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सोशल मीडिया के सहारे पंचायत चुनाव पर आयोग की रहेगी नजर

बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर आयोग पहली बार सोशल मीडिया पर उम्मीदवारों की मॉनिटरिंग करेगा. चुनाव के दौरान किसी भी गड़बड़ी की शिकायत के लिए चुनाव आयोग के द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है.ऐप के माध्यम से मतदाता शिकायत दर्ज करा सकेंगे. आयोग ने शिकायत पर त्वरित कारवाई करने के लिए हेल्पलाइन नंबर18003457243 जारी किया है. राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की ऑनलाइन निगरानी कि विभिन्न की सुविधाएं इस बार पंचायत चुनाव में देखने को मिलेगी.


जागरूकता के लिए सोशल मीडिया का सहारा- बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं को जागरूक करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग (bihar state election commission) ने पंचायत चुनाव पर विशेष गीत भी लांच किया है. ये है बिहार जय जय बिहार गीत को कलर ट्यून के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा मतदाताओं से मतदाता सूची की तैयारी और मतदान केंद्रों की स्थापना को लेकर संवाद स्थापित किया जा रहा है.


बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल- बिहार के पंचायत चुनाव में पहली बार बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. राज्य में बोगस वोटिंग रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर बायोमेट्रिक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. बायोमेट्रिक के लगने से मतदाता दो बार मतदान नहीं कर सकेंगे. ईवीएम का प्रयोग- बिहार पंचायत चुनाव में पहली बार ईवीएम का प्रयोग किया जाएगा. राज्य में मुखिया (Mukhia), जिला परिषद, वार्ड सदस्य और पंचायत समिति पद के लिए मतदाता ईवीएम से वोट कर सकेंगे. वहीं पूरे चुनाव में ईवीएम मशीन और पोलिंग पार्टी को भी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जायेगी. ईवीएम (EVM) मतदान केंद्र से कब निकली और मतगणना कक्ष तक कितनी देर में पहुचेगी इसकी जानकारी जीपीएस के माध्यम से मिल सकेगी.पोलिंग पार्टी भी मतगणना केंद्र पर कब पहुचेगी इसकी भी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जायेगी

शताब्दी भवन के तोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग (शताब्दी भवन )के पास मजार से सटे एक बहुमंजिली इमारत के हुए अवैध निर्माण को तोड़ने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। जस्टिस यू यू ललित की पीठ ने राज्य सरकार व अन्य की अपील पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के इस मामलें में बहाल amicus curie वरीय अधिवक्ता राजेंद्र नारायण को जारी किया हैं।

इससे पूर्व जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय जजों की बेंच ने इस मामलें पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। जजों की पाँच सदस्यीय बेन्च ने बहुमत के निर्णय से इस भवन निर्माण को अवैध करार देते हुए एक माह के भीतर तोड़ने का आदेश दिया था ।
इस भवन के निर्माण पर कोर्ट ने तत्काल रोक लगाते हुए राज्य सरकार से पूछा था कि क्या इसके निर्माण को लेकर पटना हाईकोर्ट और पटना नगर निगम से भी अनुमति ली गई थी ?

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि नई बिल्डिंग से सटे मजार के करीब वक्फ बोर्ड का चार मंजिला कार्यालय बन रहा है। कार्यालय के सबसे नीचे मुसाफ़िर खाना बन रहा है।
य़ह तिमंजिला भवन है एवं नए इमारत के निर्माण में किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी ।
इस पर जजों ने कहा था कि यह गलत तरीके से बना है।बिल्डिंग बाय लॉ की धारा 21 में स्पष्ट कहा गया है कि विधान सभा , राजभवन और हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील से सटे कोई दूसरी बिल्डिंग नहीं बनाई जा सकती है। साथ ही इसकी उँचाई 10 मीटर से अधिक नहीं हो सकती हैं।इस मामलें पर नोटिस का जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट पुनः सुनवाई करेगा।

भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के जीरो टांलरेंस के दावे की खुली पोल इंजीनियर ने कहा मुंह खोलूंगा तो सरकार हिल जाएगी ।

सरकार भले ही भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात करता है लेकिन पिछले 72 घंटे से एक इंजीनियर जिस तरीके से पूरी सरकार को लील डाउन कराये हुए है यह देख कर मेरे जैसा पत्रकार भी हैरान है कि नीतीश कुमार के सीएम रहते हुए सिस्टम इतना लाचार बेवस और कमजोर कैसे हो सकता है ।


जी है मैं बात कर रहा हूं दरभंगा जिले में ग्रामीण कार्य विभाग में पदस्थापित अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार की जिन्हें मुजफ्फरपुर पुलिस ने तीन दिन पहले 18 लाख रुपया केस के साथ पकड़ा है हलाकि उसके पास दो करोड़ से ज्यादा पैसा था ऐसी खबरे हम लोग के पास आ रही थी ।


खैर मैंने जब मुजफ्फरपुर एसएसपी जयकांत से खुद बात किया तो इन्होंने कहा कि संतोष जी 30 लाख रुपया बरामद हुआ है हमलोग भी सून रहे हैं कि दो करोड़ इसके पास था लेकिन गांड़ी में इतना ही है आर्थिक अपराध इकाई और इनकमटैक्स को सूचना दे दिए हैं वो लोग आ रहे हैं जो कारवाई करे वो लोग। एसएसपी मुजफ्फरपुर से हमारी बात दोपहर दो बजे के करीब हुई थी शाम में एएसपी वेस्ट सैयद इमरान मसूद ने कहा कि इंजीनियर के पास से 18 लाख रुपया बरामद हुआ है और इंजीनियर पर पंचायत चुनाव को लेकर राज्य में जारी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी है जिसमें इस समय नगद पैसे लेकर चलने पर रोक है ।


ये समझ से पड़े कि बात है कि एक सरकारी इंजीनियर जिसके विभागीय गांड़ी से 18 लाख रुपया नगद पैसा बरामद होता है और उस पर मुखिया चुनाव वाले धारा के तहत मामला दर्ज होता है ,और इससेे बड़ी बात यह है कि एएसपी वेस्ट को जब मीडिया वाले ने इंजीनियर को मीडिया के सामने लाने को कहां तो इस तरह भड़क गये जैसे मीडिया वाले कोई अपराध कर दिया हो अभी तक इंजीनियर की तस्वीर किसी मीडिया के पास नहीं है।


खैर मुजफ्फरपुर पुलिस उसी दिन शाम में थाना पर से ही इंनजीयिर को जमानत दे दिया हलाकि इस मामले में एएसपी और एसएसपी दोनों से सवाल किया गया तो अधिकारिक तौर पर कोई जबाव नहीं दिया गया फिर दूसरे दिन खबर आती है कि इंजीनियर के दरभंगा और पटना स्थित आवास पर छापा मारा गया तो 49 लाख रुपया नगद उसके आवास से बरामद हुआ।
49 लाख रुपया की बरामदगी के बावजूद अभी तक पुलिस यह तय नहीं कर पा रही है कि इस इंजीनियर के साथ करे क्या ,वैसे खबर आ रही है कि इंजीनियर पुलिस को पुछताछ में सहयोग नहीं कर रही है इसलिए अब इनको बेल दे कर छोड़ दिया जाये अभी वो पुलिस हिरासत में है या फिर पुलिस उसको छोड़ दिया है हलाकि अधिकारिका तौर पर पूरा सिस्टम खामोश है कोई भी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है ।


बिहार में भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री के अंदर तीन विभाग है विशेष निगरानी ,निगरानी और आर्थिक अपराध इकाई जिसके अधिकारी सीधे सीएम को रिपोर्ट करते हैं एक इंजीनियर के पास से 67 लाख रुपया कैस बरामद हो रहा है लेकिन ये सारी ऐजेंसी ऐसे खामोश है जैसे ये कोई साधारण बात है आर्थिक अपराध इकाई की एक टीम पहुंची हुई है लेकिन चार दिन होने को है लेकिन अभी तक कोई बड़ी कारवाई नहीं हुई है ।


ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि ये इंजीनियर कौन है क्यों कि चैन छिनतई में एक पूर्व विधायक के बेटा की गिरफ्तारी हुई तो पुलिस भी और हम मीडिया वाले भी बड़े बड़े अंक्षर में लिख रहे हैं दिखा रहे हैं लेकिन इस इंजीनियर को लेकर पूरा सिस्टम खामोश है कहां जा रहा है कि इस इंजीनियर का रिश्ता सत्ता में बैठे ऐसे लोगों से हैं जो इन दिनों सरकार के नाक के बाल बने हुए हैं इसलिए कारवाई करने से सब बच रहा है ।सबसे बड़ी बात है ग्रामीण कार्य विभाग के एक सीनियर इंजीनियर चार दिनों से पुलिस के हिरासत में है और विभाग ऐसे खामोश है जैसे कुछ हुआ ही नहीं है ।

चारा घोटाला से जुड़े जांच अधिकारी का हुआ तबादला

बहुचर्चित चारा घोटाला से जुड़े सीबीआई के दो जांच अधिकारी बीके सिंह और दशरथ मुर्मू का रांची से पटना एवं कोलकाता स्थानांतरण किया गया है। एसपी स्तर के दोनों सीबीआई अधिकारी वर्तमान में रांची सिविल कोर्ट में सुनवाई के लिए लंबित चारा घोटाला के दो मामले आरसी 47ए/ 1996 और आरसी 48 ए/1996 के जांच पदाधिकारी रहे हैं । पूर्व में पटना हाईकोर्ट और बाद में झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई के सीनियर अधिकारी चारा घोटाला मामले की सुनवाई में लगातार मॉनिटरिंग कर रहे थे। मामले की सुनवाई बाधित न हो इस वजह से झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों के तबादले पर रोक लगा रखी थी। 

मालूम हो कि रांची में चारा घोटाले से जुड़े कुल 53 मामलों को सुनवाई के लिए रांची सिविल कोर्ट भेजा गया था। जबकि  11 मामलों की सुनवाई पटना स्थित सिविल कोर्ट में चली। रांची सिविल कोर्ट के स्पेशल जज ने अभी तक 51 मामलों का निष्पादन कर अपना फैसला सुना दिए हैं। जबकि चारा घोटाला के दो बड़े मामले अभी भी सुनवाई के लिए लंबित है। सीबीआई अधिकारी बीके सिंह लालू प्रसाद से जु़ड़े चारा कांड संख्या आरसी 47 ए /1996 के जांच अधिकारी हैं। जबकि सीबीआई के दूसरे अधिकारी दशरथ मुर्मू आरसी 48 ए/1996 के जांच पदाधिकारी हैं।

सरपंच होंगे पंचायत का प्रशासनिक हेड

पंचायत चुनाव से ठीक पहले पंचायती राज विभाग (Bihar Panchayati Raj Vibhag) ने नए सिरे से मुखिया व सरपंच के दायित्वों का निर्धारण किया है। इसके तहत मुखिया को जहां ग्राम सभा और पंचायतों की बैठक बुलाने का अधिकार होगा, वहीं इनके जिम्मे विकास योजनाओं के लिए मिलने वाली पंजी की निगरानी की भी जिम्मेवारी होगी। वहीं सरपंच गांवों में सड़कों के रखरखाव से लेकर सिंचाई की व्यवस्था, पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देने जैसे कार्य करेंगे।

मुखिया को हर साल करनी होगी कम से कम बैठकें
पंचायती राज विभाग के अनुसार मुखिया को अपने कार्य क्षेत्र में एक वर्ष में कम से कम चार बैठकें आयोजित करनी होगी। बैठक के अलावा इनके पास ग्रामी पंचायतों के विकास की कार्य योजना बनाने के साथ-साथ प्रस्तावों को लागू करने की जवाबदेही भी होगी। इसके अलावा ग्राम पंचायतों के लिए तय किए गए टैक्स, चंदे और अन्य शुल्क की वसूली के इंतजाम करना भी इनके जिम्मे होगा।

सरपंचों को मिले तीन बड़े अधिकार
मुखिया के साथ सरपंचों को पंचायती राज व्यवस्था में तीन बड़े अधिकार दिए गए हैं। ग्राम पंचायत की बैठक बुलाने और उनकी अध्यक्षता करने का अधिकार इन्हें मिला हुआ है। इसके अलावा ग्राम पंचायत की कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां भी इन्हीं के पास रहेंगी। इनके जिम्मे जो मुख्य कार्य होंगे उनमें गांव की सड़कों की देखभाल, पशुपालन व्यवसाय को बढ़ावा देना, सिंचाई की व्यवस्था करने के अलावा दाह संस्कार और कब्रिस्तान का रखरखाव करना होगा।

पंचायत सम‍िति के जिम्‍मे होगा ये काम
इनके अलावा पंचायत समिति को जो कार्य सौंपे गए हैं उसके अनुसार इन्हें केंद्र, राज्य और जिला परिषद द्वारा सौंपे कार्यों का निष्पादन करना। पंचायत समिति का वार्षिक बजट बनाना व बजट पेश करना होगा। प्राकृति आपदाओं में पंचायत समिति प्रमुख को 25 हजार रुपये तक खर्च करने का अधिकार होगा ।

उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति बिगड़ी कई तटबंध टूटे राजधानी से कई जिलों का सड़क सम्पर्क हुआ भंग

नेपाल में पिछले 72 घंटे से लगातार हो रही है बारिश के कारण एक बार फिर 40 दिनों बाद उत्तर बिहार में बाढ़ की स्थिति बिगड़ गयी है वही गंडक बराज से आज रात 5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने को लेकर पूरे इलाको को प्रशासन ने खाली करने का निर्देश दिया है ।

गंडक , बूढ़ी गंडक, बागमती और कमला बलान सहित तमाम छोटी नदियां भी तबाही मचाने लगी है। चम्पारण से लेकर मिथिलांचल तक नये क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। पूर्वी चम्पारण में अरेराज- हाजीपुर एसएच-74 पर संग्रामपुर के इजरा के पास करीब एक किलोमीटर में दो फीट गंडक का पानी बह रहा है। पानी और बढ़ा तो आवागमन ठप हो जाएगा। बगहा दो प्रखंड की नौरंगिया दरदरी पंचायत के पचफेड़वा में भपसा नदी के टूटे बांध से गांवों में पानी फैल रहा है। बगहा के पिपरासी प्रखंड की सेमरा लबेदहा पंचायत में गंडक की बाढ़ से दर्जनभर घर व दो सड़कें बह गईं हैं। सीतामढ़ी के छह सात प्रखंड की तीन दर्जन से अधिक पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। कुम्मा डायवर्सन पर पानी बढ़ने से एनएच 104 पर आवागमन ठप हो गया है। दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड क्षेत्र के लोगों को कमला-बलान में उफान से सातवीं बार बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। मधुबनी के झंझारपुर में 15 दिनों से फ्लड फाइटिंग जारी रहने के बाद भी आरएस के अदलपुर-पिपराघाट के सामने कमला बलान के पूर्वी तटबंध में कटाव पर काबू नहीं पाया जा सका है। बगहा की नौरंगिया दरदरी पंचायत के पचफेरवा में भपसा नदी का बांध टूट गया। इससे दो दर्जन गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। सिकरहना की बाढ़ का पानी लौरिया-नरकटियागंज पथ पर अशोक स्तंभ के पास डायवर्सन पर चढ़ गया है। अशोक स्तंभ परिसर में भी पानी फैलने लगा है। पानी रामनगर-लौरिया पथ की ओर बढ़ रहा है। रामनगर के दोन क्षेत्र के बगही व गुदगुदी पंचायत में मसान के कटाव में सैंकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई।

पूर्वी चम्पारण के संग्रामपुर में एसएच 74 पर चढ़ा गंडक का पानी संग्रामपुर प्रखंड में अरेराज- हाजीपुर एसएच 74 पर दो फीट बाढ़ का पानी बह रहा है। अरेराज कीआधा दर्जन पंचायतों में बाढ़ से तबाही मची है। सुगौली, बंजरिया, केसरिया, पताही प्रखंड की कई पंचायतें बाढ़ से प्रभावित है। सुगौली नगर पंचायत के सात वार्ड बाढ़ से घिर गए हैं। पताही में मोतिहारी-शिवहर पथ पर पानी चढ़ने से तीसरे दिन भी आवागमन ठप है। डुमरिया घाट में गंडक नदी लाल निशान से ऊपर बह रही है। लाल बेगिया सिकरहना, लाल बाकेया गुवाबारी व अहिरौलिया में बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है।

सीतामढ़ी की तीन दर्जन पंचायतों के दर्जनों गांव प्रभावित
सीतामढ़ी जिले के नये इलाके में बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है। बागमती व अधवरा समूह की नदियां लाल निशान के ऊपर है। जिले के छह प्रखंड की तीन दर्जन से अधिक पंचायतें बाढ़ से प्रभावित है। सुरसंड प्रखंड के नगर पंचायत सहित 15 पंचायत के चार दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। कुम्मा डायवर्सन पर पानी चढ़ने से आवागमन में परेशानी हो रही है। लखनदेई नदी का पानी शहर के निचले इलाके में प्रवेश कर रहा है। बाजपट्टी व चोरौत के दो दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित है। वहीं पुपरी के दो पंचायत के आधा दर्जन गांव प्रभावित है। बेलसंड नगर पंचायत सहित प्रखंड नौ पंचायतों के एक दर्जन गांवों में मनुषमरा नदी का पानी निचले इलाके में फैल गया है। बेलसंड-सीतामढ़ी पथ में कोठी चौक से भोरहा तक व बेलसंड धनकौल पथ में सौली, सुंदरपुर व सौली मठ तक बाढ़ का पानी सड़क तीन फीट बह रहा है।

जिले से होकर गुजरने वाली सभी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। हालांकि कमला-बलान नदी के जलस्तर में 83 सेमी की कमी आने से लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। कमला-बलान के जलस्तर में उफान से घनश्यामपुर प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गयी है। प्रखंड में सातवीं बार बाढ़ आने से लोग परेशान हैं। सड़कों पर पानी बहने से सिर्फ नाव ही आवागमन का माध्यम है। उधर, हनुमाननगर प्रखंड में भी बागमती का पानी फैल गया है। प्रखंड की सभी 14 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हो गयी हैं। हायाघाट-अशोक पेपर मिल सड़क पर पानी बहने से अब भी आवागमन ठप है।

नीतीश कुमार पीएम मटेरियल जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में हुआ पारित

JDU के राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कुल 8 एजेंडों पर चर्चा की गई। इस बैठक में ललन सिंह को आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किया गया और उन्हें अध्यक्ष पद के सभी अधिकारों को दिया गया। इस बैठक के एजेंडे में संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के लिए भी JDU के संविधान में संशोधन किया गया है। पहले से राष्ट्रीय अध्यक्ष ही संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष होते थे। लेकिन संशोधन में ये साफ किया गया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी को मनोनीत कर सकते है। अभी, उपेंद्र कुशवाहा JDU संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष है। वही, जातीय जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर भी प्रस्ताव पास किए गए। इसमें JDU ने अपने पुरानी बातों को फिर से दोहराया है।

1 प्रस्ताव – राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किए जाने पर राष्ट्रीय परिषद ने मुहर लगा दी। वहीं, रामचंद्र प्रसाद सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण योगदान के प्रति आभार व्यक्त और उनके कार्यकाल की प्रशंसा पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के फैसले का अनुमोदन किया गया।

2 प्रस्ताव – पार्टी संविधान में संशोधन किया गया। राष्ट्रीय परिषद में यह प्रस्ताव किया गया कि संविधान की धारा 28 में आवश्यक संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया जाए जिसमें JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष होंगे या किसी को अध्यक्ष मनोनीत करने के साथ सदस्यों का मनोनयन करेंगे।

3 प्रस्ताव- राष्ट्रीय परिषद ने आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में NDA के साथ समुचित हिस्सेदारी के आधार पर चुनाव लड़ने की पहल करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को अधिकृत किया गया है।

4 प्रस्ताव -इस प्रस्ताव में जातीय आधार पर जनगणना को रखा गया है। पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया कि आवश्यक है कि केंद्र सरकार जाति आधारित जनगणना कराकर सभी जातियों का वास्तविक आंकड़ा सार्वजनिक करें। जिससे सुविधा विहीन और विकास से वंचित जातियों को उनकी आबादी के अनुरूप साधन एवं सुविधा मुहैया हो सके। जनगणना समाज और सरकार सबके हित में होगी और इससे हमारी संसदीय लोकतंत्र मजबूत होगा।

5 प्रस्ताव – राष्ट्रीय परिषद की मांग है कि जस्टिस रोहिणी आयोग की सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाए ताकि बिहार की तर्ज पर अत्यंत पिछड़े वर्गों को सामाजिक शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के प्रयासों को अधिक बल मिल सके।

6 प्रस्ताव – जनसंख्या नियंत्रण के लिए शिक्षित कन्या-सुखी परिवार के बिहार मॉडल को जनसंख्या कम करने का लक्ष्य बनाने का प्रस्ताव रखा गया। JDU किसी कठोर नियंत्रण अथवा किसी नकारात्मक नतीजों वाले प्रयास के बजाय जागरूकता अभियान एवं बालिका शिक्षा के विस्तार के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि को कम करने का समर्थन करता है।

7 प्रस्ताव – मेडिकल परीक्षाओं में की गई आरक्षण व्यवस्था का स्वागत किया गया । पार्टी का मानना है कि इसमें पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए 27% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए 10% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। इससे वंचित समूह को सामाजिक न्याय एवं विशेष अवसर मिलेंगे। इस प्रोत्साहन से चिकित्सा सेवा क्षेत्र में समानता उपलब्ध कराने के प्रयास में सफलता मिलेगी।

8 प्रस्ताव -इस में शोक प्रकाश लाया गया। जिसमें नेताओं के निधन पर शोक व्यक्त किया गया।

इस प्रस्तावों पर भी लगा मोहर

1— यूपी और मणिपुर विधान सभा चुनाव में अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी जदयू।

2–नीतीश कुमार पीएम पद के हैं योग्य उम्मीदवार

3– हम बीजेपी के सबसे विश्वसनीय पार्टनर।

पंचायत चुनाव के दौरान प्रत्याशी चार चक्का गांड़ी का नहीं कर सकते हैं इस्तमाल

राज्य निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव को लेकर कई और गाइड लाइन जारी किये हैं जिसके तहत प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार के दौरान कितने वाहन यूज करना है इस पर खास ध्यान रखा गया हैै।

प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। जिप सदस्य प्रत्याशी को दो हल्के मोटर या दो दोपहिया वाहन से प्रचार करने की अनुमति दी जा सकती है। वहीं, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य एवं सरपंच को चालक सहित एक यांत्रिक दोपहिया वाहन सिर्फ अभ्यर्थी अथवा उनके निर्वाचन अभिकर्ता के लिए मंजूरी दी जाएगी। ग्राम पंचायत सदस्य एवं पंच प्रत्याशी या उनके निर्वाचन अभिकर्ता चुनाव प्रचार में किसी तरह के वाहन का उपयोग नहीं कर सकते हैं। आयोग द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अभ्यर्थी या निर्वाचन अभिकर्ता में से किसी एक को ही वाहन का परमिट दिया जायेगा। बिना परमिट के वाहन का परिचालन किये जाने पर उसे तुरंत जब्त कर लिया जायेगा।

आयोग द्वारा यह निर्देश जारी किया गया है कि मतदाताओं को दी जाने वाली पहचान पर्चियां सादे कागज पर अंकित होनी चाहिए। उम्मीदवार का नाम या चुनाव चिह्न बिल्कुल भी अंकित नहीं होना चाहिए। 100 मीटर पहले रुक जायेंगे वाहन नाम निर्देशन पत्र दाखिल करने के लिए निर्वाची पदाधिकारी के कार्यालय के 100 मीटर की परिधि में किसी भी वाहन का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होगा।

जदयू राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक से बिहार की राजनीति की दिशा तय होगी

जदयू के राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक आज और कल पार्टी के प्रदेश कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में होनी है। इस बैंठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ,मंत्री आरसीपी सिंह ,संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, प्रधान महासचिव केसी त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव संजय झा, आफाक अहमद,रामसेवक सिंह, रामनाथ ठाकुर, गुलाम रसूल बलियावी, कमर आलम, राष्ट्रीय सचिव आरपी मंडल, विद्यासागर निषाद, रवीन्द्र प्रसाद सिंह, संजय वर्मा, राजसिंह मान, कोषाध्यक्ष डॉ. आलोक सुमन समेत कुल 18 नेता शामिल होंगे।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को बैठक में शामिल होंगे और पार्टी नेता को सम्बोधित करेंगे ।

हलाकि बैठक के एजेंडे की बात करे तो बैठक में मुख्य रूप से उन प्रस्तावों पर मुहर लगनी है, जिन्हें दिल्ली में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लिया गया था।

1—पहला प्रस्ताव था जातिगत जनगणना
2–दूसरा प्रस्ताव था जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने से सम्भव नहीं है पार्टी इसके लिए लोगों को जागरूक के लिए अभियान चलायेंगी
3–तीसरा प्रस्ताव था जदयू अपने संविधान में संशोधन पर भी मुहर लगाएगा। इसके तहत यह व्यवस्था की गई है कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष को यह अधिकार होगा कि वे पार्टी के राष्ट्रीय संंसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में किसी को जिम्मेदारी दे सकें।
4—जदयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह भी तय हुआ था पार्टी उन राज्यों में विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारेगी, जहां चुनाव बहुत जल्द होने वाले है। इस क्रम में उत्तर प्रदेश और मणिपुर का जिक्र आया था। इससे जुड़े प्रस्ताव पर भी राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुहर लगेगी।

हलाकि ये सारे एजेंडे दिखावे के लिए इस बैठक के पीछे मूल रुप से दो एजेंडा प्रमुख है जिसमें एक जातीय जनगणना को लेकर बीजेपी कैसे बैकफुट पर आती है और दूसरा संगठन से आरसीपी सिंह और उनके चाहने वाले लोगों का सफाया कैसे हो।
पहले एजेंडे को प्रभावी बनाने की जिम्मेवारी के0सी त्यागी को दी गयी है और आरसीपी सिंह के ऑपरेशन की जिम्मेवारी ललन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा दो गयी है।

क– नीतीश कुमार जातीय जनगणना को लेकर दूसरे राज्यों के दौरे पर निकलेंगे
रणनीति के तहत राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में एक प्रस्ताव पार्टी की और से लाया जा रहा है जिसमें जातीय जनगणना को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एक नैरेटिव बने इसके लिए नीतीश कुमार देश स्तर उन्हें कैंपेन की जिम्मेवारी दी जाये ।
इसकी पीछे नीतीश कुमार की मंशा यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दू मुस्लिम और राष्ट्रवाद का जो नैरेटिव चरम पर है उसको कमजोर किया जा सके ।क्यों कि जब तक राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दू मुस्लिम और राष्ट्रवाद का नैरेटिव चलता रहेंगा जातिवादी राजनीति कमजोर होती चली जायेंगी और ऐसे में पार्टी को बचाये रखना मुश्किल हो जायेंगा। इसलिए राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक पूरी तौर पर जातीय जनगणना को लेकर फोकस रहेंगा ।
साथ ही जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बीजेपी जो कानून लाना चाह रही है उसका अपने तरीके से विरोध जारी रखने की रणनीति पर भी गम्भीर चर्चा होगी क्यों कि जातीय जनगणना को तोड़ जनसंख्या नियंत्रण कानून ही है ।
जो जातिवादी राजनीति को हाशिए पर पहुंचा सकता है क्यों कि बीजेपी इस कानून को पूरी तौर पर मुस्लिम नैरेटिव को सामने रख कर आगे बढ़ रही है।

ख–आरसीपी सिंह को पर कतरने की भी तैयारी है
राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के अध्यक्ष बनने पर जैसे ही मोहर लगेंगा ललन सिंह को संगठन के विस्तार का अधिकार मिल जायेंगा ।आरसीपी सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाने के लिए भले ही पार्टी एक व्यक्ति एक पद की बात कह रहा है जबकि आरसीपी सिंह से पहले शरद यादव और नीतीश कुमार राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं और मंत्री और सीएम भी इसलिए एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला के पीछे आरसीपी को संगठन और पार्टी से दूर करना ही था इसलिए सबकी नजर राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक पर है क्यों कि अभी तक जदयू के नेताओं को बयान है उस गौर करेंगे तो एक बात समान्य है जदयू के हमारे सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार हैं और जदयू में एक ही नेता है, वह नीतीश कुमार हैं. जनता दल यूनाइटेड का मतलब आप लोग अच्छे तरीका से जान लीजिए, जनता दल यूनाइटेड है और इसका मतलब भी साफ है. पार्टी पूरी तरह से एकजुट है. कहीं भी पार्टी में किसी भी तरह का मतभेद नहीं है।बयान जरुर इस तरह के आ रहे हैं लेकिन पार्टी के अंदर सब कुछ ठीक ठाक नहीं है यह दिख रहा है भले ही नीतीश कुमार क्यों ना मतभेद की बात सिरे से खारिज कर दे।
हलाकि आरसीपी विरोधी जो भी नेता है उसके निशाने पर प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा है माना यही जा रहा है कि राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक के बाद उमेश कुशवाहा को प्रदेश अध्यक्ष से हटाया जा सकता है हलाकि यह निर्णय इतना आसाना नहीं है क्यों कि भले ही आरसीपी सिंह नीतीश में पूरी आस्था दिखा रहे हैं लेकिन आज वो इतने कमजोर भी नहीं है कि नीतीश उन्हें सिरे से खारिज कर दे ।

वैसे नीतीश और आरसीपी के बीच के रिश्ते को समझना आज की परिस्थिति में भी बहुत मुश्किल है भले ही 2020 के विधानसभा चुनाव में 10 से 15 ऐसे सीटों पर जहां जदयू चुनाव हारी है, उस हार के लिए आरसीपी जिम्मेवार है ये नीतीश भी स्वीकार करते हैं लेकिन इसके इतर भी बहुत सारी बाते ऐसी है जो आरसीपी को सिरे से खारिज करना नीतीश के लिए मुश्किल होगा ।

ऐसे में दो दिनों के इस राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक से बिहार की राजनीति किस और करवट लेगी इसका निर्घारण होना तय माना जा रहा है ।

पंचायत चुनाव में कौन कहां से चुनाव लड़ सकता है चुनाव आयोग ने जारी किया निर्देश मुखिया पद के प्रखंड का वोटर होना अनिवार्य

बिहार में होने वाले पंचायत आम चुनाव के दौरान कोई भी मतदाता अपने प्रखंड के किसी भी पंचायत से मुखिया पद का प्रत्याशी बन सकेगा।राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रत्याशियों के निर्वाचन क्षेत्रों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके अनुसार किस पद के प्रत्याशी के निर्वाचन क्षेत्र की सीमा कौन-कौन सी होगी, इसकी जानकारी दी गयी है। आयोग के दिशा-निर्देश के अनुसार कोई भी व्यक्ति अगर मुखिया पद का प्रत्याशी बनना चाहता है तो वह अपने प्रखंड के अंदर किसी भी पंचायत से मुखिया का चुनाव लड़ सकता है। इसी प्रकार, आयोग ने अन्य पदों के लिए भी निर्वाचन क्षेत्रों की स्थिति स्पष्ट कर दी है।

आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए उस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज होना आवश्यक है। मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बाद कोई व्यक्ति ग्राम पंचायत सदस्य या ग्राम कचहरी के पंच का चुनाव लड़ना चाहता है तो वह उस ग्राम पंचायत के किसी भी वार्ड से प्रत्याशी हो सकता है।

इसी प्रकार कोई भी व्यक्ति मुखिया, सरपंच या पंचायत समिति सदस्य का प्रत्याशी बनना चाहता है तो वह उस प्रखंड के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव का प्रत्याशी हो सकता है। शर्त यह है कि उसका नाम उस प्रखंड के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए।

इसी प्रकार, आयोग ने जिला परिषद प्रत्याशी को लेकर भी निर्देश दिया है। जिला परिषद प्रत्याशी अपने जिले के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार हो सकता है। बर्शेते कि उसका नाम उस जिले के किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल हो।

पंचायत चुनाव में एक कर्मचारी चार चरणों के चुनाव में ही लेगा भाग।

बिहार में पंचायत चुनाव के दौरान एक कर्मचारी को अधिकतम चार चरणों के चुनाव में तैनात किया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि कर्मियों की कमी की दशा में एक मतदान अधिकारी, मतगणना कर्मी, पेट्रोलिंग मैजिस्ट्रेट, माइक्रो ऑब्जर्बर को अधिकतम चार चरणों में ही प्रतिनियुक्त किए जाएंगे।


गौरतलब है कि पूर्व में आयोग ने एक कर्मी को तीन चरणों में ही तैनात करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिलों से कर्मियों की कमी के कारण मात्र तीन चरणों में ही प्रतिनियुक्ति किए जाने में कठिनाई की जानकारी आयोग को दी गयी। इसके बाद आयोग ने अपने पूर्व के आदेश को संशोधित करते हुए अधिकतम चार चरणों में कर्मियों की तैनाती का निर्देश दिया है।

आयोग के अनुसार प्रत्येक मतगणना (ईवीएम से) टेबुल पर एक महिला कर्मी को मतगणना सहायक के रुप में तैनात किया जाएगा। वहीं, इवीएम के मतगणना टेबुल पर एक माइक्रो ऑब्जार्बर महिला या पुरुष अवश्य तैनात किया जाए। आयोग के सचिव मुकेश कुमार सिन्हा ने यह आदेश जारी किया और इस संबंध में की गयी कार्रवाई की जानकारी आयोग को देने को भी कहा।

सृजन मामले में सीबीआई और ईडी ने गठित की विशेष टीम

सृजन मामले में सीबीआई बैंक कर्मी और भागलपुर नजारत से जुड़े कर्मियों को जेल भेज कर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट सौप दिया था उससे ये लगने लगा था कि बिहार के सबसे बड़े घोटाले के रहस्य पर से पर्दा नहीं उठेगा ,लेकिन जिस तरीके से एक बार फिर केन्द्रीय ऐंजसी संक्रिय हुई है उससे ये लगने लगा है कि सृजन मामले बड़ी कारवाई होने वाली है क्यों कि जो काम सीबीआई चार वर्ष में नहीं कर पायी है वो काम सीबीआई एक माह के अंदर कर दिया है ।


सीबीआई इस माह सृजन से जुड़े 30 लोगों को गिरफ्तारी किया है वही गुरुवार को आरोपी सीमा कुमारी पटना सीबीआई कोर्ट में सरेंडर की है वही मनोरमा देवी के बेटे और उसकी पत्नी कि गिरफ्तारी के लिए राँ जैसी केन्द्रीय ऐंजसी का भी सहयोग सीबीआई ले रही है कहां जा रहा है कि दोनों नेपाल के रास्ते आस्ट्रेलिया भाग गया है वही खबर ये भी आ रही है कि सीबीआई ने बिहार के तीन एडीजी और एक एसपी रैंक के अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है जिसमें एक के खाते में सृजन के खाते से सीधा पैसा गया है दूसरे एडीजी स्तर के अधिकारी पर आरोप है कि वो सरकार के अनुमति के बगैर थाईलैंड घूमने गया था सरकार ने इसको लेकर उक्त एडीजी से स्पष्टीकरण भी पुंछा है तीसरे पर साक्ष्य को दबाने का आरोप है और चौथे पर पी0के0घोष के कम्पनी में निवेश का आरोप है वही कई आईएस अधिकारी को भी फिर से नोटिस भेजने कि तैयारी चल रही है जिनके हस्ताक्षर युक्त चेक के माध्यम से सरकार के खाते से पैसे सृजन के खाते में ट्रांसफर
हुआ है ।वही सीबीआई की टीम पटना स्थित एक हीरा कारोबारी से फिर पुछताछ शुरु किया है जो बिहार के कई नेता और पदाधिकारी की पत्नी को हीरे की अंगूठी और हीरे की हार डिलेभरी किया था जिसका भुगतान सृजन के द्वारा किया गया था।
वही ईडी सृजन मामले का मास्टमाइड प्रणव कुमार घोष को गिरफ्तार किया है जिससे दिल्ली में सीबीआई के अधिकारी भी पुछताछ किया था इस पुछताछ के दौरान घोष ने सरकार का जो पैसा सृजन के खाते में गया था उस पैसे का कहां कहां निवेश हुआ है इसकी पूरी जानकारी ईडी और सीबीआई को दे दिया है।


जानकार बता रहे हैं कि निवेश मामले में कई पॉलिटिशियन और ब्यूरोक्रेट्स सीधे सीधे शामिल है। ईडी सृजन के धन से बेगलुरु ,रायपुर , गाजियाबाद, पुणे, पटना और भागलपुर,में फ्लैट और अन्य अचल संपत्तियों की खरीद हुई है। ईडी ने सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है और ऐसे 32 फ्लैट, 18 दुकान, 38 जमीन का प्लॉट और 47 बैंक खाते को जप्त किया है जिसमें 18.45 करोड़ रुपए जमा है उसको जप्त कर लिया है वही भागलपुर ,गाजियाबाद और रायपुर शहर में स्थिति कई और बड़े निवेश की जांच कर रही है ।


वही सीबीआई ने जनवरी 2021 में भागलपुर कोतवाली थाने में सृजन से जुड़े मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर बुधवार को एक केस दर्ज किया है जिसमें महालेखाकार के उस पत्र का भी जिक्र है जिसमें महालेखाकार ने बिहार सरकार के वित्त विभाग को आगाह किया था कि सृजन में गलत तरीके से पैसे का ट्रांजेक्शन हो रहा है। महालेखाकार के इस पत्र पर वित्त विभाग ने कोई कारवाई नहीं किया था ।


जानकार बता रहे हैं कि सीबीआई ने महालेखाकार के उस पत्र का हवाला एफआईआर में करके जांच का दायर बढ़ा दिया है ।

अब बिहार आने वाले यात्रियों को भी पास होना होगा कोरोना टेस्ट

शुक्रवार से पटना एयरपोर्ट, पटना जंक्शन, दानापुर जंक्शन और पाटलिपुत्रा स्टेशन पर केरल और महाराष्ट्र से आने वालों का रैपिड एंटीजन टेस्ट होगा। पॉजिटिव मिले लोगों को आइसोलेशन सेंटर भेज दिया जाएगा। पाटलिपुत्र खेल परिसर में किया जाएगा आइसोलेट ।


केरल और महाराष्ट्र के यात्रियों की जांच के लिए एयरपोर्ट और स्टेशन पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहेगी, ताकि उन्हें लाइन में लगाकर उनकी कोरोना जांच की जा सके। सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह ने बताया कि पटना जंक्शन, दानापुर और पाटलिपुत्रा स्टेशन पर जांच के लिए लैब टेक्नीशियन और एएनएम की टीम तीन पाली में तैनात रहेगी। जिन यात्रियों की रिपोर्ट एंटीजन में पॉजीटिव आएगी, उन्हें पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आइसोलेट करने के लिए भेजा जाएगा।

पुलिस अवर निरीक्षक 2018 बैच के दीक्षांत समारोह में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार

पुलिस अवर निरीक्षक 2018 बैच के दीक्षांत समारोह में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार, स्थान, बिहार पुलिस अकाडमी, राजगीर, दिनांक 26 अगस्त 2021

अफरशाही और भ्रष्टाचार बीजेपी और नीतीश दोनों के गले की बनी फांस जनता दरबार से भी नहीं निकल रहा है हल

बिहार के मुख्यसचिव राज्य में जारी अफसरशाही को लेकर एक माह के दौरान दूसरी बार जिलों में तैनात अधिकारियों को चेतावनी दिया है कि माननीय सांसद और विधायक के सम्मान का ख्याल रखे और ऐसा नहीं हुआ तो अब कारवाई होगी ।इस तरह का एक पत्र मुख्यसचिव 27-07-2021 को भी जारी किये थे।

लेकिन इस पत्र के बावजूद जिला में तैनात अधिकारियों के कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं हुआ है और इसको लेकर सरकार काफी चिंतित है।क्यों कि 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को जो बड़ा नुकसान हुआ उसकी एक बड़ी वजह थाना और प्रखंड स्तर पर व्याप्त अफरशाही और भ्रष्टाचार रहा है ।

मुख्यसचिव को एक माह के अंदर दूसरी बार पत्र जारी करने के पीछे वजह यही है अब सरकार अफरशाही और भ्रष्टाचार को बर्दास्त करने के मूड में नहीं है लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अफरशाही और भ्रष्टाचार हमेशा उपर से नीचे कि और बढ़ता है कभी भी नीचे से उपर कि और नहीं बढ़ता है।इस सच्चाई के बावजूद नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों बीच बीच का राश्ता निकालने में लगा है और इसी कड़ी में नीतीश कुमार जनता से सीधा संवाद पर फिर से काम करना शुरु किये , जनता दरबार शुरु हुआ ,घर से बाहर निकलने लगे ,बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मिलना शुरु किये फिर भी सरकार का इकबाल कायम नहीं हो रहा है ।

1–अफरशाही और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए प्रदेश कार्यालय में शुरु हुआ दरबार
मुख्यसचिव और सीएम के पहल के बावजूद अफरशाही और भ्रष्टाचार को लेकर बहुत कुछ बदल नहीं पा रहा है और सरकार का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है इसको देखते हुए सीएम जहां हर सोमवार को जनता दरबार में शामिल हो रहे हैं वहीं बीजेपी के मंत्री पार्टी दफ्तर में रोजाना सहयोग कार्यक्रम के तहत बैठ रहे हैं और अब तो जदयू के मंत्री भी पार्टी दफ्तर में बैठने लगे हैं ।

बात इन दफ्तरों में शिकायत के चरित्र कि करे तो यहां भी अधिकांश मामले थाने और प्रखंड में व्याप्त अफसरशाही और भ्रष्टाचार को लेकर ही आ रहा है या फिर बहाली में व्याप्त फर्जीवाड़े से जुड़ा है मतलब समस्या एक ही है समाधान कि कोशिश अलग अलग प्लेटफर्म से शुरु कि गयी है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो कोशिश शुरु कि गयी है उसके सहारे प्रशासनिक तंत्र की सबसे निचली इकाई में सुधार कैसे सम्भव है जबकि उस तंत्र को भ्रष्ट और लूटेरा बनने पर पटना में बैठे लोग कम मजबूर नहीं कर रहे हैं ।

बिहार के आठ दस जिलों को छोड़ दे तो अधिकांश जिलों में एसपी और डीएम थाना प्रभारी और बीडीओ ,सीओ से सीधे पैसा लेता है ,थाना प्रभारी पद पर नियुक्त करने के लिए एसपी पैसा लेता बीडीओ और सीओ के लिए मंत्री पैसा लेता है।
ऐसे में जब कोई पदाधिकारी पोस्टिंग में पैसा देगा तो फिर आप उन अधिकारियों से सही काम की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।

रेप के आरोपी डीएसपी को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत ।

पटना हाई कोर्ट ने एक नाबालिग से रेप के आरोपी गया के तत्कालीन डीएसपी कमलाकांत प्रसाद को फिलहाल राहत दे दी है।जस्टिस आशुतोष कुमार की एकल पीठ ने अग्रिम जमानत के लिए दायर अपील पर सुनवाई के बाद केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया है।

साथ ही अपने अंतरिम आदेश में निचली अदालत को निर्देश दिया कि अगर कमलाकांत प्रसाद आत्मसमर्पण करते हैं, तो उन्हें जमानत दे दी जाए।

कमला कांत प्रसाद की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल को एक साजिश के तहत फंसाया गया है।गत 27 मई को गया के महिला थाना में पीड़ित लड़की के भाई ने एफआईआर दर्ज कर आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में दशहरा पर्व के दौरान उसकी नाबालिग बहन के साथ गया मुख्यालय में तैनात तत्कालीन डीएसपी ने रेप किया था।

पुलिस ने भाई के बयान पर रेप के साथ ही पोक्सो तथा एस सी एस टी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया।वर्मा ने कहा कि कथित घटना के समय लड़की नाबालिग नहीं थी।इसलिए पोक्सो के तहत मामला नहीं बनता है।

मेडिकल जांच में भी डॉक्टर ने रेप की पुष्टि नहीं की है।उन्होंने कोर्ट को बताया कि आवेदक कमलाकांत प्रसाद की पत्नी जो अलग रहती है उसी ने यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया है।केस डायरी आने के बाद फिर सुनवाई होगी।

बिहार में लांक डाउन पूरी तरह खत्म सीएम ने की घोषणा

कोविड की स्थिति की समीक्षा की गई। कोरोना संक्रमण की स्थिति में सुधार को देखते हुए सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शापिंग माल, पार्क, उद्यान एवं धार्मिक स्थल सामान्य रूप से खुल सकेगें। जिला प्रशासन की अनुमति से सभी प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन अपेक्षित सावधानियों के साथ आयोजित किए जा सकेगें।

सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज, तकनीकि शिक्षण संस्थान तथा विद्यालय (पहली से बारहवीं कक्षा तक) के साथ साथ कोंचिग संस्थान भी सामान्य रूप से खुलेगें। राज्य के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, विद्यालयों द्वारा परीक्षा आयोजित की जा सकेंगी। 50% क्षमता के साथ सिनेमा हॉल, क्लब, जिम, स्वीमिंग पूल, रेस्टोरेंट एवं खाने की दुकान (आंगतुको के साथ) खुल सकेगें।

परन्तु तीसरे लहर की संभावना के मद्देनजर हम सभी बिहारवासियों को कोविड अनुकूल व्यवहार के साथ सावधानी बरतना जरूरी है।

प्रतिबंधित दवाओं के बिक्री पर शीध्र लगाये रोक – हाईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने राज्य में प्रतिबंधित दवाओं के व्यापार में लिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने शशि रंजन सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्रीप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि बिहार ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 व रूल्स 122 ई का हवाला देते हुए कहा है कि कानून के प्रावधानों के विरुद्ध प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जा रही है।

इस जनहित याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर पूरे राज्य में केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री वर्तमान समय के प्रभारी ड्रग्स कंट्रोलर की मिलीभगत से की जा रही है। इस मामले में सहायक औषधि नियंत्रक, मुजफ्फरपुर, ने कुल 111 फर्मों के नामों को 12 जून, 2021 को अपने पत्र के जरिये अभियोजन चलाने को लेकर भेजा था।

परंतु ड्रग्स कंट्रोलर ने अभियोजन चलाने की स्वीकृति नहीं दी। श्री श्रीवास्तव ने आगे ड्रग्स कंट्रोलर ऑफ इंडिया के विगत 11 फरवरी, 2021, 22 मार्च, 2021 और 26 अप्रैल, 2021 के पत्रों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राज्य के ड्रग्स कंट्रोलर की मिलीभगत से पूरे राज्य में प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री जारी है और इनके संरक्षण में ही इन सब कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। प्रतिबंधित चीजों को दवाओं में मिलाकर दवाओं की बिक्री की जा रही है।

राज्य सरकार का पक्ष राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता एस डी यादव ने रखा। इस मामले पर आगे की सुनवाई आगामी 31 अगस्त को की जाएगी।

पंचायत चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी, पूरे प्रदेश में आर्दश आचार संहिता लागू

राज्य में पंचायतों के छह पदों के लिए चुनाव होगा। इनमें से 4 पदों का चुनाव ईवीएम से और 2 पदों का चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाएगा। जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, ग्राम पंचायत मुखिया और ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे। इसके अलावा सरपंच और पंच के चुनाव बैलेट पेपर से होंगे। पंचायत चुनाव में करीब 6 करोड़ 44 लाख वोटर होंगे और मतदान केन्द्रों की संख्या करीब 1 लाख 14 हजार होगी।

बिहार में पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही जिला निर्वाचन पदाधिकारी(पंचायत), अनुमंडल अधिकारी, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, निर्वाची पदाधिकारी, सहायक निर्वाची पदाधिकारी तथा जिला निर्वाचन पदाधिकारी(पंचायत) द्वारा मनोनीत उप निर्वाचन पदाधिकारी(पंचायत) के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर रोक लग जाएगी। इसके अलावा चुनाव कार्य से जुड़े अन्य क्षेत्रीय पदाधिकारियों, कर्मचारियों के स्थानांतरण पर भी रोक रहेगी।

अधिवक्ता के पत्र से घमासान

पटना हाई कोर्ट के विख्यात अधिवक्ता दिनेश को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित एक खुला पत्र में पटना हाई कोर्ट में अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के अधिवक्ताओं को हाई कोर्ट में जज बनाने की मांग की है। श्री दिनेश ने अपने पत्र में कहा है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में अनुसूचित जनजाति वर्ग से जज बनाने की मांग की है।

इस खुले पत्र के जरिये पटना हाई कोर्ट में अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग से जज बनाने को लेकर अनुशंसा करने की मांग की गई है। पत्र में आगे कहा गया है कि पटना हाई कोर्ट 105 वर्ष पुराना है।
विगत वर्षों में विभिन्न जातियों के लोगों को पटना हाई कोर्ट का जज बनाया गया, किन्तु पटना हाई कोर्ट के वर्ष 1916 में की गई स्थापना से अभी तक सिर्फ एक अनुसूचित जाति वर्ग से जज नियुक्त हुए।

लेकिन, पिछले 105 वर्ष में एक भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के जज नहीं बनाए गए। उन्होंने अपने खुले पत्र के माध्यम से उम्मीद जताया है कि इन वंचित वर्ग के लोगों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।

पटना हाईकोर्ट के राज्य में असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की नियुक्ति के लिए बी पी एस सी द्वारा ली गई प्रारंभिक के परिणाम को संशोधित करने का निर्देश के मद्देनजर बी पी एस सी ने कल होने वाली असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की होने वाली मुख्य परीक्षा स्थगित कर।जस्टिस सी एस सिंह ने सुदीप कुमार दास की याचिका पर सुनवाई करते हुए बी पी एस सी को यह निर्देश दिया था कि प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को संशोधित कर रिजल्ट को प्रकाशित करें।
बी पी एस सी ने 553 पदों पर असिस्टेंट prosecution ऑफिसर की नियुक्ति के लिए 6 फरवरी, 2020 को विज्ञापन निकाल कर आवेदन आमंत्रित किया।याचिकाकर्ताओं ने इसके लिए पिछड़ा और आर्थिक पिछडे वर्ग के उम्मीदवार के रूप में आवेदन किया।
7 फरवरी,2021 को प्रारंभिक परीक्षा बी पी एस सी ने आयोजित किया।27 अप्रैल,2021 को इसका परिणाम प्रकाशित किया गया।
इन उम्मीदवारों ने अपनी श्रेणी मे कट ऑफ मार्क्स से अधिक अंक प्राप्त होने के बाद भी असफल घोषित हुए।बी पी एस सी ने प्रारंभिक परीक्षा में न्यूनतम अंक निर्धारित कर दिया,जब की विज्ञापन में मुख्य परीक्षा में शामिल होने उम्मीदवारों की प्रारंभिक परीक्षा में 1:10 के अनुपात में उम्मीदवार लेना था।
कोर्ट ने विज्ञापन मे दिए गए प्रावधान के अनुसार उम्मीदवारों को सफल घोषित करने के लिए प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम संशोधन करने का निर्देश बी पी एस सी को दिया।
गौरतलब है कि प्रारंभिक परीक्षा में न्यूनतम अंक के आधार पर प्रकाशित परिणाम पर कल से मुख्य परीक्षा लेने का कार्यक्रम था।
कोर्ट ने मामलें को प्रारम्भिक परीक्षा के परिणाम में संशोधित करने के बाद मुख्य परीक्षा का कार्यकम घोषित किया जाएगा।कोर्ट ने इसके साथ ही इस मामलें को निष्पादित कर दिया।

जब पेड़ों और जानवरों की गिनती हो सकती है तो जातियों की क्यों नहीं?

जातिगत जनगणना को लेकर बिहार के 10 राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश और राजद लीडर तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। नीतीश ने कहा कि हमने बिहार की जातियों के संबंध में प्रधानमंत्री को जानकारी दी है, उन्होंने हमारी बातों को ध्यान से सुना। प्रधानमंत्री ने जातिगत जनगणना की मांग को नकारा नहीं है। तेजस्वी बोले कि जब पेड़-पौधों की गिनती हो सकती है तो जातियों की क्यों नहीं, ये राष्ट्रहित में है।

पीएम से मुलाकात के बाद क्या बोले सीएम नीतीश
सीएम नीतीश कुमार ने कहा, ‘पीएम मोदी ने बिहार से आए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों की बातों को सुना है। अब पीएम मोदी को निर्णय लेना है, वह जो भी उचित समझें। जातीय जनगणना पर अभी निर्णय के बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। पीएम ने गंभीरता से सभी को सुना है। इसके लिए उनका आभारी हूं। एक-एक विषय की जानकारी दी गई है। प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों ने जातीय जनगणना के पक्ष में अपनी बातें रखी’। सीएम नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष की ओर से यह प्रस्ताव मिला था कि जातीय जनगणना के मुद्दे पर पीएम से मिलना चाहिए।
क्या बोले तेजस्वी
वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि पेड़-पौधों की गिनती होती है, जानवरों की गिनती होती है तो इंसानों की क्यों नहीं- ‘सरकार के पास स्पष्ट आंकड़ा नहीं है, किस समाज के कितने लोग हैं, इसकी जानकारी नहीं है।

आंकड़ों के आधार पर ही किसी भी काम को किया जाएगा। पहली बार किसी राज्य के सभी पार्टियों ने मिलकर विधानसभा में पारित किया गया जातीय जनगणना कराने के बाद कोई विवाद नहीं होगा। इससे रिजर्वेशन लागू करने में भी मदद मिलेगी। सीएम नीतीश कुमार और पीएम मोदी को भी धन्यवाद देता हूं। उन्होंने पूरी बातें सुनी है। अब हम लोगों को निर्णय का इंतजार है’।
CM नीतीश कुमार रविवार देर शाम ही पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहले से ही दिल्ली में हैं। उनके अलावा इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस, HAM, VIP, AIMIM, माले, CPI और CPM के नेता भी मौजूद थे।

इस प्रतिनिधिमंडल में BJP के तरफ से मंत्री जनक राम को भेजा गया था। बैठक में जदयू से शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, कांग्रेस नेता अजीत शर्मा, CPI (माले) नेता महबूब आलम, AIMIM के अख्तरुल इमान, पूर्व मुख्यमंत्री और हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी, VIP प्रमुख मुकेश सहनी, CPI नेता सूर्यकांत पासवान और CPM नेता अजय कुमार शामिल हुए हैं।

कोरोना काल में बेहतर काम करने वाले कबीर संस्थान को मिला सौगात।

बिहार के पहले शव फ्लूनरल संयत्र जो बिजली, गैस से संचालित होता है,का सफल ट्रायल दरभंगा में सम्पन्न हुआ। अमेरिकी संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोशिएशन और उसकी सहयोगी संस्था बिहार झारखंड एसोशिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (बाजना), मैथिल ऑफ नार्थ अमेरिका (मोना) जयपुर फुट यू एस ए द्वारा प्रदत्त शव फ्लूनरल संयत्र का मुक्तिधाम ,भिगो में अधिष्ठापन हुआ है।

मालूम रहे कि अमेरिकी संस्थानों ने कोरोना शव निस्तारण में कठिनाई देख दरभंगा के कबीर सेवा संस्थान को यह संयत्र जनहित में प्रदत किया। इसके बाद जिलाधिकारी डॉ त्यागराजन एस एम की पहल पर निगम ने मुक्तिधाम, भिगो में इसे स्थापित करने हेतु एन ओ सी दिया तथा सिविल वर्क भी करवाया। प्रसासन ने बिजली कनेक्शन की व्यवस्था की, जबकि इसके संचालन हेतु 27 सिलेंडरों का गैस बैंक, संयत्र का हरियाणा से लाने का व्यय, इसका अधिष्ठापन का खर्च कबीर सेवा संस्थान उठा रहा है।

50 से 60 लाख रु की संयुक्त लागत से अधिष्ठापन होने वाला यह शव फ्लूनरल संयत्र उत्तर बिहार का अकेला शवदाह संयत्र है जो बिजली से संचालित होगा तथा इसका हिट गैस से होगा। एक शव संस्कार में अधिकतम 45 मिनट लगेगा और पर्यावरण की भी रक्षा होगी। इस पर प्रति शव डेढ़ हजार रु का गैस पर खर्च का अनुमान है।

इंडियन ऑयल कारपोरेशन ने भी कंपनी की ओर से एक सौ रु प्रति सिलेंडर छूट दिया है।

अब ट्रायल के बाद यह उदघाटन के लिए तैयार है। हरियाणा से आये संयत्र निर्माता एम डी इंटरप्राइजेज के तकनीकी विशेषज्ञ ने तीसरे राउंड में एक सप्ताह रह कर इसका अधिष्ठापन किया और कर्मी को प्रशिक्षित भी किया। ट्रायल के समय नगर निगम के अभियंता, कर्मी सहित कबीर सेवा संस्थान और मुक्तिधाम समिति के लोगों सहित कई लोग मौजूद थे।

इस संयत्र के अधिष्ठापन से जहां शव संस्कार में समय और पैसे की बचत होगी, जबकि सबसे अहम पर्यावरण की भी रक्षा होगी।

अब जिलाधिकारी, नगर आयुक्त विधिवत इसके निरीक्षण के उपरांत इसके उदघाटन की तिथि तय करेंगे।

इसके अधिष्ठापन में लगातार नदी का बढ़ता पानी और भीषण बारिश के कारण काफी कठिनाई हुई। पूर्ण कार्य में एक कार्य चिमनी का अधिष्ठापन रह गया है, जो नदी का पानी घटने पर क्रेन जाने पर ही संभव है। हालांकि अभी इसके बिना भी शव संस्कार का कार्य हो सकेगा, जिसका धुआं चिमनी के बिना 100 फिट ऊंची की जगह 20 फिट से ही फिलहाल निकलेगा।
संयत्र अधिष्ठापन होते ही नगर आयुक्त मनेश कुमार मीणा ने संयत्र की देखरेख हेतु कर्मचारियों को जिम्मेदारी हेतु आदेश दिया है, वहीं वरीय पुलिस अधीक्षक बाबूराम ने इसकी सुरक्षा हेतु संबंधित थाना, पुलिस को आदेश दिया है। इसके अलावा मुक्तिधाम में सी सी टी वी से भी पुलिस निगरानी रखेगी। इसके अधिष्ठापन का कार्य भी चल रहा है।

बिहार में एक मंदिर ऐसा जहाँ भाई बहन की पूजा होती है ,मुगल सिपाही से बहन की रक्षा करते जान गवा दिया

भारतीय समाज में रक्षाबंधन इतना महत्‍वपूर्ण त्‍योहार है कि इसे हिंदुओं के अलावा कई दूसरे मतों को मानने वाले परिवार भी मनाते हैं। इस पर्व को लेकर तमाम लोक कथाएं हैं किंवदंतियां हैं। यह पर्व भाई और बहन के प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। ऐसे मौके पर आपको बिहार के एक मंदिर की कहानी जानकर हैरानी हो सकती है, जहां भाई और बहन की बकायदा पूजा होती है। यह मंदिर है सिवान जिले के दारौंदा प्रखंड के भीखाबांध गांव में। यहां विशाल मेला लगता रहा है।

भीखाबांध स्थित भैया-बहिनी मंदिर भाई- बहन के अटूट प्रेम एवं विश्वास का प्रतीक है। यह मंदिर प्रखंड मुख्यालय से 12 किलोमीटर उत्तर एवं महाराजगंज अनुमंडल से चार किलोमीटर पूरब सिवान -पैगंबरपुर पथ के किनारे स्थित है।

इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि मुगल शासक काल में एक भाई अपनी बहन को राखी के मौके पर दो दिन पहले ही डोली में बिठाकर भभुआ (कैमूर) से अपने गांव ला रहा था। भीखाबांध गांव के समीप मुगल सिपाहियों ने डोली में बैठी दुल्‍हन को देखा तो उस की सुंदरता देखकर उनके मन में गलत भावना भर गई। सिपाहियों ने डोली को रोक कर बहन के साथ गलत हरकत करने का प्रयास करने लगे। इस पर भाई अपनी बहन की रक्षा के लिए सिपाहियों से उलझ गया। कहा जाता है कि बहन अपने आप को असहाय महसूस करते हुए भगवान को याद की। उसी समय धरती फटी और भाई-बहन दोनों उसी में समा गए। डोली उठा रहे कुम्हारों ने वहां स्थित कुएं में कूद कर जान दे दी।

कहा जाता है कि इस घटना के दिनों बाद यहां एक ही स्थल पर दो वट वृक्ष निकले, जो कई बीघा जमीन पर फैल गए। ये वृक्ष ऐसे दिखाई देते हैं कि मानो लगता है कि एक-दूसरे की सुरक्षा कर रहे हों। यहां पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती गईं। इसके बाद यहां एक मंदिर का निर्माण हुआ। इसमें भाई-बहन के पेड़ की पूजा होती है। भाई-बहन सोनार जाति के होने के चलते सबसे पहले इन्हीं की जाति के लोगों द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है।

हलाकि कोविड संक्रमण की वजह से यह मंदिर बंद है। बिहार में मंदिरों को खोलने की इजाजत अभी सरकार ने नहीं दी है। यहां कम श्रद्धालुओं की पहुंचने की उम्मीद है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां अतिक्रमण के चलते वट वृक्ष कुछ कट्ठा में सिमट कर रह गया है। इस मंदिर की जीर्णोद्धार के लिए प्रशासनिक स्तर पर आज तक कुछ भी प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मंदिर एवं वटवृक्ष की ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की मांग की है।

कोरोना से मौत मामले में यूरोपीय देशों से भी आगे निकला बिहार सीआरएस रिपोर्ट में हुआ खुलासा

बिहार में कोरोना से कितनी मौते हुई है इसको लेकर शुरु से ही विवाद रहा है स्वास्थय विभाग और पीआईबी बिहार के साइट पर आज भी कोरोना से मौत की बात करे तो 9649 लोगों का नाम दर्ज है वही राज्य सरकार के आकड़ों की बात करे तो 2020 और 2021के बीच मतलब पहली और दूसरी लहर की बात करे तो बिहार में कोरोना से 5,163 लोगों की मौत हुई है जबकि दूसरी लहर में बिहार का ऐसा कोई भी गांव नहीं था जहां से कोरोना फैलने और कोरोना से मौत की खबर नहीं आयी हो लेकिन नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) ने बिहार सरकार के दावे की कलई खोल कर रख दिया है ।

सीआरएस के रिपोर्ट की माने तो बिहार में औसतन मौत का जो आकड़ा रहा है उससे (मार्च 2020 से मई 2021) के बीच 2,51,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। यह संख्या इस अवधि के दौरान राज्य में कोरोना वायरस की वजह से हुई आधिकारिक मौतों से 48.6 गुना है।

हलाकि इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर मौत का आकंड़ा 35 प्रतिशत अधिक रहा है महामारी से पहले की अवधि (जनवरी 2015 से फरवरी 2020) के सीआरएस डेटा को एक ऑल कॉज मोरटैलिटी बेसलाइन बनाने के लिए औसत निकाला गया है और उसकी तुलना मार्च 2020 से मई 2021के बीच में दर्ज मौतों से की गई तो 2,51,000 ‘अतिरिक्त मौतों’ की संख्या सामने आई है।

मई के अंत तक राज्य के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 5,163 थी। इसका मतलब है कि सीआरएस आंकड़ों से पता चलता है कि आधिकारिक कोविड-19 की मौत का आंकड़ा 48.6 गुना कम था। कोविड-19 प्रकोप के दौरान राज्य सरकारों ने ग्राउंड डेटा को इकट्ठा करने के लिए इस सिस्टम को शुरू किया था। यह रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय के तहत सभी जन्म और मृत्यु को रिकॉर्ड करने की राष्ट्रीय प्रणाली है।

सीआरएस के आकड़े सामने आने के बाद मीडिया के सवालों से बचते हुए बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने बस इतना ही कहा कि वे सीआरएस डेटा पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन कोविड-19 से संबंधित सभी मौतें डीएम और सिविल सर्जन की तरफ से सत्यापित हैं।

जीविका दीदी ने कर दी कमाल भाई के हाथों में दीदी की बनी राखी से सजेंगी हाथ

कहते हैं रेशम के धागे की राखी का बड़ा महत्व होता है । पूर्णिया की दर्जनों जीविका दीदीयां इन दिनों मलबरी की खेती कर अपने हाथों से बेकार पड़े खराब कोकून से रेशम का धागा निकालकर आकर्षक राखियां बना रही है । इससे जहां उन्हें रोजगार मिल रहा है वहीं ये दीदीयां लोगों को रेशम की शुद्ध राखियां भी मुहैया करा रही है । पिछले साल 23 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी मन की बात में धमदाहा के मलवरी की खेती कर आर्थिक उपार्जन करने वाले आदर्श जीविका समूह की सराहना की थी ।

पूर्णिया के धमदाहा अनुमंडल के अमारी कुकरन में आदर्श जीविका समूह समेत चार अन्य समूह की जीविका दीदीयां इन दिनों रेशम की राखी बना रही है । जीविका दीदी रीना कुमारी ने कहा कि पहले वे लोग खराब हो चुके कोकून को बेकार समझकर फेंक देते थे । लेकिन पिछले साल पटना के सरस मेला में उनलोगों ने देखा कि कुछ लोग किस तरह बेकार पड़े चीजों का इस्तेमाल कर अच्छा हैन्डीक्राफ्ट बना रहे हैं, तो उनलोगों के मन में भी कुछ नया करने की ललक जगी । इसके लिये उनलोगों ने पहले प्रशिक्षण लिया फिर पिछले साल कोरोना के समय अपने परिवार के साथ मिलकर 21 सौ राखियां बनायीं। इस तरह उन्हें कोरोना की मुश्किल घड़ी में तकरीबन 40 हजार रुपये की आमदनी हुई।

इस बार धमदाहा के पांच समूह की 40 जीविका दीदीयों ने बैठक कर राखी बनाने का काम शुरु किया । इस साल उनलोगों का लक्ष्य करीब पचास हजार राखियां बनाने का है और एक राखी की कीमत 15 रु. से 50 रु. तक तय किया गया है। उन्हें भरोसा है कि इससे उन्हें अच्छी आमदनी भी होगी और कुछ सकारात्मक पहल भी।

इस संदर्भ में डीएम राहुल कुमार ने बताया कि पूर्णिया की जीविका दीदीयां अच्छा काम कर रही हैं। धमदाहा की आदर्श मलवरी उत्पादक जीविका समूह की जीविका दीदीयों की प्रशंसा पिछले साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी की थी । उन्होंने कहा कि धमदाहा की कई जीविका दीदीयां जहां रेशम की राखी के अलावे साड़ी समेत कई चीजें बना रही हैं वहीं कुछ जीविका दीदीयां मक्का उत्पादन और मक्का से सामग्री बनाकर आर्थिक उपार्जन कर रही है ।

पूर्णिया जीविका समूह की दीदियां लगातार अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए न सिर्फ प्रयास करती हैं बल्कि लगातार प्रशिक्षण ले कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान भी बना रही है ।

सरकारी मानदेय पाने वाले नहीं लड़ सकते है पंचायत चुनाव ,नेपाल की बेटी को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

बिहार में पंचायत चुनाव की उलटी गिनती शुरु हो गयी है 24 अगस्त को चुनाव की अधिसूचना जारी होने वाली है। इससे पहले आयोग ने पंचायत चुनाव लड़ने वालो को लेकर एक अर्हता (योग्यता)जारी किया है जिसमें सरकार ने मानदेय पर काम करने वाले कर्मी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

साथ ही वैसी लड़किया जिसकी शादी भारत में हुई है और वो नेपाल की रहने वाली है ऐसी लड़कियों को नेपााल के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आरंक्षण का लाभ नहीं मिलेगा ।राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पत्र के अनुसार विशेष शिक्षा परियोजना, साक्षरता अभियान, शिक्षा केंद्रों पर मानदेय पर कार्यरत अनुदेशक, पंचायत के अधिन मानदेय व अनुबंध पर कार्यरत शिक्षा मित्र, न्याय मित्र, विकास मित्र, टोला सेवक व दलपति केंद्र व राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकार से वित्तीय सहायता पाने वाले शैक्षणिक-गैर शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी, रसोइया व मानदेय पर कार्यरत कर्मी, गृहरक्षक एवं सरकारी वकील भी पंचायत चुनाव नहीं लड सकेंगे और ना ही किसी भी पद के लिए किसी व्यक्ति का प्रस्तावक ही बन सकते हैं।इतना ही नहीं आंगनबाडी केंद्र पर तैनात सेविका व सहायिका भी किसी भी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेगी और ना ही वे चुनाव मैदान में उतरने वाले अभ्यर्थी की प्रस्तावक ही बन सकेगी।

कौन कौन प्रस्तावक बन सकता है —-

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में किसी पद के प्रस्तावक होने के लिए संबंधित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र के वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी है। वहीं, 21 वर्ष से कम आयु वर्ग वाले किसी का प्रस्तावक नहीं बन सकेंगे। प्रस्तावक बनने के लिए भारत का नागरीक होना जरूरी है। केंद्र व राज्य सरकार सहित किसी स्थानीय प्राधिकार की सेवा में रहने वाले व्यक्ति भी प्रस्तावक नहीं बनेंगे। सक्ष्म न्यायालय द्वारा विकृतचित घोषित व्यक्ति एवं कोर्ट से राजनीतिक अपराध से अलग किसी भी अपराध के लिए छह महिने के कारावास की सजा पाने वाले व्यक्ति किसी का प्रस्तावक नहीं होंगे। वहीं, एक सक्षम व्यक्ति एक ही अभ्यर्थी का प्रस्तावक बन सकेंगे।

चुनाव में ये उतर सकते हैं —-
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तय की गई अर्हता के मुताबिक सेवा निवृत सरकारी कर्मी, जनवितरण प्रणाली के लाइसेंसी विक्रेता, कमीशन के आधार पर काम करने वाले अभिकर्ता एवं अकार्यरत गृहरक्षक पंचायत चुनाव के मैदान उतर सकते हैं।

वही मधुवनी के डीएम के पत्र के आलोक में राज्यनिर्वाचन आयोग ने कहा है कि नेपाल की जो भी लड़किया भारत में बिहायी गयी है उसको आरक्षंण का लाभ नहीं मिलेगा

कोविड टीकाकरण में पटना राप्ट्रीय स्तर पर 10 स्थान बरकरार

कोविड-19 टीकाकरण में पटना जिला ने न केवल बिहार प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। जिसका चरणबद्ध विवरण निम्नवत है-

1/ पूरे देश के 754 जिलों में पटना जिला का सर्वाधिक टीकाकरण में दसवां स्थान बरकरार है।
1/ मुंबई 8628757
2/बृहद मंगलूर 8326267
3/पुणे7111246
4/कोलकाता5288244
5/चेन्नई 4501791
6/अहमदाबाद4418468
7/थाणे 4176939
8/24 परगना3619551
9/हैदराबाद3538561
10/पटना3509731

2/ बिहार राज्य में टीकाकरण की सर्वाधिक प्रतिशतता (पहला एवं दूसरा दोनों डोज में) पटना नंबर वन जिला

पहला डोज
पटना 59.7%, भागलपुर 43.7%, पूर्णियां 40.9% शिवहर 40.2% नालंदा 39.5%

दूसरा डोज में भी सर्वाधिक प्रतिशतता
पटना 21%
शिवहर9.1%
नालंदा 8.8%
पूर्णिया 8.5%
भागलपुर 8.5%

टीकाकरण के पहला एवं दूसरा डोज की प्रतिशतता में पटना जिला की प्रतिशतता राज्य की प्रतिशतता से भी आगे।
पहला डोज
राज्य का 37.2%
पटना जिला का 59.7%
दूसरा डोज
राज्य का 7.3%
पटना जिला का 21%

3/ * 45 प्लस के टीकाकरण के पहले एवं दूसरे डोज में पटना जिला का राज्य स्तर पर पहला स्थान*

पहला डोज
पटना 66%
शिवहर 58.1%
नालंदा 53.6%
भागलपुर 17.3%
पूर्णिया 17.3%

45 प्लस के टीकाकरण के दूसरे डोज मे भी पटना जिला का पहला स्थान
पटना 32.2%
शिवहर 20.5%
नालंदा 17.8%
भागलपुर 17.3%
पूर्णिया17.3%

45 प्लस के टीकाकरण के पहला एवं दूसरा डोज मैं पटना जिला की प्रतिशतता राज्य से भी अधिक।
पहला डोज
राज्य का 46%
पटना जिला का 66%
45 प्लस का दूसरा डोज में
राज्य का 14%
पटना जिला का 32.2%

4/ 18 से 45 आयु वर्ग के व्यक्तियों के टीकाकरण के पहला एवं दूसरा दोनों ही डोज में राज्य स्तर पर पटना जिला का पहला स्थान

पहला डोज
पटना 51.2%
भागलपुर 36.73
सारण 32.2
पूर्णियां 31.06
पूर्वी चंपारण 30.88
18 से 45 आयु वर्ग के दूसरे डोज में पटना जिला का पहला स्थान
पटना 11.10%
पूर्वी चंपारण2.87%
पूर्णिया 2.61%
सारण2.57%
भागलपुर2.51%
18 से 45 आयु वर्ग के टीकाकरण के पहले एवं दूसरे डोज में पटना जिला की प्रतिशतता राज्य की प्रतिशतता से भी अधिक
पहला डोज
राज्य का 30.22%
पटना जिला का51.20%
द्वितीय डोज में
राज्य का 2.11%
पटना जिला का11.10%

5/ पटना शहर में शत प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त किया गया है। इसके तहत कूलर 1440613 व्यक्तियों का टीकाकरण किया गया जो लक्ष्य का 100.23% है।

जिला की महत्वपूर्ण एवं उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए जिला अधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह ने कर्मियों तथा जिला वासियों को बधाई दी है तथा दोगुने उत्साह से कार्य कर जिला को टीकाकरण से शत प्रतिशत आच्छादित करने को कहा है।

उक्त तमाम उपलब्धियों को प्राप्त करने हेतु जिलाधिकारी द्वारा लोगों की जरूरत एवं सुविधा को ध्यान में रखकर दूरदर्शी पहल करते हुए विशेष टीकाकरण केंद्र, 24×7 केंद्र की स्थापना, टीका एक्सप्रेस आदि शुरू किए गए तथा जिला वासियों एवं कर्मियों के समन्वित प्रयास से पटना जिला ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अद्वितीय एवं अविस्मरणीय कीर्तिमान स्थापित किया है।

6/ विशेष टीकाकरण केंद्र
केंद्र की संख्या 17
टीकाकृत व्यक्ति 1004049
पहला डोज 729955
दूसरा डोज274094

7/24×7 केंद्र की स्थापना
ऐसे तीन केंद्र की स्थापना 6 जून को किया गया जिसका पटना वासी ने भरपूर फायदा उठाया तथा जिला प्रशासन की सुविधा एवं व्यवस्था की सराहना की।
24×7 के रूप में कार्यरत तीनों केंद्रों पर कुल 446700 व्यक्तियों को टीकाकृत किया गया जिसने फर्स्ट डोज 295 110 तथा सेकंड डोज 151590 है।
पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कंपलेक्स 187233
पाटलिपुत्रा अशोक 154324
पॉलिटेक्निक कॉलेज पाटलिपुत्रा 105143 है।

बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत प्रदान करों।

किसानों को बाढ़ में नष्ट फसलों एवं घरों के धराषाई होनें के एवज में आर्थिक मुआवज दो। बाढ़ से निबटने की दीर्घकालीन योजना पर अमल करों। बिहार के बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुँचाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। बेगुसराय, भागलपुर, कटिहार दरभंगा, पुर्वी, पष्चिमी चम्पारण जिलों से जो वीडियों एवं अन्य श्रोतो से सुचनाएँ प्राप्त हो रही हैं, वे मानवीय संवेदनाओं को विचलित करने वाली है।

बिहार सरकार की ओर से बाढ़ से निबटने एवं बाढ़ प्रभावित लोगों को अवासीयी सुविधाओं के साथ – साथ भोजन, शुद्ध पेयजल बीमारों को दबा, बच्चों को दूध उपलब्ध कराने के जो बड़े – बडे़ दावे किये जाते है, वह जमीनी स्तर पर कहीं दिखाई नहीं पड़ता है। बाढ़ पीड़ितों को भाग्य भरोसे छोड़ दिया गया है। खुद भाजपा के पटना से सांसद रामकृपाल यादव राहत सामग्रियों के बंदर बांट की बात कह रहे है।

एक तो राहत बाढ़ पीड़ितों तक पहुँच नही रहा है और जो पहुँच रहा है, वह भी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ जाय तो इस तरह का प्रषासन किस काम का।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मॉ0) की बिहार राज्य कमिटी बिहार के तमाम पार्टी इकाइयों जिला कमिटीयों से बाढ़ पीड़ितों के हक में आवज उठाने एवं अपने स्तर से सम्भव सहायता प्रदान करने का आह्ावान करती है। पार्टी उन तमाम जिला इकाईयों का अभिन्दन करती है जिन्होनें बाढ़ पीड़ितों की दुर्दसा को सरकार के सामने लाया है और अपने स्तर से राहत प्रदान कर रहे है।

ऑनलाइन पोर्टल से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को ससमय भुगतान करने में बिहार को मिल रही सफलता

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को यहां बताया कि अब बिहार भी आशा एवं आशा फैसिलिटेटर की प्रोत्साहन राशि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रदान करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। पहले आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को अपने भुगतान के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिससे कई बार उन्हें कुछ महीने तक अपने भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता था। आशा कार्यकर्ताओं की इस समस्या को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने दिसम्बर, 2020 से आश्विन पोर्टल की शुरुआत की। इस पोर्टल के माध्यम से अब आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को न सिर्फ ससमय भुगतान हो रहा है, बल्कि वह अपने द्वारा की जा रही गतिविधियों का ब्यौरा भी पोर्टल पर फीड भी कर रही है।

श्री पांडेय ने बताया कि पहले आशा पिछले माह की 26 तारीख से वर्तमान माह की 25 तारीख तक किए गए कार्यों की प्रोत्साहन राशि का ब्यौरा भरती हैं। इसके बाद इसे आशा फैसिलिटेटर हस्ताक्षरित करती है। फिर सम्पूर्ण ब्यौरा माह के अंतिम कार्य दिवस यानी 30 या 31 तारीख तक आशा द्वारा आश्विन पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। आशा दो तरह के कार्य करती हैं। पहला समुदाय आधारित एवं दूसरा संस्थान आधारित. दोनों स्तर पर अधिकतम 63 तरह की गतिविधियां होती हैं, जिसे एक आशा कर सकती है। यदि आशा द्वारा अपलोड की गई गतिविधियां सामुदायिक आधारित होती हैं, तो इसे संबंधित एएनएम 5 तारीख तक सत्यापित करती हैं। यदि गतिविधियां ब्लॉक या अनुमंडलीय फैसिलिटी स्तर की होती हैं तो इसे प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक( बीसीएम) एवं जिला स्तरीय फैसिलिटी स्तर की गतिविधियां होने पर जिला सामुदायिक उत्प्रेरक(डीसीएम) सत्यापित करते हैं। इसके बाद संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी आश्विन पोर्टल पर भरी गयी प्रोत्साहन राशि को सत्यापित कर राज्य स्तर पर भेज देते हैं। इस तरह प्रत्येक महीने के 12 तारीख तक पिछले माह में आशा एवं आशा फैसिलिटेटर द्वारा किए गए कार्यों का भुगतान सुनिश्चित हो जाता है।

श्री पांडेय ने बताया कि दिसम्बर, 2020 से अभी तक अश्विन पोर्टल से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को विगत माह तक 150 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि की भुगतान की गई है, जो कि कुल देय प्रोत्साहन राशि का लगभग 94 फीसदी हैं। बिहार में फिलहाल 87699 आशा एवं 4261 आशा फैसिलिटेटर हैं। दिसम्बर, 2020 से पहले आशा को भुगतान मैन्युली किया जाता था, लेकिन आशा एवं आशा फैसिलिटेटर की इतनी बड़ी संख्या होने के कारण उनकी गतिविधियों का मैन्युली सत्यापन करने में कठिनाई होती थी, जिसके कारण उनका ससमय भुगतान नहीं हो पाता था, लेकिन आश्विन पोर्टल की शुरुआत होने से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर की सभी गतिविधियों का पोर्टल के माध्यम से कम समय में सत्यापन हो रहा है। इससे भुगतान में आसानी हो रही है। आशा कार्यकर्ता उत्साहित हो अपने कार्य को और बेहतर तरीके से कर रही हैं।

एक गांव ऐसा जहां हिन्दू भी मुहर्रम मनाते हैं

बिहार के बांका जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां एक भी घर मुस्लिम नहीं है फिर भी पूरा गांव बुराई पर अच्छाई की जीत , शहादत और कुर्बानी की प्रतीक #मुहर्रम पर्व पूरे धूमधाम से मनाता है हम बात कर रहे हैं बांका जिले के अमरपुर प्रखंड स्थित तारडीह गांव का जहां आज सुबह से ही पूरे गांव का नराजा बदला बदला सा दिख रहा है । पूरे गाँव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहने के बाबजूद वहाँ रह रहे हिन्दू परिवार पिछले कई वर्षों से मुहर्रम धूमधाम से मना रहे हैं l इस पर्व को मानाने की शुरुआत 1990 में अमरपुर विधानसभा से विधायक रहे स्व. माधो मण्डल के पिता ने की थी। तब से उनके बंशज इसे आज तक मनाते आ रहे हैं। माधो मण्डल के पुत्र शंकर मण्डल ने बताया कि उनके दादा जी को कोई संतान नहीं हो रही थी, तब उन्होंने मजार पर जाकर मन्नत मांगी और मन्नत पूरा होने पर इस पर्व की शुरुआत की गयी l इसमें ग्रामीणों का काफ़ी सहयोग मिलता है l इस पर्व में स्थानीय लोग मुस्लिम रीतिरिवाज के लिये गाँव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहने के कारण दूसरे गाँव से मौलवी को बुलाकर परम्परा का निर्वहन करते हैं l

सुबह से ही तारडीह वाले गाँव से पांच किलोमीटर दूर मुस्लिम आबादी बाले गाँव में जाकर पहलाम करते हैं एवं आपस में भाईचारा का संदेश देते हैं l हालांकि इस बार कोविड नियमों की वजह से जुलूस का आदेश नहीं मिलने के कारण शांतिपूर्ण तरीके से गाँव में ही पहलाम करेंगे lहलाकि बिहार के कई इलाकों में मुस्लिम इसी तरीके से गांव के गांव छठ पर्व करते हैं ।