पिछले दो दशकों में अकबरनगर ने स्वच्छता के मामले में कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे, लेकिन इस हड़ताल ने उन उपलब्धियों को धुंधला कर दिया है। शहर के कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में कचरा जमा होने से उत्पादन लाइनों पर भी असर पड़ रहा है। इसके अलावा, स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि कचरा जमा होने से ग्राहक आने में कमी आ रही है, जिससे दैनिक आय में गिरावट देखी जा रही है। नगरपालिका ने कहा कि वह इस स्थिति को शीघ्र सुलझाने के लिए सभी पक्षों से संवाद कर रही है, परन्तु हड़तालकर्ता अभी भी अपने शर्तों को लेकर अडिग हैं।
हड़ताल के सातवें दिन, नगर निगम ने एक आपातकालीन अधिसूचना जारी की, जिसमें बताया गया कि कचरे के ढेर को रोकने के लिए निजी ठेकेदारों को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाएगा। इस कदम से कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, परन्तु हड़ताल करने वाले श्रमिकों ने इसे ‘भुगतान से कम और अधिकारों से कम’ के रूप में खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे केवल उचित वेतन, भत्ते और कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित होने पर ही काम पर लौटेंगे। इस बीच, नगरपालिका ने कहा कि वह सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए तैयार है, परन्तु यह प्रक्रिया समय लेगी।
हड़ताल के दौरान, नगर परिषद के प्रमुख ने स्थानीय मीडिया को बताया कि कचरे के ढेर ने स्वास्थ्य जोखिम को बढ़ा दिया है, विशेषकर जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान से। उन्होंने बताया कि कचरा जलने से विषैली गैसें उत्पन्न हो रही हैं, जिससे श्वसन रोगों की संभावनाएं बढ़ रही हैं। इस संदर्भ में, नगरपालिका ने एम्बुलेंस और स्वास्थ्य केंद्रों को अतिरिक्त स्टाफ प्रदान किया है, ताकि संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का त्वरित निवारण किया जा सके।
शहर के प्रमुख नागरिक संगठनों ने भी इस हड़ताल पर टिप्पणी की, जहाँ उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने नगरपालिका को आह्वान किया कि वह इस विवाद को सुलझाने के लिए एक मध्यस्थ समिति बनाकर सभी पक्षों की सुनवाई करे। इस बीच, कई स्थानीय निवासी ने कचरे के ढेर के कारण उत्पन्न बुरे गंध और कीटाणुओं से परेशान होने की शिकायत की।
नगर निगम के प्रमुख अधिकारी ने बताया कि हड़ताल के कारण शहर की वित्तीय स्थिति भी प्रभावित हुई है। कचरा संग्रह और निपटान में देरी से उत्पन्न अतिरिक्त लागतों ने नगरपालिका के बजट पर दबाव डाला है, जिससे अन्य विकास परियोजनाओं में कटौती की संभावना बन रही है। उन्होंने कहा कि यदि हड़ताल दो हफ्तों से अधिक जारी रहती है, तो नगर निगम को अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता पड़ेगी, जिससे राज्य सरकार से अतिरिक्त अनुदान की माँग की जा रही है।
राज्य सरकार ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह नगर निगम के साथ मिलकर समस्या का समाधान खोजेगी, परन्तु श्रमिक अधिकारों का सम्मान भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे उचित वार्ता के माध्यम से समाधान चाहते हैं और हड़ताल को समाप्त करने के लिए सभी पक्षों से सहयोग की उम्मीद करते हैं।
Updated: August 23, 2026
Akbar Nagar’s sanitation workers have been on strike for eight days over unmet pay promises, leaving waste piles to grow and threatening public health and the city’s economy. The municipality is considering hiring private contractors while negotiations continue, as authorities warn of mounting costs and a looming budget squeeze.
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