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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना को लेकर जारी किया गाइडलाइन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओमिक्रोन मरीजों के लिए होम आइसोलेशन में रहने की नई गाइडलाइन जारी की है।

आज बुधवार को होम आइसोलेशन के हल्के और बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों के लिए रिवाइज्ड गाइडलाइंस जारी की हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में दुनिया के अलावा यह भारत में भी देखा गया है कि कोविड-19 के अधिकतर मामले बिना लक्षण और हल्के होते हैं। ऐसे मामले आमतौर पर न्यूनतम दखलअंदाजी, सही मेडिकल गाइडेंस और मॉनिटरिंग के तहत मरीज घर पर ठीक हो जाते हैं।

इसलिए केंद्र सरकार ने अपनी गाइडलाइंस बदलाव की है।

कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव आने के 7 दिन बाद और लगातार 3 दिन तक बुखार नहीं आने के बाद होम आइसोलेशन खत्म हो जाएगा और मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

होम आइसोलेशन पीरियड खत्म होने के बाद मरीज को दोबारा टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।

कोरोना की तैयारी को लेकर आज फिर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा था कि करोना महामारी के तीसरे लहर के रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा की क्या कदम उठाए जा रहे है।एडवोकेट जेनरल ने कोर्ट को बताया कि इस महामारी पर नियंत्रण के कई तरह के राज्य सरकार ने कदम उठाए हैं।करोना महामारी के रोक थाम के दिए गए दिशानिर्देशों का पालन सख्त तरीके किया जा रहा है।
सार्वजानिक स्थलों,सिनेमा,मॉल,पार्क आदि को फिलहाल बंद कर दिया गया।साथ ही 10 रात्रि से सुबह पाँच बजे तक curfew भी प्रशासन ने लागू कर दिया है।
सरकारी,निजी दफ्तरों में कर्मचारियों के पचास फी सदी उपस्थिति के साथ ही कार्य होगा।स्कूलों कॉलेजों में भी इसी तरह की व्यवस्था की गई हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवा को इसके महामारी से निबटने कार्रवाई करने को तैयार किया जा रहा।सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में करोना मरीज के ईलाज के पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि अभी दो लाख व्यक्तियों का प्रति दिन टेस्ट किया जा रहा है।ऑक्सीजन की आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त है और अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति के पूरी कार्रवाई हो रही है।
जो व्यक्ति करोना से पीड़ित हैं,उनके लिए ईलाज की व्यवस्था की गई है।उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

अभी जो ओम्रिकोन नामक नए वेरिएंट के तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति में परिवर्तन हो रहा है।दिल्ली,मुंबई जैसे शहरों से ले कर देश के अन्य भागों में ओम्रिकोन बहुत तेजी से फैल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट व अन्य कई हाई कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई शुरू कर दी गई है।इस स्थिति को देखते हुए कल से ही पटना हाईकोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई प्रारम्भ हो चुका है।

इस मामले पर 12 जनवरी, 2022को सुनवाई होगी।

बिहार में हुआ कोरोना विस्फोट, सात माह पहले वाली स्थिति की और बढ़ा बिहार।

कोरोना प्रोटोकाँल में लापरवाही अब भारी पड़ने लगा है हलात सात माह पहले जैसे होती जा रही है इस बीच खबर आ रही है कि बिहार के दोनों डिप्टी CM समेत 4 मंत्री कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं सभी मंत्री होम आइसोलेशन में हैं वही कल जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह भी कोरोना पाँजिटिव पाये गये थे।

कोरोना संक्रमित मंत्रियों में डिप्टी CM रेणु देवी, डिप्टी CM तारिकशोर प्रसाद, मद्य निषेध मंत्री सुनील कुमार और भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी शामिल हैं।

एक्टिव मरीजों की संख्या 2222 पहुंची वहीं । आरा के नवोदय विद्यालय में 17 छात्र कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।

बिहार में लगा मिनी लॉक डाउन

बिहार में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार (आपदा प्रबंधन समूह/Crisis Management Group) की बैठक में निम्नांकित निर्णय लिए गए है:-

  1. आवश्यक सेवाओ को छोड़ कर सभी दुकाने 8 बजे तक खुली रहेंगी।
  2. रात्रि 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नाईट कर्फ्यू जारी रहेगी।
  3. क्लास 9, 10, 11 एवम 12 की क्लास एवम सभी कॉलेज 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलेंगे।
    ऑनलाइन क्लास को प्राथमिकता देंगे।
  4. क्लास 8 तक के सभी क्लास ऑनलाइन ही चलेंगे।
  5. कोचिंग क्लास 9, 10, 11, 12 के लिए 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलेंगे।
  6. सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय 50 प्रतिशत उपस्थित के साथ खुलेंगे। किसी भी बाहरी व्यक्ति के कार्यालय में प्रवेश वर्जित रहेगा।
  7. सभी पूजा स्थल श्रद्धालुओं के लिए अगले आदेश तक बन्द रहेंगे। केवल पुजारी ही पूजा कर सकेंगे।
  8. सिनेमा हॉल/ जिम/पार्क/ क्लब/ स्टेडियम/ स्वीमिंग पूल पूर्णतः बन्द रहेंगे।
  9. रेस्टोरेंट/ ढाबे आदि 50% कैपेसिटी के साथ खुलेंगे।
  10. शादी विवाह में अधिकतम 50 व्यक्ति तथा अन्तिम संस्कार में 20 व्यक्ति की अनुमति होगी।
  11. सभी राजनीतिक/ सामुदायिक/ सांस्कृतिक सार्वजनिक आयोजनों में अधिकतम 50 व्यक्ति की अनुमति होगी। परंतु इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।
  12. शॉपिंग मॉल पूर्णतः बन्द रहेँगे।

कोरोना के कोहराम का असर कल से हाईकोर्ट में होगा आंनलाइन सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में राज्य में कोरोना महामारी से उत्पन्न हुए हालात को गम्भीरता से लेते हुए कल 4 जनवरी,2022 से मुकदमों की ऑनलाइन सुनवाई होगी। इस सम्बन्ध शिवानी कौशिक व अन्य की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा मौखिक जानकारी दी गई कि चूंकि पटना हाई कोर्ट के कुछ जज व कर्मी भी कोरोना से संक्रमित हो गए, इसलिए कल 4 जनवरी, 2022 से पटना हाई कोर्ट में कामकाज ऑनलाइन तौर पर ही किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों का जीवन भी बहुमूल्य है, इसलिए इन बातों को भी ध्यान में रखना होगा। कोर्ट ने पूर्व में भी सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा था कि कोरोना के नए वैरिएंट के मद्देनजर हमें सावधानी बरतने की जरूरत है। कोरोना अभी गया नहीं है।

इसके पूर्व में भी कोर्ट ने राज्य सरकार से कोरोना को लेकर राज्य भर में मुहैया कराई गई सुविधाओं के संबंध में ब्यौरा देने को कहा था।

अगली सुनवाई आगामी 5 जनवरी, 2022 को होगी।

बिहार में हुआ कोरोना विस्फोट, क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बुलाई गयी बैठक।

बिहार में पिछले 24 घंटों के दौरान 500 से अधिक नये कोरोना के संक्रमित पाये गये हैं. इसकी संख्या में पिछले एक सप्ताह से लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. एक दिन में राज्य में इसके प्रसार की संख्या 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है. साथ ही एक दिन में कोरोना का फैलाव 21 जिलों से बढ़कर 26 जिलों में हो गया ।

इस बीच कल 4 जनवरी को कोरोना के बढ़ते फैलाव को देखते आपदा प्रबंधन की विशेष बैठक बुलाई गयी है जिसमें लांक डाउन और कोरोना से निपटने की तैयारी को लेकर विस्तृत चर्चा होगी ।

कोरोना को लेकर कल होगी बैठक

इधर आज जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के दौरान एंटीजन टेस्ट में 14 लोग संक्रमित पाए गए इसमें 3 पुलिसकर्मी भी शामिल है इसकी सूचना आते ही पूरे मुख्यमंत्री सचिवालय में हड़कम्प मच गया है ।

वही आज से प्रशासन सख्ती बरतनी शुरु कर दिया है मास्क चेकिंग और कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने के लिए पांच नयी टीमें बनायी गयी हैं. अब इसके लिए जिले में कुल 10 टीमें सक्रिय हो गयी हैं.जिन पांच नयी टीमों का गठन किया गया है, उनमें तीन टीमें बस, टेंपो आदि में मास्क की चेकिंग करेंगी. बिना मास्क के अगर ड्राइवर, खलासी या उसमें बैठे अन्य लोग मिले, तो वाहन को जब्त किया जा सकता है.

कोरोना को लेकर हालात सही नहीं –नीतीश

इसके अतिरिक्त दो टीमें दुकानों पर मास्क चेकिंग अभियान चलायेंगी. उपभोक्ता और दुकानदार को बिना मास्क पाये जाने पर दुकान को सील कर दिया जायेगा. इसके अतिरिक्त पांच मोबाइल टीमें सब्जी मंडी तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मास्क चेकिंग कर दंडात्मक कार्रवाई करेंगी।

वही आज से पूरे बिहार में 15 से 18 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण अभियान शुरु हो गयी है इस बीच सीएम ने कहा कि कोरोना से निपटने को सरकार तैयार है और कल की बैठक में निर्णय लिया जा सकता है ।

कोरोना के कहर पर सरकार के रवैये पर हाईकोर्ट ने जतया एतराज

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना महामारी के नए वेरिएंट के बढ़ते प्रभाव के रोक थाम व नियंत्रित किये जाने के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने शिवानी कौशिक व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा है कि करोना महामारी के तीसरे लहर के रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा की क्या कदम उठाए जा रहे है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष राज्य सरकार ने बताया कि अगली सुनवाई में राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा बुकलेट के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को नए सिरे से पूरे तथ्यों की जांच कर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

लेकिन अभी जो ओम्रिकोन नामक नए वेरिएंट के तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति में परिवर्तन हो रहा है।दिल्ली,मुंबई जैसे शहरों से ले कर देश के अन्य भागों में ओम्रिकोन बहुत तेजी से फैल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट व अन्य कई हाई कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई शुरू कर दी गई है।इस स्थिति को देखते हुए पटना हाईकोर्ट में शीघ्र ऑनलाइन सुनवाई होने की संभावना है।
इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामा में राज्य के स्वास्थ्य सेवाओं में विरोधाभासी तथ्यों के मद्देनजर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई थी।

पिछली ऑन लाइन सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग के अपर प्रधान सचिव ने बताया कि राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों से पूरी जानकारियां ले कर उन्हें बुकलेट के रूप में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।

प्रधान अपर स्वास्थ्य सचिव अमृत प्रत्यय ने कोर्ट को बताया था कि बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा समिति के कार्यपालक अधिकारी संजय कुमार के अध्यक्षता में चार सदस्यों की एक टीम गठित किया गया है, जो राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी और उपलब्ध सुविधाओं की जांच कर रहा है।
ज़िला के सभी जिलों के सिविल सर्जनों द्वारा ज़िला के सरकारी अस्पतालों के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा तथ्यों को जांच कर प्रस्तुत करेंगे।

पिछली सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि कोरोना के नए वैरिएंट के मद्देनजर हमें सावधानी बरतने की जरूरत है।कोरोना का खतरा अभी भी बरकरार है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से कोरोना को लेकर राज्य भर में कराई गई सुविधाओं के संबंध में ब्योरा देने को कहा था। कोर्ट ने विशेष तौर साउथ अफ्रीका में फैले कोविड के नए वैरियंट ओमाइक्रोन के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार को राज्य में ऑक्सीजन के उत्पादन और भंडारण के संबंध में सूचित करने को कहा था।
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने बताया था कि कोर्ट ने उसके पूर्व भी राज्य के राज्य भर में उपलब्ध मेडिकल स्टाफ, दवाइयां, ऑक्सीजन व एम्बुलेंस आदि के संबंध में ब्यौरा तलब किया था।

इस मामले पर 5 जनवरी, 2022 को सुनवाई होगी।

बिहार में मिला पहला ओमिक्रांन के मरीज सीएम ने बुलाई आपात बैठक

#OmicronVirus बिहार में ओमिक्रॉन के मरीज मिलने की सूचना के बाद आज मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है जिसमें ओमिक्रांन के सम्भावित खतरों से निपटने को लेकर चर्चा होगी ।स्वास्थ्य विभाग की मानें तो बिहार में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का पहला मरीज गुरुवार को मिला। वह इंग्लैंड से आए भाई से मिलने के लिए दिल्ली गया था, जो संक्रमित है और दिल्ली में क्वारंटाइन है।

ओमिक्रॉन को देखते हुए नीतीश ने बुलाई बैठक

संक्रमित 26 वर्षीय युवक किदवईपुरी के IAS कॉलोनी स्थित घर में होम आइसोलेशन में है। इसका सैंपल जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए दिल्ली स्थित एनसीडीसी लैब भेजा गया था। युवक 21 दिसंबर को संक्रमित हुआ था। अब सुबह से कांटेक्ट ट्रेसिंग शुरू होगी। आज यानी शुक्रवार से ही ओमिक्रॉन मरीज के लिए अलग से सर्विलांस टीम का भी गठन किया जाएगा। 31 दिसंबर को पटना में 99, गया में 48 और मुंगेर में 9 नए केस मिले।

कोरोना को देखते हुए हाईकोर्ट की सुरक्षा बढ़ाई गयी

कोविड – 19 संक्रमण के बढ़ते हुए प्रवृत्ति को देखते पटना हाई कोर्ट परिसर में प्रवेश तत्काल प्रभाव से सीमित कर दिया गया है। पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी नोटिस के अनुसार कोर्ट के सभी कर्मियों को प्रवेश द्वार पर अनिवार्य रूप से पहचान पत्र दिखाने को कहा गया है।

अधिवक्ताओं को कोर्ट द्वारा निर्णय किये गए उचित अधिकारी द्वारा जारी ई – पास दिखाने पर ही प्रवेश दिया जाएगा। इसी तरह से, मुवक्किलों को भी कोर्ट परिसर में प्रवेश हेतु स्पेशल पास जारी किया जाएगा।

जारी नोटिस के अनुसार कोर्ट ऑफीसर को इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। कोविड – 19 के संबंध में पूर्व में अधिसूचित प्रोटोकॉल व मानक संचालन प्रक्रियाओं ( एस ओ पी ) का सख्ती से पालन किया जाएगा और इसका उल्लंघन करने को गंभीरता से लिया जाएगा।

कोरोना से निपटने को लेकर राज्य सरकार की क्या तैयारी इस आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई

#Covid19 : पटना हाईकोर्ट ने राज्य में कोरोना महामारी के मामले पर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने शिवानी कौशिक व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की।

राज्य सरकार ने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया कि अगली सुनवाई में राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा बुकलेट ( Compendium) के रूप में पेश करेगी।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को नए सिरे से पूरे तथ्यों की जांच कर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

इससे पहले राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामा में विरोधाभासी तथ्यों के मद्देनजर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई थी।आज इस मामलें की ऑन लाइन सुनवाई हुई,जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अपर प्रधान सचिव ने बताया कि राज्य के सभी जिलों के अस्पतालों से पूरी जानकारियां ले कर उन्हें बुकलेट( Compendium) के रूप में कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।

राज्य सरकार द्वारा दायर विरोधभासी हलफनामा पर पिछली सुनवाई में ऑन लाइन उपस्थित स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव अमृत प्रत्यय ने खेद जाहिर किया था।उन्होंने कहा था कि अगली सुनवाई में विस्तृत और पूरे तथ्यों के साथ हलफनामा दायर किया जाएगा।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा समिति के कार्यपालक अधिकारी संजय कुमार के अध्यक्षता में चार सदस्यों की एक टीम गठित किया गया है।यह टीम राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी और उपलब्ध सुविधाओं की जांच कर रहा है।

ज़िला के सभी जिलों के सिविल सर्जनों द्वारा ज़िला के सरकारी अस्पतालों के सम्बन्ध में पूरा ब्यौरा तथ्यों को जांच कर प्रस्तुत करेंगे।

राज्य सरकार ने जो इससे पहले ज़िला के सरकारी अस्पतालों के सम्बन्ध में हलफनामा दायर किया था, उसमें काफी जानकारियां सही नहीं थी।कोर्ट ने इसे काफी गम्भीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को पूरा और सही तथ्यों पर आधारित ब्यौरा प्रस्तुत करने को कहा था।

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर आज साढ़े ग्यारह बजे सुबह ऑनलाइन पर सुनवाई किया। कोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के अपर प्रधान सचिव ने ऑन लाइन उपस्थित हो कर सारी स्थिति का ब्यौरा दिया।
कोर्ट ने पटना के सिविल सर्जन को अस्पतालों में सारी व्यवस्था,दवा,डॉक्टर व अन्य सुविधाओं की तैयारी बनाए रखने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा था कि कोरोना के नए वैरिएंट के मद्देनजर हमें सावधानी बरतने की जरूरत है।कोरोना का खतरा अभी भी बना हुआ है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से कोरोना को लेकर राज्य भर में कराई गई सुविधाओं के संबंध में ब्योरा देने को कहा था। कोर्ट ने विशेष तौर साउथ अफ्रीका में फैले कोविड के नए वैरियंट ओमाइक्रोन के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार को राज्य में ऑक्सीजन के उत्पादन और भंडारण के संबंध में सूचित करने को कहा था।

अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने बताया था कि कोर्ट ने उसके पूर्व भी राज्य के राज्य भर में उपलब्ध मेडिकल स्टाफ, दवाइयां, ऑक्सीजन व एम्बुलेंस आदि के संबंध में ब्यौरा तलब किया था।
इस मामले पर 7 जनवरी, 2022को सुनवाई होगी।

बिहार के स्वास्थ्यमंत्री का दावा ओमिक्रम से निपटने को तैयार है बिहार

बिहार सरकार कोविड के तीसरे लहर और ओमिक्रम (#Omicron) के अंदेशा को लेकर पहले से ही पूरी तरह तैयार है…..स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की माने तो सूबे में स्वास्थ्य व्सवस्था को बेहतर करने के साथ ही सूबे के विभिन्न अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट लगाने और डाक्टरो और नर्सो को और हाईटेक ट्रेनिंग कराकर उनको तैयार रहने के लिए एलर्ट कर दिया गया है ।

ओमिक्रोन से लड़ने को तैयार है बिहार

साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया भी जागरूकता फैलाने का काम कर रहा है।हमसभी किसी तरह से निपटने को तैयार है।

कोरोना से मौत मामले में अनुग्रह अनुदान का शीघ्र भुगतान का निर्देश

बिहार सरकार आपदा प्रबंधन विभाग

कोविड-19 से मृत सभी व्यक्तियों के आश्रितों को 4.00 लाख रुपये की दर से अनुग्रह अनुदान की राशि का भुगतान माह- मार्च, 2021 से बिहार सरकार द्वारा किया जा रहा है।

माननीय मुख्यमंत्री, बिहार द्वारा इस हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष से राशि का भुगतान करने की शुरूआत की गयी थी तथा इससे कोविड-19 से मृत 3737 व्यक्तियों के आश्रितों हेतु कुल 149.48 करोड़ रूपये की राशि सभी जिलों में उपलब्ध करायी गयी।

इसके उपरान्त राज्य सरकार ने शेष मृतकों के आश्रितों को राज्य संसाधन से आपदा प्रबंधन विभाग के अधिसूचना संख्या 2098 दिनांक 09.06.2021 द्वारा राज्य के निवासी जिनकी मृत्यु कोविड-19 से राज्य के अन्दर हो गई है, उन्हें अनुग्रह अनुदान की राशि का भुगतान करने का निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री राहत कोष से अबतक कोविड-19 से 3704 मृत व्यक्तियों को 4.00 लाख की दर से कुल 148.16 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा कोविड-19 से अबतक 5111 मृत व्यक्तियों के आश्रितों को 4.00 लाख रुपये की दर से कुल 204.44 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है एवं शेष आश्रितों को भुगतान की कार्रवाई जिला स्तर से की जा रही है। इस प्रकार अबतक बिहार सरकार के द्वारा कुल 8815 लाभुको को 352.60 करोड़ रूपये की राशि उपलब्ध करायी जा चुकी है।

गृह मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के आश्रितों को 50,000 रुपये की दर से अनुग्रह अनुदान का भुगतान राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से करने का निर्णय लिया गया है।

उक्त के आलोक में राज्य सरकार के द्वारा भी पूर्व में कोविड- 19 से मृत व्यक्तियों के आश्रितों को 4.00 लाख रुपये की दर से भुगतान की गई अनुग्रह अनुदान की राशि के अतिरिक्त 50,000 रुपये की राशि का भी भुगतान करने का निर्णय लिया गया है।

इसके अन्तर्गत सभी जिलों को 8815 कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के आश्रितों को भुगतान हेतु कुल 44.075 करोड़ रुपये आवंटित की गई है, जिसका भुगतान जिला पदाधिकारी के स्तर से किया जा रहा है।

सभी जिलों को जिला स्तर से ही कोविड-19 से मृत व्यक्तियों के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान की राशि का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में अंतरित करने का निदेश दिया गया है। अब तक कुल भुगतान की गयी राशि 396.675 करोड़ हैं।

कोरोना को देखते हुए बिहार में हाई अलर्ट जारी अंतर्राष्ट्रीय उड़ान से आने वाले यात्री होगे क्वारैंटाइन।

अंतर्राष्ट्रीय यात्रा को लेकर बिहार में हाई अलर्ट
कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट के बाद भी 10 दिनों तक रहना होगा क्वारैंटाइन।

कोरोना को लेकर देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग व मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण के निर्देश के बाद बिहार में भी अलर्ट कर दिया गया है।

मुख्य सचिव को भेजे गए दिशा निर्देश में सचिव राजेश भूषण ने इंटरनेशनल यात्रियों को लेकर चौकसी बढ़ाने को कहा है। अब विदेश से आने वालों को कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी 10 दिनों तक क्वारैंटाइन होना पड़ेगा।

रेलवे स्टेशन से लेकर एयरपोर्ट पर जांच को लेकर सख्ती बढ़ाने का आदेश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है कि विदेश से आने वालों का सर्च ऑपरेशन तेज किया जाए और जांच में सख्ती की जाए।

पटना एयरपोर्ट पर जांच में जुटी एजेंसी को पटना एयरपोर्ट अथॉरिटी से मिलकर जांच और तेज करने को कहा गया है। जांच में कोई भी यात्री नहीं छुटे इसे लेकर आदेश दिया गया है।

इसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कड़ी निगरानी का आदेश दिया गया।बिहार में इस तरह के दो से अधिक यात्री को चिंहित किया गया है जो हाल ही में विदेश से बिहार लौटे हैं लेकिन सूचना के बावजूद अधिकांश यात्रियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है इसी बीच पटना और दरभंगा हवाई अंड्डा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है

कोरोना को लेकर सरकार फिर सख्त।

राज सरकार ने अनलॉक 9 की घोषणा की है 23 नवंबर से लेकर 30 नवंबर तक राज्य में विवाह समारोह और बरात के दौरान डीजे बजाने की इजाजत नहीं होगी

शादी के तारीख से 3 दिन पहले स्थानीय थाने को सूचना देनी होगी श्राद्ध कर्म में भी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा जिन राज्यों में शंकर मन अधिक है वहां से आने वाले लोगों को कोरोना जांच अनिवार्य कर दिया गया है

क्लब जीमस्विमिंग पूल 50% उपस्थिति के साथ खुलेंगे यहां सिर्फ को भी टीका पर आप लोगों का आना अनुमान होगा

जिन जिलों में अभी भी संक्रमण ज्यादा है वहां से फ्लाइट रेल ट्रक अन्य वाहनों से राज्य से आने वाली यात्रियों की जांच कराई जाएगी जांच कराने में उन्हें ही छूट मिलेगी जो 72 घंटा पहले का आरती पीसीआर टेस्ट लेकर आएंगे

सिनेमा हॉल पहले की तरह 50% उपयोग के साथ ही खुलेंगे शॉपिंग मॉल में प्रोटोकॉल का प्रक्रिया अनिवार्य है

सार्वजनिक स्थानों पर किसी प्रकार का आयोजन जिला प्रशासन की अनुमति के अनुरोध होगा साथ ही 3 दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी दुकानों में सिर्फ को भी टीका प्राप्त व्यक्ति ही कार्य करेंगे

कोरोना और सांप्रदायिकता तनाव को देखते हुए पूरे राज्य में जारी हुआ अलर्ट

दीपावली और छठ को देखते हुए राज्य सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और पुलिस अधिकारियों के साथ साथ प्रशासनिक अधिकारी और मेडिकल फील्ड से जुड़े कर्मियों की छुट्टी अगले आदेश तक के लिए रद्द कर दिया गया है ।

कोरोना और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिलों पर विशेष नजर रखने का निर्देश जारी किया गया है और इसके लिए रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर दो लेयर में सुरक्षा और स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात किया गया है ताकि कोरोना से जुड़े प्रोटोकॉल का पूरी तौर पर पालन हो सके ।

पुलिस मुख्यालय ने इसको लेकर एक निर्देश जारी किया है डीजीपी एसके सिंघल के आदेश पर एडीजी विधि-व्यवस्था विनय कुमार ने छुट्टी पर रोक लगाने से संबंधित पत्र जारी कर दिया है। आदेश के तहत दिवाली, काली पूजा और छठ महापर्व पर विधि-व्यवस्था व सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए 12 दिनों तक पुलिसकर्मियों के सभी प्रकार के अवकाश पर रोक लगाई गई है।

हालांकि विशेष परिस्थितियों में बहुत जरूरी होने पर अवकाश दिया जा सकता है। इसकी मंजूरी जिला, रेल और अन्य इकाइयों के वरीय पुलिस अधिकारी से लेनी होगी। आदेश की कॉपी सभी जिलों के एसएसपी-एसपी के अलावा इकाइयों और बिहार विशेष सशस्त्रत्त् पुलिस के कमांडेंट को भेज दी गई है।

इसी तरह स्वास्थ्य विभाग की और से भी सभी सिविल सर्जन और डीएम को निर्देश जारी किया है जिसके तहत कोरोना प्रोटोकॉल का अनुपालन शत प्रतिशत हो इसके लिए रेलवे स्टेशन ,बस स्टेंड और एयरपोर्ट पर विशेष जांच व्यवस्था कराने का निर्देश जारी किया है ।

दिसंबर तक सूबे के सभी लोगों को लगेगा टीका का पहला डोज

दिसंबर तक सूबे में सभी लोगों को लगेगा
कोरोना टीका का पहला डोजः मंगल पांडेय
संक्रमण से बचाव को लेकर त्योहार एवं अन्य कार्यक्रमों में सावधानी बरतने पर जोर
पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि भारत सरकार सूबे में दोनों डोज के शत-प्रतिशत टीकाकरण को लेकर गंभीर है।

साथ ही इमरजेंसी कोविड रिसपोंस पैकेज (इसीआरपी) के तहत केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त राशि भी आवंटित की जा रही है। बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में आयोजित राज्य के मंत्रियों की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और सुदृढ़ीकरण सहित टीकाकरण को लेकर विभिन्न पहलुआें पर चर्चा हुई।

श्री पांडेय ने कहा कि समीक्षा बैठक में कोरोना की संभावित अगली लहर को देखते हुए पिछले साल की तरह राज्यों को सतर्क रहने को कहा गया है। आने वाले त्योहार एवं वैवाहिक कार्यक्रमों के अलावे अन्य समारोहों सहित धार्मिक स्थलों, शॉपिंग मॉल और बाजारों में सावधानी बरतने पर भी विशेष जोर दिया जाय, ताकि लोग संक्रमण से बच सकें।

साथ ही बैठक में दिसंबर तक कोरोना टीका का पहला डोज का सौ फीसदी पूर्ण करने और दूसरा डोज का प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा डोर-टू-डोर दूसरे डोज से वंचित लोगों का सर्वे किया जा रहा है। बिहार में पहला डोज से छूटे और दूसरा डोज नहीं लेने वालों के लिए मतदाता सूची के आधार पर सर्वे का काम पूर्व से चल रहा है।

समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष मेगा अभियान चला कोरोना टीकाकरण की संख्या भी बढ़ायी जा रही है।
श्री पांडेय ने कहा कि इमरजेंसी कोविड रिसपोंस पैकेज (इसीआरपी) फेज-2 के तहत बिहार को करीब साढ़े 13 सौ करोड़ रुपये मिलना है। इस मद में से राज्य स्वास्थ्य समिति को लगभग 860 करोड़ रुपये मिल चुका है। इसीआरपी फेज-2 स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ-साथ पीडियाट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर एवं रेफरल ट्रांसपोर्ट पर केंद्रित होगा।

इसके अलावे प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत इस वर्ष इस 1116 करोड़ रूपये की योजना स्वीकृत हुई है। 2025 तक बिहार को 62 सौ करोड़ रुपये मिलना है। इस राशि का उपयोग शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए डायग्नॉस्टिक सेवाओं को विकसित करने एवं प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का शहरी क्षेत्र में विकेंद्रीकृत करने में किया जायेगा। प्रत्येक 15 हजार शहरी आबादी पर एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित होगा।

श्री पांडेय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदत राशि से शहरी क्षेत्रों के अलावे ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर किया जायेगा। उप स्वास्थ्य केंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए नये भवनों का निर्माण उन जगहों पर किया जायेगा, जहां मौजूदा भवन उपलब्ध नहीं है।

साथ ही इस राशि को प्रखंड जन स्वास्थ्य इकाइयों के माध्यम से रोगों की निगरानी और जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला को प्रखंड स्तर पर विकसित करने के अलावे इस राशि को स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डायग्नॉस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में लगाया जायेगा।

कोरोना से हुई मौत मामले में सरकार पीड़ित परिवार को शीघ्र मुआवजा भुगतान करे –हाईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने Covid 19 महामारी के कारण हुए मृत लोगों के परिवारों को चार लाख रुपये या अधिसूचित मुआवजा की राशि मुहैया कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता कुणाल की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष अभ्यावेदन दायर करने को कहा है।

याचिका में Covid 19 के कारण मृत लोगों की सही – सही आंकड़ा उपलब्ध करवाने हेतु आदेश देने का आग्रह किया गया था। वरीय अधिवक्ता बसंत कुमार चौधरी ने बताया कि आपदा प्रबंधन एक्ट, 2005 की धारा 12 के तहत निर्देश देने को लेकर याचिका दायर की गई थी।

याचिका में कोरोना के कारण मृत लोगों की सही – सही आंकड़ा उपलब्ध करवाने व मृतक के परिवार को मृत्यु का कारण बताते हुए आधिकारिक कागज उपलब्ध करवाने का भी आग्रह किया गया था।

याचिका में कहा गया है कि मार्च, 2020 में कोरोना का संक्रमण भारत में देखा गया। मार्च, 2021 में कोविड का दूसरा लहर भारत में आया। अप्रैल, 2021 से राज्यभार में बडी तादाद में लोगों की कोविड की वजह से मौत हुई।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल में बेड की कमी, अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी, दवाओं की कमी, डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ की सरकारी अस्पताल में अनुपलब्धता व एम्बुलेंस की कमी सहित कई अन्य कारणों की वजह से भी कोविड के रोगियों की मौत राज्य में हुई। याचिकाकर्ता का कहना था कि एक सर्वे में पाया गया है कि कोविड की वजह से बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई है।

लेकिन राज्य सरकार का आंकड़ा विश्वास के योग्य नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया आंकड़ा वास्तविक आंकड़ा से बहुत कम है। राज्य सरकार द्वारा कोविड से मृत परिवार को 4 लाख रुपये मुआवजा की राशि उपलब्ध करवाने की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा मुआवजा की राशि अभी तक नहीं दी गई है।

याचिकाकर्ता द्वारा याचिका में 1 अप्रेल, 2021 से 31 मई, 2021 तक कोविड कि वजह से राज्य के तेरह जिलों में मृतकों की एक सूची भी लगाई गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया।

देश में 100 करोड़ कोरोना के टीकाकरण में बिहार का रहा सबसे बड़ा सहयोग 8 करोड़ लोगों को लग चुका है टीका

टीकाकरण का ऐतिहासिक दिन सबों के सामूहिक प्रयास का नतीजाः मंगल पांडेय
31 दिसम्बर 2021 तक आठ करोड़ से अधिक टीकाकरण का आंकड़ा होगा पार
 
पटना। देश मे कोरोना टीकाकरण का आंकड़ा सौ करोड़ के पार होने पर स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने देशवासियों, राज्यवासियों समेत इससे जुड़े स्वास्थकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और कोरोना वारियर्स को शुभकामनाएं दी है। साथ ही इस ऐतिहासिक कार्य के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का आभार जताया है।

श्री पांडेय ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा इस टीकाकरण अभियान की सफलता का श्रेय माननीय प्रधानमंत्री को जाता है, जिनके कारण देशवासियों को मुफ्त में कोरोना का टीका उपलब्ध हो सका।

श्री पांडेय ने इस मौके पर गुरुवार को राजधानी के पाटलीपुत्रा कॉलोनी स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज टीकाकरण केन्द्र पहुंचकर स्वास्थ्य एवं टीकाकर्मियों की हौसला आफजाई की और टीका ले रहे लाभार्थियों से रू-ब-रू हुए। श्री पांडेय ने कहा कि आज का यह ऐतिहासिक दिन सबों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है, जो गर्व और गौरव को विषय है।

बिहार ने जहां अपने लक्ष्य के मुताबिक समय से पूर्व छह करोड़ टीकाकरण का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं 31 दिसम्बर, 2021 तक जनता के सहयोग से 8 करोड़ से अधिक टीकाकरण का आंकड़ा अवश्य पार कर लेगा। देश में टीकाकरण का आंकड़ा 100 करोड़ के पार होने पर राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर दिवाली जैसा दृश्य आयोजित किया जा रहा है।

सभी टीकाकरण केंद्रों पर इस विशेष उपलब्धि पर रोशनी से सजावट कर लोगों को जागरूक करने के लिए संदेश देने का निर्देश राज्य के सभी सिविल सर्जनों को दिया गया है।

श्री पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के निरंतर प्रयास और माननीय मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश पर राज्य में न सिर्फ कोरोना जांच, बल्कि टीकाकरण अभियान को भी गति दी जा रही है। इसका परिणाम है कि बिहार पिछले कई मौकों पर टीकाकरण के मामले में कई राज्यों को पछाड़ देश में सबसे आगे रहा। टीकाकरण अभियान 16 जनवरी 2021 से प्रारंभ हुआ था और करीब 9 माह में देश ने इस विशेष उपलब्धि को हासिल किया।

कोरोना का टीका लेने से छूटे हुए लोगों के लिए विशेष टीकाकरण 22 अक्टूबर को

छूटे हुए लाभाथिर्यों का विशेष टीकाकरण 22 अक्टूबर कोः मंगल पांडेय
आशा एवं आंगनबाड़ी सेविका को इस कार्ययोजना में लगाया गया

पटना। स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में छूटे हुए लाभाथिर्यों का विशेष टीकाकरण 22 अक्टूबर को होगा। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान को और गति देते हुए निर्णय लिया है कि राज्य में जिन लोगों ने अब तक टीकाकरण नहीं करवाया है, उनका अब आशा व आंगनबाड़ी वर्कर्स घर-घर जाकर सर्वे करेंगी और इससे संबंधित रिपोर्ट सौंपेगी। उस आधार पर विभाग उनके लिए विशेष अभियान के तहत उनका टीकाकरण सुनिश्चित करवाएगी।

श्री पांडेय ने कहा कि जिन लोगों ने अब तक टीका नहीं लिया है, उनका सर्वे वोटर लिस्ट के आधार पर पूरे राज्य के अलग-अलग पंचायत व वार्डों में 18 से 20 अक्टूबर तक करवाया जायेगा। यह कार्य संबंधित क्षेत्र के आशा फैसिलिटेटर एवं बीसीएम की देख-रेख में किया जाएगा।

इसके साथ ही इस कार्य में सभी संबंधित सहयोगी संस्थाओं का अनिवार्य रुप से सहयोग लेना सुनिश्चित किया गया है। सर्वे के उपरांत प्रखंड द्वारा आशा से प्राप्त लाभार्थी सूची के अनुसार टीकाकरण सत्र स्थल, टीकाकरण कर्मी एवं संबंधित सामग्री आदि को सूक्ष्म कार्ययोजना में समाहित कर जिला को उपलब्ध कराया जाएगा।

श्री पांडेय ने ये भी कहा कि टीकाकरण की सफलता के लिए दुर्गापूजा के अवसर पर सभी पूजा पंडालों में कोविड -19 टीकाकरण से संबंधित प्रचार-प्रसार सामग्रियों को प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि टीकाकरण के प्रति जागरुकता में और तेजी आ सके।

बच्चों के संदर्भ में कोरोना को लेकर देश का स्वास्थ्य व्यवस्था निपटने में सक्षम।

“बच्चों के संदर्भ में प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने में देश की मौजूदा निगरानी व्यवस्था से काफी मदद मिली”
डॉ. एन के अरोड़ा राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के कोविड-19 कार्यकारी समूह के अध्यक्ष

कोविड-19 टास्क फोर्स के प्रमुख सदस्य डॉ. एन के अरोड़ा ने कोविड-19 वैक्सीन की अब तक की यात्रा और भारत के लिए वर्तमान तथा भविष्य में इसके मायने पर बातचीत की।

देश ने 10 महीने से भी कम समय में 100 करोड़ टीकाकरण की उपलब्धि हासिल कर ली है। यह देश में महामारी की स्थिति में क्या बदलाव लाएगा?
यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। वैक्सीन आत्मनिर्भरता ने इस रिकॉर्ड को हासिल करने में सबसे अधिक सहायता की है। हम इतनी बड़ी आबादी का टीकाकरण कर पाए, क्योंकि हम देश में वैक्सीन का विकास और उत्पादन करने में सफल रहे।
यह उपलब्धि रातोंरात हासिल नहीं की गयी है; यह डेढ़ साल की रणनीतिक सोच, इसके कार्यान्वयन और कड़ी मेहनत का परिणाम है।

हमारे देश में, 94 करोड़ से अधिक वयस्क हैं, जो टीकाकरण के पात्र हैं। कई राज्यों में, 100 प्रतिशत वयस्क आबादी को वैक्सीन की पहली खुराक दी जा चुकी है। भारत की वर्तमान वैक्सीन वितरण क्षमता, वैक्सीन उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति को देखते हुए हम अगले तीन महीनों में वैक्सीन की 70 से 80 करोड़ खुराकें और दे सकते हैं।

भविष्य में हमारे देश में महामारी की स्थिति पांच बातों पर निर्भर रहेगी। एक, लोग कितने प्रभावी ढंग से कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करते हैं? दूसरा, वैक्सीन की उपलब्धता। तीसरा, महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्राकृतिक रूप से संक्रमित होने वाली आबादी का प्रतिशत। चौथा, आने वाले सप्ताहों और महीनों में वायरस के किसी नए रूप (वैरिएंट) का सामने आना और पांचवां, भविष्य में मामलों में वृद्धि के निदान के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारी।

दूसरी लहर के दौरान, देश भर में 70 से 85 प्रतिशत लोग संक्रमित हुए। इसके अलावा, पिछले चार महीनों में कोई नया रूप (वैरिएंट) सामने नहीं आया है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से आईसीयू बेड की संख्या, ऑक्सीजन की आपूर्ति व जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता को बढ़ाने और नैदानिक सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए गए हैं। अब, यह देशवासियों पर निर्भर है कि वे कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन, विशेष रूप से आने वाले त्योहारों के दौरान भी जारी रखें। मुझे दृढ़ विश्वास है कि कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करने और अनुशासन बनाए रखने से मामलों को कम रखने तथा सामान्य स्थिति की ओर लौटने में काफी मदद मिलेगी।

हालांकि भारत बच्चों की वैक्सीन (टीका) का सबसे बड़ा उत्पादक रहा है, लेकिन इसे वैक्‍सीन (टीका) विकसित करने के लिए नहीं जाना जाता था। महामारी के दौरान, हालांकि इसने अनेक वैक्सीन विकसित की। ऐसा कैसे संभव हुआ?
पिछले दो दशकों में, देश ने आधारभूत विज्ञान अनुसंधान के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने के क्षेत्र में बड़ी उन्‍नति की है।

वास्तविक बदलाव तब शुरू हुआ जब पिछले साल नए टीकों के बुनियादी अनुसंधान और विकास को उत्प्रेरित करने एवं प्रोत्साहित करने का निर्णय किया गया। मार्च 2020 में, बड़ी धनराशि का निवेश किया गया, और एक अनुकूल वातावरण तैयार किया गया। इसने वैज्ञानिकों के साथ-साथ उद्यमियों को भी नए टीकों के विकास के लिए सहयोग करने और एक जगह पर आने के लिए प्रोत्साहित किया। अंतरराष्ट्रीय भागीदारों, स्थानीय निर्माताओं, वैज्ञानिकों और विभिन्न विज्ञान प्रयोगशालाओं के बीच सहयोग के परिणामस्वरूप नई प्रौद्योगिकी का विकास और हस्तांतरण हुआ।

इसके परिणामस्‍वरूप, भारत महामारी की शुरुआत के 10 महीने से भी कम समय में अपना राष्ट्रव्यापी टीकाकरण कार्यक्रम शुरू कर सका। आज, इसके पास कोविड टीकों की एक मजबूत पाइपलाइन-निष्क्रिय वैक्सीन, सब-यूनिट वैक्सीन, वेक्टर्ड वैक्सीन, डीएनए वैक्सीन, आरएनए वैक्सीन है- जो वयस्कों के साथ-साथ देश के और अनेक अन्‍य देशों के बच्चों के लिए उपलब्ध होगी।

इन टीकों को बहुत कम समय में विकसित किया गया और इन्हें आपातकालीन उपयोग का अधिकार दिया गया, जिसका अर्थ है कि उनके दीर्घकालिक प्रभाव का अध्ययन करने से पहले उन्हें लोगों के लिए उपलब्ध कराया गया। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या अन्‍य उपाय किए गए?

जून-जुलाई, 2020 के महीनों से ही, दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने टीकों के संभावित प्रभावों और दुष्प्रभावों पर चर्चा शुरू कर दी थी। सितम्‍बर-अक्टूबर तक, भारत में, एक विस्तारित विशेषज्ञ पैनल स्थापित किया गया जो वयस्क टीकाकरण के कारण उत्पन्न हो सकने वाली समस्याओं के समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक टीकाकरण के बाद प्रतिकूल स्थिति (एईएफआई) पर नजर रख सके। इस पैनल में अन्‍य लोगों के अलावा सामान्य चिकित्सक, पल्मोनोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट शामिल थे। एईएफआई सदस्यों के लिए देश भर में जांच, कारण और प्रभाव प्रशिक्षण अक्टूबर-नवम्‍बर में आयोजित किया गया था और दिसम्‍बर तक उनमें से अधिकांश को प्रशिक्षित किया जा चुका था।

देश ने उन नैदानिक स्थितियों को शामिल करने के लिए एक सूची तैयार की जिनकी परम्‍परागत रूप से प्रतिकूल घटनाओं के रूप में जानकारी दी जा रही थी, लेकिन अतिरिक्त स्थितियों को सूची में जोड़ा गया जो सैद्धांतिक रूप से किसी भी नए टीके के साथ उत्‍पन्‍न हो सकती हैं – इन्हें एईएसआई भी कहा जाता है, यानी विशेष रुचि की प्रतिकूल घटनाएं।

आसपास के अस्पतालों या जिला अस्पतालों में कार्यरत टीके लगाने वालों, नर्सों और डॉक्टरों को इस बारे में जागरूक किया गया कि कैसे किसी भी साधारण प्रतिक्रिया से होने वाली प्रतिकूल घटना, जहां अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है, उसे प्रबंधित और रिपोर्ट किया जा सकता है।

बच्चों के मामले में प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं से निपटने में देश के मौजूदा निगरानी अनुभव ने काफी मदद की।
डब्‍ल्‍यूएचओ ने इस कार्य को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके राष्ट्रीय कार्यालय में एक वैक्सीन-सुरक्षा प्रभाग है जो तकनीकी सहायता के साथ-साथ लॉजिस्टिक सहयोग प्रदान करता है।

प्रत्येक टीकाकरण केन्‍द्र में टीकाकरण के बाद 30 मिनट निगरानी रखने के लिए बैठने के स्‍थान की व्‍यवस्‍था है। इसका उद्देश्य किसी भी गंभीर प्रतिक्रिया जैसे कि एनाफिलेक्सिस को तुरंत प्रबंधित करना और फिर उन्हें निकटतम स्वास्थ्य सुविधा में भेजना है। इस दृष्टिकोण ने कई सौ लोगों की जान बचाई है। टीके की एक खुराक देने के 28 दिन के भीतर होने वाली किसी भी नैदानिक घटना या बीमारी को आगे जांच और यह निर्धारित करने के लिए कि क्या यह टीके और टीकाकरण से संबंधित है, इसकी जानकारी एईएफआई के रूप में दी जानी चाहिए। नियमित पूरक निगरानी की जानकारी के लिए देश भर में 20 से 25 स्‍थानों पर अस्पतालों और सामुदायिक स्थलों पर सक्रिय निगरानी स्थापित की गई। इससे हमें टीकों के किसी भी संभावित दीर्घकालिक प्रभाव को खारिज करने में भी मदद मिलेगी।

टीके की सुरक्षा के बारे में लोगों को समझाना कितना मुश्किल था?
पोलियो उन्मूलन के लिए चलाए गए एक लंबे अभियान, जिसने टीके को लेकर संदेह को दूर किया, की वजह से देश कोविड-19 टीकों के बारे में गलत सूचनाओं, अफवाहों से निपटने के लिए पहले से ही तैयार था। सरकार ने टीकाकरण अभियान शुरू होने से पहले ही पिछले साल अक्टूबर में सामाजिक जागरुकता कार्यक्रम शुरू कर दिया था। इस प्रणाली ने टेलीविजन चैनलों, प्रिंट मीडिया, वेबिनार, रेडियो कार्यक्रमों, आमने-सामने के संवाद के माध्यम से तथ्य-आधारित, वैज्ञानिक जानकारी के प्रसार के लिए समग्र दृष्टिकोण को अपनाया। इसके अलावा, कई प्रतिष्ठित व्यक्ति, धार्मिक नेता, सामुदायिक नेता जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल थे क्योंकि उनका जनता के साथ एक मजबूत जुड़ाव है।

पहली बार, सोशल मीडिया स्कैनिंग एक व्यवस्थित तरीके से की जा रही है ताकि अफवाहों और गलत सूचनाओं पर बहुत बारीकी से नजर रखी जा सके, उनकी निगरानी की जा सके, उनका विश्लेषण किया जा सके और व्यवस्थित तरीके से उनका मुकाबला किया जा सके। मेरा यह मानना है कि टीके (वैक्सीन) को लेकर शंका भी एक संक्रामक बीमारी की तरह है, यह तेजी से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्रों में फैलती है यदि इसे खत्म करने के लिए त्वरित कार्रवाई नहीं की जाती है।

आपको क्या लगता है कि देश के लिए बाकी आबादी का टीकाकरण करना कितना आसान या मुश्किल होगा?
भारत में 94 करोड़ वयस्क हैं और इस आबादी को पूरी तरह से प्रतिरक्षित करने के लिए लगभग 190 करोड़ खुराक की आवश्यकता है। जहां तक टीके की आपूर्ति और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे का सवाल है, हमें पूरा भरोसा है। वास्तव में, हम अभी लोगों में टीका लगवाने को लेकर उत्साह का माहौल देख रहे हैं, उनमें अब टीके को लेकर कोई शंका नहीं है। आगे मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास है कि प्रासंगिक कारणों को दूर करने के ठोस प्रयासों से देश को पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

कोरोना के तीसरी लहर को देखते हुए अस्पतालों में बच्चों के लिये बनेंगे 1516 कोविड डेडिकेटेड बेडः मंगल पांडेय

स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए बच्चों के लिए बिहार में करीब 1516 कोविड डेडिकेटेड बेड बनाये जाएंगे। इस संदर्भ में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद राज्य स्वास्थ्य समिति ने बीएमआईसीएल को निविदा निकाल आगे की कार्रवाई करने को कहा है, ताकि तय समय पर राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में बेड अधिष्ठापित हो सके। अगले मार्च माह तक कार्य के पूर्ण होने की संभावना है।

श्री पांडेय ने कहा कि कोरोना पीड़ित बच्चों को त्वरित एवं बेहतर इलाज उपलब्ध हो सके इसे ध्यान में रख कर बेड की व्यवस्था की जा रही है। राज्य के सभी जिलों में कोविड डेडिकेटेड बेड लग जाने से आपात स्थिति में कोरोना से ग्रामीण क्षेत्रों के पीड़ित बच्चों का इलाज अपने नजदीकी जिलों में संभव हो सकेगा और आर्थिक बोझ से भी मुक्ति मिलेगी।

माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर कोरोना की रोकथाम और संभावित तीसरी लहर से सामना करने लिए राज्य में सभी आवश्यक तैयारियां पुख्ता करने का निर्देश दिया है, ताकि सही समय पर स्थितियों से निपटा जा सके। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास जारी है।

श्री पांडेय ने कहा कि 30 जिलों में 42-42 बेड और 8 जिलों में 32-32 बेड की व्यवस्था की जाएगी। कुल 1516 बेड में 456 हाइब्रिड आईसीयू बेड होंगे एवं 1060 ऑक्सीजनयुक्त बेड रहेंगे। इनमें कुछ बेड हाई डिपेंडेंसी होंगे।

विभाग संभावित तीसरी लहर के अलावे राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रखंड, अनुमंडल और सदर अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेजों में संसाधनों को बढ़ाने का लगातार कार्य कर रहा है।

कोविड डेडिकेटेड बेड के क्रियाशील होने के बाद इसके संचालन को लेकर भी अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये जाएंगे, ताकि मरीजों को परेशानी न हो ।