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बिहार में युवा सबसे अधिक कोरोना से हो रहे हैं संक्रमित, ओमीक्रोन के दस्तक से दहशत में सरकार

#Covid19  कोरोना को हलके में ना ले दूसरे लहर से भी खतरनाक हो सकता है तीसरा लहर ऐसा मानना है पटना एम्स के डांक्टर का, हो यह रहा है कि तीसरी लहर को सामान्य सर्दी खांसी वाली लहर समझ कर मरीज घर से बाहर  निकल जा रहे हैं जो खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। लक्षण होने के बावजूद जांच ना कराना और काम पर निकल जाना बड़ी परेशानी बन सकती है। एम्स में अभी तक जीतने भी मरीज आ रहे हैं उनमें ज्यादातर वही लोग हैं जो कामकाजी लोग हैं। 18 से 25 साल के बीच के लोग जो सक्रिय लोग हैं जो घरों से ज्यादा निकलते हैं कामकाज करते हैं ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा है।  साथ ही आम लोग काफी हद तक खुद से घर में इलाज कर ले रहे हैं। लेकिन, ऐसे में यह समझ लेना कि लक्षण गंभीर नहीं हैं ऐसा नहीं है एम्स में अभी तक 60 मरीज भर्ती हो चुके हैं, अब तक 5 की मौत भी हुई है 11 लोग ICU में हैं।

1—24से 26 जनवरी तक तीसरा लहर पीक पर जा सकता है 

तीसरे लहर में कोरोना को लेकर अभी तक जो बात सामने आयी है उसमें बिहार का R-Value 4.55 यानी एक व्यक्ति 4 से अधिक लोगों को संक्रमित कर रहा है। ऐसे में हम यह मान रहे हैं कि बिहार में तीसरी लहर की पीक 24 से 26 जनवरी के बीच आएगी ऐसे में काफी सतर्क रहने कि जरूरत है और इस बार 40 से 50 के बीच युवा मरीज ज्यादा परेशानी महसूस कर रहे हैं ।

2– तीसरे लहर में कोरोना का लक्षण बदल गया है 

सामान्य तौर पर इस बार लक्षणों में सर्दी खांसी ज्यादा है लेकिन इसके साथ ही कुछ नए लक्षण भी हैं जो सामने आ रहे हैं। बदन में असहनीय दर्द हो रहा है, इतना ज्यादा कि मरीज कई बार दर्द की वजह से डिप्रेशन में चले जा रहे हैं। गले में खराश बहुत ज्यादा परेशान करने वाली है। इसके साथ ही पेट खराब होना , आंखों में लालीपन, लाल चकत्ते शरीर पर होना , सिर दर्द यह सारे लक्षण है जो इस बार सामने आ रहे हैं।

3—कोरोना संक्रमित मरीजों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला तेज हो रहा है

एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 72 घंटों के दौरान बिहार में कोरोना से संक्रमित मरीजों का अस्पताल में भर्ती होने का सिलसिला तेज होने लगा है चार दिन पहले दो चार ऐसे मरीज आ रहे थे जिनको भर्ती होने कि जरूरत महसूस हो रही थी लेकिन अभी 

एम्स में—48, आईजीएमस–12, एनएमसीएच–47, पीएमसीएच–05

मतलब पूरे बिहार में इस समय सौ के करीब मरीज भर्ती है जिसमें 30 से अधिक मरीज आईसीयू में भर्ती है ।

4–ओमीक्रोन पहुंचा बिहार

एक सप्ताह तक बिहार में ओमीक्रोन से पीड़ित एक मरीज का पता चला था जो दिल्ली अपने ओमीक्रोन पीड़ित भाई से मिलने गया था लेकिन बिहार में कल जिस 32 सैंपल की जांच हुई है उसमें 27 ओमीक्रोन से पीड़ित मिला है इस तरह कुल टेस्ट का 85 प्रतिशत मरीज ओमीक्रोन से पीड़ित मिल रहा है ऐसे में विशेषज्ञों की राय है कि बिहार में जांच में तेजी लायी जाये तो ओमीक्रोन से संक्रमित मरीजों की संख्या काफी हो सकती है ऐसे में बिहार के लोगों को और सतर्क रहने कि जरूरत है ।

5–पटना बना #Corona Hotspot 

जी है अभी तक जो जांच रिपोर्ट सामने आया है उसमें संक्रमण दर की बात करे तो बिहार में सबसे अधिक 21.94 प्रतिशत संक्रमण पटना का है दूसरे स्थान पर गया है वही अभी तक 300 प्रखंड में कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है पिछले एक सप्ताह के दौरान जांच के बाद संक्रमण दर एक फीसदी से बढ़कर 2.55 प्रतिशत हो गया है ।

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के काम काज को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कोर्ट ने लिया संज्ञान

पटना हाईकोर्ट में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में सही तौर से काम- काज किये जाने को लेकर तदर्थ कमेटी बनाने हेतु एक जनहित याचिका पर सुनवाई 17 जनवरी,2022 तक टली। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अजय नारायण शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई की है।

इस जनहित याचिका में चयनकर्ताओं/ सपोर्ट स्टाफ व बी सी सी आई द्वारा संचालित घरेलू टूर्नामेंट में विभिन्न उम्र के राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाडियों को सही तौर से चयन करने को लेकर आदेश देने का अनुरोध किया गया है।।
इस जनहित यह आरोप लगाया गया है कि प्रबंधन कमेटी में अवैध रूप से कुर्सी पर काबिज लोगों द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है।

यह भी आरोप लगाया गया है कि कुर्सी पर कथित रूप से अवैध तौर पर बैठे लोग प्रतिभावान क्रिकेट खिलाड़ियों के दावों को हतोत्साहित कर रहे हैं। खिलाड़ियों के मनमाने औऱ अनुचित तौर से चयन कर क्रिकेट को बेचने पर उतारू है।
इस याचिका में यह भी माँग की गई है कि पटना हाईकोर्ट में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन से सम्बंधित मामलों की सुनवाई एक साथ एक बेंच द्वारा की जाए।

राज्य में खिलाड़ियों की स्थिति और भी खराब होते जा रही है। साथ ही इस से खिलाड़ी घरेलू टूर्नामेंट में भी कामयाब नहीं हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बोर्ड ऑफ कंट्रोल फोर क्रिकेट इन इंडिया एंड अदर्स बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार व अन्य के मामले में 9 अगस्त, 2018 को दिये गए फैसले दिया गया था।

इसके अनुसार जस्टिस आर एम लोढ़ा कमेटी द्वारा की गई अनुशंसा के आलोक में खिलाड़ियों का सही तौर से चयन करने हेतु क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के गठन करने को लेकर आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

इस मामलें पर अब अगली सुनवाई 17 जनवरी,2022 को होगी।

पीएम को सुरक्षा मानको से खिलवाड़ की अनुमति नहीं होनी चाहिए

मोदी की सुरक्षा में चूक सिस्टम का फेल्योर है ।
सुप्रीम कोर्ट को कठोर एक्शन लेनी चाहिए ।
पीएम को सुरक्षा मानको से खिलवाड़ की अनुमति नहीं होनी चाहिए ।

लोकतंत्र में जनता द्वारा चुनी गयी सरकार बहुमत के दंभ पर मनमर्जी ना करे उसी को नियंत्रित करने के लिए न्यायपालिका और कार्यपालिका का गठन किया है, भारतीय लोकतंत्र का सार तत्व यही है लेकिन भारत में धीरे धीरे विधायिका के सामने कार्यपालिका और न्यायपालिका कमजोर पड़ती जा रही है ऐसे में लोकतंत्र खतरे में है यह कहने में कोई गुरेज नहीं है।
एक कहानी अमेरिका में काफी प्रचलित है एक बार अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन व्हाइट हाउस के बाहर सुबह सुबह टहल रहे थे कोहरा की वजह से एक राहगीर राष्ट्रपति से टकरा गया । वह व्यक्ति शायद जल्दी में था झुँझलाकर पूछा कौन है भाई राष्ट्रपति का जवाब था यही जानने के लिए तो मैं टहल रहा हूं।

ये नहीं चलेगा एसपीजी को सख्त होना होगा


राहगीर को लगा कि यह व्यक्ति सनकी है फिर राहगीर ने व्हाइट हाउस की ओर इशारा करते हुए पूछा इसमें कौन रहता है राष्ट्रपति ने कहा मित्र इसमें कोई नहीं रहता है लोग आते और चले जाते हैं कहने का मतलब पीएम की कुर्सी पर लोग आते हैं और चले जाते हैं लेकिन संस्थान से जुड़े लोग हमेशा बने रहते हैं ऐसे में संस्थानों की विशेष जिम्मेवारी है कि ये जो आने और जाने वाले लोग है जिन्हें जनता चुनती है उनकी मनमर्जी को नियंत्रित रखे तभी इस देश में लोकतंत्र आगे बढ़ पायेगा
पंजाब में पीएम का रास्ता रोके जाने के मामले में जो सियासी तमाशा चल रहा है इसमें संस्थानों की जिम्मेवारी बढ़ गयी है सवाल मोदी का नहीं है

ये व्यक्ति कैसे पीएम के गाँड़ी के पास पहुँच गया क्या ये चूक नहीं है

सवाल देश का है ऐसे में मोदी की सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है अच्छा है पीएम की सुरक्षा को लेकर विस्तृत बहस हो और उसके बाद ऐसा फुलप्रूफ व्यवस्था बने कि फिर से पीएम की सुरक्षा को लेकर सियासत ना हो सके क्यों कि पंजाब की घटना के बाद कई ऐसे तथ्य सामने आयी है जहां मोदी सुरक्षा मानकों का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन करते दिख रहे हैं ये अनुमति किसी भी पीएम को नहीं मिलनी चाहिए और इसके लिए एसपीजी को सुरक्षा मानको को लेकर और सख्त होने कि जरूरत है ।

पंजाब से जो खबरें आ रही है कि पीएम का काफिला रोकने के मामले में पीएम के पास कोई भी किसान नहीं था जबकि बीजेपी के नेता ही मौजूद थे पीएम इस रास्ते से जा रहे हैं ये बीजेपी के नेता को कैसे पता चला जिस बीजेपी के नेता का वीडियो वायरल हो रहा है उसका नाम शिवम है और मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया है कि पीएम के पास मोदी जिंदाबाद का नारा में हूं लहरा रहा था वीडियो में साफ दिख रहा है कि झंडा लिए यह शख्स पीएम के गाड़ी के काफी करीब पहुंच गया है और एसपीजी मूकदर्शक बना हुआ है क्या बीजेपी का झंडा और मोदी जिंदाबाद का नारा लगाने वाले आतंकी नहीं हो सकता है यह वीडियो कही ना कही एसपीजी के प्रोफेशनल पुलिस होने पर सवाल खड़े कर रही है इतना ही नहीं एक वीडियो काशी का भी सामने आया है इस वीडियो को देखने के बाद तो लगता ही नहीं है कि पीएम की सुरक्षा में एसपीजी लगा हुआ है यह वीडियो तो बर्दाश्त योग्य नहीं इसी तरह की गलती की वजह से देश दो प्रधानमंत्री को खो चुका है।

रवीश कुमार ने मीडिया को कहाँ लोकतंत्र का दुश्मन

14 जनवरी से विपक्ष और जनता शुरू करें अख़बार फाड़ो और चैनल सुधारो आंदोलन

जब तक विपक्ष अपनी सभाओं के मंच से अख़बार फाड़ो आंदोलन शुरू नहीं करेगा तब तक जनता नहीं समझ पाएगी कि चुनाव के समय अख़बार और न्यूज़ चैनल किस तरह से लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं। यह लोकतंत्र जनता का है। उसने बनाया है। इसलिए आप जनता पर ज़िम्मेदारी है कि चुनाव के समय अख़बारों और सभी न्यूज़ चैनलों के कवरेज को ध्यान से देखें। अख़बारों और न्यूज़ चैनलों के ख़िलाफ़ विपक्ष इसलिए आंदोलन नहीं कर रहा है क्योंकि सत्ता मिलने पर वह भी अख़बारों का इस्तमाल इसी तरह करता है या करना चाहता है। इसलिए विपक्ष के नेता आराम से गोदी मीडिया में इंटरव्यू देने जाते हैं। विपक्ष के नेता को हर दिन का अख़बार रैली में भाषण शुरू करने से पहले फाड़ना चाहिए। रैली में आई जनता को बताना चाहिए कि कैसे पैसे के दम पर ये अख़बार बिक गए हैं। इनमें विपक्ष का कवरेज नहीं है। एक दिन आप जनता को भी ये अख़बार ग़ायब कर देंगे। इसका बड़ा असर होगा। लेकिन विपक्ष डरपोक हो चुका है। उसमें नैतिक बल नहीं बचा है।इससे नुक़सान आप जनता और पाठकों का होता है। क्योंकि इनके कूड़ा को पढ़ने और देखने में आपका समय और पैसा ख़र्च होता है।

हज़ारों करोड़ रुपये के इस मीडिया के ज़रिए जनता को ग़ुलाम बनाने का जो खेल चल रहा है, उसके चक्रव्यूह को जनता ही तोड़ेगी लेकिन उसके पहले उसे पूरा खेल समझना होगा। यूपी चुनावों के दौरान हिन्दी के अख़बार और न्यूज़ चैनल गंध फैलाने जा रहे हैं।
इसलिए जनता से अपील है कि वह लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीक़े से अपने अपने घरों में अख़बार फाड़ो आंदोलन शुरू करे। बालकनी में जाकर अख़बार फाड़ दे। चौराहे पर जाकर अख़बार फाड़ दे और चुनावों के दौरान अख़बार बंद करा दे। ये सब गिरोह बन गए हैं। आपके विश्वास का सौदा कर रहे हैं। आप सावधान नहीं होंगे तो फिर मीडिया मीडिया को लेकर रोना मत रोइयेगा।

सबसे पहले आप पाठक और दर्शक अख़बार पढ़ने और टीवी देखने का तरीक़ा और नज़रिया बदलें। ग़ौर से देखिए कि कवरेज के नाम पर केवल रैलियों का सीधा प्रसारण हो रहा है या उनमें कही गई बातों का अपने रिपोर्टर के सहारे तथ्य जुटाकर परीक्षण भी किया जा रहा है। यह भी देखिए कि क्या केवल प्रधानमंत्री की रैली कवर हो रही है? यह भी देखिए कि रैलियों के कवरेज में विपक्ष को कितनी जगह मिल रही है। यह भी देखिए कि प्रधानमंत्री और बीजेपी की रैली के सीधा प्रसारण में लगातार कवरेज़ हो रहा है, कितनी देर तक कवरेज़ हो रहा है और विपक्ष की रैली का कवरेज शुरु होते ही कैसे ब्रेक आ जाता है। क्या गाँव गाँव भ्रमण करने के नाम पर निकले टीवी के ऐंकर या रिपोर्टर हालात का जायज़ा ले रहे हैं या आकर्षक मंच सज़ा कर बहस करा रहे हैं। जिनसे कुछ निकलता नहीं है। मार-पीट, हंगामा और किसी प्रवक्ता के ग़ुस्से या लतीफ़े का भाषण लोकप्रिय हो जाता है। जिसमें आपको मज़ा तो आता है मगर मिलता कुछ नहीं है। डिबेट शो से सावधान रहें। यह चुनाव के समय जनता की आँखों में धूल झोंकने का कार्यक्रम होता है। मेरा काम है समय पर बता देना। बाक़ी आप इस उस चैनल के बीच फ़र्क़ करते रहें।

इन पैमानों में आप दर्शक भी अपनी तरफ़ से कुछ जोड़ सकते हैं। मेरे इन पैमानों से आप देखेंगे कि न्यूज़ चैनल और यू ट्यूबर अस्पताल या किसी सरकारी संस्थान के पास नहीं जाते, जिससे आप उन जगहों का हाल समझें।पता चले कि मरीज़ किस स्थिति से गुज़र रहा है। शहर में कूड़े की हालत से लेकर रद्दी हो चुके सरकारी स्कूल और कालेज का हाल बताने नहीं जाएँगे। बस चौराहे पर कुछ वक्ता क़िस्म के लोगों को पकड़ लेंगे जो बहस को शानदार बना देते हैं। इससे वीडियो तो वायरल होता है मगर दर्शक को दूसरा वायरल हो जाता है। अंधकार का वायरल। उन बहसों में कुछ नहीं होता है। बस यही कि यूपी होगी किसकी। जबकि पत्रकारों को हर दावों की रिपोर्टिंग करनी चाहिए। पड़ताल करनी चाहिए। मगर मीडिया हर चुनाव को एक मौक़े के रुप में इस्तमाल करता है। चुनाव के नाम पर खूब कमाता है और चुनाव के बहाने जनता को और अधिक अंधकार में धकेल देता है।

मैंने भी पब्लिक के बीच जाकर रिपोर्टिंग की है। लेकिन अब नहीं करता। पाँच साल से मीडिया क्या जनता को सूचनाओं की जानकारी दे रहा था? एक पाठक और दर्शक के तौर पर आप याद करें। कितनी खोजी ख़बरें देखी हैं आपने? जिसमें अख़बार या टीवी के दर्शक ख़बर को सरकारी दावों से अलग खोज कर लाते हों?जब ऐसी रिपोर्टिंग होती ही नहीं है तो इसका मतलब है कि आपको भी कुछ नहीं पता। तो ये मॉडल क्या है? ये मॉडल है कि पहले आपको अंधकार में रखना, फिर आपको चुनाव के समय जागरुक घोषित कर आपकी प्रतिक्रियाओं से उस अंधेरे का विस्तार करना। अभी नहीं तो बीस साल बात ज़रूर समझ आएगा। आप चुनाव के बहाने फिल्ड में बहुत से पत्रकारों को घूमते तो देखेंगे लेकिन उनसे रिपोर्टिंग नहीं दिखेगी। बहुत कम मात्रा में दिखेगी।

इसी तरह आप सभी चैनलों के कार्यक्रम देखते हुए सख़्त मानक बनाएँ। देखें कि टीवी का रिपोर्टर चौराहे पर खड़ा होकर केवल पब्लिक से बयान ले रहा है या अपनी तरफ़ से
जनता को बता भी रहा है। अख़बारों के कवरेज को भी ध्यान से पढ़िए। पैसे का बड़ा खेल वहाँ भी होता है। अख़बार अपनी तरफ़ से पड़ताल कर रहे हैं या केवल रैलियों का कवरेज हो रहा है। भाषणों के आधार पर हेडलाइन बनाई जा रही है। एक अख़बार में कितनी ख़बर बीजेपी की छप रही है और कितनी ख़बर विपक्ष की। उस ख़बर के भीतर बीजेपी की ख़बर की कैसी डिटेल है और विपक्ष की कैसे। जैसे मुमकिन है कि विपक्ष की ख़बर में डिटेल न हो। उसके मूल सवाल ग़ायब कर दिए जाएँ और विपक्ष के नेता के बयान को कभी पहले नंबर की प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। उनके बयानों को हल्के अक्षरों में छापा जाएगा जबकि बीजेपी के अख़बारों को मोटे अक्षरों में प्रमुखता से छापा जाएगा।

हिन्दी के अख़बार बड़े धूर्त हैं। चुनावी कवरेज के नाम पर अपनी पुरानी फाइल निकाल कर इतिहास बताने के नाम पर पन्ना भर देते हैं। जाति की गिनती बता देते हैं मगर नेता के काम को लेकर रिपोर्टिंग नहीं करते हैं। आपको लगेगा कि चुनावी कवरेज पढ़ रहे हैं लेकिन इतिहास के नाम पर उसमें कुछ नहीं होता है। बोगस है। हर चुनाव नया होना चाहिए और पिछले चुनाव में किए गए वादों की समीक्षा के नाम पर होना चाहिए। उनका कवरेज होना चाहिए।

चुनाव को लेकर जो असली खेल चलता है, चंदे का, खर्चे का, बूथ मैनेजमेंट का इन सबकी गहराई से रिपोर्टिंग नहीं होती है।प्रेस का काम है कि वह चुनाव आयोग की भूमिका पर भी नज़र रखे। केवल आयोग की प्रेस कांफ्रेंस कवर न करे। बल्कि देखे कि आयोग निष्पक्ष वातावरण बना रहा है या नहीं। सभी के लिए बराबर से फ़ैसले हो रहे हैं या नहीं। चंदे का खेल पकड़े। केवल इल्केटोरल रोल ही चंदे का सोर्स नहीं है। स्थानीय स्तर पर भी दुकानदारों और व्यापारियों से भारी मात्रा में अघोषित चंदा वसूला जाता है। क्या किसी अख़बार या चैनल में दम बचा है कि इन सबको उजागर कर दे। इसलिए आप मीडिया के ज़रिए हर दिन मारे जा रहे हैं। आप मृत मतदाता होते जा रहे हैं। मृत मतदाताओं से वोट दिलवा कर इस लोकतंत्र को कृत्रिम रुप से लोकतंत्र बनाया जा रहा है। मेरी इस बात को लिख कर पर्स में रख लें। बाद में अफ़सोस के वक़्त काम आएगा।

पाठकों से अपील है कि पहले तो अख़बारों को लेना बंद करें। इनसे आप प्रोपेगैंडा के अलावा कुछ नहीं जाते हैं। लेकिन कुछ हज़ार की संख्या में पाठक अख़बार लें मगर उनकी समीक्षा के लिए। उनकी ख़बरों की एक एक बात को गहराई से देखें और हर दिन ट्विटर से लेकर इंस्टाग्राम पर उनकी तस्वीर लगाकर समीक्षा करें। पाठक और दर्शक का अपना आंदोलन चलना चाहिए।

हर दिन कुछ पाठक दैनिक जागरण तो कुछ अमर उजाला, कुछ दैनिक हिन्दुस्तान तो कुछ भास्कर का अध्ययन करें। यह काम विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी करना चाहिए। बीजेपी और विपक्ष की ख़बरों की हर मामले में तुलना करें। आपस में चर्चा करें और सोशल मीडिया पर बताएँ कि कैसे एक अख़बार किसी एक के पक्ष में धार्मिक बयान को मोटे अक्षरों में छाप रहा है। कैसे सभी अख़बारों में किसी एक दल के फ़ायदे के लिए सभी धार्मिक बयानों को प्रमुखता से छापा जा रहा है। कैसे इन बयानों को छापने के लिए तरह तरह के नए संगठन और धर्म गुरु सामने लाए जा रहे हैं।

इसी तरह। राजनीतिक विज्ञापनों की भी तुलना करें। बीजेपी से लेकर सपा और कांग्रेस सबके विज्ञापन की। उनमें क्या है और उनकी संख्या कितनी है। अख़बार में छपने वाली रैलियों की तस्वीर की भी तुलना करें।अगर इस तरह की समीक्षा आप पाठकों ने कर दी तो जनता यूपी चुनाव के बहाने मीडिया को और बेहतर तरीक़े से समझेगी।

ऐसा कर आप हम पत्रकारों की बहुत मदद करेंगे। न्यूज़ रुम का माहौल बदलेगा कि जनता समझदार हो गई है। इस मीडिया पर बिल्कुल भरोसा न करें। बल्कि इस लाइन को गाँव गाँव की दीवारों पर लिख दें मगर लिखने से पहले चुनाव आयोग से इजाज़त ले लें क्योंकि नारे लिखने पर कार्रवाई हो सकती है। लेकिन सोशल मीडिया पर आप लिख सकते हैं। अगर ये आंदोलन चल पड़ा तो फिर से पत्रकारों के हाथ में कलम आ जाएगी और जनता के हाथ में अधिकार। मृत मतदाता जीवित हो उठेगा और लोकतंत्र जीवंत।

राबड़ी के बहाने सुशील मोदी ने ठाकरे पर साधा निशाना

महाराष्ट्र पुलिस ने किया राबड़ी देवी का अपमान, उद्धव ठाकरे से बात करें लालू-सुशील कुमार मोदी

पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति पूरा सम्मान, उनसे किसी मराठी की तुलना अपमान कैसे?

  1. महाराष्ट्र में भाजपा सोशल मीडिया सेल के प्रभारी ने यदि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे को “मराठी राबड़ी देवी’ कहा और इसे ‘अपमान’ या ‘गाली’ मान कर वहां की पुलिस ने कार्रवाई की, तो राजद को कांग्रेस, शिवसेना और महाराष्ट्र सरकार से अपना विरोध प्रकट करना चाहिए।
    ठाकरे सरकार बताये कि बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री का नाम क्या कोई असंसदीय शब्द है?
  1. भाजपा जानना चाहती है कि क्या महाराष्ट्र पुलिस राबड़ी देवी जी को ऐसी सम्मानित महिला नहीं मानती, जिससे किसी मराठी की तुलना की जा सके ?
    राबड़ी देवी का अपमान वह महाराष्ट्र पुलिस कर रही है, जिसने सुशांत सिंह राजपूत के मामले में लीपापोती की और जिस पर 100 करोड़ रुपये महीने की अवैध वसूली के दाग लगे हैं।
  2. राबड़ी देवी से भाजपा के राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं और भले ही उन्होंने कभी बिहार के एक राज्यपाल के प्रति अमर्यादित शब्दों का प्रयोग भी किया हो, लेकिन हमारी पार्टी सदा उनका सम्मान करती है।
    यदि हिम्मत है तो लालू प्रसाद इस मुद्दे पर सोनिया गाँधी या उद्धव ठाकरे से बात करें।
    राजद बेवजह भाजपा को निशाना बना रहा है।

बिहार में खाद को लेकर किसानों का हंगामा जारी

बिहार में खाद को लेकर संग्राम जारी है दो सप्ताह पहले तक डीएपी खाद को लेकर किसान परेशान था अब यूरिया खाद को लेकर किसान परेशान है ।इस बीच अररिया के किसानों को खाद नहीं मिलने की वजह से शनिवार की सुबह सैकड़ों की संख्या में किसानों ने टाउन हॉल के समीप सड़क को जाम कर दिया और खाद उपलब्ध कराने की मांग करने लगे।

बिहार में खाद के लिए सड़क पर उतरे किसान

जीरोमाइल से चांदनी चौक जाने वाली मुख्य मार्ग जाम हो जाने से सैकड़ों वाहन का जाम मे फस गया और आवागमन बाधित हो गया है। जिससे जाम की समस्या उत्पन्न हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही अररिया SDO पुष्कर कुमार नगर थाना अध्यक्ष कुमार अभिनव दल बल के साथ पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे किसानों को समझा बुझाकर शांत कराया।

इस मौके पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि यूरिया प्रति बोरा 266 का दाम है लेकिन खाल दुकानदार के द्वारा 300 से 400 में यूरिया बेचा जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि जब वह लोग सरकारी दाम पर यूरिया देने की मांग करने लगे तो खाद दुकानदार दुकान बंद कर फरार हो गया। जिसके बाद आक्रोशित किसानों ने सड़क जाम कर दीया और सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन करने लगे।

खाद को लेकर बिहार में गुस्से में है किसान


यह स्थिति पूरे बिहार का है पहले डीएपी को लेकर हंगामा था अब यूरिया को लेकर हंगामा है हालांकि खाद को लेकर इस तरह की परेशानी काफी दिनों बाद देखने को मिल रहा है ।

बिहार में दूसरी लहर से भी तेज गति से बढ़ रहा है कोरोना।

सीमित लॉकडाउन के बावजूद बिहार में कोरोना का लहर बेकाबू होता जा रहा है इस बीच बिहार में कोरोना के फैलाव का जो आकड़ा सामने आ रहा है वह चिंता बढ़ाने वाली है दूसरे और तीसरे लहर के आंकड़ों के अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि शुरुआती 15 दिनों में दूसरी लहर की तुलना में तीसरी लहर में संक्रमण दर 1.5 गुना ज्यादा है ।

दूसरी लहर में 15 दिनों 22 मार्च से 05 अप्रैल के बीच 5410 संक्रमित मरीज जांच में सामने आया था वही इस बार 24 दिसंबर से 07 जनवरी के बाच 9447 संक्रमित मरीज जांच में सामने आया है वही बात जांच के प्रतिशत की कड़े तो 10 मरीज में 1.64 मरीज संक्रमित पाये जा रहे हैं साथ ही मरीज के भर्ती होने कि बात करे तो यहां भी दूसरी लहर से ज्यादा लोग अभी तक भर्ती हो चुके हैं वही अभी तक बिहार में तीन लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है।

वही बीते 24 घंटे में पटना AIIMS में 6 साल की मासूम के साथ 33 नए मरीज भर्ती हुए हैं। संक्रमण के मामले जिस तरह से बढ़ रहे हैं उसी हिसाब से हॉस्पिटल में भी भीड़ बढ़ रही है।

बात रिकवरी रेट की करे तो बिहार में रिकवरी रेट में भी गिरावट आनी शुरु हो गयी है। अब यह 97.20% पहुंच गई है। अब तक राज्य में कुल 7,35,852 लोग संक्रमित हुए हैं, जिसमें 7,15,262 मरीजों ने कोरोना को मात दी है। अब तक राज्य में 12,100 लोगों की मौत हो चुकी है।

शनिवार को राजद कार्यालय में हुई जांच में 8 लोग पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद एहतियात के तौर पर ऑफिस को बंद किया गया है। वहीं, इस संबंध में राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि हमारे सभी कर्मचारी और पदाधिकारी कोविड जांच में सुरक्षित पाए गए हैं। लेकिन, पोर्टल के कुछ लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। कोरोना की बढ़ती स्थिति को देखते हुए राजद कार्यालय अगले आदेश तक के लिए बंद किया गया है।

नीतीश के गुगली में एक बार फिर फंसा बीजेपी

नीतीश बिहार की राजनीति के चाणक्य हैं ये कई मौके पर साबित कर चुके हैं और एक बार फिर जातीय जनगणना पर बयान देकर बीजेपी सहित सारे विपंक्ष को बैकफुट पर खड़ा कर दिया है।

बिहार की राजनीति में इस वक्त राजनीतिक समझ और उस समझ के सहारे सौदेबाजी में नीतीश कुमार के सामने दूर दूर तक कोई नहीं है ।सुशील मोदी में वो समझ था लेकिन नीतीश कुमार के प्रभामंडल से वो कभी बाहर नहीं निकल सके और इस वजह से बीजेपी बिहार में स्वतंत्र निर्णय लेने कि स्थिति में अभी भी नहीं है।

लालू प्रसाद नीतीश से बेहतर खिलाड़ी हैं लेकिन सत्ता लोलुपता में इस तरह फंसे हुए हैं कि नीतीश की राजनीति को कैसे पराजित करें इस और सोचना ही छोड़ दिया है।

जगतानंद सिंह बेहतर प्रशासक हैं लेकिन राजनीति की वो समझदारी नहीं है, शिवानंद तिवारी में वो आग है लेकिन पार्टी में वो स्थिति नहीं है। बात मनोज झा की करे तो उनकी समझ प्रशांत किशोर वाली है डाटा बेस । और बात बिहार बीजेपी कि करे तो राजनीति की समझ मामले में ऐसी बैंक क्रप्सी पहले कभी नहीं रही है बीजेपी का राज्य और केंद्रीय नेतृत्व इस डर से अभी भी बाहर निकल पा रही है कि कही नीतीश साथ ना छोड़ दे ।

नीतीश कुमार इसी का लाभ उठा रहे हैं और जब बीजेपी से कुछ शर्त मनमानी रहती है तो चलते चलते ऐसा बयान दे देते हैं कि राजद उसमें फंस जाता है और बीजेपी सहम जाता है । याद करिए राज्यपाल कोटे से विधान परिषद सदस्यों के मनोनयन का समय था उस वक्त नीतीश कुमार ने इसी तरह का पिटारा खोल दिया क्या हुआ बीजेपी को मनोनयन में नीतीश के 50 प्रतिशत वाली शर्त माननी पड़ी।

अगले माह बिहार विधान परिषद के 24 सीटों का चुनाव होना है 2015 की बात करे तो उस चुनाव में भाजपा को 11, जदयू को 5, लोजपा को 1, कांग्रेस को 1, राजद को 4 सीटों पर जीत मिली थी बाद में भोजपुर के राधा चरण साह, मुंगेर के संजय प्रसाद और सीतामढ़ी के दिलीप राय राजद छोड़कर जदयू में आ गये वही पूर्वी चंपारण से कांग्रेस के टिकट पर जीते राजेश राम भी जदयू का दामन थाम लिया।


कटिहार से निर्दलीय जीते अशोक अग्रवाल और सहरसा से लोजपा के टिकट पर जीतीं नूतन सिंह भाजपा का दामन थाम ली इस तरह.बदलाव के बाद भाजपा में 13 और जदयू में 9 सदस्य है। नीतीश यहां भी 50–50 का फॉर्मूला चाहते हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार ने जातीय जनगणना के जीन को पिटारा से बाहर निकाल दिया है और कहा बिहार बीजेपी में जातीय जनगणना को लेकर अभी तक सहमति नहीं बनी है जिस दिन सहमति बन जायेंगी सर्वदलीय बैठक की तिथि तय हो जायेंगी ।

नीतीश का यह बयान सही निशाने पर लगा है और राजद आगे आकर समर्थन देने तक की बात कह दी हालांकि बीजेपी का अधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है लेकिन मंत्री नीरज सिंह का बयान पहली बार ऐसा लगा कि बीजेपी नीतीश से अलग स्टैंड लेने पर विचार कर रही है लेकिन मंत्री नीरज सिंह का बयान उतना महत्व नहीं रखता जब तक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष या फिर बिहार बीजेपी के प्रभारी का बयान नहीं आता है लेकिन राजद के बयान से इतना तो जरुर हो गया है कि नीतीश एक बार फिर बीजेपी के साथ सौदेबाजी कर सकता है और तय मानिए कि बिहार विधान परिषद का 50-50 का फॉर्मूला का दांव एक बार फिर नीतीश के पक्ष में होगा ।

नीट परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक-सुशील मोदी

नीट-पीजी एवं यूजी में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला गरीबों की ऐतिहासिक जीत – सुशील कुमार मोदी

  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नीट-पीजी एवं यूजी के ऑल इंडिया कोटा में पहली बार ओबीसी को 27 फीसद और सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को 10 फीसद आरक्षण देने का फैसला किया था।
    अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों वर्गों के छात्र-छात्राओं को दाखिले में आरक्षण देने के सरकार के फैसले को बहाल रखा।
    इससे मेडिकल के स्नातक और परास्नातक ( यूजी-पीजी) पाठ्यक्रम में नामांकन चाहने वाले 4 हजार से ज्यादा छात्रों को लाभ होगा।
  2. नीट-पीजी एवं यूजी में नामांकन के 15 प्रतिशत केंद्रीय कोटा में आरक्षण देने के फैसले को जब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, तब सरकार ने मजबूती से अपना पक्ष रखा।
    इस मुद्दे पर अदालत का ताजा निर्णय सभी वर्ग के गरीबों के हित में एक ऐतिहासिक विजय है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के लिए पारिवारिक वार्षिक आय की 8 लाख की सीमा को भी स्वीकार किया है।
    इससे नीट-पीजी काउंसलिंग में गतिरोध खत्म होगा।

आनंद मोहन की रिहाई को लेकर जारी सियासत के बीच अभयानंद ने डीएम कृष्णैय्या के ईमानदारी की चर्चा कर एक नये डिवेट की शुरुआत कर दी

  • घर में खाना नहीं मिलता था *
    श्री जी. कृष्णैय्या पश्चिम चम्पारण के जिला पदाधिकारी थे और मैं पुलिस अधीक्षक। एक दिन हम दोनों बगहा क्षेत्र में नहर की कच्ची सड़क पर चले जा रहे थे। बातों-बातों में अचानक उन्होंने मुझे अपनी ज़िन्दगी के कुछ किस्से सुनाए।
    उनके पिता रेलवे के क्लास 4 कर्मचारी थे। उनकी माँ और पिता के पास बासगित के पर्चे पर बनी एक झोंपड़ी थी। दोनों शिक्षित नहीं थे। वे स्वयं पढ़ने में अच्छे थे तो उनको हरिजन छात्रवृति मिली और वे चौथी कक्षा में हरिजन क्षत्रावास चले गए। उनके गाँव में भी एक नहर था। जब हॉस्टल से मन ऊब जाता तब वे नहर में तैरते हुए घर आ जाते परन्तु किसी दिन भी घर के हड़िया में खाना नहीं मिलता। वे फिर भाग कर हॉस्टल चले जाते। कम से कम वहाँ उन्हें खाना तो मिल जाता था।
    यह एक छोटा सा परिचय है उस IAS DM का जिसने कभी जाति के आधार पर भेद-भाव नहीं किया। अगर वो अंतर करते भी थे, तो गरीब-अमीर पर, जाति पर कभी नहीं।
    जिले का कोई व्यक्ति चाहे कितना भी धनाढ्य क्यों न हो, यह नहीं कह पाया कि कृष्णैय्या जी को उसने छोटा या बड़ा कुछ भी दिया हो। दूसरी ओर ऐसा भी कोई व्यक्ति नहीं था जो यह कह सके कि वह उनसे मिलने उनके घर गया हो और उसे एक प्याला चाय नहीं मिला हो।
    जिले में कई अमीर घराने हैं जिनके घर महलों की भांति हैं। एक आम सभा आयोजित की गई थी जिसका स्थान एक महल के बगल में था। लंच का समय हुआ तो उन जमींदार साहब ने DM और SP साहब को अपने महल में स्वागत का प्रस्ताव दिया। मैंने तुरंत जवाब दिया कि घर से टिफ़िन लाया हूँ। DM साहब ने भी यही जवाब दिया। मुझे अत्यंत खुशी हुई। हम दोनों ने अपनी गाड़ी में साथ में बैठ कर घर से लाया टिफ़िन खाया।
    आम लोगों के बीच यह चर्चा थी कि इससे पहले DM और SP की ऐसी कोई जोड़ी नहीं आई जिसने ज़मींदारों के स्वागत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया हो।
    जिले का आम आदमी उनसे बेहद प्यार करता था, उनकी इज़्ज़त करता था। वे उस जिले में किसी भी भीड़ में घुस जाते तो लोग सम्मान से उनके लिए रास्ता बना देते थे। दुर्भाग्य था कि जिस घटना में उनकी हत्या हुई, वह मुजफ्फरपुर जिले में घटित हुई थी। पश्चिम चम्पारण में यह घटना हो ही नहीं सकती थी।
  • लेखक–अभयानंद पूर्व डीजीपी बिहार

बिहार में कोरोना का कहर जारी हर घंटे 100 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज आ रहे हैं

बिहार में कोरोना का कहर जारी है और अब हर घंटे 100 से अधिक कोरोना पाँजिटिव मरीज सामने आने लगा है ।आज बेगूसराय जिले में कोरोना के 103 नये मरीज सामने आये हैं इस तरह बेगूसराय में मरीजों की संख्या 197 पंहुची गयी है वही पटना अभी भी कोरोना का हॉटस्पॉट बना हुआ है डॉक्टरों से लेकर नेता तक कोरोना की चपेट में आ गये हैंमुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सेक्रेटरी अनुपम कुमार व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा भी कोरोना पॉजिटिव हो गये हैं वही दरभंगा के एसएसपी अवकाश कुमार के कोरोना संक्रमित होने की सूचना आ रही है ।

वहीं दरभंगा व्यवहार न्यायालय के 4 अधिकारी समेत कई कर्मियों के कोरोना पॉजिटिव होने की सूचना आ रही है. इधर शुक्रवार को यह जानकारी सामने आई है कि जदयू कार्यालय में 5 और लोग कोरोना पॉजिटिव मिले हैं।

बात पटना की करे तो AIIMS के कोरोना नोडल डॉ. सजीव कुमार का कहना है कि पिछले 24 घंटे में 2 मौतें हुई है। पटना के दीदारगंज के बांका गांव के रहने वाले एक 25 साल के मरीज का एम्स में आंत का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के पहले कोरोना की जांच में पुष्टि नहीं हुई। ऑपरेशन के बाद कोरोना की पुष्टि हुई और तब हालात काफी गंभीर हो गई। आपात स्थिति में ऑपरेशन के बाद कोरोना से मरीज की मौत हो गई है। दूसरी मौत एक 85 वर्षीय महिला की हुई है, जो पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थी और उसके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। कोरोना नोडल का कहना है कि 24 घंटे में डॉ. अनिल कुमार, HOD, ट्रॉमा और इमरजेंसी के साथ 14 डॉक्टर संक्रमित हुए हैं। पैरामेडिक्स स्टाफ भी अधिक संख्या में संक्रमित हुए हैं।

पटना सिविल कोर्ट में भी एक न्यायिक पदाधिकारी, 12 कर्मचारी समेत 19 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इनमें वकील हैं।
इस बीच बिहार सरकार ने कोरोना को लेकर नया गाइड लाइन जारी किया है कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार ने थोड़ी सी सख्ती और बढ़ा दी है। सभी स्कूल, कॉलेज, शिक्षण, प्रशिक्षण संस्थान व कोचिंग को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश जारी कर दिया। सभी छात्रावास भी बंद रहेंगे, लेकिन स्कूल, कॉलेज, शिक्षण, प्रशिक्षण व कोचिंग संस्थान के कार्यालय 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलेंगे। ऑनलाइन शिक्षण कार्य संचालित होंगे। केन्द्र तथा राज्य आयोग द्वारा आयोजित नियोजन संबंधी परीक्षाएं तथा विभिन्न विद्यालय बोर्डों द्वारा आयोजित परीक्षाएं होंगी। पुलिस व होमगार्ड प्रशिक्षण संस्थान तथा चिकित्सा से संबंधित शिक्षण, प्रशिक्षण संस्थान(छात्रावास सहित) खुले रहेंगे। अन्य सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के संबंध में संबंधित विभागाध्यक्ष निर्णय लेंगे। मुख्य सचिव आमिर सुबहानी के आदेश से गृह विभाग ने यह आदेश जारी कर दिया है। सभी इंडोर व आउटडोर स्टेडियम में होने वाले खेल से संबंधित गतिविधियां स्थगित होंगी। राज्य में गुरुवार से नया गाइड लाइन जारी किया है। इसके तहत कई तरह के प्रतिबंध लागू किए गए हैं जो 21 जनवरी तक प्रभावी रहेंगे।

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा मामले में आज फिर हुई सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामलें पर सुनवाई करते हुए केंद्र ( आर्केलोजिकल् सर्वे ऑफ इंडिया) और बिहार सरकार को अगली सुनवाई में निश्चित रूप से हलफनामा करने का निर्देश दिया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निवेदिता निर्विकार की अध्यक्षता में वकीलों की तीन सदस्यीय कमिटी गठित की थी।कोर्ट ने समिति को इन स्मारकों के हालात का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट करने का आदेश दिया था।
पिछली सुनवाई में वकीलों की समिति ने कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट रखी।

वकीलों की कमिटी ने जीरादेई के डा राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात कहीं।साथ ही पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की स्थिति भी असंतोषजनक पाया।वहाँ काफी गन्दगी पायी गई और सफाई व्यवस्था की खासी कमी थी।
साथ ही पटना के सदाकत आश्रम की दुर्दशा को भी वकीलों की कमिटी ने गम्भीरता से लिया।इस मामलें पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को 7 जनवरी,2022 तक जवाब देने का निर्देश दिया था।

जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि जीरादेई गांव व वहां डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है।याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है।न तो वहां पहुँचने के सड़क की हालत सही है।साथ ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति और भी खराब हैं,जिसकी लगातार उपेक्षा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के इसी उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण लगातार हालत खराब होती जा रही है।कोर्ट को बताया गया कि पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित उनसे सम्बंधित स्मारकों की दुर्दशा भी साफ दिखती हैं।वहां सफाई,रोशनी और लगातार देख रेख नहीं होने के कारण ये स्मारक और ऐतिहासिक धरोहर अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

इस स्थिति में शीघ्र सुधार के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने की जरूरत हैं।

डा राजेंद्र प्रसाद न सिर्फ भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता रहे,बल्कि भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष भी रहे।तत्पश्चात् भारत के पहले राष्ट्रपति बने।इस पद पर उन्होंने मई,1962 तक कार्य किया।

बाद में राष्ट्रपति के पद से हटने के बाद पटना के सदाकत आश्रम में रहे,जहां 28 फरवरी,1963 को उनकी मृत्यु हुई।
ऐसे महान नेता के स्मृतियों व् स्मारकों की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाना उचित नहीं हैं।इनके स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 11 जनवरी,2022 को होगी।

पीएम की सुरक्षा पर जारी है सियासत भाजपा कांग्रेस आमने सामने

एसपीजी से जुड़े एक अधिकारी हमारे अच्छे मित्र रहे हैं , कल सुबह से ही उन्हें ढूंढ रहा था लेकिन कोई लोकेशन नहीं मिल पा रहा था शाम चार बजे उनका मैसेज आया अभी अभी संतोष जी लैंड किये हैं कुछ खास है क्या मैंने कहां हां कुछ खास तो है कि लेकिन रात में आराम से बात करेंगे।
रात उनसे लम्बी बातचीत हुई स्वाभाविक था मसला पंजाब और पीएम की सुरक्षा से ही जुड़ा था बातचीत को मैंने प्रश्न और उत्तर सक्ल में करना शुरू किया मेरा पहला सवाल था पंजाब में जो कुछ भी हुआ उस पर आपका क्या कहना है।
संतोष जी मीडिया में जो खबरें आ रही है उसके आधार पर पीएम के यात्रा का मैं कमान इन चीफ रहता तो पीएम को इतनी दूर तलक सड़क मार्ग से जाने की कतई इजाजत नहीं देता वैसे कुछ वर्षो में पीएम की सुरक्षा को लेकर जो मानक निर्धारित उसको पीएम की और से कई बार तोड़ा गया है और यही वजह है कि पूराने लड़के इस सर्विस से अपने को अलग करने लगा है क्यों कि देश ने दो दो प्रधानमंत्री को खोया है और बहुत ही सोच विचार और मंथन के बाद एसपीजी का गठन किया गया एसपीजी में काम करने वालों के लिए एक ही मंत्र है अपनी जान चली जाये पीएम का बाल बांका भी नहीं होना चाहिए ।
मेरा दूसरा सवाल है एसपीजी इतनी लम्बी यात्रा को लेकर सहमत नहीं होगा तो फिर पीएम कैसे निकल गये

ऐसा है संतोष जी एसपीजी के जो भी अधिकारी पीएम के साथ में होगे वो पीएम के इच्छा के बावजूद सड़क मार्ग से इतनी दूर तक ले चलने को तैयार नहीं हुए होंगे क्यों कि आज तक जब से एसपीजी का गठन हुआ है पांच से दस किलोमीटर सड़क मार्ग से चलने को लेकर सभी तरह की तैयारी रहती है लेकिन इतनी दूर 140 किलोमीटर सड़क मार्ग से पीएम को लेकर चलना सोच भी नहीं सकते हैं ।
अगर पीएम ने सड़क मार्ग से जाने का इच्छा व्यक्त किये होगे तो फिर एक पूरी प्रक्रिया है इसकी सूचना तुरंत डीजी एसपीजी को गया होगा डीजी एसपीजी इसकी सूचना कैबिनेट सेक्रेटरी को दिये होंगे और कैबिनेट सेक्रेटरी का काम है स्टेट के डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी से बात करके पीएम की यात्रा का रूट तय कराये और उसके बाद कैबिनेट सेक्रेटरी और उनका पूरा सचिवालय सक्रिय हो जाता है उनके सचिवालय में कई आईपीएस अधिकारी भी रहते हैं वो स्टेट पुलिस चीफ से कोडिनेट करके पीएम के लिए रास्ता तैयार कराते हैं हालांकि मीडिया में जो खबर आ रही है मुझे नहीं लगता है कि पंजाब का डीजीपी और मुख्य सचिव पीएम के सड़क मार्ग से जाने कि सहमति दिया होगा भले ही बातचीत के दौरान पीएम जाना चाहते हैं कुछ करो तो फिर ये दोनों अधिकारी तैयार हो गये होगे क्यों कि इतनी दूर सड़क मार्ग से जाने कि अनुमति कोई स्टेट नहीं दे सकता है ऐसा क्या था मौसम की खराबी की वजह से मोदी जी भी कई सभा को मोबाइल से संबोधित किये हैं वहां भी कर सकते थे ।
संतोष जी हुआ यही होगा कि कैबिनेट सैक्ट्री कह दिये होगे किसी तरह प्रतिष्ठा बचाओ पीएम जाना चाह रहे हैं तो ये लोग मान गये होगे क्यों कि सुरक्षा कारणों से राज्य के सीनियर अधिकारी ना कह दिये तो फिर सवाल ही नहीं है कि पीएम यात्रा पर निकल जाये ।

तब तो स्टेट का फेलियर है संतोष जी उपरी तौर पर आ कह सकते हैं लेकिन आईबी कहां सोयी हुई थी एसपीजी और आईबी के अधिकारी हर पल एक दूसरे से सूचना शेयर करते रहते हैं फ्लाई आभर पर पब्लिक पहुंच गयी है आईबी को रिपोर्ट करना चाहिए था ना वैसे हुआ यही होगा कि सभी तरह की जानकारी के बावजूद कैबिनेट सचिव पीएम की वजह से चुपी साध लिये होगे लेकिन जैसे ही थोड़ी सी समस्या सामने आयी तुरंत वापस करवा लिए ऐसा नहीं है एसपीजी इस तरह के मूभमेन्ट में भी पीएम को सुरक्षित निकालने में सक्षंम था वैसे इस मुद्दे को लेकर जो सियासत हो रही है उससे फोर्स का मनोबल गिरेगा क्यों कि पीएम की सुरक्षा से जुड़े अधिकारी हमेशा विवाद से बचना चाहता है ऐसे में इस बार जो हो रहा है आने वाले समय में पीएम की यात्रा को लेकर एक अलग तरह की समस्या उत्पन्न हो सकती है सरकार किसी भी पार्टी कि रहे पीएम की सुरक्षा को लेकर एक व्यवस्था बनी हुई है उसमें राज्य और केन्द्र की ऐजसी साथ काम करती है और दोनों एक दूसरे को सहयोग करती रहती है इसमें पार्टी और सरकार का कोई भी योगदान नहीं होता है सारे आईएस आईपीएस अधिकारी भले ही किसी स्टेट के कैडर के हो उनका विभागयी बांस कैबिनेट सैक्ट्री ही होता है और उनका इतना अधिकार है कि किसी भी अधिकारी की कैडर बदल सकते हैं और सीधे कार्यवाही भी कर सकते हैं इसलिए कोई पदाधिकारी जानबूझ कर इस तरह की गलती करने का साहस नहीं कर सकता है ।देखिएगा एक सप्ताह में मामला ठंडे बस्ता में चला जायेंगा क्यों कि ज्यादा खीचतान किये ना तो फिर आने वाले समय में पीएम के मूवमेंट को लेकर एक अलग तरह की परेशानी खड़ी हो सकती है आपात स्थिति में तब कोई भी अधिकारी रिक्स लेने से बचने लगेगा ।

हाईकोर्ट ने सिवान जिले में स्थित राज्य के पहले हाईस्कूल के हाल पर की सुनवाई।

पटना हाई कोर्ट ने सिवान जिले में स्थित अविभाजित बिहार के प्रथम हाई स्कूल के जीर्णोद्धार के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के सेकंडरी स्कूल के निदेशक से रिपोर्ट तलब किया है। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास चन्द्र ऊर्फ गुड्डू बाबा की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

खास बात यह है कि यह राज्य का पहला इंग्लिश स्कूल भी है, जिसे इंग्लिश स्कूल के रूप में जाना जाता है। किंतु नारायण सिंह द्वारा जमीन दान में दिए जाने के बाद यह जिला का पहला हाई स्कूल हो गया।

कोर्ट ने सेकंड्री स्कूल के निदेशक को स्वयं विद्यालय जाकर विद्यालय का आकलन करते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा है। जनहित याचिका में अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे जीर्ण शीर्ण स्थिति में सिवान जिले के गोरिया कोठी में मौजूद नारायण कर्मयोगी हाई स्कूल के जीर्णोद्धार हेतु आदेश देने की माँग की गई थी।

उक्त स्कूल की स्थापना वर्ष 1916 में की गई थी। स्कूल में अभी भी कुछ अनोखी वस्तुएं (एंटीकस) असुरक्षित रूप से पड़ी हुई है। इतना ही नहीं विद्यालय में चहारदीवारी भी नहीं है।

कई एकड़ जमीन में स्थित इस हाई स्कूल में लाईब्रेरी, लैब व खेल के सामान भी मौजूद हैं। चहारदीवारी के नहीं होने से सभी बहुमूल्य वस्तुएं असुरक्षित है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि याचिकाकर्ता द्वारा सभी संबंधित प्रतिवादियों के समक्ष उक्त मामले में उचित कार्रवाई करने को लेकर स्पीड पोस्ट से अभ्यावेदन भी दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने यह जनहित याचिका दायर किया। अब इस मामले पर सुनवाई छह सप्ताह बाद कि जाएगी।

पीएम के काफिला रूकने को लेकर सियासत जारी सुशील मोदी ने कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप

राजनीतिक द्वेष में प्रधानमंत्री की जान लेना चाहती है कांग्रेस, सुरक्षा में सेंधमारी संयोग नहीं – सुशील कुमार मोदी

  1. जो लोग राजनीतिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को परास्त नहीं कर पाए, वे देश के दुश्मनों के साथ सांठगांठ कर उनकी हत्या की साजिश करने पर उतर आए हैं।
    प्रधानमंत्री की सुरक्षा में इरादतन की गई सेंधमारी पर पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा ने चिंता व्यक्त की, लेकिन सोनिया गाँधी ने एक शब्द नहीं कहा।
    कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी खुद उस दल की मंशा बता रही है, जिसके नेता पाकिस्तान जाकर मोदी को हटाने की मदद मांग चुके हैं।
  2. पंजाब के एडीजीपी ( कानून-व्यवस्था) ने कुछ संगठनों के रोड ब्लॉक करने के बारे में तीन बार राज्य की चन्नी सरकार को आगाह किया था।
    क्या यह संयोग था कि 1,3,4 जनवरी को भेजे गए एहतियाती प्रशासनिक निर्देशों को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया? भिंडरावाला पैदा करने वाली कांग्रेस पंजाब को फिर से उग्रवाद में झोंकने की कोशिश कर रही है।

बिहार में हुआ कोरोना विस्फोट पटना बना हांट स्पांट।

बिहार में कोरोना का हाल लगातार बिगड़ता जा रहा है पटना सबसे बड़ा हॉट स्पॉट बन गया है। आज दोपहर 12 बजे तक 1599 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसमें से 1203 मरीज पटना का है और 396 लोग पटना से बाहर के हैं।जांच रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आया है उसमें 17 साल से कम उम्र के 18 बच्चे भी शामिल हैं।वही दूसरी और कोरोना को लेकर आ रही खबर को देखते हुए मुख्य सचिव अमीर सुबहानी बिहार के सभी जिले के डीएम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हलात का जायजा ले रहे हैं ।

इस बीच स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने मीडिया को बताया है कि ‘बिहार में कोरोना मरीज 3 से 5 दिन में ठीक हो रहे हैं। घबराने की जरूरत नहीं है। सिर्फ 63 लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

98% होम आइसोलेशन में ही ठीक हो रहे हैं। कोरोना का बढ़ता ट्रेंड इंडीकेट करता है कि यह कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन है। बिहार में डेल्टा व डेल्टा प्लस वैरिएंट के केस भी हैं। नए वैरिएंट की पहचान के लिए IGIMS में एक और मशीन लगेगी।

‘वहीं, BJP के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है, ‘कल जांच में कोरोना पॉजिटिव आया है। सम्पर्क में आए लोग जांच करा लें।’

देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर काईवाही होनी चाहिए

एसपीजी चीफ को पद छोड़ देना चाहिए सवाल देश की सुरक्षा से जुड़ा है ।

ये बात वर्ष 2003 की है जब पहली बार एसपीजी सुरक्षा वाले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यक्रम को कवर करने का मौका मिला था । जहां तक मुझे याद है 6 जून को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कोसी नदी पर महासेतू के निर्माण की नींव रखने के लिए निर्मली आने वाले थे उनके आने को लेकर क्या क्या तैयारी चल रही है इसकी रिपोर्टिंग के लिए तीन बार दरभंगा से निर्मली जाना पड़ा था।

इसके लिए ट्रेन से सुबह निकलना पड़ता था और देर रात तक लौटना होता था ।इस दौरान कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा को लेकर एसपीजी कितना सजग था ये मैं देख चुका हूं । निर्मली नेपाल के सीमा के काफी करीब था और उस समय नेपाल में माओवादी हिंसा चरम पर था जैसे ही निर्मली पहुंचे कार्यक्रम स्थल के आसपास मौजूद पुलिसकर्मी कवर करने से रोक दिया बहुत वाद विवाद हुआ तो वो मुझे एसपीजी के अधिकारी के पास ले गये एसपीजी के अधिकारी बहुत ही कड़े लहजे में कहां अभी तुरंत आप निकल जाइए कार्यक्रम को लेकर कवर नहीं कर सकते बेहद संवेदनशील इलाका है।

मैं अड़ा हुआ था कवर ता करेंगे ही करेंगे इतनी दूर से आये हैं तैयारी को लेकर खबर करनी ही पड़ेगी क्यों कि चैनल हेड का आदेश है । बातचीत चल ही रही थी उसी दौरान एक अधिकारी मेरा पूरा पता पुछ लिया और चंद मिनटों में ही दरभंगा और समस्तीपुर एसपी से मेरे बारे में उस समय सेटेलाइट फोन से पूरी जानकारी ले लिया, जानकारी मिलने के बाद दोनों अधिकारियों के बीच आंखों आंखों में ही संवाद हुआ और फिर उन्होंने बैठने के लिए कुर्सी मंगवाया और फिर साथ भोजन नाश्ता और कार्यक्रम को कवर करने में पूरा सहयोग भी किया और इस दौरान एसपीजी के गठन से लेकर नेपाल के माओवादी आन्दोलन को लेकर लम्बी बातचीत हुई ।

दो दिन बाद फिर जाने का आदेश हुआ वही सुबह सुबह छुक छुक करती रेल की सवारी करके पहुंचे तो देखते हैं एनएसजी की पूरी नई टीम है फिर उसी प्रोसेस से गुजरना पड़ा मुश्किल हुआ कवर करने में और जब कार्यक्रम के दिन पहुंचे तो उस दिन एसपीजी का कोई तीसरी टीम पहुंच हुई थी ।

मतलब इस स्तर पर पीएम के कार्यक्रम की तैयारी एसपीजी करती है ।हालांकि बाद के दिनों में एसपीजी सुरक्षा मानक वाले राहुल गांधी और सोनिया गांधी के कार्यक्रम को भी कवर करने का चार बार मौका मिला लेकिन मोदी के कार्यक्रम की बात करे तो एक दर्जन से अधिक कार्यक्रम को कवर कर चुके हैं इसलिए पीएम की सभा को कवर करने में किस तरह के सुरक्षा मानको से गुजरना पड़ता है मुझे भी पता है। पीएम के कार्यक्रम की बात करे तो पटना में अगर पीएम का कार्यक्रम रहता है तो पटना जिले में पहले पोस्टेड रहे ऐसे अधिकारी और पुलिसकर्मियों की पटना में कार्यक्रम से चार दिन पहले प्रतिनियुक्ति हो जाती है जिनकी जनता में छवि बेहतर रही है ,वही आठ से दस जिलों से पुलिस फोर्स बुलाया जाता है कार्यक्रम स्थल से लेकर जिस रास्ते से पीएम को गुजरना है उस रास्ते के सारे मकान के ऊपर पुलिस तैनात रहता है।

ऐसे में पीएम का हेलीकॉप्टर मौसम की खराबी के कारण नहीं उड़ पाया और पीएम 90 किलोमीटर सड़क मार्ग से चल दिये और एसपीजी जाने की अनुमति दे दिया यह पीएम के सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तौर पर उल्लंघन है । और ऐसे में पीएम को सड़क मार्ग से जाने कि अनुमति देने वाले अधिकारियों पर जरूर कार्यवाही होनी चाहिए क्यों कि पीएम अपनी सुरक्षा मानकों को लेकर अगर राजनीति करते हैं , पीएम सस्ती लोकप्रियता के लिए सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करते हैं और एसपीजी चुप रह जाता हैं तो यह देश की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है। रही बात रुट के लीक होने कि तो वही एएनआई जिसके हवाले से सारी मीडिया खबर चला रही है कि पीएम ने चलते चलते कहा कि मुख्यमंत्री को मेरा शुक्रिया कहना कि मैं बठिंडा एयरपोर्ट तक जिंदा पहुंच सका।

उस मीडिया हाउस का ट्विटर हैडल देखिए पीएम की पंजाब यात्री से जुड़ी वो तमाम खबरे ट्वीट है पीएम सड़क मार्ग से जा रहे हैं इनका काफिला यहां से निकला और उसी के आधार पर सारे चैनल में खबर चल रही थी।ऐसे में पीएम के सड़क मार्ग से जाने को लेकर गोपनीय क्या रहा ।

आज तक किसी पीएम को इतनी लम्बी दूरी तक सड़क मार्ग से जाने कि अनुमति कहीं नहीं मिली है एसपीजी तैयार ही नहीं हो सकता है क्यों कि पीएम का जो सुरक्षा मानक है उसके अनुसार 90 किलोमीटर को कवर करने के लिए केंद्रीय फोर्स के साथ साथ कई राज्यों के पुलिस को तैनात करना पड़ेगा ।तब कही पीएम के सुरक्षा मानक का पालन हो सकता है ।

पंजाब में भी जिला को कितना फोर्स होगा बिहार में पांच सौ के करीब है तो वहां हजार होगा और ऐसे में अचानक फोर्स को कहा जाये कि आप एनएच पर पीएम के काफिले को सुरक्षित पास कराने के लिए थाने से निकले किसी भी स्थिति में संभव है क्या ।

राजनीति चलती रहे आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहे लेकिन पीएम की सुरक्षा को लेकर यह बहुत बड़ी चूक हुई है और इसके लिए जो भी अधिकारी पीएम के आदेश का अमल किया है उसको सेवा में बने रहने का अधिकार नहीं है। क्योंकि कि सबको पता है पंजाब में किसान पीएम से नराज है पीएम जिस रास्ते से जा रहे हैं वह रास्ता सामरिक रूप से संवेदनशील है फिर एसपीजी ने अनुमति कैसे दे दिया।

कोई भी स्टेट पुलिस ये रिस्क नहीं ले सकता है सवाल ही नहीं पैदा लेता है कि कोई डीजीपी अनुमति दे दे अगर डीजीपी ने अनुमति दिया है उस पर कार्यवाही होनी चाहिए ।

राजनीति सही है होती रहनी चाहिए लेकिन पीएम की सुरक्षा और देश की रक्षा को लेकर राजनीति हो ये सही नहीं है इससे देश कमजोर होगा संस्थान कमजोर होगी और उसका असर देश की अखंडता पर सकता है ।

बिहार के लोगों को फिलहाल ठंड से राहत नहीं 10 जनवरी तक स्थिति में सुधार की सम्भावना नहीं

बिहारवासियों को फिलहाल ठंड से राहत की उम्मीद नहीं है आठ जनवरी के बाद बिहार में छह जिलों विशेषकर वैशाली, सारण,सीवान, मुजफ्फरपुर , मधुबनी, सीतामढ़ी ओर शिवहर में पुरवैया बहने से बारिश होने का अनुमान है।

वही इस दौरान पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है जिस वजह से नौ से 10 जनवरी के बीच थोड़ी राहत रहेगा . उसके बाद फिर पूरे बिहार में शीतलहर चलनी शुरू हो जायेगी. मौसम विज्ञानियों का मत है कि पूरे जनवरी में इस बार रिकाॅर्ड तोड़ सर्दी पड़ने के आसार बन रहे हैं।

गया में कंपकंपाने वाली सर्दी से पूरा जन-जीवन अस्त-व्यस्त है. न केवल लोग बल्कि पशु-पक्षी भी परेशान हैं. पिछले दो दिनों में गया का न्यूनतम तापमान छह डिग्री लुढ़क कर मंगलवार को 6.2 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है. अधिकतम तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस रहा ।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना को लेकर जारी किया गाइडलाइन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओमिक्रोन मरीजों के लिए होम आइसोलेशन में रहने की नई गाइडलाइन जारी की है।

आज बुधवार को होम आइसोलेशन के हल्के और बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों के लिए रिवाइज्ड गाइडलाइंस जारी की हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में दुनिया के अलावा यह भारत में भी देखा गया है कि कोविड-19 के अधिकतर मामले बिना लक्षण और हल्के होते हैं। ऐसे मामले आमतौर पर न्यूनतम दखलअंदाजी, सही मेडिकल गाइडेंस और मॉनिटरिंग के तहत मरीज घर पर ठीक हो जाते हैं।

इसलिए केंद्र सरकार ने अपनी गाइडलाइंस बदलाव की है।

कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव आने के 7 दिन बाद और लगातार 3 दिन तक बुखार नहीं आने के बाद होम आइसोलेशन खत्म हो जाएगा और मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

होम आइसोलेशन पीरियड खत्म होने के बाद मरीज को दोबारा टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।

कोरोना की तैयारी को लेकर आज फिर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा था कि करोना महामारी के तीसरे लहर के रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा की क्या कदम उठाए जा रहे है।एडवोकेट जेनरल ने कोर्ट को बताया कि इस महामारी पर नियंत्रण के कई तरह के राज्य सरकार ने कदम उठाए हैं।करोना महामारी के रोक थाम के दिए गए दिशानिर्देशों का पालन सख्त तरीके किया जा रहा है।
सार्वजानिक स्थलों,सिनेमा,मॉल,पार्क आदि को फिलहाल बंद कर दिया गया।साथ ही 10 रात्रि से सुबह पाँच बजे तक curfew भी प्रशासन ने लागू कर दिया है।
सरकारी,निजी दफ्तरों में कर्मचारियों के पचास फी सदी उपस्थिति के साथ ही कार्य होगा।स्कूलों कॉलेजों में भी इसी तरह की व्यवस्था की गई हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवा को इसके महामारी से निबटने कार्रवाई करने को तैयार किया जा रहा।सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में करोना मरीज के ईलाज के पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि अभी दो लाख व्यक्तियों का प्रति दिन टेस्ट किया जा रहा है।ऑक्सीजन की आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त है और अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति के पूरी कार्रवाई हो रही है।
जो व्यक्ति करोना से पीड़ित हैं,उनके लिए ईलाज की व्यवस्था की गई है।उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

अभी जो ओम्रिकोन नामक नए वेरिएंट के तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति में परिवर्तन हो रहा है।दिल्ली,मुंबई जैसे शहरों से ले कर देश के अन्य भागों में ओम्रिकोन बहुत तेजी से फैल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट व अन्य कई हाई कोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई शुरू कर दी गई है।इस स्थिति को देखते हुए कल से ही पटना हाईकोर्ट में ऑनलाइन सुनवाई प्रारम्भ हो चुका है।

इस मामले पर 12 जनवरी, 2022को सुनवाई होगी।