गोपालगंज की सासामुसा चीनी मिल परिसर में सोमवार को एक बड़ा विवाद उभर आया है. यहां पर किसानों और मजदूरों ने एक सामूहिक पंचायत का आयोजन किया और चीनी मिल की मशीनों को स्क्रैप में काटने की प्रक्रिया का विरोध किया. किसानों ने स्पष्ट कहा कि जब तक किसानों और मजदूरों का बकाया भुगतान नहीं हो जाता है, तब तक किसी भी कीमत पर फैक्ट्री को स्क्रैप में नहीं कटने दिया जाएगा.
एनसीएलटी की नीलामी के बाद से यह विवाद जारी है. किसानों और मजदूरों ने इस नीलामी की आलोचना की है और कहा है कि इससे उनका अधिकार छीना जा रहा है. वे कहते हैं कि इस नीलामी के तौर पर, कृषि क्षेत्र के भविष्य को खतरे में डाला गया है.
गोपालगंज के सासामुसा चीनी मिल की मशीनें पिछले कुछ दिनों से स्क्रैप में काटने की प्रक्रिया के लिए तैयार की जा रही हैं, लेकिन किसानों और मजदूरों ने इसका विरोध किया. वे कहते हैं कि उनके साथ कोई भी अन्याय नहीं होना चाहिए.
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष, रामशंकर सिंह ने कहा, हम किसानों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. हमारा मानना है कि किसानों का बकाया भुगतान होना चाहिए और फिर ही फैक्ट्री को स्क्रैप में काटा जा सकता है.
किसानों के अलावा, मजदूरों ने भी इस विरोध में शामिल होने की घोषणा की है. वे कहते हैं कि उनका भी बकाया भुगतान होना चाहिए और उनकी मांगों को पूरा किया जाना चाहिए.
गोपालगंज जिले के मजदूर संघ के अध्यक्ष, रामवीर सिंह ने कहा, हम मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. हमारा मानना है कि मजदूरों का बकाया भुगतान होना चाहिए और उनकी मांगों को पूरा किया जाना चाहिए.
21 जून को हजारों किसानों ने महाधरना का एलान किया है, जिसे किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित किया जाएगा. इस महाधरना में किसान और मजदूर दोनों हिस्सों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
एनसीएलटी की नीलामी के बाद से यह विवाद जारी है, लेकिन किसानों और मजदूरों का समर्थन कम नहीं हुआ है. वे कहते हैं कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार हैं और किसी भी कीमत पर फैक्ट्री को स्क्रैप में नहीं कटने देंगे.
गोपालगंज के सासामुसा चीनी मिल की मशीनें पिछले कुछ दिनों से स्क्रैप में काटने की प्रक्रिया के लिए तैयार की जा रही हैं, लेकिन किसानों और मजदूरों ने इसका विरोध किया है. वे कहते हैं कि उनके साथ कोई भी अन्याय नहीं होना चाहिए.
किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष, रामशंकर सिंह ने कहा, “हम किसानों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। हमारा मानना है कि किसानों का बकाया भुगतान होना चाहिए और फिर ही फैक्ट्री या संबंधित संस्थान के संचालन से जुड़े किसी भी निर्णय पर आगे बढ़ना चाहिए। जब तक किसानों का हक नहीं मिल जाता, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”
विरोध की आग में किसान-मजदूर एकजुटता का प्रतीक बन रहे हैं। यह कदम न केवल उनके अधिकारों की रक्षा के लिए, बल्कि कृषि क्षेत्र और उसके भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है। किसानों और मजदूरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे और न्याय मिलने तक पीछे नहीं हटेंगे। उनका मानना है कि इस एकजुटता से उनकी आवाज और अधिक मजबूत होगी तथा संबंधित अधिकारियों पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ेगा।