दूसरी नीलामीकृत संपत्ति बांका जिले का पिंडारा कॉपर‑लेड‑जिंक ब्लॉक है, जिसमें तांबा, सीसा और जस्ता के बड़े संग्रहीत संसाधन मौजूद हैं। प्रारम्भिक आंकड़ों के अनुसार, इस ब्लॉक में 2.5 मिलियन टन तांबा, 1.8 मिलियन टन सीसा और 3 मिलियन टन जस्ता की संभावनाएँ हैं, जो राज्य के औद्योगिक विकास के लिए रणनीतिक महत्व रखती हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि यह ब्लॉक राष्ट्रीय स्तर पर धातु निर्यात में योगदान दे सकता है, बशर्ते उचित निवेश और तकनीकी सहयोग हो।
ई‑नीलामी के लिए बिहार सरकार ने “इंडिया एलेक्स” पोर्टल के साथ सहयोग किया है, जिससे बोली प्रक्रिया पारदर्शी और समय‑सापेक्ष बनी रहेगी। बोलीदाता को ब्लॉक की भूवैज्ञानिक रिपोर्ट, पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन और सामाजिक प्रतिबंधों की पूरी जानकारी प्रदान की जाएगी। विभाग ने कहा कि सभी दस्तावेज़ ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे छोटे एवं मध्यम उद्यमों को भी समान अवसर मिलेगा।
निवेशकों के बीच शुरुआती प्रतिक्रिया उत्साहजनक है; कई राष्ट्रीय खनन कंपनियों ने पहले ही अपने बिडिंग रणनीति तैयार कर ली हैं। विदेशियों ने भी इस पहल को सकारात्मक माना है, विशेषकर एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र के निवेशकों ने भारतीय खनिज नीति में हुए सुधारों को अवसर के रूप में देख रहे हैं। इस संदर्भ में, भारत सरकार के खनिज नीति‑2023 के तहत निजी एवं विदेशी निवेशकों को अधिक लचीलापन प्रदान करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जो इस नीलामी को और आकर्षक बनाते हैं।
खनन क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों ने कहा कि ई‑नीलामी प्रक्रिया में तकनीकी मानकों और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ब्लॉक के विकास के दौरान स्थानीय समुदायों के पुनर्वास और सामाजिक उत्थान के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है। इस दिशा में, सरकार ने सामाजिक विकास के लिए एक विशेष फंड स्थापित करने की घोषणा की है, जिसमें नीलामी से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा आवंटित किया जाएगा।
राज्य के आर्थिक सलाहकार ने बताया कि यदि इस नीलामी से अपेक्षित राजस्व प्राप्त हो जाता है, तो बिहार की वार्षिक खनिज आय में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। इस आय को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे के विकास में पुनः निवेश किया जाएगा, जिससे राज्य के जीडीपी में दीर्घकालिक सुधार आएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से राजस्व संग्रहण की पारदर्शिता बढ़ेगी और कर चोरी को रोका जा सकेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों ने इस कदम को बिहार सरकार की आर्थिक विविधीकरण की रणनीति के रूप में देखा है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में धातु‑आधारित उद्योगों का विकास राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है, और इस नीलामी से बिहार इस दिशा में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है। विपक्षी दल ने इस पहल की सराहना की, पर साथ ही कहा कि पर्यावरणीय मानकों की कड़ाई से निगरानी आवश्यक है।
Updated: August 26, 2026
Bihar prepares to auction magnetite and copper-lead-zinc blocks in Jamui and Banka via electronic bidding this September, aiming to attract national and international investment. The state anticipates a significant revenue boost and industrial growth, with proceeds earmarked for social development and infrastructure upgrades.
Bihar’s e‑auction could turn its mineral‑rich hinterland into a cash‑flow engine, funding schools and hospitals while attracting the same foreign capital that fuels China’s steel surge.
If the promised transparency and community‑rehabilitation funds hold up, the state may rewrite
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