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बिहार के कटिहार में बेहतर बिजली आपूर्ति को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक होने पर पुलिस गोलीबारी में 2 की मौत हो गई; मौत के बाद फूटा लोगों का गुस्सा, जमकर मचाया हंगामा

कटिहार/पटना: बिहार के कटिहार जिले में बुधवार को अपर्याप्त बिजली आपूर्ति को लेकर प्रदर्शन ने तूल पकड़ लिया, पथराव के बाद पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

पटना में पुलिस मुख्यालय के अनुसार, “बारसोई पुलिस स्टेशन से बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर हुई इस घटना में” एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी और बिजली विभाग के कर्मचारी” घायल हो गए। पीएचक्यू ने कहा, “लगभग 1,000 स्थानीय निवासी बिजली विभाग कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे थे। कुछ असामाजिक तत्व भीड़ में घुस गए और उन्होंने पथराव करना शुरू कर दिया। जब एक पुलिस दल ने उपद्रवियों को रोकने की कोशिश की, तो उन पर भी ईंटों, पत्थरों और लाठियों से हमला किया गया।”

कटिहार के जिलाधिकारी रवि प्रकाश ने पीटीआई-भाषा को फोन पर बताया, ”दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है जबकि एक अन्य का उपमंडल अस्पताल में इलाज चल रहा है.”

मृतकों में से एक की मौके पर ही मौत हो गई, जिसकी पहचान बासल गांव निवासी खुर्शीद आलम (34) के रूप में की गई। दूसरे मृतक की पहचान ज्ञात नहीं हो पाई है, हालांकि वह और अन्य घायल प्रदर्शनकारी पास के गांवों के निवासी बताए गए हैं। घटना स्थल पर कैंप कर रहे कटिहार के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने संवाददाताओं से कहा, “आप स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बिजली कार्यालय का शायद ही कोई हिस्सा बचा हो जहां तोड़फोड़ और पथराव के संकेत न मिले हों।”

बिहार बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने नीतीश की कड़ी आलोचना की….

एसपी ने कहा, “प्रदर्शनकारी अचानक हिंसक हो गए और परिसर में धावा बोल दिया। संबंधित उपमंडल पुलिस अधिकारी समेत अधिकारियों को भीड़ ने बंधक बना लिया, जिन्हें चोटें भी आई हैं। इसलिए, आत्मरक्षा में गोलियों का इस्तेमाल किया गया। जांच जारी है और पुलिसकर्मियों पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” इस बीच, इस घटना की विपक्षी भाजपा और सीपीआई (एमएल)-लिबरेशन ने तीखी आलोचना की, जो बाहर से नीतीश कुमार सरकार का समर्थन करती है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और राज्य भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नित्यानंद राय ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि यह घटना मुख्यमंत्री की जद (यू) और राज्य के सत्तारूढ़ महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राजद के नेतृत्व वाली सरकार की “बर्बरता” को दर्शाती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, जो राजद से हैं, के इस्तीफे की भी मांग की और शिक्षकों की नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा राज्य की राजधानी में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन पर लाठीचार्ज की हालिया घटनाओं के लिए उन्हें दोषी ठहराया। सीपीआई (एमएल)-एल, जो सरकार का हिस्सा न होते हुए भी महागठबंधन का हिस्सा है, ने भाजपा पर कटिहार में “भीड़ को उकसाने” का आरोप लगाया। सीपीआई (एमएल)-एल के विधायक दल के नेता मेहबूब आलम, जो कि बारसोई स्थित बारसोई क्षेत्र के बलरामपुर के विधायक हैं, ने भी प्रत्येक मृतक के परिजनों को “20 लाख रुपये मुआवजा” और घायल प्रदर्शनकारी को अनुग्रह राशि देने की मांग की।

आलम ने कहा, “भीड़ अचानक हिंसक हो गई और हमें यकीन है कि भाजपा ने उन्हें उकसाया था। इसके कार्यकर्ता अराजकता में पनपते हैं, जैसा कि हाल ही में एक प्रदर्शन के दौरान पुलिस कर्मियों पर मिर्च पाउडर फेंकने से स्पष्ट था।” संदर्भ राज्य की शिक्षक भर्ती नीति के विरोध में 13 जुलाई को आयोजित ‘विधानसभा मार्च’ का था, जब प्रदर्शनकारियों में से एक विजय कुमार सिंह की मृत्यु हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है और मृतक के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं हैं।

आलम ने यह भी कहा, “पुलिस को संयम बरतना चाहिए था और गोली नहीं चलानी चाहिए थी। मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।”

नीतीश कैबिनेट की बैठक में 35 एजेंडों पर लगी मुहर; जानें किन एजेंडों पर लगी मुहर

पटना। मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में कुल 35 एजेंडों को मंजूरी दी गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों और विकासात्मक परियोजनाओं को शामिल किया गया।

बिहार कैबिनेट निर्णयों पर मुख्य सचिव ने कहा कि कैबिनेट ने कुल 35 प्रस्तावों पर अपनी सहमति दी। प्रमुख निर्णयों में नगर विकास विभाग के तहत आरा में जल निकासी के लिए 77 करोड़ रुपये के आवंटन को मंजूरी दी गयी। साथ ही बेतिया-नरकटियागंज गौनाहा बाजार पथ के निर्माण के लिए 74.42 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गयी।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अंडा नहीं खाने वाले बच्चों को सप्ताह में दो दिन बुधवार व शुक्रवार को भुनी हुई मूंगफली देने का निर्णय लिया गया। इसके लिए 216.16 करोड़ रुपए स्वीकृत किये गये। इसी तरह मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत 30 हजार निजी नलकूप लगाने के लिए 222 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गयी।

बैठक के दौरान कैबिनेट ने बिहार सूचना आयोग में पहले से मौजूद पदों के अलावा विभिन्न श्रेणियों के 5 पदों के सृजन की मंजूरी दे दी। सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और सदर अस्पताल में शौचालय और स्नानघर के निर्माण के लिए सुलभ इंटरनेशनल को दी गई अनुमति थी।

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कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना को भी हरी झंडी मिल गई। पांच मंडल मुख्यालयों- गया, दरभंगा, पटना और मुजफ्फरपुर में महिला छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा, जिसका उद्देश्य राज्य में महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करना है।

कैबिनेट में चर्चा के प्रमुख एजेंडे इस प्रकार हैं

  • बेतिया-नरकटियागंज गौनाहा बाजार सड़क निर्माण के लिए 74.42 करोड़ रुपये स्वीकृत
  • मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत 5 मंडल मुख्यालयों में बनेंगे महिला छात्रावास
  • कैबिनेट द्वारा स्वच्छता संबंधी उपाय किए जाने पर सुलभ इंटरनेशनल सरकारी अस्पतालों में शौचालयों का निर्माण करेगा
  • स्वास्थ्य विभाग ने की सख्त कार्रवाई: कई डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त
  • स्मार्ट सिटी पहल का विस्तार: भागलपुर, पटना, मुजफ्फरपुर और बिहारशरीफ में बनाई जाएंगी सोसायटी
  • कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत लाभ को मंजूरी दी
  • कृषि यंत्रीकरण योजना के लिए 119 करोड़ रुपये स्वीकृत
  • बिहार फसल सहायता योजना सब्जी फसलों को लाभ पहुंचाती है
  • राज्य सरकार ने आयोग और बोर्ड के सदस्यों के वेतन को बीपीएससी के बराबर किया

स्मार्ट सिटी पहल के तहत भागलपुर, पटना, मुजफ्फरपुर और बिहारशरीफ में सोसायटी बनाने की तैयारी है। इन समाजों से शहरी विकास और इन शहरों के निवासियों के लिए रहने की स्थिति में सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है।

हालाँकि, कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य विभाग के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाइयों के मामलों को भी संबोधित किया गया। अशोक कुमार सिंह और रवि कुमार आनंद कुमार समेत कई डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी गयी।

इसके अलावा कैबिनेट ने कृषि रोड मैप चतुर्थ के तहत चालू वित्तीय वर्ष में कृषि यांत्रिकीकरण योजना के लिए 119 करोड़ रुपये की निकासी की मंजूरी दे दी. इस कदम का उद्देश्य राज्य के कृषि क्षेत्र में कृषि पद्धतियों को बढ़ाना और उत्पादकता को बढ़ावा देना है।

बिहार में 34540 सहायक शिक्षकों की बहाली के बचे सीट पर कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक बहाली नहीं किये जाने से पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में 34540 सहायक शिक्षकों की बहाली के बचे सीट पर कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक बहाली नहीं किये जाने से नाराजगी जाहिर की। जस्टिस पी बी बजनथ्री की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने शिक्षा विभाग के सम्बन्धित सचिव और प्राथमिक शिक्षा के निदेशक को अगली तारीख पर कोर्ट में उपस्थित हो कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगली तारीख पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ अदालती आदेश के अवमानना के दोषी के लिए आरोप तय किया जायेगा।

कोर्ट का कहना था कि 19 अकटुबर, 2016 को हाई कोर्ट ने छह माह के भीतर सहायक शिक्षक के बचे हुये 2213 सीट पर बहाली प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था।लेकिन करीब सात साल के बाद भी बहाली नहीं की जा सकी।

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कोर्ट ने कोर्ट में उपस्थित निदेशक से जानना चाहा कि सहायक शिक्षक की बहाली करने के अधिकारी कौन हैं।कोर्ट के सवाल पर उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी सहायक शिक्षक को बहाली करने के अधिकारी हैं।

इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी जिला में बहाली करने के लिए अधिकृत हो सकते हैं।लेकिन यह मामला पूरे राज्य का हैं।

कोर्ट ने इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद की जाएगी।

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“इंडिया” बनाम भारत में करोड़ों गरीब-पिछड़े भारत के साथ : सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भ्रष्ट और परिवारवादी विपक्षी दलों के मंच का नाम “इंडिया” रखने से इनकी खोटी नीयत छिपने वाली नहीं है। इनके इलीट, पश्चिम-प्रभावित और हिंदू-विरोधी “इंडिया” को करोड़ों गरीबों, पिछड़ों का संस्कृतिनिष्ठ भारत 2024 में मुँहतोड़ जवाब देगा। इंडिया बनाम भारत मैच में जीत भारत की होगी।

  • नाम बदलने से मॉल का खोटा माल नहीं बदल जाता
  • लालू, ममता, केजरीवाल की हकीकत किसी से छिपी नहीं
  • संयोजक न बनाये जाने से नीतीश कुमार की हुई किरकिरी

श्री मोदी ने कहा कि चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद और चिटफंड घोटाले में लिप्त ममता बनर्जी जैसे दागी लोग जहाँ जुटे हैं, उस नए मॉल का नाम बदल लेने से खोटा माल खरा सोना नहीं हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि बंगलोर में सबसे बड़ी किरकिरी तो नीतीश कुमार की हुई। उन्हें फर्जी “इंडिया’ का संयोजक न बनाये जाने से नाराज होकर पहले ही बैठक से निकल लेना पड़ा। वे प्रेस कांफ्रेन्स में नहीं थे।

Nitish Kumar

बंगलुरू में नीतीश-विरोधी पोस्टर भी लगाये गए थे, जबकि वहाँ सरकार कांग्रेस की है।

श्री मोदी ने कहा कि इन दलों की पटना बैठक में इसी तरह केजरीवाल नाराज होकर दिल्ली लौट गए थे। जो लोग चुनाव से पहले न मन मिला पा रहे हैं, न एक चेहरा तय कर पाए, वे देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई चुनौती नहीं दे पाएँगे।

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। जस्टिस पीवी बजंत्री की खंडपीठ ने एक अवमानना के सिलसिले में श्री पाठक के विरुद्ध जमानतीय वारंट जारी किया।

एक शिक्षिका सुकृति कुमारी को नियमित शिक्षक का वेतन नहीं दे कर नियोजित शिक्षक का वेतन दिया गया,जबकि कोर्ट ने उन्हें नियमित शिक्षक का वेतन देने का निर्देश दिया था ।

अपर मुख्य शिक्षा सचिव के के पाठक की ओर से अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जून, 2023 में पदभार ग्रहण किया है।तब से वे अदालती अवमानना से सम्बन्धित मामलों पर कार्रवाई कर रहे है।

याचिकाकर्ता शिक्षिका सुकृति कुमारी के मामलें में अदालती आदेश का पालन किया जा चुका है।लेकिन कोर्ट ने अदालती आदेश के पालन में हुए बिलम्ब को गंभीरता से लेते हुए जमानतीय वारंट जारी किया।

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अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में कोर्ट द्वारा जारी जमानतीय वारंट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है,जिस पर कल सुनवाई होना तय हुआ है।इस मामलें को भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जायेगा।

इस मामलें पर अगली सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी।

जब सरकार पहले से नियुक्त शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, तब नये शिक्षकों के वेतन मद में सालाना 11000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे उठायेगी? : सुशील मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जब सरकार पहले से नियुक्त शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, तब नये शिक्षकों के वेतन मद में सालाना 11000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ कैसे उठायेगी? पैसे कहाँ से आएँगे, यह बताना चाहिए।

• खाते में हजार करोड़ शेष रहते शिक्षकों का वेतन रोकना गलत
• उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपते ही बिहार को मिल जाएगी समग्र शिक्षा अभियान की राशि
• पिछले साल का बिहार ने केंद्र को नहीं दिया खर्च का हिसाब
• बताएँ, नये शिक्षकों के वेतन हेतु कहाँ से आएँगे 11000 करोड़- सुशील कुमार मोदी

श्री मोदी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति और उनके वेतन का भुगतान पूरी तरह राज्य सरकार की जिम्मेवारी है। केंद्र सरकार इसमें केवल सहयोग करती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से शिक्षक वेतन-मद में सहायता राशि न मिलने का दुष्प्रचार कर रही है, जबकि सच यह है कि बिहार सरकार ने पिछले साल के खर्च का हिसाब और उपयोगिता प्रमाण पत्र ही नहीं दिया।

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श्री मोदी ने कहा कि जैसे ही राज्य सरकार उपयोगिता प्रमाण पत्र सौंपेगी, केंद्र से समग्र शिक्षा अभियान की सहायता राशि मिल जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के खाते में अब भी 1000 करोड़ रुपये बिना खर्च हुए पड़े हैं। इससे शिक्षकों को वेतन दिया जा सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए केंद्र पर तथ्यहीन आरोप लगाना नीतीश सरकार की आदत बन गयी है। यह सरकार शिक्षकों की पीठ पर लाठी चलाती है और वेतन रोक कर पेट पर लात मारती है।

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पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस-मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई 18 जुलाई,2023 तक टली

पटना हाईकोर्ट में पटना एवं राज्य के अन्य क्षेत्रों में खुले आम नियमों का उल्लंघन कर मांस-मछली बेचने पर पाबन्दी लगाने सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई 18 जुलाई,2023 तक टली। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस बारे में पटना नगर निगम को विस्तृत जानकारी देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था। पटना नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया कि आधुनिक बूचडखाने के निर्माण और विकास के लिए स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है।

साथ ही निविदा की कार्रवाई की जा रही है। पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने के लिए पटना नगर निगम ने तीन सप्ताह की मोहलत मांगी,जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया था।ये जनहित याचिका अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने दायर की है।

पिछली सुनवाई में अधिवक्ता मानिनी जायसवाल ने कोर्ट को बताया था कि पटना समेत राज्य विभिन्न क्षेत्रों में अस्वास्थ्यकर और नियमों के विरुद्ध मांस मछली काटे और बेचे जाते हैं।उन्होंने कहा कि इससे जहाँ आम आदमी के स्वास्थ्य पर पर बुरा असर पड़ता हैं, वहीं खुले में इस तरह से खुले में जानवरों के काटे जाने से छोटे लड़कों के मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

याचिकाकर्ता के वकील मानिनी जयसवाल ने कोर्ट से यह भी आग्रह किया था कि खुले और अवैध रूप से चलने वाले बूचडखानों को नगर निगम द्वारा तत्काल बंद कराया जाना चाहिए ।

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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि पटना के राजा बाज़ार, पाटलिपुत्रा , राजीव नगर, बोरिंग केनाल रोड , कुर्जी, दीघा , गोला रोड , कंकड़बाग आदि क्षेत्रों में नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस मछ्ली की बिक्री होती है।

अधिवक्ता मानिनी जयसवाल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि अस्वस्थ और बगैर उचित प्रमाणपत्र के ही जानवरों को मार कर इनका मांस बेचा जाता है ,जो कि जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

उनका कहना था कि शुद्ध और स्वस्थ मांस मछ्ली उपलब्ध कराने के लिए सरकार को आधुनिक सुविधाओं सुविधाओं के साथ बूचड़खाने बनाए जाने चाहिए,ताकि मांस मछली बेचने वालोंं को भी सुविधा मिले।

इस मामलें पर अब अगली सुनवाई 18 जुलाई, 2023 को की जाएगी।

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इन हॉस्टलों की स्थिति में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया

राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कॉलेजों में छात्रों के हॉस्टलों की दयनीय हालत पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस के वी कृष्णन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इन हॉस्टलों की स्थिति में सुधार के लिए ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार ने विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विचार विमर्श किया।उन्होंने भी हॉस्टालों की स्थिति के सम्बन्ध में अपना रिपोर्ट दिया।राज्य सरकार इस मामलें पर कार्रवाई की योजना बना रही है।

याचिकाकर्ता विकास चंद्र उर्फ़ गुड्डू बाबा ने अपनी जनहित याचिका में बताया था कि राज्य के विश्वविद्यालयों व उनके अंतर्गत कालेजों में छात्रों के हॉस्टलों की स्थिति काफी दयनीय है।उन हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

छात्रों के लिए साफ सुथरे और अच्छे कमरे,स्वच्छ शौचालयों,शुद्ध पेय जल,कैंटीन,बिजली आदि सुविधायें उपलब्ध नहीं है।
याचिका में ये भी कहा गया कि इससे छात्रों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं ।

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इसका प्रभाव उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य पर पड़ता है ।इस याचिका ये अनुरोध किया गया कि छात्रों के लिए नये हॉस्टलों का निर्माण किया जाये,जिनमें उनके लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हो,ताकि उन्हें रहने और पढ़ने लिए सही माहौल मिले।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामलें में 23 अक्टूबर,2019 को बिहार सरकार के मुख्य सचिव और सभी सबंधित पक्षों को दिया गया।इसमें ये कहा गया कि छात्रों के लिए साफ सुथरे कमरे,स्नानघर, शौचालयों,बिजली आदि की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया।लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी।

कोर्ट ने आज इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से उम्मीद जाहिर की कि वह विभिन्न विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों की स्थिति सुधारने के उचित व प्रभावी कदम उठाएगी।इसके साथ ही कोर्ट ने इस जनहित को निष्पादित कर दिया।

लाठी में तेल पिलाने वालों की संगत में नीतीश, बर्बर हुई पुलिस: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति, 10 लाख युवाओं की सरकारी नौकरी पर विश्वासघात, शासन में भ्रष्टाचार और चौपट कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे पर शांतिपूर्ण ढंग से संचालित विधानसभा मार्च पर बर्बर लाठीचार्ज कर एक कार्यकर्ता की जान लेना और दर्जनों लोगों को बुरी तरह जख्मी करना निंदनीय है। क्या यही लोकतंत्र है नीतीश कुमार जी ?

  • शिक्षकों के मुद्दे पर व्यर्थ नहीं जाएगा भाजपा कार्यकर्ता का बलिदान
  • पटना की सड़कों पर लोकतंत्र लहूलुहान हुआ

श्री मोदी ने कहा कि प्रदर्शन करने के अधिकार को लाठी के बल पर रौंदने वाली सरकार किस मुँह से लोकतंत्र बचाने की बात करती है ?

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांग के समर्थन में भाजपा के जहानाबाद जिला महामंत्री विजय कुमार सिंह का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। इसके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

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श्री मोदी ने कहा कि लाठी में तेल पिलाने वालों की संगत में आकर नीतीश कुमार ने पुलिस को निरंकुश और हिंसक बना दिया है।

उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर भाजपा के सैंकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, संघर्ष किया और लाठी खायी, उसे विधान मंडल में भी पूरी ताकत से उठाया गया। अब हम ये मामला जनता की अदालत में भी ले जाएँगे।

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के खिलाफ कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। जस्टिस पीवी बजंत्री की खंडपीठ ने एक अवमानना के सिलसिले में पाठक को

कोर्ट ने आज 13 जुलाई,2023 को निश्चित रूप से कोर्ट में स्वयं उपस्थित होने का आदेश दिया था।लेकिन किसी कारणवश के के पाठक स्वयं उपस्थित नहीं होकर,अपने वकील के जरिए हाजिर हुए।

कोर्ट ने इसे आदेश की अवमानना करार देते हुए उनकी हाजिरी को सुनिश्चित करने हेतु जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया।

अपर मुख्य शिक्षा सचिव की ओर से कोर्ट के समक्ष उपस्थित अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने बताया कि श्री पाठक ने जून, 2023 में अपने पद पर योगदान दिया।नालंदा जिला के एक शिक्षक घनश्याम प्रसाद सिंह को हेड मास्टर के पद पर प्रोन्नत का आदेश जारी किया गया।

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उन्होंने बताया कि अपर मुख्य सचिव पाठक ने नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिख कर आदेश का पालन किये जाने का निर्देश दिया ।

जिला शिक्षा पदाधिकारी,नालंदा ने आदेश का पालन कर विभाग को सूचित किया।उस शिक्षक ने भी आदेश के अनुपालन होने को स्वीकार भी किया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 जुलाई,2023 को होगी।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई 7 जुलाई, 2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई अधूरी रही।इस मामलें पर कल 7जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी। इस मामलें में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

आज भी राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के
किया जाना है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जाति सम्बन्धी सूचना शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के समय भी दी जाती है।जातियाँ समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हर धर्म में अलग अलग जातियाँ होती है।

उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया जा रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जातीय सर्वेक्षण का कार्य लगभग 80 फी सदी पूरा हो गया है।उन्होंने कहा कि ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकार में है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इससे सर्वेक्षण से किसी के निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा है।महाधिवक्ता शाही ने कहा कि बहुत सी सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक होती हैं।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।

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कोर्ट ने ये भी पूछा था कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।ये असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा था कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

इस मामलें पर कल 6 जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी।इस मामलें पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार, ऋतिका रानी,अभिनव श्रीवास्तव और राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को प्रस्तुत किया।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई कल 6 जुलाई, 2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कल 6 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी। इस मामलें में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

आज राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के लिए किया जाना है।

उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया जा रहा है ।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जातीय सर्वेक्षण का कार्य लगभग 80 फी सदी पूरा हो गया है।उन्होंने कहा कि ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकार में है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इससे सर्वेक्षण से किसी के निजता का उल्लंघन नहीं हो रहा है।महाधिवक्ता शाही ने कहा कि बहुत सी सूचनाएं पहले से ही सार्वजनिक है ।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।

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#PatnaHighCourt

कोर्ट ने ये भी पूछा था कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

कल की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।

उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।ये असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा था कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

इस मामलें पर कल 6 जुलाई,2023 को भी सुनवाई जारी रहेगी ।

‘Land For Job Scam’ मामले में लालू परिवार की बढ़ी मुश्किलें; घोटाले में CBI ने दाख‍िल की चार्जशीट

दिल्ली । केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में Land For Job Scam मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है। बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव के परिवार की मुश्किलें कम होने नाम नहीं ले रही है। CBI आरोप पत्र में नौकरी के बदले जमीन घोटाले से संबंधित मामले में बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव, RJD प्रमुख और पूर्व सीएम पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू यादव, बिहार की पूर्व CM राबड़ी देवी और कई अन्य लोगों का नाम शामिल किया है।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल ताजा आरोप पत्र में तेजस्वी यादव और कंपनियों समेत 17 को आरोपी बनाया गया है। CBI ने मामले में एके इन्फोसिस्टम्स और कई बिचौलियों को भी नामजद किया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तरफ से कोर्ट में कहा गया था कि, “कोर्ट की छुट्टी के बाद सीबीआई अपना पूरक आरोप पत्र दाखिल करेगी.” जिसके बाद कोर्ट ने कहा था कि, इस मामले में अगली सुनवाई 12 जुलाई को की जाएगी। अदालत ने कहा था कि, “मामले में लगातार देरी स्वीकार्य नहीं है.” जिसके जवाब में CBI ने कहा था कि, इस मामले में जांच चल रही है और उन्हें नए तथ्यों को शामिल करने के लिए थोड़ा समय और चाहिए। ज‍िसके बाद आज यानी सोमवार को CBI ने चार्जशीट दायर की है।

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नौकरी के बदले जमीन घोटाला ( Land For Job Scam) मामले में यह दूसरा आरोपपत्र है और इसमें तेजस्वी के अलावा लालू और राबड़ी का नाम के साथ-साथ 14 अन्य लोगों के भी नाम शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक इस मामले में पहला आरोपपत्र दाखिल होने के बाद सामने आए नए दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर यह आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

दूसरे आरोपपत्र में अभियुक्तों के नाम की सूची (Name of the accused in the 2nd chargesheet of Land For Job Scam :-

01) Shri Lalu Prasad Yadav, Ex-Union Minister of Railways,
02) Smt. Rabri Devi,
03) Sh. Tejashwi Prasad Yadav,
04) Sh. Maheep Kapur, Ex-GM of West Central Railway (WCR),
05) Sh. Manoj Pande, Ex-CPO of WCR,
06) Dr. P. L. Bankar, Ex-CPO of WCR
07) Sh. Dil Chand Kumar,
08) Sh. Gyan Chand Rai,
09) Sh. Hazari Rai,
10) M/s A. K Infosystems Pvt Ltd,
11) Sh. Mahesh Singh,
12) Sh. Mohd. Dhanif Ansari,
13) Sh. Shatrudhan Rai,
14) Sh. Vishwakarma Rai,
15) Sh. Ashok Kumar Yadav,
16) Sh. Ram Briksh Yadav and
17) Sh. Rajnath Singh.

जानें क्या है नौकरी के बदले जमीन घोटला ( Land For Job Scam )

Land For Job Scam घोटाला उस समय हुआ जब लालू प्रसाद कांग्रेस नीत केंद्र की UPA-1 सरकार में रेल मंत्री थे। CBI ने आरोप लगाया है कि 2004-09 की अवधि के दौरान लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान बिना किसी विज्ञापन या सार्वजनिक सूचना के नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर पसंदीदा लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई।

भारतीय रेलवे के विभिन्न क्षेत्रों में समूह ‘डी’ पदों पर विभिन्न व्यक्तियों को नियुक्त किया गया था और इसके बदले में संबंधित व्यक्तियों ने तत्कालीन रेल मंत्री प्रसाद के परिवार के सदस्यों को और इस मामले में लाभार्थी कंपनी ‘एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ को अपनी जमीन हस्तांतरित की थी।

जांच एजेंसी CBI के मुताबिक, रेलवे में नौकरी के बदले में उम्मीदवारों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लालू यादव के परिवार के सदस्यों को बाजार रेट से काफी कम दरों पर जमीन बेची थी।

बिहार सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पटना हाइकोर्ट में सुनवाई कल 4 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी, जाने क्या हुआ आज की सुनवाई में

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कल 4 जुलाई,2023 को भी जारी रहेगी। इन मामलों में दायर याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।

इससे पूर्व हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।

कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।कोर्ट ने ये भी पूछा है कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि इससे निजता का उल्लंघन होगा क्या।

आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

दूसरी तरफ राज्य सरकार राज्य सरकार का कहना था कि जन कल्याण की योजनाएं बनाने और सामाजिक स्तर सुधारने के लिए ये सर्वेक्षण किया कराया जा रहा है।

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इससे पूर्व राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई करते हुए जातीय जनगणना सम्बन्धी मामलें पर पटना हाइकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने इंकार कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष 3 जुलाई,2023 को पटना हाइकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा था ।सुप्रीम कोर्ट में जातीय जनगणना से सम्बंधित मामलें पर अगली सुनवाई 14 जुलाई,2023 निर्धारित की गयी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट में इस मामलें पर 3 जुलाई,2023 को सुनवाई की तिथि निर्धारित होने को देखते हुए ये 14जुलाई,2023 की तिथि तय की थी।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की थी।सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी,जिसमें कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई करने सम्बन्धी याचिका को रद्द कर दिया था।

साथ ही राज्य सरकार ने पटना हाइकोर्ट द्वारा 4 मई, 2023को पारित अंतरिम आदेश को भी चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस के वी चन्द्रन की खंडपीठ ने राज्य सरकार के 3 जुलाई,2023 के पूर्व सुनवाई करने की याचिका को कोर्ट ने 9मई,2023 को सुनवाई करने के बाद खारिज कर दिया था।

इस आदेश विरुद्ध को राज्य सरकार ने एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर की है।पटना हाइकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही रखा।

9 मई, 2023 को सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट ने इन मामलों पर सुनवाई की तिथि 3 जुलाई,2023 ही निश्चित किया था।गौरतलब कि पहले 4मई,2023 को कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए जातीय जनगणना पर रोक लगा दी थी।

इन मामलों पर कल भी सुनवाई जारी रहेगी।

बिहार के लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में “भ्रष्ट नेताओं को करारा जवाब” देंगे : अमित शाह

लखीसराय । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को बिहार के लखीसराय जिले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा । शाह ने कहा…

वह सिर्फ लालू को बेवकूफ बना रहे हैं’ और नीतीश कुमार को ‘पलटू बाबू’ (मिस्टर यू-टर्न) कहा

बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, नित्यानंद राय, नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह, बिहार भाजपा के विनोद तावड़े, सुनील ओझा, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिंन्ह, पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी समेत सभी बड़े नेता स्टेज पर मौजूद थे।

CM नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अभी-अभी पलटू बाबू पूछ रहे थे कि नौ साल में क्या किया? अरे नीतीश बाबू, जिनके साथ इतना बैठे हो, जिनके कारण मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हो- उनका तो लिहाज करो।पीएम नरेंद्र मोदी जहां जा रहे हैं, वहां मोदी-मोदी हो रहा। ये मोदी का सम्मान जो पूरे दुनिया भर में हो रहा है वह उनका या भाजपा का सम्मान नहीं हो रहा बल्कि आपका और पूरे देश की जनता का सम्मान हो रहा है।

जब से भाजपा की सरकार बनी तो पाक प्रेरित आतंकियों को जगह दिखा दी। सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को घर घुसकर मारा। कांग्रेस, जदयू, राजद, ममता समेत सारे विपक्षी 70 साल से धारा 370 को गोद में खिला रहे थे। लेकिन, मोदी जी ने धारा 370 को खत्म कर दिया और कश्मीर की रक्षा की। यह लोग संसद में बैठकर काउ-काउ करते थे कि धारा 370 हटाओगे तो खून की नदियां बहेंगी। अरे राहुल बाबा खून की नदियां तो छोड़ो किसी ने कंकड़ तक चलाने की हिम्मत नहीं हुई। नरेंद्र मोदी ने देश और बिहार के विकास के लिए कई काम किए।

Amit Shah in Bihar

उन्होंने पूर्व सहयोगी नीतीश कुमार से यह बताने को भी कहा कि उन्होंने बिहार के लिए क्या किया है। “उन्होंने केवल अपने गठबंधन सहयोगियों को बदला है।”

अमित शाह बोले- अरे नीतीश बाबू, जिनके कारण मुख्यमंत्री बने हो, उनका तो लिहाज करो

मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा, ‘क्या बार-बार घर बदलने वाले नेता पर भरोसा किया जा सकता है? क्या ऐसे आदमी के हाथ में बिहार की बागडोर दी जानी चाहिए? वह भी यह जानता है. इसीलिए वह देश का पीएम बनने के लिए कांग्रेस के घर के सामने बैठे हैं. वह पीएम नहीं बनना चाहते, वह इस उम्र में सिर्फ लालू यादव को बेवकूफ बना रहे हैं.’ वह यहीं बिहार में रहना चाहते हैं और उन्होंने बीजेपी के सभी प्रतिद्वंद्वियों को इकट्ठा कर लिया है.”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की यात्रा पिछले सप्ताह 15 विपक्षी दलों के 32 नेताओं की पटना में मुलाकात के कुछ दिनों बाद हुई है और उनमें से एक को छोड़कर सभी ने संयुक्त रूप से भाजपा का मुकाबला करने और 2024 के राष्ट्रीय चुनावों से पहले एक साझा एजेंडा बनाने की कसम खाई थी।

अमित शाह ने यह भी कहा कि महागठबंधन सरकार के तहत कानून-व्यवस्था की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।

यह कहते हुए कि बिहार राज्य ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है, शाह ने कहा, “बिहार 2024 के चुनावों में भ्रष्ट नेताओं को करारा जवाब देगा।”

अमित शाह ने कहा कि जिन्होंने विश्वासघात किया है, उन्हें दंड देने का काम मुंगेर लोकसभा वालों को करना है। जनता से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि 2024 में मोदीजी को जिताओगे, 2025 में BJP को जिताओगे।

पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अंततः विधवा ज्योति कुमारी को दरभंगा जिला प्रशासन ने दिया साढ़े चार लाख रुपए का मुआवजा दिया

पटना हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अंततः विधवा ज्योति कुमारी को दरभंगा जिला प्रशासन ने दिया साढ़े चार लाख रुपए का मुआवजा दिया। दरअसल कोविड के दौरान पति की मृत्यु हो गई थी।

लेकिन उसकी विधवा पत्नी को जिला प्रशासन ने राज्य सरकार द्वारा घोषित मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया।बार बार गुहार लगाने के बाद भी जब दरभंगा जिला प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो बाध्य होकर विधवा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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अधिवक्ता रतन कुमार कुमर ने रिट याचिका दायर कर यह मामला उठाया।जस्टिस मोहित कुमार शाह ने सुनवाई की।कोर्ट के कड़े रुख के बाद दरभंगा के समाहर्त्ता ने विधवा ज्योति कुमारी के नाम से जारी साढ़े चार लाख रुपए का चेक दिया।

इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को निष्पादित कर दिया।

विपक्ष की बैठक टांय-टांय फिश हो गई; ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ परंतु बैठक के बाद जो चुहिया निकली वह भी मरी हुई : सुशील मोदी

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि विपक्ष की बैठक टांय-टांय फिश हो गई। कहावत है ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ परंतु बैठक के बाद जो चुहिया निकली वह भी मरी हुई ।

• विपक्षी एकता बैठक की निकली हवा
• अरविंद केजरीवाल गुस्से में पत्रकार वार्ता छोड़कर चले गए

श्री मोदी ने कहा कि बैठक कि एक ही उपलब्धि है कि अगली बैठक का स्थान और तिथि तय हो गई। न तो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, न ही नीतीश कुमार को संयोजक बनाने की चर्चा हुई। उल्टे अरविंद केजरीवाल गुस्से में प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए।

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श्री मोदी ने कहा कि 7 मुख्य विपक्षी दल बैठक से नदारद थे। 15 शामिल दलों में 10 परिवारवादी दल हैं और 12 दल हैं जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। ऐसे वंशवादी और भ्रष्टाचारी से लिप्त पार्टियां ईमानदार नरेंद्र मोदी का मुकाबला नहीं कर सकती।

पटना हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की अवमानना से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर को 7 जुलाई,2023 को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया हैं

पटना हाईकोर्ट ने अदालती आदेश की अवमानना से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर को 7 जुलाई,2023 को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया हैं ।जस्टिस राजीव राय ने हरिंदर कौर की अवमानना मामलें पर सुनवाई की।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश का अनुपालन 7 जुलाई,2023 तक नहीं किया गया, तो इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर स्वयं कोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा ।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आरके शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि दिनांक 21मार्च,2017 को पटना हाई कोर्ट ने एक आदेश पारित कर याचिकाकर्ता के पति द्वारा इलाहाबाद बैंक (वर्तमान में इंडियन बैंक)में जमा कराये गए 17 लाख रुपये को ब्याज समेत याचिकाकर्ता को लौटाने का आदेश दिया था ।

आदेश के अनुपालन में इलाहाबाद बैंक द्वारा 17 लाख रुपये तो लौटा दिये गए ,लेकिन उसका ब्याज नहीं याचिकाकर्ता को नहीं लौटाया गया।

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कोर्ट ने जब ब्याज देने के संबंध में बैंक के अधिवक्ता से स्पष्टीकरण माँगा, तो उन्होंने पटना हाई कोर्ट द्वारा पारित फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ब्याज देना बैंक की देनदारी नहीं है।चूँकि इस राशि को बैंक द्वारा इस्तेमाल नहीं किया गया है ।

उन्होंने कोर्ट से कहा कि आदेश के अनुपालन में मूल राशि लौटा दी गई है। इस पर कोर्ट ने असहमति जताते हुए बैंक को ब्याज की राशि याचिकाकर्ता को लौटाने का आदेश दिया ।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो इंडियन बैंक के चीफ मैनेजर अदालत में स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देंगे । इस मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई,2023 को होगी ।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पटना हाईकोर्ट में योग दिवस का आयोजन किया गया

आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पटना हाईकोर्ट में योग दिवस का आयोजन किया गया। इसमें पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के वी चंद्रन समेत कई अन्य जज, रजिस्ट्री के अधिकारीगण, विभिन्न अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी व पटना हाईकोर्ट के अधिकारी और कर्मचारियों ने इस कार्यक्रम भाग लिया। ये कार्यक्रम सुबह साढ़े छह बजे से साढ़े सात बजे आयोजित किया गया था ।

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JDU सांसद के बेटे को 1600 करोड़ रुपये के एम्बुलेंस ठेका दिये जाने के मामलें पर पटना हाईकोर्ट में 24 जून,2023 को सुनवाई की जाएगी

कथित रूप से जदयू सांसद के बेटे को 1600 करोड़ रुपये के एम्बुलेंस ठेका दिये जाने के मामलें पर पटना हाईकोर्ट में 24 जून,2023 को सुनवाई की जाएगी। जस्टिस पी वी बजनथ्री की खंडपीठ में इस बीभीजे इंडिया लिमिटेड व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।

इस याचिका में ये आरोप लगाया गया है कि जदयू के जहानाबाद से सांसद चंदेश्वर प्रसाद चन्द्रवंशी के बेटे बेटी की कंपनी पशुपतिनाथ डिस्ट्रीब्यूटर्स को इस एम्बुलेंस का ठेका मिला हैं।

बाक़ी बीडर्स ने इस मामलें पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई याचिकायें दायर की है।इन्हीं याचिकायों पर कोर्ट सुनवाई करेगी।

बीडिंग में सरकार के द्वारा सांसद के बेटे की कंपनी को लाभ पहुँचाने का आरोप है।बीडिंग में नियमों को बदलकर पशुपति डिस्ट्रिब्यूटर्स को लाभ पहुँचाया गया हैं।

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इन पर आरोप हैं कि बीडिंग में रेट को कम करके पशुपति कंपनी को टेंडर दिया गया है।इन याचिकायों में कहा गया कि इन्हें लाभ पहुँचाने के लिए नियमों की उपेक्षा की गयी है।

याचिकाओं में ये भी कहा गया कि यह कंपनी इस बीडिंग के लिए योग्य नहीं हैं । सांसद के परिवार के चार लोग कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं।

24 जून,2023 को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई की जाएगी।

Bihar Cabinet Expansion: नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार आज; JDU विधायक रत्नेश सदा को आज शपथ दिलाई जायेगी

पटना । पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बड़े बेटे और हम पार्टी के अध्यक्ष संतोष सुमन ने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है जिसके बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है । सोनबरसा से जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक और दलित नेता रत्नेश सदा को सुमन के स्थान पर मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है।

अगस्त 2022 में जद (यू) द्वारा महागठबंधन (महागठबंधन) सरकार बनाने के लिए भाजपा के साथ अपना नाता तोड़ लेने के बाद लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में, संतोष सुमन के इस्तीफे के बाद बिहार मंत्रिमंडल में 30 मंत्री हैं। विधानसभा की कुल संख्या के आधार पर अधिकतम 36 मंत्री हो सकते हैं।

शपथ ग्रहण समारोह सुबह 11 बजे राजभवन में होगा। सदा के अलावा कांग्रेस और राजद के कुछ नेता मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

मंत्रिमंडल में राजद के 16, जदयू के 11 और कांग्रेस के दो मंत्री हैं। एक निर्दलीय सदस्य भी है।

रत्नेश सदा, जो सोनबरसा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, को SC और ST कल्याण विभाग दिए जाने की संभावना है, जो पहले संतोष सुमन के पास था। सदा मुसहर समुदाय से हैं। जद (यू) से तीन बार के विधायक कबीरपंथी से जुड़े हैं।

रत्नेश सदा ने मांझी पर 1980 के दशक से कई सरकारों में मंत्री रहने के अलावा CM के रूप में एक संक्षिप्त कार्यकाल के बावजूद दलितों, विशेष रूप से मुसहरों के लिए जुबानी सेवा करने का भी आरोप लगाया है।

यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नीतीश कुमार आबादी वाले उत्तर बिहार से ताल्लुक रखने वाले सदा को ऊपर उठाकर मांझी को होने वाले नुकसान को बेअसर करना चाह रहे हैं, खासकर अगर वह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में लौट आए।

बिहार में प्रचंड गर्मी और लू से हालत खराब, आने वाले 48 घंटे में गर्मी से कोई राहत के संकेत नहीं

राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में प्रचंड गर्मी और लू के बढ़ने के साथ कोई राहत के संकेत नहीं हैं। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को पटना, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण, भोजपुर, शेखपुरा, बेगूसराय, खगड़िया, नालंदा और बांका में भीषण लू चलने की आशंका है।

वहीं, भागलपुर, सुपौल, जमुई, कटिहार, नवादा, सीवान, औरंगाबाद और जमुई में भी हीटवेव के हालात बन सकते हैं। मौसम पूर्वानुमान में बताया गया है कि अगले तीन से चार दिनों के दौरान प्रदेश के दक्षिणी भागों में लू का असर बना रहेगा। वहीं, उत्तरी भागों में वर्षा की आंशिक गतिविधियां बने होने के कारण लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।

मानसून के पहले बिहार में जानलेवा गर्मी जारी है। मौसम विभाग की माने तो आने वाले 48 घंटे में गर्मी से कोई राहत के संकेत नहीं हैं।

hot weather

पूरे बिहार में प्रचंड गर्मी और लू के बढ़ने के साथ प्रदेश में बिजली की खपत का रिकॉर्ड भी ध्वस्त हो गया है। इस गर्मी में बिजली कंपनी ने 6 हजार मेगावाट से अधिक बिजली देना शुरू किया जो बढ़ता हुआ 6900 मेगावाट तक आ पहुंचा है।

मौसम विभाग का कहना है कि जब तक मानसून बिहार को पूरी तरह से प्रभावित नहीं कर लेता है तब तक ऐसे ही मौसम की मार झेलना होगा।

बिहार में निर्माणाधीन पुल दूसरी बार टूटा; BJP ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव का मांगा इस्तीफा

भागलपुर । पूर्वी भारतीय राज्य बिहार में गंगा नदी पर बनाया जा रहा चार लेन का कंक्रीट का पुल सिर्फ एक साल में दूसरी बार भरभराकर कर गंगा नदी में गिर गया। जिसने एक बार फिर इसके निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा कर दिया है।

निर्माणाधीन पुल के गिरने के बाद बिहार की राजनीति गर्म हो गई है । BJP नेता और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव का इस्तीफा मांगा है । इसके बाद तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पर सफाई दी और बताया कि आखिर ये पुल क्यों गिरा है. उन्होंने इसके डिजाइन में ही खामी बताई है।

सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने इस घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं ।

गंगा नदी के ऊपर बन रहा पुल रविवार को गिर गया। नदी के तट पर लोगों की भीड़ को पुल को फिल्माते और नीचे गिरते हुए चिल्लाते हुए देखा जा सकता है। रविवार की शाम करीब 6 बजे अचानक पुल गिर गया। जिस वक्त हादसा हुआ, उस वक्त काम बंद हो चुका था। इस वजह से पुल पर कोई मजदूर नहीं था। जैसे ही पुल ताश के पत्तों की तरह गंगा में गिरा, नदी के पानी की कई फीट ऊंची लहरें उठीं। सड़क किनारे बैठे लोग सहम गए। पुल गिरने की घटना का स्थानीय लोगों ने वीडियो बना लिया।

पटना हाईकोर्ट ने महादलित विकास मिशन योजना अंतर्गत छात्रवृत्ति घोटाले के मामलें में जेल में बंद आईएएस अधिकारी एसएम राजू को नियमित जमानत देते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया

पटना हाईकोर्ट ने महादलित विकास मिशन योजना अंतर्गत छात्रवृत्ति घोटाले के मामलें में जेल में बंद आईएएस अधिकारी एसएम राजू को नियमित जमानत देते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया है ।
न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा ने राजू की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए ये निर्णय सुनाया।

यह मामला राज्य सरकार की महादलित विकास मिशन के योजना अंतर्गत अनुसूचित जनजाति व महादलित के छात्र व छात्राओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के घोटाले से संबंधित है। इस मामले पर निगरानी ब्यूरो के डीएसपी ने 23 अक्टूबर, 2017 को एक मामला दर्ज किया था, जो निगरानी थाना कांड संख्या एकाशी 2017 के रूप में आईपीसी की सुसंगत धाराओं एवं भ्रष्टाचार निरोध कानून की धारा 13 के अंतर्गत दर्ज हुआ था।

इस मामले में राजू को इसीलिए आरोपी बनाया गया, क्योंकि वह महादलित विकास मिशन के सचिव के रूप में पदस्थापित थे।

याचिकाकर्ता के तरफ से वरीय अधिवक्ता पुष्कर नारायण शाही ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में राजू बिल्कुल बेकसूर है।

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उनके खिलाफ प्राथमिकी में कोई सीधा आरोप दर्ज नहीं है और ना ही कोई ऐसा आरोप लगाया गया है। जिससे यह साबित हो कि इस कांड के मुख्य अभियुक्त कंपनी के साथ उनका कोई लेन-देन हुआ था।

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया था कि इस कांड के एक अन्य रिटायर्ड आईएएस कड़ा परशुराम रमैया को 2019 में ही निचली अदालत से जमानत मिल गई थी। उनसे कहीं बेहतर केस राजू का है ,जो पिछले साढ़े 4 महीने से जेल में बंद है ।

वही निगरानी ब्यूरो की तरफ से विशेष लोक अभियोजक अरविंद कुमार ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि केस डायरी की कई जगहों पर स्पष्ट सबूत व साक्ष्य मिलते हैं, जिससे राजू का इस कांड में संलिप्तता उजागर होता है।

कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद 5 मई,2023 को फैसला सुरक्षित कर लिया था जिसे आज सुनाया गया।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर याचिकाओं को स्वीकृत करते हुए वहां के नागरिकों को बड़ी राहत दी

पटना हाईकोर्ट ने पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर याचिकाओं को स्वीकृत करते हुए वहां के नागरिकों को बड़ी राहत दी है।कोर्ट ने अपने निर्णय में ये स्पष्ट किया कि जो भी निर्माण 2018 के पहले बने है,उस पर दीघा लैण्ड सेटलमेंट एक्ट के तहत किया जाना है।कोर्ट ने प्रशासन द्वारा नेपालीनगर क्षेत्र में मकान तोड़े जाने को अवैध ठहराया। साथ ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को रद्द कर दिया।

जस्टिस संदीप कुमार ने 17 नवंबर,202 सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने इस मामलें पर निर्णय देते हुए कहा कि जिन लोगों के मकानों को गैर कानूनी तरीके से तोड़ा गया है,उन्हें पांच पाँच लाख रुपए मुअबजा देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है।कोर्ट ने साफ किया है कि यदि क्षतिपूर्ति की राशि अगर अधिक हो,तो उस पर विचार कर देना होगा।

कोर्ट ने ये भी कहा कि जिनका मकान 2018 के बाद बना है,उन सभी मामलों में दीघा लैण्ड सेटलमेंट एक्ट के तहत विचार करने का निर्देश दिया गया था।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने बिहार राज्य आवास बोर्ड को बताने को कहा था कि अब तक पटना में उसने कितनी कॉलोनियों का निर्माण और विकास किया हैं।

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साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को एमिकस क्यूरी संतोष सिंह द्वारा प्रस्तुत दलीलों का अगली सुनवाई में जवाब देने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार राज्य आवास बोर्ड के दोषी अधिकारियों और जिम्मेवार पुलिस वाले के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई की कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा था।

कोर्ट ने कहा था कि ये बहुत आश्चर्य की बात है कि इनके रहते इस क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन कर मकान बना लिए गए।

इस मामलें पर कोर्ट द्वारा सभी पक्षों को सुनने के बाद निर्णय 17 नवंबर,2022 को सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाया गया।

बिहार में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग; DSP स्तर के अफसरों का ट्रांसफर, देखिए पूरी लिस्ट

पटना । बिहार में बढ़ती अपराध की घटनाओं को लेकर सरकार की खूब किरकिरी हो रही है, विपक्षी दल सरकार पर हमलावर बने हुए हैं और लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं । विधि व्यवस्था को लेकर हो रही फजीहत के बाद सरकार ने राज्य के लॉ एंड ऑर्डर को सुधारने के लिए DSP स्तर के 55 अधिकारियों का तबादला कर दिया है।

सरकार की तरफ से तबादले का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। गृह विभाग की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, पटना के मद्यनिषेध डीएसपी मनीष आनंद को जमालपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है। पटना में ही तैनात मद्यनिषेध के डीएसपी नवीन कुमार को समस्तीपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है।

जमुई में तैनात डीएसपी उमेश कुमार को मुजफ्फरपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है। पटना के मद्यनिषेध डीएसपी मनीष आनंद को जमालपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है, वहीं पटनामें ही तैनात मद्यनिषेध के डीएसपी नवीन कुमार को समस्तीपुर का रेल डीएसपी बनाया गया है ।

बिहार पुलिस मुख्यालय में पदस्थापना का इंतजार कर रहे मनोज कुमार सुधांशु कोभोजपुर के ट्रैफिक डीएसपी नियुक्त किया गया है। वहीं बगहा के वाल्मीकिनगर में तैनातधीरज कुमार को मुजफ्फरपुर का ट्रैफिक डीएसपी बनाया गया है। पटना में तैनात बसंतीटुड्डू को सारण का ट्रैफिक डीएसपी बनाया गया है।

पटना में ही आर्थिक अपराध इकाई के डीएसपी कौशल किशोर कमल को पूर्णिया का ट्रैफिक डीएसपी नियुक्त किया गया है। पटना में तैनात बसंती टुड्डू को सारण का ट्रैफिक डीएसपी बनाया गया है। पटना में विशेष सशस्त्र पुलिस बल में तैनात प्रभात रंजन को मुंगेर का ट्रैफिक डीएसपी बनाया गया है।

Police transfer

महेंद्र कुमार को बेगूसराय ट्रैफिक डीएसपी से विशेष सशस्त्र पुलिस-10 में तैनात किया गया। गौतम शरण ओमी को विशेष शाखा से विशेष सशस्त्र बल-16 में पोस्टिंग मिली है। पोस्टिंग के इंतजार में रहे रविशंकर प्रसाद को मद्य निषेध और अपराध अनुसंधान विभाग में तैनाती की गई है। डुमरांव से संजय कुमार झा को भी मद्य निषेध और अपराध अनुसंधान विभाग में ताबदला किया गया है।

अन्य जिलों के भी डीएसपी स्तर के कई अधिकारियोंका तबादला किया गया है. देखिए पुरी सूची…


पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी पूर्व RJD विधायक गुलाब यादव को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी

पटना हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी पूर्व आरजेडी विधायक गुलाब यादव को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगा दी है । जस्टिस संदीप कुमार की एकलपीठ ने गुलाब यादव की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके ख़िलाफ़ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का भी आदेश दिया है।

पूर्व विधायक पर एक महिला ने कथित रूप से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। महिला ने वर्ष 2021 में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उसे महिला आयोग का सदस्य बनाने का झांसा देकर पूर्व विधायक ने उसे अपने रूकनपुरा स्थित आवास पर बुलाया। उसके साथ दुष्कर्म कर उसका वीडियो बना लिया था।

अपनी शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि गुलाब यादव ने उसे दिल्ली एवं पुणे के विभिन्न होटल में बुला कर उसके साथ दुष्कर्म किया था।

इस मामले की अगली सुनवाई 6 सितंबर,2023 को होगी ।

UPSC Result 2022: बिहार का UPSC पर कब्जा, टॉपर बनीं पटना की इशिता किशोर; द्वितीय स्थान पर गरिमा लोहिया

UPSC सिविल सेवा परिणाम 2022: यूपीएससी परीक्षा अपने कठिन स्तर और प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए प्रसिद्ध है। UPSC ने मंगलवार को सिविल सेवा अंतिम परिणाम 2022 घोषित कर दिया गया। इशिता किशोर इस साल UPSC IAS टॉपर बनी हैं।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट- upsc.gov.in पर सिविल सेवा अंतिम परिणाम 2022 घोषित कर दिया है। इशिता किशोर इस साल UPSC IAS टॉपर बनी हैं। उम्मीदवार यूपीएससी की मेरिट लिस्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।

नियुक्ति के लिए कुल 1022 का चयन किया गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए कुल 180 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। भारतीय विदेश सेवा के लिए 38 और भारतीय पुलिस सेवा के लिए 200 का चयन किया गया है।

UPSC TOPPER 2022

473 का चयन केंद्रीय सेवा समूह ‘ए’ और 131 का चयन समूह ‘बी’ सेवाओं के लिए किया गया है। अनुशंसित 101 उम्मीदवारों की उम्मीदवारी अनंतिम है। ऐसे उम्मीदवारों के रोल नंबरों की सूची मेरिट सूची में उल्लिखित है।।

यूपीएससी आईएएस टॉपर लिस्ट 2022

RankNameRoll Number
1Ishita Kishore5809986
2Garima Lohia1506175
3Uma Harathin N1019872
4Smriti Mishra0858695
5Mayur Hazarika0906457
6Gahana Navya James2409491
7Waseem Ahmad Bhat1802522

UPSC RESULT 2022 यहां देखें टॉपर्स की लिस्ट

उम्मीदवार यूपीएससी की मेरिट लिस्ट ऑनलाइन चेक कर सकते हैं। यूपीएससी मेरिट लिस्ट 2022 की जांच के लिए सीधा लिंक-

  • यूपीएससी सीएसई फाइनल मेरिट लिस्ट 2022 कैसे चेक करें
  • आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं
  • होमपेज पर उस लिंक पर क्लिक करें जिसमें UPSC CSE मुख्य परिणाम 2022 (अंतिम) लिखा हो
  • स्क्रीन पर एक पीडीएफ फाइल खुलेगी
  • पीडीएफ फाइल में यूपीएससी सिविल सेवा मुख्य अंतिम परिणाम 2022 होगा।
  • मेरिट लिस्ट चेक करें और उसे डाउनलोड करें

पटना हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानियो के पौत्र पौत्रियों को हाई कोर्ट नियुक्तियों में आरक्षण देने से साफ इंकार करते हुए दायर याचिका को रद्द को कर दिया

पटना हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानियो के पौत्र पौत्रियों को हाई कोर्ट नियुक्तियों में आरक्षण देने से साफ इंकार करते हुए दायर याचिका को रद्द को कर दिया।जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने विकाश कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया।

कोर्ट को बताया गया कि हाई कोर्ट ने 550 सहायको की बहाली के लिए गत 3 फरवरी,2023को एक विज्ञापन जारी किया था।इस विज्ञापन में सभी को आरक्षण दिया गया, लेकिन स्वतंत्रता सेनानियो के पोता पोती को दिये जाने वाले दो प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया।

उनका कहना था कि राज्य सरकार ने 10 फरवरी 2016 को पत्रांक 2526 जारी कर स्वतंत्रता सेनानी के पौत्र पौत्रिओं को दो प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था।जिसका लाभ हाई कोर्ट अपने यहां के बहाली में नहीं दे रहा है।

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जबकि हाई कोर्ट के नियमावली के नियम 10 के तहत आरक्षण देने का प्रावधान है।वही हाई कोर्ट की ओर से इस याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया गया कि इस बहाली में एससी /एसटी सहित ईबीसी /बीसी /ईडब्ल्यूएस को निर्धारित प्रतिशत के अनुसार आरक्षण दिया जा रहा है।

उनका कहना था कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के आदेश के बाद नियमावली के नियम 10 के तहत आरक्षण दिया जाता हैं।कोर्ट ने दोनों पक्षों का दलील सुनने के बाद अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।