Press "Enter" to skip to content

नॉर्थ ईस्ट का होना पाप है क्या? नॉर्थ ईस्ट की हूं कालगर्ल,चाइनीज,प्रॉस्टिट्यूट नहीं

मेरा नाम शैरॉन लामारी है। नॉर्थ ईस्ट के खूबसूरत राज्य मेघालय के शिलॉन्ग में मेरा घर है। मैं हमेशा से आसमान में उड़ना चाहती थी। मेहनत से एयरहोस्टेज बन गई, लेकिन किस्मत को यह मंजूर नहीं था। मैं एयरलाइंस इंडस्ट्री से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में आ गई। जहां भी काम करने के लिए गई, वहां मेरे लिए नॉर्थ ईस्ट का होना एक तरह से पाप हो गया।

लुक्स यानी मेरे नयन-नक्श आज तक मेरे हर काम में आड़े आते हैं। मुझे इस देश का नागरिक ही नहीं माना जाता है। मेरे पास अपने लुक्स को लेकर इतनी कहानियां हैं कि लिखने के लिए दीवारें कम पड़ जाएं। आप आम लोगों को छोड़ दीजिए। इस देश के पढ़े-लिखे जिम्मेदार लोग ही हमें इस देश का नहीं समझते। हमें कुछ भी बोल देते हैं।

2006 की बात है। मैं सहारा एयरलाइंस में एयरहोस्टेज थी। आज के सांसद रवि किशन तब सिर्फ भोजपुरी फिल्मों के एक्टर थे। दिल्ली से मुंबई जा रही हमारी फ्लाइट में वो भी सफर कर रहे थे। उन्होंने फ्लाइट के दौरान पूरे क्रू के सामने पूछा- तुम चाइनीज हो? मुझे बुरा तो बहुत लगा। उस वक्त तो मैंने उन्हें कुछ नहीं कहा, लेकिन पांच मिनट के बाद मैं उनके पास गई और कहा, सर मैंने साड़ी पहनी है, मैं अच्छी हिंदी बोल रही हूं तो आपको मैं कहां से चाइना की लग रही हूं?

मैंने उनसे पूछा कि क्या आपके चाइना में दोस्त हैं, क्या आपने कभी चाइनीज देखें हैं? रवि किशन के पास मेरे सवालों का कोई जवाब नहीं था। जब रवि किशन जैसे लोग ही ऐसी बात करेंगे, हमें चाइनीज समझेंगे तो बाकी लोगों से क्या उम्मीद करें।

कोविड की दोनों लहरों में मैं मुंबई में जहां से भी गुजरती लोग मेरे पास से भाग जाते थे। कई लोग बोलते थे- चाइना..चाइना…चाइना।। ऐसे ही कोई हमें मोमोज बोलता है तो कोई कुछ और, लेकिन हमें कोई इस देश का हिस्सा नहीं मानता है।

मेरे नॉर्थ ईस्ट लुक्स के नुकसान की अति यह थी कि मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे पागलखाने में भर्ती करवा दिया था। मैं 21 दिन पागलखाने में भर्ती रही।

दरअसल, गुवाहाटी में रहने वाले एक पंजाबी लड़के के साथ मैं रिलेशन में थी। मैं उस वक्त सहारा एयरलाइंस में एयर हॉस्टेस थी।
जब कभी मुझे छुट्टी मिलती तो मैं उसके पास गुवाहाटी आ जाती। मेरा अपना भी एक घर गुवाहाटी में था। मेरे पेरेंट्स और भाई-बहन भी वहीं मेरे पास जा जाते थे। वो लड़का मेरे भाई का भी अच्छा दोस्त बन गया था।

उसका वहां एक रेस्त्रां था, मैं जब भी छुट्टी पर जाती थी तो मैं ही वहां बैठती थी। मैं वहां इतना मन लगाकर काम किया करती थी कि घाटे में चल रहा उसका रेस्त्रां प्रॉफिट में आ गया।

लेकिन फिर वही हुआ। वह धीरे- धीरे मुझसे किनारा करना चाहता था। मेरे लुक्स की वजह से वह मुझसे शादी नहीं करना चाहता था। उसका कहना था कि उसका परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं है। उसकी इस बात पर मेरा मन था कि मान ही नहीं रहा था।

एक दिन हम दोनों कहीं जा रहे थे, उसने शराब पीकर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाई और जानबूझकर ऐसे गाड़ी भिड़ा दी जिसमें मुझे ही चोट आई, उसे कोई चोट नहीं आई। मेरा सिर फट गया। शरीर के दूसरे हिस्सों में भी गहरी चोटें आईं।

मुझे गुवाहाटी के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मैं कुछ दिन आईसीयू में रही। आईसीयू से बाहर आने के बाद मैं तरह-तरह की दवाएं खा रही थी। भूख लगने की दवा, नींद आने की दवा यानी हर चीज की दवा। मैं बहुत हाइपर रहने लगी, डॉक्टर मुझसे परेशान हो गए।

नॉर्थ ईस्ट के पहाड़ों में रहने वाला मेरा सीधा-साधा सा परिवार है। बॉयफ्रेंड ने मेरे भाई से कहा कि मुझे पागलखाने में भर्ती करवा दिया जाना चाहिए। मेरी भलाई समझकर भाई मान गया। मेरे परिवार ने मुझे पागलखाने में भर्ती करवा दिया।

जब मुझे वहां ले जाया गया तो मैं नहीं जानती थी कि वह पागलखाना है। मुझे लगा कि मुझे चेकअप के लिए ले जाया जा रहा है। जब एक हॉल कमरे में मुझे धकेला गया। मोबाइल छीन लिया गया।

मैंने वहां से भागने की कोशिश की। भागकर उस हॉल के सामने वाली एक दीवार पर चढ़ गई। मैंने देखा कि दीवार के उस पार भी वैसे ही लोग थे। एक घंटे के बाद मुझे उस दीवार से नीचे उतारा गया और रस्सी से एक बेड के साथ बांध दिया गया।

मैं न चीखी और न चिल्लाई। मैं जानती थी कि मैं पागल नहीं हूं। अगर मैं चीखें मारूंगी तो यह लोग मेरी उल्टी-सीधी दवाएं शुरू कर देंगे। मैं किसी भी तरह से उस पागलखाने से भागना चाहती थी।

मैंने बहुत सूझ से काम लिया। कभी रोई या चीखी चिल्लाई नहीं। नॉर्मल बीहेव किया। ऐसे में तीन-चार घंटों के बाद मेरे हाथ-पांव खोल दिए गए। मैं नॉर्मल रहने लगी।

वहां अजीबोगरीब लोगों के साथ मुझे बहुत खराब लगता था। उनमें एक मैं ही नॉर्मल थी। आप खुद सोचिए कि एक ठीक-ठाक इंसान को पागलखाने में डाल दिया जाए तो उसकी क्या हालत होती होगी।

किसी तरह दिन बीतते रहे। पागलखाने में मौजूद मरीजों को सुबह-शाम आधे-आधे घंटे के लिए खाना खाने के लिए खोला जाता था। बाकी समय बंद रखा जाता था। लोग बिखरे बालों और गंदे कपड़ों में यहां-वहां घूमते रहते थे। लगभग 21 दिन बाद मैं उस पागलखाने से बाहर निकल सकी।

बाहर आकर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। दरअसल बारहवीं के बाद मैंने गुवाहाटी के एक टॉप इंस्टीट्यूट से एयर हॉस्टेस का कोर्स किया था। मैं पहले सहारा एयरलाइंस रही और बाद में कतर एयरलाइंस में।

मैंने पांच साल एयरलाइंस सेक्टर में जॉब किया, लेकिन इस एक्सीडेंट के बाद मेरी एक टांग में रॉड डाली गई, जिसके बाद मैं एयरलाइंस में नौकरी करने के लायक नहीं रही।

मुझे इंसोमेनिया की शिकायत हो चुकी थी। नींद नहीं आती थी। लेकिन मैंने अस्पताल की दवाएं और नींद न आने की दवाएं छोड़ने का फैसला किया। योग और साधना शुरू की। आखिरकार मैं उस मनोस्थिति से निकल ही आई।

अब मैं गुवाहाटी के एयरहोस्टेस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स में ट्रेनिंग देने लगी, लेकिन मुझे रात में मुंबई आने के सपने आते थे। इतने सपने आते थे कि मुझे लगा कि मुझे मुंबई चले जाना चाहिए।

एयरलाइंस सेक्टर की वजह से पहले से मेरे दोस्त मुंबई में रहते थे। मैं यहां चली आई। एक कास्टिंग डायरेक्टर ने मुझसे नाप-तोल में विज्ञापन का काम देने का कहा। एक विज्ञापन के 15 हजार रुपए मिलने थे। महीने में कुल तीन विज्ञापन शूट होने थे।

मुझे लगा कि मुंबई में मेरा गुजारा हो जाएगा। जब मुंबई आई तो महीने में सिर्फ एक ही विज्ञापन शूट करने के लिए मिला। कास्टिंग डायरेक्टर का कहना था कि मेरे लुक्स ऐसे हैं कि सभी राज्यों और इलाके के लोगों को ठीक नहीं लगेगा।

मैं काफी मायूस हुई, लेकिन मेरे अंदर बहुत हिम्मत थी। मैंने तय किया कि मैं मुंबई से जाउंगी तो नहीं। इंटनटेनमेंट इंडस्ट्री में लड़की होने की अपनी चुनौतियां हैं और नॉर्थ ईस्ट की लड़की होने की चुनौतियां तो खत्म ही नहीं होती हैं। मेरे लुक्स हर जगह आड़े आते हैं। मेरा काम मुश्किल कर देते हैं।

मैं सच बताऊं तो नॉर्थ ईस्ट का समाज महिला प्रधान है, बच्चे मां का सरनेम लगाते हैं। प्रॉप्रर्टी में लड़कियों को हिस्सा पहले दिया जाता है। मणिपुर और मेघालय जैसे राज्यों में घर औरतें ही चला रही हैं।

हमारा समाज प्रोग्रेसिव, पढ़ा-लिखा और बराबरी का समाज है। जैसे हमारे यहां बस में अगर मर्द बैठा है तो महिलाएं सीट नहीं मांगती हैं। औरतें वो सारे काम करती हैं, जो मर्द करते हैं। इसलिए वाइन पीना, पार्टी में नाचना या देर रात घर आना, मेकअप करना, फैशनेबल कपड़े पहनना हमारे समाज का हिस्सा हैं।

हम नॉर्थ ईस्ट की हैं इसलिए यहां किसी से अच्छे से बात कर लो तो उसे लगता है कि यह मेरे साथ सोएगी ही, किसी के साथ पार्टी में डांस कर लो तो उसे लगता है कि हम प्रॉस्टिट्यूट हैं, वाइन पी लो तो उसे लगता है कि हम आसानी से उनके लिए अवेलेबल हैं।

एक बार मेरी मुंबई के एक नामी वकील मुलाकात हुई। वह मुझसे कहने लगा कि मैंने नॉर्थ ईस्ट की लड़कियों की जिंदगी बना दी है, तुम्हारी भी बना दूंगा। तुम्हें चाहिए ही क्या अच्छा पैसा और अच्छा सेक्स ? यानी हम नॉर्थ ईस्ट की हैं तो हम सिर्फ सेक्स करने के लिए ही पैदा हुई हैं।

एक बार मुझे मेरा पासपोर्ट रिन्यू करवाना था तो पुलिस वाला मुझसे कालगर्ल की तरह बात करने लगा। अरे भाई मैं पढ़ी लिखी और आत्मनिर्भर हूं। एयरहोस्टेस रही हूं। कोई तवायफ नहीं।

यह तो कुछ भी नहीं। गुवाहटी के जिस इंस्टीट्यूट से मैंने एयरहोस्टेस का कोर्स किया था वह हमें एक एयरलाइंस में नौकरी के इंटरव्यू के लिए मुंबई लेकर आए। रात में इंस्टीट्यूट के एमडी ने मुझे जुहू अपने होटल के कमरे में बुलाया, मैं नहीं गई।

गुवाहाटी जाने के बाद वहां एमडी के साथ काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने मुझे बहुत लताड़ा। कहने लगी कि मैं एमडी के कमरे में क्यों नहीं गई। मैंने उनसे कहा कि मुझे कमरों में जाकर नौकरियां नहीं चाहिए, मैं खुद कर लूंगी।

मैं कहीं भी चली जांऊ, अलग दिखाई देती हूं। टीवी-फिल्म में मुझे काम इसलिए नहीं मिल रहा है कि मेरी शक्ल की किसी की बेटी नहीं हो सकती है। बहू नहीं हो सकती है यानी इंडस्ट्री में हमारे लिए कोई काम नहीं है।

मुझे यहां सब चाइनीज बोलते हैं। मेरे हाथों से बहुत से विज्ञापन निकल गए। ऑडिशन कॉल होते हैं, सिलेक्शन भी होता है। लेकिन बाद में कहा जाता है कि सेमीन्यूड कर लोगे। यानी हम नॉर्थ ईस्ट के हैं तो हम यही सब करेंगे। कई जगह तो मैंने मुंह पर बोल दिया कि नॉर्थ ईस्ट की हूं तो क्या नंगी हो जाऊं? मेरे लुक्स ने प्यार से लेकर करिअर तक में मुझे आगे नहीं बढ़ने दिया।