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देश 1974 के छात्र आंदोलन की तरफ तो नहीं बढ़ रहा है

हिंसक आन्दोलन का जो हश्र होता है ठीक उसी दिशा में RRB-NTPC परीक्षा धांधली को लेकर जारी आन्दोलन बढ़ चला है और इस आंदोलन को लेकर चर्चा में आये खान कल से ही सफाई दे रहे हैं कि छात्रों के हिंसा में मेरा कोई वास्ता नहीं है और मैं छात्रों से अपील कर रहा हूं कि हिंसा न करे फिर भी छात्र हिंसा कर रहे हैं तो मैं क्या करु।

वैसे कल देर रात पटना के पत्रकार नगर थाने में कोचिंग संचालक खान समेत प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराने वाले छह शिक्षक एसके झा, नवीन, अमरनाथ, गगन प्रताप और गोपाल वर्मा समेत बाजार समिति के कई कोचिंग संचालकों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है इन पर छात्रों को भड़काने और हिंसा फैलाने की साजिश रचने का आरोप है, आज NSUI दिल्ली में रेल भवन का घेराव करेंगे। वही छात्र संगठन आइसा व नौजवान संगठन इनौस ने आरआरबी एनटीपीसी की परीक्षा के रिजल्ट में धांधली तथा ग्रुप डी की परीक्षा में एक की जगह दो परीक्षाएं लेने के खिलाफ 28 जनवरी को बिहार बंद का आह्वान किया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रोजगार जैसे मुद्दों को सरकार हिन्दू मुसलमान .नेहरू,सुभाष और भारत पाकिस्तान से सहारे कब तक टालती रहेगी क्यों कि आज ना कल भूख और पेट की आग का सवाल उठेगा ही और उस दिन देश जलने से कोई रोक नहीं सकता है ।

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं का मूड जानने के लिए मैं गांव गांव घूम रहा था इसी दौरान मैं नवादा शहर को कोई 20 किलोमीटर दूर उस लोकसभा क्षेत्र के सबसे बड़े महादलित गांव में मतदाताओं का मूड जानने पहुंचा था उस गांव में पासी जाति के लोग रहते थे नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून को लेकर लोग काफी खफा थे बिहार में पासी समाज शराब के धंधे में पीढ़ी दर पीढ़ी से लगे हुए उस गांव के दो दर्जन से अधिक महिला और पुरुष जेल में था बात शुरु हुई नहीं कि महिला और पुरुष नीतीश कुमार पर टूट परा नांन स्टांप गाली देता रहा यह सिलसिला 30 मिनट तक चलता रहा इस दौरान मेरी कोशिश ये रही की वोट किसको दे रहे हैं ये स्पष्ट हो सके सावल दर सवाल चलता रहा लेकिन कोई खुल कर बोलने को तैयार नहीं था तभी एक युवा कैमरे के सामने आया और कहां सर मेरा नाम संदीप चौधरी है ये मेरे पिता जी है और ये प्लंबर मिस्त्री का काम करते हैं और ये मेरी माँ है आंगनवाड़ी सेविका है मैं पांच वर्ष से पटना में रह कर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा हूं और ये सही है की मोदी के राज में सरकारी नौकरी की वेकेंसी नहीं आ रही है पहले 1500 रुपया में काम चल जाता था लेकिन महंगाई इतनी बढ़ गयी है कि अब चार हजार रुपया महिना खर्च हो रहा है मतलब मेरे माँ पिता के आमदनी का बड़ा हिस्सा मेरे पढ़ने पर खर्च हो रहा है बहन की शादी करनी है मेरी वजह से पैसा नहीं बच पा रहा है लेकिन सर सवाल देह(शरीर) का नहीं है देश का है।

मोदी की नीति के कारण सरकारी नौकरी जरूर कम हो गयी लेकिन पेट से बड़ा सवाल देश हैं और इस बार देश के लिए वोट करेंगे देश रहेगा तब ना पेट की चिंता करेंगे, इसलिए इस बार मोदी को ही वोट देंगे ।

मतलब भारत पाकिस्तान का मुद्दा इस स्तर पर गांव गांव में पहुंच गया था और इस मुद्दा के आगे दो जून की रोटी का मुद्दा भी गौण पड़ गया था हालांकि रोजगार का मुद्दा बिहार विधानसभा में बड़ा मुद्दा बन गया था और 10 लाख लोगों को रोजगार देने कि घोषणा की वजह से ही रातो रात तेजस्वी बिहार के युवाओं का चहेता बन गया था और बड़ी मुश्किल से नीतीश और मोदी के सरकार की वापसी हो पाई थी ,जबकि बिहार में जाति और सामाजिक समीकरण अभी भी तेजस्वी के अनुकूल नहीं है फिर भी उसकी पार्टी इस तरह से फाइट दिया था मोदी और नीतीश को ।

लेकिन अब भावनात्मक मुद्दे भारत पाकिस्तान ,हिन्दू मुसलमान और नेहरू सुभाष पर बेरोजगारी और रोजगार का सवाल भारी पड़ता जा रहा है और RRB-NTPC परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों का जो उग्र प्रदर्शन हो रहा है वो उसी फ्रस्टेशन (हताशा) का प्रकटीकरण है क्यों कि जहां जहां यह हंगामा चल रहा है बिहार का वो जगह पटना ,नालंदा ,गया ,आरा ,बक्सर ,सासाराम,जहानाबाद कोचिंग संस्थानों का हब है जहां वर्षो से हजारों छात्र सरकारी वैकेंसी के इन्तजार में लाखो लाख रुपया कोचिंग और घर से बाहर रहने पर खर्च कर रहा है और अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है इसलिए सरकार इस आंदोलन को पुलिस के बल पर रोक ले ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है यू कहे तो बारूद के ढेर सरकार बैठी है और कभी भी बड़ा विस्फोट हो सकता है और 1974 जैसा छात्र आन्दोलन पूरे देश में फैल जाये तो कोई बड़ी बात नहीं होगी ।

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