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पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। जस्टिस पीवी बजंत्री की खंडपीठ ने एक अवमानना के सिलसिले में श्री पाठक के विरुद्ध जमानतीय वारंट जारी किया।

एक शिक्षिका सुकृति कुमारी को नियमित शिक्षक का वेतन नहीं दे कर नियोजित शिक्षक का वेतन दिया गया,जबकि कोर्ट ने उन्हें नियमित शिक्षक का वेतन देने का निर्देश दिया था ।

अपर मुख्य शिक्षा सचिव के के पाठक की ओर से अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जून, 2023 में पदभार ग्रहण किया है।तब से वे अदालती अवमानना से सम्बन्धित मामलों पर कार्रवाई कर रहे है।

याचिकाकर्ता शिक्षिका सुकृति कुमारी के मामलें में अदालती आदेश का पालन किया जा चुका है।लेकिन कोर्ट ने अदालती आदेश के पालन में हुए बिलम्ब को गंभीरता से लेते हुए जमानतीय वारंट जारी किया।

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#PatnaHighCourt

अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में कोर्ट द्वारा जारी जमानतीय वारंट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है,जिस पर कल सुनवाई होना तय हुआ है।इस मामलें को भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जायेगा।

इस मामलें पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी।

जब सरकार पहले से नियुक्त शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, तब नये शिक्षकों के वेतन मद में सालाना 11000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे उठायेगी? : सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जब सरकार पहले से नियुक्त शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, तब नये शिक्षकों के वेतन मद में सालाना 11000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे उठायेगी? पैसे कहाँ से आएँगे, यह बताना चाहिए।

• खाते में हजार करोड़ शेष रहते शिक्षकों का वेतन रोकना गलत
• उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपते ही बिहार को मिल जाएगी समग्र शिक्षा अभियान की राशि
• पिछले साल का बिहार ने केंद्र को नहीं दिया खर्च का हिसाब
• बताएँ, नये शिक्षकों के वेतन हेतु कहाँ से आएँगे 11000 करोड़- सुशील कुमार मोदी

श्री मोदी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति और उनके वेतन का भुगतान पूरी तरह राज्य सरकार की जिम्मेवारी है। केंद्र सरकार इसमें केवल सहयोग करती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से शिक्षक वेतन-मद में सहायता राशि न मिलने का दुष्प्रचार कर रही है, जबकि सच यह है कि बिहार सरकार ने पिछले साल के खर्च का हिसाब और उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं दिया।

SushilModi

श्री मोदी ने कहा कि जैसे ही राज्य सरकार उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपेगी, केंद्र से समग्र शिक्षा अभियान की सहायता राशि मिल जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के खाते में अब भी 1000 करोड़ रुपये बिना खर्च हुए पड़े हैं। इससे शिक्षकों को वेतन दिया जा सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए केंद्र पर तथ्यहीन आरोप लगाना नीतीश सरकार की आदत बन गयी है। यह सरकार शिक्षकों की पीठ पर लाठी चलाती है और वेतन रोक कर पेट पर लात मारती है।

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पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस-मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई 18 जुलाई,2023 तक टली

पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस-मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई 18 जुलाई,2023 तक टली। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस बारे में पटना नगर निगम को विस्तृत जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था। पटना नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया कि आधुनिक बूचडखाने के निर्माण और विकास के लिए स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है।

साथ ही निविदा की कार्रवाई की जा रही है। पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए पटना नगर निगम ने तीन सप्ताह की मोहलत मांगी,जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था।ये जनहित याचिका अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने दायर की है।

पिछली सुनवाई में अधिवक्ता मानिनी जायसवाल ने कोर्ट को बताया था कि पटना समेत राज्य विभिन्न क्षेत्रों में अस्वास्थ्यकर और नियमों के विरुद्ध मांस मछली काटे और बेचे जाते हैं।उन्होंने कहा कि इससे जहाँ आम आदमी के स्वास्थ्य पर पर बुरा असर पड़ता हैं, वहीं खुले में इस तरह से खुले में जानवरों के काटे जाने से छोटे लड़कों के मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

याचिकाकर्ता के वकील मानिनी जयसवाल ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया था कि खुले और अवैध रूप से चलने वाले बूचडखानों को नगर निगम द्वारा तत्काल बंद कराया जाना चाहिए ।

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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पटना के राजा बाज़ार, पाटलिपुत्रा , राजीव नगर, बोरिंग केनाल रोड , कुर्जी, दीघा , गोला रोड , कंकड़बाग आदि क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस मछ्ली की बिक्री होती है।

अधिवक्ता मानिनी जयसवाल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि अस्वस्थ और बगैर उचित प्रमाणपत्र के ही जानवरों को मार कर इनका मांस बेचा जाता है ,जो कि जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

उनका कहना था कि शुद्ध और स्वस्थ मांस मछ्ली उपलब्ध कराने के लिए सरकार को आधुनिक सुविधाओं सुविधाओं के साथ बूचड़खाने बनाए जाने चाहिए,ताकि मांस मछली बेचने वालोंं को भी सुविधा मिले।

इस मामलें पर अब अगली सुनवाई 18 जुलाई, 2023 को की जाएगी।

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इन हॉस्टलों की स्थिति में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी कृष्णन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इन हॉस्टलों की स्थिति में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विचार विमर्श किया।उन्होंने भी हॉस्टालों की स्थिति के सम्बन्ध में अपना रिपोर्ट दिया।राज्य सरकार इस मामलें पर कार्रवाई की योजना बना रही है।

याचिकाकर्ता विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ने अपनी जनहित याचिका में बताया था कि राज्य के विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कालेजों में छात्रों के हॉस्टलों की स्थिति काफी दयनीय है।उन हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

छात्रों के लिए साफ सुथरे और अच्छे कमरे,स्वच्छ शौचालयों,शुद्ध पेय जल,कैंटीन,बिजली आदि सुविधायें उपलब्ध नहीं है।
याचिका में ये भी कहा गया कि इससे छात्रों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं ।

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इसका प्रभाव उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ता है ।इस याचिका ये अनुरोध किया गया कि छात्रों के लिए नये हॉस्टलों का निर्माण किया जाये,जिनमें उनके लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हो,ताकि उन्हें रहने और पढ़ने लिए सही माहौल मिले।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामलें में 23 अक्टूबर,2019 को बिहार सरकार के मुख्य सचिव और सभी सबंधित पक्षों को दिया गया।इसमें ये कहा गया कि छात्रों के लिए साफ सुथरे कमरे,स्नानघर, शौचालयों,बिजली आदि की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी।

कोर्ट ने आज इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से उम्मीद जाहिर की कि वह विभिन्न विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों की स्थिति सुधारने के उचित व प्रभावी कदम उठाएगी।इसके साथ ही कोर्ट ने इस जनहित को निष्पादित कर दिया।

लाठी में तेल पिलाने वालों की संगत में नीतीश, बर्बर हुई पुलिस: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति, 10 लाख युवाओं की सरकारी नौकरी पर विश्वासघात, शासन में भ्रष्टाचार और चौपट कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे पर शांतिपूर्ण ढंग से संचालित विधानसभा मार्च पर बर्बर लाठीचार्ज कर एक कार्यकर्ता की जान लेना और दर्जनों लोगों को बुरी तरह जख्मी करना निंदनीय है। क्या यही लोकतंत्र है नीतीश कुमार जी ?

  • शिक्षकों के मुद्दे पर व्यर्थ नहीं जाएगा भाजपा कार्यकर्ता का बलिदान
  • पटना की सड़कों पर लोकतंत्र लहूलुहान हुआ

श्री मोदी ने कहा कि प्रदर्शन करने के अधिकार को लाठी के बल पर रौंदने वाली सरकार किस मुँह से लोकतंत्र बचाने की बात करती है ?

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांग के समर्थन में भाजपा के जहानाबाद जिला महामंत्री विजय कुमार सिंह का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। इसके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

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श्री मोदी ने कहा कि लाठी में तेल पिलाने वालों की संगत में आकर नीतीश कुमार ने पुलिस को निरंकुश और हिंसक बना दिया है।

उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर भाजपा के सैंकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, संघर्ष किया और लाठी खायी, उसे विधान मंडल में भी पूरी ताकत से उठाया गया। अब हम ये मामला जनता की अदालत में भी ले जाएँगे।

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। जस्टिस पीवी बजंत्री की खंडपीठ ने एक अवमानना के सिलसिले में पाठक को

कोर्ट ने आज 13 जुलाई,2023 को निश्चित रूप से कोर्ट में स्वयं उपस्थित होने का आदेश दिया था।लेकिन किसी कारणवश के के पाठक स्वयं उपस्थित नहीं होकर,अपने वकील के जरिए हाजिर हुए।

कोर्ट ने इसे आदेश की अवमानना करार देते हुए उनकी हाजिरी को सुनिश्चित करने हेतु जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया।

अपर मुख्य शिक्षा सचिव की ओर से कोर्ट के समक्ष उपस्थित अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने बताया कि श्री पाठक ने जून, 2023 में अपने पद पर योगदान दिया।नालंदा जिला के एक शिक्षक घनश्याम प्रसाद सिंह को हेड मास्टर के पद पर प्रोन्नत का आदेश जारी किया गया।

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उन्होंने बताया कि अपर मुख्य सचिव पाठक ने नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिख कर आदेश का पालन किये जाने का निर्देश दिया ।

जिला शिक्षा पदाधिकारी,नालंदा ने आदेश का पालन कर विभाग को सूचित किया।उस शिक्षक ने भी आदेश के अनुपालन होने को स्वीकार भी किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 जुलाई,2023 को होगी।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई 7 जुलाई, 2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई अधूरी रही।इस मामलें पर कल 7जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी। इस मामलें में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

आज भी राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के
किया जाना है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जाति सम्बन्धी सूचना शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के समय भी दी जाती है।जातियाँ समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हर धर्म में अलग अलग जातियाँ होती है।

उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया जा रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जातीय सर्वेक्षण का कार्य लगभग 80 फी सदी पूरा हो गया है।उन्होंने कहा कि ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकार में है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इससे सर्वेक्षण से किसी के निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा है।महाधिवक्ता शाही ने कहा कि बहुत सी सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक होती हैं।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।

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कोर्ट ने ये भी पूछा था कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।ये असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा था कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

इस मामलें पर कल 6 जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी।इस मामलें पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार, ऋतिका रानी,अभिनव श्रीवास्तव और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई कल 6 जुलाई, 2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कल 6 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी। इस मामलें में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

आज राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के लिए किया जाना है।

उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया जा रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जातीय सर्वेक्षण का कार्य लगभग 80 फी सदी पूरा हो गया है।उन्होंने कहा कि ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकार में है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इससे सर्वेक्षण से किसी के निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा है।महाधिवक्ता शाही ने कहा कि बहुत सी सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक है ।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।

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कोर्ट ने ये भी पूछा था कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

कल की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।ये असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा था कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

इस मामलें पर कल 6 जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी ।

‘Land For Job Scam’ मामले में लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें; घोटाले में CBI ने दाख‍िल की चार्जशीट

दिल्ली । केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में Land For Job Scam मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है। बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव के परिवार की मुश्किलें कम होने नाम नहीं ले रही है। CBI आरोप पत्र में नौकरी के बदले जमीन घोटाले से संबंधित मामले में बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव, RJD प्रमुख और पूर्व सीएम पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू यादव, बिहार की पूर्व CM राबड़ी देवी और कई अन्य लोगों का नाम शामिल किया है।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल ताजा आरोप पत्र में तेजस्वी यादव और कंपनियों समेत 17 को आरोपी बनाया गया है। CBI ने मामले में एके इन्फोसिस्टम्स और कई बिचौलियों को भी नामजद किया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तरफ से कोर्ट में कहा गया था कि, “कोर्ट की छुट्टी के बाद सीबीआई अपना पूरक आरोप पत्र दाखिल करेगी.” जिसके बाद कोर्ट ने कहा था कि, इस मामले में अगली सुनवाई 12 जुलाई को की जाएगी। अदालत ने कहा था कि, “मामले में लगातार देरी स्वीकार्य नहीं है.” जिसके जवाब में CBI ने कहा था कि, इस मामले में जांच चल रही है और उन्हें नए तथ्यों को शामिल करने के लिए थोड़ा समय और चाहिए। ज‍िसके बाद आज यानी सोमवार को CBI ने चार्जशीट दायर की है।

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नौकरी के बदले जमीन घोटाला ( Land For Job Scam) मामले में यह दूसरा आरोपपत्र है और इसमें तेजस्वी के अलावा लालू और राबड़ी का नाम के साथ-साथ 14 अन्य लोगों के भी नाम शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक इस मामले में पहला आरोपपत्र दाखिल होने के बाद सामने आए नए दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर यह आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

दूसरे आरोपपत्र में अभियुक्तों के नाम की सूची (Name of the accused in the 2nd chargesheet of Land For Job Scam :-

01) Shri Lalu Prasad Yadav, Ex-Union Minister of Railways,
02) Smt. Rabri Devi,
03) Sh. Tejashwi Prasad Yadav,
04) Sh. Maheep Kapur, Ex-GM of West Central Railway (WCR),
05) Sh. Manoj Pande, Ex-CPO of WCR,
06) Dr. P. L. Bankar, Ex-CPO of WCR
07) Sh. Dil Chand Kumar,
08) Sh. Gyan Chand Rai,
09) Sh. Hazari Rai,
10) M/s A. K Infosystems Pvt Ltd,
11) Sh. Mahesh Singh,
12) Sh. Mohd. Dhanif Ansari,
13) Sh. Shatrudhan Rai,
14) Sh. Vishwakarma Rai,
15) Sh. Ashok Kumar Yadav,
16) Sh. Ram Briksh Yadav and
17) Sh. Rajnath Singh.

जानें क्या है नौकरी के बदले जमीन घोटला ( Land For Job Scam )

Land For Job Scam घोटाला उस समय हुआ जब लालू प्रसाद कांग्रेस नीत केंद्र की UPA-1 सरकार में रेल मंत्री थे। CBI ने आरोप लगाया है कि 2004-09 की अवधि के दौरान लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान बिना किसी विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना के नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर पसंदीदा लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई।

भारतीय रेलवे के विभिन्न क्षेत्रों में समूह ‘डी’ पदों पर विभिन्न व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था और इसके बदले में संबंधित व्यक्तियों ने तत्कालीन रेल मंत्री प्रसाद के परिवार के सदस्यों को और इस मामले में लाभार्थी कंपनी ‘एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ को अपनी जमीन हस्तांतरित की थी।

जांच एजेंसी CBI के मुताबिक, रेलवे में नौकरी के बदले में उम्मीदवारों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लालू यादव के परिवार के सदस्यों को बाजार रेट से काफी कम दरों पर जमीन बेची थी।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई कल 4 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कल 4 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी। इन मामलों में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

इससे पूर्व हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।

कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।कोर्ट ने ये भी पूछा है कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

दूसरी तरफ राज्य सरकार राज्य सरकार का कहना था कि जन कल्याण की योजनाएं बनाने और सामाजिक स्तर सुधारने के लिए ये सर्वेक्षण किया कराया जा रहा है।

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इससे पूर्व राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई करते हुए जातीय जनगणना सम्बन्धी मामलें पर पटना हाइकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने इंकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष 3 जुलाई,2023 को पटना हाइकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा था ।सुप्रीम कोर्ट में जातीय जनगणना से सम्बंधित मामलें पर अगली सुनवाई 14 जुलाई,2023 निर्धारित की गयी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट में इस मामलें पर 3 जुलाई,2023 को सुनवाई की तिथि निर्धारित होने को देखते हुए ये 14जुलाई,2023 की तिथि तय की थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की थी।सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी,जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करने सम्बन्धी याचिका को रद्द कर दिया था।

साथ ही राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट द्वारा 4 मई, 2023को पारित अंतरिम आदेश को भी चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने राज्य सरकार के 3 जुलाई,2023 के पूर्व सुनवाई करने की याचिका को कोर्ट ने 9मई,2023 को सुनवाई करने के बाद खारिज कर दिया था।

इस आदेश विरुद्ध को राज्य सरकार ने एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर की है।पटना हाइकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही रखा।

9 मई, 2023 को सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही निश्चित किया था।गौरतलब कि पहले 4मई,2023 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए जातीय जनगणना पर रोक लगा दी थी।

इन मामलों पर कल भी सुनवाई जारी रहेगी।

बिहार में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के मामले पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी

पटना हाईकोर्ट में राज्य में निबंधित और योग्य फार्मासिस्ट के पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के मामले पर सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में राज्य सरकार को पुनः जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था।ये जनहित याचिका मुकेश कुमार ने दायर किया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशान्त सिन्हा ने कोर्ट को बताया था कि डॉक्टरों द्वारा लिखें गए पर्ची पर निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा दवा नहीं दी जाती है।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि बहुत सारे सरकारी अस्पतालों में अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क ही फार्मासिस्ट का कार्य करते है।वे बिना जानकारी और योग्यता के ही मरीजों को दवा बांटते है।जबकि ये कार्य निबंधित फार्मासिस्टों द्वारा किया जाना है।

उन्होंने कहा कि इस तरह से अधिकारियों द्वारा अनिबंधित नर्स,एएनएम,क्लर्क से काम लेना न केवल सम्बंधित कानून का उल्लंघन है,बल्कि आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ खिलबाड़ है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उन्होंने कोर्ट को बताया कि फार्मेसी एक्ट,1948 के तहत फार्मेसी से सम्बंधित विभिन्न प्रकार के कार्यों के अलग अलग पदों का सृजन किया जाना चाहिए।लेकिन बिहार सरकार ने इस सम्बन्ध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

इस आम लोगों का स्वास्थ्य और जीवन पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि फार्मेसी एक्ट,1948 के अंतर्गत बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल के क्रियाकलापों और भूमिका की जांच के लिए एक कमिटी गठित की जाए।

ये कमिटी कॉउन्सिल की क्रियाकलापों की जांच करें,क्योंकि ये गलत तरीके से जाली डिग्री देती है।उन्होंने कोर्ट को बताया था कि बिहार राज्य फार्मेसी कॉउन्सिल द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जी पंजीकरण किया गया है।

राज्य में बड़ी संख्या मे फर्जी फार्मासिस्ट कार्य कर रहे है।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

बिहार के लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में “भ्रष्ट नेताओं को करारा जवाब” देंगे : अमित शाह

लखीसराय । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बिहार के लखीसराय जिले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा । शाह ने कहा…

वह सिर्फ लालू को बेवकूफ बना रहे हैं’ और नीतीश कुमार को ‘पलटू बाबू’ (मिस्टर यू-टर्न) कहा

बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, नित्यानंद राय, नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह, बिहार भाजपा के विनोद तावड़े, सुनील ओझा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिंन्ह, पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी समेत सभी बड़े नेता स्टेज पर मौजूद थे।

CM नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी-अभी पलटू बाबू पूछ रहे थे कि नौ साल में क्या किया? अरे नीतीश बाबू, जिनके साथ इतना बैठे हो, जिनके कारण मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हो- उनका तो लिहाज करो।पीएम नरेंद्र मोदी जहां जा रहे हैं, वहां मोदी-मोदी हो रहा। ये मोदी का सम्मान जो पूरे दुनिया भर में हो रहा है वह उनका या भाजपा का सम्मान नहीं हो रहा बल्कि आपका और पूरे देश की जनता का सम्मान हो रहा है।

जब से भाजपा की सरकार बनी तो पाक प्रेरित आतंकियों को जगह दिखा दी। सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को घर घुसकर मारा। कांग्रेस, जदयू, राजद, ममता समेत सारे विपक्षी 70 साल से धारा 370 को गोद में खिला रहे थे। लेकिन, मोदी जी ने धारा 370 को खत्म कर दिया और कश्मीर की रक्षा की। यह लोग संसद में बैठकर काउ-काउ करते थे कि धारा 370 हटाओगे तो खून की नदियां बहेंगी। अरे राहुल बाबा खून की नदियां तो छोड़ो किसी ने कंकड़ तक चलाने की हिम्मत नहीं हुई। नरेंद्र मोदी ने देश और बिहार के विकास के लिए कई काम किए।

Amit Shah in Bihar

उन्होंने पूर्व सहयोगी नीतीश कुमार से यह बताने को भी कहा कि उन्होंने बिहार के लिए क्या किया है। “उन्होंने केवल अपने गठबंधन सहयोगियों को बदला है।”

अमित शाह बोले- अरे नीतीश बाबू, जिनके कारण मुख्यमंत्री बने हो, उनका तो लिहाज करो

मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा, ‘क्या बार-बार घर बदलने वाले नेता पर भरोसा किया जा सकता है? क्या ऐसे आदमी के हाथ में बिहार की बागडोर दी जानी चाहिए? वह भी यह जानता है. इसीलिए वह देश का पीएम बनने के लिए कांग्रेस के घर के सामने बैठे हैं. वह पीएम नहीं बनना चाहते, वह इस उम्र में सिर्फ लालू यादव को बेवकूफ बना रहे हैं.’ वह यहीं बिहार में रहना चाहते हैं और उन्होंने बीजेपी के सभी प्रतिद्वंद्वियों को इकट्ठा कर लिया है.”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा पिछले सप्ताह 15 विपक्षी दलों के 32 नेताओं की पटना में मुलाकात के कुछ दिनों बाद हुई है और उनमें से एक को छोड़कर सभी ने संयुक्त रूप से भाजपा का मुकाबला करने और 2024 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले एक साझा एजेंडा बनाने की कसम खाई थी।

अमित शाह ने यह भी कहा कि महागठबंधन सरकार के तहत कानून-व्यवस्था की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।

यह कहते हुए कि बिहार राज्य ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है, शाह ने कहा, “बिहार 2024 के चुनावों में भ्रष्ट नेताओं को करारा जवाब देगा।”

अमित शाह ने कहा कि जिन्होंने विश्वासघात किया है, उन्हें दंड देने का काम मुंगेर लोकसभा वालों को करना है। जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि 2024 में मोदीजी को जिताओगे, 2025 में BJP को जिताओगे।

पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अंततः विधवा ज्योति कुमारी को दरभंगा जिला प्रशासन ने दिया साढ़े चार लाख रुपए का मुआवजा दिया

पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अंततः विधवा ज्योति कुमारी को दरभंगा जिला प्रशासन ने दिया साढ़े चार लाख रुपए का मुआवजा दिया। दरअसल कोविड के दौरान पति की मृत्यु हो गई थी।

लेकिन उसकी विधवा पत्नी को जिला प्रशासन ने राज्य सरकार द्वारा घोषित मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया।बार बार गुहार लगाने के बाद भी जब दरभंगा जिला प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो बाध्य होकर विधवा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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अधिवक्ता रतन कुमार कुमर ने रिट याचिका दायर कर यह मामला उठाया।जस्टिस मोहित कुमार शाह ने सुनवाई की।कोर्ट के कड़े रुख के बाद दरभंगा के समाहर्त्ता ने विधवा ज्योति कुमारी के नाम से जारी साढ़े चार लाख रुपए का चेक दिया।

इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को निष्पादित कर दिया।

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई ई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 14 जुलाई,2023 तक का मोहलत दिया

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी कृष्णन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 14 जुलाई,2023 तक का मोहलत दिया है।

याचिकाकर्ता विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ने अपनी जनहित याचिका में बताया कि राज्य के विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कालेजों में छात्रों के हॉस्टलों की स्थिति काफी दयनीय है।उन हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

छात्रों के लिए साफ सुथरे और अच्छे कमरे,स्वच्छ शौचालयों,शुद्ध पेय जल,कैंटीन,बिजली आदि सुविधायें उपलब्ध नहीं है।
याचिका में ये कहा गया कि इससे छात्रों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं ।

इसका प्रभाव उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ता है ।इस याचिका ये अनुरोध किया गया कि छात्रों के लिए नये हॉस्टलों का निर्माण किया जाये,जिनमें उनके लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हो,ताकि उन्हें रहने और पढ़ने लिए सही माहौल मिले।

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याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामलें में 23 अक्टूबर,2019 को बिहार सरकार के मुख्य सचिव और सभी सबंधित पक्षों को दिया गया।इसमें ये कहा गया कि छात्रों के लिए साफ सुथरे कमरे,स्नानघर, शौचालयों,बिजली आदि की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी।

कोर्ट ने आज इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अबतक की गयी कार्रवाई का ब्यौरा राज्य को 14 जुलाई,2023 प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।इस मामलें पर अब अगली सुनवाई 14 जुलाई, 2023 को होगी।

विपक्ष की बैठक टांय-टांय फिश हो गई; ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ परंतु बैठक के बाद जो चुहिया निकली वह भी मरी हुई : सुशील मोदी

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि विपक्ष की बैठक टांय-टांय फिश हो गई। कहावत है ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ परंतु बैठक के बाद जो चुहिया निकली वह भी मरी हुई ।

• विपक्षी एकता बैठक की निकली हवा
• अरविंद केजरीवाल गुस्से में पत्रकार वार्ता छोड़कर चले गए

श्री मोदी ने कहा कि बैठक कि एक ही उपलब्धि है कि अगली बैठक का स्थान और तिथि तय हो गई। न तो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, न ही नीतीश कुमार को संयोजक बनाने की चर्चा हुई। उल्टे अरविंद केजरीवाल गुस्से में प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए।

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श्री मोदी ने कहा कि 7 मुख्य विपक्षी दल बैठक से नदारद थे। 15 शामिल दलों में 10 परिवारवादी दल हैं और 12 दल हैं जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। ऐसे वंशवादी और भ्रष्टाचारी से लिप्त पार्टियां ईमानदार नरेंद्र मोदी का मुकाबला नहीं कर सकती।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों समेत ज़िला अस्पतालों में वेंटीलेटर,एमआरआई मशीन,सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों समेत ज़िला अस्पतालों में वेंटीलेटर,एमआरआई मशीन,सिटी स्कैन जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने रणजीत पंडित की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 11अगस्त,2023 तक की गयी कार्रवाईयों का ब्यौरा निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया राज्य के बहुत सारे प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रो के अपने भवन नहीं है।इसके लिए राज्य सरकार को भूमि उपलब्ध करा कर अपने भवन प्राथमिक चिकित्सा केंद्र हेतु बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के सभी नौ सरकारी मेडिकल कालेजों में जो सिटी स्कैन मशीन लगाए गए हैं, वे पीपीपी मोड पर लगाए गए है।इन्हें मेडिकल कॉउन्सिल ऑफ इंडिया मान्यता नहीं देता है।

इसी तरह से राज्य के पाँच मेडिकल कालेजों में एमआरआई मशीन लगाया है, जो कि पीपीपी मोड पर लगाया गया कि।उन्होंने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के बार बार आदेश देने बाद भी सिटी स्कैन और एमआरआई मशीन नहीं लगाया गया।

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कोर्ट के 3 अगस्त,2022 के आदेश के छह महीने पूरा होने के बाद भी इन्हें अस्पतालों में अबतक नहीं लगाया गया है।

इस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दीनू कुमार और अधिवक्ता रितिका रानी ने याचिकाकर्ता की ओर से और एडवोकेट जनरल ने राज्य सरकार की ओर से पक्षों को प्रस्तुत किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 11अगस्त,2023 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की अवमानना से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर को 7 जुलाई,2023 को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया हैं

पटना हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की अवमानना से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर को 7 जुलाई,2023 को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया हैं ।जस्टिस राजीव राय ने हरिंदर कौर की अवमानना मामलें पर सुनवाई की।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश का अनुपालन 7 जुलाई,2023 तक नहीं किया गया, तो इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा ।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आरके शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि दिनांक 21मार्च,2017 को पटना हाई कोर्ट ने एक आदेश पारित कर याचिकाकर्ता के पति द्वारा इलाहाबाद बैंक (वर्तमान में इंडियन बैंक)में जमा कराये गए 17 लाख रुपये को ब्याज समेत याचिकाकर्ता को लौटाने का आदेश दिया था ।

आदेश के अनुपालन में इलाहाबाद बैंक द्वारा 17 लाख रुपये तो लौटा दिये गए ,लेकिन उसका ब्याज नहीं याचिकाकर्ता को नहीं लौटाया गया।

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कोर्ट ने जब ब्याज देने के संबंध में बैंक के अधिवक्ता से स्पष्टीकरण माँगा, तो उन्होंने पटना हाई कोर्ट द्वारा पारित फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ब्याज देना बैंक की देनदारी नहीं है।चूँकि इस राशि को बैंक द्वारा इस्तेमाल नहीं किया गया है ।

उन्होंने कोर्ट से कहा कि आदेश के अनुपालन में मूल राशि लौटा दी गई है। इस पर कोर्ट ने असहमति जताते हुए बैंक को ब्याज की राशि याचिकाकर्ता को लौटाने का आदेश दिया ।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर अदालत में स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देंगे । इस मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई,2023 को होगी ।

राज्य कर नगर निकाय चुनाव में ओबीसी/ईबीसी को दिए गए आरक्षण मामले की सुनवाई अब पटना हाई कोर्ट के दो जजों की खंडपीठ करेगी

राज्य कर नगर निकाय चुनाव में ओबीसी/ईबीसी को दिए गए आरक्षण मामले की सुनवाई अब पटना हाई कोर्ट के दो जजों की खंडपीठ करेगी। जस्टिस राजीव रॉय ने इस मामले को दो जजों की खंडपीठ को भेजने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि समर्पित आयोग की ओर से राज्य सरकार को दी गई रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को हाई कोर्ट के समक्ष रखने का आदेश दिया था।

जिसके बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गई।इस याचिका पर जस्टिस सत्यव्रत वर्मा सुनवाई कर रहे थे।

इस दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दायर अर्जी पर सवाल उठाते हुये कहा गया कि इस केस को दो जजों की खंडपीठ को करना चाहिये।उन्होंने इस केस को खंडपीठ के समक्ष भेजने का अनुरोध किया।

कोर्ट ने इस मामले में गर्मी की छुट्टी के बाद कोई निर्णय लेने का आदेश दिया था विदित है कि पटना हाईकोर्ट ने नगर निकाय चुनाव में ओबीसी/ईबीसी को दिए गए आरक्षण को गैरकानूनी करार देते हुए आरक्षित सीट को सभी के लिए खोलने का आदेश दिया था।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव को स्थगित कर दिया।नगर निकाय का चुनाव दो चरणों में होना था। पहले चरण का चुनाव 10 अक्टूबर,2022 को और दूसरे चरण का चुनाव 20 अक्टूबर,2022 को होना था।

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इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने हाई कोर्ट में पुनर्विचार अर्जी दायर की। लेकिन बाद में इस अर्जी को वापस ले ली।

हाई कोर्ट में आवेदकों की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि नगर निकाय चुनाव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजरअंदाज किया जा रहा है। पिछड़ी जाति को नगर निकाय चुनाव में आरक्षण नही दिया जा रहा है।

जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के लिए समर्पित आयोग बना निर्णय लेने के बाद ही चुनाव कराने का आदेश दिया है।लेकिन राज्य सरकार पिछड़ी जाति को आरक्षण दिये बिना चुनाव कराने का निर्णय लिया है।

वही राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया गया कि पंचायत चुनाव के समय ही पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ देने के लिए पिछड़ी जातियों का डाटा कलेक्शन किया गया था।उसी डाटा के आधार पर नगर निकाय का चुनाव कराने का फैसला लिया गया है।

राजधानी पटना समेत राज्य के कई अन्य शहरों में बने बड़ी और बहुमंजिली ईमारतों में आग बुझाने की पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के मामलें में पटना हाईकोर्ट में दो सप्ताह बाद की जाएगी

राजधानी पटना समेत राज्य के कई अन्य शहरों में बने बड़ी और बहुमंजिली ईमारतों में आग बुझाने की पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के मामलें में पटना हाईकोर्ट में दो सप्ताह बाद की जाएगी।अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

उन्होंने अपनी जनहित याचिका में बताया कि पटना समेत राज्य के कई शहरों में बड़ी ईमारतों में आग बुझाने की प्रभावी व्यवस्था न के बराबर है।उन्होंने बताया कि इन ईमारतों में बिजली के शॉर्ट सर्किट होने या किसी अन्य कारण से आग लगने पर आग बुझाने की सही व्यवस्था नहीं होने के कारण अक्सर जान माल की बड़े पैमाने पर क्षति होती है।

उन्होंने बताया कि शहरों में शहरों में नियमों का उल्लंघन करने के कारण आग बुझाने में काफी कठिनाई होती है।सड़कों व गलियों मे होने वाले अतिक्रमणों के कारण चौड़ाई कम होती जा रही है।इससे भी आग बुझाने वाले फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

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उन्होंने ये भी जानकारी दी है कि पटना में 51 ईमारतों को आग बुझाने की व्यवस्था की जांच के बाद अस्थायाई अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है।जबकि 12 ईमारतों को उनके आग बुझाने की व्यवस्था की जांच कर स्थायी अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है ।

उन्होंने बताया कि पटना में हजार से अधिक ऐसी ईमारतें है, जिन्हें आग बुझाने की व्यवस्था का अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है ।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस- मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी

पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस- मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम को विस्तृत हलफनामा दायर करने के लिए पुनः दो सप्ताह का समय दिया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस बारे में पटना नगर निगम को विस्तृत जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा था। पटना नगर निगम ने कोर्ट को बताया था कि आधुनिक बूचडखाने के निर्माण और विकास के लिए स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है।

ये जनहित याचिका अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने दायर की है। अधिवक्ता मानिनी जयसवाल ने कोर्ट को बताया कि पटना समेत राज्य विभिन्न क्षेत्रों में अस्वास्थ्यकर और नियमों के विरुद्ध मांस मछली काटे और बेचे जाते हैं।

उन्होंने सुनवाई के दौरान बताया था कि इससे जहाँ आम आदमी के स्वास्थ्य पर पर बुरा असर पड़ता हैं, वहीं खुले में इस तरह से खुले में जानवरों के काटे जाने से छोटे लड़कों के मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

याचिकाकर्ता के वकील मानिनी जयसवाल ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया था कि खुले और अवैध रूप से चलने वाले बूचडखानों को नगर निगम द्वारा तत्काल बंद कराया जाना चाहिए ।

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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पटना के राजा बाज़ार, पाटलिपुत्रा , राजीव नगर, बोरिंग केनाल रोड , कुर्जी, दीघा , गोला रोड , कंकड़बाग आदि क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस मछ्ली की बिक्री होती है।

अधिवक्ता मानिनी जायसवाल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि अस्वस्थ और बगैर उचित प्रमाणपत्र के ही जानवरों को मार कर इनका मांस बेचा जाता है ,जो कि जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

उनका कहना था कि शुद्ध और स्वस्थ मांस मछ्ली उपलब्ध कराने के लिए सरकार को आधुनिक सुविधाओं सुविधाओं के साथ बूचड़खाने बनाए जाने चाहिए,ताकि मांस मछली बेचने वालोंं को भी सुविधा मिले।

साथ ही जनता को भी स्वस्थ और प्रदूषणमुक्त मांस मछली मिल सके।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पटना हाईकोर्ट में योग दिवस का आयोजन किया गया

आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पटना हाईकोर्ट में योग दिवस का आयोजन किया गया। इसमें पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के वी चंद्रन समेत कई अन्य जज, रजिस्ट्री के अधिकारीगण, विभिन्न अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी व पटना हाईकोर्ट के अधिकारी और कर्मचारियों ने इस कार्यक्रम भाग लिया। ये कार्यक्रम सुबह साढ़े छह बजे से साढ़े सात बजे आयोजित किया गया था ।

yoga day

JDU सांसद के बेटे को 1600 करोड़ रुपये के एम्बुलेंस ठेका दिये जाने के मामलें पर पटना हाईकोर्ट में 24 जून,2023 को सुनवाई की जाएगी

कथित रूप से जदयू सांसद के बेटे को 1600 करोड़ रुपये के एम्बुलेंस ठेका दिये जाने के मामलें पर पटना हाईकोर्ट में 24 जून,2023 को सुनवाई की जाएगी। जस्टिस पी वी बजनथ्री की खंडपीठ में इस बीभीजे इंडिया लिमिटेड व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।

इस याचिका में ये आरोप लगाया गया है कि जदयू के जहानाबाद से सांसद चंदेश्वर प्रसाद चन्द्रवंशी के बेटे बेटी की कंपनी पशुपतिनाथ डिस्ट्रीब्यूटर्स को इस एम्बुलेंस का ठेका मिला हैं।

बाक़ी बीडर्स ने इस मामलें पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई याचिकायें दायर की है।इन्हीं याचिकायों पर कोर्ट सुनवाई करेगी।

बीडिंग में सरकार के द्वारा सांसद के बेटे की कंपनी को लाभ पहुँचाने का आरोप है।बीडिंग में नियमों को बदलकर पशुपति डिस्ट्रिब्यूटर्स को लाभ पहुँचाया गया हैं।

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इन पर आरोप हैं कि बीडिंग में रेट को कम करके पशुपति कंपनी को टेंडर दिया गया है।इन याचिकायों में कहा गया कि इन्हें लाभ पहुँचाने के लिए नियमों की उपेक्षा की गयी है।

याचिकाओं में ये भी कहा गया कि यह कंपनी इस बीडिंग के लिए योग्य नहीं हैं । सांसद के परिवार के चार लोग कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं।

24 जून,2023 को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई की जाएगी।

Bihar Cabinet Expansion: नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार आज; JDU विधायक रत्नेश सदा को आज शपथ दिलाई जायेगी

पटना । पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बड़े बेटे और हम पार्टी के अध्यक्ष संतोष सुमन ने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है जिसके बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है । सोनबरसा से जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक और दलित नेता रत्नेश सदा को सुमन के स्थान पर मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है।

अगस्त 2022 में जद (यू) द्वारा महागठबंधन (महागठबंधन) सरकार बनाने के लिए भाजपा के साथ अपना नाता तोड़ लेने के बाद लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में, संतोष सुमन के इस्तीफे के बाद बिहार मंत्रिमंडल में 30 मंत्री हैं। विधानसभा की कुल संख्या के आधार पर अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं।

शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे राजभवन में होगा। सदा के अलावा कांग्रेस और राजद के कुछ नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

मंत्रिमंडल में राजद के 16, जदयू के 11 और कांग्रेस के दो मंत्री हैं। एक निर्दलीय सदस्य भी है।

रत्नेश सदा, जो सोनबरसा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, को SC और ST कल्याण विभाग दिए जाने की संभावना है, जो पहले संतोष सुमन के पास था। सदा मुसहर समुदाय से हैं। जद (यू) से तीन बार के विधायक कबीरपंथी से जुड़े हैं।

रत्नेश सदा ने मांझी पर 1980 के दशक से कई सरकारों में मंत्री रहने के अलावा CM के रूप में एक संक्षिप्त कार्यकाल के बावजूद दलितों, विशेष रूप से मुसहरों के लिए जुबानी सेवा करने का भी आरोप लगाया है।

यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नीतीश कुमार आबादी वाले उत्तर बिहार से ताल्लुक रखने वाले सदा को ऊपर उठाकर मांझी को होने वाले नुकसान को बेअसर करना चाह रहे हैं, खासकर अगर वह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में लौट आए।

बिहार में प्रचंड गर्मी और लू से हालत खराब, आने वाले 48 घंटे में गर्मी से कोई राहत के संकेत नहीं

राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में प्रचंड गर्मी और लू के बढ़ने के साथ कोई राहत के संकेत नहीं हैं। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को पटना, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण, भोजपुर, शेखपुरा, बेगूसराय, खगड़िया, नालंदा और बांका में भीषण लू चलने की आशंका है।

वहीं, भागलपुर, सुपौल, जमुई, कटिहार, नवादा, सीवान, औरंगाबाद और जमुई में भी हीटवेव के हालात बन सकते हैं। मौसम पूर्वानुमान में बताया गया है कि अगले तीन से चार दिनों के दौरान प्रदेश के दक्षिणी भागों में लू का असर बना रहेगा। वहीं, उत्तरी भागों में वर्षा की आंशिक गतिविधियां बने होने के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

मानसून के पहले बिहार में जानलेवा गर्मी जारी है। मौसम विभाग की माने तो आने वाले 48 घंटे में गर्मी से कोई राहत के संकेत नहीं हैं।

hot weather

पूरे बिहार में प्रचंड गर्मी और लू के बढ़ने के साथ प्रदेश में बिजली की खपत का रिकॉर्ड भी ध्वस्त हो गया है। इस गर्मी में बिजली कंपनी ने 6 हजार मेगावाट से अधिक बिजली देना शुरू किया जो बढ़ता हुआ 6900 मेगावाट तक आ पहुंचा है।

मौसम विभाग का कहना है कि जब तक मानसून बिहार को पूरी तरह से प्रभावित नहीं कर लेता है तब तक ऐसे ही मौसम की मार झेलना होगा।

बिहार में निर्माणाधीन पुल दूसरी बार टूटा; BJP ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव का मांगा इस्तीफा

भागलपुर । पूर्वी भारतीय राज्य बिहार में गंगा नदी पर बनाया जा रहा चार लेन का कंक्रीट का पुल सिर्फ एक साल में दूसरी बार भरभराकर कर गंगा नदी में गिर गया। जिसने एक बार फिर इसके निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा कर दिया है।

निर्माणाधीन पुल के गिरने के बाद बिहार की राजनीति गर्म हो गई है । BJP नेता और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव का इस्तीफा मांगा है । इसके बाद तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पर सफाई दी और बताया कि आखिर ये पुल क्यों गिरा है. उन्होंने इसके डिजाइन में ही खामी बताई है।

सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने इस घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं ।

गंगा नदी के ऊपर बन रहा पुल रविवार को गिर गया। नदी के तट पर लोगों की भीड़ को पुल को फिल्माते और नीचे गिरते हुए चिल्लाते हुए देखा जा सकता है। रविवार की शाम करीब 6 बजे अचानक पुल गिर गया। जिस वक्त हादसा हुआ, उस वक्त काम बंद हो चुका था। इस वजह से पुल पर कोई मजदूर नहीं था। जैसे ही पुल ताश के पत्तों की तरह गंगा में गिरा, नदी के पानी की कई फीट ऊंची लहरें उठीं। सड़क किनारे बैठे लोग सहम गए। पुल गिरने की घटना का स्थानीय लोगों ने वीडियो बना लिया।

पटना हाईकोर्ट ने महादलित विकास मिशन योजना अंतर्गत छात्रवृत्ति घोटाले के मामलें में जेल में बंद आईएएस अधिकारी एसएम राजू को नियमित जमानत देते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने महादलित विकास मिशन योजना अंतर्गत छात्रवृत्ति घोटाले के मामलें में जेल में बंद आईएएस अधिकारी एसएम राजू को नियमित जमानत देते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया है ।
न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा ने राजू की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए ये निर्णय सुनाया।

यह मामला राज्य सरकार की महादलित विकास मिशन के योजना अंतर्गत अनुसूचित जनजाति व महादलित के छात्र व छात्राओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के घोटाले से संबंधित है। इस मामले पर निगरानी ब्यूरो के डीएसपी ने 23 अक्टूबर, 2017 को एक मामला दर्ज किया था, जो निगरानी थाना कांड संख्या एकाशी 2017 के रूप में आईपीसी की सुसंगत धाराओं एवं भ्रष्टाचार निरोध कानून की धारा 13 के अंतर्गत दर्ज हुआ था।

इस मामले में राजू को इसीलिए आरोपी बनाया गया, क्योंकि वह महादलित विकास मिशन के सचिव के रूप में पदस्थापित थे।

याचिकाकर्ता के तरफ से वरीय अधिवक्ता पुष्कर नारायण शाही ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में राजू बिल्कुल बेकसूर है।

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उनके खिलाफ प्राथमिकी में कोई सीधा आरोप दर्ज नहीं है और ना ही कोई ऐसा आरोप लगाया गया है। जिससे यह साबित हो कि इस कांड के मुख्य अभियुक्त कंपनी के साथ उनका कोई लेन-देन हुआ था।

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया था कि इस कांड के एक अन्य रिटायर्ड आईएएस कड़ा परशुराम रमैया को 2019 में ही निचली अदालत से जमानत मिल गई थी। उनसे कहीं बेहतर केस राजू का है ,जो पिछले साढ़े 4 महीने से जेल में बंद है ।

वही निगरानी ब्यूरो की तरफ से विशेष लोक अभियोजक अरविंद कुमार ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि केस डायरी की कई जगहों पर स्पष्ट सबूत व साक्ष्य मिलते हैं, जिससे राजू का इस कांड में संलिप्तता उजागर होता है।

कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 5 मई,2023 को फैसला सुरक्षित कर लिया था जिसे आज सुनाया गया।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर याचिकाओं को स्वीकृत करते हुए वहां के नागरिकों को बड़ी राहत दी

पटना हाईकोर्ट ने पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर याचिकाओं को स्वीकृत करते हुए वहां के नागरिकों को बड़ी राहत दी है।कोर्ट ने अपने निर्णय में ये स्पष्ट किया कि जो भी निर्माण 2018 के पहले बने है,उस पर दीघा लैण्ड सेटलमेंट एक्ट के तहत किया जाना है।कोर्ट ने प्रशासन द्वारा नेपालीनगर क्षेत्र में मकान तोड़े जाने को अवैध ठहराया। साथ ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को रद्द कर दिया।

जस्टिस संदीप कुमार ने 17 नवंबर,202 सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने इस मामलें पर निर्णय देते हुए कहा कि जिन लोगों के मकानों को गैर कानूनी तरीके से तोड़ा गया है,उन्हें पांच पाँच लाख रुपए मुअबजा देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।कोर्ट ने साफ किया है कि यदि क्षतिपूर्ति की राशि अगर अधिक हो,तो उस पर विचार कर देना होगा।

कोर्ट ने ये भी कहा कि जिनका मकान 2018 के बाद बना है,उन सभी मामलों में दीघा लैण्ड सेटलमेंट एक्ट के तहत विचार करने का निर्देश दिया गया था।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने बिहार राज्य आवास बोर्ड को बताने को कहा था कि अब तक पटना में उसने कितनी कॉलोनियों का निर्माण और विकास किया हैं।

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साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को एमिकस क्यूरी संतोष सिंह द्वारा प्रस्तुत दलीलों का अगली सुनवाई में जवाब देने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार राज्य आवास बोर्ड के दोषी अधिकारियों और जिम्मेवार पुलिस वाले के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई की कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा था।

कोर्ट ने कहा था कि ये बहुत आश्चर्य की बात है कि इनके रहते इस क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन कर मकान बना लिए गए।

इस मामलें पर कोर्ट द्वारा सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय 17 नवंबर,2022 को सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाया गया।

बिहार में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग; DSP स्तर के अफसरों का ट्रांसफर, देखिए पूरी लिस्ट

पटना । बिहार में बढ़ती अपराध की घटनाओं को लेकर सरकार की खूब किरकिरी हो रही है, विपक्षी दल सरकार पर हमलावर बने हुए हैं और लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं । विधि व्यवस्था को लेकर हो रही फजीहत के बाद सरकार ने राज्य के लॉ एंड ऑर्डर को सुधारने के लिए DSP स्तर के 55 अधिकारियों का तबादला कर दिया है।

सरकार की तरफ से तबादले का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। गृह विभाग की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, पटना के मद्यनिषेध डीएसपी मनीष आनंद को जमालपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है। पटना में ही तैनात मद्यनिषेध के डीएसपी नवीन कुमार को समस्तीपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है।

जमुई में तैनात डीएसपी उमेश कुमार को मुजफ्फरपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है। पटना के मद्यनिषेध डीएसपी मनीष आनंद को जमालपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है, वहीं पटनामें ही तैनात मद्यनिषेध के डीएसपी नवीन कुमार को समस्तीपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है ।

बिहार पुलिस मुख्यालय में पदस्थापना का इंतजार कर रहे मनोज कुमार सुधांशु कोभोजपुर के ट्रैफिक डीएसपी नियुक्त किया गया है। वहीं बगहा के वाल्मीकिनगर में तैनातधीरज कुमार को मुजफ्फरपुर का ट्रैफिक डीएसपी बनाया गया है। पटना में तैनात बसंतीटुड्डू को सारण का ट्रैफिक डीएसपी बनाया गया है।

पटना में ही आर्थिक अपराध इकाई के डीएसपी कौशल किशोर कमल को पूर्णिया का ट्रैफिक डीएसपी नियुक्त किया गया है। पटना में तैनात बसंती टुड्डू को सारण का ट्रैफिक डीएसपी बनाया गया है। पटना में विशेष सशस्त्र पुलिस बल में तैनात प्रभात रंजन को मुंगेर का ट्रैफिक डीएसपी बनाया गया है।

Police transfer

महेंद्र कुमार को बेगूसराय ट्रैफिक डीएसपी से विशेष सशस्त्र पुलिस-10 में तैनात किया गया। गौतम शरण ओमी को विशेष शाखा से विशेष सशस्त्र बल-16 में पोस्टिंग मिली है। पोस्टिंग के इंतजार में रहे रविशंकर प्रसाद को मद्य निषेध और अपराध अनुसंधान विभाग में तैनाती की गई है। डुमरांव से संजय कुमार झा को भी मद्य निषेध और अपराध अनुसंधान विभाग में ताबदला किया गया है।

अन्य जिलों के भी डीएसपी स्तर के कई अधिकारियोंका तबादला किया गया है. देखिए पुरी सूची…


पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी पूर्व RJD विधायक गुलाब यादव को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी

पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी पूर्व आरजेडी विधायक गुलाब यादव को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है । जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने गुलाब यादव की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके ख़िलाफ़ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का भी आदेश दिया है।

पूर्व विधायक पर एक महिला ने कथित रूप से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। महिला ने वर्ष 2021 में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उसे महिला आयोग का सदस्य बनाने का झांसा देकर पूर्व विधायक ने उसे अपने रूकनपुरा स्थित आवास पर बुलाया। उसके साथ दुष्कर्म कर उसका वीडियो बना लिया था।

अपनी शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि गुलाब यादव ने उसे दिल्ली एवं पुणे के विभिन्न होटल में बुला कर उसके साथ दुष्कर्म किया था।

इस मामले की अगली सुनवाई 6 सितंबर,2023 को होगी ।

UPSC Result 2022: बिहार का UPSC पर कब्जा, टॉपर बनीं पटना की इशिता किशोर; द्वितीय स्थान पर गरिमा लोहिया

UPSC सिविल सेवा परिणाम 2022: यूपीएससी परीक्षा अपने कठिन स्तर और प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए प्रसिद्ध है। UPSC ने मंगलवार को सिविल सेवा अंतिम परिणाम 2022 घोषित कर दिया गया। इशिता किशोर इस साल UPSC IAS टॉपर बनी हैं।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट- upsc.gov.in पर सिविल सेवा अंतिम परिणाम 2022 घोषित कर दिया है। इशिता किशोर इस साल UPSC IAS टॉपर बनी हैं। उम्मीदवार यूपीएससी की मेरिट लिस्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।

नियुक्ति के लिए कुल 1022 का चयन किया गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए कुल 180 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। भारतीय विदेश सेवा के लिए 38 और भारतीय पुलिस सेवा के लिए 200 का चयन किया गया है।

UPSC TOPPER 2022

473 का चयन केंद्रीय सेवा समूह ‘ए’ और 131 का चयन समूह ‘बी’ सेवाओं के लिए किया गया है। अनुशंसित 101 उम्मीदवारों की उम्मीदवारी अनंतिम है। ऐसे उम्मीदवारों के रोल नंबरों की सूची मेरिट सूची में उल्लिखित है।।

यूपीएससी आईएएस टॉपर लिस्ट 2022

RankNameRoll Number
1Ishita Kishore5809986
2Garima Lohia1506175
3Uma Harathin N1019872
4Smriti Mishra0858695
5Mayur Hazarika0906457
6Gahana Navya James2409491
7Waseem Ahmad Bhat1802522

UPSC RESULT 2022 यहां देखें टॉपर्स की लिस्ट

उम्मीदवार यूपीएससी की मेरिट लिस्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। यूपीएससी मेरिट लिस्ट 2022 की जांच के लिए सीधा लिंक-

  • यूपीएससी सीएसई फाइनल मेरिट लिस्ट 2022 कैसे चेक करें
  • आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं
  • होमपेज पर उस लिंक पर क्लिक करें जिसमें UPSC CSE मुख्य परिणाम 2022 (अंतिम) लिखा हो
  • स्क्रीन पर एक पीडीएफ फाइल खुलेगी
  • पीडीएफ फाइल में यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य अंतिम परिणाम 2022 होगा।
  • मेरिट लिस्ट चेक करें और उसे डाउनलोड करें

पटना हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव और सीतामढ़ी विशेष उत्पाद जज 2 के खिलाफ अवमानना मामला दर्ज करने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट के फैसला को नजरअंदाज कर जब्त सामान को नहीं छोड़े जाने पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव और सीतामढ़ी विशेष उत्पाद जज 2 के खिलाफ अवमानना मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन और जस्टिस मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ ने मेरठ के जीनेथ कंपनी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जब्त सामान को छोड़ने और इन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना अर्जी दर्ज करने का आदेश दिया।

आवेदक के अधिवक्ता रोहित सिंह ने कोर्ट को बताया कि अस्पतालो में इस्तेमाल होने वाले समान को मेरठ के ट्रांसपोर्टर के यहां माल बुक कराया गया।उन्होंने कोर्ट को बताया कि ट्रांसपोर्टर ने ट्रक से बुक सामान को असम भेजा।

बिहार के सीतामढ़ी के रास्ते जब ट्रक जा रहा था, तो उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने ट्रक रुकवा जांच किया।अधिकारी ने जो प्राथमिकी दर्ज की है, उसके अनुसार ट्रक जांच के दौरान दो हजार लीटर से ज्यादा विदेशी शराब जब्त किया गया।

इस दौरान ट्रक का ड्राइवर और खलासी भागने में कामयाब हो गये।उनका कहना था कि बुक समान को छोड़ने के लिए हाई कोर्ट में एक अर्जी दायर की गई थी।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले समान को उत्पाद कानून के तहत जब्त नहीं किया जा सकता।

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कोर्ट ने सीतामढ़ी के विशेष उत्पाद जज को जब्त सामान को छोड़ने के बारे में कानून के तहत आदेश जारी करे।कोर्ट के आदेश के आलोक में आवेदक ने अर्जी दायर की।

लेकिन विशेष उत्पाद जज ने उसे खारिज कर दिया।इसके बाद आवेदक ने उत्पाद आयुक्त के समक्ष अपील दायर किया।आयुक्त ने भी अपील को खारिज कर दिया।

इस आदेश के वैधता को अपर मुख्य सचिव के समक्ष रिवीजन दायर कर चुनौती दी।अपर मुख्य सचिव ने हाई कोर्ट के पूर्व के आदेश को देख उसे नहीं मानते हुये जब्त सामान को छोड़ने से इंकार करते हुए उसे नीलाम कार्रवाई करने का आदेश दिया।

अपर मुख्य सचिव के आदेश सहित अन्य अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई कर जब्त सामान को छोड़ने का निर्देश दिया।साथ ही हाईकोर्ट के आदेश उल्लंघन करने को लेकर अपर मुख्य सचिव और सीतामढ़ी के विशेष उत्पाद जज दो के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज करने का आदेश हाई कोर्ट प्रशासन को दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय से हत्या के प्रयास में 10 साल की सजा पाए अभियुक्त को रिहा कर दिया

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय से हत्या के प्रयास में दस साल की सजा पाए अभियुक्त को रिहा कर दिया ।जस्टिस आलोक कुमार पांडेय ने चंदन कुमार मंडल की अपील याचिका पर स्वीकृति देते हुए उसे रिहा कर दिया ।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 06.09.2016 को शाम करीब 7.30 बजे जब वह शौच के लिए जा रही थी,तब वहां अपीलकर्ता और अन्य लोगों ने उसे पकड़ लिया और उसको मारने के इरादे से चाकू से वार किया। जिसके परिणामस्वरूप उसकी गर्दन और पेट के दाहिने हिस्से में चोटें आईं और वह जमीन पर गिर गई।

चीख सुनकर पीड़िता का पति और अन्य ग्रामीण जब आये, तो अपीलकर्ता और अन्य लोगो मौके से भाग गए।

याचिकाकर्ता पर आईपीसी की धारा 307, 324 और 341 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी । जिस पर निचली अदालत ने याचिकाकर्ता को दंडनीय अपराधों के लिए दोषी ठहराते हुए धारा 307 के तहत पांच हजार रुपये के जुर्माने के साथ दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।साथ ही आईपीसी की धारा 324 के तहत अपराध के लिए एक हजार के जुर्माने के साथ तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनोहर प्रसाद सिंह ने कोर्ट में दलील दी थी कि प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी की गई । उन्होंने कोर्ट को बताया की घटना स्थल के विवरण में परस्पर विरोधाभास पाया गया है ।

एपीपी एएमपी मेहता ने याचिका का कड़ा विरोध किया।तथ्यों का अवलोकन कर अदालत ने याचिकाकर्ता की 6 साल की हिरासत के मद्देनजर उसे रिहा कर दिया और उसकी शेष सजा को खत्म कर दिया।

पटना हाइकोर्ट ने नवनीत कुमार द्वारा उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में सौ करोड़ रुपए के घोटाले के मामलें में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने नवनीत कुमार द्वारा उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक में सौ करोड़ रुपए के घोटाले के मामलें में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस पी बी बजनथ्री व जस्टिस ए अभिषेक रेड्डी के डिवीजन बेंच द्वारा की गई।

याचिकाकर्ता के एडवोकेट श्री शिव प्रताप ने बताया कि सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा भारत सरकार और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को 5 सप्ताह में अपना जवाब दायर करने का निर्देश दिया I मामले की अगली सुनवाई 26 जून,2023 को होगी ।

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गौरतलब है कि इस मामले में पिछले वर्ष मार्च में मुजफ्फरपुर के कोर्ट के आदेश पर काजी मुहम्मदपुर थाने में सौ करोड़ रुपए के घोटाले की प्राथमिकी दर्ज हुई थी, लेकिन इसमें कोई भी प्रगति नहीं हुई ।

याचिकाकर्ता के द्वारा सितम्बर, 2022 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी,जिसमें पूरे मामले की जांच सीबीआई और इ डी से कराने की मांग की गई थी ।

पटना हाईकोर्ट ने पटना मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमणकारियों द्वारा किये गए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने पटना मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमणकारियों द्वारा किये गए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन व जस्टिस मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष राज किशोर श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

अतिक्रमणकारी की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने इस मामले में अधिकारी के समक्ष अपनी बात को रखने की बात कही। कोर्ट का कहना था कि अभी सुनवाई खंडपीठ कर रही है।

इसके बाद खंडपीठ ने अतिक्रमणकारी के अधिवक्ता की दलील को सुनने के बाद उनकी याचिका को खारिज कर दिया।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह ने हाई कोर्ट द्वारा विगत 5 मई, 2023 को इस मामले में पारित किए गए आदेश का हवाला दिया गया। इसमें दानापुर के अंचलाधिकारी ने अन्य बातों के अलावा चार सप्ताह में कम से कम 70 फीसदी अतिक्रमण को हटाने की बात कही थी।

इस बीच कोर्ट ने राज्य सरकार को विकल्प तलाशने को भी कहा है।इस नहर बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति को दानापुर के अंचलाधिकारी ने भी स्वीकार किया है।

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सोन नहर प्रमंडल, खगौल, पटना द्वारा अतिक्रमण वाद दायर करने के लिए दानापुर के अंचलाधिकारी को लिखा गया था, लेकिन अभी तक इसे नहीं हटाया गया।

सोन नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा दानापुर के अंचलाधिकारी को अतिक्रमणकारियों की सूची भी अंचलाधिकारी को दी गई है।

कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्र में विभागीय मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर किये गए अतिक्रमण को अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध अतिक्रमण वाद दायर कर ठोस अग्रेतर कार्रवाई करने हेतु अनुरोध किया था, ताकि विभागीय भूमि अतिक्रमणकारियों से मुक्त हो सके।

इस मामले में आगे की सुनवाई अब अगली सुनवाई 31जुलाई,2023 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानियो के पौत्र पौत्रियों को हाई कोर्ट नियुक्तियों में आरक्षण देने से साफ इंकार करते हुए दायर याचिका को रद्द को कर दिया

पटना हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानियो के पौत्र पौत्रियों को हाई कोर्ट नियुक्तियों में आरक्षण देने से साफ इंकार करते हुए दायर याचिका को रद्द को कर दिया।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने विकाश कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

कोर्ट को बताया गया कि हाई कोर्ट ने 550 सहायको की बहाली के लिए गत 3 फरवरी,2023को एक विज्ञापन जारी किया था।इस विज्ञापन में सभी को आरक्षण दिया गया, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियो के पोता पोती को दिये जाने वाले दो प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया।

उनका कहना था कि राज्य सरकार ने 10 फरवरी 2016 को पत्रांक 2526 जारी कर स्वतंत्रता सेनानी के पौत्र पौत्रिओं को दो प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था।जिसका लाभ हाई कोर्ट अपने यहां के बहाली में नहीं दे रहा है।

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जबकि हाई कोर्ट के नियमावली के नियम 10 के तहत आरक्षण देने का प्रावधान है।वही हाई कोर्ट की ओर से इस याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया गया कि इस बहाली में एससी /एसटी सहित ईबीसी /बीसी /ईडब्ल्यूएस को निर्धारित प्रतिशत के अनुसार आरक्षण दिया जा रहा है।

उनका कहना था कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के आदेश के बाद नियमावली के नियम 10 के तहत आरक्षण दिया जाता हैं।कोर्ट ने दोनों पक्षों का दलील सुनने के बाद अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में जातीय जनगणना से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई अगले बेंच के गठन होने तक टली

सुप्रीम कोर्ट में जातीय जनगणना से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई अगले बेंच के गठन होने तक टली। सुप्रीम कोर्ट मे जज जस्टिस संजय करोल ने इस मामलें पर सुनवाई से अपने को अलग किया।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय क़रोल ने पटना हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में इस मामलें पर सुनवाई की थी।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी,जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करने सम्बन्धी याचिका को रद्द कर दिया था।

साथ ही राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट द्वारा 4 मई, 2023को पारित अंतरिम आदेश को भी चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने राज्य सरकार के 3 जुलाई,2023 के पूर्व सुनवाई करने की याचिका को कोर्ट ने 9मई,2023 को सुनवाई करने के बाद खारिज कर दिया था।

इस आदेश विरुद्ध को राज्य सरकार ने एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर की है।पटना हाइकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही रखा। 9 मई, 2023 को सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही निश्चित किया था।

गौरतलब कि पहले 4मई,2023 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए जातीय जनगणना पर रोक लगा दी थी।चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार इस दौरान इक्कठी की गई आंकड़ों को शेयर व उपयोग फिलहाल नहीं करेगी।

Supreme-court-on-Bihar-caste-based-survey
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पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका में ये कहा गया था कि क्योंकि पटना हाइकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार के पास जातीय जनगणना कराने का वैधानिक अधिकार नहीं है,इसीलिए इन याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 को सुनवाई करने का कोई कारण नहीं है।

साथ ही कार्यपालिका के पास जातीय जनगणना कराने का क्षेत्राधिकार नहीं है।इसे कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट कर दिया था।

कोर्ट ने ये भी कहा था कि जातीय जनगणना से जनता की निजता का उल्लंघन होता है।इस सम्बन्ध में विधायिका द्वारा कोई कानून भी नहीं बनाया गया है।

कोर्ट ने अपने 4 मई, 2023 के अंतरिम आदेश में जो निर्णय दिया है,उसमें सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय दिया गया।कोर्ट ने इन याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम रूप से निर्णय दे दिया है।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य
लोगों के लिए कल्याणकारी और विकास की योजना तैयार है।इसका किसी अन्य कार्य के लिए कोई उद्देश्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की इस याचिका पर सुनवाई के लिए जस्टिस बी आर गवाई और जस्टिस संजय करोल के बेंच का गठन किया गया था।लेकिन चूंकि जस्टिस संजय करोल ने इस मामलें की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।

अतः इस मामलें की सुनवाई के लिए फिर बेंच गठित होने के बाद सुनवाई की जाएगी।

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के पशु चिकित्सालयों में ड्रग व कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत फार्मासिस्टों के पद सृजित और नियुक्ति नहीं होने के मामलें पर राज्य सरकार से जवाबतलब किया

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के पशु चिकित्सालयों में ड्रग व कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत फार्मासिस्टों के पद सृजित और नियुक्ति नहीं होने के मामलें पर राज्य सरकार से जवाबतलब किया।चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने विकास चंद्र ऊर्फ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस एक्ट की तहत फार्मासिस्टों पद सृजित व नियुक्ति की जानी चाहिए, ताकि पशु अस्पतालों में दवाओं की देखभाल और वितरण इन फार्मासिस्टों के जरिये सुनिश्चित किया जा सके।

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याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य वेटेरिनरी डायरेक्टरेट के लोक सूचना अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार फिलहाल राज्य के वर्ग – एक के पशु चिकित्सालयों में फार्मासिस्ट के पदों की मंजूरी नहीं दी गई है। इस मामले पर अगली सुनवाई 14 जुलाई,2023 को की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट में राज्य में पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई 10 जुलाई,2023 को की जाएगी

पटना हाइकोर्ट में राज्य में पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई 10 जुलाई,2023 को की जाएगी।चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई की।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को पुलिस स्टेशन भवनों के निर्माण व सुधार के लिए उपलब्ध फंड के सम्बन्ध में पंद्रह दिनों में विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को मॉडल पुलिस थाने के निर्माण पर विचार करने के लिए राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से बिहार व अन्य राज्यों के मॉडल पुलिस थाने के सम्बन्ध में जानकारी दी गई थी।

कोर्ट ने जानना चाहा था कि पुलिस स्टेशनों के निर्माण व सुधार के लिए उपलब्ध फंड के सम्बन्ध में कितने दिनों में जानकारी दी जा सकती है।राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया था कि पंद्रह दिनों में इस सम्बन्ध ब्यौरा प्रस्तुत कर दिया जाएगा।

कोर्ट द्वारा सहायता करने के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी सोनी श्रीवास्तव ने बताया कि पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फंड की उपलब्धता के सम्बन्ध में ब्यौरा देने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक ये ब्यौरा कोर्ट में प्रस्तुत नहीं हुआ।

कोर्ट ने बिहार राज्य पुलिस भवन निर्माण निगम में काफी पद के रिक्त होने को काफी गम्भीरता से लिया था।उन्होंने राज्य सरकार को इन रिक्त पदों को शीघ्र भरने को कहा,ताकि पुलिस थाना भवनों का निर्माण कार्य तेजी से हो सके।

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एमिकस क्यूरी सोनी श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया था कि राज्य में 1263 थाना है,जिनमें 471 पुलिस स्टेशन के अपने भवन नहीं है।इन्हें किराये के भवन में काम करना पड़ रहा है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य में पुलिस स्टेशन भवनों का निर्माण और पुनर्निर्माण का कार्य समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

जब तक दूसरे भवन में चल रहे पुलिस स्टेशन के लिए सरकारी भवन नहीं बन जाते,तब तक पुलिस अधिकारी कमल किशोर सिंह कॉर्डिनेटर के रूप में कॉर्डिनेट करेंगे।

इससे पहले भी पुलिस स्टेशन की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का मामला कोर्ट में उठाया गया था।राज्य सरकार ने इन्हें सुधार लाने का वादा किया था,लेकिन ठोस परिणाम नहीं दिया था।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता सोनी श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जो थाने सरकारी भवन में चल रहे हैं, उनकी भी हालत अच्छी नहीं है।उनमें भी बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है।

उन्होंने बताया कि पुलिस स्टेशन में बिजली,पेय जल,शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं है। लगभग आठ सौ थाने ऐसे है, सरकारी भवनों में चल रहे है,लेकिन उनकी भी स्थिति अच्छी नहीं है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जो थाना सरकारी भवन में है,उनमें भी निर्माण और मरम्मती की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि कई पुलिस स्टेशन के भवन की स्थिति खराब है।

पुलिसकर्मियों को काफी कठिन परिस्थितियों में और कई सुविधाओं के अभाव में कार्य करना पड़ता है।इस मामलें पर अगली सुनवाई 10 जुलाई,2023 को होगी।

पटना हाई कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई की

पटना हाई कोर्ट ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में कई व्यक्तियों के आंख की रौशनी खो जाने के मामले पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उन पीडितों के नाम देने का निर्देश दिया है,जिन्हें अब तक मुआबजा नहीं मिला है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिन्द के आपरेशन में 32 व्यक्तियों ने आँखों की रौशनी खो दिया था।इनमें से 19 पीडितों को राज्य सरकार द्वारा मुआबजा मिला है।लेकिन बाकी 13 पीडितों को अब तक भी मुआबजा नहीं मिला सका है।

कोर्ट ने इसे काफी गम्भीरता से लेते अधिवक्ता विजय कुमार सिन्हा को इन पीडितों के नाम कोर्ट के समक्ष देने का निर्देश दिया है।इसके बाद कोर्ट इन्हें मुआबजा देने का आदेश राज्य सरकार को देगा।मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है।

कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में निदेशक प्रमुख,स्वास्थ्य सेवा और सिविल सर्जन, मुजफ्फरपुर द्वारा हलफनामा नहीं दायर करने को गम्भीरता से लिया थ।कोर्ट ने पिछली सुनवाईयों में मुजफ्फरपुर के एस एस पी को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

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कोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में कहा था कि इस मामलें में गठित डॉक्टरों की कमिटी को चार सप्ताह मे अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

कोर्ट को बताया गया था कि आँखों की रोशनी गवांने वाले पीडितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं।साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया था,लेकिन अब तक दर्ज प्राथमिकी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपनी आँखें की रोशनी खोनी पड़ी।

याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी ऑंखें गंवानी पड़ी।

इस मामले पर अगली सुनवाई 28 जुलाई,2023 को की जाएगी।

बिहार सरकार के मंत्री शमीम अहमद के विरुद्घ पटना हाई कोर्ट में श्याम बिहारी प्रसाद द्वारा दायर चुनाव अर्जी पर सुनवाई जारी रहेगी

राज्य सरकार के मंत्री शमीम अहमद के विरुद्घ पटना हाई कोर्ट में श्याम बिहारी प्रसाद द्वारा दायर चुनाव अर्जी पर सुनवाई जारी रहेगी। जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय श्याम बिहारी प्रसाद की चुनाव याचिका पर सुनवाई कर रहे है।

हाई कोर्ट ने शमीम अहमद द्वारा दायर अर्जी को खारिज कर दिया। इस याचिका को रद्द करने के लिए अंतरिम याचिका दायर किया गया था।अंतरिम याचिका में कहा गया था कि इस याचिका में याचिका दायर करने को लेकर कारण नहीं बताया गया।

चुनाव याचिका के जरिये चुनाव को मोहम्मद शमीम अहमद के निर्वाचन को रद्द करने का कोर्ट से माँग किया गया है।आवेदक की ओर से वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने कोर्ट को बताया कि नामांकन पत्र दाखिल करने के वक्त मंत्री शमीम अहमद के विरुद्ध दो आपराधिक मुकदमें लंबित थे, जिसकी जानकारी उन्होंने अपनी राजनैतिक दल यानी आरजेडी को दी है।

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इसमें रकसौल थाना कांड से जुड़े हुए मुकदमें में फाइनल फॉर्म दाखिल किया गया है, जिसे कोर्ट ने भी स्वीकार कर लिया। इस मामले में मुद्दों को तय करने पर सुनवाई आगामी 18 मई,2023 को की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट में मोदी सरनेम मामलें पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई 4 जुलाई ,2023 तक टली

पटना हाइकोर्ट में मोदी सरनेम मामलें पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई 4 जुलाई ,2023 तक टली। जस्टिस संदीप कुमार ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि निचली कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर 15 मई, 2023 तक का रोक लगाते हुए राहुल गांधी को राहत दे दी थी।

गौरतलब है कि पटना की निचली अदालत ने उन्हें 12 अप्रैल,2023 को मोदी सरनेम मामलें में की गई टिप्पणी पर कोर्ट में उपस्थित हो कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा था।निचली अदालत के उस आदेश के विरुद्ध राहुल गांधी ने आदेश को रद्द करने के लिए पटना हाइकोर्ट में एक याचिका दायर की थी।

कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी थी।इसके अनुसार उन्हें पटना की निचली अदालत में फिलहाल उपस्थित नहीं होना पड़ेगा।

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गौरतलब है कि 2019 उन्होंने कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मोदी सरनेम को ले कर टिप्पणी की थी।इसी मामलें में बिहार के वरिष्ठ बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पटना के सिविल कोर्ट में परिवाद पत्र दायर किया था।

इस मामलें में सूरत की कोर्ट ने उन्हें दो वर्षों की सजा सुनाई थी,जिस कारण उन्हें अपनी संसद सदस्यता खोनी पड़ी थी।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 4 जुलाई, 2023 की जाएगी।

कर्नाटक के परिणाम का बिहार पर कोई असर नहीं होगा: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा के चुनाव परिणाम का बिहार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

राजद-जदयू के लोग भी नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने के लिए वोट देंगे

श्री मोदी ने कहा कि देश की जागरूक जनता विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में अलग-अलग तरह से मतदान करती है, इसलिए 2018 में राजस्थान-छत्तीसगढ में कांग्रेस को वोट देने वालों ने भी 2019 के संसदीय चुनाव में भाजपा का समर्थन किया था।

उन्होंने कहा कि 2024 में राजद-जदयू के मतदाता भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए बिहार में एकजुच होकर वोट देंगे।

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श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार का जनाधार खिसक चुका है। पिछले साल विधानसभा के तीन उपचुनावों ने जदयू को उसकी हैसियत बता दी।

उन्होंने कहा कि सात दल मिल कर भी कुढनी और गोपालगंज में भाजपा को नहीं हरा पाए थे। इनमें से जो एक दल कर्नाटक में सरकार बनाने जा रहा है, उसकी बिहार में कोई बिसात नहीं।

पटना हाईकोर्ट ने अंतिम मोहलत देते हुए कहा कि यदि 18 मई,2023 तक हलफनामा दायर नहीं किया गया, तो उन्हें स्वयं कोर्ट में उपस्थित होना होगा

पटना हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद जवाबी हलफ़नामा दायर नहीं करने के मामले को काफी गंभीरता से लिया।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए परिवहन विभाग के सचिव को अंतिम मोहलत देते हुए कहा कि यदि 18 मई,2023 तक हलफनामा दायर नहीं किया गया, तो उन्हें स्वयं कोर्ट में उपस्थित होना होगा ।

कोर्ट ने सुनीता देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया।याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के उस अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसके अंतर्गत राज्य के परिवहन विभाग ने मोटर वाहन अधिनियम-1988 के प्रावधान के आलोक में सार्वजनिक सुरक्षा और सुविधा हेतु 15 वर्ष से अधिक पुराने सभी कॉमर्शियल वाहनों की आवाजाही पर पटना नगर निगम, दानपुर, खगौल ऐवं फुलवारी नगर परिषद में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी ।

कोर्ट ने 20 सितंबर 2022 को अपने आदेश से इस मामले में जवाबी हलफनामा परिवहन सचिव के मांगा था।

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वरीय अधिवक्ता सियाराम शाही ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट ने पिछले आदेश के अनुपालन में परिवहन सचिव द्वारा अभी तक जवाबी हलफनामा दायर नहीं किया है ।

कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप के अनुरोध पर अंतिम मोहलत देते हुए परिवहन सचिव को जवाबी हलफ़नामा दायर करने का निर्देश दिया।साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि अगली सुनवाई तक आदेश का अनुपालन नहीं किया गया,तो परिवहन सचिव को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करना होगा।

इस मामले पर अगली सुनवाई 18 मई,2023 को होगी ।

पटना हाइकोर्ट ने चंदन कुमार यादव द्वारा औषधि निरीक्षक के पद पर नियुक्ति हेतु BPSC द्वारा जारी विज्ञापन मे अनुभव संबंधी प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने चंदन कुमार यादव द्वारा औषधि निरीक्षक के पद पर नियुक्ति हेतु बी पी एस सी द्वारा जारी विज्ञापन मे अनुभव संबंधी प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने इस याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि विज्ञापन में अनुभव से जुडा प्रावधान अनिवार्य योग्यता नही है। इसके लिए सरकार द्वारा वर्ष 2014 मे नियमावली बनाई गई थी,जिसमे औषधि एवं प्रसाधन नियमावली 1945 के नियम 49 मे प्रावधानित शैक्षणिक अर्हता को लागू करने की बात कही गई थी, न कि अनुभव को।

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वही दूसरी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फुल बेंच ने कुलदीप सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में यह तय किया है कि औषधि एवं प्रसाधन नियमावली 1945 की पारा 49 के अनुसार ये अनुभव औषधि निरीक्षक के पद हेतु अनिवार्य योग्यता नही है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार किए जाने का निर्देश दिया गया। परीक्षा 20 जून,2023 से होनी है।कोर्ट ने बी पी एस सी को जवाब देने का निर्देश दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 19 जून,2023 को होगी।

पटना हाइकोर्ट में बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई 23 जून,2023 को होगी

पटना हाइकोर्ट में बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई 23 जून,2023 को होगी। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

राज्य सरकार ने रूल्स बनाने के कोर्ट से समय की याचना की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 23 जून,2023 की तिथि सुनवाई के लिए निर्धारित की।

पूर्व में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को अबतक की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने के लिए दिसंबर,2022 तक का मोहलत दिया था।

याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया था कि कोर्ट ने जो भी आदेश दिया,उस पर राज्य सरकार के द्वारा कोई प्रभावी और ठोस कार्रवाई अब तक नहीं किया गया है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को भी पूरी जानकारी देने को कहा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था।

साथ ही कोर्ट ने इसमें सुधारने के उपाय पर सलाह देने को कहा था।याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने बताया था कि नेशनल मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम ही के अंतर्गत राज्य के 38 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम चल रहा हैं।लेकिन इसमें स्टाफ की संख्या नाकाफी ही है। हर जिले में सात सात स्टाफ होने चाहिए, जबकि इनकी संख्या नाकाफी है।

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पूर्व की सुनवाई में उन्होंने बताया था कि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह मेन्टल हेल्थ केयर एक्ट के तहत कानून बनाए।साथ ही इसके लिए मूलभूत सुविधाएं और फंड उपलब्ध कराए।लेकिन अबतक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

कोर्ट को ये भी बताया गया था कि सेन्टर ऑफ एक्सलेंस के तहत हर राज्य में मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कॉलेज है।लेकिन बिहार ही एक ऐसा राज्य हैं,जहां मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कोई कालेज नहीं है।जबकि प्रावधानों के तहत राज्य सरकार का ये दायित्व हैं।

पिछली सुनवाईयों में कोर्ट को बताया गया था कि केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड में कमी आयी है,क्योंकि फंड का राज्य द्वारा पूरा उपयोग नहीं हो रहा था।पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं।उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 23 जून,2023 को होगी।

पटना हाइकोर्ट ने बिहार में बगैर निबंधन कराए कोचिंग संस्थान खोलने, मनमाने ढंग से छात्रों से फीस बसूलने और बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में बगैर निबंधन कराए कोचिंग संस्थान खोलने,मनमाने ढंग से छात्रों से फीस बसूलने और बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। वेटरन फोरम की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।इस मामलें पर अगली सुनवाई 4 जुलाई,2023 को होगी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने बिहार कोचिंग इंस्टिट्यूट(कन्ट्रोल एंड रेगुलेशन)एक्ट,2010 के section 9 के अंतर्गत नियम नहीं बने है।नियमों के बिना ही मनमाने तरीके से कुकुरमुत्ते की तरह पटना समेत राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कोचिंग इंस्टिट्यूट खुल गए है।

कोर्ट ने इस तरह के जनहित याचिका की सराहना करते हुए आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि एक्ट 2010 में बनने के वाबजूद अबतक राज्य सरकार ने इस मामलें नियम क्यो नहीं बनायें।

उन्होंने कोर्ट को बताया बिना निबंधन के इस तरह के कोचिंग इंस्टिट्यूट खुल गए हैं।इनमें तो दावे बड़े बड़े किये जाते है,लेकिन इंस्टिट्यूट्स में न तो स्तरीय अध्यापन होता है और न ही योग्य शिक्षक होते है।

इन कोचिंग इंस्टिट्यूट में पढ़ाई का स्तर भी सही नहीं है।कोचिंग के नाम पर ये कोचिंग इंस्टिट्यूट अभिभावकओ व छात्रों से मनमाना फीस बसूलते है।

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अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि इन कोचिंग इंस्टिट्यूट में न तो कोई पाठ्यक्रम होता है और न ही ये पाठ्यक्रम पूरा करने की जिम्मेदारी लेते है।इन्होने कोर्ट को बताया कि अधिकांश कोचिंग इंस्टिट्यूट एक या दो रूम के कमरे में संचालित किये जाते है।छात्र व छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती।

उन्होंने बताया कि इन कोचिंग इंस्टिट्यूट में न तो शुद्ध पेय जल की व्यवस्था है और न शौचालयों की।विशेषकर छात्राओं के लिए इन सुविधाओं का अभाव होता है।

उन्होंने कहा कि इन कोचिंग इंस्टिट्यूट को नियमानुसार और निबंधन होने के बाद ही इन्हें खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए।साथ ही इन पर राज्य सरकार को अपनी निगरानी रखनी होगी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार और रितिका रानी और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता पी के वर्मा ने कोर्ट के समक्ष तथ्यों को प्रस्तुत किया।इस मामलें पर अगली सुनवाई 4जुलाई,2023 को होगी।

पटना हाइकोर्ट ने जबरन घर खाली कराने के मामले पर एसएसपी,पटना सहित बुद्धा कॉलोनी के थानेदार को लगाई कड़ी फटकार लगायी

पटना हाइकोर्ट ने जबरन घर खाली कराने के मामले पर एसएसपी,पटना सहित बुद्धा कॉलोनी के थानेदार को लगाई कड़ी फटकार लगायी। कोर्ट ने कहा कि आखिर किस कानून के तहत पुलिस घर खाली कराई।यही नहीं ,उस घर में रह रही 25 लड़कियों को बाहर कर दिया गया।

जस्टिस मोहित शाह ने पटना डीएम और सदर एसडीएम को इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया।साथ ही किरायेदार को घर पर कब्जा दिलाने के मामले पर कार्रवाई करने का आदेश दिया। कोर्ट ने रेणु कुमारी सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की।

आवेदिका के वकील शिव प्रताप ने कोर्ट को बताया कि गत सोमवार को सुंबह सुबह मकान मालिक पुलिस एव स्थानीय असामाजिक तत्वों के मिल कर जबरन किराये के घर से बेदखल कर दिया गया।

उनका कहना था कि इस घर में लड़कियों का छात्रावास था।कोर्ट ने पटना के एसएसपी सहित बुद्धा कॉलोनी के थानेदार को तलब किया।

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कोर्ट आदेश के बाद पटना के एसएसपी और बुद्धा कॉलोनी के थानेदार कोर्ट में हाजिर हो कर बताया कि आवेदिका के शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।उनका कहना था कि जांच में जबरन बेदखल करने की बात सामने आई हैं।

जांच रिपोर्ट पटना सदर एसडीएम को भेज दी गई हैं।अब डीएम और एसडीएम ही घर का कब्जा दिलाने की कार्रवाई कर सकते हैं।कोर्ट ने पटना डीएम और एसडीएम को तलब किया।आला अधिकारी कोर्ट में उपस्थित हुये।

कोर्ट ने सोमवार तक कब्जा दिलाने के बारे में कानून के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया।साथ ही मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 18 मई,2023 को तय किया गया है।

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के सभी डीएम समेत केंद्र सरकार की एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को निर्देश दिया है कि बिहार में जितने भी हवाई पट्टियां, पुराने हवाई अड्डे और सिविल एनक्लेव हैं, उन सबों के भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए

पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य के सभी डीएम समेत केंद्र सरकार की एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को निर्देश दिया है कि बिहार में जितने भी हवाई पट्टियां, पुराने हवाई अड्डे और सिविल एनक्लेव हैं, उन सबों के भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश दिया।साथ ही यह सुनिश्चित करें कि वे भविष्य में भी उपयोग आने हेतु सुरक्षित और संरक्षित रहें।

चीफ जस्टिस के.वी विनोद चंद्रन एवं जस्टिस मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ ने निखिल सिंह सहित अन्य 30 जनहित याचिकाकर्ताओं की अर्जियों को निष्पादित करते हुए यह निर्णय सुनाया।

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कोर्ट ने इस फैसले में यह भी स्पष्ट किया की राज्य में हवाई अड्डों का निर्माण या विकास हो या नही,यह एक नीतिगत मामला है।इसमें केंद्र और राज्य सरकार को निर्णय लेना है, न कि हाई कोर्ट को।

पटना हाइकोर्ट ने राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री शंकर प्रसाद टेकरिवाल के निधन के 10 साल बाद सहरसा पुलिस ने उन्हें मिले सरकारी गार्ड और अंगरक्षक के एवज में 18 लाख रुपये से अधिक की राशि नीलाम पत्र के जरिये वसूलने की कार्रवाई पर रोक लगा दिया

पटना हाइकोर्ट ने राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री शंकर प्रसाद टेकरिवाल के निधन के 10 साल बाद सहरसा पुलिस ने उन्हें मिले सरकारी गार्ड और अंगरक्षक के एवज में 18 लाख रुपये से अधिक की राशि नीलाम पत्र के जरिये वसूलने की कार्रवाई पर रोक लगा दिया।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

कोर्ट ने प्रभाकर टेकरीवाल की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया।

याचिकाकर्ता के तरफ से वरीय अधिवक्ता रामाकांत शर्मा ने कोर्ट को बताया की यह मामला सरकारी अफसरशाही के मनमानापन दर्शाता है। एक दिवंगत कैबिनेट मिनिस्टर जिन्हें सरकार की तरफ से अंगरक्षक और हाउस गार्ड मिला , उसके बदले सरकारी राशि वसूलने की कार्रवाई एक मजाक नहीं बल्कि सरकारी अफसरों द्वारा निर्दोष नागरिकों से जबरन पैसे वसूलने अथवा उनकी संपत्ति को लूटने की कार्रवाई है ।

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शर्मा ने कोर्ट को बताया कि शंकर प्रसाद टेकारिवाल 1990 से लेकर फरवरी 2005 तक सहरसा से लगातार विधायक रहे और 12 वर्षों तक वित्त, खनन एवं अन्य विभाग के मंत्री रहे उनके मंत्रीमंडल में रहने के समय राज्य सरकार ने उन्हें तीन अंगरक्षक और हाउस गार्ड दिया था।

2002 में रावड़ी सरकार से उन्होंने इस्तीफा देने के बाद जब वह सहरसा अपने गृह क्षेत्र गए ,तो उन्होंने अपने हाउस गार्ड और दो अंग रक्षकों को सरकार को लौटा दिया और विधायकों को मिलने वाले एक बॉडीगार्ड को भी उन्होंने, फरवरी 2005 में विधायकी कार्य काल पूरा होने पर वापस भेज दिया था।

उनका निधन 2012 में हुआ और उसके 10 साल बाद सहरसा के तत्कालीन एसपी ने मनमाने तरीके से स्व. टेकरीवाल को1998 से 2005 तक दिए गए एक अंगरक्षक मुहैय्या कराने के लिए लगभग 18 लाख रुपये की राशि बकाया बताते हुए स्व शंकर प्रसाद टेकरीवाल के बेटे प्रभाकर टेकरीवाल से वसूलने की कार्रवाई नीलाम वाद के जरिये शुरू किया।

जस्टिस रंजन ने हैरानी जताते हुए पूरी नीलाम वाद पर रोक लगाने का आदेश दिया।मामलें पर आगे सुनवाई होगी।

बिहार सरकार ने पटना हाइकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करने सम्बन्धी याचिका को रद्द कर दिया था

राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी,जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करने सम्बन्धी याचिका को रद्द कर दिया था।साथ ही राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट द्वारा 4 मई, 2023को पारित अंतरिम आदेश को भी चुनौती दी गई है।

चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने राज्य सरकार के 3 जुलाई,2023 के पूर्व सुनवाई करने की याचिका को कोर्ट ने 9मई,2023 को सुनवाई करने के बाद खारिज कर दिया था।

इस आदेश विरुद्ध को राज्य सरकार ने एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर की है।पटना हाइकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही रखा। 9 मई, 2023 को सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही निश्चित किया था।

गौरतलब कि पहले 4मई,2023 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए जातीय जनगणना पर रोक लगा दी थी।चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार इस दौरान इक्कठी की गई आंकड़ों को शेयर व उपयोग फिलहाल नहीं करेगी।

Bihar-caste-based-survey-Nitishkumar in Supreme Court

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका में ये कहा गया था कि क्योंकि पटना हाइकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार के पास जातीय जनगणना कराने का वैधानिक अधिकार नहीं है,इसीलिए इन याचिकाओं पर 3 जुलाई,2023 को सुनवाई करने का कोई कारण नहीं है।

साथ ही कार्यपालिका के पास जातीय जनगणना कराने का क्षेत्राधिकार नहीं है।इसे कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट कर दिया था।

कोर्ट ने ये भी कहा था कि जातीय जनगणना से जनता की निजता का उल्लंघन होता है।इस सम्बन्ध में विधायिका द्वारा कोई कानून भी नहीं बनाया गया है।

कोर्ट ने अपने 4 मई, 2023 के अंतरिम आदेश में जो निर्णय दिया है,उसमें सभी मुद्दों पर अंतिम निर्णय दिया गया।कोर्ट ने इन याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम रूप से निर्णय दे दिया है।

राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के लिए कल्याणकारी और विकास की योजना तैयार है।इसका किसी अन्य कार्य के लिए कोई उद्देश्य नहीं है।