Press "Enter" to skip to content

Posts tagged as “biharnews”

बिहार बना नशीली पदार्थो का हब

बिहार इन दिनों नशीली पदार्थ के तस्करी का हब बनता जा रहा है रोजाना शराब के बरामदगी की खबर आती ही रहती है और अब ड्रग्स के तस्करी की भी बात सामने आने लगी है दो दिन पहले ही लखीसराय में गंजा का एक बड़ा खेप पकड़या था और आज गया पुलिस ने 2 किलो 200 ग्राम ब्राउन शुगर पकड़ा है जिसकी किमत करोड़ो में है ।

गया एसएसपी की माने तो कई दिनों से रेकी करने के बाद 2 किलो 200 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ तीन सप्लायर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपी गया जिले के टनकुप्पा थाना क्षेत्र अंतर्गत बरसौता गांव निवासी है। गिरफ्तार आरोपितों में सूरज कुमार सुमन कुमार उर्फ लोकेश आलोक कुमार शामिल है।

इन तीनों के पास से 2 किलो 200 ग्राम ब्राउन शुगर ड्रग्स दो मोटरसाइकिल और तीन मोबाइल बरामद किया गया है।एसएसपी ने बताया कि पकड़े गए तीनों ब्राउन शुगर सप्लाई करने का काम करता है। एसएसपी ने बताया कि बरामद ब्राउन शुगर की बाजार में कीमत करोड़ के आसपास आंकी गई है।

सएसपी ने बताया कि पकड़े गए तीनों आरोपितों का तार झारखंड के बरही से जुड़े हैं, जो बराबर गया और आसपास के इलाकों में ब्राउन शुगर की आपूर्ति करता है। उन्होंने स्पष्ट किया ब्राउन शुगर की आपूर्ति कराने में कुछ सफेदपोश लोगों के भी नाम सामने आए हैं। पकड़े गए लोगों के द्वारा जिन सफेदपोश नेताओं का नाम बताया गया है।

उनकी गिरफ्तारी कराने के लिए टीम छापेमारी कर रही है। घटनास्थल से एक आरोपित फरार हुआ है। वह झारखंड के बरही थाना क्षेत्र का रहने वाला है।इस मामले में मुफस्सिल थाना में एनडीपीसी एक्ट 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सएसपी ने कहा कि कुछ स्थानीय सफेदपोश नेता भी ब्राउन शुगर की पूर्ति में शामिल हैं। बरामद मोबाइल में अंकित नंबरों की भी जांच कराई जा रही है पकड़े गए आरोपों के मोबाइल में जिन व्यक्तियों का नाम अंकित है या बराबर आपूर्तिकर्ता से बातचीत होती है उनके गिरेबान तक भी पुलिस पहुंचने के लिए साक्ष्य जुटा रही है।

बिहार कांलेज आंफ फिजियोथेरेपी कोर्स की पढ़ाई को लेकर हुई सुनवाई

पटना हाई कोर्ट ने बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी में फिजियोथेरेपी व ऑक्यूपेशनल थेरेपी में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स शुरू करने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता भावना सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता ने उचित समय सीमा में डॉक्टर, शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टाफ तथा टेक्नीशियन और फिजियोथैरेपिस्ट के कॉलेज में खाली पड़े पदों भरे जाने का अनुरोध किया।

उन्होंने बताया कि बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी राज्य में एकमात्र सरकारी अस्पताल है । यहाँ ऑक्यूपेशनल थेरेपी का कोर्स व इलाज समेत पुनर्वास और फिजियोथेरेपी की सुविधाएं मुहैया कराई जाती है।खासतौर से वैसे गरीब लोगों को जो इसका इलाज दूसरे स्थानों पर करवाने में समर्थ नहीं हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अप्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा प्रशिक्षित व्यक्तियों के कामों को अस्पताल में किया जा रहा है। इतना ही नहीं, प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा इस अस्पताल में गार्ड का काम किया जा रहा है।

इसलिए कोर्ट से कॉलेज में समुचित काम काज को लेकर निर्देश देने की भी मांग किया गया है।मामले पर सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जाएगी।

सीएम हैरान 2016 में मैट्रिक पास किये छात्रों को अभी तक नहीं मिला है प्रोत्साहन राशी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम के दौरान उस वक्त हैरान रह गये जब उनकी खुद की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत 2016 से छात्रों को राशी नहीं मिल रही है।

भागलपुर से आई एक बच्‍ची ने बताया कि उसने 2016 में मैट्रिक परीक्षा पास की थी, बावजूद उसे मुख्‍यमंत्री प्रोत्‍साहन योजना की राशि अब तक नहीं मिली है। इसे सुनकर सीएम चौंक गए। इसके बाद भी इस तरह के एक दर्जन से अधिक मामले आए।

क युवक ने 2017 में परीक्षा पास करने पर भी अब तक प्रोत्‍साहन राशि नहीं मिलने की बात कही। सीएम आश्‍चर्यचकित थे कि इतने वर्षों बाद भी योजना की राशि क्‍यों नहीं दी गई फिर वो अधिकारियों से इस संदर्भ में बात किया ।

इसी तरह जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम के दौरान पिछले दिनों सीएम को पता चला कि 2015 से ही आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका को मानदेय नहीं मिल रहा जनता के दरबार कार्यक्रम के दौरान भोजपुर जिला के सहार प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र की सहायिका, समस्तीपुर जिला के विभूतिपुर प्रखंड समेत अन्य कई स्थानों से आयी सेविकाओं ने सीएम के समाने मानदेय नहीं मिलने को लेकर अपनी बात रखी। सेविका की बात सुन कर सीएम इसी तरह हैरान रह गये थे ।

सफाईकर्मियों के हड़ताल मामले में सरकार को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत कल फिर होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में पटना नगर निगम कर्मियों के चल रहे हड़ताल के मामलें पर 14 सितम्बर,2021 को सुनवाई होगी। शिवानी कौशिक व् अन्य की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

एडवोकेट जेनरल ने कोर्ट के समक्ष नगर निगमकर्मियो के चल रहे हड़ताल पर सुनवाई करने का अनुरोध किया।उन्होंने कहा कि अभी करोना का समय चल रहा है।ऐसे।समय में इन निगम कर्मियों के हड़ताल से पूरे पटना की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुआ है।शहर के हर इलाके में गन्दगी फैली हुई हैं।

कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा कि करोना के मुश्किल हालात से निपटने के लिए क्या क्या उपाय किये जा रहे हैं।अभी कोरोना के तीसरी लहर आने की संभावना बनी हुई हैं। इस स्थिति से सतर्क रहने की।सख्त जरूरत है।

कोर्ट में आज संविदा पर कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों की मांगो के सम्बन्ध में।सुनवाई होनी थी,लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों के उपस्थित नही होने के कारण मामलें की सुनवाई कल तक टल गई।पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को इन संविदा पर कार्य करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के मांगो के मामलें में चार सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को इन स्वास्थ्यकर्मी की मांगो के बारे में गठित कमिटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का करने को कहा था।कोरोना काल में राज्य के संविदा पर कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने वेतन, ई पी एफ,हाउस रेंट आदि के लिए हड़ताल पर गए थे।

जब मामला कोर्ट के सामने आया,तो कोर्ट ने इन्हें Covid-19 के मद्देनजर अपनी हड़ताल समाप्त करने का निर्देश दिया।साथ ही राज्य सरकार को भी निर्देश दिया था कि इनके मांगो पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि इन स्वास्थ्यकर्मियों के मांगो विचार करने के लिए सम्बंधित अधिकारियों की कमिटी गठित की गयी है।

पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि अधिकारियों की ने सभी मुद्दों पर विचार कर अपने संस्तुति सरकार को दे दी हैं।
कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को सम्बंधित अधिकारियों की बैठक बुला कर संविदाकर्मियों की मांगो पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

इस मामलें पर अगली सुनवाई कल पुनः की जाएगी।

रामविलास पासवान के बरसी के सहारे चिराग ने नीतीश को दी खुली चुनौती बीजेपी के तमाम बड़े नेता हुआ शामिल

”तमाशबीन हूं मैं ”
सड़क के बीचों बीच एक पत्थर गिरा हुआ था उसी सड़क से समाज के अलग अलग वर्ग से जुड़े लोग जा रहे थे और सड़क के बीचों बीच पड़े पत्थर से चोट खा रहे थे। चोट खाने वालो की अलग अलग प्रतिक्रिया आ रही थी। इसी दौरान गांव का प्रधान मुखिया जी भी कही जाने के लिए घर से निकले उनको भी सड़क के बीचों बीच परा पत्थर से चोट लग गया, चोट लगने के बाद मुखिया जी आराम से उस पत्थर को उठाये और सड़क के किनारे रख दिये इस कहनी के सहारे यह संदेश दिया गया है जनप्रतिनिधि किस तरह के सोच वाले होते हैं ये हमारे शिक्षा उपयोग से जुड़ी कहानी के किताब में लिखा।
आजाद भारत में भी इस तरह का दौड़ कभी रहा है नेहरु के कैबिनेट में श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी थे ।किसी ने राजीव गांधी को कहां कि बाजपेयी सख्त बिमार हैं और इनको बाहर इलाज कराने की जरुरत है। राजीव गांधी ने तुरंत एक डेलिगेट अमेरिका बाजपेयी जी के नेतृत्व में भेजने का फैसला लिया ताकी बाजपेयी जी सरकारी पैसे से अमेरिका में इलाज करा सके ।
लेकिन भारतीय राजनीति का एक दौर ये भी है जहां विपक्ष का मतलब दुश्मन समझा जाता है, वैसे राजनीति में कब कौन दुश्मन दोस्त बन जाये कहना मुश्किल है फिर भी इत तरह कि शैली आज की राजनीति में बढ़ती जा रही है ।
रामविलास पासवान का कल पहली बरसी था नीतीश कुमार उस बरसी में शामिल नहीं हुए हलाकि नीतीश कुमार राजनीति में मतभेद रखने वाले मित्रों के साथ इस तरह का व्यवहार करते रहे हैं फिर भी इस हद तक नहीं
रामविलास पासवान कोई पहला व्यक्ति नहीं है नीतीश इस तरह का व्यवहार पहले भी करते रहे हैं जार्ज ,शरद दिग्विजय सिंह सहित दर्जनों ऐसे नेता थे जिनका नीतीश कुमार के निर्माण में बड़ी भूमिका रही फिर भी मतभेद हुआ तो रिश्ते मनभेद तक पहुंच गया।

ये नीतीश की शैली रही है जिससे मतभेद हुआ उसे मिटाने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं और खास बात यह है कि राजनीतिज्ञ होने के बावजूद भी उनकी मनभेद वाली शैली दिख जाती है।
खैर उनके इसी राजनैतिक जीवन में मनभेद होने के बावजूद भी ना चाहते हुए भी उनके सामने खड़ा है ऐसे कई नाम है सम्राट चौधरी,नीतीश मिश्रा ,श्रेयसी सिंह जो नीतीश के इक्छा के विपरीत मंत्री बने हुए हैं, विधायक बने हुए हैं ,
ऐसे में रामविलास पासवान के परिवार के साथ इस तरह का आचरण राजनीति से जुड़े पंडित देख कर हैरान है क्यों कि कई ऐसे मौके आये हैं जब मनभेद के बावजूद झुके भी हैं और दोस्ती का हाथ बढ़ाया है और इस बार तो कई ऐसे नेता है जिसको देख कर नीतीश नजर हटा लेते हैं आज कल उन्हें पार्टी में शामिल करने के लिए पूरी ताकत लगाये हुए हैं ।
गांव का साधारण व्यक्ति जिसको राजनीति का कहकरा भी पता नहीं है वो भी जानता है कि पासवान किसके साथ खड़ा है ऐसे में नीतीश कुमार तीन चाह माह बाद बिहार के दो सीटों पर उपचुनाव होना है जिसमें जीत हासिल करना नीतीश के सरकार के लिए बेहद जरुरी है उसमें एक सीट कुशेश्वरस्थान जहां रामविलास पासवान का ननिहाल था और आज भी उनके परिवार के ही लोग जदयू से विधायक रहे हैं ऐसे में इस हद तक विरोध की वजह समझ से पड़े है।

हलाकि नीतीश कुमार की जो राजनैतिक शैली रही है हम साथ आपके जरुर हैं लेकिन कुछ फैसले ऐसे लेते रहे जिससे राष्ट्रीय स्तर पर इनकी एक अलग पहचान बनी रही ।
एनडीए के साथ है वोट प्रणव दा को देगें यूपीए के साथ हैं वोट कोविंद को देगें इसी तरह से हिन्दू मुस्लिम राजनीति को लेकर कुछ विषय पर मजबूती के साथ खड़े रहते थे चाहे मोदी ही सामने क्योंं ना हो ।लेकिन इस बार फिजा बदली बदली सी नजर आ रही है। हिन्दू मुस्लिम मामले में भी नीतीश उस तरह से अब स्टैंड नहीं ले पा रहे हैं ।
देवीलाल को लेकर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर संदेश दे सकते हैं लेकिन उससे भी वो दूरी बना लिए और रामविलास पासवान के बरसी के मौके पर नीतीश के इक्छा के विपरित राज्यपाल के साथ साथ बीजेपी के कई मंत्री ,सांसद और विधायक शामिल हुए यहां तक कि सुशील मोदी भी पहुंच गये मतलब बिहार बीजेपी को अब पहले जैसे नीतीश के नराज होने से कोई परहेज नहीं है ।

तो ऐसे में क्या माना जाये नीतीश ने मान लिया है कि यह मेरी आखिरी पारी है क्या वो भी समझने लगें हैं कि 2010 और 2021 के नीतीश में बहुत बड़ा फर्क है अब वोट को लेकर उस तरह के गेम चेंजर नहीं रहे ।
ऐसे में सीधी पाली खेलते चलिए जातीय जनगणना के सहारे कुछ हासिल हो गया तो ठीक नहीं तो राजनीति से बाय बाय कर लेगें ।

पॉलिटेक्निक के छात्रों ने दायर किया याचिका

पटना हाई कोर्ट ने पॉलीटेक्निक के छात्रों को प्रोन्नत करने के मामले पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन दाखिल देने को कहा है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मनोरंजन कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता ने पॉलिटेक्निक के पहले, तीसरे, चौथे और पांचवे सेमेस्टर के लेटरल एंट्री के छात्रों को यू जी सी द्वारा जुलाई, 2021 में जारी किये गए आदेश के सन्दर्भ में अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत करने हेतु याचिक दायर किया था।
कोर्ट से झारखंड, यू पी, राजस्थान, हरियाणा और बिहार के अन्य यूनिवर्सिटी की तरह ही बगैर किसी परीक्षा लिए संशोधित एकेडेमिक कैलेंडर 2021- 22 और ए आई सी टी ई के अनुसार अगले सेमेस्टर में प्रमोट करने हेतु आदेश देने का अनुरोध किया है।

याचिकाकर्ता ने अपने याचिका में छठे सेमेस्टर के लिए होम सेन्टर से फिजिकल परीक्षा लेने व् यू जी सी के गाइडलाइंस के अनुसार इसी तरह से बैक लॉग छात्रों के मामले में कार्रवाई करने हेतु निर्देश देने के लिए आग्रह किया है। याचिकाकर्ता को कोर्ट के आदेश की तिथि से चार सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारी के समक्ष अपने शिकायतों के निवारण के लिए अभ्यावेदन दाखिल करने को कहा गया है। संबंधित अधिकारी को आदेश की प्रति के साथ अभ्यावेदन मिलने पर प्राथमिकता देते हुए, दो महीने के भीतर अभ्यावेदन पर विचार करते हुए इसे शीघ्रता से निष्पादित करने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया।

महापुरुषों को याद करने के सहारे आजकल चल रही है सियासत

‘ भुला दिया गया है’ भारत की राजनीति का अभिन्न थीम बन चुका है। इसके जवाब में ‘ याद किया जा रहा है’ का थीम हर जगह लाँच है। राजनीतिक दल को जनता भले न याद आए लेकिन ‘ भुला दिया गया है’ के भय से वे हर दिन किसी न किसी महापुरुष को याद करते रहते हैं। हर दूसरा फ़ालतू मंत्री सुबह सुबह किसी महापुरुष को याद करता है और फिर अगली सुबह किसी और को। उसका काम सारा उल्टा होता है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं के पेज पर जाइये तो हर दिन हाथ जोड़े हुए किसी की जयंती मना रहे होते हैं। हुआ यह है कि राजनीति में इतने महापुरुषों की प्रेरणाएं मिक्स हो चुकी है कि इनसे प्रेरित राजनेता और कार्यकर्ता जनता से दूर हो चुका है। याद करना एक नया उद्योग बन गया है। तारीख़ याद कर लेना ही याद करना हो चुका है।

आज महान कवि सुब्रमण्य भारती की सौवीं वर्षगाँठ है। यहाँ दो दलों के पोस्टर एक दूसरे से होड़ कर रहे हैं। तमिल कोटे से कवि को याद किया जा रहा है। हर जाति हर धर्म और हर भाषा में राजनीतिक दल के लोग हैं और ये लोग इसी काम आते हैं। बाक़ी पोस्टर पर कवि की रचना तो होनी नहीं थी। रचना की दो पंक्तियों को भी जगह मिल सकती थी। कवि की आत्मा को भी लगता होगा कि कौन लोग आ गए हैं।

आपको नेतागीरी करनी है और ट्रोल करने के लिए गिरोह बनाना है तो मूर्ति स्मारक और जयंती पुण्यतिथि याद करना शुरू कर दें।

लेखक –रवीश कुमार पत्रकार

वायरल बुखार को लेकर पूरे राज्य में जारी हुआ अलर्ट सीएम का निर्देश इलाज को हो समूचित व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आज 1 अणे मार्ग स्थित संकल्प में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने कोरोना जांच, टीकाकरण एवं बच्चों में फैल रहे वायरल बुखार से बचाव को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बच्चों में वायरल बुखार से बचाव को लेकर उठाये जा रहे कदमों की जानकारी दी। साथ ही कोरोना संक्रमण की अद्यतन स्थिति, कोरोना जांच एवं वैक्सीनेशन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों एवं जिला अस्पतालों में वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों एवं उनके उपचार के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी अस्पतालों में दवा की उपलब्धता पर्याप्त है। वायरल बुखार को लेकर विभाग पूरी तरह से एक्टिव है। उसकी सघन मॉनिटरिंग की जा रही है। वायरल बुखार को लेकर लोगों को घबराने की जरुरत नहीं है। श्री प्रत्यय अमृत ने बताया कि कोविड वैक्सीनेशन का काम शहरी क्षेत्रों में लगभग शत-प्रतिषत पूर्ण हो गया है। अगर कोई बचे हुये हैं तो उनका टीकाकरण भी जल्द से जल्द करा लिया जायेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी टीकाकरण कार्य तेजी से चल रहा है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में जिनका टीकाकरण बचा हुआ है, उनका जल्द से जल्द टीकाकरण करायें। ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाकर टीकाकरण का कार्य तेजी से पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि खासकर मुंबई, केरल और तमिलनाडू से आने वाले लोगों की कोरोना जांच अवश्य करायें। रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर बाहर से आने वालों पर विशेष नजर रखें। इन जगहों पर कोरोना जांच की व्यवस्था रखें। टीकाकरण कोरोना से बचाव का कारगर उपाय है। इसके साथ ही कोरोना की जांच भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कोरोना जांच की संख्या और बढ़ायें। इसे प्रतिदिन दो लाख तक ले जायें। लोग मास्क का प्रयोग जरुर करें। यह कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ-साथ अन्य वायरल बीमारियों से बचाव में भी उपयोगी है। माइकिंग के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर लोगों को सचेत एवं जागरुक करते रहें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों में वायरल बुखार को लेकर अलर्ट और एक्टिव रहें। वायरल बुखार के लक्षणों पर भी नजर बनाये रखें। बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की कोताही नहीं हो। अस्पतालों में दवा की पर्याप्त उपलब्धता रखें। उन्होंने कहा कि वायरल बुखार को लेकर विभाग द्वारा उठाये जा रहे कदमों के संबंध में मीडिया के माध्यम से लोगों को जानकारी दें।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कई निर्देश दिये हैं ।
सभी लोग मास्क का प्रयोग जरुर करें। यह कोरोना संक्रमण से बचाव के साथ-साथ अन्य वायरल बीमारियों से बचाव में भी उपयोगी है।

    माइकिंग के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर लोगों को सचेत एवं जागरुक करते रहें।
बच्चों में वायरल बुखार को लेकर अलर्ट और एक्टिव रहें। 
बच्चों के इलाज के लिये अस्पतालों में दवा की पर्याप्त उपलब्धता रखें।
वायरल बुखार को लेकर विभाग द्वारा उठाये जा रहे कदमों के संबंध में मीडिया के माध्यम से लोगों को जानकारी दें।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष अभियान चलाकर टीकाकरण का कार्य तेजी से पूर्ण करें।
कोरोना जांच की संख्या और बढ़ायें और इसे प्रतिदिन दो लाख तक करें।
मुंबई, केरल और तमिलनाडू से आने वाले लोगों की कोरोना जांच अवश्य करायें। रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर बाहर से आने वाले लोगों पर विशेष नजर रखें। इन जगहों पर भी कोरोना जांच की व्यवस्था रखें।

फिलहाल हाईकोर्ट फिजिकल नहीं चलेंगा दशहरा के बाद होगा निर्णय

पटना हाईकोर्ट दशहरा के अवकाश के बाद 20 अक्टूबर, 2021को कोरोना की स्थिति का जायजा लेगा।इसके बाद पटना हाईकोर्ट प्रशासन फिजिकल कोर्ट प्रारम्भ करने के सम्बन्ध में निर्णय लेगा।साथ ही यह भी निर्णय लिया जाएगा कि फिजिकल कोर्ट की कार्यवाही किस हद तक संभव होगा और किस प्रकार चलाया जा सकेगा।

पिछले वर्ष मार्च से कोर्ट में मुकद्दमों की सुनवाई वर्चुअल मोड़ पर की जा रही हैं।अधिवक्ता संघो ने पटना हाईकोर्ट प्रशासन से फिजिकल कोर्ट शुरू करने का अनुरोध किया।लेकिन करोना महामारी को देखते हुए हाई कोर्ट प्रशासन ने फिजिकल कोर्ट नहीं शुरू किया।

4 जनवरी,2021से पटना हाईकोर्ट में करोना के लिए जारी दिशानिर्देश व सुरक्षा नियमों के तहत हाइब्रिड कोर्ट शुरू किया गया।इसमें प्रथम पाली में फिजिकल कोर्ट के माध्यम से मामलों की सुनवाई होती थी और द्वितीय पाली में ऑनलाइन सुनवाई होती थी।

लेकिन मार्च,2021मे करोना महामारी के फिर से बढ़ने के कारण अप्रैल,2021 से फिर मामलों की ऑनलाइन सुनवाई शुरू हुई,जो अबतक चल रही हैं।

इस बीच वकीलों और अधिवक्ता संघो ने कई बार फिजिकल कोर्ट शुरू करने के चीफ जस्टिस से मांग की।इस करोना महामारी काल में वकीलों और उनके साथ जुड़े स्टाफ की स्थिति काफी खराब हो गई।उन्हें गहरे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।बहुत सारे वकील अपने घर गांव चलें गए और उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
एक ओर कोर्ट बंद होने से उनके आय का स्रोत खत्म हो गया,वहीं सरकार और बार कौन्सिल के द्वारा भी बहुत प्रभावी आर्थिक मदद नहीं।दी गई।

तेजस्वी के दाव में पहली बार नीतीश हुए असहज रघुवंश सिंह और रामविलास पासवान की जंयती को राजकीय सम्मान घोषित करने की हुई मांग

बिहार में एक बार फिर सियासी घेराबंदी शुरु हो गयी है नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व० डॉक्टर रघुवंश प्रसाद सिंह जी एवं स्व० रामविलास पासवान जी की राज्य में आदमकद प्रतिमा स्थापित करने और उनकी जयंती अथवा पुण्यतिथि को राजकीय समारोह घोषित करने की माँग को लेकर माननीय मुख्यमंत्री, बिहार को पत्र लिखा।


बिहार की राजनीति में रघुवंश प्रसाद सिंह और रामविलास पासवान की अपनी एक अलग पहचान भी है और समाजिक पकड़ भी है ऐसे में तेजस्वी ने जो मांग कि है अगर सरकार इसको मान लेती है तो इसका क्रेंडिट तेजस्वी को जायेंगा और नहीं मानता है तो तेजस्वी इसके सहारे बिहार की सियासत में एक अलग तरह की गोलबंदी करा सकता है ऐसे में तेजस्वी का यह पत्र बिहार के सियासत को नयी दिशा दे सकता है क्यों कि सार्वजनिक स्तर पर हर कोई जानता है कि रधुवंश सिंह औऱ रामविलास पासवान को लेकर नीतीश कभी सहज नहीं रहे हैं ऐसे में तेजस्वी का यह मांग बिहार की राजनीति में पहली बार नीतीश कुमार के परेशीन पैदा करता है ।

माननीय मुख्यमंत्री जी,
बिहार, पटना।

स्व० डॉक्टर रघुवंश प्रसाद सिंह एवं स्व० रामविलास पासवान जी दोनों ही राज्य के महान विभूति होने के साथ-साथ प्रखर समाजवादी नेता थे। दोनों ही राजनेताओं ने अपने सामाजिक सरोकारों और सक्रिय राजनीतिक जीवन के माध्यम से बिहार राज्य की उल्लेखनीय सेवा की। दोनों बिहार के ऐसे सपूत रहे हैं जिनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से हम सभी बिहारवासी सदा ऋणी रहेंगे।
महोदय, आपको तो ज्ञात ही है निधन से कुछ दिन पूर्व स्व० डॉ रघुवंश बाबू ने आपको सम्बोधित पत्र के माध्यम से अपनी कुछ माँगे पूर्ण करने की इच्छा व्यक्त की थी। मुझे विश्वास है कि आप उन माँगों को पूर्ण करने हेतु आवश्यक कदम उठा रहे होंगे। रघुवंश बाबू की अंतिम इच्छाओं को सम्मान देते हुए उन्हें पूरा करना ही उनके प्रति हमलोगों की सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इसी प्रकार स्व० रामविलास पासवान जी सामाजिक न्याय, समतावादी विकास और समाजवाद के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन वंचितों उपेक्षितों के सामाजिक उत्थान, संघर्ष, रक्षा एवं विकास के लिए समर्पित किया। वो बिहार के विकास के लिए सदैव संघर्षरत रहे।
अतः मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया स्व० रघुवंश बाबू एवं स्व० रामविलास पासवान जी की राज्य में आदमकद प्रतिमा स्थापित करते हुए उनकी जयंती अथवा पुण्यतिथि को राजकीय समारोह घोषित किया जाए। 
- (तेजस्वी प्रसाद यादव)

पंचायत चुनाव में पहली बार स्ट्रांग रूम में लगाया जायेंगा इलेक्ट्रॉनिक लॉक

पंचायत चुनाव की तैयारी जोड़ पकड़ने लगा और इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत आम चुनाव में तैनात प्रेक्षकों को निर्देश दिया है कि वह मतदान के सात दिन पहले मतदाताओं तक मतदाता पर्ची उपलब्ध करा दें। इससे मतदाताओं को जानकारी मिलेगी कि उनका संबंधित मतदान केंद्र कौन सा है।

सोन भवन चुनाव के दौरान जो प्रेक्षक नियुक्त हुए हैं उसका दो दिनों का प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है । राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद ने प्रेक्षक को कहा कि पंचायत चुनाव को हर हाल में निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में संपन्न करना है। इसके लिए ईवीएम से मतदान होगा और साथ ही बायोमेट्रिक पद्धिति का उपयोग कर हर मतदाता की पहचान की जायेगी। इससे फर्जी मतदान पर पूरी तरह से रोक लगेगी।

उन्होंने कहा कि ईवीएम से मतदान होने पर मसल और मनी पावर पर रोक लगेंगा।
इस बार राज्य चुनाव आयोग एक नई व्यवस्था कर रही है। मतदान के बाद ईवीएम और बैलट बॉक्स रखने के लिए बनाए गए स्ट्रांग रूम में इलेक्ट्रॉनिक लॉक लगाया जा रहा है। इस लॉक की विशेषता यह है कि जैसे ही इसे खोला जाएगा कि इससे संबंधित सभी पदाधिकारियों को स्ट्रांग रूम का ताला खोले जाने की जानकारी मिल जाएगी। इतना ही नहीं चुनाव आयोग को भी पता चल जाएगा कि स्ट्रांग रूम को खोला गया है जिसमें ताला खोलने की तारीख और समय की भी जानकारी मिल जाएगी। चुनाव में यह व्यवस्था पहली बार की गई है।

औरंगाबाद के डिस्ट्रिक्ट जज को हाईकोर्ट ने किया निलंबित

पटना हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी कर औरंगाबाद के वर्तमान जिला जज श्री कृष्णा मुरारी शरण को निलंबित कर दिया है| हाईकोर्ट ने उन्हें बिहार जुडिशियल सर्विस के रुल 6 सब रुल (1) के तहत उन्हें अपने पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है |

इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि श्री कृष्ण मुरारी शरण अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने के दौरान बिना पूर्व अनुमति के वे मुख्यालय से बाहर नहीं जा सकेंगे।लेकिन उनके निलंबन के दौरान निर्वाह भत्ता मिलता रहेगा। जॉंच जारी रहने या अगले आदेश तक उन्हें पटना सिविल कोर्ट में अटैच किया गया हैं।

इस आदेश की कॉपी औरंगाबाद के निलंबित।डिस्ट्रिक्ट जज कृष्ण मुरारी शरण को भेजी गई है।उन्हें कहा गया है कि वे अपने कार्य का प्रभार इस आदेश के मिलते ही वरिष्ठतम एडिशनल और सेशन्स जज को सौंप देंगे।इस आदेश की प्रति पटना के ज़िला जज को आवश्यक कार्र्वाई के लिए प्रेषित की गई है।

असंगठित क्षेत्र से जुड़े मजदूरों के लिए राज्य सरकार ने खोला द्वार

श्रम कल्याण दिवस” से महाभियान चलाकर राज्य के सभी असंगठित क्षेत्र के कामगारों का राष्ट्रीय ई-श्रम पोर्टल पर कराया जायेगा निबंधन:

  • 31 दिसंम्बर 2021 तक राज्य के 3 करोड़ 49 लाख कामगारों के निबंधन का पूरा किया जायेगा लक्ष्य:
    श्री जिवेश कुमार, मंत्री श्रम संसाधन विभाग|

बिहार के सभी असंगठित क्षेत्र के कामगारों को राष्ट्रीय ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराये जाने हेतु राज्य में महाभियान चलाकर लक्ष्य को पुरा किया जायेगा| इस अभियान को “श्रम कल्याण दिवस” (दिनांक 17/09/2021) से शुरू किया जाएगा| दिनांक 31 दिसंम्बर 2021 तक 3 करोड़ 49 लाख कामगारों के निबंधित कर लिया जायेगा, जो राज्य के लिए भारत सरकार से निर्धारित लक्ष्य है| विभागीय मंत्री, श्री जिवेश कुमार ने उक्त बातें निर्धारित लक्ष्य के प्रप्ति हेतु विभाग के पदाधिकारियों के साथ समीक्षात्मक बैठक के दौरान कही|

  1. उन्होंने यह बताया कि केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक बेहतर पहल की है, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour and Employment) ने इसकी शुरुआत दिनांक 26 अगस्त को किया है| जिसके तहत देश भर के लगभग 43.7 करोड़ असंगठित श्रमिकों को ई-श्रम पोर्टल (e-SHRAM Portal) से जोड़ा जायेगा| जिसका उदेश्य देश के सभी असंगठित क्षेत्र के कामगार तक सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचना है|
  2. देश भर के असंगठित श्रमिक जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते है उनका पहचान पत्र और आधार कार्ड की तर्ज पर इनके कार्य के अनुसार रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है| जिससे इनके आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए योजनाएं बनाकर क्रियान्वित की जा सके| साथ ही निबंधित श्रमिकों को 2 लाख रुपये का बीमा का लाभ भी दिया जा रहा है, जिससे श्रमिक की असामयिक मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को तात्कालिक आर्थिक सहायता दी जा सके|
    ई – श्रम पोर्टल की विशेषताओं को बताते हुए माननीय मंत्री ने कहा:-
    1) पोर्टल पर श्रमिक अपना रजिस्ट्रेशन खुद से या CSC पर जा करा सकते हैं।
    2) श्रमिक का जन्म तिथि, होम टाउन, मोबाइल नंबर और सामाजिक श्रेणी जैसे अन्य आवश्यक डिटेल भरने के अलावा, आधार कार्ड नंबर और बैंक खाते का डिटेल का उपयोग करके रजिस्ट्रेशन किया जाता है|
    3) श्रमिकों को एक ई-श्रम कार्ड जारी किया जाता है जो 12 अंकों का विशिष्ट नंबर है।
    4) इसका उद्देश्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का एकीकरण करना है।
    5) ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से बिहार सरकार का लक्ष्य 3.49 करोड़ असंगठित श्रमिकों, जैसे: निर्माण मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों, रेहड़ी-पटरी वालों और घरेलू कामगारों का रजिस्ट्रेशन करवाना है।
  3. बिहार राज्य में अद्यतन स्थिति के अनुसार बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में निबंधित लगभग 17 लाख कामगारों का पूर्ण विवरण को राष्ट्रीय ई पोर्टल में जोड़े जाने हेतु भेजा जा चुका है| साथ ही राज्य के अन्य योजनाओं से जुड़े लगभग 11 लाख कामगारों के डाटा को भी जोड़ा जा चुका है| इस ई पोर्टल से बिहार राज्य से 3 करोड़ 49 लाख कामगारों को जोड़े जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो राज्य के आबादी का 30 प्रतिशत है, जिससे लगभग राज्य के सभी कामगार आच्छादित हो जायेंगे|
  4. श्रम संसाधन विभाग विभिन्न विभागों (आपदा / कृषि / पथ निर्माण/ भवन निर्माण आदि) से समन्वय स्थापित कर उनके यहां कार्यरत आधार आधारित पंजीकृत कामगारों का भी समायोजन इस ई पोर्टल पर करा रहा है, जिसमें विशेष रूप से मनरेगा के श्रमिक, जीविका दीदियों को जोड़ा जायेगा| साथ ही दिए गए लक्ष्य को जिलावार (जनसंख्या के अनुरूप) विभाजित कर इसे पूरा किया जायेगा| इससे संबधित पत्र सभी जिलों के जिलाधिकारी को अपर मुख्य सचिव स्तर से प्रेषित किया जा रहा है|
  5. सभी कार्य को (CSC) कॉमन सर्विस सेंटर के द्वारा कराया जायेगा जो प्रत्येक पंचायत में कार्यरत है, इसको पूरा करने हेतु भावी रूप रेखा तैयार की गयी है, जिसको लेकर अग्रेतर कारवाई की जा रही है| राज्य में स्टेट एडमिन बना दिया गया, जो जिलावार डाटा मूल्यांकन और अनुश्रवण करेंगे| साथ ही प्रगति हेतु जिला स्तर के पदाधिकारियों से प्रत्येक स्तर पर इसकी समीक्षा कर त्वरित गति से इसे 31 दिसम्बर 2021 तक पुरा किया जायेगा|

समीक्षा बैठक के दौरान, अपर मुख्य सचिव, श्रीमती वन्दना किनी, विशेष सचिव, श्री अलोक कुमार, श्रमायुक्त, सुश्री रंजिता, संयुक्त श्रमायुक्त, श्री अरविंद कुमार और श्री वीरेंद्र कुमार के साथ वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे|

स्वाइन फ्लू ने बिहार में दी दस्तक पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी

वायरल बुखार से अभी राज्य बाहर भी नहीं निकला है कि कोरोना से भी खतरनाक स्वाइन फ्लू के बिहार में आने की सूचना से पूरे स्वास्थ्य महगमा में हड़कंप मच गया है ।विभाग ने कल इसको लेकर एक आपात बैठक बुलाई है।विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि कोरोना ,वायरल बुखार और स्वाइन फ्लू के लक्षण में काफी समानता है इस वजह से जब तक मरीजों का टेस्ट नहीं होगा तब तक यह तय नहीं हो पायेंगा कि आखिरकार मरीज किस बिमारी से ग्रसित है ।कोरोना कि ही तरह स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों से काफी तेजी से संक्रमण फैलता है इसलिए डांक्टर भी स्वाइन फ्लू के आने से घबरा गये हैं ।
खबर ये आ रही है कि आज फुलवारी की बिरला कॉलोनी के अरविंद कुमार (58 वर्ष) की आज दोपहर इनफ्लूएंजा-A से मौत हो गई है। वहीं पारस हॉस्पिटल में दो मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। पारस हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आसिफ ने दो मरीजों में स्वाइन फ्लू के H1N1 वायरस की पुष्टि की है। वही खबर ये भी है कि पटना के एक निजी अस्पताल में भी इस बिमारी से संक्रमित कई और मरीजों का इलाज चल रहा है ।

इस बीच पटना की सिविल सर्जन डॉ विभा कुमारी का कहना है कि महामारी रोग को देखते हुए अधिकारी को अलर्ट कर दिया गया है। मामले की छानबीन की जा रही है। संक्रमण कहां से आया, इसकी पड़ताल की जा रही है। मृतक के बारे में भी जानकारी इकट्‌ठा कराया जा रहा है। सिविल सर्जन का कहना है कि मामला संज्ञान में आते ही जांच पड़ताल शुरु कर दी गई है।
क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू का संक्रमण वायरस के कारण होता है।
यह संक्रामक बीमारी एच-1 एन-1 वायरस से फैलता है।
स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीज में सामान्य मौसमी सर्दी-जुकाम जैसे ही लक्षण दिखते हैं।
संक्रमित लोगों में नाक से पानी आना, नाक बंद हो जाना आम बात है।
गले में खराश, सर्दी-खांसी, बुखार, सिरदर्द, शरीर में तेज दर्द होता है।
संक्रमण में थकान, ठंड लगना, पेट दर्द और कभी-कभी दस्त उल्टी होना।
स्वाइन फ्लू से कैसे बचाव करें
डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के संक्रमण को लेकर लोगों को पूरी तरह से अलर्ट होना पड़ेगा। कोरोना की ही तरह मास्क का प्रयोग और साफ सफाई को लेकर गंभीर होना पड़ेगा। इसमें खांसने, छींकने या छूने से भी स्वाइन फ्लू का वायरस एक से दूसरे व्यक्ति में पहुंच जाता है। इस कारण से स्वाइन फ्लू से प्रभावित लोगों को अलग रखा जाना चाहिए।

पैसा बाटने के आरोप में एक बार फिर घिरे तेजस्वी

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।जिसमें तेज स्वी महिलाओं के बीच 500-500 रुपये के नोट बांटते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनके इस वीडियो को जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है।

जेडीयू एमएलसी ने राजद विधायक पर तंज कसते हुए कहा कि जाओ बबुआ अपनी पहचान बनाओ, आर्थिक लुटेरे होने का दाग मिटाओ।

वीडियो वायरल की खबर वायरल होते ही विपक्ष एक बार फिर तेजस्वी पर हमलावर हो गया है
नीरज कुमार ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिख कर
तेजस्वी यादव के गोपालगंज में पैसा बांटने और पँचायत आदर्श आचार संहिता के उलंघन मामले में संज्ञान लेने की मांग की।

वही मंत्री शाहनवाज हुसैन ने इस मसले पर कहाँ कि
पंचायत चुनाव को लेकर आचार संहिता लगा हुआ है।

जिनके पास पैसा है वह पैसा बांट रहे हैं
वैसे नताओं को मर्यादा का पालन करना चाहिए।।

क्या पढ़ना है छात्रों को तय करने दीजिए

किस तरह की शिक्षा और समाज चाहते हैं हम?
अभी हाल फिलहाल में 10वीं व 12वीं बोर्ड का रिजल्ट आया है। विद्यार्थी तय कर रहे होंगे कि आगे कौन सा स्ट्रीम लेना है। मैंने महसूस किया है कि दबाव कुछ ऐसा होता है कि निम्न क्रम में स्ट्रीम लेना होता है: विज्ञान> वाणिज्य> मानविकी। मतलब विज्ञान सबसे अच्छा और मानविकी सबसे कम अच्छा। अगर किसी को विज्ञान में कम नंबर भी है तो भी खींच-तान के उसी विषय को लेने का ही प्रेशर होता है। भले ही उसको मानविकी विषय में अच्छे नंबर आए हों और झुकाव भी कहीं ना कहीं उसकी तरफ हो, फिर भी अगर उसने वो स्ट्रीम ले लिया तो उसे गया गुजरा समझा जाता है। इसके पीछे परिवार, समाज और पीयर (peer) प्रेशर बड़े कारण हैं। आजकल शिक्षा ज्ञान कम, कमाने का जरिया अधिक बन गया है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। मूल्यों के क्षरण के पीछे मैं इसे एक महत्वपूर्ण फैक्टर मानती हूं।

जबरदस्ती इंजीनियर बनने का इतना दबाव है कि इतने सारे इंजीनियर कॉलेजों से निकल रहे हैं लेकिन उनमें बेरोजगारी बड़ी समस्या है। फिर भी लोग व्यापक तौर पर अपनी सोच नहीं बदल पा रहे हैं। स्किल पर लोगों का ध्यान कम है।

हर विषय का अपना महत्व होता है। जिस विषय में रुचि और पैशन है, उस फील्ड में बढ़िया कैरियर बनाया जा सकता है। जिसमें रुचि नहीं है, उसको लेकर जीवन भर झेला सकते हैं। अच्छा, हमारे यहां ये चीज भी है कि कोई परेशान हैं या दूसरी दिशा में जाना चाहते हैं तो जीवन के किसी प्वाइंट पर स्ट्रीम/प्रोफेशन बदलने की सोचना भी बड़ी हिमाकत की बात है। बैंक लोन, बच्चे आदि के चलते ऐसा निर्णय लेना आसान नहीं है। नतीजा फ्रस्ट्रेशन के साथ काम करते रहना पड़ता है।

एक जिंदगी मिली है, अपने अनुसार निर्णय लीजिए (क्योंकि जिंदगी भर निभाना आप ही को है), जरुरत पड़े तो गैर परंपरागत निर्णय लेने का माद्दा रखिए, स्ट्रीम/प्रोफेशन भी बदल सकते हैं और संतुष्ट जीवन जिएं। हो सकता है एकाध बार आप फेल हो जाएं लेकिन फिर से खड़े होने की हिम्मत रखिए। अंततः सार यहीं है कि अगर आप खुश रहेंगे तो दुनिया खुश रहेगी।

– लेखिका प्रो० लक्ष्मी कुमारी वीर कुंवर सिंह विश्वविधलय के राजनीतिशास्त्र विभाग से जुड़ी है ।

इस बार के पंचायत चुनाव में लोकसभा और विधानसभा जैसी सुविधाएं रहेंगी मतदान केन्द्रों पर

पंचायत चुनाव 2021 के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न हो इसको लेकर कई सुधार किये है जिसमें पहली बार पंचायत चुनाव में ईवीएम का इस्‍तेमाल हो रहा है। पहली बार ऐसा चुनाव हो रहा है, जिसमें ईवीएम और बैलेट पेपर दोनों का प्रयोग एक साथ हो रहा है। इस बीच आयोग ने हर मतदान केंद्र पर सेल्‍फी प्‍वाइंट बनाने की बात कही है। आयोग ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पंचायत चुनाव में किए जा रहे सभी नए प्रयोगों को शत प्रतिशत सफल बनाये ।

लोकसभा औऱ विधानसभा चुनाव कि तरह पंचायत चुनाव को उत्सवी माहौल में कराने के लिए हर बूथ पर सेल्फी प्वाइंट बनाया जाए। आयोग के इस पहल से पहली बार पंचायत चुनाव में मतदान करने वाले युवा मतदाता सेल्फी प्वाइंट तस्वीर लेकर इंटरनेट मीडिया पर शेयर कर करने में सहूलियत होगी।

मतदाताओं मैं जागरूकता फैलाये
आयोग ने कहा है कि पंचायत चुनाव को लेकर राज्य में उत्सवी महौल बनाया जाए जिसमें दीवार लेखन, वीडियो के माध्यम से मतदाताओं का जागरूकता जैसे कार्य सुनिश्चित किए जाएं। आयोग के आयुक्त ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रत्याशियों का नामांकन पत्रों का शत प्रतिशत डिजिटलाइज कर अपलोड किया जाए। हर बूथ पर मतदान के दिन बिजली और मोबाइल कनेक्टिविटी हर हाल में बनी रहे।

हर बूथ पर दो महिला कर्मियों की तैनाती का निर्देश
मतदान के दिन हर बूथ पर कम से कम दो महिला कर्मियों की तैनाती की जाए वही 11 चरणों में चुनाव होने कि वजह से चुनाव कार्य में लगे कर्मी थके नहीं इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला के निर्वाचन पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि चुनाव में एक कर्मचारी की अधिकतम चार बार ड्यूटी लगाई जाएगी। इसको लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने कई आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया है

बिहार जिला जज परीक्षा का परिणाम धोषित

बिहार डिस्ट्रिक्ट जज एंट्री लेवल परीक्षा में 16 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किए गए । पटना हाईकोर्ट ने आज एक नोटिस जारी कर बिहार डिस्ट्रिक्ट जज एंट्री लेवल परीक्षा 2020 के परिणाम घोषित कर उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की सूची प्रकाशित की ।

लिखित परीक्षा ऐवम साक्षात्कार के आधार पर परीक्षा में सफल उम्मीदवारों का चयन किया गया है। इनके नाम इस प्रकार से है, दीपक कुमार,राज विजय सिंह,मनीष कुमार शुक्ला,सुदेश कुमार श्रीवास्तव,मनीष कुमार,पीयूष कुमार,नर्वेदेश्वर पाण्डेय, पवन कुमार,निकिता आर बोरा,रंजीता कुमारी,रचना अग्रवाल,गौरव सिंह,प्रमोद कुमार,पुष्पा कुमारी,सत्य नारायण लाल सांझी और ज्योति कुमारी।

इस परीक्षा में कुल 53 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था जिसमें से केवल 16 उम्मीदवार ही सफल हुए। ग़ौरतलब है कि परीक्षा में एससी कोटे से एक भी उम्मीदवार सफल नहीं हो सके ।

बिहार के स्वास्थ्य विभाग का हाल बेहाल

आज हम आपको बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी तीन तस्वीरें दिखा रहे हैं और उन तस्वीरों के सहारे कोरोना के तीसरी लहर से लड़ने को लेकर जो दावे किये जा रहे हैं उसकी सच्चाई से आप रुबरु हो सकते हैं ।

पहली तस्वीर राज्य में फैले वायरल बुखार से जुड़ी है खबर यह है कि शहर से लेकर गांव तक में बच्चे वायरल बुखार से पीड़ित है पीड़ित बच्चों में पांच से आठ प्रतिशत बच्चें ऐसे हैं जिनको अस्पताल की जरुरत है हाल यह है कि राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच,आईजीएमएस.एनएमसीएच और एम्स जहां कोरोना के तीसरी लहर को देखते हुए विशेष तौर पर पीकू व नीकू अस्पताल तैयार किया गया था वहां एक भी बेड खाली नहीं है ।

अस्पताल के बाहर गलियारे में इलाज के अभाव में बच्चा तरप रहा है ।वही कोरोना वाला हाल माँ के गंधे पर बीमार बच्चा और बाप के हाथ में आँक्सीजन का सिलेंडर ।बेड की जगह बाथरुम के गेट पर बच्चों को गोद में लिए मां हैरान परेशान मरीज के परिजनों को निहार रही है और अपने पति से बार बार कह रही है कुछ कीजिए ना बाबू बहुत रो रहा है ।

पति परेशान है अस्पताल में ना डां है ना बेड है और ना ही दवा है,करे तो करे क्या हर आने जाने वालों को टकटकी निगाह से देख रहा है कही किसी रास्ते से फरिस्ता की तरह कोई डाँ आये और उसके बच्चे को बचा ले ।ये हाल राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच का है जिला और अनुमंडल अस्पताल की तो बात ही छोड़ दे ।

दूसरी तस्वीर सिवान सदर अस्पताल की है जहां एक व्यक्ति की लाश 15 घंटे तक फर्श पर पड़ी रही और वार्ड में कुत्ते घूमते रहे, लेकिन किसी ने इसकी सुध नहीं ली।

तीसरी तस्वीर जीएमसीएच बेतिया की है जहां चोरों ने आईसीयू में घुसकर मरीज को लगा आक्सीजन मॉनिटर चुरा लिया। मरीज के परिजनों के टोकने पर चोर ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया। खराब होने व बदलने के नाम पर मॉनिटर चुराकर ले गया। जल्दबाजी में मॉनिटर खोलने के दौरान चोर ने ऑक्सीजन पाइप भी नोंच दिया थोड़ी देर बाद मरीज की स्थिति जब बिगड़ने लगी तो परिचन भागे भागे नर्स रुम में गयी वहां नर्स मौजूद नहीं थी हल्ला हंगामा शुरु हुआ तो कही से एक नर्स पहुंची और फिर किसी तरह आंक्सीजन का पाइप लगायी ये मेडिकल कांलेज का हाल है ।

इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का कहना है कि राज्य स्वास्थ्य समिति के टीम को अस्पताल का दौरा करने के लिए भेजा गया है उन्हें रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है कई विशेषज्ञों से बातचीत में पता चला है कि वायरल फीवर है और सभी सरकारी अस्पतालों में बच्चों के समुचित इलाज का निर्देश दिया गया है पूरे मामले पर मैं खुद नजर रख रहा हूं और लगातार अधिकारियों के संपर्क में हूं

संभार–संतोष सिंह के वाल से

उतार-चढ़ाव के बाद बाजार हरे निशान में बंद; सेंसेक्स 58,305, निफ्टी 17,369 पर बंद; एयरटेल, नेस्ले टॉप गेनर

साप्ताहिक एफएंडओ समाप्ति सत्र में घरेलू बेंचमार्क सूचकांक मामूली बढ़त के साथ सपाट बंद हुए । बीएसई सेंसेक्स 54.81 अंक (0.09 प्रतिशत) बढ़कर 58,305.07 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 15.75 अंक (0.09 प्रतिशत) ऊपर 17,369.25 पर बंद हुआ।

बीएसई मिडकैप इंडेक्स 72.07 अंक (0.29 फीसदी) ऊपर 24,639.15 पर कारोबार कर रहा था, जबकि एसएंडपी बीएसई स्मॉलकैप 105.72 अंक (0.38 फीसदी) ऊपर 27,607.00 पर था। बैंक निफ्टी अपने इंट्राडे लाभ को बनाए रखने में विफल रहा, 0.23% कम 36,683 पर समाप्त हुआ ।

भारती एयरटेल 2.73% की बढ़त के साथ सेंसेक्स में शीर्ष पर रही, इसके बाद नेस्ले इंडिया, टाटा स्टील और बजाज फिनसर्व का स्थान रहा। टाइटन गुरुवार को सेंसेक्स का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला था, जो लगभग 1% गिर गया। इसके बाद अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज ऑटो, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक का स्थान रहा। मीडिया, एफएमसीजी, धातु सबसे अधिक लाभ में रहे ।

सेंसेक्स एक नजर में

सेंसेक्स के 30 शेयर्स में से 18 शेयर्स बढ़त के साथ और 12 शेयर्स लाल निशान में बंद हुए। बी एस ई पर कारोबार के दौरान 196 शेयर्स 52 हफ्ते के ऊपरी स्तर पर और 23 शेयर्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों के टॉप गेनर और लूजर का हाल

निफ्टी एक नजर में

बाढ़ को लेकर सीएम की अध्यक्षता में हुई मैराथन बैठक

राज्य में बाढ़ आपदा एवं अल्पवृष्टि से उत्पन्न स्थिति पर मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में साढ़े पांच घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय,
प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता करने का मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिया निर्देश

मुख्य बिन्दु :-
1. बाढ़ के कारण जहां किसानों द्वारा फसल नहीं लगायी जा सकी, उसे फसल क्षति मानते हुये उन सभी किसानों को उचित सहायता उपलब्ध करायें। साथ ही किसानों की फसल क्षति का भी आंकलन कर उन्हें सहायता उपलब्ध करायें।

2. कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग एवं सभी जिलों के जिलाधिकारी बाढ़ के कारण हुई क्षति का पंचायतवार सही तरीके से आंकलन करें ताकि उसके आधार पर सभी प्रभावितों की मदद की जा सके। कोई भी बाढ़ आपदा पीड़ित सहायता से वंचित नहीं रहे।

3. तीन से चार दिनों में बाढ़ से हुई क्षति का पूर्ण आंकलन कर लें। इसके पष्चात् जिलों के प्रभारी मंत्री संबंधित जिलों में जाकर जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर इसे अंतिम रुप दें।

4. पषु एवं मत्स्य संसाधन विभाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशु क्षति का भी ठीक से आंकलन कराये और पशुपालकों की सहायता करें।

5. जल संसाधन विभाग बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालीन योजना बनाकर कार्य करे ताकि बाढ़ का असर कम से कम हो।

6. जिलों के उन विषिष्ट क्षेत्रों का भी आंकलन कर लें, जहॉ अल्पवृष्टि की स्थिति बन रही हो।

7. हर वर्ष बाढ़ के कारण बिहार का बहुत बड़ा क्षेत्र प्रभावित होता है, उससे बचाव एवं राहत के लिए हमलोग लगातार काम कर रहे हैं।

पटना 08 सितम्बर 2021 :- मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में राज्य में बाढ़ आपदा एवं अल्पवृष्टि से उत्पन्न स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। साढ़े पांच घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिलाधिकारी भी शामिल हुए।

बैठक के दौरान प्रस्तुतीकरण के माध्यम से भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के प्रतिनिधि ने अब तक की वर्षापात की स्थिति और आने वाले दिनों के वर्षा पूर्वानुमान के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य में बाढ़ एवं अल्पवृष्टि को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक तीन चरणों, प्रथम चरण- 13 से 17 जून, द्वितीय चरण- 1 जुलाई से 7 जुलाई, तृतीय चरण- 8 अगस्त से 22 अगस्त में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है। आपदा पीड़ितों के लिए सभी प्रकार के राहत एवं बचाव कार्य किये गये। मुख्यमंत्री द्वारा हवाई सर्वेक्षण एवं बाढ़ राहत शिविरों में शरणार्थियों से मिलकर राहत कार्यों का जायजा लिया गया। इससे पीड़ितों का काफी मनोबल बढ़ा। अब तक 7,95,538 परिवारों के बीच 477.32 करोड़ रुपये ग्रैच्युट्स रिलीफ की राशि का वितरण किया जा चुका है और बाकी बचे लोगों में जी0आर0 का वितरण 25 सितंबर तक कर दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि बाढ़ से 26 जिलों के 16.60 लाख परिवारों की 69.63 लाख जनसंख्या प्रभावित हुई है, जिन्हें हरसंभव मदद की जा रही है।

समीक्षा बैठक में कृषि विभाग के सचिव श्री एन0 सरवन कुमार, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के सचिव श्री जितेंद्र श्रीवास्तव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती एन0 विजयलक्ष्मी एवं जल संसाधन विभाग के सचिव श्री संजीव हंस ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बाढ़ के दौरान अपने-अपने विभागों द्वारा किये गये कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।
समीक्षा के दौरान सभी जिलों के जिलाधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने जिलों के आपदा प्रभावित क्षेत्रों, जी0आर0 वितरण, क्षतिग्रस्त सड़कें, फसल क्षति, पशु क्षति आदि के साथ-साथ बाढ़ के दौरान किये गये राहत एवं बचाव कार्यों की भी जानकारी दी।

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष अधिक वर्षापात होने से नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण राज्य में बाढ़ की स्थिति बनी। हमने हवाई सर्वेक्षण कर राज्य के सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। साथ ही प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को भी हवाई सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया ताकि वे अपने जिलों के पूरे क्षेत्रों का ठीक से जायजा ले सकें। प्रभावित लोगों के बीच राहत एवं बचाव कार्य कर उन्हें हरसंभव मदद मुहैया कराया गया। हमने राहत शिविरों में जाकर बाढ़ पीड़ितों के लिए चलाये जा रहे राहत कार्यों एवं वहां की व्यवस्थाओं की जानकारी ली और अधिकारियों को सभी प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। सभी जिलाधिकारी अभी भी मौसम पूर्वानुमान के आधार पर आगे की स्थिति के लिए सचेत रहें और पूरी तैयारी रखें।

मुख्यमंत्री ने निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ के कारण जहां किसानों द्वारा फसल नहीं लगायी जा सकी, उसे फसल क्षति मानते हुये उन सभी किसानों को उचित सहायता उपलब्ध करायें। साथ ही किसानों की फसल क्षति का भी आंकलन कर उन्हें सहायता उपलब्ध करायें। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग एवं सभी जिलों के जिलाधिकारी बाढ़ के कारण हुई क्षति का पंचायतवार सही तरीके से आंकलन करें ताकि उसके आधार पर सभी प्रभावितों की मदद की जा सके। कोई भी बाढ़ आपदा पीड़ित सहायता से वंचित नहीं रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन से चार दिनों में बाढ़ से हुई क्षति का पूर्ण आंकलन कर लें। इसके पष्चात् जिलों के प्रभारी मंत्री संबंधित जिलों में जाकर जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर इसे अंतिम रुप दें। उन्होंने कहा कि पषु एवं मत्स्य संसाधन विभाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशु क्षति का भी ठीक से आंकलन कराये और पशुपालकों की सहायता करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संसाधन विभाग बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालीन योजना बनाकर कार्य करे ताकि बाढ़ का असर कम से कम हो। उन्होंने कहा कि जिलों के उन विषिष्ट क्षेत्रों का भी आंकलन कर लें, जहॉ अल्पवृष्टि की स्थिति बन रही हो। हर वर्ष बाढ़ के कारण बिहार का बहुत बड़ा क्षेत्र प्रभावित होता है, उससे बचाव एवं राहत के लिए हमलोग लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार भविष्य के लिये सचेत रहते हुये पूरी तैयारी रखें।

बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री तारकिशोर प्रसाद, उप मुख्यमंत्री सह आपदा प्रबंधन मंत्री श्रीमती रेणु देवी, शिक्षा मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडे, जल संसाधन मंत्री श्री संजय कुमार झा, भवन निर्माण मंत्री श्री अशोक चौधरी, कृषि मंत्री श्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, पथ निर्माण मंत्री श्री नितिन नवीन, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार,पंचायती राज मंत्री श्री सम्राट चौधरी, परिवहन मंत्री श्रीमती शीला कुमारी, लघु जल संसाधन मंत्री श्री संतोष कुमार सुमन, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री श्री मुकेश सहनी, समाज कल्याण मंत्री श्री मदन सहनी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, पर्यटन मंत्री श्री नारायण प्रसाद, कला, संस्कृति एवं युवा मामले के मंत्री श्री आलोक रंजन, ग्रामीण कार्य मंत्री श्री जयंत राज, श्रम संसाधन मंत्री श्री जिवेश मिश्रा, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री श्री सुमित कुमार सिंह, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन मंत्री श्री सुनील कुमार, गन्ना उद्योग मंत्री श्री प्रमोद कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री रामसूरत कुमार, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री व्यास जी, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य श्री पी0एन0 राय, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य श्री उदयकांत मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, मुख्य सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, पुलिस महानिदेशक श्री एस0के0 सिंघल, विकास आयुक्त श्री आमिर सुबहानी, आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अमृत लाल मीणा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री चंचल कुमार, अपर मुख्य सचिव पथ श्री अमृत लाल मीणा सहित सभी जिलां के प्रभारी अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार एवं मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्योग मंत्री श्री शाहनवाज हुसैन, संबंधित विभागों के अन्य वरीय पदाधिकारीगण, सभी प्रमंडलीय आयुक्त, रेंज के आई0जी0/डी0आई0जी0, सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक जुड़े हुए थे।

रामविलास पासवान की पहली बरसी मनायी जायेंगी पटना तैयारी जोड़ो पर

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) नेता चिराग पासवान अपने पिता व दलित नेता रामविलास पासवान की पहली बरसी पर 12 सितंबर को पटना में बड़े आयोजन करने की तैयारी में हैं। उन्होंने इस आयोजन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को न्योता भेजा है।

12 सितंबर को लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक व पूर्व दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पहली बरसी पटना में मनाई जाएगी और बरसी के बहाने चिराग बड़ी राजनैतिक लकीर खींचने की तैयारी में लगा है आज इसको लेकर बिहार के नेता प्रतिपंक्ष तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से मुलाकात कर आने का निमंत्रण दिया है वही इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं को भी न्योता भेजा है। हलाकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निमंत्रण को लेकर जब चिराग से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक मिलने का समय नहीं मिला है ।

वही निमंत्रण कार्ड पर चिराग ने पूरे पासवान परिवार का नाम छपवाया है।कार्ड के एक भाग में शोकाकुल परिवार के तौर पर सबसे पहले केंद्रीय मंत्री और अपने चाचा पशुपति कुमार पारस, चचेरे भाई कृष्ण राज, चचेरे भाई व समस्तीपुर सांसद सह प्रदेश अध्यक्ष (पारस गुट वाली लोजपा) प्रिंस राज और यश राज का नाम लिखा हुआ है। कार्ड के दूसरे भाग में विनीत के तौर पर चिराग पासवान का नाम सांसद सह राष्ट्रीय अध्यक्ष लोजपा लिखा हुआ है।

कांग्रेस के कद्दावर नेता सदानंद सिंह नहीं रहे

कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सदानंद सिंह का आज निधन हो गया है। पटना में खगौल के पास एक निजी अस्पताल क्यूरिस हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांसें ली। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। लीवर सिरोसिस की बीमारी से परेशान थे। दिल्ली के प्रसिद्ध डॉक्टर एसके सरीन से लीवर का इलाज कराया था। उसके बाद पटना लौटे, लेकिन तकलीफ बढ़ी तो फिर अस्पताल में एडमिट होना पड़ा। खगौल के पास क्यूरिस हॉस्पिटल में लगभग दो माह से उनका इलाज चल रहा था। लीवर सिरोसिस जब बढ़ने लगा तो किडनी में इंफेक्शन हो गाया। इसके बाद मंगलवार को उनका डायलिसिस किया गया। लेकिन उनके शरीर ने डायलिसिस बर्दाश्त नहीं किया और बुधवार की सुबह नौ बजकर नौ मिनट पर उनका निधन हो गया। उन्हें एक पुत्र और तीन पुत्रियां हैं।

राज्यपाल ,सीएम नीतीश कुमाप और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी ने भी जताया शोक
सीएम नीतीश कुमार ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने कहा है कि वे एक अनुभवी राजनेता थे। क्षेत्र के लोगों में भी काफी लोकप्रिय थे। 2000 से 2005 तक विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे थे। उनसे मेरा व्यक्तिगत संबंध था। उनके निधन से मर्माहत हूं। इधर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सदानंद सिंह जी के निधन पर गहरी शोक-संवेदना व्यक्त करता हूं। उनका लंबा सामाजिक-राजनीतिक अनुभव रहा। वो एक कुशल राजनेता थे। ईश्वर से उनकी आत्मा को शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।

पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने भी शोक जताया है। उन्होंने कहा कि सदानंद बाबू की कमी हमेलंबा है राजनीतिक इतिहास, नौ बार रहे थे विधायक
सदानंद सिंह का लंबा राजनीतिक सफर रहा है। वह पहली बार कहलगांव सीट से 1969 में जीत कर विधायक बने थे। विधानसभा अध्यक्ष के अलावा बिहार सरकार में कई विभागों के मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह भागलपुर की कहलगांव विधानसभा सीट से नौ बार विधायक भी रहे थे।

लड़कियां अभी भी सुरक्षित नहीं है बिहार में

तमाशबीन हूं मैं बात 2008 की है सुशासन उस वक्त लोगों के जुबान पर था उस वक्त मैं ईटीवी सा जुड़ा हुआ था और आंफिस एग्जीबिशन रोड स्थित शाही भवन में था । यही कोई रात के आठ बज रहे होंगे ।हमलोगों के साथ काम करने वाले एक सहयोगी के शादी का रिसेप्शन था आंफिस लगभग खाली हो गया था और सबसे विलम्भ से मैं ही आंफिस से निकला था ।जैसे ही गांधी मैदान से सामने स्थित रामगुलाम चौक से बाये मौर्या होटल की और मुड़े सामने देखते हैं बीच सड़क पर एक गांड़ी खड़ी है और एक लड़की को जबरन सड़क पर से उठा कर गांड़ी में बिठा रहा है तब तक मैं वहां पहुंच गया लड़की को तो बचा लिये लेकिन मेरे साथ जो हुआ उसकी कई बार चर्चा कर चुके हैं ।

लड़की को उठाने वालों में एक जंगलराज में चर्चित साले का साला था एक उस समय के जदयू के कद्दावर नेता और मंत्री के साढ़ू का बेटा था और तीसरा एक पुलिस अधिकारी का बेटा था इस घटना की चर्चा मेैं इसलिए कर रहा हूं कि लड़कियों के लेकर जंगलराज हो या फिर कानून की राज वाली सरकार हो लड़कियों को लेकर अपराधी प्रवृति वाले लोगों के नजरिया में कोई फर्क नहीं आया जैसे पहले होता था वैसे उस समय भी हो रहा था।

आज भी बिहार में अक्सर खबर आती है कि बेटी को छेड़खानी से रोकने पर बाप को गोली मार दिया भाई को पीट पीट कर अधमरा कर दिया मतलब आज भी राजधानी पटना में बेटी ,बहन और पत्नी को लेकर चलना सुरक्षित नहीं है कब कहां कोई छींटाकशी कर दे, छेड़छाड़ कर दे कहना मुश्किल है यह प्रवृति लड़कियों को लेकर सिर्फ शहर में ही नहीं है ,गांव में भी यही स्थिति है इस तरह की खबरे गांव से भी आती रहती है ।

आज भी किसी की बेटी और बहन घर से बाहर निकलती है तो जब तक वो वापस नहीं लौटती है पूरा परिवार तनाव में रहता है ।इसी तरह की एक घटना राजधानी पटना से सटे मनेर से आ रही है जहां ब्यापुर राजकीय मध्यविधालय में पढ़ने वाली छात्रा और शिक्षिका स्कूल आना बंद कर दी है ।

वजह आये दिन स्कूल जाने के दौरान आसपास के अपराधिक प्रवृति के लड़के स्कूल की छात्रा और शिक्षिका के साथ छेड़छाड़ करता रहता है स्कूल के प्राचार्य राज कुमार ने विभाग और थाने को लिख कर शिकायत किया है फिर भी कारवाई तो दूर अब ये गुंडे प्राचार्य को ही जान से मारने की धमकी दे रहा है जबकि इस स्कूल में 690 छात्राएं और 9शिक्षिकाएं है कार्यरत है फिर भी जब लड़कियां स्कूल के लिए निकलती है आस पास के लड़के सरेआम छेड़खानी करता है और शिक्षिका द्वारा आपत्ति करने पर शिक्षिका के साथ गाली गलौज और छेड़छाड़ करने से भी परहेज नहीं करता है ।

इस मानसिकता को क्या कहा कहेंगे, ये कोई सिर्फ मनेर की ही घटना नहीं है इस तरह की घटनाएं सरेआम बिहार के स्कूलों में होता रहता है ।हमें लगता है वक्त आ गया है समाज और कानून के रखवाले एक साथ मिल बैठ कर इसका समाधान निकाले ।नहीं तो फिर मुश्किले बढ़ेगी क्यों कि लड़किया भी अब फाइट करने लगी है ऐसे में बड़ी घटना घट सकती है ।

संभार –संतोष सिंह के वाल से

हाईकोर्ट से सरकार को फिर लगा झटका सृजन मामले में बैक से वसूली पर लगाया रोक

पटना हाई कोर्ट ने सृजन घोटाला से जुड़े मामले में सर्टिफिकेट केस के जरिये पैसे की वसूली की कार्यवाही पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है। जस्टिस मोहित कुमार शाह ने बैंक ऑफ बरोडा की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया।

सृजन घोटाला में कथित तौर पर संलिप्त भागलपुर शाखा के बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक से राज्य सरकार की 189 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि को सर्टिफिकेट केस चला कर वसूली करने की कार्यवाही शुरू की थी। पर फिलहाल यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश देते हुए जिला प्रशासन को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता बैंक के वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बताया कि सृजन घोटाले में जो पैसा है, जिला प्रशासन ने पैसा बसूली के लिए सर्टिफिकेट केस किया है। इसमें बैंक का कहना है कि ये सर्टिफिकेट केस नहीं हो सकता है, क्योंकि कानून में लोक मांग नहीं है। अभी सृजन घोटाले का मुकदमा चल रहा है, कोई फैसला नहीं हुआ है, इसलिए बैंक से पैसा वसूला नहीं किया जा सकता है।श्री शाही ने सुनवाई के दौरान सर्टिफिकेट ऑफिसर के क्षेत्राधिकार पर भी सवाल उठाया।

राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए सरकारी अधिवक्ता प्रशांत प्रताप ने नीलाम वाद के आदेश के विरुद्ध अपील दायर किये बगैर ही सीधे हाई कोर्ट में मामला दायर करने पर आपत्ति जताई।

वायरल बुखार ने बिहार के बच्चों की बढ़ाई परेशानी 3हजार से अधिक बच्चे भर्ती है अस्पताल में

कोरोना के तीसरी लहर की आशंका के बीच बिहार में वायरल बुखार ने पूरी सरकार की नींद हराम कर दी है अभी तक जो सूचनायें आ रही उसके अनुसार पीएमसीएच ,आईजीएमएस और एम्स पटना में कोरोना के सम्भावित खतरे को देखते हुए बच्चों के लिए जीतने भी बेड लगाये गये थे वो सारे फुल हो चुके हैं यही स्थिति SKMCH मुजफ्फरपुर और डीएमसीएच दरभंगा का है अभी तक सरकारी अस्पतालओं की ही बात करे तो 3000 हजार से अधिक बच्चों का राज्य के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है ।

एनएमसीएच के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर साहनी ने बताया कि वायरल बरोंकोलिस्ट बीमारी में श्वांस नली में सूजन हो जाता है। यह स्थिति जुकाम से शुरू होती है। सांस नली में सूजन होने से सांस फूलना, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होती है। यह एक सप्ताह से एक महीने तक रह सकता है। अगर सही से और समय पर इलाज नहीं हुआ तो यह गंभीर रूप ले लेता है अभी तक पांच सौ से अधिक बच्चे भर्ती हो चुके हैं सभी में इसी तरह के लक्षण पाये गये हैं आज सिविल सर्जन डॉ. विनय शर्मा के नेतृत्व ने एक टीम SKMCH में निरीक्षण करने पहुंची। टीम में पटना के भी स्वास्थ्य विभाग के एक वरीय अधिकारी हैं। SKMCH अधीक्षक डॉ. बीएस झा के साथ बैठक हुई। इसके बाद पीकू वार्ड निरीक्षण किया। सिविल सर्जन ने अधीक्षक से पूरी रिपोर्ट मांगी है। कहा है जिस इलाके के बच्चे अधिक प्रभावित होंगे। वहां पर विशेष निगरानी की जाएगी और जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

एम्स के शिशुरोग विशेषज्ञ डां लोकेस तिवारी की माने तो अभी तक अधिकांश बच्चों में वायरल बुखार के ही लक्षण देखने को मिल रहा है फिर भी सतर्क रहने कि जरुरत है क्यों कि कोरोना में भी कुछ ऐसा ही लक्षण मरीजों में देखा जाता है हलाकि अभी तक एम्स में एक बच्चे में कोरोना पाँजिटिभ पाया गया है और दो बच्चों में पोस्ट कोरोना के लक्षण दिखे गये हैं ।

हाईकोर्ट से सरकार को बड़ा झटका ,राज्यपाल कोटे से मनोनयन मामले में कोर्ट कर सकती है सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में राज्यपाल कोटा से मनोनीत किये गए 12 विधान पार्षदों के मनोनयन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट इन मामलों की सुनवाई कर सकता हैं। वरीय अधिवक्ता वसंत चौधरी की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि मनोनीत किये गए ये विधान पार्षद को राजनीतिज्ञों को समाजसेवी माना जाए या नहीं,इस मामले पर विचार करने की जरूरत नहीं। याचिकाकर्ता अधिवक्ता वसंत चौधरी का कहना था कि इस तरह के मामले में भारत का संविधान के प्रावधानों के तहत साहित्य, कलाकार, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता व सहकारिता आंदोलन से जुड़े हुए विशिष्ट लोगों के मनोनयन हो सकता है।

जिन बारह लोगों का विधान पार्षद के रूप में मनोनयन किया गया है ,वे बहुमत बढ़ाने और जो लोग विधान सभा में चुन कर नहीं आ सके हैं, उन्हें विधान परिषद में इस तरह से लाया गया है। यह संविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि इनमें कोई भी न तो सामाजिक कार्यकर्ता है, न ही साहित्य से जुड़ा व्यक्ति या न ही कोई वैज्ञानिक उपलब्धियां हैं। उन्होंने दलील देते हुए कहा था कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को काम का अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान और विशिष्ट होना चाहिए।लेकिन इन सब बातों पर गौर नहीं किया गया है।

श्री चौधरी ने कोर्ट को बताया कि इनमें कोई पार्टी का अधिकारी है ,तो कोई कहीं का अध्यक्ष। पिछ्ली सुनवाई मे कोर्ट ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता से पूछा कि क्या मनोनीत किये गए एम एल सी में राज्य के मंत्री पद पर है क्या।

विधान पार्षद के रूप में अशोक चौधरी, जनक राम, उपेंद्र कुशवाहा, डॉ राम वचन राय, संजय कुमार सिंह, ललन कुमार सर्राफ, डॉ राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, संजय सिंह, देवेश कुमार, प्रमोद कुमार, घनश्याम ठाकुर और निवेदिता सिंह को राज्यपाल के कोटे से मनोनयन किया गया।
अब इस मामले पर अगली सुनवाई 13 सितंबर को की जाएगी।

सृजन घोटाले मामले में हुआ बड़ा खुलासा, कई आईएएस अधिकारियों का हस्ताक्षर पाया गया सही

सृजन घोटाले मामले में हुआ बड़ा खुलासा
कई आईएएस अधिकारियों का हस्ताक्षर पाया गया सही
फोरेंसिक रिपोर्ट ने भागलपुर के तत्तकालीन डीएम के दावे को किया खारिज
फर्जी हस्ताक्षर के दावे को किया खारिज
कई आईएएस अधिकारियों का हस्ताक्षर पाया गया सही
ऐसे आईएएस अधिकारियों पर कारवाई तय

सृजन घोटाले मामले में पहली बार सीबीआई के शिकंजे में बड़ी मछली फंसी है ।जी है कल तक भागलपुर में तैनात आईएएस अधिकारी इस आधार पर बच रहे थे कि सृजन को जो भुगतान हुआ है उस चेक पर मेरा हस्ताक्षर नहीं है ।लेकिन फोरेंसिक जांच में ये बाते सामने आयी है कि भागलपुर में पदस्थापित कई डीएम के हस्ताक्षर और चेक पर दर्ज हस्ताक्षर एक है ।ऐसी स्थिति में सीबीआई कभी भी उक्त आईएएस अधिकारी को गिरफ्तार कर सकती हलाकि सीबीआई फिलहाल उक्त अधिकारी को पुछताछ के लिए बुलाना चाह रही है।

ऐसे अधिकारियों जिनका हस्ताक्षर चेक के हस्ताक्षर से मिल रहा वैसे अधिकारियों ने 28 करोड़ ,56 लाख और 27 लाख रुपये के चेक पर हस्ताक्षर किए हैं। देश की चार बड़ी फोरेंसिक लैबोरेटरीज में उनके हस्ताक्षर के नमूने की जांच कराई गई। जिसमें हस्ताक्षर सही पाया गया।

पंचायत चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रलोभन देने वाले प्रत्याशियों पर होगी कड़ी कारवाई

पंचायत आम निर्वाचन 2021 के दौरान मतदाताओं को लुभाने के मामले आयोग इस बार काफी सख्त है चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए राशि, कपड़ा, शराब जैसी सामग्री वितरण की संभावना को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने हर प्रखंड में उड़नदस्‍ता दल का गठन करने का निर्देश दिया है जिसकी मॉनिटरिंग एसपी और डीएम खुद करेंगे और उड़नदस्ता दल के नोडल अधिकारी के रूप में उपविकास आयुक्त और राज्य कर संयुक्त आयुक्त होगे। इसके साथ ही चरणवार दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।

उड़नदस्ता दल का प्रमुख कार्य अपने क्षेत्र के अंतर्गत होने वाले गैर कानूनी गतिविधियों पर पैनी नजर रखना और उसे नियंत्रित करना है। गैरकानूनी गतिविधि यथा शराब वितरण, अवैध नगदी अथवा वस्तु जिससे मतदाता को पर प्रलोभित किया जा सके
उसके संबंध में सूचना प्राप्त होते ही पुलिस अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अविलंब छापामारी करेंगे। साथ ही निर्वाचन नियमों के सुसंगत धाराओं के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई करना सुनिश्चित करेंगे।उड़नदस्ता दल सभी शिकायत योग्य निर्वाचन एवं आदर्श आचार संहिता से संबंधित मामलों पर तुरंत कार्रवाई करेंगे तथा पंचनामा दस्तावेज आदि भी तैयार करेंगे। यदि नगदी, उपहार, वस्तु, शराब या मुफ्त में भोजन के वितरण, निर्वाचकों को धमकी देने या डराने के बारे में या हथियारों, गोला बारूद, असामाजिक तत्वों की आवाजाही के बारे में शिकायत प्राप्त हो और उडऩदस्ते का घटनास्थल पर तत्काल पहुंच जाना संभव नहीं हो तो सूचना नजदीक के स्टैटिक या स्थानीय थानाध्यक्ष को देना सुनिश्चित करेंगे। अवैध नगदी का आदान-प्रदान या शराब का वितरण या अन्य वस्तुएं जिसे वोटरों को प्रभावित किया जा सके का पता लगाएंगे एवं विधि सम्मत आवश्यक कार्रवाई ससमय करना सुनिश्चित करेंगे।

राज्यपाल कोटा से मनोनयन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर

हाल ही में राज्य में राज्यपाल कोटा से मनोनीत किये गए 12 एम एल सी के मनोनयन को चुनौती देने वाली याचिका पर पटना हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। याचिका पटना हाई कोर्ट के वरीय अधिवक्ता बसंत कुमार चौधरी द्वारा दायर की गई है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि इस तरह के मामले में भारत का संविधान साहित्य, कलाकार, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता व कॉपरेटिव मूवमेंट से जुड़े हुए जैसे खास तरह के लोगों को मनोनीत करने की अनुमति देता हैं।

जिन 12 लोगों को एम एल सी मनोनीत किया गया है, वह बहुमत बढ़ाने और जो लोग एम एल ए नहीं चुन कर नहीं आये हैं, उन्हें एडजस्ट करने के लिए मनोनीत किया गया है ,जो संविधान के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता का आगे कहना था कि इनमें कोई भी न तो सामाजिक कार्यकर्ता है और न ही साहित्य से जुड़ा व्यक्ति या फिर वैज्ञानिक और कलाकार। उनका कहना था कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को काम का अनुभव, व्यवहारिक ज्ञान और एक्सपर्टीज होना चाहिए।
इन सब चीजों को नहीं देखा गया है।

खण्डपीठ ने राज्य सरकार के महाधिवक्ता से पूछा कि क्या मनोनीत किये गए एम एल सी में राज्य के मंत्री भी है ? उल्लेखनीय है कि राज्यपाल कोटे से अशोक चौधरी, जनक राम, उपेंद्र कुशवाहा, डॉ राम वचन राय, संजय कुमार सिंह, ललन कुमार सर्राफ, डॉ राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, संजय सिंह, देवेश कुमार, प्रमोद कुमार, घनश्याम ठाकुर और निवेदिता सिंह को एम एल सी मनोनीत किया गया था। इस मामले पर कल भी सुनवाई जारी रहेगी।