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सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही करने का ढोंग कर रही है

सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का ढोंग कर रही है ।
पिछले दो तीन माह से सुबह नींद खुलने पर सबसे पहले बिहार सरकार के आर्थिक अपराध से जुड़े वाट्सएप पर ही नजर जाती है कही कुछ चल तो नहीं रहा है ।

आज भी भ्रष्टअधिकारियों के खिलाफ बिहार के कई हिस्से से छापेमारी की खबर आ रही है वैसे अब यह खबर रूटीन सा हो गया है मतलब सिर्फ इतना ही रह गया है कि अधिकारियों के घर से कितना नगद पैसा मिला है ,लेकिन हाल के दिनों में राज्य सरकार ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ जो अभियान चलाया है उसमें जो साफ दिख रहा है सरकार बड़ी मछली पर कार्यवाही करने से बच रही है शुरुआत बालू माफिया पर कार्यवाही से करते हैें इस मामले में औरंगाबाद और भोजपुर के एसपी सहित आधे दर्जन से अधिक अधिकारियों कार्यवाही हुई लेकिन अभी तक औरंगाबाद के तत्कालीन एसपी सुधीर कुमार पोरिका पर निलंबन के अलावा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है जबकि इसी मामले में शेष अधिकारियों के चल और अंचल सम्पत्ति तक कि जांच हो चुकी है।

मगध विश्वविधालय के कांपी घोटाले मामले पर नजर डालिए ऐसा लग रहा है जैसे कुलपति को बचाने में सारा सिस्टम खड़ा है आर्थिक अपराध ईकाई हाजिर होने को कहता है वही राजभवन उनका छुट्टी स्वीकृत कर देता है ।

दस दिन पहले हाजीपुर के जिस लेबर इन्फोर्समेंट अधिकारी दीपक शर्मा के घर 2.50 करोड़ रुपया नगद और 30 से अधिक निवेश और बैक खाते का पता चला था उस अधिकारी से निगरानी चाह करके भी पुछताछ नहीं कर पा रही है ।उक्त अधिकारी बिहार यूपी के चैक पोस्ट मोहनिया में सात वर्ष से प्रतिनियुक्ति पर भा इस दौरान इसके मूर विभाग श्रम संशाधन विभाग कई बार केैमूर से तबादला भी किया लेकिन डीएम के आग्रह पर इसके तबादले को कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया जाता था ।


जिस तरीके से इसके पास से कैश रुपया बरामद हुआ है और जिस स्तर पर निवेश का कागजात बरामद हुआ है उससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसको संरक्षण देने वाले अधिकारियों कि क्या कमाई हुई होगी एक अनुमान के अनुसार इस अधिकारी का जितना सैलरी है उससे पांच सौ गुना अधिक की सपंत्ति का अभी तक खुलासा हो चुका है जबकि जांच अभी भी पूरा नहीं हुआ है इस अधिकारी का रखूस देखिए निगरानी की टीम दीपक वर्मा से पुछताछ करना चाह रही है लेकिन पटना के एक बड़े डाँक्टर की और से एक मेडिकल रिपोर्ट जारी किया गया है जिसमें लिखा है कि दीपर वर्मा की याददाश्त चली गयी है और बेहद गंभीर मानसिक बिमारी के दौर से गुजर रहा है।

भ्रष्ट सिस्टम के बीच तालमेल देखिए पुलिस इससे पुछताछ करेगी और कही सारा राज खोल दिया तो कई बड़े अधिकारी लपेटे में आ सकते हैं इसलिए ऐसा खेल खेला है कि निगरानी अब चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती है इस चेक पोस्ट पर तैनात रहे एक पूर्व अधिकारी की माने ते मोहनिया चेक पोस्ट पर जब से शराबबंदी हुई है अधिकारियों का रोजाना का प्रेक्टिंस 10 से 15 लाख के करीब था शराब वाले हर ट्रक से इस चेकपोस्ट पर 30 से 50 हजार रुपया लिया जाता था इस चेक पोस्ट से हरियाणा और यूपी से शराब का बड़ा खेप बिहार में प्रवेश करता था उक्त अधिकारी का कहना है कि इस राशी का हिस्सा पटना तक पहुंचता था और दीपक शर्मा इस खेल का एक बड़ा खेलाड़ी रहा है और जिला से लेकर पटना तक किसको कितना शेयर भेजना है इसका सारा हिसाब इसी के पास रहता था और यही बजह है कि बिहार में अभी तक जितनी भी छापेमारी हुई है इतना कैश किसी के यहां से बरामद नहीं हुआ है ।इसलिए इस खेल में शामिल सारे अधिकारी दीपक वर्मा का जुवान ना खुले इसमें लगा हुआ है वही परिवार वाले इस डर से सहमे हुए हैं कि दीपक शर्मा के साथ कही कोई अनहोनी ना हा जाये ।

ऐसा ही कुछ दरभंगा ग्रामीण कार्यविभाग के इंजीनियर मामले में सामने आया इंजीनियर दरभंगा से पटना के लिए निकलता है मुजफ्फरपुर पुलिस इसके गांड़ी को रोकता है जांच के दौरान कहां जाता है कि 2 करोड़ से अधिक कैश रुपया था सुबह से लगातार मुजफ्फपुर पुलिस का बयान पैसा बरामदगी को लेकर बदलता रहा अंत में पंचायत चुनाव के दौरान कैश पैसे लेकर चलने पर रोक से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज करके उस इंजीनियर को थाने से ही जमानत दे दिया गया है अभी भी इतनी बड़ी राशी मिलने के बावजूद मामला निगरानी या फिर आर्थिक अपराध ईकाई को मुजफ्फरपुर पुलिस केस ट्रान्सफर नहीं किया है ।

इस इंनजीनियर की पकड़ देखिए दो माह बाद जब विधानसभा में हंगामा हुआ तब निलंबन की कार्यवाही हो पायी जिस समय सत्ता पंक्ष की और से हंगामा हो रहा था मुख्यमंत्री विधानसभा में अपने चैबर में बैठकर सब कुछ देख रहे थे कहां ये जा रहा है कि अनिल कुमार पूरे दरभंगा प्रमंडल का पैसा वसूल कर पटना पहुंचाता था और विभाग के मंत्री की कौन कहे प्रधान सचिव भी इससे बचता था सीधा इसका संवाद सरकार के साथ था और यही वजह रहा कि कार्यवाही करने से विभाग बच रहा था ।

इस तरह के कई और उदाहरण है जो कही ना कही दिखाता है कि सरकार भ्रष्टाचार को लेकर पहले जैसे गंभीर नहीं है ।

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