्मीदवार खड़े थे। इसमें शरद को जीत हासिल हुई है।

वे मई 2022 यानी हार्वर्ड में अपने दीक्षांत समारोह तक इस पद पर बने रहेंगे। सागर को हार्वर्ड में उच्चतम स्कॉलरशिप प्राप्त है और वह प्रतिष्ठित केसी महिंद्रा स्कॉलर भी हैं। हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन में पढ़ रहे 50 देशों के 1200 से अधिक छात्रों ने उनका चयन किया।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने मंगलवार यानी 21 सितंबर को चुनाव परिणामों की आधिकारिक घोषणा की। 14 सितंबर से 19 सितंबर के बीच मतदान हुआ था। अध्यक्ष के रूप में शरद सागर छात्र संघ का नेतृत्व करेंगे। इसमें एक उपाध्यक्ष, एक प्रशासक और अन्य निर्वाचित सीनेटर शामिल होंगे।

शरद सागर ने हार्वर्ड में उच्चतम स्कॉलरशिप प्राप्त किया है और वो प्रतिष्ठित के.सी महिंद्रा स्कॉलर भी हैं.
शरद सागर 16 वर्ष की आयु में उन्होंने राष्ट्रीय संगठन डेक्सटेरिटी ग्लोबल की स्थापना की, और 24 वर्ष की आयु में फोर्ब्स ने उन्हें 30 वर्ष तक की आयु के 30 सबसे प्रभावशाली उद्यमियों की सूची में शामिल किया.

वर्ष 2016 में शरद सागर राष्ट्रीय और वैश्विक तब सुर्खियों में आए थे, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें एकमात्र भारतीय के रूप में व्हाइट हाउस में होने वाले एक विशेष सभा के लिए आमंत्रित किया था. उसी वर्ष नोबेल शांति केंद्र ने सागर को नॉर्वे में होने वाले नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया. शरद सागर अमिताभ बच्चन द्वारा होस्ट प्रसिद्ध टेलीविजन गेम शो कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) के विशेषज्ञ भी हैं।

कंपनी के नियमों की अनदेखी करके काम देने का मामला आया सामने

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और शुचिता का दावा करने वाली नीतीश सरकार इस बार अपने ही उपमुख्यमंत्री के कृत्य से बैकफुट पर है।मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे महात्वाकांक्षी योजना’हर घर नल का जल’ योजना से जुड़ी हुई है जिसमें उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद पर अपने पद के प्रभाव का इस्तमाल कर साले और दमाद की कम्पनी को काम दिलाने का आरोप है।

हलाकि इस आरोप के बावजूद पूरी बीजेपी तारकेश्वर प्रसाद के साथ खड़ी है तारकेश्वर प्रसाद भी कह रहे हैं की मैं राजनीति में हूं इसका क्या मतलब मेरे परिवार के लोग बिजनेस व्यापार करना छोड़ दे ये सारा काम मेरे उपमुख्यमंत्री बनने से पहले का है और काम के आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं है ।

उपमुख्यमंत्री के रिश्तेदार को मिला काम यह पूरा मामला उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद के गृह जिले कटिहार से जुड़ा हुआ है जहां हर घर नल का जल’ योजना के तहत जीवनश्री इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और दीपकिरण इंफ्रास्ट्रक्टर प्राइवेट लिमिटेड को 48 करोड़ और 3 करोड 60 लाख का काम दिया गया है आरोप यह है कि इस दोनों कम्पनी के निदेशक मंडल में उपमुख्यमंत्री के साले और दमाद शामिल है यो दोनों कंपनी पटना के पते पर रजिस्टर्ड है ।

वन श्री जीवनश्री इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का पता 319,ASHIANA TOWER EXHIBITION ROAD PATNA Patna BR 800001 दर्ज और दूसरी कंपनी दीपकिरण इंफ्रास्ट्रक्टर प्राइवेट लिमिटेड का पता 74,SARSWATI APARTMENT, S.P. VERMA ROAD, PATNA BR 800001 दर्ज है ।

सरकारी काम करने के लिए योग्य नहीं है यह कपंनी आशियाना टावर कमरा नम्बर 319 में दो कपंनी का दफ्तर है
पहला BRITESKY BUILDCON( P )LTD. और दूसरा JEEVANSHREE INFASTRURE,(P)LTD का है। दोनों कंपनी के निदेशक मंडल में दो व्यक्ति संतोष कुमार और ललित किशोर का नाम शामिल है । इस कंपनी को 48 करोड़ रुपया का काम दिया गया है इस कंपनी का टर्नओभर काफी है लेकिन इससे पहले किसी भी तरह के सरकारी काम करने को लेकर कोई अनुभव नहीं है पीडब्लूडी नियमावली के अनुसार ऐसी कंपनी को काम नहीं दिया जा सकता है।

आशियाना टावर स्थित कमरा नम्बर 319 में जब बिहार न्यूज पोस्ट का रिपोर्टर पहुंचा तो दफ्तर में एक दो लोग बैठे थे जो इस मसले पर बात करने से साफ इनकार कर दिया वही दूसरी कंपनी दीपकिरण इंफ्रास्ट्रक्टर प्राइवेट लिमिटेड का जो पता दर्ज है 74,SARSWATI APARTMENT, S.P. VERMA ROAD, PATNA BR 800001 वहां जब बिहार न्यूज पोस्ट का संवाददाता पहुंचा तो दफ्तर का कोई भी साइनबोर्ड लगा हुआ नहीं था , कॉल बेल बचाया तो प्रदीप कुमार भगत निकले उनसे जब संवाददाता ने पुंछा कि इस पते पर एक कम्पनी का नाम दर्ज है और यहां तो आपका आवास है जबतक उनसे सवाल किया जाता तब तक वो रुम बंद करते हुए इतना ही कहा मेरे वकील से बात करिए मुझे कुछ भी नहीं कहना है ।

उपमुख्यमंत्री के साले की कंपनी की आँडिट रिपोर्ट कंपनी के फर्जी होने का दे रहा है प्रमाण
दीपकिरण इंफ्रास्ट्रक्टर प्राइवेट लिमिटेड के वर्ष 2019 और 2020 के ऑडिट रिपोर्ट पर गौर करे तो उस रिपोर्ट में कही भी किसी भी तरह के सरकारी कामकाज करने का जिक्र ही नहीं है वर्ष 2019–2020 के बीच कंपनी आँडिट रिपोर्ट में लिखा है कि इस वर्ष 78लाख 6 हजार 800 रेवेन्यू प्राप्त हुआ है जिसमें 44 लाख 26हजार 136 रुपया 68 पैसा समान खरीद बिक्री से और सर्विस में 33 लाख 80 हजार 664 रुपया आया है लेकिन इस आँडिट रिपोर्ट में कही भी टीडीएस देने की चर्चा नहीं है जबकि किसी भी तरह के काम में कंपनी को टीडीएस भरना ही है जबकि इस कंपनी को सरकारी ठेका मिला है गौर करने वाली बात यह है कि इस कंपनी के वित्तीय वर्ष 2018–2019 का जो आँडित रिपोर्ट है वो शून्य है मतलब उस वर्ष कंपनी कोई काम नहीं कि है। इस तरह के कंपनी को किस आधार पर सरकारी ठेका दिया गया एक बड़ा सवाल है ।हलाकि इस मामले में विभाग के अधिकारियों से जब सवाल किया गया तो कहां गया कि मामले की जांच चल रही है ऐसी कोई बात संज्ञान में आती है तो कारवाई होगी।

वही इस मामले को लेकर पूर्व मंत्री और अब राष्ट्रीय जनता दल के नेता रामप्रकाश महतो का कहना है कि जब भी इससे संबंधित शिकायत की गयी तो पुलिस द्वारा ग्रामीणों को धमकाया जाता था.’हर घर नल का जल’ योजना का हाल बेहाल है, ग्रामीणों का कहना है कि जब से ‘हर घर नल का जल’ योजना का काम हुआ है तब से नल में पानी नहीं मिल रहा तो कहीं नल का पाइप टूटा हुआ है ।

पंचायत चुनाव के साथ ही बिहार में चुनावी हिंसा का दौर शुरु मुखिया प्रत्याशी के पुत्र की हुई हत्या

पंचायत चुनाव के साथ ही बिहार के ग्रामीण इलाकों से हिंसा की खबर आने लगी है ताजा मामला नक्सली प्रभावित शिवहर से आ रही है जहां शिवहर के तरियानी थाना क्षेत्र के विशंभरपुर पंचायत के निवर्तमान उप मुखिया मदन प्रसाद और मुखिया प्रत्याशी इंदु देवी के बेटे विक्की कुमार (22) की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

घटना सुल्तानपुर नदी घाट के पास ब की है। युवक की लाश धान के खेत में मिली। ग्रामीणों ने प्रथम दृष्टया हत्या का कारण चुनावी प्रतिद्वंदिता बताई है। हालांकि, पुलिस अभी कुछ भी कहने से इनकार कर रही है।

घटनास्थल पर ही एक मोबाइल मिला। इससे लोग आशंका जाहिर कर रहे हैं कि अपराधी के साथ विक्की की हाथापाई भी हुई होगी। इधर, ग्रामीणों ने इसकी सूचना स्थानीय थाना पुलिस को दी। घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा मामले की जांच में जुट गई है।

बड़ी खबर शिवहर से आई है जहां एक मुखिया प्रत्याशी के बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। मृतक की पहचान 22 वर्षीय विक्की कुमार के रूप में हुई है। विक्की की लाश धान के खेत में मिली। मृतक विक्की कुमार तरियानी थाना क्षेत्र के विशंभरपुर पंचायत की मुखिया प्रत्याशी इंदु देवी का बेटा था।

इंदु देवी के पति मदन प्रसाद पंचायत के निवर्तमान उप मुखिया हैं। बुधवार को सुल्तानपुर घाट के पास धान के खेत में विक्की का शव मिला। मामले की जांच तरियानी थाना पुलिस कर रही है।

चुनावी माहौल में हत्या चुनावी माहौल में हुई इस हत्या को लेकर इलाके में तनाव है। इसे देखते हुए डीएसपी संजय कुमार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई है।डीएसपी ने कहा है कि जल्द ही इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझा ली जाएगी। इधर प्रत्याशी इंदु देवी और उनके पति मदन प्रसाद बदहवासी की हालत में हैं। इसलिए वे कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं।

अखिलेश की तरह तेजस्वी भी अब टोपी में आयेंगे नजर लालू प्रसाद ने राजद कार्यकर्ताओं के लिए जारी किया ड्रेसकोर्ड

राजद के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के आखिरी दिन आज लालू यादव ने राजद कार्यकर्ताओं एवं नेताओं को आनलाइन संबोधित किया। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए लालू यादव ने राजद नेताओं को टिप्स दिया जिस दौरान लालू प्रसाद ने कहा कि यूपी के तर्ज पर राजद कार्यकर्ताओं को भी अब ड्रेस कोड का पालन करना होगा। राजद सुप्रीमो ने अपने संबोधन के दौरान ही ड्रेस कोर्ड तय भी कर दिया ।

अब राजद के कार्यकर्ता और नेता हरी गमछी और टोपी पहने नजर आएंगे। इन्होंने आगे कहा कि पार्टी के प्र‍ति निष्‍ठावान बनें। बिहार आने के बाद मैं हर जिले का दौरा करुंगा और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात भी करुंगा। लालू यादव ने कहा कि हमारी पार्टी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी है।

वोट हमारा कम नहीं होता है। जो हार जाता है वो पार्टी छोड़ देता है, जिसे टिकट नहीं मिलती वो अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार को हराने में जुट जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। इस तरह की बातों पर उन्‍होंने घोर आपत्ति जताई। उन्‍होंने प्रशिक्षण शिविर के आयोजन की सराहना की और कहा कि आगे भी ऐसा होगा।

आरजेडी सुप्रीमो ने इस दौरान अपने छोटे बेटे व बिहार के पूर्व उप मुख्‍यमंत्री रहे तेजस्वी यादव को लेकर भी बड़ी बात कही। उन्होंने तारीफ करते हुए कहा कि तेजस्वी के नेतृत्व को बिहार की जनता ने स्वीकारा है। दूसरे दलों के नेता भी कहते हैं कि तेजस्वी काफी अच्छा कर रहे हैं। बिहार का भविष्‍य युवा हाथों में होना चाहिए।

इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता अपने घर पर आरजेडी का झंडा लगाए। यही हमारी पहचान है। वही प्रशिक्षण शिविर में राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा कि दल की मर्यादा के लिये जो कुछ करना होगा करेंगे. बूथ, पंचायत, ज़िला कमेटी को को मजबूत करने से राजद का पताका फहरायेगा. अनुसाशन को अपनाओगे तो दुनिया से अराजकता समाप्त होगी ।

राम के सहारे बिहार की राजनीति साधने की तैयारी में लगा बीजेपी

जाति आधारित राजनीति का मक्का कहे जाने वाले बिहार में इन दिनों धर्म आधारित राजनीति को मजबूत करने को लेकर कशमकश तेज हो गई है और इसको लेकर आये दिन कुछ ना कुछ बखेड़ा खड़ा हो रहा है ।इस बार मामला रामायण की पढ़ाई को पाठ्यक्रम में शामिल करने को लेकर खड़ा हुआ है ।बीजेपी मध्यप्रदेश के तर्ज पर ही बिहार में भी रामायण की पढ़ाई को पाठ्यक्रम में शामिल करने को लेकर सरकार पर दबाव बनाने लगा है ।

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सिलेबस में रामायण को शामिल करने की बात करते हुआ कहा कि रामायण हमें सदियों से सही राह दिखाती आई है. हम इतिहास पढ़ते हैं तो रामायण भी पढ़नी चाहिए. इतिहास के साथ हर वो विषय लोगों को पढ़नी चाहिए जो लोगों को बेहतर संदेश देती है.।

वहीं बिहार सरकार के वन एवं पर्यवरण मंत्री नीरज कुमार बबलू (Bihar Minister Neeraj Kumar Bablu) ने कहा कि बिहार के स्कूलों और कॉलेजों में भगवान श्री राम (Lord Shree Ram) से जुड़ी तमाम जानकारियों को सिलेबस में शामिल किया जाए ताकि लोग अधिक से अधिक भगवान श्री राम के बारे में जान सकें।

विवाद बढ़ते देख जदयू कोटे से मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बीच का रास्ता निकालते हुए कहा कि रामायण और गीता की जानकारी रखना सबके लिए अच्छी बात है, लेकिन इस तरह का कोई भी प्रस्ताव पर अभी तक शिक्षा विभाग के विचाराधीन नहीं है ।

लेकिन हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के बयान से एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया है जीतनराम मांझी ने भगवान श्रीराम (Lord Shree Rama) के अस्तित्व को ही काल्पनिक करार देते हुए कहा कि श्रीराम कोई जीवित और महापुरुष व्यक्ति थे, ऐसा मैं नहीं मानता. पर रामायण कहानी में जो बातें बताई गई है वो सीखने वाली है. रामायण कथा में कई श्लोक और संदेश ऐसे हैं जो लोगो को बेहतर व्यक्तित्व के निर्माण में सहायक है सिलेबस में शामिल हो मुझे कोई एतराज नहीं है ।

मांझी के इस बयान पर बीजेपी के विधायक काफी गुस्से में है बीजेपी विधायक हरि भूषण ठाकुर बचोल ने कहा कि राम के अस्तित्व पर सवाल करने वाले मांझी जी जरा बताये उनके माता-पिता जी जीतन राम मांझी की जगह जीतन राक्षस मांझी क्यों नहीं रखा।मांझी सेकुलर दिखने के चक्कर में ओछी राजनीति कर रहे हैं।जीतनराम मांझी को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए हलाकि बीजेपी विधायक के इस बयान के बाद जीतनराम मांझी ने एक बार फिर अपने पूराने बयान पर कायम रहते हुए कहा कि मैं माफी किस बात मांगू जो सही है वो मैंने कहा ।

उपेन्द्र कुशवाहा और शरद यादव की बीच हुई मुलाकात से बिहार की राजनीति गरमाई

जदयू के संसदीय दल के नेता उपेन्द्र कुशवाहा और शरद यादव के बीच बंद कमरे में दो घंटे तक चली बैठक के बाद बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गयी है और अटकलों का दौड़ शुरु हो गया है कि शरद यादव की घर वापसी हो रही है क्या।

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद नीतीश कुमार अपने तमाम पूराने सहयोगियों के साथ लगातार सम्पर्क में है और उनके पार्टी में वापसी को लेकर खुद पहल कर रहे हैं और उस कड़ी की शुरुआत उपेन्द्र कुशवाहा के जदयू में शामिल होने से हुआ था ,और उसके बाद पूर्व विधायक मंजीत सिंह पूर्व विधान पार्षद विनोद कुमार सिंह सहित दो दर्जन से अधिक नेताओं की घर वापसी हुई है।

हलाकि शरद यादव की वापसी के सवाल को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा सहित पार्टी के अधिकांश नेता खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है लेकिन जिस तरीके से उपेन्द्र कुशवाहा मुलाकात की तस्वीर को सार्वजनिक किये हैं उससे कही ना कही यह लग रहा है कि अंदर खाने में कुछ ना कुछ खिचड़ी पक रही है।

क्यों कि नीतीश कुमार जिस तरीके से चिराग को निशाने पर ले रहे हैं ऐसे में बिहार में वापसी के लिए यादव वोट में डिवीजन कराने वाले बड़े चेहरे की जरुरत है भले ही इस बार कोसी का वो इलाका जदयू की प्रतिष्ठा को बचा लिया लेकिन आने वाले समय में जिस तरीके से विजेन्द्र यादव और नरेन्द्र नरायण यादव जैसे नेता बढ़ती उम्र के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हो रहे हैं ऐसे में जदयू की परेशानी आने वाले समय में बढ़ सकती है ।

इसलिए शरद यादव सिर्फ बिहार की चुनावी राजनीति के लिए ही नहीं राष्ट्रीय फलक पर तीसरे मोर्चे को लेकर कोई सम्भावना बनती है तो उस समय शरद यादव की भूमिका महत्वपूर्ण हो जायेंगी क्यों कि इनका रिश्ता कांग्रेस से भी और लालू से भी बेहतर है। ऐसे में शरद आज की राजनीति में नीतीश की जरुरत है इस स्थिति में आने वाले समय में शरद यादव की वापसी हो जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

भ्रष्टाचार को लेकर सीएम आज भी दिखे असहज

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज 4, देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम में शामिल हुए। जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे 123 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यकम‘ में सामान्य प्रशासन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, पंचायती राज विभाग, ऊर्जा विभाग, पथ निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, जल संसाधन विभाग, उद्योग विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, परिवहन विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग, योजना एवं विकास विभाग, पर्यटन विभाग, भवन निर्माण विभाग, वाणिज्य कर विभाग, सूचना एवं जन-संपर्क विभाग तथा गन्ना (उद्योग) विभाग के मामलों पर सुनवाई हुयी।

मुख्यमंत्री ने जनता के दरबार में हाजिर होकर लोगों की शिकायतें सुनीं। जनता दरबार में आये एक शख्स ने मुख्यमंत्री से दबंग मुखिया की करतूत की शिकायत करते हुए कहा कि मुखिया द्वारा सड़क का दो-तीन इंच ढलाई हुआ है और उसके बारे में बोलने पर हमको केस में फंसाया गया है। नल-जल का काम पूरा नहीं हुआ इसकी शिकायत पर वार्ड सदस्य एवं मुखिया के ससुर के द्वारा भी हमलोगों को झूठे मुकदमे में फंसाया गया है। वर्ष 2016 से अब तक जितना काम मनरेगा का किया गया है, सभी काम जे0सी0बी0 से हुआ है। युवक की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

गोपालगंज के अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य श्री योगेंद्र मिश्रा ने मुख्यमंत्री से कहा कि मैं रिटायर्मेंट के बाद से जनसेवा करता आ रहा हूं। गांव की भौगोलिक परिस्थिति साफ बताती है कि उसे बिहार की बजाए यूपी का अंग होना चाहिए। आपसे आग्रह है कि मेरे गांव को उत्तर प्रदेश में शामिल करा दिया जाए। मुख्यमंत्री भी इस मांग को सुनकर चौंक गए और आवेदक को संबंधित विभाग के अधिकारी के पास भेज दिया।

बगहा, पश्चिमी चंपारण के श्री आशुतोष मणि पाठक ने कहा कि बगहा-1 प्रखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत मझौवां के अंतर्गत मेरे गांव के पास डेढ़ कि0मी0 लंबे चैनल (तिरहुत मेन कैनाल) के भर जाने से गांव में फसल बर्बाद हो जाता है और बाढ़ भी आ जाता है। वहीं हरनौत, नालंदा के श्री धनंजय कुमार ने कल्याण बिगहा बहादुर पथ के अंतर्गत द्वारिका बिगहा महाने नदी पर पुल निर्माण के संबंध में अपनी मांग रखी। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को समस्याओं के समाधान करने का निर्देश दिया।

एंकगरसराय, नालंदा के श्री राजीव कुमार ने गेहूं अधिप्राप्ति की राशि नहीं मिलने की षिकायत की तो वहीं मनेर, पटना के श्री ओम प्रकाश ने प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने के संबंध में शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इस पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

कोचस, रोहतास के श्री अभिषेक कुमार ने राशन कार्ड बनवाने को लेकर धांधली होने की शिकायत के साथ-साथ रिश्वतखोरी कर फर्जी लोगों के राशन कार्ड बनवाए जाने की बात कही तो वहीं असरगंज, मुंगेर के श्री विद्यानंद सिंह ने जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत अपने यहां तालाबों के जीर्णोद्धार के संबंध में शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इस संबंध में आवष्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

चौसा ग्राम पंचायत में कार्यरत एक महिला न्याय मित्र ने मुख्यमंत्री से गुहार लगायी कि मेरे ग्राम पंचायत को नगर पंचायत में तब्दील कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद ग्राम कचहरी खत्म होने से मैं न्याय मित्र के पद पर काम नहीं कर पा रही हूॅ। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने नए सिरे से नियोजन में एडजस्ट किए जाने की मांग की।

मुख्यमंत्री ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि ऐसे ग्राम पंचायत से जो अब नगर पंचायत में तब्दील हो चुके हैं और जहां ग्राम कचहरी की व्यवस्था खत्म हो चुकी है। उन जगहों पर काम करने वाले न्याय मित्रों को दूसरी जगह नियोजित करने की कार्रवाई करें।

शेखपुरा के बरबीघा से आए एक फरियादी ने मुख्यमंत्री से कहा कि उद्योग विभाग में मेरी पत्नी के नाम पर फर्जी दस्तखत करके सब्सिडी की निकासी करा ली गई है। यह बड़ा घोटाला है और तत्कालीन उद्योग मंत्री और राजद नेता की मिलीभगत से बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। राजद नेता के बेटे के नाम पर कंपनी है उसी ने घोटाला किया है। यह सुन मुख्यमंत्री ने तुरंत जांच के आदेश दिये।

पटना के एक फरियादी ने मुख्यमंत्री से कहा कि उद्योग विभाग के अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की है। फरियादी ने आगे बताते हुए कहा कि उस समय उद्योग विभाग के मंत्री से हमने इस बात की शिकायत की तो आरोपी ने मंत्री से मिलकर मामले को रफा-दफा करा दिया। यह शिकायत सुन मुख्यमंत्री ने तुरंत उद्योग विभाग को निर्देष दिया कि इस मामले की जांच कर त्वरित कार्रवाई करें।

शेखपुरा से आये एक फरियादी ने मुख्यमंत्री से शिकायत किया कि पैक्स में धान बेचने के सालभर बाद भी पैसे का भुगतान नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इस समस्या के समाधान करने का निर्देश दिया।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद, ऊर्जा सह योजना एवं विकास मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री श्री शाहनवाज हुसैन, जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, भवन निर्माण मंत्री श्री अशोक चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार, कृषि मंत्री श्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री श्री रामप्रीत पासवान, पंचायती राज मंत्री श्री सम्राट चौधरी, सहकारिता मंत्री श्री सुबाष सिंह, गन्ना उद्योग मंत्री श्री प्रमोद कुमार, पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री श्री मुकेश सहनी, ग्रामीण कार्य मंत्री श्री जयंत चौधरी, लघु जल संसाधन मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन, परिवहन मंत्री श्रीमती शीला कुमारी, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री नीरज कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0सिंघल, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, संबंधित विभागों के अन्य वरीय अधिकारी, पटना के जिलाधिकारी श्री चंद्रशेखर सिंह तथा वरीय पुलिस अधीक्षक श्री उपेंद्र शर्मा उपस्थित थे।

‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम के पष्चात् मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत करते हुये कहा कि हमलोग शुरु से कह रहे हैं कि छह माह में छह करोड़ से ज्यादा टीकाकरण करेंगे। प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस के अवसर पर हमलोगों ने तय किया था कि कम से कम 30 लाख टीकाकरण करेंगे लेकिन इस लक्ष्य को पार करते हुए 33 लाख से अधिक टीकाकरण किया गया। टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है। हमलोग निश्चित रुप से वैक्सिनेशन का काम तेजी से जारी रखेंगे। केंद्र सरकार से जो वैक्सीन मिलनी चाहिए वो मिल रही है।

इसको लेकर हमारी सरकार के लोग केंद्र से बातचीत करते रहते हैं। निरंतर केंद्र से वैक्सीन की सप्लाई हो रही है। वैक्सीनेशन का काम तेजी से काम किया जा रहा है। इसको लेकर सभी लोग अलर्ट और सक्रिय हैं। वैक्सीनेशन महाअभियान की हमलोग लगातार जानकारी लेते रहे। 17 सितंबर की रात में ही 30 लाख से ज्यादा वैक्सीनेशन होने की जानकारी मिल गई थी। अगले दिन सुबह में हमलोगों को बताया गया कि एक दिन में 33 लाख से ऊपर वैक्सिनेशन हो गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग शुरु से ही इस बात पर जोर देते रहे हैं कि कोरोना की जांच के लिए भी निश्चित तौर पर काम करते रहना है। कोई बाहर से आ रहा है उसकी वजह से 6-7 केस कहीं-कहीं से निकल जा रहा है। कोरोना से ज्यादा प्रभावित राज्यों से आने वाले लोगों के जांच का प्रबंध किया गया है ताकि इसकी पहचान हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि टीकाकरण का डोज छह करोड़ से भी ज्यादा बढ़ेगा। आप समझ लीजिए कि फर्स्ट डोज जिसका हो चुका है उसके सेकेंड डोज का भी तो टीकाकरण चल रहा है। दूसरे डोज के लिए भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि सभी लोगों को दूसरी डोज भी पड़ जाए।

मगही और भोजपुरी भाषा को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री के बयान से संबंधित प्रश्न का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को इसका एहसास नहीं कि बिहार एक था बिहार तो 2000 में दो हिस्से में बंटा। बिहार के लोगों को झारखंड के प्रति पूरा का पूरा प्रेम है और झारखंड के लोगों को भी बिहार के प्रति प्रेम है। पता नहीं पॉलिटकली लोग क्या बोलते हैं ये बात समझ में नहीं आती। झारखंड के एक एक आदमी के प्रति हमलोगों की श्रद्धा है। बिहार-झारखंड तो भाई है, एक ही परिवार के सबलोग हैं। वैसे तो पूरा देश के लोग एक परिवार के हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जब बिहार और झारखंड एक था तब लोग काम करने झारखंड जाते थे लेकिन अब कोई नहीं जाता है। बिहार का बंटवारा होने के बाद बिहार के लोगों में काफी मायूसी आ गयी थी। झारखंड के अलग हो जाने के बाद लोगों को लगा था कि बिहार बर्बाद हो जायेगा, बिहार में कुछ नहीं बचेगा लेकिन ये सब धारणायें गलत साबित हुई। बिहार का तेजी से विकास हो रहा है। बिहार में कई संस्थानों की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को झारखंड के प्रति कोई गलत धारणा नहीं है। लोग एक दूसरे की इज्जत करते हैं। इसी तरह झारखंड के लोगों का भी बिहार के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव है। पता नहीं लोग ऐसी बात क्यों बोलते हैं?

मगही और भोजपुरी बोलने वालों को झारखंड के मुख्यमंत्री द्वारा दबंग कहे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई दबंग नहीं है। ऐसी बात नहीं सोचनी चाहिए। अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोग विभिन्न राज्यों में रहते हैं। बिहार के ही कुछ इलाकों में बंगाल की भाषा बोली जाती है। इसी तरह उत्तर प्रदेश और झारखंड के कुछ इलाकों में भी बिहार की भाषा बोली जाती है। भाषा को लेकर ऐसी सोच ठीक नहीं है। अगर किसी को कोई राजनीतिक लाभ लेना है तो वह अलग बात है। हमलोग ऐसी बात कभी नहीं सोचते हैं। हमलोगों का झारखंड के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव है।