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बिहार में अब नालंदा कुर्मी नहीं चलेगा गड़बड़ी किये तो कारवाई के लिए तैयार रहे

“तमाशबीन हूँ मैं “
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के जो नतीजे सामने आये उसमें सबसे ज्यादा नुकसान जदयू को हुआ है जबकि चुनाव नीतीश कुमार के चेहरे पर ही लड़ा गया था ।

चुनाव परिणाम के बाद एक बात जो साफ दिख रही थी कि राज्य की जनता का भरोसा नीतीश कुमार के सुशासन के दावे से उठ चुकी है और इसकी वजह पंचायत स्तर तक व्याप्त अफसरशाही और भ्रष्टाचार था ।

सरकार गठन के बाद नीतीश कुमार अफसरशाही और राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कैसे अंकुश लगाये इस पर काम करना शुरु किये और इसके लिए एक बार फिर जनता के दरबार में सीएम कार्यक्रम की शुरुआत हुई ।
वही सीएम ने कई वर्षो से सुस्त पड़े भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाले विभाग निगरानी ,विशेष निगरानी और आर्थिक अपराध इकाई के प्रमुख को भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कठोर कारवाई करने का निर्देश दिया ।

निर्देश के बाद यू कहे तो बिहार में पहली बार भ्रष्टाचार मामले में बड़ी मछलियों पर कारवाई हुई है इस कारवाई से प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक चर्चा जो आम हुआ करता था कि नालंदा और उस आप कुर्मी हैं तो आप कुछ भी कर सकते हैं कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है या फिर आप एक खास दरबार से जुड़े हैं तोआपका बाल बांका नहीं होने वाला है लेकिन इस बार जो कारवाई हुई है उससे यह मिथ टूटा है ।

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में जो कारवाई हुई है उसमें ऐसे अधिकारी भी हैं जो नालंदा और कुर्मी होने के के साथ साथ पूर्व मंत्री के दमाद होने के बावजूद कारवाई हुई है। इतना ही नहीं खास दरबार तक सीधे सूटकेस पहुंचाने वाले अधिकारी भी नपे हैं।

मंत्री के रिश्तेदार भी नपे हैं और साथ ही सत्ता समीकरण के साथ जातीगत राजनीति के सहारे पोस्टिंग कराने वाले अधिकारी भी नपे हैं ।

इस तरह की कारवाई से भले ही अभी ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा है लेकिन पोस्टिंग और तबादले को लेकर जो सरकार की नीति है उस नीति में जब तक बुनियादी बदलाव नहीं किये जायेंगे तब तक भ्रष्टाचार पर इस तरह की कारवाई फोरी ही साबित होगी ।

1–मुजफ्फरपुर डीटीओ पर कारवाई
सरकार गठन के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ पहली बड़ी कारवाई मुजफ्फरपुर के डीटीओ रजनीश लाल पर हुई थी । निगरानी ने उसके आवास से इतने नगदी पैसे बरामद किये थे कि नोट गिनने वाला मशीन लाना पड़ा था ।रजनीश सिर्फ मुजफ्फरपुर के ही डीटीओ नहीं थे वो सारण (छपरा) के भी डीटीओ थे ।समझ सकते हैं कि मुजफ्फरपुर अपने आप में कितना बड़ा जिला है और उसके साथ छपरा जहां बालू कारोबार चरम पर है ऐसे में दो जिलों का प्रभार बिना मंत्री और विभागीय हेड के सहमति के बगैर सम्भव है क्या ,जबकि मुख्यालय अधिकारी भरे पड़े हैं फिर रजनीश लाल में इतनी मेहरबानी क्यों वैसे इनका एक और परिचय है कि ये बिहार सरकार के एक मंत्री के रिश्तेदार हैं ।

2–बालू माफिया से सांठगांठ मामले में दो एसपी चार डीएसपी सहित 41 अधिकारियों पर हुई कारवाई
नयी सरकार के गठन के बाद से ही ये खबर आ रही थी कि बालू माफिया सरकार को अस्थिर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है इस सूचना के बाद सरकार बालू के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए लगातार अधिकारियों को निर्देश दे रहा था, लेकिन पदाधिकारी और बालू माफिया के बीच इस तरह का गठजोड़ बन गया था कि सरकार के निर्देश के बावजूद भी अवैध कारोबार चरम पर था, सरकार ने तय किया कि अब कठोर कारवाई के बिना लगाम लगने वाला नहीं है और फिर सरकार आर्थिक अपराध इकाई को मिशन बालू माफिया का जिम्मा दिया गया पूरी छूट के साथ ।

आर्थिक अपराध इकाई के एडीजी नैयर हसनैन खान अपने खास पदाधिकारियों के साथ एक माह तक ऑपरेशन बालू माफिया पर काम करते रहे और उसके बाद सरकार से हरी झंडी मिलते ही कारवाई शुरु हो गयी और भोजपुर के एसपी राकेश कुमार दुबे और औरंगाबाद के एसपी सुधीर कुमार पोरिका पालीगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी तनवीर अहमद, भोजपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पंकज रावत, डिहरी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार और औरंगाबाद सदर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनूप कुमार सहित एक दर्जन से अधिक पुलिस पदाधिकारियोंं को निलंबित कर दिया गया।
साथ ही एसडीओ ,सीओ ,वीडिओ और डीटीओ स्तर के कई अधिकारियों पर भी कारवाई हुई अब जरा गौर करिए जिन अधिकारियों पर कारवाई हुई है उसका बैकग्राउंड कैसा रहा है ।

3–भोजपुर एसपी राकेश कुमार दूबे –इस अधिकारी को कौन नहीं जानता है लालू राज में इसकी तूती बोलती थी नीतीश कुमार आये तो कुछ दिन फिल्ड से बाहर रहे लेकिन जैसे ही राजद से जुड़े एक कद्दावर नेता नीतीश के करीब आये राकेश दूबे को प्राइम पोस्टिंग

मिलनी शुरु हो गयी भोजपुर एसपी रहते हुए बालू माफिया से इनका कैसा रिश्ता था कहना मुश्किल है लेकिन उस सिडिकेंट से इनका जुड़ाव रहा है ये किसी से छुपी हुई भी नहीं है ।

4–औरंगाबाद के एसपी सुधीर कुमार पोरिका–इस अधिकारी के बारे में खासबात यह है कि ये दरबार के खासम खास थे पटना सिटी एसपी के रुप में ही इन पर मुकदमों में पैसे लेने का आरोप लगने लगा था लेकिन दरबार के करीबी थे इसलिए इनकी बेहतर पोस्टिंग होती रही। हद तो तब हो गयी ये जनाब दरबार के सहारे नालंदा के एसपी बन गये वहां भी इनका प्रैक्टिस वैसे ही चलता रहा जैसा ये दूसरे जिले में चलाते थे ।
हलाकि सीएम तक इसके कारनामे की खबर जब तक पहुंचती ये पूरा नाम कमा चुके थे फिर कुछ दिनों के लिए इन्हें जिले से बाहर कर दिया गया लेकिन जैसी ही दरबार की सक्रियता बढ़ी जनाव औरंगाबाद पहुंच गये जहां थाना प्रभारी की पोस्टिंग में सारे हदे इन्होंने पार कर दिया ।

5–भोजपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पंकज रावत –बालू माफिया से सांठगांठ मामले में चार अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पर भी कारवाई हुई है उसमें एक हैं पालीगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी तनवीर अहमद जो 2009 –20010 बैच के अधिकारी हैं ये जनाब समस्तीपुर सदर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी भी रह चुके है विभाग में इनकी पहचान 20-20 खेलने वाले अधिकारी के रुप में है इनकी पोस्टिंग की सूची देख कर ही समझ में आ जायेगा कि जनाव कितने बड़े भीआईपी थे। डिहरी के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संजय कुमार 2004 बैच के अधिकारी है हलाकि ये दरबारी होने के बावजूद मध्यममार्गी रहे हैं ।औरंगाबाद सदर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनूप कुमार प्रमोसन के डीएसपी बने हैं पूराने डीजीपी के दरबारी थे इसलिए उन्हें प्राइम पोस्टिंग दी गयी थी ।

और बात अगर भोजपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पंकज रावत की करे तो ये सारी अहर्ता पूरी करते हैं नालंदा के हैं कुर्मी भी हैं कांग्रेस के एक बड़े नेता के दमाद भी हैं टैक्स वाले दरबार के खासम खास भी है 2004 बैच के ये भी अधिकारी है इनकी पोस्टिग की बात करे तो ये हाजीपुर,मोतिहारी ,बेतिया,गया आरा जैसे अनुमंडल के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रह चुके हैं सीबीआई जांच भी झेल रहे हैं, मोतिहारी में भी इन पर गम्भीर आरोप लगे थे फिर इनकी पोस्टिंग में कभी फिल्ड से बाहर नहीं रही इन पर कारवाई का बड़ा असर है ब्यूरोक्रेसी पर ।

6–कार्यपालक पदाधिकारी अनुभूति श्रीवास्तव
2013 बैच के नगर विभाग विभाग के अधिकारी है पहली पोस्टिंग इनकी भभुआ नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर हुआ था पहले पोस्टिंग में ही जनाव अपनी योग्यता दिखा दिये करोड़ो के घोटाले का आरोप हंगामा होने पर कैमूर के तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस पूरे मामले की जांच की जिसमें ये दोषी पाये गये लेकिन नाम के अनुसार इन्होंने काम किया नगर विभाग विभाग के अधिकारियों से मिल कर कारवाई वाली फाइल दबवा दिये शुक्र कहिए मामला सीएम के जनता दरबार में आ गया और उसके बाद कारवाई शुरु विशेष निगरानी की टीम ने आय से अधिक मामले को लेकर एक प्राथमिकी दर्ज किया है छापेमारी हुई तो करोड़ो को अवैध सम्पत्ति बरामद हुआ हुई है ।

7–मुजफ्फरपुर में ग्रामीण कार्य विभाग दरभंगा में कार्यरत एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अनिल कुमार (Engineer Anil kumar) के ठिकाने से 49 लाख रुपये और बरामद हुए हैं. इससे पूर्व उसके स्कार्पियो से 18 लाख रुपये मिले थे. इस तरह सरकारी अधिकारी की गाड़ी से कुल बरामद राशि 67 लाख रुपया बरामद हुआ।
ये साहब मंत्री के स्वजातीय हैं और करीबी भी हैं इसलिए इन्हें दो जिले की जिम्मेवारी मिली हुई है जब कि मुख्यालय में इंनजीनिर बिना काम के बैठे हुए हैं ।
मतलब कारवाई से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगना सम्भव नहीं है क्यों कि जिस तरीके से पोस्टिंग की प्रक्रिया सरकार चला रही है ऐसे में काम करने वाले ईमानदार अधिकारियों के पोस्टिंग की गुंजाइश
कम है हलाकि इस मामले में बिहार के पूर्व डीजीपी और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ करवाई करने को लेकर चर्चित रहे अभयानंद
का कहना है कि कानून प्रयाप्त है हां पोस्टिंग में अधिकारियों के कार्यशैली को देखा जाना चाहिए साथ ही पोस्टिंग के समय राजनैतिक हस्तक्षेप कैसे कम हो इस सरकार को सोचना चाहिए क्यों कि सब खेल पोस्टिंग से ही शुरु होता है ।

संभार –संतोष सिंह के वाल से

गोपाल के सामने क्यों बेबस हैं नीतीश

JDU विधायक गोपाल मंडल पर तेजस राजधानी एक्सप्रेस में यात्रियों के साथ हंगामा गाली गलौज धमकी दिए मामले में रेल एसपी पटना के निर्देश पर जीआरपी थाना आरा में JDU विधायक गोपाल मंडल सहित 4 लोगों पर आरा GRP में प्राथमिकी दर्ज….आरा GRP कांड संख्या –76/21 धारा:–504/290/379/34 भा०दी०वी एवं 3 (r)(s) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज की गई है। यह पहला मामला है जब बिहार के किसी विधायक की वजह से जहां पूरे देश में राज्य की आलोचना हो रही है वही सरकार और JDU अपने विधायकों को लेकर पूरी तरह से डिफेंसिव है।

सीएम नीतीश कुमार से जब आज मीडिया ने गोपाल मंडल के हरकत के बारे में सवाल किया तो उन्होंने “जांच चल रही है’ कहते हुए मीडिया से दूरी बना लिए ।गोपाल मंडल को लेकर यह कोई पहला मौका नहीं है जब सरकार को असहज होना पड़ा है।

कुछ दिन पहले राज्य के उप मुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद के बारे में बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी किये थे जिसको लेकर बीजेपी को असहज होना पड़ा था।शराबबंदी को लेकर गोपाल मंडल नीतीश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए कहा था कि ‘मुख्यमंत्री का कान बंद है। इसलिए मुख्यमंत्री का कान खोलना चाहते हैं। बिहार में ऐसा कोई पुलिस या पुलिस अधिकारी नहीं है, जो शराब नहीं पीता।

कुछ दिन पहले बांका में 20 एकड़ जमीन पर JDU के विधायक कब्जा जमाने गए थे, लेकिन लोगों ने उन्हें बंधक बना लिया था। लौटने के बाद भागलपुर में उन्होंने एक समुदाय के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करते हुए कहा- ‘उन लोगों की हिम्मत है..ठोक देंगे इस घटना को लेकर भी सोशल मीडिया में एक वीडियो खुब वायरल हुआ था इतना ही नहीं समय समय पर सीएम नीतीश कुमार के फैसले पर भी सवाल उठाते रहते हैं विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने कहा टिकट वितरण को लेकर सवाल खड़े हुए कहा था कि जदयू की हार के लिए सीएम नीतीश खुद जिम्मेवार हैं । ‘नाथनगर की सीट नीतीश कुमार की गलती की वजह से पार्टी हार गई।

Jdu और नीतीश गोपाल मंडल को लेकर खामोश क्यों है

इस तरह से व्यवहार के बावजूद नीतीश कुमार की चुप्पी रहस्य की बात है कहा यह जा रहा है कि बिहार विधानसभा में एक तो इस बार जदयू के विधायक की संख्या काफी कम है ऐसे में कारवाई करने के बाद विधायक खुल्ला साँड़ हो जायेंगा और उसके बाद सरकार को और परेशानी बढ़ सकती है

गरीबों के बीच राँबीन हुड, की छवि है गोपाल मंडल का
भागलपुर के गोपालपुर से गोपाल मंडल लगातार चौथी बार विधायक बने हैं इसकी वजह है यह है कि वो जिस गंगोता जाति से आते हैं उसकी पहचार उस इलाके में लड़ाकू जाति के रुप में है ,भागलपुर दंगा के दौरान जब शहर के लोग असुरक्षित महसूस करने लगे थे उस समय गंगोता ही पूरे शहर की सुरक्षा अपने कंधों पर लिया था और फिर भागलपुर में जो कुछ भी हुआ उसके पीछे गंगोता ही खड़ा था।

वो छवि आज भी भागलपुर जिले के लोगों के जेहन से बाहर नहीं निकला है इसका लाभ गोपाल मंडल को मिलता है फिर उस इलाके में भूमिहार और गंगोता के बीच वर्चस्व को लेकर ताना तानी चलता रहता है जिसके खिलाफ गोपाल मंडल हमेशा खड़ा रहता है फिर पुलिस और पदाधिकारी के बारे में सार्वजनिक रुप से बोलने की छवि है इस वजह से गरीबों के बीच गोपाल मंडल काफी लोकप्रिय है इतना ही नहीं भागलपुर लोकसभा में गंगोता जाति के वोट सबसे अधिक वोट 9.26 फीसदी हैं। भागलपुर जिले की राजनीति गंगोता जाति के वोटर तय करते हैं और गोपाल मंडल अपने जाति में भी काफी लोकप्रिय है।

भागलपुर से जदयू सांसद अजय कुमार मंडल भी गंगौता जाति से ही आते हैं और चाह करके गोपालमंडल का प्रभाव वो कम नहीं कर पाये लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार को गोपालमंडल को मनाने में पसीना छुट गया था कहां ये जा रहा है कि गोपालमंडल के मामने के बाद ही अजय मंडल सरल जीत हासिल कर पाये ऐसे में भागलपुर जिले में गोपाल मंडल का राजनैतिक पकड़ इतनी मजबूत है कि नीतीश कुमार चाह करके भी कुछ खास नहीं कर पायेंगे ।

वही गोपाल मंडल नीतीश कुमार से इसलिए भी नराज हैं कि चार बार से लगातार विधायक बनने के बावजूद नीतीश कुमार इन्हें मंत्री नहीं बनाये हैं और उसी नराजगी का यह असर है कि गोपाल मंडल नीतीश कुमार कैसे असहज महसूस करे इसके लिए सीमाएं लांघते रहता है ।

सरकारी गांड़ी पर हाईकोर्ट का चला डंडा बगैर निबंधन के सड़क पर उतरा तो होगा जप्त

पटना हाई कोर्ट ने बगैर निबंधन के ही सड़कों पर घूम रही पटना नगर निगम की गाड़ियों के मामले को निष्पादित कर दिया।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने आदेश जारी किया है कि कोई भी सरकारी या अन्य सरकारी निकाय की गाड़ी बगैर निबंधन के सड़क पर खड़ी नहीं रह सकती।

पटना नगर निगम के मामले में कोर्ट ने इस लापरवाही पर अपनी नाराज़गी जताते हुए नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को चार महीने के भीतर जिम्मेदार अफसरों पर कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने निर्भय प्रशांत की जनहित याचिका को निष्पादित करते हुए ये आदेश दिया।

कोर्ट ने कड़ी टिपण्णी करते हुए कहा कि देश मे कानून से ऊपर कोई नही है।
जब मोटर वाहन कानून में कोई गाड़ी को निबंधन से छूट नही है, तो नगर निगम की गाड़ियां एक दिन भी आखिर बगैर निबंधन के कैसे सड़कों पर खड़ी रहती थी ? खण्डपीठ ने यह स्पष्ट आदेश जारी किया कि बगैर निबंधन के कोई भी सरकारी व निगम की गाड़ी एक दिन भी सड़कों पर खड़ी नही रहेगी।

कोर्ट में दायर हलफनामे को माने, तो पटना नगर निगम ने 925 गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन के लिए तकरीबन 2 करोड़ रुपये जमा किया।

वर्ष 2019 में राजधानी की सड़कों पर नगर निगम की करीब 925 गाड़ियां बगैर निबंधन व् बीमा के ही घूम रही थी।।

पंचायत चुनाव के दौरान नामांकन में गड़बड़ी पायी गयी तो चुनाव से आप हो सकते हैं बाहर

पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के नामंकन का आज दूसरा दिन है अभी तक 900 सौ से अधिक प्रत्याशी नामांकन का पर्चा भर चुका हैं हलाकि आयोग ने इस नामांकन के दौरान कई तरह के गाइड लाइन जारी किया है जिसका अनुपालन नहीं करने पर प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो सकता है ।

राज्य चुनाव आयोग के गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन के दौरान कई जरूरी काजगात भी जमा करने होंगे।. नामांकन पत्र के साथ जरूरी कागजात नहीं रहने तथा कागजात में किसी तरह की त्रुटि होने पर अभ्यर्थी का नाम नामांकन पत्र रद्द कर दिया जा सकता है ।

आयोग के द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाची पदाधिकारी नामांकन पत्र की बारिकी से जांच करेंगे.
अभ्यर्थी व प्रस्तावक के मतदाता क्रमांक में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर निर्वाची पदाधिकारी उसे ठीक करायेंगे. लेकिन जरूरी कागजातों में किसी तरह की त्रुटि होने पर तथा कागजात नामांकन पत्र के साथ संलग्न नहीं रहने पर नामांकन पत्र रद्द हो जायेगा़ ।

. आयोग के द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक नाम निर्देशन पत्र प्रपत्र 6, शपत्र पत्र, अनुसूची-1(बिहार पंचायत राज अनिधियम 2006 की धारा 136 के संबंध में), अनुसूची-2(मतदाता सूची में अभ्यर्थी व प्रस्तावक के नाम दर्ज होने से संबंधित घोषणा), अनुसूची-3 (शपथ पत्र व एनेक्शचर को दी जाने वाली सूचनाओं का प्रपत्र), अनुसूची 3 क (अपराध, संपत्ति व शैक्षणिक योग्यता के संबंध में), अनुसूची 3 ख (अभ्यर्थी का बायोडाटा) देना जरूरी है़ इसके साथ नाम निर्देशन शुल्क, चालान या नाजिर रसीद की मूल कॉपी नामांकन पत्र के साथ संलग्न करना जरूरी है.

पीएम से मिलकर स्वास्थ्य मंत्री ने भेंट की नये बन रहे पीएमसीएच की आकृति

पीएम से मिलकर स्वास्थ्य मंत्री ने भेंट की नये बन रहे पीएमसीएच की आकृति

पटना, 3 सितंबर। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में मिलकर बिहार में लगातार हो रही बड़ी संख्या में कोरोना जांच और टीकाकरण की विस्तृत जानकारी दी। खास कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टीका वाली नाव के द्वारा किये जा रहे टीकाकरण के संबंध में बताया गया। साथ ही माननीय प्रधानमंत्री का इमरजेंसी कोविड रिसपोंस पैकेज-2 के तहत केंद्र से मिलने वाले सहयोग के लिए श्री पांडेय ने आभार भी व्यक्त किया। श्री पांडेय ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री ने बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने एवं कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए राज्य सरकार को हर स्तर पर तैयारी करने की बात कही।

श्री पांडेय ने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री को बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और बेहतर बनाने के उद्देश्य से किये जा रहे राज्य सरकार के प्रयासों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया। इसके अलावे कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर आधारभूत संरचनाओं का विस्तार के अलावे डाॅक्टर्स, नर्स एवं पैरा मेडिकल स्टाफ की हो रही नियुक्ति के संबंध में भी जानकारी दी गई। श्री पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री जी को दुनिया का दूसरा और देश के सबसे बड़े बन रहे 5 हजार 462 बेड के अस्पताल पीएमसीएच की आकृति भेंट की। माननीय प्रधानमंत्री ने इस कार्य के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार की प्रशंसा भी की। श्री पांडेय ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बनाये जा रहे लगभग 16 सौ नये अस्पताल के भवनों (स्वास्थ्य उपकेंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) के निर्माण की जानकारी भी माननीय प्रधानमंत्री को दी गई।

मंत्री जी के क्षेत्र भ्रमण पर लगी रोक चुनाव प्रचार करते दिखे तो होगी कारवाई

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव को देखते हुए मंत्री ,विधायक और सांसद के क्षेत्र भ्रमण पर रोक लगा दिया है इस आदेश का ाअनुपालन नहीं करने वाले मंत्री ,विधायक और सांसद के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के तहत मामला दर्ज में ।आयोग के निर्देश के अनुसार केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री ही नहीं विधायक, विधान पार्षद और सांसद भी अपने सरकारी यात्रा को चुनावी यात्रा से बिल्कुल अलग रखेंगे। दोनों यात्राओं को एक साथ नहीं किया जाएगा।

मंत्री यदि जिला मुख्यालय या क्षेत्रीय स्तर के कार्यालयों तक सरकारी कार्यों के सिलसिले में जाते हैं और उसके बाद निजी वाहन के माध्यम से चुनावी यात्रा करते हैं तब भी पूरे दौरे को चुनावी दौरा माना जाएगा।

साथ ही वो उम्मीदवार जिनके साथ मंत्री देखे जाएंगे उसके चुनावी खर्चे में मंत्री के पूरे दौरे का खर्च जोड़ दिया जाएगा। सरकारी वाहन से लेकर सरकारी भवन के चुनाव कार्यों के लिए उपयोग पर भारतीय दंड संहिता की धारा 171 (c) के तहत कार्रवाई होगी। इसके तहत दोष सिद्ध होने पर तीन महीने कारावास की सजा या दो सौ रुपए आर्थिक दंड हो सकता है या दोनों ही हो सकता है। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है। इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट करेंगे।

भारत में भी लोकतंत्र को बचाये रखना एक बड़ी चुनौती है

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया को लेकर बेहद कठोर टिप्पणी की है और कहा है कि ये कोर्ट के बारे में भी ताकतवर लोगों के इशारे पर लिखता रहता है ऐसे में इस पर कड़े कानून बनाये जाने कि जरुरत है।

सुप्रीम कोर्ट के इस ऑब्जरवेशन की तारीफ होनी चाहिए लेकिन सवाल यह है कि जिस तरीके से कोर्ट काम कर रही है, उसको लेकर कोर्ट खुद खमोश क्यों है कोर्ट में भ्रष्टाचार चरम पर है ,न्याय की खुल्लम खुल्ला बोली लगती है सब जानता है क्या ये बात कोर्ट को पता नहीं है ऐसे में सवाल करने पर भी रोक लगा दी जायेंगी तो फिर इसे क्या कहेंगे ये हिपोक्रेसी नहीं होगा ।
हाल ही पटना हाईकोर्ट ने सरकार से पुछा है कि ऐसे कितने सरकारी अधिकारी हैं जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं यही सवाल तो जज से भी होनी चाहिए थी कि कितने जज हैं जिनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। इसलिए सिर्फ सवाल करने और नसीहत देने से कोई भी संस्था ज्यादा दिनों तक चल नहीं सकती है ।

अफगानिस्तान इसका सबसे लेटेस्ट उदाहरण है चंद मिनट में ही चंद बंदूकधारी के सामने कोर्ट, सांसद ,पुलिस ,सेना और ब्यूोरोक्रेसी ताश की पत्तों की तरह बिखर गया क्यों? 20 वर्षो के दौरान लोकतंत्र, न्याय व्यवस्था,सैन्य ताकत ,स्त्री स्वतंत्रता और मानवाधिकार के नाम पर जो संस्थान खड़े हुए उस संस्थान में नियुक्ति की जो प्रक्रिया रही वो जनता को रास नहीं आया।
आज ही भारतीय मीडिया में लीड खबर है जेेईई मेंस की परीक्षा में जबरदस्त खेला हुआ है आज की तारीख में गौर करे तो कोई भी ऐसी परीक्षा है जहां आप भरोसे के साथ कह सकते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है वैसे भारत में अभी भी परीक्षा में थोड़ी ईमानदारी बची हुई है इसलिए लोगों को सिस्टम पर भरोसा बचा हुआ है लेकिन यह भरोसा भी धीरे धीरे खत्म होता जा रहा है ।

मीडिया पर से भरोसा उठ ही गया है ,ब्यूरोक्रेसी हाफ ही रहा है ,न्याय व्यवस्था अपनी अंतिम सांस बचाये रखने के लिए संर्घष कर रहा है।

हमारे यहां सांसद और विधायक और मुखिया चुनने को लेकर जो संवैधिनाक प्रक्रिया है उसमें अब अच्छे लोगों के सांसद ,विधायक और मुखिया बनने की सम्भावना लगातार क्षीण होती जा रही है आने वाली राजनीति में लोहिया ,जेपी ,अटल बिहारी ,कर्पूरी ठाकुर, ,लालू ,नीतीश जैसे नेता पैदा होने की सम्भावना अब नहीं बची है।

ऐसे में आपके पास दुनिया का दूसरा तालीबान देश घोषित होने के लिए तैयार रहिए क्यों कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी लोकतंत्र को बने रहने के लिए जिस तरीके से संस्थान को मजबूत होना चाहिए था वो नहीं हो पाया ऐसे में पांच वर्ष में एक वोट के सहारे आप लोकतंत्र को बचाये नहीं रख सकते हैं यह यक्ष सवाल हमारे आपके सामने मुंह बाये खड़ा है ।

पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर सरकार का तेवर तल्ख कहा जेपी और लोहिया से समझौते का सवाल नहीं

जेपी और लोहिया के विचारों को बिहार के विश्वविधालय के पाठ्यक्रम से बाहर करने के मामले में राज्य सरकार राजभवन से दो दो हाथ करने के मूड में दिख रहा है आज राज्य के शिक्षा मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि इस मामले में महामहिम से मिलने का समय मांगा गया था लेकिन वो बिहार से बाहर है फिर उनसे मैंने फोन पर बात किया और एमए के पाठ्यक्रम में जो बदलाव हुआ है उससे सरकार के मंशा से अवगत करा दिया है और उम्मीद है कि राजभवन एमए के पाठ्यक्रम में जो बदलाव हुआ है उसको वापस ले लेगा ।

यह मामला बिहार के सारण स्थित जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय में जेपी और राममनोहर लोहिया के विचारों को पीजी के पाठ्यक्रम से हटाने की खबर के बाद सुर्खियों में था जिसको देखते हुए सरकार ने जेपी विश्वविधालय के कुलपति और रजिष्ट्रार को तलब किया था। कुलपति और रजिष्ट्रार से बातचीत के बाद शिक्षामंत्री विजय चौधरी सामने आए और सरकार का रुख साफ किया। शिक्षामंत्री ने कहा कि जयप्रकाश और लोहिया के विचारों की पढ़ाई जारी रहेगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार दूसरे विश्वविद्यालयों में भी ऐसे मामलों की जानकारी लेगी।

मीडिया से बात करते हुए विजय चौधरी ने कहा कि सीएम नीतीश ने खुद मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि सीबीसीएस लागू होने से बदलाव की बात कही जा रही है। चांसलर के आफिस ने सभी वाइस चांसलर को इसे भेज दिया था। कहा कि विश्वविद्यालय के स्तर पर भी इन चीजों को देखा जाना चाहिए था, उसके बाद लागू करने की बात होनी चाहिए थी।
शिक्षामंत्री ने कहा कि हम लोगों के समझ में यह बात भी नहीं आ रही कि सीबीसीएस का पाठ्यक्रम में इस तरह के परिवर्तन से क्या लगाव है। कुछ लोगों के राजनीतिक विचार को पाठ्यक्रम से अलग क्यों किया गया, यह समझ से परे है। कहा कि छपरा के कुलपति ने भी अपनी तरफ से कोई आदेश दिया हो ऐसी बात नहीं है। यह जिस रूप में हुआ है, हम लोग इसे उचित नहीं मानते हैं। सरकार के दृष्टिकोण से भी यह बिल्कुल अनुचित और अनियमित है। अभी तक जो परंपरा और नियम रहे हैं, उसके अनुसार भी ठीक नहीं है। नई शिक्षा नीति को लेकर भी यह गलत है।

जेपी-लोहिया के विचार बिना भारतीयता की सोच ही संभव नहीं
उन्होंने कहा कि अगर कोई परिवर्तन हुए और चांसलर आफिस से दिये गए तो बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद को भी उसकी जानकारी होनी चाहिए, जो नहीं हुई है। कुलपति ने भी अपनी पूरी सहमति जताई है कि यह उचित नहीं है, हम लोग इसके निराकरण का उपाय करेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया की सोच और विचार के बिना भारतीय राजनीति के दर्शन से समाजवाद, साम्यवाद और जेपी लोहिया के विचारों को अलग कर दिया जाएगा तो भारतीयता की सोच ही अलग हो जाएगी। यह लोग तो खालिस भारतीय विचारों के प्रतिबिंब हैं। उनके विचारों को कैसे अलग किया जा सकता है। कहा कि अभी तक इससे जुड़े कागजातों की पड़ताल नहीं हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अन्य विश्वविद्यालयों की भी पड़ताल करें। हो सकते हैं वहां भी इसी तरह की दिक्कतें हों।

हाईकोर्ट ने तेज प्रताप से चुनाव के दौरान साक्ष्य छुपाने को लेकर मांगा जबाव

पटना हाईकोर्ट में राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सह विधायक तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका पर सुनवाई शुरु कर दिया है। तेज प्रताप यादव के हसनपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचन कोलेकर विजय कुमार यादव ने चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दिया है।

कोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से विवादित बिंदुओं को दाखिल किया गया। जस्टिस विरेन्द्र कुमार ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए इसे रिकॉर्ड पर रखने का आदेश दिया।
अब इस मामलें पर 30 सितंबर को सेटलमेंट ऑफ इशू और गवाही पर सुनवाई की जाएगी। गवाही में संबंधित पक्षकारों द्वारा उन दस्तावेजों और गवाहों की सूची भी दी जाएगी ,जो इस मुकदमें से जुड़े हुए होंगे।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व् विधायक तेज प्रताप यादव के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि एक्ट, 1951 की धारा 100 का हवाला देते हुए तेज प्रताप यादव के निर्वाचन को अमान्य घोषित करने के लिए यह चुनाव याचिका दायर की गई हैं।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने यादव के निर्वाचन को अमान्य करार देकर हारे हुए जद यू के उम्मीदवार राज कुमार राय को घोषित करने करने के लिए चुनाव याचिका दायर की है।
यह मामला वर्ष 2020 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। याचिका दायर करने का आधार यादव द्वारा जानबूझकर अपनी संपत्ति के संबंध में पूरा ब्यौरा नहीं देने का आरोप लगाया गया है

याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधि क़ानून की धारा 123(2) के अनुसार इसे भ्रष्ट आचरण बताया है।

3 नवंबर, 2020 को विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ था। 10 नवंबर, 2020 को चुनाव परिणाम घोषित किया गया था, जिसमें तेज प्रताप यादव हसनपुर विधानसभा चुनाव क्षेत्र से विजयी हुए थे। अब इस मामले में आगे की सुनवाई आगामी 30 सितंबर को की जाएगी।

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में डीएसपी के घर छापेमारी

बालू माफिया से सांठगांठ मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने कारवाई तेज कर दिया है आज पटना पालीगंज के तत्कालीन एसडीपीओ तनवीर अहमद के ठिकानों पर आर्थिक अपराध शाखा (ईओयू) ने छापेमारी की है। वे बालू के अवैध खनन में संलिप्तता के आरोप में निलंबित हैं। उनके पटना स्थित फ्लैट के अलावा बेतिया जिला के पैतृक घर की भी तलाशी ली जा रही है। इसके अलावा उनके नरकटियागंज अनुमंडल के मैनाताड़ थाना क्षेत्र के पीडारी गाँव में भी छापामारी चल रही है अहमद के पास आय से 60 प्रतिशत अधिक संपति पाई गई है।

डीएसपी का घर भारत-नेपाल सीमा पर है। ईओयू की इस कार्रवाई से पहले उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। निलंबित किए गए डीएसपी के खिलाफ बालू माफियाओं संग सांठगांठ के सबूत मिले हैं।इससे पहले आर्थिक अपराध इकाई ने बालू माफिया से सांठगांठ मामले में निलंबित डेहरी के तत्कालीन एसडीओ सुनील कुमार सिंह के तीन ठिकानों पर एक साथ छापानारी किया था । ईओयू ने पटना और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित उनके पैतृक आवास पर भी छापेमारी किय था। वहां कमरे की तलाशी लेने के साथ ही घर पर मौजूद निलंबित एसडीओ से घंटों पूछताछ कि गयी थी ।

चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के खर्च का सीमा किया निर्धारित

बिहार में पंचायत चुनाव का बिगुल बच गया है आज प्रथम चरण के चुनाव को लेकर दस जिलों के 12 प्रखंडों में नामांकन का काम शुरु हो गया है ।

वही इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के अधिकतम खर्च की सीमा निर्घारित कर दिया है ।
आयोग ने सभी पदों के क्षेत्र व जनसंख्या के अनुसार चुनाव में खर्च की सीमा तय कर दी है। मुखिया और सरपंच प्रत्याशी अधिकतम 40 हजार ही खर्च कर पाएंगे वही वार्ड सदस्य और पंच पद के प्रत्याशी अधिकतम 20 हजार रुपए तक चुनाव में खर्च कर सकते हैं।

जिला परिषद प्रत्याशी को एक लाख रुपए तक खर्च करने की छूट दी गई है। वहीं आयोग ने पंचायत समिति सदस्य के पद पर चुनाव लड़ने वालों के लिए अधिकतम 30 हजार रुपया खर्च की सीमा तय कर दी है।

सभी प्रत्याशी को तय सीमा में ही खर्च करनी है साथ ही चुनाव में खर्च की गई राशि का हिसाब भी सभी को देना पड़ेगा। प्रत्याशियों को मतों की गणना का कार्य संपन्न होने के बाद चुनाव खर्च का ब्यौरा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। अगर इस बार कोई प्रत्याशी खर्च का हिसाब नहीं देते हैं तो अगले चुनाव में वैसे प्रत्याशी चुनाव से वंचित रह सकते हैं।

सभी प्रत्याशियों को मतगणना की समाप्ति के 15 दिन के अंदर अपने खर्च का ब्यौरा निर्वाची पदाधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य होगा। जांच में किसी प्रत्याशी के खर्च की राशि अधिक होती है तो ऐसे में उस प्रत्याशी पर चुनाव आयोग के फैसले का उल्लंघन करने के खिलाफ में कार्रवाई की जाएगी।

भ्रष्ट इंजीनियर के खिलाफ विभाग की चुप्पी से मंत्री और विभागीय अधिकारियों के कार्यशैली सवालों के घेरे में ।

दरभंगा ग्रामीण कार्य विभाग के अधीक्षण अभियंता को थाने से ही छोड़ने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है वही अभी तक विभाग द्वारा अभियंता पर कोई कारवाई नहीं किये जाने पर मंत्री सहित विभाग के प्रधान सचिव के मंशा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं ।

डीजीपी ने पूरे मामले में एसएसपी मुजफ्फरपुर से इंजीनियर मामले में बरामद राशी और एफआईआर के साथ साथ थाने के स्टेशन डायरी तक की कांपी मांगी है। जो खबर आ रही है उसके अनुसार स्टेशन डायरी और एफआईआर दर्ज करने के समय को लेकर कई तरह की त्रृटि है जिसका लाभ अभियुक्त को मिल सकता है हलाकि अब इस पूरे मामले की जांच आईजी मुजफ्फरपुर खुद देख रहे हैं।
इस बीच मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली को लेकर बिहार के पूर्व डीजीपी और बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त अभियान चलाने वाले अभयानंद का कहना है कि जो मीडिया रिपोर्ट है उसके अनुसार मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में हैं।

सरकारी सेवक के पास से नगद पैसा बरामद होता है और उस पर आदर्श आचार संहिता का मामला दर्ज होता है जो समझ से पड़े है क्यों कि सरकारी सेवक के मामले में कानून पूरी तौर पर स्पष्ट है अगर किसी भी सरकारी कर्मी के पास से नगद पैसा बरामद होता है और उस पैसे का अगर हिसाब नहीं बता रहा है तो तुंरत उस पर पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज करना है ।
वही मुजफ्फरपुर पुलिस खुद कह रही है कि इंजीनियर के पास से बरामद लैपटांप और मोबाइल के डाटा मालूम करने में इंजीनियर सहयोग नहीं कर रहे हैं ऐसे में थाने से बेल देना समझ से पड़े है।

सीआरपीसी की धारा 41 के तहत नोटिस देने का प्रावधान है लेकिन वैसे स्थिति में ना जब अभियुक्त पुलिस को सहयोग कर रही है दूसरी बात अभियुक्त के बाहर रहने से साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है लेकिन इंजीनियर मामले में सब कुछ सामने है थाने में रहते हुए छेड़छाड़ कर रहा था ऐसे में मुजफ्फरपुर पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी ही है।
इस बीच मुजफ्फरपुर एसएसपी जयकांत से जब थाने से छोड़ने को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना है कि इस तरह के मामले में थाने से बेल देने का प्रावधान है ,बिहार पुलिस इससे पहले भी इस तरह के मामले में बेल देती रही है ऐसे में इस तरह के सवाल का कोई मतलब नहीं है ।मुजफ्फरपुर पुलिस इस मामले की पूरी गहनता से छानबीन कर रही है और एएसपी स्तर के अधिकारी को इस कांड का अनुसंधानकर्ता बनाया गया है ।

इस बीच इस मामले को लेकर विभागीयमंत्री जयंत राज से जब यह पुंछा गया कि आपके विभाग के एक सीनियर इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया बरामद हुआ है और उस पर मुकदमा भी दर्ज हुआ है फिर भी अभी तक कोई कारवाई नहीं हुई है इस पर मंत्री का कहना है कि इस मामले में विभाग भी अपनी ओर से जांच कर रहा है और शीघ्र ही समुचित कार्रवाई की जाएगी।

बिहार का एक और अधिकारी आय से अधिक संपत्ति मामले में पकड़ा गया

बिहार में भ्रष्टाचार किस कदर व्याप्त है उसकी बानगी आज राज्य सरकार के स्पेशल विजिलेंस के छापा के दौरान सामने आयी है ।

जी है नगर विकास विभाग के 2013 बैच के पदाधिकारी जो हाजीपुर नगर परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पद से हाल ही सस्पेंड हुए हैं अनुभूति श्रीवास्तव के फ्लैट पर बुधवार को छापेमारी हुई। एक DSP की अगुवाई में स्पेशल विजिलेंस के 10 लोगों की टीम ने सुबह 7 बजे से ही दबिश दे रही है। पूरा मामला आय से अधिक की संपत्ति का है।

आरोप है कि अनुभूति श्रीवास्तव ने सरकारी पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार से जुड़े कई कांडों को अंजाम दिया है। अब तक वह अवैध रूप से करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्ति के मालिक बन चुके हैं। इनके खिलाफ काफी शिकायतें सरकार को भेजी जा रही थी, जिसके बाद इंटरनल जांच हुई। 18 अगस्त को ही इन्हें हाजीपुर नगर परिषद के मुख्य कार्यपाल पदाधिकारी के पद से सस्पेंड कर दिया गया था। फिर पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित स्पेशल विजिलेंस ने इनके खिलाफ FIR दर्ज की।

इसके बाद आज टीम ने राजधानी के रूकनपुरा इलाके के तिलक नगर में स्थित अर्पणा मेंशन में छापेमारी की।अभी तक जांच के दौरान सात वर्ष के नौकरी में अकूत सम्पर्ति अर्जित करने के प्रमाण मिले हैं जिसमें पटना में दो फ्लैट एक इंदौर में फ्लैट के साथ साथ एक करोड़ से अधिक निवेश और लगभग 75 लाख रुपया विभिन्न बैक खाते में जमा मिला है फिलहाल सारे कागजात और बैक खाते को विशेष निगरानी की टीम ने जप्त कर लिया है और इनके खिलाफ आय़ से अधिक सम्पत्ति मामले में प्राथमिकी दर्ज किया गया है ।

पंचायत चुनाव में इस बार जिला मुख्यालय में होगी मतगणना

राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के मतगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया है इस बार मतगणना जिला मुख्यालय में होगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने बिहार के सभी डीएम को पत्र जारी करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी परिस्थिति मतगणना प्रखंड या अनुमंडल स्तर पर नहीं होगा ।


आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि मतपेटियों को प्रखंड मुख्यालय की बजाय जिला स्तर पर ही संग्रहण केंद्र बनाएं। वहीं पर ईवीएम और बैलेट बॉक्स को रखने की व्यवस्था करें।


पंचायत चुनाव में पहले प्रखंड स्तर पर ही मतगणना होती थी लेकिन इस बार व्यवस्था बदल दी गई है। मतगणना स्थल पर बनाए जाने वाले संग्रहण केंद्र पर पंचायतवार रीसिविंग काउंटर बनाया जाएगा। दो या तीन पंचायत पर एक काउंटर की व्यवस्था की जाएगी। मुख्य काउंटर के पीछे पदवार ईवीएम एवं मतपेटिका को प्राप्त करने के लिए पांच सब काउंटर भी बनाए जाएंगे। सब काउंटर से पदवार चिन्हित ब्रजगृह में संबंधित पद के लिए ईवीएम एवं आवश्यक प्रपत्र(पीठासीन पदाधिकारी की घोषणा, मतपत्र लेखा एवं पेपरसिल लेखा) को पदवार चिन्हित वज्रगृह में रखा जाएगा।


मतगणना स्थल पर प्रत्येक पंचायत के लिए पांच व्रजगृह बनाए जाएंगे, जिसमें अलग-अलग पद के लिए जैसे ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य तथा जिला परिषद सदस्य के लिए होगा। पंच और सरपंच पद के लिए अलग से एक अतिरिक्त कक्ष बनाया जाएगा।

बाढ़ से बेहाल बिहार रेलवे पुल पर दवाब की वजह से मिथिलाचंल का देश से सम्पर्क टूटा

हायाघाट के पास रेलवे पुल पर पानी के दबाव के कारण जयनगर रेलखंड पर कई ट्रेनों का परिचालन ठप हो गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से रेलवे प्रशासन ने जयनगर-भागलपुर एक्सप्रेस वे, जयनगर-समस्तीपुर पैसेंजर सहित कई ट्रेनों को रद कर दिया है।इसके साथ ही गंगासागर एक्सप्रेस सहित कुछ ट्रेनें समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और बरौनी से चलाए जाने की खबर है। पवन और शहीद एक्सप्रेस सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर के रास्ते चलेंगी। ट्रेनों के रद होने और रूट डायवर्जन के लिए रेल यात्रियों को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है।

01 सितंबर को अपने प्रारंभिक स्टेशन से प्रस्थान करने वाली वैसी ट्रेनें जिनका परिचालन रद्द किया गया है-

  • 05549 जयनगर-पटना स्पेशल ट्रेन
  • 05550 पटना-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05553 भागलपुर-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05554 जयनगर-भागलपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05589 समस्तीपुर-दरभंगा स्पेशल ट्रेन
  • 05590 दरभंगा-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05593 समस्तीपुर-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05594 जयनगर-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन
  • 05283 मनिहारी-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 05284 जयनगर-मनिहारी स्पेशल ट्रेन 03225 जयनगर-राजेंद्र नगर टर्मिनल स्पेशल ट्रेन
  • 03226 राजेंद्र नगर टर्मिनल-जयनगर स्पेशल ट्रेन
  • 03227 सहरसा-राजेंद्र नगर टर्मिनल स्पेशल ट्रेन
  • 03228 राजेंद्र नगर टर्मिनल-सहरसा स्पेशल ट्रेन
  • 05559 दरभंगा-अहमदाबाद स्पेशल ट्रेन

सोशल मीडिया के सहारे पंचायत चुनाव पर आयोग की रहेगी नजर

बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर आयोग पहली बार सोशल मीडिया पर उम्मीदवारों की मॉनिटरिंग करेगा. चुनाव के दौरान किसी भी गड़बड़ी की शिकायत के लिए चुनाव आयोग के द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है.ऐप के माध्यम से मतदाता शिकायत दर्ज करा सकेंगे. आयोग ने शिकायत पर त्वरित कारवाई करने के लिए हेल्पलाइन नंबर18003457243 जारी किया है. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की ऑनलाइन निगरानी कि विभिन्न की सुविधाएं इस बार पंचायत चुनाव में देखने को मिलेगी.


जागरूकता के लिए सोशल मीडिया का सहारा- बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग (bihar state election commission) ने पंचायत चुनाव पर विशेष गीत भी लांच किया है. ये है बिहार जय जय बिहार गीत को कलर ट्यून के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा मतदाताओं से मतदाता सूची की तैयारी और मतदान केंद्रों की स्थापना को लेकर संवाद स्थापित किया जा रहा है.


बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल- बिहार के पंचायत चुनाव में पहली बार बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. राज्य में बोगस वोटिंग रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. बायोमेट्रिक के लगने से मतदाता दो बार मतदान नहीं कर सकेंगे. ईवीएम का प्रयोग- बिहार पंचायत चुनाव में पहली बार ईवीएम का प्रयोग किया जाएगा. राज्य में मुखिया (Mukhia), जिला परिषद, वार्ड सदस्य और पंचायत समिति पद के लिए मतदाता ईवीएम से वोट कर सकेंगे. वहीं पूरे चुनाव में ईवीएम मशीन और पोलिंग पार्टी को भी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जायेगी. ईवीएम (EVM) मतदान केंद्र से कब निकली और मतगणना कक्ष तक कितनी देर में पहुचेगी इसकी जानकारी जीपीएस के माध्यम से मिल सकेगी.पोलिंग पार्टी भी मतगणना केंद्र पर कब पहुचेगी इसकी भी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जायेगी

शताब्दी भवन के तोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग (शताब्दी भवन )के पास मजार से सटे एक बहुमंजिली इमारत के हुए अवैध निर्माण को तोड़ने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। जस्टिस यू यू ललित की पीठ ने राज्य सरकार व अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के इस मामलें में बहाल amicus curie वरीय अधिवक्ता राजेंद्र नारायण को जारी किया हैं।

इससे पूर्व जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय जजों की बेंच ने इस मामलें पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। जजों की पाँच सदस्यीय बेन्च ने बहुमत के निर्णय से इस भवन निर्माण को अवैध करार देते हुए एक माह के भीतर तोड़ने का आदेश दिया था ।
इस भवन के निर्माण पर कोर्ट ने तत्काल रोक लगाते हुए राज्य सरकार से पूछा था कि क्या इसके निर्माण को लेकर पटना हाईकोर्ट और पटना नगर निगम से भी अनुमति ली गई थी ?

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि नई बिल्डिंग से सटे मजार के करीब वक्फ बोर्ड का चार मंजिला कार्यालय बन रहा है। कार्यालय के सबसे नीचे मुसाफ़िर खाना बन रहा है।
य़ह तिमंजिला भवन है एवं नए इमारत के निर्माण में किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी ।
इस पर जजों ने कहा था कि यह गलत तरीके से बना है।बिल्डिंग बाय लॉ की धारा 21 में स्पष्ट कहा गया है कि विधान सभा , राजभवन और हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील से सटे कोई दूसरी बिल्डिंग नहीं बनाई जा सकती है। साथ ही इसकी उँचाई 10 मीटर से अधिक नहीं हो सकती हैं।इस मामलें पर नोटिस का जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पुनः सुनवाई करेगा।

पंचायत प्रतिनिधियों के असहज मौत पर राज्य सरकार देंगी मुआवजा

पंचायत चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों को लेकर कई तरह के फैसले लिए हैं जिसमें मुखिया ,सरपंच के क्षेत्राधिकारी के साथ साथ अब कार्यकाल के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों की मौत होने पर सरकार मुआवजा का भी प्रावधान किया है ।

राज्य निर्वाचन आयोग से मिली जानकारी के अनुसार, चुनावी व्यवस्था के तहत जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति प्रमुख, उप प्रमुख, पंचायत समिति के सदस्य, मुखिया, उप मुखिया, ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम कचहरी सरपंच, उप सरपंच और ग्राम कचहरी के पंच चुनाव जीतते हैं और कार्यकाल के दौरान उनकी आपराधिक घटना, प्राकृतिक आपदा या हिंसात्मक घटना और दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो उनके स्वजन को सरकार की ओर से पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मृत्यु की स्थिति में राशि स्वीकृति का अधिकार सरकार ने जिलाधिकारी को दिया है।

राज्य में चल रहे विशेष क्वारन्टाइन जेल बंद अब समान्य जेलों में रहेगा कैदी

कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जेलों में कोरोना की रोकथाम और बचाव के लिए बनाई गई विशेष क्वारन्टाइन जेलों (Special Quarantine Cell) को बंद कर दिया गया। जेल आइजी मिथिलेश मिश्र (Jail IG Mithilesh Mishra) ने कोरोना का कहर समाप्त होते ही विशेष क्वारन्टाइन जेलों की सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

सूबे के विभिन्न न्यायालयों से न्यायिक हिरासत में भेजे जाने वाले आरोपित अब सीधे स्थानीय जेल भेजे जाएंगे। पूर्व की तरह कोरोना से बचाव को बनाए गए विशेष क्वारन्टाइन जेलों में अब उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारन्टाइन के लिए नहीं भेजा जाएगा।

कोरोना लहर को देखते हुए 2020 में कोरोना महामारी की भयावह स्थिति से जेल में बंद बंदियों को बचाने के लिए विशेष क्वारन्टाइन जेल बनाए गए थे। कोरोना का असर समाप्त होने के बाद 2020 में ही कुछ दिनों के लिए यह विशेष व्यवस्था स्थगित की गई थी पर कोरोना की दूसरी लहर आते ही 11 अप्रैल 2021 से पुन: इसे न सिर्फ बहाल किया गया था बल्कि कई सुविधाओं से भी लैस कराते हुए बंदियों के लिए वेक्सिनेशन की भी सुविधाएं मुहैया कराई गई थी।

नीतीश कुमार पीएम पद के नहीं है उम्मीदवार मोदी हैं सर्वमान्य नेता

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में भारत के प्रधानमंत्री बनने की तमाम योग्यता रखते हैं, हालांकि वह पीएम पद के दावेदार नहीं हैं। रविवार को जदयू की राष्टीय परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया। साढ़े तीन घंटे से अधिक चली इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केन्द्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह, संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा, सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह समेत जदयू राष्ट्रीय परिषद के करीब ढाई सौ सदस्यों की उपस्थित के बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं और वही एनडीए में पीएम पद के प्रत्याशी भी हैं। लिहाजा, नीतीश कुमार इस पद के दावेदार नहीं हैं। लेकिन, हमारा मानना है कि पीएम पद के लिए जिन योग्यताओं और जिस आला दर्जे के समर्पण तथा दक्षताओं की जरूरत होती है, वे सभी नीतीश कुमार में हैं। ललन सिंह के इस प्रस्ताव को जदयू राष्ट्रीय परिषद ने सर्वसम्मति से पारित किया।

उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति बिगड़ी कई तटबंध टूटे राजधानी से कई जिलों का सड़क सम्पर्क हुआ भंग

नेपाल में पिछले 72 घंटे से लगातार हो रही है बारिश के कारण एक बार फिर 40 दिनों बाद उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति बिगड़ गयी है वही गंडक बराज से आज रात 5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने को लेकर पूरे इलाको को प्रशासन ने खाली करने का निर्देश दिया है ।

गंडक , बूढ़ी गंडक, बागमती और कमला बलान सहित तमाम छोटी नदियां भी तबाही मचाने लगी है। चम्पारण से लेकर मिथिलांचल तक नये क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। पूर्वी चम्पारण में अरेराज- हाजीपुर एसएच-74 पर संग्रामपुर के इजरा के पास करीब एक किलोमीटर में दो फीट गंडक का पानी बह रहा है। पानी और बढ़ा तो आवागमन ठप हो जाएगा। बगहा दो प्रखंड की नौरंगिया दरदरी पंचायत के पचफेड़वा में भपसा नदी के टूटे बांध से गांवों में पानी फैल रहा है। बगहा के पिपरासी प्रखंड की सेमरा लबेदहा पंचायत में गंडक की बाढ़ से दर्जनभर घर व दो सड़कें बह गईं हैं। सीतामढ़ी के छह सात प्रखंड की तीन दर्जन से अधिक पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। कुम्मा डायवर्सन पर पानी बढ़ने से एनएच 104 पर आवागमन ठप हो गया है। दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड क्षेत्र के लोगों को कमला-बलान में उफान से सातवीं बार बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। मधुबनी के झंझारपुर में 15 दिनों से फ्लड फाइटिंग जारी रहने के बाद भी आरएस के अदलपुर-पिपराघाट के सामने कमला बलान के पूर्वी तटबंध में कटाव पर काबू नहीं पाया जा सका है। बगहा की नौरंगिया दरदरी पंचायत के पचफेरवा में भपसा नदी का बांध टूट गया। इससे दो दर्जन गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। सिकरहना की बाढ़ का पानी लौरिया-नरकटियागंज पथ पर अशोक स्तंभ के पास डायवर्सन पर चढ़ गया है। अशोक स्तंभ परिसर में भी पानी फैलने लगा है। पानी रामनगर-लौरिया पथ की ओर बढ़ रहा है। रामनगर के दोन क्षेत्र के बगही व गुदगुदी पंचायत में मसान के कटाव में सैंकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई।

पूर्वी चम्पारण के संग्रामपुर में एसएच 74 पर चढ़ा गंडक का पानी संग्रामपुर प्रखंड में अरेराज- हाजीपुर एसएच 74 पर दो फीट बाढ़ का पानी बह रहा है। अरेराज कीआधा दर्जन पंचायतों में बाढ़ से तबाही मची है। सुगौली, बंजरिया, केसरिया, पताही प्रखंड की कई पंचायतें बाढ़ से प्रभावित है। सुगौली नगर पंचायत के सात वार्ड बाढ़ से घिर गए हैं। पताही में मोतिहारी-शिवहर पथ पर पानी चढ़ने से तीसरे दिन भी आवागमन ठप है। डुमरिया घाट में गंडक नदी लाल निशान से ऊपर बह रही है। लाल बेगिया सिकरहना, लाल बाकेया गुवाबारी व अहिरौलिया में बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है।

सीतामढ़ी की तीन दर्जन पंचायतों के दर्जनों गांव प्रभावित
सीतामढ़ी जिले के नये इलाके में बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है। बागमती व अधवरा समूह की नदियां लाल निशान के ऊपर है। जिले के छह प्रखंड की तीन दर्जन से अधिक पंचायतें बाढ़ से प्रभावित है। सुरसंड प्रखंड के नगर पंचायत सहित 15 पंचायत के चार दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। कुम्मा डायवर्सन पर पानी चढ़ने से आवागमन में परेशानी हो रही है। लखनदेई नदी का पानी शहर के निचले इलाके में प्रवेश कर रहा है। बाजपट्टी व चोरौत के दो दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित है। वहीं पुपरी के दो पंचायत के आधा दर्जन गांव प्रभावित है। बेलसंड नगर पंचायत सहित प्रखंड नौ पंचायतों के एक दर्जन गांवों में मनुषमरा नदी का पानी निचले इलाके में फैल गया है। बेलसंड-सीतामढ़ी पथ में कोठी चौक से भोरहा तक व बेलसंड धनकौल पथ में सौली, सुंदरपुर व सौली मठ तक बाढ़ का पानी सड़क तीन फीट बह रहा है।

जिले से होकर गुजरने वाली सभी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। हालांकि कमला-बलान नदी के जलस्तर में 83 सेमी की कमी आने से लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। कमला-बलान के जलस्तर में उफान से घनश्यामपुर प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गयी है। प्रखंड में सातवीं बार बाढ़ आने से लोग परेशान हैं। सड़कों पर पानी बहने से सिर्फ नाव ही आवागमन का माध्यम है। उधर, हनुमाननगर प्रखंड में भी बागमती का पानी फैल गया है। प्रखंड की सभी 14 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हो गयी हैं। हायाघाट-अशोक पेपर मिल सड़क पर पानी बहने से अब भी आवागमन ठप है।

नीतीश के सामने है दोहरी चुनौती पार्टी और सरकार दोनों कैसे बचे

आज जदयू के केंद्रीय संगठन में हाल में हुए बदलाव के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) कई महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी राय देंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच फैले भ्रम को दूर करेंगेे और उन सवालों के जवाब भी देंगे जो पार्टी संगठन में अक्सर पूछे जा रहे हैं। रविवार को पटना में आयोजित राष्ट्रीय परिषद (JDU National Council) की बैठक में मुख्यमंत्री के भाषण का इंतजार पार्टी के कार्यकर्ता शिद्दत से कर रहे हैं। हाल के दिनों में उनके बीच संशय पैदा करने वाली कई घटनाएं हुईं। इस या उस नेता के बदले पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओं के बीच अधिक दुविधा है।

स्वागत समारोह या शक्ति प्रदर्शन
जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर सांसद राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह (JDU National President Lalan Singh) छह अगस्त को पटना आए। उनके स्वागत में भारी भीड़ जुटी। केंद्र में मंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह (Union Minister of Steel RCP Singh) पहली बार बिहार आए। उसमें भी अच्छी भीड़ जुटी। लेकिन, तैयारी के बैनर से विवाद हो गया। उस बैनर पर नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह का फोटो नहीं था। वह बैनर हटा। नया बैनर लगा। लेकिन, आरसीपी की पूरी यात्रा में बैनर का फोटो विवाद बन कर झूलता रहा। संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) फोटो चुनिन्दा जवाब में उपेंद्र कुशवाहा की यात्रा के बैनरों से आरसीपी गायब कर दिए गए।

संगठन का काम करते रहेंगे
आरसीपी ने सम्मान समारोह में कहा कि वह केंद्र में मंत्री रहेंगे और संगठन का काम पहले की तरह करते रहेंगे। उन्होंने बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं के घर पर भोजन करने की घोषणा की। कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिया कि इस्पात मंत्रालय और बिहार सरकार में मनोनयन से भरे जाने वाले पदों की वैकेंसी खत्म करेंगे। कार्यकर्ताओं को मनोनीत करेंगे। उन्होंने इशारे में कहा कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की उनकी भूमिका कायम रहेगी।

कार्यकर्ताओं-नेतृत्व दोनों में असमंजस
आरसीपी की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं और छोटे-मध्यम दर्जे के नेतृत्व में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है कि वह किसे संगठन का नेता माने। बेशक नीतीश कुमार सर्वोच्च हैं। लेकिन, संगठन के मामले में वह रोज-रोज अपनी राय नहीं दे सकते हैं। लिहाजा उनके बाद वाले कमांड की जरूरत है। संभव है कि नीतीश कुमार अपने संबोधन में जिक्र करें कि पार्टी संगठन का व्यवहारिक नेतृत्व कौन करेगा। पार्टी के प्रति संगठन और सरकार-दोनों की जिम्मेवारी है। यह तय होगा प्राथमिक जिम्मेवारी किसकी है।

बैक ड्राप पर सिर्फ नीतीश का चेहरा
अध्यक्ष बनने के बाद भी ललन सिंह संगठन के मामले में अधिक सक्रिय नहीं हैं। स्वागत कराने के बाद लोकसभा की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली चले गए। संसद की कमेटी के साथ जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए थे। वहां जदयू कार्यालय में गए। लेकिन, बिहार संगठन में उन्होंने कोई महत्वपूर्ण हस्तक्षेप नहीं किया। शायद इसलिए भी कि वे मुख्यमंत्री के मुंह से अपनी भूमिका के बारे में सुन लेना चाहते हैं। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में ललन सिंह के अध्यक्ष बनने के फैसले की भी पुष्टि होगी। इसके बाद ललन सिंह की प्रभावी भूमिका शुरू होगी। फिलहाल, जदयू के प्रदेश कार्यालय के बैनर से राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से लगाया गया आरसीपी का फोटो हटा दिया गया है। ललन सिंह का फोटो रविवार के बाद लगेगा।

सरकार में शामिल होने का फैसला
अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि आरसीपी सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का फैसला किसका था। ललन सिंह कह रहे हैं कि यह राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला था। उस समय राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी ही थे। मुख्यमंत्री अबतक कुछ स्पष्ट नहीं बोले हैं। दूसरी तरफ आरसीपी कह रहे हैं कि उन्होंने आज तक बिना मुख्यमंत्री की सहमति से कुछ नहीं किया। मुख्यमंत्री राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कुछ ऐसा जरूर कहेंगे, जिससे कार्यकर्ता समझ जाएं कि किसी की सहमति या राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से आरसीपी ने केंद्रीय कैबिनेट में शामिल होने का फैसला किया।

– अरुण अशेष(लेखक दैनिक जागरण के वरिष्ट पत्रकार हैं)

पंचायत चुनाव में एक कर्मचारी चार चरणों के चुनाव में ही लेगा भाग।

बिहार में पंचायत चुनाव के दौरान एक कर्मचारी को अधिकतम चार चरणों के चुनाव में तैनात किया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कर्मियों की कमी की दशा में एक मतदान अधिकारी, मतगणना कर्मी, पेट्रोलिंग मैजिस्ट्रेट, माइक्रो ऑब्जर्बर को अधिकतम चार चरणों में ही प्रतिनियुक्त किए जाएंगे।


गौरतलब है कि पूर्व में आयोग ने एक कर्मी को तीन चरणों में ही तैनात करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिलों से कर्मियों की कमी के कारण मात्र तीन चरणों में ही प्रतिनियुक्ति किए जाने में कठिनाई की जानकारी आयोग को दी गयी। इसके बाद आयोग ने अपने पूर्व के आदेश को संशोधित करते हुए अधिकतम चार चरणों में कर्मियों की तैनाती का निर्देश दिया है।

आयोग के अनुसार प्रत्येक मतगणना (ईवीएम से) टेबुल पर एक महिला कर्मी को मतगणना सहायक के रुप में तैनात किया जाएगा। वहीं, इवीएम के मतगणना टेबुल पर एक माइक्रो ऑब्जार्बर महिला या पुरुष अवश्य तैनात किया जाए। आयोग के सचिव मुकेश कुमार सिन्हा ने यह आदेश जारी किया और इस संबंध में की गयी कार्रवाई की जानकारी आयोग को देने को भी कहा।

रामविलास जी के मौत के लिए चिराग जिम्मेवार है

केन्द्रीय मंत्री पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच जुबानी जंग तेज हो गयी है हाजीपुर यात्रा के दौरान जिस तरीके से चिराग के समर्थक लगातार पशुपति पारस पर हमलावर रहे इससे बौखला कर पारस ने आज यहां तक कह दिये कि सूरज इधर से उधर हो सकता है मगर अब चिराग के साथ सुलह नहीं हो सकती।

साथ ही पशुपति पारस ने चिराग पर आरोप लगाते हुए कहा है कि चिराग ने जबरन रामविलास पासवान को लोजपा अध्यक्ष पद से हटा दिया था। वह मेरी भी इज्जत भी नहीं करते थे। उन्होंने कहा कि चिराग मुझे अपने खून से अलग मानते हैं। पशुपति ने कहा कि लोजपा में टूट की वजह मैं नहीं खुद चिराग पासवान हैं। उनके फैसले से पार्टी के लोग नाखुश थे। रामविलास जी भी मुझे ही अपना असली वारिस मानते थे।

चिराग ने पिछले साल संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश को जेल भेजने की बात मुझसे कही थी। बिहार सीएम को विकास पुरुष बोलने पर उन्होंने मुझे पार्टी से निकालने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि यह सब रीना पासवान की मौजूदगी में हुआ था।असली लोजपा मेरे साथ है चंद लफंगा चिराग के पास है जल्द ही बिहार और पूरे देश में एक बार फिर पार्टी को नये सिये से खड़े करेंगे ।

पंचायत चुनाव में भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने पर चुनाव आयोग ने लगायी रोक

पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप में पद से हटाए गए मुखिया इस बार पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 के तहत जिन मुखिया और उप-मुखिया पर निहित शक्तियों के दुरुपयोग या अपने दायित्वों के निर्वहन में दुराचार का आरोप लगा है, प्रमंडलीय आयुक्त अथवा राज्य सरकार द्वारा पद से हटाए गए हों तथा सक्षम प्राधिकार अथवा न्यायालय द्वारा इसे स्थगित या रद नहीं किया गया हो वे पद से हटाए जाने की तिथि से पांच साल तक पंचायत चुनाव में उम्मीदवार नहीं हो सकेंगे।

ऑन लॉक 6 में वैक्सीन लेने वाला व्यक्ति ही बिहार में घूम सकता है।

अनलॉक – 6 में क्या खास है

गृह विभाग के अपर प्रमुख सचिव चैतन्य प्रसाद ने दी जानकारी
26 अगस्त से 25 सितंबर तक अनलॉक – 6 लागू रहेगा

पूर्व के प्रतिबंधों में काफी सहूलियत दी गई।
राज्य के सभी दुकान व प्रतिष्ठान सामान्य समय पर खुलेंगे बंद करने के समय पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।
दुकान और प्रतिष्ठान में काम करने वाले सभी मालिक व कर्मचारियों द्वारा टीकाकरण लेना अनिवार्य होगा।

और अपने प्रतिष्ठानों में उसका सर्टिफाइड कॉपी रखना अनिवार्य होगा।

दुकान में प्रतिष्ठानों में मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंस का पालन पूर्व की तरह ही करना होगा।

राज्य के सभी शिक्षण संस्थान 100% उपस्थिति के साथ खुलेंगे।

पहली से लेकर 12वीं तक के स्कूलों को भी 100 % उपस्थिति के साथ खुलेंगे।

शिक्षण संस्थानों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था रखी जाएगी।

राज्य में चलने वाले सभी सरकारी आवासीय स्कूलों को भी खोला जाएगा।

राज्य के सभी बोर्ड व समिति द्वारा परीक्षाएं लेने की इजाजत होगी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को टीकाकरण करने की जिम्मेवारी होगी।

सार्वजनिक स्थल पर किसी भी तरह के आयोजन की अनुमति जिला प्रशासन द्वारा लेना अनिवार्य होगा।
आयोजन में कितने लोग शामिल होंगे इसकी सीमा जिला प्रशासन क्या करेगा।

शादी समारोह वर्ष श्राद्ध कार्यक्रम में लोगों की तरह संख्या समाप्त कर दी गई है।
लेकिन शादी समारोह में बारात व डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रहेगा।

सभी पर समान रूप से खुलेंगे।

राज्य के सभी धार्मिक स्थलों को भी समान रूप से खोला जायेगा।
मंदिर – मस्जिद व गुरुद्वारों में कोविड-19 इनका पालन कर श्रद्धालु पूजा कर सकेंगे।

राज्य में सभी सामाजिक राजनीतिक और खेलकूद जैसे कार्यक्रम कराने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।

राजगीर के कुंड में वे अब स्नान हो सकेगा। हालांकि इसके लिए आरटी पीसीआर का 72 घंटे पूर्व नेगेटिव जांच रिपोर्ट या फिर रैपिड एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट होना अनिवार्य रहेगा।

50% क्षमता के साथ सिनेमा हॉल और शॉपिंग मॉल सामान्य समय से खुल सकेंगे।

50% क्षमता के साथ रेस्टोरेंट सामान्य समय से खोला जाएगा।

राजगीर क्लब जिम और स्विमिंग पूल 50% क्षमता के साथ वैक्सीनेशन लिए हुए व्यक्तियों के लिए खोला जाएगा।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट 100 % क्षमता के साथ चलेंगे।

कहॉ कब होगा पंचायत चुनाव

बिहार पंचायत चुनाव

कुल 11 चरणों मे होगा चुनाव ।

24 सितंबर को पहला चरण ।
10 जिला , 12 प्रखंड ।

29 सितंबर को दिव्तीय चरण।
34 जिला , 48 प्रखंड

8 अक्टूबर को तीसरा चरण ।
35 जिला ,50 प्रखंड

20 अक्टूबर को चौथा चरण ।
36 जिला,53 प्रखंड

24 अक्टूबर को 5वा चरण ।
38 जिला,58 प्रखंड

3 नवंबर को छठा चरण ।
37 जिला,57 प्रखंड

15 नवंबर सातवा चरण ।
37 जिला,63 प्रखंड

24 नवंबर आठवां चरण।
36 जिला,55 प्रखंड

29 नवंबर नवा चरण।
35 जिला,53 प्रखंड

8 दिसंबर 10 वा चरण
34 जिला ,53 प्रखंड

12 दिसंबर 11वा चरण
20 जिलों , 38 प्रखंड

बाढ़ प्रभावित जिले में अंतिम चरण में होगा चुनाव ।

38 जिले
534 प्रखंड
8072 ग्राम पंचायत
9,28,09,194 ग्रामीण जनसंख्या
1,13,891 कुल मतदान केंद्र
6,38,94,737 कुल ग्रामीण मतदाता
3,35,80,487 पुरुष मतदाता
3,03,11,779 महिला मतदाता
2,471 अन्य मतदाता।

6 पद के कुल 2लाख 55 हजार 22 के लिए होना है पंचायत चुनाव।

ग्राम पंचायत मुखिया – 8072
ग्राम पंचायत सदस्य – 113307
पंचायत समिति सदस्य – 11104
जिला परिषद सदस्य – 1160
ग्राम कचहरी सरपंच – 8072
ग्राम कचहरी पंच – 113307

अधिवक्ता के पत्र से घमासान

पटना हाई कोर्ट के विख्यात अधिवक्ता दिनेश को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक खुला पत्र में पटना हाई कोर्ट में अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के अधिवक्ताओं को हाई कोर्ट में जज बनाने की मांग की है। श्री दिनेश ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जनजाति वर्ग से जज बनाने की मांग की है।

इस खुले पत्र के जरिये पटना हाई कोर्ट में अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग से जज बनाने को लेकर अनुशंसा करने की मांग की गई है। पत्र में आगे कहा गया है कि पटना हाई कोर्ट 105 वर्ष पुराना है।
विगत वर्षों में विभिन्न जातियों के लोगों को पटना हाई कोर्ट का जज बनाया गया, किन्तु पटना हाई कोर्ट के वर्ष 1916 में की गई स्थापना से अभी तक सिर्फ एक अनुसूचित जाति वर्ग से जज नियुक्त हुए।

लेकिन, पिछले 105 वर्ष में एक भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के जज नहीं बनाए गए। उन्होंने अपने खुले पत्र के माध्यम से उम्मीद जताया है कि इन वंचित वर्ग के लोगों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।

पटना हाईकोर्ट के राज्य में असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की नियुक्ति के लिए बी पी एस सी द्वारा ली गई प्रारंभिक के परिणाम को संशोधित करने का निर्देश के मद्देनजर बी पी एस सी ने कल होने वाली असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की होने वाली मुख्य परीक्षा स्थगित कर।जस्टिस सी एस सिंह ने सुदीप कुमार दास की याचिका पर सुनवाई करते हुए बी पी एस सी को यह निर्देश दिया था कि प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को संशोधित कर रिजल्ट को प्रकाशित करें।
बी पी एस सी ने 553 पदों पर असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की नियुक्ति के लिए 6 फरवरी, 2020 को विज्ञापन निकाल कर आवेदन आमंत्रित किया।याचिकाकर्ताओं ने इसके लिए पिछड़ा और आर्थिक पिछडे वर्ग के उम्मीदवार के रूप में आवेदन किया।
7 फरवरी,2021 को प्रारंभिक परीक्षा बी पी एस सी ने आयोजित किया।27 अप्रैल,2021 को इसका परिणाम प्रकाशित किया गया।
इन उम्मीदवारों ने अपनी श्रेणी मे कट ऑफ मार्क्स से अधिक अंक प्राप्त होने के बाद भी असफल घोषित हुए।बी पी एस सी ने प्रारंभिक परीक्षा में न्यूनतम अंक निर्धारित कर दिया,जब की विज्ञापन में मुख्य परीक्षा में शामिल होने उम्मीदवारों की प्रारंभिक परीक्षा में 1:10 के अनुपात में उम्मीदवार लेना था।
कोर्ट ने विज्ञापन मे दिए गए प्रावधान के अनुसार उम्मीदवारों को सफल घोषित करने के लिए प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम संशोधन करने का निर्देश बी पी एस सी को दिया।
गौरतलब है कि प्रारंभिक परीक्षा में न्यूनतम अंक के आधार पर प्रकाशित परिणाम पर कल से मुख्य परीक्षा लेने का कार्यक्रम था।
कोर्ट ने मामलें को प्रारम्भिक परीक्षा के परिणाम में संशोधित करने के बाद मुख्य परीक्षा का कार्यकम घोषित किया जाएगा।कोर्ट ने इसके साथ ही इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

जब पेड़ों और जानवरों की गिनती हो सकती है तो जातियों की क्यों नहीं?

जातिगत जनगणना को लेकर बिहार के 10 राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश और राजद लीडर तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। नीतीश ने कहा कि हमने बिहार की जातियों के संबंध में प्रधानमंत्री को जानकारी दी है, उन्होंने हमारी बातों को ध्यान से सुना। प्रधानमंत्री ने जातिगत जनगणना की मांग को नकारा नहीं है। तेजस्वी बोले कि जब पेड़-पौधों की गिनती हो सकती है तो जातियों की क्यों नहीं, ये राष्ट्रहित में है।

पीएम से मुलाकात के बाद क्या बोले सीएम नीतीश
सीएम नीतीश कुमार ने कहा, ‘पीएम मोदी ने बिहार से आए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों की बातों को सुना है। अब पीएम मोदी को निर्णय लेना है, वह जो भी उचित समझें। जातीय जनगणना पर अभी निर्णय के बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। पीएम ने गंभीरता से सभी को सुना है। इसके लिए उनका आभारी हूं। एक-एक विषय की जानकारी दी गई है। प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों ने जातीय जनगणना के पक्ष में अपनी बातें रखी’। सीएम नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष की ओर से यह प्रस्ताव मिला था कि जातीय जनगणना के मुद्दे पर पीएम से मिलना चाहिए।
क्या बोले तेजस्वी
वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि पेड़-पौधों की गिनती होती है, जानवरों की गिनती होती है तो इंसानों की क्यों नहीं- ‘सरकार के पास स्पष्ट आंकड़ा नहीं है, किस समाज के कितने लोग हैं, इसकी जानकारी नहीं है।

आंकड़ों के आधार पर ही किसी भी काम को किया जाएगा। पहली बार किसी राज्य के सभी पार्टियों ने मिलकर विधानसभा में पारित किया गया जातीय जनगणना कराने के बाद कोई विवाद नहीं होगा। इससे रिजर्वेशन लागू करने में भी मदद मिलेगी। सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी को भी धन्यवाद देता हूं। उन्होंने पूरी बातें सुनी है। अब हम लोगों को निर्णय का इंतजार है’।
CM नीतीश कुमार रविवार देर शाम ही पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहले से ही दिल्ली में हैं। उनके अलावा इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस, HAM, VIP, AIMIM, माले, CPI और CPM के नेता भी मौजूद थे।

इस प्रतिनिधिमंडल में BJP के तरफ से मंत्री जनक राम को भेजा गया था। बैठक में जदयू से शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, कांग्रेस नेता अजीत शर्मा, CPI (माले) नेता महबूब आलम, AIMIM के अख्तरुल इमान, पूर्व मुख्यमंत्री और हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी, VIP प्रमुख मुकेश सहनी, CPI नेता सूर्यकांत पासवान और CPM नेता अजय कुमार शामिल हुए हैं।

पूर्व राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर मुख्यमंत्री ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की ।

पटना : 21 अगस्त 2021, मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने पूर्व राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा है कि स्वर्गीय कल्याण सिंह एक प्रख्यात राजनेता थे। वे दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के पद को भी सुशोभित किया था। देश की राजनीति में उनका बहुमूल्य योगदान रहा है। स्वर्गीय कल्याण सिंह जी के साथ मेरा आत्मीय संबंध था और उनसे दिल्ली में प्राय: मुलाकात हो जाती थी। उनके निधन से न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है।
मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों एवं प्रशंसकों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

चिराग को बुझाने वाले मेरे पिता जी को भी बुझाना चाहते थे,नीतीश जी राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार और लूट को रोकिए ना जनता खुद सर आँखों पर बिठा लेगा।

चिराग बुझेगा या जलेगा, ये आरसीपी सिंह या फिर नीतीश कुमार के हाथों में नहीं है। उनका वश चलता तो वो मुझे और मेरे पिताजी को कबका बुझा दिए होते ।ये कहना है लोजपा सांसद चिराग पासवान का हाल ही केन्द्रीयमंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह जब जमुई पहुंचे थे तो पत्रकार ने उनके चिराग पासवान को लेकर सवाल किया था तो उस सवाल के जबाव में आरसीपी ने कहा कि जो बुझ चुका है, उसपर क्या बोलना?

हलाकि आरसीपी के बयान पर चिराग इतना पर ही चुप नहीं हुआ आरसीपी और नीतीश कुमार पर चुटकी लेते हुए कहा कि आप मंत्री बन कर आये थे, यह पैसा बाढ़ पीड़ितों पर लगा देते, विकास में लगा देते। जगह-जगह पर होडिंग-पोस्टर लगवाए थे, इतनी ही मेहनत बिहार के विकास में करते तो बेहतर रहता।बिना घूस लिये कोई काम नहीं होता है यही करवाता देते जनता गदगद हो जाती है।

उन्होंने कहा कि सड़क की गुणवत्ता में कमी और कमीशनखोरी जैसी समस्या जमुई ही नहीं पूरे प्रदेश की है। इसलिए इसकी मिसाल हम जमुई से कायम करना चाहते हैं। किसी भी सड़क के निर्माण में कोई समझौता किए बिना गुणवत्तापूर्ण निर्माण हो इसके लिए पदाधिकारियों को भी इमानदारी पूर्वक निष्ठा के साथ कार्य करने के लिए कहा गया है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए फायदा हो।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण सड़क का निर्माण नहीं होने की वजह से गुणवत्ता में समझौता करने की वजह से आज जो सड़क बनी उसके पहले का हिस्सा टूटने लगता है। पहली बरसात में ही सड़क की हालत जर्जर हो जाती है। बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट के माध्यम से भी मैंने इस समस्या को बिहार सरकार के संज्ञान में देने का काम किया।बिहार की सबसे बड़ी समस्या है कि बिना घूस दिए कोई कार्य नहीं होता इन तमाम चीजों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनकी राज्य सरकार और जिला प्रशासन क्यों खामोश है ये मेरे समझ से परे है।

नाम का डबल इंजन की सरकार है

बहरहाल अपने समझ से जितना होता है मैं जिला प्रशासन व मुख्यमंत्री के संज्ञान में देने का कार्य करता हूँ। मैंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया है कि हमलोग पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ कार्य करें। डबल इंजन की सरकार हैं तो आपकी पास पूरी ताकत है न केंद्र का पूरा सहयोग है। कौन सी ऐसी योजना है जिसमें दोनों का सहयोग नहीं है।उसके बाद भी इंफ्रास्ट्रक्चर की ऐसी स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन राज्य सरकार से हमारी यह शिकायत रही है कि केंद्र सरकार की योजनाएं प्रदेश में पूर्णतः धरातल पर नहीं उतर पाई है। डबल इंजन की सरकार होने का मतलब यही है न की दोनों का तालमेल इतना खूबसूरत हो कि राज्य सरकार की कोई योजना केंद्र में लंबित न हो और केंद्र सरकार की कोई योजना राज्य में लंबित न हो। उसके बाद भी कहीं न कहीं अड़चन आती है तो डबल इंजन की सरकार पर प्रश्नचिन्ह जरूर लगता है।

रेशम नगरी भागलपुर पुराने गौरव को प्राप्त करेगा, बनेगा आत्मनिर्भर…उपमुख्यमंत्री

भागलपुर का अतीत और वर्तमान गौरवशाली रहा है। रेशम नगरी भागलपुर अपने पुराने गौरव को प्राप्त करेगा और आत्मनिर्भर बनेगा। बिहार सरकार अपनी योजनाओं के माध्यम से यहां के लोगों की अपेक्षाओं पर खड़ा उतरेगी। उक्त बातें भागलपुर के लाजपत पार्क में आयोजित “आत्मनिर्भर बिहार- भागलपुर की बात” कार्यक्रम में बिहार के उपमुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद ने कहे।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बिहार के सात निश्चय पार्ट-2 के अंतर्गत बिहार सरकार द्वारा कई महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिसके तहत काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना की वैश्विक चुनौती के बीच बिहार ही नहीं समूचे देश में आर्थिक प्रवाह बाधित हुआ है, परंतु इन चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने मानव जीवन की रक्षा हेतु यथासंभव बेहतर प्रबंध किए। केंद्र सरकार ने लोगों के लिए नि:शुल्क कोरोना टीकाकरण की व्यवस्था सुनिश्चित की, वहीं बिहार सरकार छ: माह में छ: करोड़ लोगों को टीकाकरण करने लक्ष्य के तहत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कोराना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए बिहार सरकार तैयार है।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भागलपुर जिले को हवाई अड्डे की सुविधा एवं भोलानाथ पुल के निर्माण हेतु केंद्र सरकार से बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि भागलपुर में स्मार्ट सिटी के विभिन्न अवयवों के क्रियान्वयन की तकनीकी बाधाओं को दूर किया गया है। सैंडिस कंपाउंड में स्मार्ट सिटी के सभी कंपोनेंट पर काम हो रहा है। स्मार्ट रोड नेटवर्किंग के तहत कुल 34 सड़कों का पुनर्विकास एवं पुन:संयोजन किया जा रहा है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 30 किलोमीटर है। सड़क जाम से मुक्ति हेतु घंटाघर चौक से आदमपुर चौक, बड़ी खंजरपुर, मायागंज अस्पताल पथ को बाईपास के लिए चयनित किया गया है। भागलपुर शहर में चार वाहन पार्किंग बनाने की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि विगत 15 वर्षों में सरकार ने बिहार के चतुर्दिक विकास के लिए बेहतर काम किए हैं, जिसके परिणाम धरातल पर दिख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांवों की समृद्धि एवं स्वालंबन के लिए केंद्र सरकार एवं बिहार सरकार ने महत्वपूर्ण योजनाओं को संचालित किया है। उज्जवला योजना, जलापूर्ति योजना, गली-नाली पक्की सड़क योजना सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से गांवों की खुशहाली और समृद्धि के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए हैं।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रेशम नगरी भागलपुर उद्योग और कृषि उत्पादों के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। भागलपुर के प्राचीन गौरव को पुर्नस्थापित करते हुए आत्मनिर्भर बिहार के संकल्पों को हम सबके सहयोग से पूरा करेंगे।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विभागों में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर नियुक्ति को लेकर बीपीएससी के फैसले को किया रद्द

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विभागों में असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल इंजीनियरिंग) के पद पर नियुक्ति को लेकर बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अर्हता प्राप्त उम्मीदवारों की उम्मीदवारी को रद्द किये जाने के मामले पर सुनवाई की। अनामिका आशना व अन्य की याचिकाओं पर जस्टिस चक्रधारी एस सिंह ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इनकी उम्मीदवारी इस आधार पर रद्द नहीं की जा सकती है कि ये यूनिवर्सिटी द्वारा जारी सर्टीफिकेट प्रस्तुत नहीं कर सके।

कोर्ट ने कहा है कि जैसा कि साक्षात्कार पत्र कहा गया है कि साक्षात्कार के बाद भी यह निर्णय लेने का अधिकार आयोग के पास सुरक्षित है कि कोई उम्मीदवार अपेक्षित शैक्षणिक योग्यता रखता है या नहीं।ऐसी स्थिति में आयोग यह निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा कि याचिकाकर्ता बी टेक (सिविल इंजीनियरिंग) की योग्यता आवेदन की अंतिम तिथि को रखते हैं या नहीं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि आयोग द्वारा 2017 मे जारी विज्ञापन में याचिकाकर्ताओं से इस पद पर बहाली के लिए आवेदन आमंत्रित किया था। तीनों उम्मीदवारों ने पी टी और मेंस की लिखित परीक्षा को पास करने के बाद साक्षात्कार में भाग लिया।

लेकिन बाद में आयोग ने यह कहते हुए इनकी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया कि बी टेक का प्रोविजनल सर्टिफिकेट बी आई टी सिंदरी द्वारा जारी किया गया है ,न कि विनोबा भावे यूनिवर्सिटी द्वारा।

आयोग ने साक्षात्कार में सफल उम्मीदवारों की भी उम्मीदवारी को रद्द कर दिया।याचिकाकर्ता का कहना था कि यह भी आश्चर्य की बात है कि विनोबा भावे विश्विद्यालय से पास बहुत से अन्य उम्मीदवार जो कि सिर्फ प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रस्तुत किये थे, उन्हें इस विज्ञापन संख्या – 02/ 2017 में सफल घोषित किया गया था।

हालांकि जब याचिकाकर्ता ने इस बात को अपने रिट याचिका में इस बात की जानकारी दी, तो बी पी एस सी ने उन सभी सफल उम्मीदवारों की भी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों के दलीले सुनने के बाद ऐसे सभी उम्मीदवारों के संदर्भ में बी पी एस सी द्वारा उम्मीदवारी निरस्त करने के निर्णय को रद्द कर दिया।

तेज प्रताप परिवार में अलग थलग पड़े लालू का सीधा संदेश अनुशासन तोड़े तो होगी कारवाई ।जगतानंद सिंह को मिली खुली छुट अनुशासन से नहीं करना है समझौता चाहे मेरा बेटा ही क्यों ना हो ।

तेज प्रताप अपने ही जाल में इस तरह से उलझते चले जा रहे हैं कि अब उनके सलाहकार भी उस जाल से बाहर कैसे निकले इसको लेकर हाथ खड़े कर दिये हैं ।भाई तेजस्वी से मुलाकात बेनतीजा रहा तेजस्वी ने तेजप्रताप को किसी भी तरह के स्पेस देने से साफ मना कर दिया है। साथ ही चेतावनी भी दे डाला है कि पार्टी में अनुशासन बनाये रखे नहीं तो आप पर भी कारवाई होगी ।

इस बयान के बाद तेज प्रताप आपा खो दिये और फिर अपने अंदाज में संजय यादव और तेजस्वी को देख लेने की धमकी देते हुए तेजस्वी के आवास से बाहर निकल गये ।

हलाकि इस मामले में सुबह में ही बहन रोहिणी आचार्य ने ट्वीट के सहारे तेज प्रताप को परिवार की क्या इक्छा है ये जता दिया था , सफलता की मंजिल पानी है, अनुशासन और संयम को अपनाना है।फिर भी तेज प्रताप अपने व्यवहारा में सुधार लाने को तैयार नहीं है।

वही लालू प्रसाद सहित परिवार के अधिकांश सदस्य तो ये समझ में आ गया है कि इस खेल में मुख्यमंत्री आवास में तैनात के सीनियर अधिकारी शामिल है जो तेज प्रताप के हर पैरवी को एंटरटेन भी करता है और उसके कहने पर तेज प्रताप के साथ रहने वाले लोगों को ठीकेदारी दिलाने में भी मदद कर रहा है।

हलाकि यह खेल 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले से चल रहा है लेकिन लालू प्रसाद परिवार में टूट को लेकर कोई संदेश ना जाये इसका ख्याल रखा और तेज प्रताप के हर जायज नजायज बात को मानता रहा हलाकि अब लालू प्रसाद मन बना चूंके हैं कि तेज प्रताप की जो राजनैतिक शैली है उससे तेजस्वी को खासा नुकसान हो सकता है इसलिए तेज प्रताप को लेकर निर्णय लेने का वक्त आ गया है क्यों कि अभी हाल फिलहाल में कोई चुनाव भी होने वाला नहीं है और फिर अनुसाशन को लेकर लालू यह संदेश भी देना चाहते हैं कि मेरा बेटा ही क्यों ना हो बर्दास्त नहीं करेंगे ।

इस संदेश से आने वाले समय में तेजस्वी को बिहार की राजनीति में अलग पहचान बनाने में मदद मिलेगी क्यों कि परिवार को पता है कि कभी तेज प्रताप जैसी शैली साधू और सुभाष का भी रहा करता था जिसके नुकसान से आज भी राजद बाहर निकल नहीं पाया है ।

नीतीश कुमार के गुगली में बिहार बीजेपी बोल्ड , जनसंख्या नियंत्रण कानून के सहारे नीतीश को घेरने की तैयारी शुरु बीजेपी नेता सीएम और राज्यपाल से मिलने की बनायी रणनीति

जातीय जनगणना मामले में बिहार बीजेपी नीतीश कुमार के गुगली में फंस गया 23 अगस्त को जातीय जगगणना मामले में पीएम से मिलने जा रहे प्रतिनिधि मंडल में अब बीजेपी भी शामिल होगी ।मीडिया से बात करते हुए बिहार प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायासवाल ने कहा कि PM नरेंद्र मोदी से 23 अगस्त CM नीतीश कुमार के साथ जा रहे प्रतिनिधिमंडल में भाजपा कोटे के मंत्री भी शामिल होंगे ।

हलाकि जातीय जनगणना को लेकर बिहार बीजेपी के तमाम बड़े नेता विरोध करते रहे हैं लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद यह तय हो गया कि बिहार बीजेपी बिहार में जातीय राजनीति के जाल में बाहर निकलने में नाकामयाब रहा हलाकि इसको लेकर बीजेपी के अंदर घमासान मच गया है और केन्द्रीय नेतृत्व को हस्तक्षेप करने को कहा है कल आर्शीवाद यात्रा की शुरुआत करने गया पहुंचे केन्द्रीयमंत्री आरके सिंह ने कहा था कि जातिगत राजनीति’ करने वाले ही ‘जातीय जनगणना’ की कर रहे हैं मांग केन्द्रीयगृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय तो पहले ही लोकसभा में जातीय जनगणना के विरोध में बयान दे चुके हैं वैसे इस मामले में सहकारिता मंत्री सुभाष सिंह ने कहा था- ‘इससे सामाजिक तनाव होगा।’ इसी तरह मंत्री नीरज सिंह बबलू ने भी जातीय जनगणना से पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग की थी। हलाकि नीतीश कुमार के इस गुगली पर भेल ही बीजेपी बोल्ड हो गया है लेकिन अब बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर नीतीश पर दबाव बढ़ाने कि कोशिश बीजेपी आज से शुरु कर दी और जल्द ही बिहार बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल सीएम और राज्यपाल से मिलने जा रहा है ।

तेज प्रताप के आचरण से लालू नराज, तेजस्वी को बुलाया दिल्ली, तेज प्रताप पर हो सकती है कारवाई ।

राजद से अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है पिछले 24 घंटों के दौरान जिस तरीके से तेज प्रताप तेजस्वी के निजी सहायक संजय यादव और प्रदेश अध्यक्ष जगतानंद सिंह को निशाने पर ले रहे हैं ऐसे में यह तय हो गया है कि अब पार्टी में तेज प्रताप बहुत कम दिन के मेहमान रह गये हैं ।

क्यों कि तेज प्रताप के आचरण से लगातार पार्टी को नुकसान हो रहा है और इस बात को लालू प्रसाद और तेजस्वी भी पूरी तौर पर समझ रहे हैं तेज प्रताप के कारण है पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में राजद को कई सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था ऐसे में तेज प्रताप के कार्यशैली पर रोक नहीं लगाया गया तो पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है ।वही खबर ये आ रही है कि तेज प्रताप मीडिया से बात करते हुए जिस अंदाज में जगतानंद सिंह और संजय यादव को लेकर सार्वजनिक रुप से टिप्पणी किया है उससे लालू प्रसाद खासे नराज है और कल तेजस्वी को दिल्ली बुलाया है ।

इस बीच खबर ये आ रही है कि मनोज झा सहित पार्टी के तमाम बड़े नेता की कल रात एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी जिसमें यह तय हुआ है कि तेज प्रताप को लेकर अब पार्टी नरम रुख अख्तियार नहीं करेंगी क्यों कि तेज प्रताप के व्यवहार से कांग्रेस सहित महागठबंधन के तमाम सहयोगी दल नराज है और परिवार के अंदर भी मीसा भारती को छोड़ दे तो पूरा परिवार तेज प्रताप के व्यवहार से नाखुस है ऐसे में परिवार पूरी तौर पर तेजस्वी के साथ खड़ा है ।

वैसे आज रात या फिर कल सुबह तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच बातचीत हो सकती है हलाकि बातचीत के सहारे बहुत कुछ बदलने वाली है लालू परिवार लगभग तय कर लिया है कि तेज प्रताप को राजनीति से साइड कर दिया जाये वैसे राबड़ी इस फैसले को लेकर सहज नहीं है फिर भी सवाल तेजस्वी के राजनैतिक भविष्य से जुड़ा हुआ है ।

जिस तरीके का आचरण तेज प्रताप का है ऐसे में पार्टी के साथ साथ तेजस्वी का राजनैतिक भविष्य अब दाव पर लग गया है । लालू प्रसाद के पास अब कोई विकल्प नहीं बच गया है पार्टी के तमाम बड़े नेता तेज प्रताप के व्यवहार से नराज है अब तो यहां तक चर्चा होने लगी है कि जगतानंद सिंह पार्टी के लिए जब अपने बेटा के खिलाफ खड़े हो गये थे तो लालू प्रसाद खड़े क्यों नहीं हो रहे हैं ऐसे में तेज प्रताप को लेकर पार्टी कोई कठोर निर्णय ले ले तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

अब घर बैठे जान सकते हैं खून की उपलब्धता, ब्लड बैंकों का हुआ डिजिटलीकरण

पटना, 19 अगस्त। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गुरुवार को यहां बताया कि राज्यवासी अब घर बैठे खून की उपलब्धता जान सकते हैं। इसके लिए राज्य के 89 ब्लड बैंकों का डिजिटलीकरण किया गया है, ताकि लोगों को ब्लड मिलने में आसानी हो सके। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस दिशा में पहल करते हुये राज्य के कुल 94 ब्लड बैंकों के 89 ब्लड बैंकों को ई-रक्तकोष से जोड़कर इनका डिजिटलीकरण किया गया है। दूसरी ओर राज्य के 10 जिलों में 10 नए ब्लड बैंक भी बनाये जा रहे हैं, ताकि खून की उपलब्धता में कमी न हो।

श्री पांडेय ने कहा कि ब्लड कलेक्शन को बढ़ाने के लिए नए ब्लड कलेक्शन स्टोरेज यूनिट भी स्थापित किए जा रहे हैं। ब्लड स्टोरेज यूनिट के मामले में राज्य सरकार ने काफ़ी प्रगति की है। वर्ष 2016-17 में राज्य में केवल 8 ब्लड स्टोरेज यूनिट थे, जो अब बढ़कर 68 हो गए हैं। वहीं, राज्य में वर्ष 2017-18 में 46, 2018-19 में 54 एवं 2019-20 में 58 ब्लड स्टोरेज यूनिट थे। इस तरह पांच सालों में कुल 60 नए ब्लड स्टोरेज यूनिट की शुरुआत हुई है। आने वाले समय में इसकी संख्या 108 तक बढ़ाने की कार्ययोजना है। अभी राज्य में कुल 94 ब्लड बैंक क्रियाशील है। इसमें जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज सहित कुल 38 सरकारी ब्लड बैंक तथा 5 रेड क्रॉस समर्थित एवं 51 निजी ब्लड बैंक हैं। अब राज्य के 10 जिलों में 10 नए ब्लड बैंक की शुरुआत होगी। इसमें अररिया, अरवल, सुपौल, पूर्वी चंपारण, शिवहर, बांका एवं भागलपुर के जिला अस्पतालों में नए ब्लड बैंक स्थापित किये जाएंगे। पटना के गुरु गोविन्द सिंह अस्पताल, गया के जेपीएन अस्पताल एवं दरभंगा के बेनीपुर अनुमंडलीय अस्पताल में भी नए ब्लड बैंक का निर्माण पूरा किया जाएगा। अररिया, अरवल, बांका एवं भागलपुर जिले में ब्लड बैंक का निर्माण अंतिम चरण में है।

श्री पांडेय ने कहा कि ई-रक्तकोष ब्लड बैंकों के कार्य प्रवाह को जोड़ने, डिजिटलीकरण और सुव्यवस्थित करने की एक पहल है। खून की आकस्मिक जरूरत होने पर ब्लड बैंकों पर लोगों की निर्भरता बढ़ जाती है। ऐसे में ब्लड बैंकों की खून की पर्याप्त उपलब्धता कई मरीजों के लिए जीवनदायनी साबित होती है। ब्लड बैंकों में खून की उपलब्धता अधिक से अधिक रक्तदान करने से सुनिश्चित होती है। इसलिए लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए जरूर आगे आना चाहिए। नियमित रक्तदान करने से ह्ृदय रोगों से भी बचाव होता है। रक्तदान करने से एक व्यक्ति लगभग 3 से 4 मरीजों की जान बचा सकता है।

तालिबान: दोराहे पर अफ़ग़ानिस्तान और भारत की दुविधा

अफ़ग़ानिस्तान में घड़ी की सुई रिवर्स डायरेक्शन में मुड़ चुकी है। अफ़ग़ानी समाज का उदारवादी प्रगतिशील तबका, जो धार्मिक रूप से सहिष्णु है, नागरिक अधिकारों का हिमायती है, लोकतांत्रिक मूल्यों में आस्था रखता है और महिलाओं एवं उनके अधिकारों को लेकर प्रगतिशील सोच रखता है, अपने अस्तित्व को लेकर सशंकित है। और, तालिबान को लेकर सशंकित केवल अफ़ग़ानी समाज ही नहीं है, वरन् पूरी-की-पूरी दुनिया डरी और सहमी हुई है। कारण यह कि तालिबान कोई संस्था नहीं है, वरन् सोच और मानसिकता है, ऐसी सोच और मानसिकता, जो आधुनिक काल की तमाम प्रगतियों को नकारती हुई आधुनिकता पर मध्ययुगीनता की जीत सुनिश्चित रहना चाहती है। अफ़ग़ानिस्तान में उदारवादी लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था और उसके मूल्यों को नकारता हुआ तालिबान उसे इस्लामिक धर्म और धर्मतंत्र की गिरफ़्त में लाना चाहता है।

तालिबान के नेतृत्व में अफ़ग़ानिस्तान का ‘इस्लामिक एमिरेट ऑफ अफ़ग़ानिस्तान’ में तब्दील होना इसी को पुष्ट करता है। यह प्रतीक है अफ़ग़ानिस्तान में उदारवादी लोकतांत्रिक मूल्यों के अन्त का, महिला अधिकारों एवं मानवाधिकारों की त्रासदी का, अल्पसंख्यक जनजातियों की पहचान के साथ-साथ व्यवस्था में उनके समुचित एवं पर्याप्त प्रतिनिधित्व एवं भागीदारी की शुरू हो चुकी प्रक्रिया के अवरुद्ध होने का और समावेशी अफ़ग़ानिस्तान के सपनों के धूल-धूसरित होने का।

स्पष्ट है कि तालिबान अफ़ग़ानिस्तान का सच है, ऐसा सच जो अफ़ग़ानिस्तान ही नहीं, वरन् भारत सहित शेष दुनिया के लिए ख़ौफ़नाक और भयावह साबित हो सकता है। तालिबान को लेकर मुसलमानों के एक तबके में उत्साह है, जो और भी भयावह और ख़तरनाक है क्योंकि उन्हें यह लगता है कि तालिबान इस्लामीकरण की प्रक्रिया के ज़रिए मुसलमानों के धार्मिक वर्चस्व को सुनिश्चित करेगा और पूरी दुनिया में शरीयत को लागू करेगा। उनकी आँखें तब भी नहीं खुल रही हैं जब वे देख रहे हैं कि राजधानी काबुल पर क़ब्ज़े के बाद वहाँ से भागने वाले लोगों में ग़ैर-मुस्लिमों की तुलना में मुसलमान कहीं अधिक हैं। और, ऐसा नहीं कि यह सब अनपेक्षित है। फ़रवरी,2020 में अफ़ग़ानिस्तान सरकार को दरकिनार करते हुए जिन शर्तों पर अमेरिका और तालिबान के बीच शान्ति समझौता सम्पन्न हुआ, उसके बाद ऐसा ही होना था। बस, प्रतीक्षा थी अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो सैनिकों की वापसी की। फिर, यह सब महज़ समय की बात रह गयी, लेकिन, यह सब इतनी जल्दी होगा, इसकी भी उम्मीद शायद किसी को नहीं रही होगी।

जहाँ तक भारत के संदर्भ में इन बदलावों के निहितार्थों का प्रश्न है, तो भारत गहरे संकट में है और भारतीय कूटनीति की असफलता से उपजे इस संकट के मूल में मौजूद है भारत की विदेश-नीति की त्रासदी। ऐसा नहीं है कि पिछले तीन दशकों के दौराजहाँ तक भारत के संदर्भ में इन बदलावों के निहितार्थों का प्रश्न है, तो भारत गहरे संकट में है और भारतीय कूटनीति की असफलता से उपजे इस संकट के मूल में मौजूद है भारत की विदेश-नीति की त्रासदी। ऐसा नहीं है कि पिछले तीन दशकों के दौरान भारत की अफ़ग़ानिस्तान नीति और तालिबान को लेकर उसका नज़रिया कभी आश्वस्त करने वाला रहा हो, पर पिछले क़रीब सवा सात वर्षों के दौरान भारत की विदेश-नीति ने चेक एंड बैलेंसेज की उपेक्षा करते हुए अमेरिकोन्मुखी नज़रिया अपनाया। इसी नज़रिए के कारण इसने क्षेत्रीय समीकरणों और अफ़ग़ान समस्या के समाधान के लिए क्षेत्रीय स्तरों पर चल रहे प्रयासों को अपेक्षित महत्व नहीं दिया और आज उसे इसकी क़ीमत चुकानी पड़ रही है।

अब दिक़्क़त यह है कि काबुल और अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर क़ब्ज़े के बाद आज भी भारत में अफ़ग़ानिस्तान संकट को हिन्दू-मुसलमान की बाइनरी में रखकर देखा जा रहा है जो दु:खद एवं त्रासद है। भारतीय समाज का एक हिस्सा अपनी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से इसे मुस्लिम समाज के साथ-साथ भारतीय समाज और राजनीति के उदारवादी, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी और वामपंथी तबके को बदनाम करने के अवसर के रूप में देख रहा है और इस अवसर को भुनाने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। और, इसका एक त्रासद पहलू यह भी है कि मुस्लिम समाज का एक हिस्सा अफ़ग़ानिस्तान के मोर्चे पर होने वाले इन बदलावों से उत्साहित है। उसे न तो अपनी त्रासद स्थिति चिन्तित करती है, और न ही अफ़ग़ानियों का दु:ख, उनकी पीड़ा एवं उनकी बेचैनियाँ ही विचलित करती हैं। वह तो इस्लामी सत्ता की पुनर्स्थापना और इस्लामी वर्चस्व की संभावना मात्र से उत्साहित एवं पुलकित है।

अब सवाल यह उठता है कि जब वर्तमान में तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के सच के रूप में सामने आ चुका है और उसे पाकिस्तान एवं चीन सहित तमाम भारत-विरोधी शक्तियों का समर्थन मिल रहा है, अमेरिका सहित दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियाँ अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह से परहेज़ कर रही हैं, ऐसे में भारत को क्या करना चाहिए? दरअसल, अब भारत बैकफ़ुट पर है, वह रिसीविंग इंड पर है और उसके सामने सीमित विकल्प हैं, ऐसी स्थिति में आवश्यकता इस बात की है कि भारत वेट एंड वाच की रणनीति अपनाते हुए अफ़ग़ानिस्तान में फँसे भारतीयों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने की कोशिश करे, बैक चैनल से तालिबान के साथ डील करते हुए उसके भारत-विरोधी रवैये को कम करने की कोशिश करें और अफगानिस्तान में अपने अब सवाल यह उठता है कि जब वर्तमान में तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के सच के रूप में सामने आ चुका है और उसे पाकिस्तान एवं चीन सहित तमाम भारत-विरोधी शक्तियों का समर्थन मिल रहा है, अमेरिका सहित दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियाँ अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह से परहेज़ कर रही हैं, ऐसे में भारत को क्या करना चाहिए? दरअसल, अब भारत बैकफ़ुट पर है, वह रिसीविंग इंड पर है और उसके सामने सीमित विकल्प हैं, ऐसी स्थिति में आवश्यकता इस बात की है कि भारत वेट एंड वाच की रणनीति अपनाते हुए अफ़ग़ानिस्तान में फँसे भारतीयों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने की कोशिश करे, बैक चैनल से तालिबान के साथ डील करते हुए उसके भारत-विरोधी रवैये को कम करने की कोशिश करें और अफगानिस्तान में अपने सामरिक हितों को साधने के साथ-साथ अपने निवेश को सुरक्षित करने की यथासंभव कोशिश करे। साथ ही, जल्दबाज़ी में प्रतिक्रिया देने की बजाय अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के अगले कदम की प्रतीक्षा करे और उनके साथ मिलकर तालिबान पर अंतर्रा्ष्ट्रीय दबाव निर्मित करने की कोशिश करे। उपयुक्त अवसर और अपने लिए अनुकूल माहौल की प्रतीक्षा करने के अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं है। और, हाँ, तालिबान के बहाने मुस्लिम समुदाय और भारतीय समाज के लिबरल-सेक्यूलर तबके को बदनाम करने की कोशिश तथा अफ़ग़ान संकट का राजनीतिकरण भारत के लिए आत्मघाती साबित होगा, और निकट भविष्य में भारत को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। भारत को यह समझना होगा कि अफ़ग़ानियों को भी अपनी लड़ाई ख़ुद लड़नी होगी और उसे भी अपने सामरिक हित खुद सुनिश्चित करने होंगे। इसके लिए न तो अमेरिका सहित अन्य वैश्विक शक्तियाँ सामने आयेंगी और न ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय। भारत अगर संयम एवं धैर्य से काम लेता है, तो वह गृहयुद्ध की ओर बढ़ते अफ़ग़ानिस्तान में ताजिक, उज़्बेक और हज़ारा जनजातियों के साथ-साथ अफ़ग़ानी पश्तून समाज के उदारवादी, लिबरल, डेमोक्रेटिक एवं सेक्यूलर तबके बीच अपने गुडविल की बदौलत इस क्षति की कुछ हद तक भरपायी कर सकता है। इसके लिए आवश्यकता है खुद के प्रति भरोसे की और सटीक रणनीति की। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत सरकार इसी रणनीति पर विचार कर रही है, पर समस्या है हिन्दू-मुस्लिम बाइनरी की।

-लेखक कुमार सर्वेस

(लेखक अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं और सिविल सेवा परीक्षा हेतु तैयारी कर रहे छात्रों के मेंटरिंग कर रहे हैं।)

#अफगानिस्तानसंकट #तालिबान

लालू प्रसाद के पुत्र मोह में पार्टी और परिवार में मचा घमासन जगदानंद सिंह इस्तीफा पर अड़े तेजस्वी ने पार्टी नेताओं की बुलाई बैठक

बिहार में लालू-राबड़ी परिवार (Lalu-Rabri Family) से जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) का रिश्ता लगभग टूट चुका है लालू प्रसाद के लगातार बातचीत के बावजूद जगदानंद सिंह राजद कार्यालय जाने को तैयार नहीं है।
हलाकि तेजस्वी का कहना है कि ऐसी कोई बात नहीं है यह सब मीडिया का खेल है जगदानंद सिंह कही किसी से कहे हैं कि मैं नराज हूं फिर मीडिया ये सवाल कहां से उठा रही है वैसे तेजस्वी जो कुछ भी कह रहे हैं लेकिन बगैर आग के धुआं नहीं उठाता है जिस दिन तेज प्रताप जगदानंद सिंह को हिटलर कहां था उसी दिन से जगदानंद सिंह पार्टी दफ्तर नही जा रहे हैं 15 अगस्त जैसे मौके पर जब पार्टी अध्यक्ष राष्ट्र ध्वज फहराते थे उस दिन भी वो नहीं गये और इसको लेकर जब जब तेजस्वी से सवाल किया गया वो सवालो को टालते रहे ।


लालू प्रसाद के करीबियों में जगदानंद सिंह पहले व्यक्ति नहीं हैं, जिन्हें उनके बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) के बयानों से धक्का लगा है। इसके पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) और आरजेडी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे (Ramchandra Purvey) पर भी तेज प्रताप के बयानों की गाज गिर चुकी है। रघुवंश तो इतने व्यथित हुए कि अपने आखिरी क्षणों में अस्पताल से ही लालू का साथ छोड़ने का एलान कर दिया था। फिर भी तेज प्रताप की बदजुबान जारी है । नतीजतन पुत्र के प्रति मोह से लालू के अपने लगातार बिछुड़ते जा रहे हैं।

2019 में प्रदेश अध्‍यक्ष पद से बेदखल किए गए थे रामचंद्र पूर्वे जगदानंद के अनुशासन का अक्सर मजाक उड़ाने वाले तेज प्रताप ने चार बार से लगातार आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष बनते आ रहे रामचंद्र पूर्वे को 2019 में पद से बेदखल कराया था। उनपर चुगली करने और फोन नहीं उठाने का आरोप लगाया था। तेज प्रताप की सिफारिश पर आरजेडी में एक पदाधिकारी बनाने में देरी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा था। यह वही पूर्वे हैं, जिन्होंने 1997 में जनता दल से अलग होकर लालू की नई बनी पार्टी का संविधान तैयार किया था। चारा घोटाले (Fodder Scam) में लालू जब जेल गए तो राबड़ी देवी (Rabri Devi) के साथ मंत्री के रूप में सबसे पहले शपथ लेने वाले पूर्वे ही थे। बाकी मंत्रीमंडल का गठन बाद में हुआ था। पूर्वे अपनी ही बनाई पार्टी से अब अलग-थलग हैं।

तेज प्रताप के कारण टूटा दरोगा प्रसाद राय परिवार से रिश्‍ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय (Daroga Prasad Rai) के घराने से लालू परिवार का बहुत ही धनिष्ट रिश्ता रहा था उस रिश्ते को रिश्तेदारी में बदलने के लिए लालू प्रसाद ने बड़ी धूमधाम से रिश्ता जोड़ा था और तेज प्रताप की शादी दरोगा प्रसाद की पौत्री ऐश्वर्या राय (Aishwarya Rai) के साथ हुई थी। लेकिन छह महीने के भीतर ही मामला तलाक तक पहुंच गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी तेज प्रताप ने आरजेडी के शिवहर सहित अधिकृत दो प्रत्याशियों के खिलाफ लालू-राबड़ी मोर्चा बनाकर प्रत्याशी उतार दिए थे और उस प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार भी किया था ।


तेज प्रताप से इस तरह के आचरण को लेकर पार्टी में ही नहीं परिवार में भी जबरदस्त शीत युद्ध जारी है राबड़ी और मिसा को छोड़ दे तो परिवार के अधिकांश सदस्य तेज प्रताप के व्यवहार से नराज है तेजस्वी तो कई बार तेज प्रताप के हरकत के कारण शर्मिदा होना पड़ा है ।


वैसे इस बार स्थिति बदली हुई है जगतानंद नहीं माने तो फिर लालू प्रसाद को पार्टी को सम्भाले रखना बड़ी मुश्किल होगी क्यों कि जगतानंद सिंह के प्रदेश अध्यक्ष रहने से तेजस्वी को बिहार की राजनीति समझने में काफी मदद मिलती है साथ ही आज भी जगतानंद सिंह को बिहार की राजनीति में काफी साफ सुथरी छवि है और इसका लाभ राजद को मिलता रहता है ।
तेजस्वी इसको लेकर पार्टी दफ्तर में एक बैठक बुलाया जिसमें श्याम रजक और आलोक मेहता मौजूद थे ।बैठक में जगतानंद सिंह को लेकर चर्चा हुई और इस बात पर जोड़ दिया गया कि इससे पार्टी की छवि खराब हो रही है ऐसे में पार्टी को कठोर निर्णय लेने कि आवश्कता है ।

50 लाख मोदी की तस्वीर वाली झोला के सहारे सियासत साधने मैंदान में उतरी बीजेपी सांसद और विधायक को दी गयी जिम्मेवारी

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के प्रचार प्रसार के लिए भाजपा ने आज से झोला बांटने के अभियान की शुरूआत कर दी है। प्रदेश कार्यालय में केन्द्रीय गृहमंत्री नित्यानंद राय ने इस शुभारंभ किया। प्रदेश कार्यालय से शुरू हुए इस अभियान के पहले चरण में पार्टी के विधायक और सांसद पूरे प्रदेश में 50 लाख झोला बांटेगे। पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत हर महीने पांच किलो मुफ्त अनाज देने की योजना केन्द्र सरकार चला रही है।
अब भाजपा बिहार के लोगों को झोला बांटकर ये बतायेगी की उनके घरों तक जो अनाज पहुंच रहा है, वो असल में मोदी सरकार की देन है। भाजपा के कार्यकर्ता बूथ लेवल तक कार्यक्रम आयोजित कर झोला वितरित करेंगे। झोला पर पीएम मोदी की तस्वीर, भाजपा का कमल निशान, पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना छपा है।पीएम के साथ ही क्षेत्रवार सांसद व विधायक की तस्वीर भी इसपर छपी होगी। भाजपा कार्यकर्ता49 हजार 780 जनवितरण दुकानों पर PM मोदी का बैनर लगा कर लाभुकों के बीच यह झोला वितरित करेगा।
विधायक 20 हजार तो सांसदों को बनवाना होगा 1 लाख झोला
सांसद ,विधायक और विधानपरिषद सदस्यों को विशेष जिम्मेवारी दी गयी है जिसके तहत प्रत्येक सांसद को 1 लाख झोला, 1 हजार फ्लैक्स तो विधायक को 20 हजार झोला, 200 फ्लैक्स बांटने की जिम्मेवारी दी गयी है। प्रधानमंत्री अन्न योजना के तहत राज्य के गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले परिवार को 5 किलो अनाज और 1 किलो दाल नबंबर तक मुफ्त में मिलेगा
नीतीश कुमार को इस योजना से रखा गया है दूर

भाजपा के इस झोला अभियान का असल मकसद, आमलोगों तक ये बात पहुंचाना है कि गरीबों को जो अनाज मिल रहा है वो असल में मोदी सरकार का दिया है।और यही वजह है कि यूपी में इस योजना के शुभआरम्भ के दौरान जो झोला बाटा गया था उसमें योगी की तस्वीर थी लेकिन बिहार में नीतीश कुमार की तस्वीर झोला पर नहीं है ।
यहां संसदीय क्षेत्रों के लिहाज से भाजपा के सांसदों का चेहरा होगा। जहां विधायक हैं वहां विधायक का। कुल मिलाकर केन्द्र सरकार के काम का क्रेडिट नीतीश कुमार ना ले पाएं, इसकी पूरी कोशिश की गई है।राजद ने इस झोला राजनीति पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री अन्न योजना मोदी की योजना नहीं है जो सिर्फ बीजेपी के विधायक और सांसद का फोटो झोला पर रहेगा तत्तकाल पीएम मोदी इस प्रवृति पर रोक लगाये नहीं तो राजद इसको लेकर जनता के बीच जायेंगी ।

बिहार इस बार भी वीरता पदक से चूका

हर वर्ष की भाती स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के जांबाज पुलिस पदाधिकारियों को दी जाने वाली विरता पुरस्कार( गैलेंट्री पुलिस पदक)में इस बार भी बिहार का नाम नहीं है जबकि विराता पुरस्कार के इतिहास की बात करे तो बिहार हमेशा दो तीन पदक लेता रहा है।

 गृह मंत्रालय हर साल स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेश की पुलिस सेवा से जुड़े पदाधिकारियों व कर्मियों के लिए पदक की घोषणा करती है। यह पदक चार श्रेणी में दिए जाते हैं। राष्ट्रपति का गैलेंट्री पुलिस पदक, गैलेंट्री पुलिस पदक, राष्ट्रपति का विशिष्ट सेवा पदक व सराहनीय सेवा पदक।

स्वतंत्रता दिवस पर इस वर्ष बिहार के 23 पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों को गृह मंत्रालय की ओर से सेवा पदक के लिए चुना गया है। दो पुलिस पदाधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक जबकि डीएसपी सुबोध कुमार समेत 21 को सराहनीय पुलिस सेवा पदक दिया जाएगा। आर्थिक अपराध इकाई, पटना में पुलिस निरीक्षक विपिन कुमार सिंह और पटना जिला बल में पुलिस अवर निरीक्षक राम कुमार सिंह को विशिष्ट सेवा पदक के लिए चुना गया है। बिहार के डीजीपी एसके सिंघल ने विशिष्ट व सराहनीय सेवा पदक पाने वाले पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य

इन्हें मिला सराहनीय सेवा पदक
– सुबोध कुमार, डीएसपी मद्यनिषेध,
– आनंद कुमार सिंह एसआइ सहरसा,
– राज नारायण यादव एएसआइ पटना,
– सुधाकर सिंह, एसआइ पूर्णिया,
– अर्जुन बेसरा एसआइ, रेल कटिहार,
– शत्रुघ्न पटेल, एसआइ कैमूर,
– अरुण कुमार झा, एसआइ दरभंगा,
– कुमार अजीत सिंह, एएसआइ सीआइडी,
– संजय कुमार यादव, एएसआइ सीआइडी,
– उमेश पासवान, एएसआइ एसटीएफ,
– अजय कुमार द्विवेदी, एएसआइ पुलिस मुख्यालय,
– अमेंद्र कुमार गुप्ता, एएसआइ मद्यनिषेध इकाई,
– अनिल कुमार सिंह, हवलदार एटीएस,
– अरुण कुमार सिंह, चालक हवलदार एटीएस,
– मो. रिजवान अहमद, हवलदार बीएसएपी-10,
– विनय कुमार सिंह, हवलदार सिवान,
– लालबाबू सिंह हवलदार बीएसएपी-14,
– बलराम सिंह, चालक सिपाही बीएसएपी-10,
– हरेंद्र कुमार चौधरी, सिपाही नालंदा,
– रामकुमार शर्मा, सिपाही सीआइडी,
– संजय कुमार सिपाही गोपालगंज।

गैलेंट्री पुलिस पदक नहीं मिलने को लेकर जब राज्य के डीजीपी से सवाल किया गया तो कहां कि हमारे राज्य में जांबाज पुलिस अधिकारियों की कोई कमी है कभी कभी ऐसा होता है वैसे विरता पदक का एक अलग ही महत्व है ।

भारत का 75वां स्वतंत्रता दिवस खास होगा , करेंगे दो हेलिकॉप्टर्स पुष्पवर्षा लाल किले पर

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी है कि जैसे ही स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा, भारतीय वायु सेना (IAF) के दो Mi-17 1V हेलिकॉप्टर कार्यक्रम स्थल पर फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा करेंगे

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी है कि जैसे ही स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा, भारतीय वायु सेना (IAF) के दो Mi-17 1V हेलिकॉप्टर कार्यक्रम स्थल पर फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा करेंगे. स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार ऐसा होगा. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, पहले हेलिकॉप्टर के कैप्टन विंग कमांडर बलदेव सिंह बिष्ट होंगे, जबकि दूसरे हेलिकॉप्टर की कमान विंग कमांडर निखिल मेहरोत्रा के हाथ में होगी.

स्कूल जाने से पहले सबसे जरूरी पाठ:बच्चों! मास्क पहने रहना, किसी से न कुछ लेना न देना, तबीयत जरा भी बिगड़े तो घर पर ही रहना; पेरेंट्स-टीचर्स के लिए भी जरूरी सलाह

देश में कोरोना की दूसरी लहर अब लगभग थम गई है। स्थिति सामान्य होती देख कई राज्यों ने स्कूलों को खोलने का फैसला कर लिया है। कोविड की मौजूदा स्थिति की बात करें तो फिलहाल रोजाना के मामले 40 हजार के आसपास बने हुए हैं। पंजाब और छत्तीसगढ़ ने स्कूल खोल दिए हैं, वहीं उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश 16 अगस्त से स्कूलों को फिर से खोलने की तैयारी में हैं। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच यह फैसला कितना सही और चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसे लेकर चर्चा जारी है। इन सबके बीच पेरेंट्स के लिए बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों ही चिंता का विषय बनी हुई है।