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बिहार में 50 हाईवे और 45 पुलों पर टोल नीति की तैयारी, शुल्क तय होने की रिपोर्ट तैयार; लागत‑राजस्व संतुलन पर ध्यान

बिहार की सड़कों पर टोल लगने की तैयारी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने 50 स्टेट हाईवे और 45 बड़े पुलों का सर्वेक्षण समाप्त कर लिया है और अब टोल दर तय करने के लिए अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में है। इस कदम से व्यावसायिक ट्रकों और बड़े वाहन मालिकों को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ेगा, जबकि यात्रियों की यात्रा लागत पर सीधे प्रभाव पड़ सकता है।पिछले दो वर्षों में बिहार में राजमार्ग विकास की गति उल्लेखनीय रही है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई नई सड़कें तथा पुलों का निर्माण पूरा हुआ, जिससे औद्योगिक उत्पादन और वस्तु परिवहन में वृद्धि देखी गई। इन infrastructural सुधारों को स्थायी बनाने के लिए टोल प्रणाली को अपनाना प्रशासन की प्राथमिकता बन गया है।

सर्वेक्षण कार्य में राज्य के विभिन्न जिलों के अभियंताओं, तकनीशियनों और स्थानीय अधिकारियों ने मिलकर डेटा संग्रह किया। प्रत्येक हाईवे की लम्बाई, ट्रैफिक घनत्व, सड़क की स्थिति और पुलों की संरचनात्मक क्षमता को ध्यान में रखा गया। इस विस्तृत सर्वे के परिणामस्वरूप टोल लगाने के संभावित स्थानों की सूची तैयार की गई है।

टोल लगने वाली प्रमुख सड़कों में राजगीर‑बहराइच, पटना‑गया, और मुजफ़रपुर‑बक्सर हाईवे शामिल हैं। इन मार्गों पर व्यावसायिक ट्रकों के अलावा दोपहिया और चारपहिया व्यक्तिगत वाहनों को भी अलग-अलग दर पर टोल देना प्रस्तावित है। रिपोर्ट के अनुसार, 5 टन से अधिक वजन वाले ट्रकों पर अधिकतम 250 रुपए तक का शुल्क वसूला जा सकता है।

पिछले सप्ताह, जिला मुख्यालयों में टोल नीति पर सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई। स्थानीय व्यापारी, ट्रक मालिक और नागरिक प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी चिंताएँ और सुझाव पेश किए। कई समूहों ने कहा कि टोल दरें यदि बहुत अधिक रखी गईं तो छोटे व्यापारियों की मार्जिन पर असर पड़ेगा, जबकि अन्य ने सुरक्षा और रखरखाव के लिए अतिरिक्त आय की मांग की।

राज्य सरकार ने इन विचारों को सुनने के बाद एक संतुलित टोल स्लैब तैयार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि टोल राशि को आर्थिक क्षमताओं और मार्ग की महत्त्वता के आधार पर विभाजित किया जाएगा, जिससे किसी एक वर्ग पर अत्यधिक बोझ न पड़े।

टोल नीति को लेकर राज्य के राजमार्ग विभाग के प्रमुख ने कहा, “टोल से प्राप्त आय को सीधे सड़क रखरखाव, पुल की सुरक्षा और नई सड़कों के निर्माण में उपयोग किया जाएगा। यह एक सतत विकास मॉडल है जो दीर्घकालिक लाभ देगा।” उन्होंने यह भी बताया कि टोल संग्रहण के लिए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट प्रणाली और एटीएम आधारित टोल बूथ स्थापित किए जाएंगे।

ट्रक मालिकों की एक संघ के अध्यक्ष ने टोल नीति के संभावित आर्थिक प्रभाव पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “यदि टोल दरें अनुचित रूप से निर्धारित की गईं, तो लॉजिस्टिक खर्च में वृद्धि होगी, जिससे वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफ़ा होगा।” उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि दर निर्धारण में पारदर्शिता और नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए।

पिछले कुछ महीनों में बिहार में कई बड़े उद्योगों ने अपने उत्पादन स्तर को बढ़ाया है, जिससे माल ढुलाई की माँग भी बढ़ी है। इस संदर्भ में टोल नीति का प्रभाव न केवल व्यापारिक लागत पर पड़ेगा, बल्कि राज्य की आर्थिक वृद्धि दर पर भी असर डालेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि उचित टोल दरें राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता सुधार सकती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि टोल नीति का परिचय राज्य सरकार की राजस्व वृद्धि योजना का हिस्सा है। वर्तमान में बिहार की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए अतिरिक्त स्रोतों की आवश्यकता है, और टोल एक संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह नीति चुनावी माहौल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, क्योंकि मतदाता टोल दरों के प्रति संवेदनशील होते हैं।

आर्थिक दृष्टिकोण से, टोल राजस्व को सड़कों के नियमित रखरखाव, पुलों की मरम्मत और नई परियोजनाओं के लिए आवंटित करने से सार्वजनिक खर्च में कमी आएगी। इससे बजट घाटा कम करने और विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। परंतु, इस प्रक्रिया में टोल संग्रहण के लिए तकनीकी बुनियादी ढाँचे में निवेश आवश्यक होगा, जिससे प्रारम्भिक खर्च बढ़ सकता है।

 

Updated: August 25, 2026

Bihar’s shift to tolls turns its recent highway boom into a self‑funding engine, but the true test will be whether price caps stay low enough to keep small traders viable while still feeding the maintenance budget.
If the electronic‑payment rollout falters, the promised revenue stream could evaporate,