Press "Enter" to skip to content

Posts published in “बड़ी खबर”

Breaking News of Bihar

कृषि कानून वापस लेने का फैसला अन्नदाता का दिल जीतने वाला सुशील कुमार मोदी

कृषि कानून वापस लेने का फैसला अन्नदाता का दिल जीतने वाला

  • सुशील कुमार मोदी
  • प्रधानमंत्री के बड़प्पन ने उन्हें स्टेट्समैन बनाया
  • विपक्ष इसे हार-जीत के
    क्षुद्र नजरिये से न देखे
  • दिल्ली में बिना शर्त धरना
    समाप्त कर घर लौटें किसान
  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब,हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों के एक वर्ग की भावना का सम्मान करते हुए संसद से पारित कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर बड़प्पन दिखाया।
    यह गुरु परब पर सद्भाव का प्रकाश फैलाने वाला ऐसा निर्णय है, जो प्रधानमंत्री मोदी को चुनावी राजनीति से ऊपर उठता हुआ कद्दावर स्टेट्समैन सिद्ध करता है।
    इस ऐतिहासिक पहल को किसी की जीत-हार के रूप में लेने की क्षुद्रता नहीं होनी चाहिए।
  2. हालांकि तीनों कृषि कानून किसानों के हित में थे, सरकार किसान प्रतिनिधियों से 11 चक्र में बातचीत कर इसमें और सुधार करने पर सहमत थी और सुप्रीम कोर्ट ने इनके क्रियान्वयन को स्थगित भी कर दिया था, फिर भी इन कानूनों को एक झटके में वापस लेना राजनीतिक नफा-नुकासान, दलगत मान-अपमान और तर्क-वितर्क से ऊपर उठकर अन्नदाता का दिल जीतने वाला निष्कपट कदम है।
    अब आंदोलनकारियों को अपना हठ छोड़कर बिनाशर्त धरना समाप्त कर घर लौटना चाहिए।

कृषि कानून, जातीय जनगणना और शराबबंदी पर खुलकर बोले नीतीश कुमार

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नई दिल्ली प्रवास से वापसी के पश्चात् पटना हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत की। प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के संबंध में पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून बनाये थे। यह केंद्र सरकार का निर्णय था ।

आज प्रधानमंत्री जी ने खुद ही अगले सत्र में इसे वापस लेने की घोषणा कर दी है। उन्होंने बहुत ही स्पष्टता के साथ अपनी बातें रख दी हैं। प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि उन्होंने किसानों के हित में ये तीनों कृषि कानून परित किये थे लेकिन लोगों को इस संबंध में समझा नहीं पाए। इसलिए इस

कृषि कानून की वापसी पर नीतीश का तंज

कानून को वापस लिया जा रहा है। इसमें कुछ ख़ास बोलने का कोई औचित्य नहीं है। उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव के मद्देनजर तीनों कृषि कानून वापस लिए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बारे में कौन, क्या बोलता है मालूम नहीं। सब अपनी-अपनी बातें बोलते रहते हैं लेकिन आज तीनों कृषि कानूनों के बारे में प्रधानमंत्री जी ने स्वयं अपनी बातें रख दी हैं। सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। विपक्ष को भी अपनी बातें रखने का अधिकार है।

दिल्ली में श्री लालू प्रसाद यादव के जातीय जनगणना के वक्तव्य पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने क्या कहा हमें मालूम नहीं है। उनसे अभी हमारी कोई बातचीत नहीं होती है। जातीय जनगणना को लेकर उनकी पार्टी के नेता और उनके पुत्र श्री तेजस्वी यादव समेत अन्य दूसरे लोगों ने हमसे मुलाकात की थी।

प्रधानमंत्री जी से भी हमलोगों ने इस मुद्दे पर मुलाकात की थी। जातीय जनगणना के मुद्दे पर केन्द्र ने निर्णय स्पष्ट कर दिया है। उसके बाद हमलोगों ने भी बहुत साफ साफ कह दिया है कि आपस में हम सब बैठक कर इस पर निर्णय लेंगे। श्री तेजस्वी यादव ने जो चिट्ठी लिखी थी, वह उनकी पार्टी की तरफ से आया हुआ है और वह चिट्ठी रखी हुई है। हम सब एक साथ सर्वसम्मति से इस पर निर्णय लेंगे।

बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लेकर पत्रकारों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग मेरे इस फैसले के खिलाफ हैं और धंधेबाज चाहते हैं कि शराबबंदी कानून विफल हो जाए। हम तो प्रारंभ से ही कहते रहे हैं कि हर आदमी एक विचार का होगा, यह संभव नही । मनुष्य का जो स्वभाव होता है, यह सभी को मालूम हमलोग यह मानकर चलते हैं कि कुछ लोग मेरे खिलाफ रहेंगे। इसके लिए पूरा का पूरा प्रयास करना चाहिए, सबको समझाना चाहिए।

शराबबंदी कानून के वापसी का सवाल ही पैदा नहीं होता है ।

गड़बड़ी करने वालों पर कानून के मुताबिक एक्शन होना चाहिए। हमलोगों ने सात घंटे तक बैठक कर एक-एक चीजों पर चर्चा की। हमलोगों ने शुरूआती दौर में इसके लिए जो नियम-कानून बनाये हैं इसके अलावा लगातार अभियान भी चलाते रहे हैं। हमलोगों ने अलग-अलग समय पर नौ बार इसकी समीक्षा भी की है और जितनी बातें कही गयीं उन सब चीजों पर चर्चा की गयी। इसके बारे में हमने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पूरे तौर पर आप काम करिए। लॉ एंड आर्डर और अपराध के खिलाफ जैसी कार्रवाई होती है उसी तरह इसपर भी पूरी सक्रियता के साथ कार्रवाई करनी है। इसके लिए फिर से व्यापक अभियान चलाएंगे।

मधुमेह की रोकथाम को लेकर सूबे में मरीजो की हो रही स्वास्थ्य जांचः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग मधुमेह (डायबटीज) की रोकथाम के लिए सतत प्रयत्नशील है। मधुमेह रोगियों को उचित इलाज की सुविधा प्रदान हो और उन्हें मुफ्त सलाह दी जाए। स्वास्थ्य विभाग 14 नवंबर से सभी सरकारी अस्पतालों (एनसीडी क्लिनिक एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर समेत) में मुफ्त जांच सह चिकित्सा परामर्श शिविर लगा रहा है, जो 21 नवंबर तक चलेगा।

श्री पांडेय ने कहा कि मुफ्त जांच सह चिकित्सा परामर्श शिविर में अपने ड्रेस कोड में उपस्थित चिकित्सा दल के द्वारा मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि की स्क्रीनिंग कराकर आवश्यक औषधियां उपलब्ध करवाई जा रही है। इनसे बचाव के उपायों के साथ ही खान-पान संबंधित उचित सलाह दी जा रही है। शिविर के आयोजन के लिए निर्धारित तिथि के पूर्व से ही प्रभात फेरी, जागरुकता रैली, हैंडबिल वितरण, पोस्टर बैनर, माइकिंग की व्यवस्था की गयी थी।

जिलों के सभी अस्पताल परिसर में जीविका के कार्यालय पर एवं शहर के 10 अन्य उपयुक्त स्थलों पर मधुमेह से संबंधित होर्डिंग की व्यवस्था भी की गयी। इस दौरान मधुमेह होने से पूर्व की रोकथाम के उपाय व उनके कारणों व बचाव को प्रमुखता से बताया जा रहा है।

 श्री पांडेय ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम से लोगों में इस बीमारी से सतर्क किया जा रहा है। हर जगह चिकित्सों की टीम लोगों को बीमारी से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा उपाय बता रही है। उन्होंने कहा कि मधुमेह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। सही खान-पान, व्यायाम एवं उचित किकित्सकीय सलाह से इससे बचा सकता है।

कृषि कानूनों पर माफी मांगी जाने पर आंदोलनकारी किसान ने कहा MSP लागू होने तक आन्दोलन जारी रहेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन तीन कृषि कानूनों पर माफी मांगी है, जिन पर सरकार एक साल से अधिक समय तक किसानों को उन्हें स्वीकार करने के लिए “समझाने में विफल” रही।

पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं देश की जनता से सच्चे और नेक दिल से माफी मांगता हूं। हम किसानों को नहीं समझा पाए। हमारे प्रयासों में कुछ कमी रही होगी कि हम कुछ किसानों को मना नहीं पाए।

पीएम मोदी ने कृषि कानून वापस लेने की घोषणा


पीएम मोदी की इस घोषणा के साथ ही सिंघु बॉर्डर, टीकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों ने जश्न मनाया है। किसान नेताओं का कहना है कि वे प्रधानमंत्री के बयान को अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं। हालांकि किसान आंदोलन समाप्त करने की घोषणा अभी नहीं की गई है।

किसान आंदोलन की अगुआई कर रहे राकेश टिकैत का कहना है कि एक साल बाद में सरकार की समझ में किसान शब्द आया है, हम इसे अपनी जीत मान रहे हैं। सरकार से बातचीत का रास्ता खुला है। सरकार जब संसद में कानून लेकर जाएगी, वहां क्या होगा, ये मायने रखता है। MSP हमारा मुद्दा है। सरकार MSP गारंटी कानून लेकर आए। जब तक सभी मुद्दों पर समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

वही इसको लेकर बिहार में भी सियासत चरम पर है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीनों कृषि बिल केंद्र सरकार द्वारा वापस लिए जाने पर कहा कि केंद्र सरकार का निर्णय पहले जो था वह भी केंद्र सरकार का निर्णय था अब उन्होंने जो निर्णय लिया वह भी केंद्र सरकार का निर्णय था इसलिए इस पर बहुत ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता।

कृषि कानून के रद्द होने पर नीतीश ने पीएम मोदी पर फोड़ा ठीकरा

वही लालू प्रसाद ने कहा कि विश्व के सबसे लंबे,शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक किसान सत्याग्रह के सफल होने पर बधाई।पूँजीपरस्त अहंकारी सरकार व उसके मंत्रियों ने किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, आढ़तिए, मुट्ठीभर लोग, देशद्रोही इत्यादि कहकर देश की एकता और सौहार्द को खंड-खंड कर बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में एक अविश्वास पैदा किया।देश संयम, शालीनता और सहिष्णुता के साथ-साथ विवेकपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है ना कि पहलवानी से बहुमत में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता होनी चाहिए।

राजद सासंद ने कृषि कानून के वापसी पर पीएम मोदी को लिया आड़े हाथ

तेजस्वी यादव ने कहा कि यह किसान की जीत है, देश की जीत है। यह पूँजीपतियों, उनके रखवालों, नीतीश-भाजपा सरकार और उनके अंहकार की हार है।विश्व के सबसे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक किसान आंदोलन ने पूँजीपरस्त सरकार को झुकने पर मजबूर किया।आंदोलनजीवियों ने दिखाया कि एकता में शक्ति है। यह सबों की सामूहिक जीत है। बिहार और देश में व्याप्त बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण के ख़िलाफ हमारी जंग जारी रहेगी।भाजपाई उपचुनाव हारे तो इन्होंने पेट्रोल-डीज़ल पर दिखावटी ही सही लेकिन थोड़ा सा टैक्स कम किया।

कृषि बिल वापस लेने पर कांग्रेस नेता ने भी मोदी को लिया आड़े हाथ

उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड,पंजाब की हार के डर से तीनों काले कृषि क़ानून वापस लेने पड़ रहे है।विगत वर्ष 26 नवंबर से किसान आंदोलनरत थे। बिहार विधानसभा चुनाव नतीजों के तुरंत पश्चात किसानहित में हम किसानों के समर्थन में सड़कों पर थे।इसी दिन किसान विरोधी नीतीश-भाजपा ने गाँधी मैदान में इन कृषि कानूनों का विरोध एवं किसानों का समर्थन करने पर मुझ सहित हमारे अनेक वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किया।अंततः सत्य और किसानों की जीत हुई।

मधुबनी की घटना दो संवैधानिक संस्थानों के बीच अहंकार का नतीजा है

जब दो संवैधानिक संस्था आपस में आमने सामने हो तो मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है ऐसे में रिपोर्टिंग करने में थोड़ी सावधानी बरतने की जरुरत है ।मधुबनी की घटना कुछ ऐसा ही है दोनों संस्थान अपने अंहकार में संस्थान के मर्यादाओं को तार तार करने में लगे हैं।

जज साहब ने जो लिख कर दिया उसके अनुसार पुलिस पर कार्रवाई हो गयी है दोनों पुलिस वाले जेल चले गये हैं, हाईकोर्ट जिनकी भूमिका अभिभावक की है क्यों कि पुलिस भी न्याय प्रणाली का ही हिस्सा है इसलिए हाईकोर्ट इस मामले में दोनों पक्ष को सूनने के बाद ऐसा निर्णय ले जिससे कि आगे इस तरह की घटनाए ना घटे

क्यों कि जिस जज के कार्यशैली को गलत मानते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें न्यायिक काम काज से अलग कर दिया था, उस जज के आरोप की पहले जांच होनी चाहिए थी क्यों कि जज साहब ने जो लिखित शिकायत किये हैं उसमें विवाद की जो वजह बताया है कि 16.11.21 को मुझे घोघरडीहा थानाध्यक्ष के खिलाफ घोघरडीहा प्रखंड की भोलीराही निवासी उषा देवी ने मुझे बीते मंगलवार को एक आवेदन दिया। जिसमें पीड़ित ने बताया था कि घोघरडीहा के थानाध्यक्ष ने उसके पति, ननद, वृद्ध सास व ससुर को झूठे मुकदमे में फंसा दिया गया है। साथ ही, पति के साथ दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायत की।

शिकायत मिलने के बाद मैंने सत्यता जानने के लिए 16.11.21 को ही थानाध्यक्ष को पक्ष रखने की सूचना फोन पर दी। लेकिन, थानाध्यक्ष आने से टालमटोल करते रहे। इसके बाद थानाध्यक्ष को गुरुवार को 11 बजे आने का समय दिया गया। थानाध्यक्ष निर्धारित समय पर न आकर दोपहर 2 बजे मेरे चैंबर में पहुंचे। चैंबर में प्रवेश करते ही थानाध्यक्ष ऊंची आवाज में बात करने लगा। जब हमने शांति से बात करने को कहा तो उसने कहा कि हम इसी अंदाज में बात करेंगे। क्योंकि यही मेरा अंदाज है। इसी बीच थानाध्यक्ष ने गाली-गलौज शुरू करते हुए कहा कि तुम मेरे बॉस (एसपी साहब) को नोटिस देकर कोर्ट बुलाते हो।आज तुम्हारी औकात बता देता हूं।

जज साहब को हाईकोर्ट ने उनके अटपटे फैसले की वजह से न्याययिक कार्य से अलग कर दिया है तो जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार मधुबनी जिला जज ने लोकअदालत से जुड़े कार्यों को देखने का उन्हें जिम्मा दिया है ,ऐसे में किसी महिला द्वारा दिये गये आवेदन के आलोक में थाना अध्यक्ष को फोन करके बुलाने का अधिकार इनको किस न्याययिक अधिकार के तहत मिल गया ,इसका जबाव तो देना पड़ेगा ना क्यों कि यह खुद आवेदन में लिख रहे हैं कि बार बार बुलाने के बावजूद थाना प्रभारी उनके कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे थे ।

किसी भी मामले में कोर्ट को लगता है कि थाना अध्यक्ष को कोर्ट में पेश होना चाहिए तो इसके लिए एक वैधानिक प्रावधान बना हुआ है कोर्ट एसपी को लिखता है अगर एसपी थाना अध्यक्ष को कोर्ट में उपस्थिति होने का निर्देश नहीं देता है तो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर डीजीपी कार्यालय में गठित सेल को सूचना देना है जिसका काम ही यही है कि अगर कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं हो रहा है तो उनका अनुपालन सुनिश्चित कराये ऐसे में जज सहाब जिस तरीके से अधिकारियों को बार बार कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश जारी कर रहे थे यह अधिकार उनको है क्या ।

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का इसको लेकर स्पष्ट आदेश है फिर जज साहब लगातार उस आदेश को नजरअंदाज क्यों कर रहे थे कई ऐसे सवाल है जो जज साहब के प्राथमिकी से ही स्पष्ट हो रहा है एसपी को क्यों वो बार बार कोर्ट में बुला रहे थे उनको एसपी को कोर्ट में बुलाने का कोई वाजिब वजह था क्या उनको तो अधिकार भी नहीं है ऐसे कई सवाल है जिस पर पूरी जुडिशरी को सोचना चाहिए बस यह कि हम सुप्रीम है इससे दोनों संस्थानों के बीच तनाव बढ़ेगा ।

कोरोना की वजह से इस बार भी सोनपुर मेला का आयोजन नहीं होगा

हरिहरक्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा
आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन एक माह तक चलने वाले बिहार के विश्वप्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र मेले या सोनपुर मेले की शुरुआत होती है। हालांकि कोविड के चलते सरकार द्वारा इस साल भी मेले की अनुमति नहीं दी गई है, मगर कोविड प्रोटोकॉल के तहत यहां श्रद्धालुओं को गंगा और गंडक नदियों में स्नान और हरिहरनाथ मंदिर में पूजा करने की अनुमति है। फलतः नदियों के किनारे और हरिहरनाथ मंदिर में जुटी साधु-संतों और आम श्रद्धालुओं की भीड़ ने यहां मेले जैसा दृश्य तो उपस्थित कर ही दिया है।

इस मेले के पीछे की पौराणिक कथा यह है कि प्राचीन काल में यहां गंडक के तट पर गज और ग्राह के बीच लंबी लड़ाई चली थी। गज की फ़रियाद पर विष्णु या हरि और शिव या हर ने बीच-बचाव कर इस लड़ाई का अंत कराया था। कथा प्रतीकात्मक है। प्राचीन भारत वैष्णवों और शैव भक्तों के बीच सदियों तक चलने वाली लड़ाई का साक्षी रहा था। अपने आराध्यों की श्रेष्ठता स्थापित करने के इस संघर्ष ने हजारों लोगों की बलि ली थी। इसकी समाप्ति के लिए गुप्त वंश के शासन काल में कार्तिक पूर्णिमा को वैष्णव और शैव आचार्यों का एक विराट सम्मेलन सोनपुर के गंडक तट पर आयोजित किया गया। यह सम्मेलन दोनों संप्रदायों के बीच समन्वय की विराट कोशिश साबित हुई जिसमें विष्णु और शिव दोनों को ईश्वर के ही दो रूप मानकर विवाद का सदा के लिए अंत कर दिया गया। उसी दिन की स्मृति में यहां पहली बार विष्णु और शिव की संयुक्त मूर्तियों के साथ हरिहर नाथ मंदिर की स्थापना हुई थी। उसी काल में यहां एशिया के सबसे बड़े पशु मेले की भी शुरुआत हुई थी जिसने कालांतर में एक बड़े व्यावसायिक मेले का भी रूप धर लिया।

पिछले लगभग डेढ़ हजार सालों से हरिहरक्षेत्र मेला एक ऐसी जगह रही है जहां ग्रामीण बिहार की सभ्यता और संस्कृति को निकट से देखा, जाना और महसूस किया जा सकता है।

शहाबुद्दीन के दामाद बेटी का रिसेप्शन आज

मोतिहारी —
शहाबुद्दीन के दामाद शादमान के ज्ञानबाबू चौक स्थित घर रानीकोठी में आज वलीमा (रिसेप्शन) है। जिसे लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। समारोह में पटना, सीवान, मुजफ्फरपुर, बेतिया, बगहा सहित विभिन्न जगहों से रिश्तेदारों सहित अन्य मेहमानों के आने का सिलसिला जारी है।

रिसेप्शन समारोह के लिए शादमान के पिता इफ्तेखार अहमद सह साहब के घर रानीकोठी में भव्य पंडाल बनाया गया। जहां पंडालों को कई तरह की आकर्षक डिजाइन देकर सजाया गया। जिससे पंडालों की खूबसूरती देखते बन रही है।

बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन एंप्लॉय फेडरेशन के द्वारा 9 सूत्री मांगों को लेकर दिया धरना

बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन एंप्लॉय फेडरेशन के द्वारा अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर बिहार सरकार के परिवहन निगम कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर एक दिवसीय धरना देकर सरकार और प्रशासनिक अधिकारी परिवहन निगम के खिलाफ नाराजगी जाहिर की बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन इंप्लाइज फेडरेशन के सचिव विश्वजीत कार्यकारी अध्यक्ष गजनबी नवाब महासचिव अजय कुमार समेत बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया इस मौके पर संगठन के महासचिव अजय कुमार ने बताया बिहार राज्य पथ परिवहन निगम राज्य सरकार का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी उपक्रम है केंद्रीय कानून के तहत वर्ष 1959 में संवैधानिक दायित्व के तहत राज्य सरकार ने परिवहन निगम की स्थापना की थी

लेकिन राज सरकार की निगम विरोधी और निजी बस मालिक पक्षी नीति अपनाने के वजह से आज परिवहन निगम के हालात काफी खराब हो चुके हैं समय-समय पर निगम बस बेड़े में नई गाड़ियां जोड़ने और नई नियुक्ति करने के बजाए पीपीपी मोड पर निजी बस परिचालकों को राष्ट्रीयकृत मार्गों पर निगम परमिट प्राप्त कर निजी बस मालिक पक्षी नीति चला रही है

,,,, निगम के कर्मचारियों पर राज सरकार और निगम प्रबंधन का हमला इसके बाद तेज हो गया है मजदूरों पर दमन उत्पीड़न बेतहाशा बढ़ गया है वेतन मानदेय सेवा शर्तों में कटौती की जा रही है मेहनत मजदूरी करने वालों की हालात बद से बदतर होती जा रही है श्रम कानून में मालिक पक्षीय सुधार के जरिए जहां एक और मालिकों को नौकरी पर रखने एवं उसे बाहर करने की छूट दी जा रही है

वही ट्रेड यूनियन के गतिविधियों पर तरह तरह की पाबंदियां लगाई जा रही है अस्थाई नियुक्ति के स्थान पर ठेका प्रथा बाहर की एजेंसियो से कार्य लीला अस्थाई एवं दैनिक मजदूरी के जरिए मजदूरों का भयंकर शोषण हो रहा है,,,, वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट कौन वर्ष 2017 में पटना उच्च न्यायालय ने कहा है कि राज्य में समान काम का समान वेतन देना होगा भारत सरकार और सरकार द्वारा निर्धारित ₹18000 मासिक मंजूरी होगी उससे कम किसी भी हालात में वेतन देना मंजूर नहीं होगा पद और योग्यता के अनुरूप इससे उनका वेतन निर्धारित की जानी चाहिए,,,

परिवहन निगम के कार्यरत अस्थाई कर्मचारियों का विशेषण और दो हट गया है 31 मार्च 2017 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जवान तलाव का भुगतान भी निगम ने नहीं किया राज्य सरकार से 7 वर्ष पूर्व राशि प्राप्त होने के बावजूद निगम ने उपलब्ध राशि से से वार्तालाप का भुगतान नहीं करना निगम प्रबंधन का सेवानिवृत्त कर्मचारियों विरोधी मानसिकता का परिचायक है केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत मंगाई भर्ती की लंबित दोस्तों को कर्मचारियों के वेतन में जोड़ने का आदेश निर्गत नहीं करना प्रबंधन का कुरुर मानसिकता है

संविदा पर बहाल कर्मचारी पदाधिकारियों से बंधुआ मजदूर की तरह व्यवहार किया जा रहा है पद और योग्यता के अनुरूप वेतन नहीं देकर आल्सो वेतन पर कार्य करने हेतु मजबूर किया जा रहा है अवकाश के दिनों में मनमाने तरीके से बिना किसी क्षतिपूर्ति का बराबर कार्यालय खोलकर कार्य करने को मजबूर किया जा रहा है

इस संदर्भ में पूर्व में भी निगम कर्मचारियों द्वारा अपने ज्वलंत समस्याओं के निराकरण हेतु निगम प्रशासक को पत्रांक संख्या 115 दिनांक 20 अक्टूबर 2021 एवं विकलांग संख्या 105 2 अक्टूबर 2021 के माध्यम से मांग की गई थी और प्रबंधन से द्विपक्षीय वार्ता मांग की पूर्ति हेतु अनुरोध किया गया था लेकिन अब तक प्रबंधन द्वारा इस पर किसी प्रकार का कोई विचार नहीं किया गया है प्रबंधन का यह रवैया निगम विरोधी निगम कर्मी विरोधी मानसिकता का परिचायक है यूनियन के द्वारा सरकार और निगम प्रबंधन के समक्ष उठाई गई मांगे

1 पूर्व के हड़ताल के दौरान संपन्न द्विपक्षीय समझौता की कंडिका तीन लागू की जाए

2 वेतन विसंगति के बकाए राशि का अविलंब भुगतान किया जाए

3 महंगाई भत्ते की किस्त को तत्काल निगम कर्मी के वेतन में जोड़ा जाए

4 समान काम का समान मंजूरी दी जाए

5 आउटसोर्सिंग और ठेका पर बहाली तथा मजदूरों का शोषण और दोहन करने की प्रथा है इसलिए इस पर बहाल सभी कर्मी को सेवा नियमित की जाए

6 संविदा, दैनिक वेतन मजदूरी , पचोर से मजदूर को न्यूनतम ₹21000 मासिक वेतन भुगतान किया जाए

7 निगम के अस्तित्व को बचाने के लिए 500 नई बसें क्रय कर निगम के बेड़े में जोड़ा जाए

8 निगम के बसों के अनुपात में शीघ्र कर्मचारी पदाधिकारियों के स्थाई नियुक्ति की जाए

9 निगम में कार्यरत कर्मचारी पदाधिकारियों को योग्यता एवं पद के अनुरूप वेतन तथा श्रम कानून के तहत सुविधा मुहैया कराई जाए

नीतीश जी मुझसे इतना ही घ्रृणा है तो मुझे गोली मारवा दें नहीं तो जेल के अंदर खाने में जहर मिला दें–आनंद मोहन

सहरसा: — जी.कृष्णैया हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व सांसद आनंद मोहन (Anand Mohan) सहरसा कोर्ट में पेशी के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुझसे इतना घ्रृणा है तो मुझे गोली मार दें या नहीं तो जेल के अंदर खाने में जहर मिला दें.”क्यों सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नजर अंदाज कर रहे हैं ।

आजीवन कारावास के 14 साल बीत जाने के साढ़े पांच महीने के बाद भी उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा रहा है वही बदले की भावना से जेल के वार्ड में छापामारी कराकर चार मोबाईल की बरामदगी दिखाकर मुझे बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं.”

नियम-कानून सभी के लिए एक

उन्होंने कहा, ” बीते 23 अक्टूबर की देर शाम जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में मंडल कारा में औचक छापेमारी की गई थी. यह बदले की भावना और राजनीतिक साजिश के तहत की गई थी. इस दौरान मुझे बदनाम करने और मानसिक यातना पहुंचाने का पूरा प्रयास किया गया. लेकिन नियम, कानून और संविधान से सभी बंधे हैं. जेल एक संस्था है, सराय नहीं जहां कोई भी मुंह उठाकर चले जाए. तलाशी के दौरान वरीय पदाधिकारी बाहर मौजूद थे जबकि डीएसपी और एसडीओ ने जेल में छापामारी की थी. “
नीतीश कुमार पर साधा निशाना

पूर्व सांसद ने कहा, ” कायदे से जेल अधीक्षक छुट्टी में थे. लेकिन उनके ही आवेदन पर उन पर मामला दर्ज किया गया है. उनके पास चार मोबाइल दिखाए गए, जो सरासर झूठ है

कोरोना टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को ‘जश्न-ए-टीका पुरस्कार’ः मंगल पांडेय

कोरोना टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने
वालों को ‘जश्न-ए-टीका पुरस्कार’ः मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरोना टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट योगदान देने वाले जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक के डॉक्टर, नर्स समेत इससे जुड़े समाजसेवियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा समारोह आयोजित कर ‘जश्न-ए-टीका पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा रहा है।

टीकाकरण में उत्कृष्ट लोगों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में जहां कोरोना जांच और टीकाकरण तेजी से किया जा रहा है, वहीं टीकाकरण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले भी सम्मानित किया जा रहा है।


श्री पांडेय ने कहा कि इसके तहत पहले चरण में 4 अक्टूबर को विभाग द्वारा जश्न-ए-टीका पुरस्कार समारोह आयोजित कर टीकाकरण में अह्म योगदान देने वाले पदाधिकारियों और टीकाकरण में सहयोग करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। सरकार के संकल्पित लक्ष्य पूरा होने के बाद पुरस्कार समारोह आयोजित कर टीकाकरण कार्य में सहयोग करने वाले सम्मानित किए जाएंगे। वैश्विक महामारी से बचाव को लेकर टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में डॉक्टर, नर्स के साथ साथ बड़ी संख्या में आमलोगों ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।

ऐसे लोगों के योगदान को उल्लेख करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जश्न ए पोर्टल का शुभारंभ किया गया। इस पोर्टल पर कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण कार्य को सफल बनाने में व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से उत्कृष्ट योगदान देने वालों के कार्य प्रविष्ट की गई, ताकि दूसरे लोगों उनके कार्य और प्रयास को जान सकें।

श्री पांडेय ने कहा कि विभाग द्वारा कोरोना टीका का प्रथम डोज और दूसरी डोज लगवाने में सामूहिक और व्यक्तिगत तौर पर उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोग सम्मानित किए जा रहे हैं। इस तरह के आयोजन से अन्य लोगों में भी सेवा की भावना जागृत होगी, जिससे कोरोना से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान में तेजी आएगी।

झंझारपुर कोर्ट में जज और पुलिस वाले आपस में भीड़े थाना अध्यक्ष गिरफ्तार

झंझारपुर एडीजे कोर्ट के जज पर हमला ।।
थाना के एसएचओ और दरोगा ने की मारपीट।।
झंझारपुर एडीजे कोर्ट के जज अविनाश कुमार प्रथम पर घोघरडीहा थाना के SHO गोपाल कृष्ण और एक सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु शर्मा के द्वारा मारपीट करने कि खबर आ रही है ।

जज पर पुलिस वाला कोर्ट में ही ताना पिस्टल

इस हमले में ADJ अविनाश कुमार प्रथम घायल हो गए ।हमले की जानकारी पाकर कोर्ट के सभी कर्मी ADJ के चेंबर में दौड़े और दोनों को पकड़ लिया । ADJ की ओर से बताया गया कि सब इंस्पेक्टर ने उन पर पिस्टल तान दिया और एसएचओ ने उनके साथ मारपीट की जिसके बाद एसएचओ और एसआई को कोर्ट के कर्मियों ने बंधक बना लिया है एसपी सहित भारी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद है ।

न्याय व्यवस्था पर हमला है


इस बीच एसएचओ गोपाल कृष्ण और एसआई अभिमन्यु शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है । बताया जाता है कि एडीजे प्रथम अविनाश कुमार लोक अदालत के अध्यक्ष हैं और घोघरडीहा थाना क्षेत्र की किसी महिला के द्वारा लोक अदालत में आवेदन दिया गया था एसएचओ गोपाल कृष्ण और अभिमन्यु शर्मा को कोर्ट में समय पर नहीं पहुंचने पर ADJ ने जब फटकार लगाई तो उसके बाद इस तरह की घटना घटी है।

संपतचक बैरिया कचड़ा प्रबंधन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर

पटना हाई कोर्ट ने पटना के संपतचक बैरिया में स्थापित किये जाने वाले कचड़ा प्रबंधन प्रोजेक्ट (वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट ) को हटाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना नगर निगम को जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने सुरेश प्रसाद यादव व अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ने खंडपीठ को बताया कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जवाबी हलफनामा से यह प्रतीत होता है कि बगैर किसी भी प्रक्रिया का पालन करते हुए संपतचक बैरिया की जनता को गंभीर प्रदूषण झेलने के लिए छोड़ दिया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस प्रोजेक्ट को स्थापित करने के लिए बिहार स्टेट पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड की सहमति भी नहीं लिया गया है।
जिसकी वजह से एक ओर वायु प्रदूषण फैल रहा है, तो दूसरी ओर कृषि योग्य भूमि पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

याचिका में यह प्रश्न उठाया गया कि किस कानूनी अधिकार के तहत पंचायत क्षेत्र में पड़ने वाले इस जगह का चयन कचड़ा प्रबंधन प्रोजेक्ट के लिए किया गया है ? यह भी कहा गया कि कृषि भूमि पर स्थापित किये जाने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए बैरिया कर्णपुरा पंचायत राज से किसी भी प्रकार की अनुमति ली गई है ?

नगर विकास व आवास विभाग के कमिश्नर, बिहार स्टेट पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड व पटना नगर निगम से स्पष्टीकरण पूछने सह शो – कॉज करने का आग्रह भी इस याचिका में किया गया है।

प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण किये जाने के पूर्व पंचायत राज बैरिया के ग्राम सभा द्वारा एक बैठक भी 29 दिसंबर, 2006 को बुलाई गई थी, जिसमें इस प्रोजेक्ट को लेकर विरोध किया गया था।
इस मामले पर आगे भी सुनवाई होगी।

पत्रकार अविनाश हत्याकांड मामले में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने लिया स्वत संज्ञान

पत्रकार अविनाश झा हत्या मामले में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने स्वत संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब किया है इस संबंध में राज्य के डीजीपी मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब किया है।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने पत्रकार अविनाश हत्याकांड मामले में लिया संज्ञान

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने स्वत संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि मधुबनी के पत्रकार अविनाश झा की संदिग्ध स्थिति में मौत की खबर आ रहा है यह बहुत ही दुखद घटना है ।

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के स्वत संज्ञान लेने की खबर के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों से एसपी मधुबनी को अवगत कराने का निर्देश दिया है साथ ही आईजी दरभंगा को पूरे मामले की जांच का आदेश डीजीपी द्वारा जारी किया गया है ।

पंचायत चुनाव में बैंककर्मियों के उपयोग पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पंचायती राज संस्थानों में कराए जा रहे पंचायत आम निर्वाचन 2021 के चुनाव कार्य मे बैंककर्मियों के साथ साथ केंद्रीय बोर्ड व निगम सहित पब्लिक सेक्टर में कार्यरत कर्मी को चुनाव ड्यूटी पर तैनात किए जाने के मामलें पर सुनवाई की।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग के साथ साथ राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार से जबाब तलब किया है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा बैंक कर्मियों को चुनाव कार्य मे लगाए जाने संबंधी चुनाव आयोग के अधिसूचना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत)- सह- जिला पदाधिकारी पटना के द्वारा दिनांक 12 अगस्त 2021 को चीफ मैनेजर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मुख्य कार्यालय पटना को लिखे उस पत्र को चुनौती दी है।

इसके माध्यम से पटना में कार्यरत सभी पदाधिकारियों एवम कर्मियों को चुनाव कार्य मे लगाए जाने के लिये नाम पद एवं उनका मोबाइल नंबर माँगा था, ताकि चुनाव कार्य के लिये उनका डाटा बेस तैयार किया जा सके।

कोर्ट को याचिकाकर्ता द्वारा बताया गया कि इससे बैंक का कार्य प्रभावित होता है।
एसबीआई पटना सर्किल ( बिहार व झारखंड क्षेत्र ) के अफसरों के संघ के महासचिव व अन्य अधिकारियों की तरफ से दायर इस याचिका में बिहार पंचायती राज कानून की संशोधित धारा 125 की संवैधानिकता को चुनौती दी गयी है।

इस धारा के तहत चुनाव ड्यूटी पर तैनात करने हेतु बैंक कर्मियों को भी राज्य सरकार के कर्मियों के समतुल्य माना गया है।
इस मामले पर फिर अगली सुनवाई 22 दिसम्बर को फिर होगी।

मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम और बिहार म्युजियम का किया भ्रमण

मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम और बिहार म्युजियम का किया भ्रमण, नये प्रस्तावित बस अड्डा के निर्माण को लेकर विभिन्न स्थलों का किया निरीक्षण

पटना, 17 नवम्बर 2021 :- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज पटना म्युजियम का भ्रमण कर वहां चलाए जा रहे अपग्रेडेशन एवं एक्सटेंशन कार्यों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को पटना म्युजियम के ग्राउंड प्लान, पटना म्यूजियम सब-वे लेबल प्लान तथा पटना म्यूजियम एवं बिहार म्युजियम की अंडरग्राउंड कनेक्टिविटी को लेकर प्रस्तावित सब–वे की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम एवं बिहार म्युजियम को जोड़ने वाले अंडरग्राउंड टनल (पाथ) बनाने की योजना की विस्तृत जानकारी ली और निर्माण कार्य को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देश देते हुये कहा बड़ी संख्या में लोग पटना म्युजियम एवं बिहार म्युजियम आते हैं और आगे भी आयेंगे। इसे ध्यान में रखते हुये यहां पार्किंग की समुचित व्यवस्था करें ताकि यहां आने वाले लोगों को किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो।

पटना म्युजियम का सीएम ने किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि पाटलिपुत्र एक ऐतिहासिक स्थल है। पुरातात्विक दृष्टिकोण से पटना म्युजियम का यह स्थल काफी महत्वपूर्ण है। इस दृष्टिकोण से पटना म्युजियम के एक हिस्से में खुदाई कराना आवश्यक है। ताकि पुरातात्विक अवशेषों की प्राप्ति से यहां के इतिहास के बारे में और विशेष जानकारी मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम भ्रमण के उपरांत बिहार म्युजियम का भी निरीक्षण किया और पटना म्युजियम एवं बिहार म्युजियम को जोड़ने वाले अंडरग्राउंड पाथ के निर्माण कार्य को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने पटना म्युजियम एवं बिहार म्युजियम के भ्रमण के पश्चात् नये प्रस्तावित बस अड्डे के निर्माण हेतु फुलवारीशरीफ के मुरादपुर, बिहटा के नेउरा तथा कन्हौली में स्थल निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के परामर्शी श्री अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव पथ निर्माण श्री प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव श्री आनंद किशोर, प्रमंडलीय आयुक्त श्री संजय कुमार अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, कला-संस्कृति एवं युवा विभाग की सचिव श्रीमती बंदना प्रेयसी, भवन निर्माण विभाग के सचिव श्री कुमार रवि, अपर सचिव कला संस्कृति एवं युवा विभाग श्री दीपक आनंद, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह, जिलाधिकारी श्री चंद्रशेखर सिंह, वरीय पुलिस अधीक्षक श्री उपेंद्र शर्मा सहित अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे।

फुलवारीशरीफ कब्रिस्तान को अतिक्रमण से मुक्त कराने का निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने फुलवारीशरीफ के टमटम पड़ाव स्थित वक्फ बोर्ड की भूमि पर बने मजार और कब्रिस्तान पर हुए अतिक्रमण की जांच कर उसे अतिक्रमण से मुक्त कराने का निर्देश डी एम, पटना को दिया। मंसूर आलम द्वारा दायर किये गए जनहित याचिका जस्टिस राजन गुप्ता की डिवीजन बेंच ने पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि फुलवारीशरीफ में टमटम पड़ाव के पास 3.5 एकड़ में सुन्नी वक्फ का काफी समय से कब्रिस्तान है।यह मिनहाज रहमातुल्लाह अल्लाएह मजार और बाबा मखदूम साहेब मजार के नाम से जाना जाता है।

इस भूमि को सुल्तान मियां नामक व्यक्ति द्वारा अतिक्रमित कर लिया गया है।अतिक्रमणकारी द्वारा इस कब्रिस्तान के भूमि पर अवैध रूप से दुकान का निर्माण भी किये जाने लगा है।

कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा अतिक्रमण करने वाले जमीन माफिया के विरुद्ध कार्रवाई करने को लेकर राज्य के मुख्य मंत्री को एक आवेदन भी 25 सितंबर, 2020 को दिया गया।

साथ ही याचिकाकर्ता ने संयुक्त आवेदन पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी, सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष, फुलवारीशरीफ के डी एस पी व एस एच ओ को भी दिया, जिसकी प्रति राज्य के डी जी पी, फुलवारीशरीफ के सी ओ व राज्य के गृह सचिव को भी भेजा गया, लेकिन अबतक अतिक्रमण हटाने के लिए को प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नही की गई। कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर उक्त आदेश देने के बाद मामले को निष्पादित कर दिया।

पटना हाईकोर्ट ने सेकेंड्री स्कूल हेडमास्टर के नियुक्ति के लिए बनी नियमावली को चुनौती देने वाली याचिका को किया स्वीकार

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में सीनियर सेकेंड्री स्कूल हेडमास्टर के नियुक्ति के लिए बनी नियमावली की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है । टेट/एस टेट उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ की रिट याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार हफ्ते में जवाब देने का आदेश दिया

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में इस नियमावली के तहत हो रही नियुक्तियां इस याचिका में पारित फैसले पर निर्भर करेगा ।

याचिकाकर्ता के वकील कुमार शानू ने कोर्ट को बताया कि 18 अगस्त 2021 को अधिसूचित हुई बिहार राज्य उच्चतर माध्यमिक स्कूल हेडमास्टर नियमावली में हेडमास्टर की नियुक्ति की शर्ते परस्पर विरोधी हैं । एक ओर 2012 नियमावली के तहत टी ई टी परीक्षा पास करना अनिवार्य है ,वही दूसरी ओर शैक्षणिक कार्य अनुभव को न्यूनतम 10 साल रखा गया है ।

इसमें मुश्किल ये हैं कि 2012 की नियमावली के तहत टीईटी परीक्षा को पास कर अधिकांश अभ्यर्थी 2014 में शिक्षक बने । इसलिए टीईटी पास शिक्षकों का न्यूनतम कार्य अनुभव 10 साल तक का नही हो पाया ।
इस कारण हेडमास्टर बहाली में मनमानी हो रही है।

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर सरकार को जवाब देने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दिया है।इस मामले पर
अगली सुनवाई 8 हफ्ते बाद होगी ।

शिक्षा माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मगध विश्वविधालय के कुलपति के ठीकाने पर चल रहा रेड

बिहार में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने बुधवार को बोध गया स्थित मगध यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के ठिकानों पर छापेमारी की। कुलपति के ऑफिस के साथ-साथ घर को खंगाला जा रहा है। इस बात की पुष्टि स्पेशल विजिलेंस यूनिट ADG नैयर हसनैन खान ने की है।

कुलपति के कार्यालय में चल रहा है छापामारी

कुलपति पर रुपए की हेराफेरी का आरोप है। इसमें कुलपति अकेले नहीं हैं। कुलपति के PA सुबोध कुमार, आरा स्थित वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी के फाइनेंशियल ऑफिसर ओम प्रकाश, पटना स्थित पाटलिपुत्रा यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार जितेंद्र कुमार और लखनऊ के मेसर्स पूर्वा ग्राफिक्स एंड ऑफसेट व मेसर्स एक्सलिकट सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मालिक शामिल हैं।

ADG के मुताबिक, इन सभी के खिलाफ 16 नवंबर को SVU ने IPC की धारा 120B, 420, R/W की धारा 12 के सेक्शन 13(2) & 13(B) और PC एक्ट 1988 के तहत FIR दर्ज की गई। फिर स्पेशल विजिलेंस कोर्ट से कुलपति के ठिकानों पर छापेमारी करने और वहां की जांच करने के लिए सर्च वारंट मांगा। इसे कोर्ट ने जारी कर दिया। इसके बाद बुधवार सुबह छापेमारी की गई।

मधुबनी पत्रकार हत्याकांड ने खड़े किये कई सवाल

पत्रकार अविनाश झा हत्याकांड मामले में पुलिस प्रशासन क्या कर रही है इस पर मेरी भी नजर है और अविनाश को न्याय कैसे मिले इसको लेकर राज्य के सीनियर अधिकारियों से भी लगातार संपर्क में है आईजी दरभंगा को देखने का निर्देश पुलिस मुख्यालय की और से दिया गया है।

जो जानकारी मिल रही है अविनाश मधुबनी जिले में चल रहे अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ अभियान चला रखा था और उसी वजह से उसकी हत्या हुई है ऐसा परिवार के लोगों का कहना है ।

वजह जो भी रहा हो लेकिन इस तरह के सार्वजनिक हितों से जुड़े मामले में झूठे मुकदमे में फंसाने से लेकर हत्या तक की घटनाए आम होती जा रही है वही इस तरह के व्हिसल ब्लोअर के संरक्षण के लिए जो कानून बनाये गये वो अब निष्प्रभावी होते जा रहा है। वजह भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ने वालों को सरकार ,न्यायपालिका और मीडिया से जो पहले संरक्षण मिलता था वो अब नहीं मिल रहा है मीडिया का हाल क्या कहना है शहाबुद्दीन की बेटी की शादी में व्यस्त है, रहे भी क्यों नहीं सबसे अधिक इसी तरह के खबर को लोग पढ़ते हैं ।

वही पुलिस और प्रशासन का हाल यह है कि सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है तो आवाज उठाने वालो पर ही पुलिस कार्रवाई करनी शुरु कर देती है, पहले ये सब थाना स्तर पर होता था लेकिन अब यह सब डीएम और एसपी के स्तर पर होने लगा है ऐसे में आप किससे न्याय की उम्मीद करते हैं ।

कोर्ट का हाल आप देख ही रहे हैं याद है या भुल गये पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में रिपोर्ट करने पर रोक लगा दिया था ।ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस भ्रष्ट व्यवस्था से कैसे लड़ा जाये ,मैं अपने अनुभव के आधार पर कुछ बाते कहना चाहता हूं भारत में लोकतंत्र के अंदर जो व्यवस्था है आप उन्ही के सहारे लड़ाई लड़ सकते हैं ।

1970 के दशक में हमारे कुछ उत्साही नौजवान बंदूक के सहारे व्यवस्था बदलने की सोच को लेकर नक्सल आंदोलन की शुरुआत किये भले ही आज यह आंदोलन एक अपराधी गैंग के हाथों सिमट कर रह गया है लेकिन इस आंदोलन ने सिस्टम को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाने के लिए जरुर मजबूर किया लेकिन हिंसा आधारित आन्दोलन का जो हश्र होता है वही हश्र नक्सल आंदोलन का भी हुआ ।

दूसरा विकल्प गांधीवाद है उसके लिए आपके अंदर नैतिक बल होना चाहिए साथ ही जेल जाने के डर से बाहर निकलना पड़ेगा आज ना तो इसके लिए समाज तैयार है ना ही हमारी युवा पीढ़ी ।सोशल मीडिया के आने से थोड़ी उम्मीद जगी थी लेकिन भाई साहब लोग इसको भी गर्त में पहुंचा दिये आज हर गांव में एक सोशल मीडिया से जुड़े लोग मिल जायेंगे जो सुबह से शाम तक मिड डे मील की जांच करने स्कूल स्कूल में घूमता रहता है , बात नहीं बनी तो फिर जनवितरण प्रणाली के दुकान पर चला जाता है, इससे भी बात नहीं बनी तो अस्पताल पहुंच जाता है और दिन भर में सौ दो सौ करते करते एक हजार रुपया तक उगाही कर लेता है ।

यही चल रहा है बिहार में हाल ही छपरा से एक सीनियर पुलिस अधिकारी का फोन आया संतोष जी सामने एक लड़का बैठा है कह रहा है कि मैं पटना के एक पोर्टल का संपादक हूं देखिए कैसे ये जनाब एक गरीब का फसा दिया है। हुआ ऐसा कि संपादक महोदय कुछ दिन पहले छपरा गये थे और एक चप्पल बनाने वाले कारोबारी को ऑर्डर दिया कि इस नाम से एक हजार हवाई चप्पल बना दो और इसके लिए एडभान्स के रूप में 5 हजार रुपया भी दे दिया, जिस दिन चप्पल लेने के लिए वो कारोबारी फोन किया उस दिन संपादक महोदय उस कंपनी के बिहार हेड को लेकर छपरा पहुंचे और थाने में बड़े ब्रांड का नकली समान बनाने का आरोप लगाते हुए केस करवा दिया ।

पुलिस उस कारोबारी के घर छापा मारा तो ब्रांडेड कंपनी का नकली चप्पल उसके घर से बरामद हुआ पुलिस वहां काम करने वाला जो भी कारीगर था सबको पकड़ कर थाने ले आया पुलिस के लिए ये बड़ी उपलब्धि थी इसलिए पूछताछ के लिए सीनियर अधिकारी भी थाने पहुंच गये इस बीच संपादक महोदय पुलिस की कार्रवाई का लाइव रिपोर्टिंग करते रहे।

सीनियर अधिकारी जब थाना पहुंचा तो पूछताछ में पता चला कि चप्पल कारोबारी कानपुर के चप्पल बनाने वाली कंपनी में काम करता था लॉकडाउन में कंपनी बंद हो गया तो छपरा लौट आये और यहां आकर चप्पल बनाना जानते थे ही ,यही घर पर छोटा सा फैक्ट्री बैठा कर चप्पल बनाते हैं और गांव गांव घूम कर बेचते हैं ये मेरा भतीजा है जो साथ कानपुर में काम करता था।

ये जो मोबाइल चला रहे हैं वहीं आये हुए थे एक माह पहले मुझे एक नाम दिये और पांच हजार एडभान्स दिये और बोले जो एक हजार पीस चप्पल इस नाम से बना दो मैंने बना करके फोन कर दिये फिर ये घटना घटी है ।

पुलिस जब कंपनी वाले से पूछा तो पता चला ब्रांडेड कंपनी इस तरह जो नकली सामान बेचता है उसको पकड़ने पर कंपनी पकड़वाने वाले व्यक्ति को अच्छा खासा पैसा देता है, संपादक महोदय मीडिया के आर में यही धंधा चला रहा है ।

कभी सूने हैं पत्रकार को भी जिला बदर किया जाता है नहीं ना सूने हैं तो सुन लीजिए यह घटना दरभंगा का है जहां एक राष्ट्रीय चैनल के पत्रकार को डीएम जिला बदर कर दिया इसलिए कि वो रोज एफसीआई गोदाम पहुंच कर उगाही करना चाह रहे थे।

यही हाल सूचना का अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले अधिकांश आरटीआई कार्यकर्ता का हर पंचायत में आपको दो चार मिल जाएगा जिसका दिन भर काम यही है सूचना मांगना और पैसा लेना और यही वजह है कि यह कानून ही निष्प्रभावी हो गया ।ऐसे में समाज भी तय नहीं पा रही है कि असली कौन है और नकली कौन है और इसी का फायदा सिस्टम उठा रहा है ।

ऐसे में भ्रष्टाचार और जुल्म के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए संगठित होने कि जरूरत है आज हो क्या रहा है भ्रष्टाचार और गलत काम करने वालो को बचाने के लिए सारा चोर एक साथ खड़ा हो जा रहा है लेकिन सही के लिए लड़ाई लड़ने वाले अक्सर अकेले पड़ जाता है ।

हाईकोर्ट ने पूर्वी चम्पारण के केसरिया ज़िला परिषद के चुनाव में उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि के समक्ष मतगणना नहीं होने के मामले पर की सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने पूर्व चम्पारण के केसरिया ज़िला परिषद के चुनाव में उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि के समक्ष मतगणना नहीं होने के मामले पर सुनवाई की।हेमंत कुमार की जनहित याचिका पर जस्टिस राजन गुप्ता की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को मतगणना के समय वीडिओ और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
इस जनहित याचिका में यह आरोप लगाया गया कि चुनाव के बाद हुए मतगणना के दौरान न तो उम्मीदवार उपस्थित थे और न ही उनके प्रतिनिधि।मतगणना उनके अनुपस्थिति में हुआ और बाद में एक चार्ट में मतगणना का परिणाम दे दिया गया।

राज्य निर्वाचन आयोग के वरीय अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया गया कि चुनाव के बाद मतगणना नियमानुकूल हुई।इसमें किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हुई।साथ ही सारी मतगणना प्रक्रिया का वीडिओ और सीसीटीवी फुटेज मौजूद है।

इस पर कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि मतगणना से सम्बंधित वीडिओ और सीसी टीवी फुटेज की जांच व् परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करें।इसके साथ ही कोर्ट ने मामले को निष्पादित कर दिया।

अपराधिक घटनाओं से जुड़े मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर हाईकोर्ट सख्त

पटना हाईकोर्ट में राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों से जारी की जाने वाली मेडिकल,इंजुरी व पोस्टमार्टम रिपोर्ट को computerised (डिजिटल) करने के जनहित याचिका दायर किया गया है।ये जनहित याचिका अधिवक्ता ओम प्रकाश ने दायर किया है।

उन्होंने इस जनहित याचिका में यह आरोप लगाया कि अधिकतर सरकारी और निजी अस्पतालों से निर्गत मेडिकल,इंजुरी व पोस्टमॉर्टम हस्तलिखित होता हैं।इससे न सिर्फ पढ़ने में कठिनाई होती है, बल्कि सही अर्थ भी नहीं निकल पाता है।
रिपोर्ट की लिखावट स्पष्ट नहीं होने के कारण पढ़ने में बहुत मुश्किलें होती है।यहीं रिपोर्ट पुलिस थाना से होते हुए कोर्ट में आता है।यहाँ इस तरह के रिपोर्ट पढ़ने में मुश्किल होने के कारण न्यायिक प्रक्रिया मे बाधा उत्पन्न होता हैं।

इससे पूर्व 16 दिसंबर,2020 को याचिकाकर्ता ने इस सम्बन्ध में जनहित याचिका दायर किया था।हाईकोर्ट ने इस मामले पर सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को इस सम्बन्ध में अभ्यावेदन दायर करने का आदेश दिया था।साथ ही सम्बंधित अधिकारी को यह निर्देश दिया था कि इस मामले में विचार कर दो माह में निर्णय लें।लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट के निर्देश के अनुसार इस सम्बन्ध में याचिककर्ता दुबारा हाईकोर्ट के समक्ष ये मामला विचार के लिए रखा।

पत्रकार हत्याकांड के खिलाफ परिजन उतरे सड़क पर कहां पुलिस दोषी को बचाने में लगी है

पत्रकार अविनाश कुमार उर्फ बुद्धिनाथ झा की हत्या को लेकर आज भी पूरे बिहार में हंगामा जारी रहा वहीं अविनाश के परिजन मधुबनी पुलिस के कार्यशैली को लेकर सड़क पर उतर आये और थाने के सामने सड़क पर बैठकर परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया।

अविनाश सोशल मीडिया पर खबरों का चैनल चलाते थे। साथ ही वे नवजातों की थेरेपी का क्लीनिक भी चलाते थे। परिजनों का आरोप है कि अविनाश बेनीपटट्टी के कई फर्जी नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई के लिए कागजी प्रक्रिया कर रहे थे, इसलिए उनकी हत्या की गई है।

पुलिस ने इस मामले में नर्स समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। बेनीपट्टी एसडीपीओ अरुण कुमार सिंह ने जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करने का दावा भी किया है। उन्होंने बताया कि अविनाश झा हत्याकांड में अरेर थाना क्षेत्र के अतरौली की पूर्णकला देवी, बेनीपट्टी के रोशन कुमार साह, बिट्टू कुमार पंडित, दीपक कुमार पंडित, पवन कुमार पंडित व मनीष कुमार को गिरफ्तार किया गया है। सभी से सघन पूछताछ की जा रही है। हत्या मामले में पुलिस प्रेम प्रसंग और नर्सिंग होम संचालकों की संलिप्तता दोनों बिन्दुओं पर जांच कर रही है।

बिहार के विकास का सच आया सामने

विधानसभा के आम चुनाव में देरी है। सो, तारापुर-कुशेश्वरस्थान के उप चुनाव को मिनी आम चुनाव तो नहीं, रिहर्सल कह सकते हैं। उप चुनाव के अनुभव से आम चुनाव के लिए सटीक पात्र तय होंगे। विषय वस्तु का निर्धारण होगा। दर्शकों की रुचि की विविधता को देखते हुए कुछ रोचक पटकथा लिखी जाएगी। तारापुर में जदयू और राजद-दोनों ने कठोर श्रम किया।

हाल के दिनों का यह पहला उप चुनाव था, जिसमें हर घर नेता पहुंचे। कड़ी मेहनत किसे कहते हैं, इसका अहसास सभी दलों को हुआ।जदयू के नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह इसी क्षेत्र में बंधे रहे। भवन निर्माण मंत्री डा. अशोक चौधरी प्रभारी बनाए गए थे।

चुनाव के दौरान वह एक दिन के लिए भी पटना नहीं आए। मतदान के दिन भी वे जमुई जिले में बैठे थे। राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल और उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने रोड शो किया। केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने कई गांवों में गए। पार्टी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा इस क्षेत्र के गांवों में गए।

विधानसभा के पिछले चुनाव में रालोसपा उम्मीदवार को पांच हजार से अधिक वोट मिले थे। कुशवाहा ने इन वोटरों को जदयू में हस्तांतरित कराने की पूरी कोशिश की। सरकार का शायद ही कोई मंत्री और जदयू का सांसद या विधायक हो, जिन्होंने उप चुनाव में वोट नहीं मांगा।

जाति बनाम विकास
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नारा न्याय के साथ विकास है। चुनाव जीतने के लिए यह काफी नहीं होता है। इसलिए जिस जाति का गांव था, उसी जाति के नेता की ड्यूटी लगाई गई। प्रचार के दौरान यह भी पता चला कि अंदरूनी हिस्से में विकास की रफ्तार ठीक नहीं है।

प्रचार के दौरान जदयू प्रवक्ता संजय सिंह को ग्रामीणों ने खराब सड़क की शिकायत की। ललन सिंह को कई जगहों पर कहना पड़ा कि प्राथमिकता के आधार पर अंदरूनी सड़कों की मरम्मत करा देंगे। इसके अलावा अफसरों की काम टालू प्रवृति और रिश्वखोरी की शिकायतें भी इफरात में मिली। सवाल उठता है कि किसी एक क्षेत्र में इतनी मेहनत आम चुनाव में भी संभव है क्या?

तेजस्वी को शुद्ध लाभ
कड़ी मेहनत के बावजूद राजद चुनाव हार गया। जदयू की तरह उसके भी विधायक-पूर्व विधायक पंचायतों में भर चुनाव मौजूद रहे। तेजस्वी यादव ने अकेले चुनाव लड़ने और अपने समीकरण से बाहर का उम्मीदवार देकर नया प्रयोग किया था। इन प्रयोगों पर उन्हें अफसोस करने की जरूरत नहीं है। तेजस्वी को शुद्ध लाभ यह हुआ कि परिवार ने भी उनके नेतृत्व को स्वीकार कर लिया।

विश्लेषण का एक पक्ष यह भी है कि राजद अपने संस्थापक लालू प्रसाद के दौर से निकल गया है। उनकी पुरानी शैली राजद के बदले प्रतिद्वंद्वी को लाभ पहुंचाती है। हां, लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान को भी उप चुनाव से संदेश मिला-अकेले चलते रहे तो घाटे में ही रहेंगे।

लेखक –अरुण अशेष

रोड एक्सीडेंट मामले में बिहार देश में बना अव्वल

स्पीड का कहर जी है बिहार में इन दिनों अपराधिक घटनाओं से कही अधिक मौते स्पीड के कहर से हो रहा है आज सुबह से ही बिहार के अलग अलग हिस्सों से अभी तक एक दर्जन से अधिक लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत की खबर आ चुकी है वही कई लोग जिंदगी और मौत से जुझ रहे हैं ।

सुशांत सिंह राजपूत के रिश्तेदारों की सड़क दुर्घटना में हुई थी मौत


सुबह सुबह आज लखीसराय जिले में हुए एक हादसे में (Lakhisarai Road Accident) जमुई जिले के खैरा थाना इलाके के भंडरा गांव के एक परिवार के छह लोगों की मौत हो गई. हादसे का शिकार हुए छह लोगों में से चार लोग सुशांत सिंह राजपूत के जीजा के रिश्तेदार थे. जीजा जी हरियाणा कैडर के डीजी रैक के अधिकारी ओमप्रकाश सिंह के चार रिश्तेदार इस दुर्घटना में मारे गए हैं.

ओमप्रकाश सिंह की बहन का अंतिम संस्कार कर उनकी बहन के पति अपने दो बेटे और एक बेटी समेत कुल 10 लोगों के साथ सुमो विक्टा में सवार थे जो अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद पटना से अपने घर लौट रहे थे. लखीसराय के पास उनकी गाड़ी सड़क हादसे का शिकार हो गई जिसमें 6 लोगों की मौत मौके पर ही हो गई जबकि चार गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों में दो लोगों को जमुई जबकि दो लोगों को पटना रेफर किया गया है.
दूसरी खबर बगहा से है जहां बगहा नगर थाना के सिकटिया मच्छरगावा गांव के समीप तेज गति से आ रहे बाइक व बैल गाड़ी के आमने सामने हुई भिड़ंत में एक की मौत हो गई। वही दो लोग गम्भीर रूप से घायल हो गए। घायलों का इलाज स्थानीय स्तर पर चल रहा है। मृतक चिउटांहा थाना क्षेत्र के रतनपुरवा के निवासी मृतक अतुल कुमार है जो अपने मां बाप के एकलौता संतान था।
तीसरी खबर कटिहार के पोठिया प्रखंड से कुरसेला से आ रही है अनियंत्रित मारुति कार पेड़ से टकराई,जिसमे कार में सवार एक दिव्यांग महिला की मौत इलाज के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हो गयी ,जबकि चालक गंभीर रूप से घायल है,मृतक फारबिसगंज के बताए जा रहे है और अपने घर से महेशखूंट जा रहे थे,घटना कुर्सेला के महेशपुर के समीप की है
चौथी खबर गोपालगंज से आ रही है जहां मीरगंज थाना के नरैनिया एसबीआई बैक के पास एक जिला प्रशासन लिखी तेज़ रफ़्तार अनियंत्रित गाडी ने एक बाइक को कुचल दिया। घटना स्थल पर ही बाइक सवार की मौत हो गयी। वहीं दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर रेफर कर दिया। मृतक की पहचान मीरगंज थाना क्षेत्र के मानिकपुर गांव निवासी कपिल देव पंडित के पुत्र हरि किशुन पंडित के तौर पर हुई है। घायल युवक नगर थाना के गोसाई टोला निवासी घोघी पण्डित के पुत्र मुंद्रिका पण्डित है।

बिहार में शराबबंदी को लेकर पत्रकार का पत्र सीएम के नाम

राज्य के मुख्यमंत्री के नाम एक पत्रकार का पत्र

नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री , बिहार

आज के सभी अखबारों में शराबबंदी को लेकर आपका एक संदेश छपा है जिसमें शराबबंदी को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव है ।साथ ही आज आप शराबबंदी कानून को और प्रभावी ढंग से कैसे लागू किया जाये इस पर बैठक करने वाले हैं ।
शायद आपको याद नहीं होगा लेकिन मुझे पूरी तौर पर याद है जब आपकी सरकार ने बिहार के गांव गांव में शराब बिक्री केन्द्र खोलने का निर्णय लिया था उस निर्णय के एक वर्ष पूरे होने पर उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग द्वारा अभियंता भवन में बड़े स्तर पर मध निषेध दिवस का आयोजन किया गया था ।
कार्यक्रम के समापन के बाद चलते चलते मैंने आपसे एक सवाल किया था एक तरफ आप शराब से होने वाले नुकसान को लेकर आज पूरे बिहार में मध निषेध दिवस मना रहे हैं दूसरी और गांव गांव में आप शराब बिक्री केन्द्र खोल रहे हैं जिस वजह से गांव स्तर पर शराब पीने वाले एक नये वर्ग का उदय हुआ, घरेलू हिंसा और अन्य अपराध में काफी वृद्धि हुई है और गांव की शांति समाप्त हो गयी है ।
आप हंसते हुए उस समय के उत्पाद एवं मद्य निषेध विजेंद्र यादव की ओर देखते हुए कहा था विजेंद्र बाबू संतोष जी के सवाल का जबाव दीजिए, ऐसा लगा मंत्री जी इस सवाल के जबाव को लेकर पूरी तैयारी के साथ कार्यक्रम में भाग लेने आये थे ।
मंत्री जी बोलने लगे महाराष्ट्र ,हरियाणा ,पंजाब और उत्तर प्रदेश में आबादी के हिसाब से जितनी दुकाने हैं उससे आज भी बिहार में आधे से कम शराब की दुकाने हैं अभी भी बिहार में और शराब की दुकाने खोलने पर सरकार विचार कर रही है और बात घरेलू हिंसा कि है तो इसलिए तो आज पूरे बिहार में स्कूल स्तर पर भी मध निषेध दिवस मनाया जा रहा है ताकी लोगों में जागरुकता आ सके कि शराब पीना से सेहत और परिवार का कितना नुकसान होता है ।
खैर अब इन सवालों का कोई मतलब नहीं रह गया है बात अब हम शराबबंदी कानून को लेकर करते हैं पहली बात आपके जानकारी के लिए पत्रकार होने के बावजूद शराब के एक बूंद का सेवन मैंने अभी तक नहीं किया हूं ।
मैं ही नहीं मेरे पूरे परिवार में चाहे वो बहन का पक्ष हो ,ससुराल का पक्ष हो, ननिहाल का पक्ष हो स्थिति यह है कोई लेता भी होगा तो पता किसी को नहीं है शराब को लेकर यह धरना आज भी है इसलिए शराबबंदी कानून के पक्षकार में भी हूं लोग इस कानून की जीतनी भी आलोचना कर ले आज भी कितने भी रसुख वाले लोग क्यों ना हो शराब पीकर चौक चौहारे पर गुंडागर्दी नहीं कर सकता है पीये हुए हैं तो साइज में है यह स्थिति अभी भी है।
वहीं दूसरी ओर सच्चाई यह भी सच्चाई है कि शराब बिहार के हर गांव में उपलब्ध है और जब चाहे आपको आपके घर पहुंचा दिया जायेगा और यह सब पुलिस और उत्पाद विभाग से जुड़े कर्मियों के सहयोग से ही चल रहा है और इसको रोकना आपके बस में नहीं है क्यों कि इस धंधे ने पूरे बिहार में एक ऐसा नेटवर्क खड़ा कर दिया है जिसको तोड़ना सम्भव नहीं है कुछ दिन पहले तक इस खेल में पुलिस मुख्यालय के आलाधिकारी भी शामिल थे लेकिन फिलहाल वैसी स्थिति नहीं है लेकिन अवैध शराब से जो कमाई हो रही है उसका हिस्सा गांव के चौकीदार से लेकर पटना तक पहुंचता है ।
आज बिहार का हर थाना धनबाद के किसी भी थाने से कम नहीं है बिहार के अधिकांश जिलों का हाल यह है कि इन दिनों धनबाद भी फेल है थाने की बोली लाखो में लगती है और फिर महिना अलग से आपको जानकारी में हो या नहीं हो सीनियर अधिकारी से लेकर थाने स्तर पर पोस्टिंग के लिए पटना में एक लाँबी काम कर रही है हलांकि इसको आप तोड़ सकते हैं ।
लेकिन शराब के अवैध कारोबार की वजह से गांव गांव में शराब कारोबारी पैदा हो गया जो लाखो में खेल रहा है और अब स्थिति यह है कि हर गांव में एक अलग तरह का अर्थतंत्र पैदा ले लिया है जो गांव की पूरी व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है।
मुख्यमंत्री जी आपके जानकारी के लिए इस बार के पंचायत चुनाव में 500 करोड़ से अधिक की राशी मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए उम्मीदवारों की और से खर्च किया गया है और इसमें शराब कारोबारी सबसे आगे हैं कैमूर से शुरु करिए और किशनगंज पहुंच जाइए बगहा से शुरु करिए वैशाली पहुंच जाइए कई शराब माफिया तो जेल में रहते हुए चुनाव जीता है ।
हलात यह है कि पंचायत में दो तरह के माफिया पैसा लूटा रहा है एक तरफ शराब माफिया पैसा बहा रहा है तो दूसरी और हर घर नल जल योजना को लूटने वाला मुखिया है एक एक पंचायत में मुखिया उम्मीदवार 40 से 50 लाख रुपया खर्च किया है,बड़ी संख्या में शराब कारोबारी चुनाव जीत कर आया है हाल ही छठ के दौरान बिहार के कई अधिकारियों से मिलने के मौका मिला जब इस विषय पर चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि संतोष जी जिस शराब माफिया को पकड़ने के लिए खगड़िया ,बेगूसराय और समस्तीपुर की पुलिस परेशान था दो माह पूर्व वो पकड़ा गया अभी जेल में बंद है और कल वो जेल में रहते मुखिया का चुनाव जीत गया है ।
हर पंचायत का यही हाल है हर पद पर शराब कोराबारी चुनाव लड़ रहा है ऐसे में पुलिस और प्रशासन क्या करेंगा कल वो प्रखंड प्रमुख बनेगा ,जिला परिषद का अध्यक्ष बनेगा ,मुखिया बन ही गया है ऐसे में इन लोगों पर कार्रवाई करना और मुश्किल हो जायेंगा अवैध पैसा का इस्तमाल इस स्तर पर होने लगा है ।
पुलिस के आलाधिकारी का कहना है कि शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है जो थानेदार हाथ डालता है उसके क्षेत्र में अलग तरह का क्राइम बढ़ जाता है कोई भी घटना घटती है ऐसे तत्व पुलिस पर हमला कराने में जुट जाता है बहुत मुश्किल होता जा रहा है फिल्ड में काम करना।
छठ के दौरान बेगूसराय के बखरी में एक व्यक्ति की डूबने से मौत हो गयी और इस घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने बखरी के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (डीएसपी) के सरकारी आवास पर हमला बोल दिया उस वक्त उनकी पत्नी और बच्चा घर में मौजूद था वो चिखती और चिल्लाती रही और भीड़ आवास में तोड़फोड़ करता रहा तत्तकालिक कारण जो भी रहा लेकिन उस हंगामे में शराब माफिया की बड़ी भूमिका थी ।
आये दिन पुलिस को लोग पीट रहे है कही पैर में बांध कर तो कही बिजली के खम्भे में बांध कर पिटाई करते वीडियो वाइरल हो रहा है यू कहे तो सरकार का इकबाल खतरे में है ऐसे में ये अब आपके जिद्द से राज्य को नुकसान हो रहा है कानून का राज खतरे में है ,पूरी व्यवस्था भ्रष्ट होने के कगार पर है ऐसे में शराबबंदी कानून पर नये सिरे से सोचने कि जरुरत है ।

3270 स्थाई आयुष चिकित्सकों नियुक्ति शीघ्रः मंगल पाण्डेय

3270 स्थाई आयुष चिकित्सकों नियुक्ति शीघ्रः मंगल पाण्डेय
प्रदेश के लोगों में देसी चिकित्सा के प्रति बढ़ रहा विश्वास

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में देसी चिकित्सा पद्धति को विकसित करने का लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही आयुष अस्पतालों की स्थिति को सुधारने के लिए भी कवायद चल रही है। इसके तहत देसी चिकित्सा कॉलेज और अस्पतालों को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके लिए आधारभूत संरचनाओं को मजबूत और चिकित्सको के रिक्त पदों पर नई नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। उन्होंने कहा कि अगले साल जनवरी तक 3270 आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी।
श्री पांडेय ने कहा कि आयुर्वेदिक, यूनानी एवं होम्योपैथिक चिकित्सकों की 3270 पदों पर नियुक्ति के लिए अधियाचना बिहार तकनीकी सेवा आयोग को भेजी गयी थी। इसके आलोक में आयोग द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। कुल 3270 पदों में से 50 फीसदी यानि 1635 पर आयुर्वेद, 30 फीसदी यानि 981 पर होमियोपैथी और 20 फीसदी यानि 654 पदों पर यूनानी चिकित्सक नियुक्त किये जाएंगे। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में आयुष चिकित्सा के प्रति भी लोगों का आकर्षण बढ़ा है। राज्य आयुष समिति की रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है कि प्रदेश के लोग एलोपैथी के साथ-साथ आयुष चिकित्सा को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
श्री पाण्डेय ने कहा कि आयुष चिकित्सा के विकास-विस्तार एवं इसकी सुविधा जन-जन तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। राज्य के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 1384 आयुष चिकित्सकों का चयन कर नियोजन किया गया है। आयुर्वेदिक के 704, होमियोपैथी के 428 व यूनानी के 252 चिकित्सक हैं। 3270 नियमित आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति होने से राज्य के लोग और बेहतर तरीके से अपना देसी चिकित्सा पद्धति से उपचार करा सकेंगे। इन चिकित्सकों की नियुक्ति आयुर्वेदिक, होमियोपैथिक और यूनानी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के साथ-साथ अन्य अस्पतालों में की जाएगी।

छिटपुट घटनाओं को छोड़ पंचायत चुनाव का सातवा चरण का मतदान सम्पन्न

बिहार पंचायत चुनाव में सातवें चरण की सीटों पर मतदान छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण सम्पन्न हो गया है । आज 37 जिलों के 63 प्रखंडों के 903 पंचायतों में वोटिंग हुई है आज के वोटिंग में भी महिलाए बढ़ चढ़ कर हिस्सा ली है । आज के मतदान का मतगणना17 और 18 नवंबर को होगी। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार सातवें चरण के मतदान में भी मतदाताओं ने जमकर उत्साह दिखाया 65 से 70 प्रतिशत मतदान की खबर है और अभी भी कई मतदान केन्द्रों पर अभी भी वोटिंग चल रही है ।आयोग के अनुसार आज के वोटिंग में 7 जगह ईवीएम खराब हुए हैं,मतदान केंद्र पर मारपीट हंगामा की तीन घटनाएं घटी है, बोगस वोटिंग के दो मामले हुए हैं बूथ कैपचरिंग के तीन मामले हुए हैं ।

ईवीएम अंधेरे में होने के 1 मामले सामने आए हैं,मतदान केंद्र पर विधुत व्यवस्था नहीं होने के 1 मामले सामने आए हैं वही कुछ नेपाली उपद्रवियों द्वारा मतदान केंद्र पर हंगामा बूथ कैपचरिंग का एक मामला सामने आया है।इन सभी मामलों को लेकर आयोग गंभीर है अभी तक प्राप्त शिकायत के आधार पर3 बूथो पर पुनर्मतदान का निर्णय आयोग ने लिया है ।

आज के मतदान में क्या खास रहा

1– सीतामढ़ी के सुरसंड प्रखंड बूथ संख्या 199 पर EVM खराब हो गया था इस वजह से प्रत्याशियों ने जमकर हंगामा किया ।

2–छपरा की नगरा पंचायत की सरपंच चंदू देवी के पति वोटिंग के दौरान शराब की बोतल के साथ गिरफ्तार। नशे में धुत सरपंच पति पर शराब और पैसे बांटने का आरोप

3–अररिया के रामपुर उत्तर बूथ संख्या 91 पर ईवीएम खराब होने के चलते दो घंटे तक मतदान बाधित रहा।

4—अररिया के फ़ारबिसगंज प्रखंड के रामपुर दक्षिण बूथ नंबर 104 पर बायोमेट्रिक नहीं होने पर लोगों ने हंगामा किया।

5—पूर्वी चंपारण के छौड़ादानो प्रखंड क्षेत्र के जुआफर गांव में मतदान के दौरान पुलिस व पब्लिक के बीच झड़प के बाद पहुंचे पुलिस अधीक्षक नवीन चंद्र झा ने दबंग निवर्तमान मुखिया व मुखिया प्रत्याशी सोनू कुमार उर्फ सोनू मुखिया सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मतदान के दौरान पुलिस से झड़प के दौरान पुलिस टीम पर पथराव भी हुआ था। इस झड़प में कुछ पुलिसकर्मी चोटिल हुए थे और कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।

6———-सीतामढ़ी जिले के सुरसंड के दिवारी मतौना टोला प्राथमिक विद्यालय बूथ नंबर 189 क पर फर्जी मतदाता द्वारा मतदान करने को लेकर दो प्रत्याशियों के पोलिंग एजेंट आपस में भिड़े । पुलिस ने एक पोलिंग एजेंट मनजीत राय को हिरासत में लिया। दूसरा फरार हो गया। पुलिस कर रही तलाश।

7———भागलपुर में बड़ी कार्रवाई! एसएसपी निताशा गुड़िया ने मतदान प्रभावित होने से रोकने के लिए चार लोगों को हिरासत में लिया है। उन्हें मतदान खत्म होने के बाद छोड़ा जाएगा। एसएसपी के आदेश पर बूथ संख्या 78 के पास से हिरासत में लिए गए पप्पू सिंह।

8—-लखीसराय के सूर्यगढ़ा प्रखंड की चंदनपुरा पंचायत के मानो गाव में मुखिया प्रत्‍याशियों के दो गुटों के बीच झड़प हो गई है। इसमें कई लोग इसमें जख्मी हो गए हैं। पुलिस ने उपद्रवी तत्‍वों को बूथ के पास से खदेड़कर भगा दिया है।

9—दरभंगा के केवती में पंचायत चुनाव की वोटिंग के दौरान दो गांव के लोगों को बीच भिड़ंत हो गई. बोगस वोटिंग के आरोपों के बाद समैला के उसराहि मदरसे के पास समेला गांव और लालगंज गांव के लोगों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 6 लोग घायल हो गए. कई गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई ।

10—हाजीपुर के भगवानपुर में पंचायत चुनाव की वोटिंग के दौरान बिठौली में बूथ नंबर 122 पर दो पक्षों में भिड़ंत हो गई. बूथ पर भारी हंगामा हुआ. पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है ।

11—मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड के पिपरौन पंचायत में सोमवार को सातवें चरण में 6 पदों के लिए मतदान हुआ. पिपरौन पंचायत बूथ नंबर 134, 135, 136 पर हंगामे की खबर के बाद स्थानीय लोगों ने मिलकर मामले को शांत किया. वहीं प्रत्याशियों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया है ।

जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में 121 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज 4 देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए। ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे 121 लोगों की समस्याओं को सुना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को समाधान के लिए समुचित कार्रवाई के निर्देश दिए।

आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में सामान्य प्रशासन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, पंचायती राज विभाग, ऊर्जा विभाग, पथ निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, कृषि विभाग, सहकारिता विभाग, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, जल संसाधन विभाग, उद्योग विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, परिवहन विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, लघु जल संसाधन विभाग योजना एवं विकास विभाग, पर्यटन विभाग, भवन निर्माण विभाग, वाणिज्य कर विभाग, सूचना एवं जन-संपर्क विभाग, गन्ना (उद्योग) विभाग के मामलों पर सुनवाई हुयी।

‘जनता दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम में गोपालगंज से आए एक युवक ने बताया कि वर्ष 2013 में उसने बिजली का कनेक्शन लिया था। वह बिजली बिल का नियमित भुगतान करता है। बावजूद इसके उसे एक माह का बहुत अधिक बिल भेज दिया गया और संबंधित विभाग के oo द्वारा तंग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को इसकी जांच कर समुचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। रोहतास जिले से आयीं एक वार्ड सदस्या ने मुख्यमंत्री को बताया कि नल-जल योजना की सारी राशि मुखिया द्वारा निकासी कर ली गई है। योजना के तहत सही तरीके से काम भी नहीं कराया गया है। वहीं समस्तीपुर से आए एक शख्स ने बताया कि 35-40 वर्ष पूर्व उनके गांव की सड़क बनाई गई थी। अब यह सड़क पूरी तरह बदहाल हो गई है।

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

छपरा से आये एक फरियादी ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि परिवहन विभाग ने निजी फिटनेस केंद्र को कार्यपालक के आदेश से बंद दिया है। फिटनेस सेंटर बंद होने से बिना फिटनेस के ही सड़कों पर गाड़ियां दौड़ रही हैं। फिटनेस सेंटर के बंद होने से बहुत सारे लोग बेरोजगार हो गये हैं। 

मुख्यमंत्री ने फरियादी की शिकायत सुनने के उपरांत  संबंधित विभाग को मामले की जांच कर न्यायोचित कदम उठाने का निर्देश दिया। कटिहार के एक युवक द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने के संबंध में शिकायत की तो वहीं गोपालगंज के एक व्यक्ति ने ऊर्जा विभाग से अवकाश प्राप्त करने के बाद उन्हें पेंशन, जी०पी०एफ० एवं ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। बांका के एक व्यक्ति जन वितरण प्रणाली द्वारा अच्छी गुणवत्ता वाले खाद्यान्न का वितरण नहीं किए जाने की शिकायत की तो वहीं शिवहर की एक महिला ने शौचालय निर्माण कराने के दो वर्ष बाद भी राशि नहीं मिलने की शिकायत की। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

पूर्णिया के एक व्यक्ति ने गुलाबबाग में वर्षों से बंद पड़े जलमीनार को चालू करने के संबंध में शिकायत की और कहा कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने में दिक्कत हो रही है। वहीं पूर्वी चंपारण के एक शिकायतकर्ता ने शिकायत करते हुए कहा कि लाइसेंस प्राप्त उनके आरा मशीन को अनुचित तरीके से बंद कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

पटना सदर के एक व्यक्ति ने शिकायत करते हुए कहा कि उद्योग विभाग द्वारा बिहार राज्य हस्तकरघा बुनकर सहयोग समिति संघ लिमिटेड के खाता पर रोक लगा दी है, जिससे सतरंगी चादर का निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है और बुनकरों के काम में दिक्कत हो रही है। वहीं किशनगंज के एक व्यक्ति ने महानंदा नदी पर ठाकुरगंज प्रखंड खरखरी एवं भेरभेरी के बीच पुल निर्माण को लेकर आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई का निर्देश दिया।

 प्रदेश के बलिया जिले से आए एक बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा कि वे बिहार में सरकारी कर्मी थे और इसी साल सेवानिवृत्त हुये हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि कुछ दिनों से उनको मिलने वाली पेंशन में कटौती कर दी गई है। मुख्यममंत्री ने संबंधित विभाग को पूरे मामले की जांचकर समस्या समाधान करने का निर्देश दिया।

शराबबंदी को लेकर नीतीश कुमार कल करेंगे समीक्षा बैठक कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराब बंदी की समीक्षा करने जा रहे हैं इसको लेकर आज मीडिया से बात करते हुए नीतीश कुमार ने दो टुक कह दिया कि मेरे रहते शराबबंदी कानून के वापस होने का सवाल ही पैदा नहीं होगा है इतना ही नहीं नीतीश कुमार ने कहा कि शराबबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शराबबंदी कानून में कोताही बरतने वाले पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शराबबंदी को लेकर एक्शन में नीतीश कुमार

साथ ही शराब का सेवन लोग नहीं करें इसको लेकर जागरूकता अभियान चलेगा।बैठक में सभी मंत्री, पदाधिकारी और डीएम-एसपी बैठक में मौजूद रहेंगे।

मेरे रहते शराबबंदी कानून को वापस लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता


वही समीक्षा बैठक पर तंज कसते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि यह समीक्षा नहीं भिक्षा बैठक है जहां आरसीपी टैक्स की वसूली होगी ,अभी तक जितनी भी समीक्षा बैठक हुई है उसका क्या रिजल्ट निकला है देख लीजिए बिहार का सारा शराब माफिया और पदाधिकारी सीधे सीएम आवास से जुड़ा है ।

देश में बिहार नजीर पेश करता रहा है शराबबंदी भी सफल होगा
शराबबंदी फेल होने को लेकर नीतीश जिम्मेवार

कंगना का बयान बस खबर में बने रहने के लिए है ।

कंगना रनौत के ‘भीख में आज़ादी’ वाले बयान

कंगना का बयान चलाने वाले मीडिया को नीतीश ने दी सलाह


पर जमकर बरसे नीतीश कुमार कुमार कहां मीडिया इसको दिखाया कैसी कैसे खबर चलाया ऐसे लोग खबर आने के लिए कुछ भी कर सकती है ।