Press "Enter" to skip to content

Posts tagged as “#PatnaHighCourt”

पटना हाइकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को पटना के कदमकुआं स्थित नेत्रहीन स्कूल का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई की। कोर्ट ने पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पटना के कदमकुआं स्थित नेत्रहीन स्कूल का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

पूर्व में कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस स्कूल में एडहॉक आधार पर बारह शिक्षकों की बहाली की गई।कोर्ट ने जानना चाहा था कि इन शिक्षकों की बहाली की क्या प्रक्रिया थी।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि इन दिव्यांग स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अनुशंसा करने हेतु बिहार कर्मचारी चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया था।

लेकिन आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 2018 के बाद कोई प्रस्ताव सरकार की ओर से नहीं आया है।कोर्ट ने इस बात को बहुत को बहुत गम्भीरता से लिया कि पटना के कदमकुआं स्थित दिव्यांग( नेत्रहीन) स्कूल में मात्र एक शिक्षक है।वह भी संगीत शिक्षक हैं।जबकि वहां स्कूल में शिक्षकों के स्वीकृत पद ग्यारह है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामलें दिन प्रतिदिन सुनवाई होगी।इससे पहले इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वृषकेतु शरण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 2014 में विज्ञापित पदों पर अब तक नहीं भरा जा सका है। यह अपने आप में राज्य का उदासीन रवैया दर्शाता है।

गौरतलब है कि इस मामले में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर कर बताया था कि निःशक्त बच्चों से जुड़ी सभी परियोजनाएं तीन महीनों के भीतर कार्यरत हो जाएंगे ।

इस पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर अपनी कार्य परियोजना बताने के लिए कहा था। इस मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी,2023 को होगी।

पटना हाइकोर्ट में पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर केंद्र, राज्य सरकार, NHAI और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने के लिए 24 फरवरी, 2023 तक का मोहलत दिया

पटना हाइकोर्ट में पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की गई। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और अन्य सम्बंधित पक्षों को हलफनामा दायर करने के लिए 24फरवरी,2023 तक का मोहलत दिया।

इससे पहले अधिवक्ताओं की टीम ने खंडपीठ के समक्ष पटना गया डोभी एनएच का निरीक्षण कर कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया था।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

वकीलों की टीम राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य के निरीक्षण पिछले सप्ताह के अंत में किया। कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगायी गई मशीन और मानव संसाधन के सम्बन्ध में भी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फेज 2 के निर्माण में उत्पन्न कर रही बाधाओं और अतिक्रमण को राज्य सरकार शीघ्र हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके लिए आवश्यक पुलिस बल और व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश सबंधित ज़िला प्रशासन को दिया है।

इससे पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।

कोर्ट ने फेज दो के 39 किलोमीटर से 83 किलोमीटर के बीच सभी प्रकार के अतिक्रमण को तेजी से हटाने का आदेश दिया।वही फेज तीन के 83 किलोमीटर से 127 किलोमीटर के बीच के अतिक्रमण को भी हटाने का आदेश दिया।

पिछली सुनवाई कोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने कोर्ट को बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।

इस मामलें पर 24फरवरी,2023 को फिर सुनवाई की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट ने बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के कर्मचारियों को पांचवां और छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुसार वेतनमान देने का निर्देश दिया है

पटना हाइकोर्ट ने बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के कर्मचारियों को पांचवां और छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुसार वेतनमान देने का निर्देश दिया है। जस्टिस पी वी बजंत्री की खंडपीठ ने बलिराम सिंह की अपील पर सुनवाई कर ये आदेश दिया।

कोर्ट ने पांचवां और छठे वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में 1जनवरी,1996 से पांचवां वेतन आयोग और छठा वेतन आयोग का लाभ 1जनवरी,2006 से अब तक का बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम के कर्माचारियों को लाभ देने का निर्देश दिया।अपीलकर्ता ने 21अगस्त,2017 को पटना हाइकोर्ट द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध अपील दायर की थी।

कोर्ट को याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि 22 दिसंबर,1961 को बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम ने संकल्प लिया था कि इनके कर्माचारियों को राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान वेतन व अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराया जाएगा।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने ये भी पाया कि बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम ने इस सम्बन्ध में कोई नियम नहीं बनाया है।इसीलिए कोर्ट ने आदेश दिया कि इस निगम के कर्मचारियों को दोनों वेतन आयोग के अनुशंसा का लाभ चार माह के भीतर देना होगा।

अगर इन्हें अगर चार माह के भीतर इन्हें धनराशि नहीं दी गई,तो निगम को इन्हें 8 फी सदी ब्याज के साथ ये धनराशि देनी होगी।इसके साथ ही कोर्ट ने मामलें को निष्पादित कर दिया।

अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार व रितिका रानी और बिहार राज्य वित्त निगम की ओर से डा. आनंद ने कोर्ट के समक्ष पक्षों को रखा।

बिहार में जुनियर इंजीनियर के 6379 पदों पर बहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा नए सिरे से विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा

पटना । बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के अंतर्गत जुनियर इंजीनियर के 6379 पदों पर बहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा नए सिरे से विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। पटना हाईकोर्ट में अजय कुमार भारती की याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई।

इस मामलें की सुनवाई जस्टिस पी वी बजंत्री की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुनियर अभियंताओं की बहाली नियमों में परिवर्तन और नए सिरे से बहाली का विज्ञापन चार माह में निकालने का निर्देश दिया।

साथ ही इस प्रक्रिया में जिन उम्मीद्वारों की उम्र सीमा खत्म हो जायेगी,उन्हें उम्र सीमा में ढील दी जाएगी।जूनियर इंजीनियर की बहाली के लिए जो 2015और 2017 अर्हताएं रखी गई थी,उन्हें इस याचिका में चुनौती दिया था।

exam

25 जनवरी,2023 को राज्य सरकार ने एक बैठक की।इसमें ये निर्णय हुआ कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में जुनियर इंजीनियर की बहाली सम्बन्धी विज्ञापन को वापस लिया जाएगा।साथ ही इनकी बहाली के लिए बिहार तकनीकी सेवा आयोग को भेजे गए प्रस्ताव वापस लिए जाएँगे।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को ये जानकारी दी गई कि इन पदों पर नए नियम बनाने के बाद से फिर से बहाली हेतु विज्ञापन प्रकाशित किया जाएगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार व रितिका रानी ने पक्ष प्रस्तुत किया, जबकि राज्य सरकार का पक्ष अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने प्रस्तुत किया।

कोर्ट ने उपरोक्त आदेश के साथ याचिका को निष्पादित कर दिया।

पटना हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक के परीक्षा परिणाम पर रोक लगा दिया

पटना हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक के परीक्षा परिणाम पर रोक लगा दिया है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने वसुन्धरा राज व संगीता कुमारी की ओर से अधिवक्ता चंद्रशेखर सिंह के जरिये दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए मनोविज्ञान विषय के सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए घोषित होने वाले परिणाम पर रोक लगा दिया है। उल्लेखनीय है कि विभिन्न विषयों के सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए बिहार राज्य विश्विद्यालय सेवा आयोग द्वारा रिक्तियां प्रकाशित की गई थी।

Patnahighcourt

इसके बाद, मनोविज्ञान विषय का इंटरव्यू भी हो चुका है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि आरक्षण के मामले में कथित रूप से गड़बड़ी की गई है।

कोर्ट को बताया गया कि मनमाने ढंग से पिछड़े वर्ग के याचिकाकर्ता को अनारक्षित कोटि में डाल दिया गया। इस मामले में आगे भी सुनवाई की जाएगी।

PatnaHighCourt News: बिहार के पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई हुई

पटना हाइकोर्ट में राज्य की पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ के समक्ष राज्य के एडीजी कमल किशोर सिंह ने पुलिस स्टेशन की स्थितियों के सम्बन्ध रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

PatnaHighCourt ने उन्हें नए बने पुलिस स्टेशन को आधुनिक बनाने के सन्दर्भ में पूरा रिपोर्ट कोर्ट में अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने उन्हें ये देखने को कहा कि थानो को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कार्रवाई आवश्यक है।

साथ ही PatnaHighCourt ने राज्य के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया कि थाने में बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए क्या क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।पुलिस थाना सही और ढंग से कार्य करें,इसके उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने ए डी जी कमल किशोर सिंह को कोर्ट और राज्य कार्डिनेटर के रूप में कार्य का जिम्मा सौंपा था।

पूर्व की सुनवाई में PatnaHighCourt ने राज्य सरकार को कॉर्डिनेटर के रूप में कार्य करने के वरीय पुलिस अधिकारी का नाम का सुझाव देने को कहा था।राज्य में 1263 थाना है,जिनमें 471 पुलिस स्टेशन के अपने भवन नहीं है।

इन्हें किराये के भवन में काम करना पड़ता है।कोर्ट ने बिहार स्टेट पुलिस बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

जब तक दूसरे भवन में पुलिस स्टेशन के लिए सरकारी भवन नहीं बन जाते,तब तक पुलिस अधिकारी एडीजी कमल किशोर सिंह कॉर्डिनेटर के रूप में कॉर्डिनेट करेंगे।

इससे पहले भी पुलिस स्टेशन की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का मामला कोर्ट में उठाया गया था।राज्य सरकार ने इन्हें सुधार लाने का वादा किया था,लेकिन ठोस परिणाम नहीं दिखा।

इसी तरह का एक मामलें पर जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने सुनवाई करते हुए पुलिस स्टेशनों की दयनीय अवस्था को गम्भीरता से लिया।उन्होंने इस मामलें को जनहित याचिका मानते हुए आगे की सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच में भेज दिया।

PatnaHighCourt में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता सोनी श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जो थाने सरकारी भवन में चल रहे हैं, उनकी भी हालत अच्छी नहीं है।उनमें भी बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है।उन्होंने बताया कि बढ़ते अपराध को देखते हुए ये आवश्यक है कि थाना और पुलिसकर्मियों को आधुनिक बनाया जाए।

उन्होंने बताया कि पुलिस स्टेशन में बिजली,पेय जल,शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं है। लगभग आठ सौ थाने ऐसे है, सरकारी भवन में चल रहे है,लेकिन उनकी भी दयनीय अवस्था है।

उन्होंने PatnaHighCourt को बताया कि जो थाना सरकारी भवन में है,उनमें भी निर्माण और मरम्मती की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि कई पुलिस स्टेशन के भवन की स्थिति खराब है।

पुलिसकर्मियों को काफी कठिन परिस्थितियों में और कई सुविधाओं के अभाव में कार्य करना पड़ता है।इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई करते हुए पटना हाइकोर्ट ने AIIMS पटना के अधिवक्ता को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक अपंग लड़कियों की जांच और ईलाज के सम्बन्ध में सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए एम्स,पटना के अधिवक्ता को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

एम्स,पटना के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि तीन लड़कियों में से दो लड़कियों को हड्डी सम्बन्धी रोग है।उनका ईलाज पटना के एम्स हॉस्पिटल में शुरू हो गया है। इन दोनों लड़कियों के ईलाज पर तीन लाख साठ हज़ार रुपया खर्च हो रहा है।ये धनराशि बिहार सरकार ने दे दिया।

उन्होंने बताया कि एक नेत्र सम्बन्धी बीमारी से ग्रस्त है।इसके ईलाज के लिए इसे दिल्ली,एम्स भेजा जाना है।इसके प्रारंभिक ईलाज के मद में राज्य सरकार ने बीस हज़ार रुपये एम्स,पटना के खाते में स्थानांतरित कर दिया।ये धनराशि एम्स,दिल्ली के खाते में एम्स,पटना को स्थानांतरित करना है।इसी सम्बन्ध में कोर्ट ने एम्स,पटना को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि सीतामढी के ज़िला व सत्र न्यायाधीश ने इनके सम्बन्ध में पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था।इसमें ये बताया गया कि दो लड़कियों को हड्डी रोग की समस्या है,जबकि एक लड़की नेत्र की समस्या से ग्रस्त है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इनके आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनके माता पिता इनका ईलाज नही करवा पा रहे थे।इनके ईलाज में अस्पताल और ईलाज का खर्च काफी होता है, जो कि इनके वश में नहीं था।

कोर्ट ने इनके ईलाज के क्रम में जांच के लिए पटना के एम्स अस्पताल भेजा था।एम्स के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने कोर्ट को बताया था कि एम्स अस्पताल में जांच का कार्य हो गया।इस मामलें की सुनवाई के क्रम में कोर्ट ने एम्स अस्पताल, पटना व राज्य सरकार समाज कल्याण विभाग को पार्टी बनाने का आदेश दिया गया था।

इस मामलें पर 20 फरवरी,2023 को फिर सुनवाई होगी।

पटना हाइकोर्ट ने पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के सन्दर्भ में केंद्र, राज्य सरकार, NHAI और निर्माण कार्य करने वाली कम्पनियों को कार्य के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट में पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की गई। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ के समक्ष वकीलों की टीम ने निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

कोर्ट ने वकीलों की टीम के रिपोर्ट के सन्दर्भ में केंद्र,राज्य सरकार,एनएचएआई और निर्माण कार्य करने वाली कम्पनियों को कार्य के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने वकीलों की टीम को इस राजमार्ग के निर्माण कार्य का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। वकीलों की टीम राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य के निरीक्षण पिछले सप्ताह के अंत में किया। कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगायी गई मशीन और मानव संसाधन के सम्बन्ध में भी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फेज 2 के निर्माण में उत्पन्न कर रही बाधाओं और अतिक्रमण को राज्य सरकार शीघ्र हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके लिए आवश्यक पुलिस बल और व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश सबंधित ज़िला प्रशासन को दिया है।

Patnahighcourt

इससे पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।साथ ही कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।

कोर्ट ने फेज दो के 39 किलोमीटर से 83 किलोमीटर के बीच सभी प्रकार के अतिक्रमण को तेजी से हटाने का आदेश दिया।वही फेज तीन के 83 किलोमीटर से 127 किलोमीटर के बीच के अतिक्रमण को भी हटाने का आदेश दिया।

पिछली सुनवाई कोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने कोर्ट को बताया था कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।

इस मामलें पर 20 फरवरी,2023 को फिर सुनवाई की जाएगी।

बिहार के अनुदानित 2459 मदरसों की जांच किये जाने से सबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाइकोर्ट ने CID को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 4 माह की मोहलत दी

पटना हाइकोर्ट ने राज्य के अनुदानित 2459 मदरसों की जांच किये जाने से सबंधित याचिका पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने सीतामढी जिले के मदरसों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए सीआईडी को चार माह की मोहलत दी।

इससे पूर्व कोर्ट ने राज्य के अनुदानित 2459 मदरसों की जांच का आदेश राज्य के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को दिया था।कोर्ट ने अल्लाउद्दीन बिस्मिल की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को इनकी जांच चार महीने में पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव को शीघ्र राज्य के सभी डी एम के साथ बैठक कर उनके संसाधनों के बारे में जांच करने का आदेश दिया।वही जांच पूरी होने तक 609 मदरसों को अनुदान राशि नहीं देने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने जाली कागजात पर मदरसों को दी गई मान्यता पर दर्ज प्राथमिकी पर राज्य के डीजीपी को अनुसंधान के बारे में पूरी जानकारी कोर्ट को देने का निर्देश दिया था।कोर्ट को इस सम्बन्ध में बताया गया कि राज्य की ओर से सीतामढी जिले के 88 मदरसों की जांच सीआईडी कर रही है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राशिद इजहार ने कोर्ट को बताया कि माध्यमिक शिक्षा के विशेष निदेशक मो तस्नीमुर रहमान ने सीतामढ़ी जिला के सरकारी अनुदान लेने वाले मदरसों की जांच रिपोर्ट दी थी।इसमें कहा गया था कि सीतामढ़ी जिला में फर्जी कागजात पर करीब 88 मदरसों ने सरकारी अनुदान ली है।

कोर्ट ने इन सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई करने की बात कही थी।उनका कहना था कि शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने हाई कोर्ट में जबाबी हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि राज्य के अन्य जिलों के 609 मदरसों जो सरकारी अनुदान प्राप्त किये हैं,उन सभी के जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था।

कोर्ट मामले पर चार माह के बाद फिर सुनवाई करेगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए पटना के कदमकुआं स्थित नेत्रहीन स्कूल के शिक्षकों का ब्यौरा तलब किया।

कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस स्कूल में एडहॉक आधार पर बारह शिक्षकों की बहाली की गई। कोर्ट ने जानना चाहा कि इन शिक्षकों की बहाली की क्या प्रक्रिया थी।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि इन दिव्यांग स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अनुशंसा करने हेतु बिहार कर्मचारी चयन आयोग को प्रस्ताव भेजा गया था।लेकिन आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 2018 के बाद कोई प्रस्ताव सरकार की ओर से नहीं आया है।

कोर्ट ने इस बात को बहुत को बहुत गम्भीरता से लिया कि पटना के कदमकुआं स्थित दिव्यांग( नेत्रहीन) स्कूल में मात्र एक शिक्षक है।वह भी संगीत शिक्षक हैं।जबकि वहां स्कूल में शिक्षकों के स्वीकृत पद ग्यारह है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस मामलें दिन प्रतिदिन सुनवाई होगी।इससे पहले इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वृषकेतु शरण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 2014 में विज्ञापित पदों पर अब तक नहीं भरा जा सका है। यह अपने आप में राज्य का उदासीन रवैया दर्शाता है।

गौरतलब है कि इस मामले में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर कर बताया था कि निःशक्त बच्चों से जुड़ी सभी परियोजनाएं तीन महीनों के भीतर कार्यरत हो जाएंगे ।

इस पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर अपनी कार्य परियोजना बताने के लिए कहा था। इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी,2023 को होगी।

पटना के विक्रम ब्लॉक में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर के निर्माण मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

पटना जिले की विक्रम ब्लॉक में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर के निर्माण के मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने रजनीश कुमार तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट में राज्य स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और पटना के डी एम उपस्थित हुए। उन्होंने को कोर्ट को बताया कि विक्रम स्थित ट्रामा सेंटर बन गया है। इसमें कुछ काम और चिकित्सकों को पदस्थापित करने का कार्य शीघ्र पूरा हो जाएगा।

कल कोर्ट ने इस मामलें पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और पटना के डी एम को 14 फरवरी,2023 को कोर्ट में उपस्थित हो कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हैरानी जताया कि 2016 से लंबित या मामला अभी तक अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तावित सुपर स्पेशलिटी ट्रामा सेंटर सह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना के लिए अक्टूबर 2016 से ही यह प्रस्तावित

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई 9 जनवरी,2023 को हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि जमीन चिन्हित होते के 3 दिनों के अंदर ट्रामा सेंटर को स्थापित करने की कार्रवाई शुरू कर देनी होगी।

कोर्ट ने आज स्वास्थ्य विभाग अपर मुख्य सचिव के स्थिति बताने के कोर्ट ने उन्हें जिम्मेदारी दी कि ये ट्रामा सेंटर पूर्ण रूप से कार्यशील हो जाए।इसके साथ ही कोर्ट ने मामलें को निष्पादित कर दिया।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामले पर सख्त नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामले पर सुनवाई करते हुए स्थिति पर सख्त नाराजगी जाहिर की। एक्टिंग चीफ जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इनके शिक्षा की उपेक्षा करना संवेदनहीनता प्रदर्शित करता है।

कोर्ट ने इस बात को बहुत को बहुत गम्भीरता से लिया कि पटना के कदमकुआं स्थित दिव्यांग( नेत्रहीन) स्कूल में मात्र एक शिक्षक है।वह भी संगीत शिक्षक हैं।जबकि वहां स्कूल में शिक्षकों के स्वीकृत पद ग्यारह है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामलें दिन प्रतिदिन सुनवाई होगी।इससे पहले इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वृषकेतु शरण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 2014 में विज्ञापित पदों पर अब तक नहीं भरा जा सका है। यह अपने आप में राज्य का उदासीन रवैया दर्शाता है।

Patnahighcourt

गौरतलब है कि इस मामले में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर कर बताया था कि निःशक्त बच्चों से जुड़ी सभी परियोजनाएं तीन महीनों के भीतर कार्यरत हो जाएंगे ।

इस पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर अपनी कार्य परियोजना बताने के लिए कहा था। इस मामले की अगली सुनवाई 15फरवरी,2023 को होगी।

PatnaHighCourtNews: बिहार सरकार के वकीलों की फीस में पिछले 14 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के मामलें पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टली

पटना हाइकोर्ट में राज्य सरकार के वकीलों की फीस में पिछले 14 सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के मामलें पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टली। एक्टिंग चीफ जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने अधिवक्ता सत्यम शिवम सुंदरम की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि सरकारी वकीलों की फीस बढोतरी के सम्बन्ध में कार्रवाई चल रही है।इसी सम्बन्ध में 17 फरवरी,2023 इस मामलें पर विचार करने के लिए बैठक आयोजित की गई है।

पूर्व की सुनवाई में PatnaHighCourt ने सुनवाई करते हुए वरीय अधिवक्ता पी के शाही समेत पाँच वरीय अधिवक्ताओं को राज्य के मुख्य कार्यपालक ( मुख्य मंत्री) से मिल कर इस सम्बन्ध में विचार करने का निर्देश दिया था।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि 29 दिसम्बर,2022 को अधिवक्ताओं की टीम ने मुख्यमंत्री से भेंट कर सरकारी वकीलों के फीस बढोतरी के सम्बन्ध में चर्चा की।उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया था।

पहले की सुनवाइयों में PatnaHighCourt को बताया गया था कि केंद्र सरकार सहित अन्य राज्य राज्य सरकार के वकीलों की तुलना में यहाँ के सरकारी वकीलों को काफी कम फीस का भुगतान किया जाता है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट को ये भी जानकारी दी गई थी कि PatnaHighCourt में ही केंद्र सरकार के वकीलों की जहाँ रोजाना फीस न्यूनतम 9 हज़ार रुपये है, वहाँ बिहार सरकार के वकीलों को इसी हाई कोर्ट में रोजाना अधिकतम फीस रू 2750 से 3750 तक ही है।

कोर्ट को जानकारी दी गई थी कि पंजाब व हरियाणा, दिल्ली सहित पड़ोसी राज्य झारखंड और बंगाल में भी वहाँ के सरकारी वकीलों का फीस बिहार के सरकारी वकीलों से ज्यादा है।

सबसे दयनीय स्थिति राज्य के सहायक सरकारी वकीलों की है, जिन्हे रोजाना मात्र 1250 रुपये फीसही काम करना पड़ता है। बिहार में राज्य सरकारों के वकीलों के फीस में वृद्धि 14 साल पहले हुई थी।

इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर को सरकारी मंजूरी मिलने के 5 वर्ष बाद भी शुरू नहीं किए जाने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और पटना के डीएम को 14 फरवरी,2023 को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया

पटना जिले की विक्रम ब्लॉक में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर को सरकारी मंजूरी मिलने के 5 वर्ष बाद भी शुरू नहीं किए जाने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने इस मामलें पर सख्त रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और पटना के डी एम को 14 फरवरी,2023 को कोर्ट में उपस्थित हो कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

ए सी जे चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस मधुरेश प्रसाद की खंडपीठ ने रजनीश कुमार तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हैरानी जताया कि 2016 से लंबित या मामला अभी तक अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सका। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया की सरकार द्वारा प्रस्तावित सुपर स्पेशलिटी ट्रामा सेंटर सह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना के लिए अक्टूबर 2016 से ही यह प्रस्तावित है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

केंद्र का निर्माण लंबित है। पिछली सुनवाई 9 जनवरी को हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि जमीन चिन्हित होते के 3 दिनों के अंदर ट्रामा सेंटर को स्थापित करने की कार्रवाई शुरू कर देनी होगी।

आज सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता एसडी यादव ने कोर्ट को बताया कि जमीन चिन्हित कर लिया गया है।कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट कहा था कि 3 दिन के अंदर सेंटर शुरू किया जाए, इस पर सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 14फरवरी,2023 को की जाएगी।

बिहार में एयरपोर्ट के स्थापित करने, विकास, विस्तार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई पटना हाइकोर्ट ने की

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में एयरपोर्ट के स्थापित करने,विकास,विस्तार और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इन मामलों पर सुनवाई की।

कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से ये बताने को कहा कि राज्य में नए एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें क्या कार्रवाई की गई। दोनों सरकारों को बताने को कहा गया कि वे बताए कि इनके सम्बन्ध में क्या प्रस्ताव बना रहे है।

कोर्ट ने उन्हें ये भी बताने को कहा कि क्या वे नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उन्हें चिन्हित करने की कार्रवाई की है।कोर्ट ने ये जानना चाहा कि इन नए एयरपोर्ट के निर्माण के लिए उनकी क्या योजना है।

साथ ही कार्यरत एयरपोर्ट पटना,गया,बिहटा और दरभंगा के एयरपोर्ट के विकास,विस्तार और सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की क्या योजना है।बहुत सारी सुविधाओं की कमी है।इन्हें बेहतर बनाने के क्या कार्रवाई की जा रही है।

इससे पूर्व में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को पटना और बिहटा में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा था। तत्कालीन चीफ संजय करोल की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध में अभिजीत कुमार पाण्डेय की जनहित याचिका पर फैसला सुनाया था।

Patnahighcourt

ये राज्य में पहला मामला है, जिसमें कोर्ट ने राज्य में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया था।

इस मामलें पर पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा था कि कई अन्य राज्यों में कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, लेकिन बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।जबकि ये बहुत ही आवश्यक और उपयोगी है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को अस्वीकार दिया था कि राज्य में एयरपोर्ट के निर्माण का मामला जनहित के अंतर्गत नहीं है।कोर्ट ने कहा कि छोटे एयरपोर्ट पर बड़े हवाई जहाज कैसे आ सकते है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य की जनता को विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा की सुविधा दिया जाना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।केंद्र और राज्य सरकार इन्हें विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद की जाएगी।

राष्ट्रीय लोक अदालत में सूचीबद्ध 385 मुकदमों में से 195 मुकदमों को निष्पादित किया गया

पटना हाई कोर्ट के समक्ष शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में 385 मुकदमें सूचीबद्ध किए गए थे। इनमें 195 मुकदमों को निष्पादित किया गया (92 प्री – सिटींग में मिलाकर)।

इस प्रकार से कुल 195 मुकदमों को निष्पादित किया गया। 103 नेशनल लोक अदालत में और 92 प्री- सिटींग में। 195 मुकदमों में 81 रिट, 56 एमजेसी और 58 एम वी एक्ट से संबंधित मुकदमें।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

प्री- सिटींग 6 फरवरी और 7 फरवरी, 2023 को हुआ था। इस तरह से लोक अदालत में 103 और प्री- सिटींग में 92 मुकदमें निष्पादित किये गए।

पटना हाईकोर्ट ने बगैर प्राथमिकी दर्ज किए ही याचिकाकर्ताओं के घर में बांस के सहारे जहानाबाद के पुलिसकर्मियों के घुसने और मारपीट करने के मामले में सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने बगैर प्राथमिकी दर्ज किए ही याचिकाकर्ताओं के घर में बांस के सहारे जहानाबाद के पुलिसकर्मियों के घुसने और मारपीट करने के मामले में सुनवाई की। जस्टिस चन्द्रशेखर झा ने अधिवक्ता जय प्रकाश और कमला कुमारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जहानाबाद के एसपी और घोसी पुलिस स्टेशन के एसएचओ को 14 फरवरी,2023 को तलब किया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया कि याचिकाकर्ता नंबर – 1 हाई कोर्ट के अधिवक्ता हैं और याचिकाकर्ता नंबर 2 उनकी मां हैं, जो जहानाबाद में एक साथ रहते हैं।

याचिकाकर्ता जय प्रकाश का अपनी पत्नी के साथ कुछ मतभेद हो गया था, जिसकी सूचना पत्नी द्वारा स्थानीय पुलिस को दी गई थी। इसके बाद पुलिस द्वारा कथित रूप से जय प्रकाश के घर पर 29 दिसंबर, 2022 को 4 बजे सुबह में बगैर किसी नोटिस के रेड किया गया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

जय प्रकाश को जबरन पुलिस थाना लाकर घोसी थाना के एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा बुरी तरह से पिटाई की गई थी।साथ ही धमकी भी दी गई थी। कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच कर बंद लिफाफे में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा है। इस मामले में आगे की सुनवाई अब आगामी 14 फरवरी,2023 को की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट ने BASA ( बिहार एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एसोसिएशन) के निबंधन रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने BASA ( बिहार एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एसोसिएशन) के निबंधन रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस पूर्णेन्दु कुमार सिंह ने याचिका पर सुनवाई करते हुए बासा के सदस्य को मुख्य सचिव की उपस्थिति में आईएएस अधिकारी के के पाठक के साथ बैठक कर आपसी सहमति से हल निकाले।

कोर्ट ने यह भी उम्मीद जाहिर की कि निबंधन रद्द करने के आदेश पर अगली सुनवाई (28 फरवरी,2023) तक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

आईएएस अधिकारी के के पाठक वर्तमान में बिहार सरकार के उत्पाद, मध निषेध और निबंधन विभाग में अपर मुख्य सचिव के पद पर कार्य कर रहे हैं।पिछले दिनों उनका बासा के अधिकारियों के साथ मतभेद हो गया था।बासा के अधिकारियों ने उनका बहिष्कार किया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने के के पाठक के अधिवक्ता नरेश दीक्षित के सकारात्मक पहल को सराहा।उन्होंने कोर्ट को बताया कि श्री पाठक इस बैठक में शामिल होने की सहमति दे दी है।ये बैठक 16फरवरी,2023 को या इसके बाद सुविधा के अनुसार की जा सकती है।

अधिवक्ता दीक्षित ने श्री पाठक से टेलीफोन पर विचार कर कोर्ट को उनकी सहमति की जानकारी दी।इस मामलें पर अगली सुनवाई 28फरवरी, 2023 को होगी।

पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट्स एसोसिएशन के वर्ष 2023-2025 कार्यकाल के लिए पदाधिकारियों के निर्वाचन के लिये वरीय अधिवक्ता अंजनी कुमार को रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) निर्वाचित किया गया

पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट्स एसोसिएशन के वर्ष 2023-2025 कार्यकाल के लिए पदाधिकारियों के निर्वाचन के लिये वरीय अधिवक्ता अंजनी कुमार को रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) निर्वाचित किया गया है। इसको लेकर एडवोकेट्स एसोसिएशन की जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाई गई थी।

रिटर्निंग ऑफिसर उक्त चुनाव का संचालन करवाएंगे। वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने बताया कि एक तीन सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है। चुनाव होली के बाद होगा।

Patnahighcourt

श्री वर्मा ने बताया कि एडवोकेट्स एसोसिएशन अधिवक्ताओं का राज्य का सबसे बड़ा एसोसिएशन है। इसके तकरीबन सात हजार पांच सौ सदस्य हैं। एसोसिएशन के पास लगभग एक करोड़ 82 लाख का रिज़र्व है।

वर्तमान कार्यकाल में एयर कंडीशनर लगवाने, वकीलों के बैठने की व्यवस्था का विस्तार, कोविड में आर्थिक मदद, कोविड टीकाकरण में सहयोग व मुकदमों के निष्पादन में सहयोग समेत कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य किये गए।

पटना हाईकोर्ट में बिहार की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए भूमि उपलब्धता से सम्बंधित मामलें पर राज्य के विकास आयुक्त को अधिकारियों के साथ बैठक करने का निर्देश दिया।

वित्त,राजस्व,विधि व अन्य सम्बंधित अधिकारी इस बैठक में शामिल हो कर भूमि उपलब्धता और अन्य समस्यायों पर विचार करेंगे।16 फरवरी,2023 को बैठक होगी।ये कमिटी 20 फरवरी,2023 को अपना रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा कि राज्य के 38 जिलों में से कितने जिलों में वकीलों के भवन निर्माण के लिए जिलाधिकारियों ने भूमि चिन्हित कर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर ली है।साथ ही उन जिलों के भी नाम कोर्ट ने तलब किया था,जहां ये कार्रवाई नहीं पूरी हुई है।

पूर्व की सुनवाई में राज्य के सभी जिलों के डीएम और ज़िला जज ऑनलाइन उपस्थित रहे थे।उन्होंने कोर्ट को भवनों के लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण के सम्बन्ध में प्रगति रिपोर्ट पेश किया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

श्री शर्मा ने कोर्ट को बताया था कि भवनों का निर्माण राज्य सरकार के भवन निर्माण भवन निर्माण विभाग करें,तो काम तेजी से हो सकेगा।ठेकेदारी के काम में बिलम्ब होने के अलावे लागत भी ज्यादा आएगा।

याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है।अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है,लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

वकीलों के लिये शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य प्रारम्भ नहीं हो पाया हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 20 फरवरी,2023 को की जाएगी।

धान की खरीद और चावल उत्पादन लक्ष्य से पीछे, किसान परेशान: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अधिकांश धान की कुटाई उसना चावल मिलों से कराने के तुगलकी फरमान के चलते धान खरीद, कुटाई और किसानों को धान के मूल्य का भुगतान करने की पूरी प्रक्रिया चरमरा गई है। धान खरीद के लिए केवल सात दिन का समय बचा है, जबकि खरीद 45 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबवे केवल 32 लाख मीट्रिक टन (एमटी) हुई।

  • अधिकांश धान उसना चावल मिलों को देने के तुगलकी फरमान से पैक्स गोदाम में जगह नहीं
  • अरवा चावल मिलों को भी धान लेने की अनुमति दे सरकार
  • अगले सीजन में उसना चावल मिलों की संख्या बढायें

श्री मोदी ने कहा कि राज्य में उसना चावल की खपत ज्यादा है, लेकिन उसना चावल बनाने वाली मिलें कम ( मात्र 156) हैं। अरवा चावल की मिलें ज्यादा (2500) हैं।

उन्होंने कहा कि 32 लाख एमटी धान से 30 लाख एमटी चावल तैयार होना था, लेकिन केवल 6लाख एमटी चावल तैयार हुआ।

SushilModi
#PatnaHighCourt

श्री मोदी ने कहा कि सरकार नियमों को और शिथिल कर अरवा चावल मिलों को भी धान कुटवाने की अनुमति देे और अगले खरीद सीजन में उसना चावल मिलों की संख्या दोगुना बढाने के उपाय करे, ताकि किसानों को धान बेचने और भुगतान पाने के लिए लंबा इंतजार न करना पडे।

उन्होंने कहा कि एक चावल मिल से 25-30 पैक्सों को सम्बद्ध करने से एक पैक्स से धान लेने की बारी महीने भर बाद आ रही है। लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पैक्स गोदाम भरे पड़े हैं। उनके आगे ट्रकों की लाइन लगी है।

श्री मोदी ने कहा कि अन्नदाता परेशान हैं। उनके धान खरीदने में समस्याएं आ रही हैं,लेकिन मुख्यमंत्री समाधान यात्रा में इस मुद्दे का संज्ञान तक नहीं ले पाये।

Patna High Court News: बिहार में पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस मामलें बिहार राज्य के ए डी जी कमल किशोर सिंह कार्डिनेटर के रूप में कार्य करेंगे।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को कॉर्डिनेटर के रूप में कार्य करने के वरीय पुलिस अधिकारी का नाम का सुझाव देने को कहा था। राज्य में 1263 थाना है,जिनमें 471 पुलिस स्टेशन के अपने भवन नहीं है।

इन्हें किराये के भवन में काम करना पड़ता है। कोर्ट ने बिहार स्टेट पुलिस बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कार्पोरेशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया।

जब तक दूसरे भवन में पुलिस स्टेशन के लिए सरकारी भवन नहीं बन जाते,तब तक पुलिस अधिकारी कॉर्डिनेटर के रूप में कॉर्डिनेट करेंगे।

इससे पहले भी पुलिस स्टेशन की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का मामला कोर्ट में उठाया गया था।राज्य सरकार ने इन्हें सुधार लाने का वादा किया था,लेकिन ठोस परिणाम नहीं दिखा।

इसी तरह का एक मामलें पर जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने सुनवाई करते हुए पुलिस स्टेशनों की दयनीय अवस्था को गम्भीरता से लिया।उन्होंने इस मामलें को जनहित याचिका मानते हुए आगे की सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच में भेज दिया।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

Patna High Court में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता सोनी श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जो थाने सरकारी भवन में चल रहे हैं, उनकी भी हालत अच्छी नहीं है।उनमें भी बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है।

उन्होंने बताया कि पुलिस स्टेशन में बिजली,पेय जल,शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं है। लगभग आठ सौ थाने ऐसे है, सरकारी भवन में चल रहे है,लेकिन उनकी भी दयनीय अवस्था है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जो थाना सरकारी भवन में है,उनमें भी निर्माण और मरम्मती की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि कई पुलिस स्टेशन के भवन की स्थिति खराब है।पुलिसकर्मियों को काफी कठिन परिस्थितियों में और कई सुविधाओं के अभाव में कार्य करना पड़ता है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।

रेप के आरोप में गया में डीएसपी के पद पर रहे पुलिस अधिकारी श्री कमला कांत प्रसाद की अग्रिम जमानत अर्जी को पटना हाईकोर्ट ने खारिज किया

पटना हाईकोर्ट ने रेप के आरोप में गया में डीएसपी के पद पर रहे पुलिस अधिकारी श्री कमला कांत प्रसाद की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज किया। जस्टिस राजीव रॉय ने ये आदेश दिया।

कोर्ट का कहना था कि पीड़िता याचिकाकर्ता की बेटी की उम्र की थी। दशहरा के समय जब कोई स्टाफ मौजूद नहीं था, तो अपने आधिकारिक क्वार्टर का दुरुपयोग करते हुए पुलिस अधिकारी ने पीड़िता के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया।

ये मामला महिला थाना कांड संख्या 18/ 2021 से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता घटना के वक्त गया में डीएसपी हेडक्वार्टर के तौर पर पदस्थापित था।

Patnahighcourt

याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा का कहना था कि प्राथमिकी दर्ज करने में असामान्य रूप से देर किया गया था। वही, पीड़िता/ इंफॉर्मेंट के वरीय अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव का कहना था कि पीड़िता को सेविका (मेड सर्वेंट) के रूप में रखा गया था।

उसे याचिकाकर्ता की पत्नी की सेवा करने के लिए पटना जाना था। इसी के लिए पीड़िता के भाई ने याचिकाकर्ता के सरकारी क्वार्टर पर लाया था।

उसे कैंपस में छोड़ दिया था, ताकि उसे गया से पटना दूसरे दिन ले जाया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने केरल हाईकोर्ट के वरीयतम जज जस्टिस विनोद के. चंद्रन को पटना हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर नियुक्त करने की अनुशंसा की है

सुप्रीम कोर्ट कालेजियम ने केरल हाईकोर्ट के वरीयतम जज जस्टिस विनोद के. चंद्रन को पटना हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस के पद पर नियुक्त करने की अनुशंसा की है । फ़िलहाल पटना हाई कोर्ट के वरीयतम जज जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह ने एक्टिंग चीफ जस्टिस के रूप में कार्य कर रहे हैं।

जस्टिस के. विनोद चंद्रन को जज के रूप 08 नवंबर, 2011 को नियुक्त किया गया था।वह 24 अप्रैल, 2025 को सेवानिवृत होने वाले हैं।

Justice_K._Vinod_Chandran

केंद्र सरकार की मुहर लगने के बाद जस्टिस विनोद के. चंद्रन पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे ।

पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर पटना हाइकोर्ट ने वकीलों की टीम को निर्माण कार्य का निरीक्षण कर अगली सुनवाई में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया

पटना हाइकोर्ट में पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की गई। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने वकीलों की टीम को निर्माण कार्य का निरीक्षण कर अगली सुनवाई में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यह वकीलों की टीम राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्य के निरीक्षण के लिए इस सप्ताह के अंत में जाएगी। कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगायी गई मशीन और मानव संसाधन के सम्बन्ध में भी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने फेज 2 के निर्माण में आ रही बाधाओं और अतिक्रमण को राज्य सरकार शीघ्र हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके लिए आवश्यक पुलिस बल और व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश सबंधित ज़िला प्रशासन को दिया है।

पिछली सुनवाई में इस राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।इससे पूर्व में भी कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इस राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में बाधा बने धार्मिक स्थलों सहित स्कूल तथा अन्य अवरोध को हटाने के लिए कोर्ट ने जहानाबाद तथा गया के डीएम एवं एसपी को निर्देश दिया था।

कोर्ट ने उन्हें हटाने के लिए तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने का आदेश दिया था।कोर्ट ने फेज दो के 39 किलोमीटर से 83 किलोमीटर के बीच सभी प्रकार के अतिक्रमण को तेजी से हटाने का आदेश दिया।

वही फेज तीन के 83 किलोमीटर से 127 किलोमीटर के बीच के अतिक्रमण को भी हटाने का आदेश दिया।पिछली सुनवाई कोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने कोर्ट को बताया कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रही है।

इस मामलें पर 14 फरवरी,2023 को फिर सुनवाई की जाएगी।

नीतीश कैबिनेट में 18 एजेंडों पर मुहर; कंप्यूटर शिक्षक के पदों के सृजन की दी गई स्वीकृति

पटना ।  बुधवार को बिहार सचिवालय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैबिनेट की चल रही मीटिंग खत्म हो गई है। मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगी है। इस बैठक में कुल 18 एजेंडों पर कैबिनेट की मुहर लगी है।

CM कैबिनेट बैठक में सरकार ने युवाओं के लिए बड़ा फैसला किया है।  टीचरों के लिए बड़ा उपहार दिया है। राज्य में अब मिडिल और हाई स्कूलों में स्टूडेंट के लिए कंप्यूटर टीचर बहाल होंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने 7360 पदों का सृजन किया है। सभी मिडिल और हाई स्कूलों में एक – एक कंप्यूटर टीचर का पद सृजन किया गया है। 

नीतीश कैबिनेट की खास बातें

  • सरकारी स्कूल कंप्यूटर के शिक्षक होंगे बहाल
  • सरकार ने 7360 पदों का सृजन किया है 
  • सासाराम प्रमंडलीय व्यवहार न्यायालय एवं कैदी हाजत भवन के लिए राशि स्वीकृत
  • 33 करोड़ 81 लाख रुपये की राशि हुई स्वीकृति
  • छपरा नगर निगम में नमामि गंगे परियोजना के लिए 254 करोड़ की मंजूरी
  • पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को सौगात
  • 7 जिलों में 100 बेड के छात्रावास का कराया जाएगा निर्माण
  • छात्रावास के लिए 4 करोड़ 98 लाख रुपये की स्वीकृति
nitish

गोपालगंज के भोरे में एक नए बिजली सब स्टेशन, संचरण लाइन एवं हथुआ ग्रिड सब स्टेशन में दो लाइन बे निर्माण के लिए 123 करोड़ 83 लाख रुपये की योजना की स्वीकृति दी गई है । वहीं सासाराम प्रमंडलीय व्यवहार न्यायालय एवं कैदी हाजत भवन के लिए 33 करोड़ 81 लाख रुपये की राशि स्वीकृति की है । साथ ही छपरा नगर निगम में नमामि गंगे परियोजना के लिए 254 करोड़ की मंजूरी दी है । इसके अलावा बैठक में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं का भी ध्यान रखा गया है। सरकार ने 7 जिलो में 100 बेड के छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। जिसके लिए 4 करोड़ 98 लाख रुपये की राशि स्वीकृति की गई है ।

साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत संचालित 38 राजकीय अभियंत्रण महाविधालय एवं 46 राजकीय पोलटेक्निक संस्थान में गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के अंतर्गत पीएचडी और एमटेक डिग्री में नामांकन के लिए  शिक्षकों को अनुमति और अवकाश की स्वीकृति मिली है। 

https://biharnewspost.com

BiharNewsPost MobileApp
https://biharnewspost.com

नीतीश कैबिनेट ने उर्जा विभाग, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सामान्य प्रसाशन विभाग, शिक्षा विभाग, समेत अन्य विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगाई है।

इसके साथ ही खगड़िया में चौथम अंचल में जवाहर नवोदय विद्यालय खगड़िया की स्थापना के लिए फ्री जमीन हस्तांतरित किया गया है। इसके अलावा रोहतास न्यायमंडल अंतर्गत अनुमंडलीय के व्यवहार न्यायालय में 10 कोर्ट भवन के निर्माण के लिए 33 करोड़ 81 लाख 82 हजार रूपए की स्वीकृति दी गई है। 

बिहार में पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर पटना हाइकोर्ट ने सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में पुलिस स्टेशनो की दयनीय अवस्था और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें पर सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने मामलें पर स्वयं संज्ञान लेते हुए सुनवाई की।

राज्य में 471 पुलिस स्टेशन के अपने भवन नहीं है।इन्हें किराये के भवन में काम करना पड़ता है।कोर्ट ने इस मामलें को गम्भीरता से लेते हुए राज्य सरकार के महाधिवक्ता पी के शाही को दो तीन वरीय आई पी एस अधिकारियों के नामों का सुझाव देने को कहा,जो कोर्ट और राज्य सरकार के मध्य कॉर्डिनेट करें।

जब तक दूसरे भवन में पुलिस स्टेशन के लिए सरकारी भवन नहीं बन जाते,तब तक पुलिस अधिकारी कोर्ट के अधिकारी के रूप में कॉर्डिनेट करेंगे।

इससे पहले भी पुलिस स्टेशन की दयनीय स्थिति और बुनियादी सुविधाओं का मामला कोर्ट में उठाया गया था।राज्य सरकार ने इन्हें सुधार लाने का वादा किया था,लेकिन ठोस परिणाम नहीं दिखा।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इसी तरह का एक मामलें पर जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने सुनवाई करते हुए पुलिस स्टेशनों की दयनीय अवस्था को गम्भीरता से लिया।उन्होंने इस मामलें को जनहित याचिका मानते हुए आगे की सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच में भेज दिया।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी अधिवक्ता सोनी श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जो थाने सरकारी भवन में चल रहे हैं, उनकी भी हालत अच्छी नहीं है।उनमें भी बुनियादी सुविधाओं की काफी कमी है।लगभग आठ सौ थाने ऐसे है,जो सरकारी भवन में चल रहे है।
उन्होंने बताया कि कई पुलिस स्टेशन के भवन की स्थिति खराब है।पुलिसकर्मियों को काफी कठिन परिस्थितियों में और कई सुविधाओं के अभाव में कार्य करना पड़ता है।

कोर्ट ने उनके द्वारा दिए गए तथ्यों को सुनते हुए कहा कि आगे की सुनवाई में इन मुद्दों विचार किया जाएगा।इस मामलें पर कल भी सुनवाई होगी।

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा कि राज्य के 38 जिलों में से कितने जिलों में वकीलों के भवन निर्माण के लिए जिलाधिकारियों ने भूमि चिन्हित कर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर ली है। साथ ही उन जिलों के भी नाम कोर्ट ने तलब किया है,जहां ये कार्रवाई नहीं पूरी हुई है।कोर्ट ऐसे जिलाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगेगा।

पिछली सुनवाई में राज्य के सभी जिलों के डीएम और ज़िला जज ऑनलाइन उपस्थित रहे थे।उन्होंने कोर्ट को भवनों के लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण के सम्बन्ध में प्रगति रिपोर्ट पेश किया था।

वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वकीलों के लिए बनने वाले भवनों के निर्माण से संबंधित कार्रवाई ब्यौरा तलब किया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई में श्री शर्मा ने कोर्ट को बताया था कि भवनों का निर्माण राज्य सरकार के भवन निर्माण भवन निर्माण विभाग करें,तो काम तेजी से हो सकेगा।ठेकेदारी के काम में बिलम्ब होने के अलावे लागत भी ज्यादा आएगा।

याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है।अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है,लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

वकीलों के लिये शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य नहीं प्रारम्भ नहीं हो पाया हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 9 फरवरी,2023 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने समस्तीपुर में कथित रूप से जाली राशन कार्ड जारी करने के मामलें में सुनवाई की

पटना हाई कोर्ट ने समस्तीपुर में कथित रूप से जाली राशन कार्ड जारी करने के मामलें में सुनवाई की। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने मोहम्मद इशाक़् की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कृष्ण कुमार ने बताया कि समस्तीपुर ज़िला में बड़े पैमाने पर जाली राशन कार्ड का धंधा चल रहा है। जो लोग वहां के निवासी भी नहीं है, उनके नाम भी राशन कार्ड में शामिल है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जो लोग मर चुके है,उनके नाम भी राशन कार्ड में लगे हुए है।उनका कहना था कि गरीबों को सब्सिडी पर दिए जाने वाले अनाज और किरासन तेल टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (कंट्रोल) आर्डर, 2015 के विपरीत गलत लोगों को दिया जा रहा है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उन्होंने कहा कि इस मामलें न जाली राशन कार्ड का मामला है,बल्कि पीडीएस को चलाने वाले भी आम जनता को लूट रहे है।उन्हें घटिया अनाज दे रहे है और वह भी पूरा बजन नहीं दे रहे है और लाभ कमा रहे है।

इसकी शिकायत पिछले साल समस्तीपुर के जिलाधिकारी से की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं देखने को मिला।इस मामलें पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी।

इस मामले में आगे की सुनवाई अब चार सप्ताह बाद कि जाएगी।

निजी स्वार्थ से प्रेरित जनहित याचिकाओं के दायर किये जाने पर पटना हाइकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया

पटना हाइकोर्ट ने निजी स्वार्थ से प्रेरित जनहित याचिकाओं के दायर किये जाने पर कड़ा रुख अपनाया। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस तरह की गलत जनहित याचिकाओं के दायर करने वाले सख्त चेतावनी दी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की याचिकाओं के दायर करने वालोंं की न सिर्फ याचिकाएं खारिज की जाएगी,बल्कि उन पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिकाओं का उद्देश्य जनता से जुड़े उचित मामलों को कोर्ट के समक्ष लाना,न कि अपनी निजी स्वार्थ के लिए जनहित याचिकाओं का दुरूपयोग करना।

Patnahighcourt

कोर्ट ने आज ही जनहित याचिका के रूप में कॉन्ट्रेक्ट से सम्बंधित मामलें दायर करने पर याचिकाकर्ता को पचास हजार रुपये का जुर्माना लगाया।कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलें को जनहित याचिका के रूप में दायर करना इस व्यवस्था का दुरूपयोग है।कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दो माह के भीतर ये राशि बालसा के खाते में डालने का निर्देश दिया।

इसी तरह के एक अन्य मामलें जनहित याचिका को निजी स्वार्थ वाला कहा।इस मामलें में याचिकाकर्ता पर पाँच हज़ार रुपये का आर्थिक दंड लगाया।कई दायर जनहित याचिकाओं को अधिवक्ताओं ने खुद ही वापस ले लिया।

पटना हाइकोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास योजना में आयी धनराशि में अनियमितता बरतने के मामलें को गम्भीरता से लेते हुए जांच के लिए छह सप्ताह का समय दिया

पटना हाइकोर्ट ने राज्य भारत सरकार के योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना में आयी धनराशि में अनियमितता बरतने के मामलें को गम्भीरता से लिया। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने हरि नारायण पासवान की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग के अपर प्रधान सचिव को राज्य में इस तरह की अनियमितता की जांच करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया। कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुमन कुमार सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि समस्तीपुर ज़िला के सिंघिया प्रखंड के तहत बारी ग्राम पंचायत राज के मुखिया ने केंद्रीय योजना के तहत आये फंड का दुरूपयोग किया है।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो पंचायत को फंड मिला,उसमें मुखिया ने अनियमितता बरती।उन्होंने अफसरों की मिलीभगत से फंड का दुरूपयोग किया।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस अनियमितता की जानकारी देते हुए उच्च अधिकारियों को कई बार अभ्यावेदन(रिप्रेजेंटशन) दिया गया, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला।

आज कोर्ट ने इस मामलें पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को राज्य में इस योजना में हुए घपले की करने के छह सप्ताह का समय दिया।इस मामलें पर अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद की जाएगी।

छात्राओं के सभी शिक्षण संस्थाओं में बने शौचालयों की दयनीय स्थिति पर सुनवाई के दौरान पटना हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में भी कोर्ट आदेश क्यों देना होता है? इस तरह कि बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है।

पटना हाइकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए छात्राओं के सभी शिक्षण संस्थाओं में बने शौचालयों की दयनीय स्थिति पर सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसे मामलों में भी कोर्ट आदेश क्यों देना होता है। एसीजे जस्टिस सी एस सिंह की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह कि बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है।

कोर्ट ने पटना समेत राज्य के सभी जिलों के सम्बन्ध में राज्य सरकार को अगली सुनवाई में पूरा रिपोर्ट चार्ट के रूप में पेश करने का आदेश दिया है।कोर्ट ने ये जिम्मेदारी अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार को दिया है।कोर्ट ने शौचालय सहित सैनेटरी नैपकिन के बारे में भी पूरी जानकारी देने का आदेश दिया।

कोर्ट ने एक स्थानीय दैनिक अखबार में छपी खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई प्रारम्भ की थी।

अधिवक्ता शम्भू शरण सिंह ने कोर्ट को बताया कि पटना जिला के डीईओ की ओर से एक हलफनामा दायर की गई है।इस हलफनामा में शहरी क्षेत्रों के सरकारी गर्ल्स स्कूल के शौचालय का पूरा ब्यौरा दिया गया है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उन्होंने कोर्ट को बताया कि राज्य के बहुत से स्कूलों में बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं पढ़ती है।इनकी संख्या काफी अधिक होने के वाबजूद भी कई स्कूलों में छात्र छात्राओं के लिए एक ही शौचालय है।

उन्होंने बताया कि नवीं कक्षा से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली दो हजार से ज्यादा छात्राओं के लिए सिर्फ दो शौचालय हैं।पटना के महत्वपूर्ण सरकारी स्कूलों का जो चार्ट दिया गया है, उससे साफ पता चलता है कि आखिर बच्चियों बीच में ही पढ़ाई क्यों छोड़ देती हैं।

उनका कहना था कि दायर हलफनामा में सैनेटरी नैपकिन के बारे में एक शब्द नहीं लिखा गया है।डीईओ की ओर से शहर के बीस स्कूलों में वर्ग नवीं से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली कुल 12 हजार 4 सौ 91 छात्राओं के लिए मात्र 128 शौचालय हैं।

उन्होंने कहा कि जब शहरी क्षेत्रों के सरकारी गर्ल्स स्कूल की दशा इस प्रकार की है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के बारे में क्या कहा जा सकता हैं।

इस् मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 13फरवरी,2023 को तय की गई है।

पटना हाइकोर्ट ने बीपीएससी द्वारा संचालित 31वीं न्यायिक अफसर नियुक्ति प्रतियोगिता परीक्षा के रिजल्ट को चुनौती देने वाली सुनवाई करते हुए परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया

जस्टिस पी वी बजंत्री और जस्टिस अरुण कुमार झा की खंडपीठ ने ऋषभ रंजन वह कुणाल कौशल सहित 17 अभ्यार्थियों की तरफ से दायर रिट याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है।इस परीक्षा में राज्य में 214सिविल जज(जूनियर डिवीजन)- न्यायिक दंडाधिकारी परीक्षा में सफल हुए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि की न्यायिक पदाधिकारियों की नियुक्तियाँ , इस मामले में पारित अंतिम फैसले के फलाफल पर निर्भर करेगा।
रिट याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि चयन करने वाली बिहार लोक सेवा आयोग ने भर्ती नियमावली और इस परीक्षा हेतु प्रकाशित विज्ञापन की कंडिकाओं का उल्लंघन किया है।आयोग ने मनमाने तरीके से मुख्य परीक्षा में प्रथम दृष्टया अयोग्य अभ्यर्थियों को भी इंटरव्यू में बुलाकर पूरे भर्ती प्रक्रिया को अनियमित और अवैध बना दिया है।

याचिकाकर्ताओं के वकील शानू ने कोर्ट को बताया कि बिहार न्यायिक सेवा भर्ती नियमावली 1955 में निहित नियमों की अनदेखी किया है।आयोग ने वैसे अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया, जिनका मुख्य परीक्षा के रिजल्ट में न्यूनतम कट ऑफ अंक से 12 फ़ीसदी अंक कम था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

एक और भर्ती नियमावली का नियम 15, आयोग को न्यूनतम कटऑफ अंक में 5 फ़ीसदी की रियायत देने की इजाजत देता है ,लेकिन आयोग ने कई आरक्षित कोटि के अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से न्यूनतम अंक में 12% की रियायत देकर इंटरव्यू में बुलाया।

शानू ने दूसरा आरोप यह लगाया के इंटरव्यू में वैसे अभ्यार्थी ,जिन्हें मुख्य परीक्षा में कटऑफ से 12 फ़ीसदी कम मिले, उन्हें साक्षात्कार का अंक 80 से 85 फ़ीसदी देते हुए उन्हें पूरी परीक्षा में योग्य घोषित किया गया।

वहीं दूसरी तरफ यह रिट याचिका कर्ता, जिन्हें औसतन मुख्य परीक्षा में न्यूनतम कटऑफ से 80 फ़ीसदी अधिक आया था, उन्हें इंटरव्यू में महज 10 से 30 फ़ीसदी अंक देकर अयोग्य घोषित किया गया। पूरे साक्षात्कार की प्रक्रिया पर प्रश्न उठाते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील ने पूरे रिजल्ट को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट से अनुरोध किया की कि मुख्य परीक्षा के अंकों के गुण दोष के आधार पर नए सिरे से योग्यता सूची तैयार कर फिर से साक्षात्कार कराया जाए।

हाईकोर्ट ने इस मामले में बीपीएससी से भी जवाब तलब किया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद की जाएगी।

चीफ जस्टिस संजय करोल ने आई टी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने को लेकर लखीसराय(किऊल) में रेलवे कोर्ट बिल्डिंग, ई- रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर का भी उदघाट्न किया

पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल ने इंफ्रास्ट्रक्चर आई टी को बढ़ावा देने को लेकर लखीसराय(किऊल) में रेलवे कोर्ट बिल्डिंग का उदघाटन किया गया। साथ ही साथ गया में मल्टी यूटिलिटी बिल्डिंग के निर्माण, जजों के लिये गेस्ट हाउस तथा गया में 80 पी ओ क्वार्टर के लिए आधार शिला रखने का काम किया गया।

‘ गो ग्रीन ‘ और पेपरलेस के अनुरूप, राज्य के सभी न्यायालयों में ई – फाइलिंग 3.0 की भी शुरुआत चीफ जस्टिस ने पटना हाई कोर्ट में किया। पटना हाई कोर्ट में ई- रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर का उदघाट्न भी हुआ। इसके शुरू हो जाने से रजिस्ट्री का फ़ाइल पेपरलेस प्रोसेसिंग के जरिये डिजिटल मोड में हो जाएगी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

इसका आयोजन जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह व जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह समेत पटना हाई कोर्ट के अन्य जजों की उपस्थिति में किया गया। इस मौके पर पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, विधि सचिव, राज्य के सभी जिला जज और न्यायिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपस्थित थे।

इन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के उदघाटन से न सिर्फ जजों को फायदा होगा, बल्कि अधिवक्ताओं के साथ ही साथ आम लोगों को भी। यह न्याय आम लोगों को आसानी से पहुंचाने की दिशा में मिल का पत्थर साबित होगा।

पटना हाईकोर्ट ने वैशाली और नालंदा जिला के 49 ईट भट्टों को बंद करने का आदेश दिया

पटना हाई कोर्ट ने वैशाली और नालंदा जिला के 49 ईट भट्टों को बंद करने के लिए तत्काल कदम उठाने का आदेश दोनों जिला के डीएम को दिया है। चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने अपने 23 पन्ने का आदेश दिया।

कोर्ट ने ईट भट्टों को फ्लाई ऐस ब्रिक्स में परिवर्तन के बारे में तेजी से कार्रवाई करने का आदेश दिया।वही प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये हर जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया। लोगों को जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने का भी आदेश दिया।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

कोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर पर्यावरण कानून का पालन करने का आदेश दिया है।कोर्ट ने आदेश की प्रति वैशाली एवं नालंदा जिला के डीएम को भेजने का आदेश दिया।

इसके पूर्व कोर्ट को बताया गया कि पर्यावरण वन एवं वातवरण बदलाव विभाग की ओर से थर्मल पावर प्लांट के तीन सौ किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी सरकारी कामों फ्लाई ऐस ब्रिक्स का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है।

पटना हाई कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह को हाईकोर्ट का कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनाया गया

पटना हाई कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह को हाई कोर्ट का कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है।आज केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस आशय का अधिसूचना जारी किया है।

गौरतलब है कि हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला को सुप्रीम कोर्ट के जज बनाये जाने के बाद पटना हाई कोर्ट में कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में एयरपोर्ट के मामलें पर एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को पटना और बिहटा में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा

पटना हाइकोर्ट ने राज्य में एयरपोर्ट के मामलें पर एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को पटना और बिहटा में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा। चीफ संजय करोल की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध में अभिजीत कुमार पाण्डेय की जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे कोर्ट ने आज सुनाया।

ये राज्य में पहला मामला है, जिसमें कोर्ट ने राज्य में एक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार करने का निर्देश दिया।इस मामलें पर कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा था कि राज्य में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।

उन्होंने कहा था कि कई अन्य राज्यों में कई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है, लेकिन बिहार में एक भी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं है।जबकि ये बहुत ही आवश्यक और उपयोगी है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार की इस दलील को अस्वीकार दिया कि राज्य में एयरपोर्ट के निर्माण का मामला जनहित के अंतर्गत नहीं है।कोर्ट ने कहा कि छोटे एयरपोर्ट पर बड़े हवाई जहाज कैसे आ सकते है।

Patnahighcourt

साथ ही राज्य सरकार की इस दलील को भी रद्द कर दिया कि राज्य के आस पास दूसरे राज्यों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट है,इसीलिए बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने की जरूरत नहीं है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य की जनता को विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा की सुविधा दिया जाना मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आता है।केंद्र और राज्य सरकार इन्हें विकसित और सुरक्षित हवाई यात्रा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

कोर्ट ने ये भी कहा कि जहां कृषि योग्य भूमि नहीं है,उन्हें चिन्हित कर वहां ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने पर विचार हो,ताकि राज्य की जनता को सुरक्षित,विकसित और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हवाई यात्रा उपलब्ध हो सके।

पटना हाइकोर्ट में चीफ जस्टिस संजय क़रोल और जज जस्टिस ए अमानुल्ला का विदाई समारोह आयोजित किया गया

पटना हाइकोर्ट में चीफ जस्टिस संजय क़रोल और जज जस्टिस ए अमानुल्ला का विदाई समारोह आयोजित किया गया।vइस अवसर पर पटना हाईकोर्ट के सभी जज,बिहार सरकार एडवोकेट जनरल पी के शाही, वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा, वरीय विधि पत्रकार अरविन्द उज्ज्वल, मुकेश कुमार, सरकारीवकील प्रशांत प्रताप व बड़ी तादाद में अधिवक्तागण उपस्थित रहे।वहाँ उन्होंने उन्हें बधाइयाँ और शुभकामनाएं दी।

पटना हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय क़रोल एवं जस्टिस अहसानुद्दिन अमानुल्लाह सुप्रीम कोर्ट के जज बने।इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने 13दिसम्बर,2022 को सुप्रीम कोर्ट मे पाँच जजों की बहाली की अनुशंसा की थी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पंकज मित्तल,पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय क़रोल, मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पी बी संजय कुमार,पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस अहसानुउद्दीन अमानुल्ला और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनोज मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट के जज बनाए जाने की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट ने की थी।

इनके द्वारा सोमवार 6 फरवरी,2023 को शपथ ग्रहण करने की संभावना है।

पटना हाईकोर्ट को बिहार लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता द्वारा बताया गया कि बीपीएससी 67 वीं के मुख्य परीक्षा का परिणाम इस एलपीए के अगली सुनवाई के पहले तक प्रकाशित होने की संभावना कम है

पटना हाईकोर्ट को बिहार लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता द्वारा बताया गया कि बीपीएससी 67 वीं के मुख्य परीक्षा का परिणाम इस एलपीए के अगली सुनवाई के पहले तक प्रकाशित होने की संभावना कम है। हर्षित शरण द्वारा दायर अपील पर जस्टिस पी वी बजंत्री की खंडपीठ को ये जानकारी बीपीएससी के अधिवक्ता दिया।

याचिकाकर्ता ने जस्टिस मधुरेश प्रसाद के सिंगल बेंच के उस आदेश को एलपीए दायर कर चुनौती दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता ने आयोग द्वारा लिए गए परीक्षा में गलत दिए गए 10 प्रश्नों को चुनौती दिया था। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता के रिट याचिका को खारिज कर दिया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया बीपीएससी द्वारा द्वारा ली गई 67वीं के मुख्य परीक्षा में 10 प्रश्न गलत थे।इस बात की जानकारी कोर्ट को देने के बाद भी सिंगल बेंच ने रिट याचिका को खारिज कर दिया।

खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को सुनने के बाद बिहार लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता से पूछा इस परीक्षा का परिणाम कब तक प्रकाशित होगा।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अगली सुनवाई तक इस परीक्षा का परिणाम प्रकाशित होने की संभावना कम है।

कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 21 फरवरी,2023 निर्धारित किया है।

पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक रूप से अपंग लड़कियों के ईलाज किए जाने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने सीतामढी ज़िला के आर्थिक रूप से कमज़ोर और शारीरिक रूप से अपंग लड़कियों के ईलाज किए जाने के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि एम्स,पटना में इनके ईलाज के लिए आवश्यक धनराशि निर्गत करने की कार्रवाई हो रही है।

एम्स,पटना के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि अस्थि रोग से ग्रस्त लड़कियों का ईलाज पटना के एम्स अस्पताल में हो जाएगा।ईलाज हेतु राज्य सरकार द्वारा आवश्यक धनराशि निर्गत होने के बाद अगले सप्ताह से इन अस्थि रोग से ग्रस्त लड़कियों का अगले सप्ताह शुरू हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि एक दृष्टिहीन लड़की के ईलाज की व्यवस्था एम्स,दिल्ली में करनी होगी।कोर्ट ने उनसे उस लड़की के आँखों के ईलाज की व्यवस्था दिल्ली के एम्स में किये जाने का निर्देश दिया।

साथ ही आर्थिक रूप से कमज़ोर,पर अच्छी छात्रा को सीतामढी के कस्तुरबा गांधी आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिया गया है।उस लड़की के शिक्षा पर आने वाला खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

Patnahighcourt

इस मामलें की सुनवाई चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने स्वयं संज्ञान लेते हुए इन दिव्यांग लड़कियों की अपंगता की जांच के लिए एम्स,पटना को भेजा था।

गौरतलब है कि सीतामढी के ज़िला व सत्र न्यायाधीश ने इनके सम्बन्ध में पटना हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखा था।इसमें ये बताया गया कि दो लड़कियों को हड्डी रोग की समस्या है,जबकि एक लड़की नेत्र की समस्या से ग्रस्त है।इनके आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इनके माता पिता इनका ईलाज नही करवा पा रहे थे।

इनके ईलाज में अस्पताल और ईलाज का खर्च काफी होता है, जो कि इनके वश में नहीं था।कोर्ट ने इनके ईलाज के क्रम में जांच के लिए पटना के एम्स अस्पताल भेजा।एम्स के अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने कोर्ट को बताया था कि एम्स अस्पताल में जांच का कार्य हो गया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एम्स अस्पताल, पटना व राज्य सरकार समाज कल्याण विभाग को पार्टी बनाने का आदेश दिया था।

इस मामलें पर 16 फरवरी,2023 को फिर सुनवाई होगी।

पटना हाइकोर्ट ने सासाराम के ऐतिहासिक महत्व के धरोहर शेरशाह के मकबरे के आसपास बड़े तालाब में स्वच्छ और ताज़ा पानी आने के लिए बनाया गए नाले बंद होने के मामलें पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने सासाराम के ऐतिहासिक महत्व के धरोहर शेरशाह के मकबरे के आसपास बड़े तालाब में स्वच्छ और ताज़ा पानी आने के लिए बनाया गए नाले बंद होने के मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता कन्हैया लाल भास्कर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते केंद्र सरकार के अधिवक्ता को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों से विचार विमर्श करने का निर्देश दिया।

इससे पूर्व कोर्ट ने रोहतास के डी एम, डीसीएलआर,सासाराम नगर निकाय के अधिकारियो समेत केंद्र सरकार के अधिकारी और एएसआई की बैठक कर विस्तृत कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने प्राची पल्लवी को इस जनहित की सुनवाई में कोर्ट की मदद करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया हैं।कोर्ट ने कहा कि ये ऐतिहासिक धरोहर है,जिसकी सुरक्षा और देखभाल करना आवश्यक हैं।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कन्हैया लाल भास्कर ने कोर्ट को बताया कि सासाराम स्थित शेरशाह का मकबरा राष्ट्रीय धरोहर हैं।इसके तालाब में साफ और ताज़ा
के लिए वहां तक नाले का निर्माण किया गया।

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि 2018 से 2020 तक सिर्फ पचास फी सदी नाले का काम हुआ।इसे बाद में खराब माना गया।इसमें लगभग आठ करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

इसमें काफी अनियमितताएं बरती गई, जिसकी जांच स्वतन्त्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।उन्होंने बताया था कि ये नाला कूड़ा से भरा पड़ा है,जिस कारण शेरशाह के मकबरे के तालाब में साफ पानी नहीं पहुँच पाता है।

वह तालाब गंदा और कचडे से भरा हुआ है।वहां जो पर्यटक आते है,उन्हें ऐसी हालत देख कर निराशा होती है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 4 फरवरी,2023 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई अब 3 सप्ताह बाद की जाएगी

पटना हाईकोर्ट में पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई अब 3 सप्ताह बाद की जाएगी। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करते हुए जांच की धीमी गति पर असंतोष जाहिर किया।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जांच की प्रगति पर असंतोष जाहिर किया था।अगली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित रही थी।

कोर्ट ने कहा था कि इस मामलें की समग्रता में जांच नहीं की जा रही हैं।पुलिस अधिकारियों को विस्तार और गहराई से जांच पड़ताल करने की आवश्यकता है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया था कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने बताया था कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी बुरी है।

पहले की सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट भी तलब किया था।

हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।

इस मामले की अगली सुनवाई में 3 सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था एवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। जस्टिस अहसाउद्दीन अमानुल्ला की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान ऑनलाइन राज्य के सभी जिलों के डीएम और ज़िला जज उपस्थित रहे।उन्होंने कोर्ट को भवनों के लिए भूमि अधिग्रहण और निर्माण के सम्बन्ध में प्रगति रिपोर्ट पेश किया।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि निर्माण कार्य अच्छे ढंग से चल रहा है। लेकिन कहीं कहीं कठिनाइयां भी आ रही है।
कोर्ट ने उन्हें इस सम्बन्ध में अगली सुनवाई में पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वकीलों के लिए बनने वाले भवनों के निर्माण से संबंधित कार्रवाई ब्यौरा तलब किया था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

पिछली सुनवाई में श्री शर्मा ने कोर्ट को बताया था कि भवनों का निर्माण राज्य सरकार के भवन निर्माण भवन निर्माण विभाग करें,तो काम तेजी से हो सकेगा।ठेकेदारी के काम में बिलम्ब होने के अलावे लागत भी ज्यादा आएगा।

याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है।अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है,लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

वकीलों के लिये शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं।उन्होंने कोर्ट को बताया कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य नहीं प्रारम्भ नहीं हो पाया हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 7फरवरी,2023 को की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट ने रैयती जमीन को जलाशय कह रहे अंचलाधिकारी के मनमानेपन की जांच करने का आदेश दिया

पूर्वी चम्पारण ज़िला में जलाशयों को अतिक्रमण मुक्त करने के दौरान एक नागरिक को पट्टे पर मिली रैयती जमीन को अंचल अधिकारी ने जलाशय कहते हुए उसे अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश दे डाला। पटना हाइकोर्ट ने जब यह पूछा कि किस कागजात के आधार पर रैयती जमीन को जलाशय कह रहे हैं, तो अंचल अधिकारी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।

कोर्ट ने इस मामले में चकिया अंचल के अंचलाधिकारी के मनमानेपन की जांच करने का आदेश पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को दिया है।

Patnahighcourt

जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह ने रघुनाथ प्रसाद की रिट याचिका को निष्पादित करते हुए पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को चकिया अंचल में इस तरह के अतिक्रमण मामले की खुद जांच पड़ताल करने का आदेश दिया।

साथ ही निजी स्वार्थ से काम करने वाले अफसरों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

पटना हाइकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी को शौचालय सहित सैनेटरी नैपकिन के बारे में भी पूरी जानकारी देने का आदेश दिया

पटना हाइकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए छात्राओं के सभी शिक्षण संस्थाओं में बने शौचालयों की दयनीय स्थिति पर पटना राज्य के सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर पूरा रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने स्वयम संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने आदेश की जानकारी अपर मुख्य सचिव सहित सभी जिलों के डीएम और डीईओ को तुरंत देने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने ये जिम्मेदारी सरकारी अधिवक्ता आलोक राही को दिया है। कोर्ट ने शौचालय सहित सैनेटरी नैपकिन के बारे में भी पूरी जानकारी देने का आदेश दिया।

कोर्ट ने एक स्थानीय दैनिक अखबार में छपी खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई प्रारम्भ की।

अधिवक्ता शम्भू शरण सिंह ने कोर्ट को बताया कि पटना जिला के डीईओ की ओर से एक हलफनामा दायर की गई है।इस हलफनामा में शहरी क्षेत्रों के सरकारी गर्ल्स स्कूल के शौचालय का पूरा ब्यौरा दिया गया है।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उन्होंने बताया कि नवीं कक्षा से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली दो हजार से ज्यादा छात्राओं के लिए सिर्फ दो शौचालय हैं।पटना के महत्वपूर्ण सरकारी स्कूलों का जो चार्ट दिया गया है, उससे साफ पता चलता है कि आखिर बच्चियों बीच में ही पढ़ाई क्यों
छोड़ देती हैं।

उनका कहना था कि दायर हलफनामा में सैनेटरी नैपकिन के बारे में एक शब्द नहीं लिखा गया है।डीईओ की ओर से शहर के बीस स्कूलों में वर्ग नवीं से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली कुल 12 हजार 4 सौ 91 छात्राओं के लिए मात्र 128 शौचालय हैं।

उन्होंने कहा कि जब शहरी क्षेत्रों के सरकारी गर्ल्स स्कूल की दशा इस प्रकार की है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के बारे में कल्पना ही की जा सकती हैं।

https://biharnewspost.com

BiharNewsPost MobileApp
https://biharnewspost.com

कोर्ट ने अपने दो पुराने आदेश का हवाला देते हुए राज्य के सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर सभी सरकारी गर्ल्स स्कूल के शौचालय और सैनेटरी नैपकिन मुहैया कराने से लेकर उसके निष्पादन के बारे में पूरी जानकारी देने का आदेश दिया।

इस् मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 7फरवरी,2023 तय की गई है।

पटना हाईकोर्ट ने मोतिहारी के पूर्व डीईओ (ज़िला शिक्षा पदाधिकारी) को दो दिनों की जेल की सजा सुनाई

पटना हाईकोर्ट में अवमानना से जुड़े एक मामले को गंभीरता से लेते हुए मोतिहारी के पूर्व डीईओ (ज़िला शिक्षा पदाधिकारी) को दो दिनों की जेल की सजा सुनाई है। साथ ही उन्हें 50 हजार रुपये का हर्जाना भी याचिकाकर्ता कुमारी पूनम को देने के लिए कहा है।

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने पंचायत टीचर की नियुक्ति से संबंधित मामले पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया।दिनांक 1अक्तुबर,2007 को याचिकाकर्ता की नियुक्ति पूर्वी चंपारण के सेमवापुर पंचायत में टीचर के पद पर हुई थी।दिनांक 04.09.2012 को याचिकाकर्ता को अपने पद से हटा कर उसकी जगह मुन्नी कुमारी को इस पद पर नियुक्त कर लिया गया था ।

याचिकाकर्ता ने जब कोर्ट में मामला दायर किया,तो कोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय सुनाया। कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें दोबारा नियुक्त कर लिया गया।याचिकाकर्ता ने पुनः एक अवमानना ​​याचिका दायर कर कोर्ट से गुहार की कि उसे जुलाई 2019 तक का वेतन जारी किए जाने हेतु आदेश पारित किया जाए।

इस पर याचिकाकर्ता ने अवमानना वाद दायर किया। कोर्ट ने उन्हें उपयुक्त प्राधिकार से संपर्क करने की छूट दी।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

लेकिन जैसे ही अवमानना ​​की कार्यवाही को समाप्त हुई, तो उक्त ज़िला शिक्षा पदाधिकारी ने एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता द्वारा उन पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि अगले आदेश तक याचिकाकर्ता से कार्य नहीं लिया जाना चाहिए।

https://biharnewspost.com

BiharNewsPost MobileApp
https://biharnewspost.com

साथ ही यदि कार्य लिया जाता है, तो प्रभारी प्राचार्य की जवाबदेही होगी। इन घटनाओं के मद्देनज़र जब हाईकोर्ट ने डीईओ को नोटिस जारी किया, तो कोर्ट को बताया गया कि अब वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उन पर अवमानना की कार्रवाई न की जाए ।

अदालत ने उन्होंने अवमानना का दोषी पाते हुए पटना के बेऊर जेल में दो दिनों की जेल भेजने की सजा सुना दी और याचिकाकर्ता को 50 हज़ार रुपये देने के लिए भी कहा है।

पटना हाइकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ के समक्ष आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार ने बताया कि पटना समेत अन्य जिलों में मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड के अध्यक्षों की बहाली के लिए फाइल चयन समिति के पास जाएगी।

याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट ने जो भी आदेश दिया,उस पर राज्य सरकार के द्वारा कोई प्रभावी और ठोस कार्रवाई अब तक नहीं किया गया है।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को पूरी जानकारी देने को कहा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्या क्या कमियों के सम्बन्ध में ब्यौरा देने को कहा था।

साथ ही कोर्ट ने इसमें सुधारने के उपाय पर सलाह देने को कहा।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने बताया कि नेशनल मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम ही के अंतर्गत राज्य के 38 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मेन्टल हेल्थ प्रोग्राम चल रहा हैं।लेकिन इसमें स्टाफ की संख्या नाकाफी ही है।जबकि हर जिले में सात सात स्टाफ होने चाहिए।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का दायित्व है कि वह मेन्टल हेल्थ केयर एक्ट के तहत कानून बनाए।साथ ही इसके लिए मूलभूत सुविधाएं और फंड उपलब्ध कराए।लेकिन अबतक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

कोर्ट को ये भी बताया गया था कि सेन्टर ऑफ एक्सलेंस के तहत हर राज्य में मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कॉलेज है।लेकिन बिहार ही एक ऐसा राज्य हैं,जहां मानसिक रोग के अध्ययन और ईलाज के लिए कोई कालेज नहीं है।जबकि प्रावधानों के तहत राज्य सरकार का ये दायित्व हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले फंड में कमी आयी है,क्योंकि फंड का राज्य द्वारा पूरा उपयोग नहीं हो रहा था।

पूर्व की सुनवाई में याचिकाकर्ता की अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय ने कोर्ट को बताया कि बिहार की आबादी लगभग बारह करोड़ हैं।उसकी तुलना में राज्य में मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुनियादी सुविधाएँ नहीं के बराबर है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 31जनवरी,2023 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राज मार्ग 80 के निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की

पटना हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राज मार्ग 80 के निर्माण में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों के काम काज पर तीखी टिप्पणी की है।

कोर्ट ने कहा कि जो काम अधिकारी का हैं, वह काम कोर्ट को करना पड़ रहा है।मुंगेर से मिर्जाचौकी तक बनने वाली राष्ट्रीय राज मार्ग 80 के निर्माण में जमीन का अधिग्रहण नहीं किये जाने पर कोर्ट ने जिला भूअर्जन पदाधिकारी को जमीन अधिग्रहण का काम जल्द पूरा करने का आदेश दिया।

इस मामले पर सुनवाई के दौरान मुंगेर के डीएम तथा जिला भूअर्जन पदाधिकारी कोर्ट में उपस्थित थे।डीएम ने कोर्ट को बताया कि 2.5 किलोमीटर राज मार्ग के निर्माण के लिए करीब 80 पक्का मकान को ध्वस्त करना पड़ेगा।उनका कहना था कि अगर राज मार्ग के निर्माण के लिए थोड़ा सा एलाइमेन्ट में बदलाव किये जाने से काफी कम घरों को तोड़ना पड़ेगा।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उन्होंने कोर्ट को एक दूसरा प्रस्ताव भी दिया कि अगर पुराने राष्ट्रीय राज मार्ग को ही नये राष्ट्रीय राज मार्ग से जोड़ दिये जाने पर काफी कम घर को तोड़ना पड़ेगा।कोर्ट ने एनएचएआई के अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या का समाधान हल करने का निर्देश दिया।

वही अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार ने कोर्ट को बताया कि मुंगेर जिला में नियमित भूअर्जन पदाधिकारी के नहीं रहने से राष्ट्रीय राज मार्ग के निर्माण में बाधा उत्पन्न हो रही हैं।इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को कार्रवाई करने का आदेश दिया।साथ ही मामलें पर अगली सुनवाई की तारीख 2 फरवरी,2023 निर्धारित की है।

पटना हाईकोर्ट ने जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्माण,विस्तार एवं नवीनीकरण के मामले पर पटना एयरपोर्ट के डायरेक्टर को तलब किया

पटना हाईकोर्ट ने जय प्रकाश नारायण एयरपोर्ट के निर्माण,विस्तार एवं नवीनीकरण के मामले पर पटना एयरपोर्ट के डायरेक्टर को तलब किया है। चीफ जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने गौरव कुमार सिंह की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया ।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि पटना ऐयरपोर्ट में सुविधाओं की काफ़ी कमी है।इस एयरपोर्ट से हवाई यात्रा करना काफ़ी जोखिम भर है ।

Patnahighcourt

इस पर कोर्ट ने पटना एयरपोर्ट के डायरेक्टर को अगली सुनवाई को कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है । इस मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी,2023 को होगी ।

पटना हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक को सहायक प्रोफेसर बहाली मामलें में तलब किया

पटना हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक को सहायक प्रोफेसर बहाली मामलें में तलब किया है।जस्टिस पी बी बजनथ्री व जस्टिस अरुण कुमार झा की खंडपीठ ने डा कुमार चन्दन की अपील पर सुनवाई की।

कोर्ट ने निदेशक को आगामी 31 जनवरी को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया है।कोर्ट का कहना था कि सहायक प्रोफेसर के बहाली के लिए कौन कौन सा पद स्वीकृत था।

PatnaHighCourt
#PatnaHighCourt

उसकी पूरी जानकारी देने का आदेश आईजीआईएमएस के निदेशक को देने का आदेश दिया ।

इससे पूर्व कोर्ट ने सहायक प्रोफेसर बहाली मामले का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश आईजीआईएमएस को दिया था।इस मामलें पर अगली सुनवाई 31जनवरी, 2023 को की जाएगी।