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पटना हाइकोर्ट में पटना स्थित ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन संस्थान के भवन को हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह तक टली

पटना हाइकोर्ट में पटना स्थित ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन संस्थान के भवन को हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह तक टली। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अधिवक्ता प्रियंका सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए 3 जनवरी,2023 तक राज्य सरकार को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।

याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया था कि पटना हाइकोर्ट के पश्चिम में हाईकोर्ट की काफी भूमि है।पटना हाईकोर्ट का लगातार विस्तार हो रहा है।

उन्होंने कोर्ट से कहा कि ललित नारायण मिश्र आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन संस्थान को पटना के मीठापुर स्थित पुराने बस स्टैंड की भूमि में स्थानांतरित किया जा सकता है। वह क्षेत्र शैक्षणिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया था कि हाईकोर्ट के प्रशासनिक विस्तार के साथ ही यहाँ वकीलों, उनके स्टाफ और कई लोग हाईकोर्ट में काम करने वालों की संख्या काफी बढ़ी है।

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उन्होंने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के पूर्वी सीमा पर भी हाईकोर्ट की भूमि है।हाईकोर्ट के विस्तार को देखते हुए हाईकोर्ट को इन भूमि की आवश्यकता है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि बड़ी तादाद में वैसे वकील है, जिन्हें हाईकोर्ट में बैठने और कार्य करने की व्यवस्था नहीं है।उन्हें बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हो रही है।

उन्होंने बताया कि जो पूर्वी सीमा पर मूल रूप से हाईकोर्ट को भूमि आवंटित की गई थी, राज्य सरकार ने उस पर एमएलए और सरकारी अधिकारियों के फ्लैट निर्माण कर लिया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को हाईकोर्ट की पूर्वी सीमा से वीरचन्द पटेल पथ तक की भूमि के बदले हाईकोर्ट को भूमि उपलब्ध करानी चाहिए।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 30जनवरी,2023 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति के छात्रों को केंद्र सरकार की “पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम” का लाभ नहीं दिए जाने के मामलें में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया

पटना हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति के छात्रों को केंद्र सरकार की “पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम ” का लाभ नहीं दिए जाने के मामलें में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस पार्थसारथी की खंडपीठ ने राजीव कुमार और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की

कोर्ट ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के सचिव सहित राज्य के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और एससी एवं एसटी कल्याण विभाग के प्रधान सचिव को 6 हफ्ते के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया है ।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि केंद्र सरकार की इस फ्लैगशिप योजना , जिसके तहत अनुसूचित जाति के छात्रों को मैट्रिक के बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने हेतु एक “फ्रीशिप कार्ड ” दिया जाता है ।इसके अंतर्गत लाभुक विद्यार्थी को बिना दाखिले फीस, ट्यूशन फीस हॉस्टल चार्ज बगैर ही 5 वर्षों तक पढ़ाई करने का अवसर मिलता है।

कार्डधारी के बैंक अकाउंट में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मोड के तहत केंद्र सरकार से स्कॉलरशिप राशि डाल दी जाती है ,जिसे सम्बन्धित कॉलेज अथवा यूनिवर्सिटी के अकाउंट से भी जोडा जाता है। इस प्रकार दाखिला ,ट्यूशन, हॉस्टल बगैर के चार्ज जमा हो जाता है।

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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जब राज्य सरकार के समक्ष पिछले साल जून में उसने एक प्रतिवेदन देकर आग्रह किया कि सुबह के अनुसूचित जाति के छात्रों को फ्रीशिप कार्ड मुहैया कराने जाए, तो राज्य सरकार की तरफ से इसे ना मंजूरी देते हुए यह कहा गया कि 2016 से ही राज्य सरकार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना लागू किए हुए है।

इसके तहत बिना किसी अड़चन के शिक्षा ऋण मुहैया होता है जिसे छात्र बाद में नौकरी लगने पर वापस अदायगी करते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील विकास पंकज का कहना था कि राज्य सरकार ने मनमाने तरीके से छात्रवृत्ति को शिक्षा ऋण से बराबर मिलान कर केंद्र सरकार के इस कल्याणकारी स्कीम का लाभ बिहार के अनुसूचित जाति के छात्रों को देने से रोका है।

कोर्ट ने इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को जवाब देने का कहा।
इस मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च,2023को होगी

बगैर क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के गठन किये खिलाड़ियों के चयन नहीं किये जाने को लेकर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन को आदेश देने को लेकर दायर याचिका पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

बगैर क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के गठन किये खिलाड़ियों के चयन नहीं किये जाने को लेकर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन को आदेश देने को लेकर दायर याचिका पर पटना हाई कोर्ट ने सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने अजय नारायण शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते कहा कि यदि नए सिरे याचिका दायर की जाती है, तो इस मामलें पर यथासंभव जल्दी सुनवाई करने के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

कोर्ट ने सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों के नामों को हटाकर उनके पद का नाम देते हुए नए सिरे से याचिका दायर करने के लिए छूट याचिकाकर्ता अजय नारायण शर्मा को दिया है।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जगन्नाथ सिंह ने बताया कि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा कथित रूप से किये रहे तमाम धांधली व एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा सचिव और क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी का पद खुद में समाहित करने तथा खिलाड़ियों के चयन में बरती जा रही धांधली के विरुद्ध पटना हाई कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को सभी प्रतिवादियों के नामों को हटाकर पद से याचिका दायर करने का निर्देश कोर्ट ने दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान, PMCH के प्रभारी निदेशक डा. सुनील कुमार को नोटिस जारी किया

पटना हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान, पीएमसीएच के प्रभारी निदेशक डा. सुनील कुमार को नोटिस जारी किया है । चीफ जस्टिस संजय क़रोल एवं जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने ब्रज भूषण की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा देने का निर्देश दिया है ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह ने खंडपीठ को बताया कि पीएमसीएच के इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (आईजीआईसी) के पूर्व डायरेक्टर डा. एसएस चटर्जी 31.12.2019 को अपने पद से सेवानिवृत हुए थे । उनकी सेवानिवृत्ति के बाद दिनांक 01.01.20 को डा. सुनील कुमार को आईजीआईसी का प्रभारी निदेशक बना दिया गया।

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करीब तीन साल से वह अपने पद पर बने हुए हैं, जबकि उक्त पद पर नियुक्ति हेतु कम से कम डिप्लोमा इन मेडिसिन या एमसीएच की न्यूनतम योग्यता होनी चाहिए।वर्तमान के प्रभारी निदेशक के पास नहीं है ।इस पर कोर्ट ने प्रतिवादी डा.सुनील कुमार को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को अपना जवाबी हलफनामा चार सप्ताह में देने का निर्देश दिया है ।

इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी ।

जिला अपीलीय प्राधिकार शिक्षक नियोजन में पीठासीन अधिकारी के रिक्त पड़े पदों को 1 फरवरी, 2023 के पहले नियुक्ति किया जाए: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जिला अपीलीय प्राधिकार शिक्षक नियोजन में पीठासीन अधिकारी के रिक्त पड़े पदों को 1 फरवरी, 2023 के पहले नियुक्ति कर दिया जाए। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने अमरेश कुमार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने कहा कि अगर इस अवधि तक शिक्षक नियोजन अपीलीय प्राधिकार में पीठासीन अधिकारी के रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति नहीं की जाती है ,तो राज्य के मुख्य सचिव समेत शिक्षा विभाग के अतिरिक्त प्रधान सचिव को अदालत में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देना होगा।

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कोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि जिला अपीलीय प्राधिकार शिक्षक नियोजन में पीठासीन अधिकारी के पद पर नियुक्ति करने के लिए सरकार द्वारा सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। लेकिन अभी तक रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति नहीं की गई है। इससे शिक्षकों से संबंधित बहुत सारे मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े हुए हैं।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता विनय कुमार पाण्डेय ने बताया कि सरकार इस मामले में कार्रवाई कर रही है।

पटना हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न एवं छेड़छाड़ के आरोप में फँसे अधिवक्ता निरंजन कुमार को हाईकोर्ट में प्रवेश करने से रोक लगा दी

पटना हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न एवं छेड़छाड़ के आरोप में फँसे अधिवक्ता निरंजन कुमार को हाईकोर्ट में प्रवेश करने से रोक लगा दी है । चीफ़ जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था।

कोर्ट ने बिहार स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा से यह बताने के लिए कहा था कि बार काउन्सिल ऑफ़ इंडिया एवं बिहार स्टेट बार काउंसिल आरोपित अधिवक्ता पर क्या कार्यवाही कर रही है ।

बिहार स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा ने कोर्ट को बताया कि बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने आरोपित अधिवक्ता के प्रैक्टिस करने पर तत्काल रोक लगा दी है, जिसे बिहार स्टेट बार काउंसिल ने मान लिया है ।

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बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया द्वारा की गई कार्रवाई के आलोक में हाईकोर्ट ने आरोपित अधिवक्ता के हाईकोर्ट में प्रवेश से रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निरंजन कुमार को नोटिस जारी किया था। अधिवक्ता निरंजन कुमार का पक्ष को वरीय अधिवक्ता मृगांक मौली ने रखा । इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी ।

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था ऐवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट में राज्य की निचली अदालतों में वकीलों के बैठने और कार्य करने की व्यवस्था ऐवं अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होने के मामलें सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल एवं जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने वरीय अधिवक्ता रमाकांत शर्मा की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वकीलों के लिए बनने वाले भवनों के निर्माण से संबंधित अद्यतन रिपोर्ट माँगी है।

श्री शर्मा ने कोर्ट को बताया कि भवनों का निर्माण राज्य सरकार के भवन निर्माण भवन निर्माण विभाग करें,तो काम तेजी से हो सकेगा।ठेकेदारी के काम में बिलम्ब होने के अलावे लागत भी ज्यादा आएगा।

याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य के अदालतों की स्थिति अच्छी नहीं है।अधिवक्ता अदालतों में कार्य करते है,लेकिन उनके लिए न तो बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न कार्य करने की सुविधाएं उपलब्ध नहीं है।

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वकीलों के लिये शुद्ध पेय जल,शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं होती हैं। कोर्ट को बताया कि अदालतों के भवन के लिए जहां भूमि उपलब्ध भी है,वहां भूमि को स्थानांतरित नहीं किया गया है। जहां भूमि उपलब्ध करा दिया गया है, वहां कार्य नहीं प्रारम्भ नहीं हो पाया हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।

Patna High Court ने गोपालगंज के हथवा प्रखंड के वीडियो और प्रखंड पंचायत राज अफसर पर एकमुश्त 20 हज़ार रुपये का हर्जाना लगाया; जाने क्या है पूरा मामला ?

पटना हाई कोर्ट से स्थगन आदेश होने के बावजूद निचली अदालत के आदेश को जारी रखते हुए अवैध तरीके से शिक्षक से काम लेने और उन्हें वेतन देने के मामले पर Patna High Court ने कड़ा रुख अपनाते हुए गोपालगंज के हथवा प्रखंड के वीडियो और प्रखंड पंचायत राज अफसर पर एकमुश्त 20 हज़ार रुपये का हर्जाना लगाया है। जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने अरविंद कुमार सिंह की रिट याचिका को सुनते हुए हरजाने की उक्त रकम को विधिक सेवा प्राधिकार में जमा करने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता के वकील राजीव कुमार सिंह ने Patna High Court का ध्यान पिछले आदेश के सम्बन्ध में बताया कि हथुआ प्रखंड के सिंघिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत प्रारंभिक विद्यालय मैं उनका मुवक्किल बतौर पंचायत शिक्षक नियुक्त हुआ था। नियुक्ति के मामले में एक अन्य शिक्षक अशोक कुमार ने भी अपना दावा किया था।

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दोनों पक्षकारों की लड़ाई राज्य अपील प्राधिकार तक गई, जहां अशोक कुमार को शिक्षक नियुक्त होने का आदेश दिया गया।प्राधिकार के आदेश के खिलाफ जब अरविंद कुमार सिंह Patna High Court आया, तब विपक्षी अशोक कुमार को नोटिस निर्गत करते हुए कोर्ट ने राज्य अपीलीय प्राधिकार के आदेश पर रोक लगा दिया था।

स्थगन आदेश के बावजूद विपक्षी अशोक कुमार काम करते रहे और उन्हें वेतन मिलता रहा। Patna High Court के आदेश की अवज्ञा पर हैरानी जताते हुए हाईकोर्ट ने इन दोनों अफसरों को तलब किया था। दोनों ऑफिसर हाई कोर्ट को यह बताने में असफल रहे कि किन परिस्थिति में हाई कोर्ट आदेश का उल्लंघन हुआ।

इस मामलें पर सुनवाई आगे की जाएगी।

भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के इंतज़ार मे जेल में बंद एक पाकिस्तानी नागरिक को रिहा करने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से जवाब तलब किया

पटना हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के इंतज़ार मे पिछले तीन साल से जहानाबाद के जेल में बंद एक पाकिस्तानी नागरिक को रिहा करने के मामले में संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के से जवाब तलब किया है । जस्टिस ए एम बदर और जस्टिस संदीप कुमार की खंडपीठ ने अफसाना नगर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया।

याचिकाकर्ता के पति सैयद नक्वी आलम उर्फ नकवी इमाम का जन्म भारत में ही सन 1973 में हुआ था और 11 साल की उम्र में वह अपनी नानी के साथ 1984 में पाकिस्तान चला गया।वहीं पढ़ाई लिखाई करते हुए पाकिस्तानी नागरिकता हासिल कर बस गया था।

अपनी पिता तबीयत खराब हो जाने की खबर पर आलम उन्हें देखने के लिए 1 साल का पासपोर्ट वह पाकिस्तान से भारत आया।बिहार के अरवल में अपने पिता की देखरेख करने लगा पासपोर्ट की मियाद फरवरी 2012 में खत्म होने के बाद आलम को ओवर स्टे प्रभावी कानून को तोड़ने की जुर्म में बिहार पुलिस में आलम पर क्रिमिनल मुकदमा दर्ज किया।

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इसमें आलम को 3 साल कैद की सजा होगी सजा के खिलाफ अपील दायर कर जमानत पर रिहा होने के कारण आलम 2016 में याचिकाकर्ता के साथ मुस्लिम रीति रिवाज से शादी भी कर बैठा । याचिकाकर्ता के वकील नारायण ने कोर्ट को बताया की आलम अपने पिता की खराब स्वास्थ्य के आधार पर भारत में ही रहने हेतु भारत की नागरिकता के लिए पासपोर्ट की मियाद खत्म होने से पहले ही सक्षम पदाधिकारी के सामने आवेदन दे चुका था।

वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी उच्चायोग ने आलम को पाकिस्तानी नागरिक मानने से इनकार भी कर दिया। ऐसी स्थिति में केंद्र और राज्य सरकार आलम को डिटेंशन सेंटर में, जो जहानाबाद जेल में स्थित है, फरवरी 2020 से बंद कर रखा है।

कोर्ट ने बिहार सरकार से यह पूछा है कि डिटेंशन सेंटर जेल के अंदर क्यों है इस मामले की अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी।

पटना हाईकोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघ बिहार राज्य बार काउंसिल के सख्त निर्देश के बावजूद के चुनाव अपने-अपने अधिवक्ता संघ चुनाव 15 जनवरी,2023 तक नहीं करा पाये

पटना हाईकोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघ बिहार राज्य बार काउंसिल के सख्त निर्देश के बावजूद के चुनाव अपने-अपने अधिवक्ता संघ चुनाव 15 जनवरी,2023 तक नहीं करा पाये है। इन तीनो अधिवक्ता संघों का चुनाव नहीं होना बिहार राज्य बार काउंसिल के आदेश का उल्लंघन है।

बिहार राज्य बार काउंसिल की जनरल बॉडी की बैठक में 12 नवंबर 2022 को ही सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि राज्य के जिस किसी भी अधिवक्ता संघ में चुनाव किसी कारण से निर्धारित अवधि में नही हो पाया है ,वह अधिवक्ता संघ अपने अपने संघों का चुनाव हर हाल में 15 जनवरी 2023 तक करा लें। इस संबंध में एक निर्देश भी सभी अधिवक्ता संघ को 14 नवंबर 2022 को जारी किया गया था।

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बार काउंसिल ने अपने पत्र में यह भी कहा था जो भी अधिवक्ता संघ 15 जनवरी 2023 तक अपने संघ का चुनाव नहीं कराएंगे ,उस अधिवक्ता संघ के विरुद्ध बार काउंसिल द्वारा कठोर कार्रवाई की जाएगी।साथ ही उस संघ को तत्काल प्रभाव से भंग करते हुए वहां विशेष समिति का गठन कर दिया जाएगा।

इस निर्देश के बाद बहुत अधिवक्ता संघ द्वारा अपने अपने संघ में चुनाव कर लिया गया।इस मामले में हाईकोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघ ही है, जहां अवधि पूरी हो जाने के बाद भी चुनाव नहीं कराया गया है।

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इन तीनों अधिवक्ता संघ का चुनाव करीब 2 वर्षों से ज्यादा अवधि से नहीं हो पाया है।इस संबंध में कुछ अधिवक्ताओं ने बताया कि अगर आज की तिथि में भी इन तीनों अधिवक्ता संघ के द्वारा चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू की जाती है, तो भी चुनाव कराने में कम से कम 2 माह से ज्यादा समय लग जाएगा।

राज्य सरकार की ओर से किसी अपील या अन्य मामले को विलंबित दायर करना करदाताओं से मिले राजस्व का दुरुपयोग: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से किसी अपील या अन्य मामले को विलंबित दायर करना राजकोष की बर्बादी या करदाताओं के मिले राजस्व का दुरुपयोग है। जस्टिस पी बी बजनथ्री और जस्टिस अरुण कुमार झा की खंडपीठ विश्वविद्यालय सेवा से जुडी एक अपील पर सुनवाई कर रही थी।

इस अपील को राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की एकलपीठ के आदेश के 823 दिनों बाद दायर किया था।कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए मुख्य सचिव को आदेश दिया कि राज्य में सरकार के मुकदमें को समय सीमा के अंतर्गत दायर करना सुनिश्चित करने हेतु एक मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित करें ।

इस मामलें मे कोर्ट ने राज्य सरकार को 14 सूत्री दिशा निर्देश दिया, जिसकेअन्तर्गत हाई कोर्ट के किसी भी आदेश का अनुपालन दो सप्ताह में करने या उस आदेश के खिलाफ अपील दायर करने हेतु एक प्रस्ताव 4 हफ्ते में अग्रसारित करने का निर्देश है।

इस मॉनिटरिंग सिस्टम के अंतर्गत सरकार के अन्य बोर्ड , व कॉरपोरेशन व अनुषांगिक संस्थानों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर होने वाले मुकदमे के हर चरण की मॉनिटरिंग होगी।

इसके लिए एक रजिस्टर रखा जाएगा।इस रजिस्टर में किस दिन हाई कोर्ट आदेश की जानकारी मिली, किस दिन कोर्ट आदेश कि अभी प्रमाणित प्रतिलिपि निकाली गई।

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साथ ही इसके विरुद्ध अपील दायर करने या आदेश का अनुपालन करने का विचार कितने दिनों के अंदर किया गया, वह किस किस अधिकारियों के जरिए किया गया सब बात की जानकारी उस रजिस्टर में रहेगी।

इस तरह से खंडपीठ ने मुख्य सचिव को मॉनिटरिंग रजिस्टर के जरिए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सरकार के मुकदमे को देर से दायर करने के लिए कौन अफसर या कौन सरकारी वकील जिम्मेदार है, उसकी भी जवाबदेही तय हो।

कोर्ट ने कहा कि यदि जरूरत पड़े ,तो सरकारी अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को निर्धारित करने वाली नियमावली में भी संशोधन करें। इससे विलंबित मुकदमे दायर करने के आरोपी अफसरों के खिलाफ भी समय अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सके।

गौरतलब है कि इस 14 सूत्री दिशा निर्देश में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को यह भी आदेश दिया है कि हर सरकारी विभाग के पास विभागीय कार्य को संचालित करने वाली संबंधित नियम नियमावली और कानून का एक विधि कोष (रिपोजिटरी) विभागीय वेब पोर्टल पर हो, ताकि हाईकोर्ट के आदेश से क्षुब्ध होकर यदि कोई विभाग हाईकोर्ट में ही यह सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का प्रस्ताव दे ,तो संबंधित कानून की विवेचना भी उसी प्रस्ताव में कर दे ।

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साथ ही साथ कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी सरकारी अपील अथवा याचिका को दायर करने से पहले सरकारी वकील को एफिडेविट करने वास्ते एडवांस कॉपी अग्रसारित करें।

इन सभी दिशा निर्देशों का अनुपालन करने और समय पर मुकदमा दायर हो,इसकी मॉनिटरिंग प्रणाली प्रारम्भ करने के लिए कोर्ट ने मुख्य सचिव को 2 हफ्ते का समय दिया है।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के वैशाली जिला अंतर्गत पड़ने वाले ऐतिहासिक सरसाई पोखर के जीर्णोद्धार को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के वैशाली जिला अंतर्गत पड़ने वाले ऐतिहासिक सरसाई पोखर के जीर्णोद्धार को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस आशुतोष कुमार व जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वैशाली के जिलाधिकारी को वन विभाग व लघु सिंचाई विभाग के साथ समन्वय कर उक्त पोखर के सौंदर्यीकरण करने व पर्यावरण बनाये रखने को लेकर छह महीने में कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने ये आदेश वैशाली के जिलाधिकारी द्वारा गठित की गई तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दिया गया है। इसके पूर्व, कोर्ट ने वैशाली के जिलाधिकारी को स्वयं जाकर स्थल निरीक्षण करने को कहा था।

इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को निष्पादित कर दिया।

पटना हाईकोर्ट में पटना के गायघाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई 30 जनवरी,2023 को होगी

पटना हाईकोर्ट में पटना के गायघाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई 30 जनवरी,2023 को होगी। जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जांच की प्रगति पर असंतोष जाहिर किया था।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट में एस एस पी, पटना और एस आई टी जांच टीम का नेतृत्व करने वाली सचिवालय एएसपी काम्या मिश्रा भी कोर्ट में उपस्थित रही थी।

कोर्ट ने कहा था कि इस मामलें की समग्रता में जांच नहीं की जा रही हैं।पुलिस अधिकारियों को विस्तार और गहराई से जांच पड़ताल करने की आवश्यकता है।

अधिवक्ता मीनू कुमारी ने बताया कि कोर्ट अब तक एस आई टी द्वारा किये गए जांच और कार्रवाई के सम्बन्ध में सम्बंधित अधिकारी से जानकारी प्राप्त करना चाहता था।उन्होंने बताया था कि आफ्टर केअर होम में रहने वाली महिलाओं की स्थिति काफी खराब हैं।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एस आई टी टीम का नेतृत्व करने वाली पुलिस अधिकारी को कोर्ट ने अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने को कहा था।

पहले की सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट भी तलब किया था।

हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया था। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन थे, जबकि जस्टिस अंजनी कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य के रूप में थे।

इस मामले की अगली सुनवाई में 30जनवरी,2023 को की जाएगी।

फार्मेसी में डिप्लोमाधारी ही फार्मेसिस्ट पद के योग्य हैं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि फार्मेसी में डिप्लोमाधारी ही फार्मेसिस्ट पद के योग्य हैं। जस्टिस पी बी बजनथ्री की खंडपीठ ने अरविन्द कुमार की याचिका पर सुनवाई की।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि
बी फर्मा व एम फार्म के डिग्रीधारी इस पद के योग्य नहीं है। कोर्ट ने बिहार फार्मेसिस्ट कैडर नियमावली के नियम 6 का हवाला देते हुए कहा कि फार्मेसिस्ट पद के लिए जीव विज्ञान एवं गणित विषय में इंटर पास छात्र तीन पार्ट वाले फार्मेसी में डिप्लोमा किये को ही फार्मेसिस्ट पद के लिए योग्य हैं।

कोर्ट ने कहा कि प्रावधानों के अंतर्गत जो छात्र बी फर्मा व एम फार्म कोर्स में डिग्री लिये है, वे इस पद के लिये योग्य नहीं है।डिप्लोमाधारी छात्र अरविन्द कुमार की ओर से वरीय अधिवक्ता पीके शाही और अधिवक्ता शशि भूषण सिंह ने पक्ष रखा।

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गौरतलब है कि हाई कोर्ट के एकलपीठ ने बी फर्मा व एम फार्म के डिग्रीधारी छात्रों को इस पद के योग्य करार देते हुए कहा था कि इस पद के लिए सॉफ्टवेयर में बदलाव कर छात्रों का आवेदन तुरंत स्वीकार करें।

इस आदेश की वैधता को राज्य सरकार एवं डिप्लोमाधारी छात्र ने अपील दायर कर चुनौती दी।लंबी सुनवाई के बाद खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसला को पलट दिया।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामले पर स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के निःशक्त बच्चों के लिए बने विशेष विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के मामले पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया ।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वृषकेतु शरण पांडेय ने कोर्ट को बताया कि 2014 में विज्ञापित पदों पर अब तक नहीं भरा जा सका है। यह अपने आप में राज्य का उदासीन रवैया दर्शाता है।

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गौरतलब है कि इस मामले में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने हलफनामा दायर कर बताया था कि निःशक्त बच्चों से जुड़ी सभी परियोजनाएं तीन महीनों के भीतर कार्यरत हो जाएंगे ।

इस पर हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को हलफनामा दायर कर अपनी कार्य परियोजना बताने के लिए कहा है । इस मामले की अगली सुनवाई 14 फरवरी,2023 को होगी।

पटना हाइकोर्ट ने अधिवक्ता निरंजन कुमार के विरुद्ध चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की एक छात्रा के विरुद्ध लगाए गए छेड़छाड़ आरोप के मामलें पर अधिवक्ता संघो के प्रस्ताव पर स्वयम संज्ञान लेते हुए सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने अधिवक्ता निरंजन कुमार के विरुद्ध चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की एक छात्रा के विरुद्ध लगाए गए छेड़छाड़ आरोप के मामलें पर अधिवक्ता संघो के प्रस्ताव पर स्वयम संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मामलें पर सुनवाई करते हुए उक्त आरोपी अधिवक्ता को नोटिस जारी किया है।साथ ही बिहार स्टेट बार कॉउन्सिल को इस सम्बन्ध में की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया।

इससे पूर्व बिहार राज्य बार कॉउन्सिल की जनरल बॉडी की बैठक बुलाई गई थी। इसमें कॉउन्सिल के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया किया इस मामले में तथ्य का पता लगाने के लिए तीन अधिवक्ताओं की एक कमेटी का गठन किया जाएगा।इस कमिटी में दो पुरुष व एक महिला अधिवक्ता होंगी।

इसमें कॉउंसिल के सदस्य नहीं रहेंगे। कमेटी दस दिनों के भीतर अपना रिपोर्ट दे देगी। कॉउन्सिल ने मीडिया रिपोर्ट और प्राथमिकी के अनुसार अधिवक्ता निरंजन कुमार को शो – कॉज नोटिस जारी करने का निर्णय लिया था।

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पटना हाइकोर्ट के अधिवक्ता निरंजन कुमार पर चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना की एक छात्रा ने उनके विरुद्ध अपने साथ छेड़खानी
करने का आरोप लगाया था।

बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया ने इस मामलें को गम्भीरता से लेते हुए आरोपी अधिवक्ता निरंजन कुमार को तत्काल प्रभाव से उनके प्रैक्टिस करने के अधिकार को निलंबित कर दिया है।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 11जनवरी,2023 को की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट में पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की गई

पटना हाइकोर्ट में पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के मामलें पर सुनवाई की गई।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान फेज एक का निर्माण कार्य के प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।साथ ही कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगायी गई मशीन और मानव संसाधन का भी ब्यौरा पेश करने का निर्देश दिया।

इससे पूर्व कोर्ट ने फेज 2 के निर्माण में आ रही बाधाओं और अतिक्रमण को राज्य सरकार शीघ्र हटाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।कोर्ट ने इसके लिए आवश्यक पुलिस बल और व्यवस्था मुहैया कराने का निर्देश सबंधित ज़िला प्रशासन को दिया है।

पिछली सुनवाई में इस राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी ने इसका निर्माण कार्य 30 जून,2023 तक पूरा करने का अश्वासन कोर्ट को दिया था।इससे पूर्व में भी कोर्ट ने इस फेज के निर्माण में बाधा उत्पन्न होने वाले सभी अवरोधों को तत्काल हटाने का निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिया।

इस राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में बाधा बने धार्मिक स्थलों सहित स्कूल तथा अन्य अवरोध को हटाने के लिए कोर्ट ने जहानाबाद तथा गया के डीएम एवं एसपी को दिया था।

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कोर्ट ने उन्हें को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने का आदेश दिया है।कोर्ट ने फेज दो के 39 किलोमीटर से 83 किलोमीटर के बीच सभी प्रकार के अतिक्रमण को तेजी से हटाने का आदेश दिया।वही फेज तीन के 83 किलोमीटर से 127 किलोमीटर के बीच के अतिक्रमण को भी हटाने का आदेश दिया।

पिछली सुनवाई कोर्ट ने पटना गया डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग के फेज दो व तीन के निर्माण में लगी निर्माण कंपनी ने कोर्ट को बताया कि पटना गया डोभी एनएच के निर्माण में कई जगह बाधा उत्पन्न किया जा रही है।उनका कहना था कि स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण कर लिया ।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि इस मामलें पर कई बार सुनवाई की गई हैं,लेकिन कभी भी अतिक्रमण किये जाने तथा जमीन नहीं देने की जानकारी नहीं दी गई थी

इस मामलें पर 19 जनवरी,2023 को फिर सुनवाई की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पश्चिम चम्पारण ज़िला स्थित हारनाटांड स्थित अनुसूचित जनजाति के बालिकाओं के लिए एकमात्र स्कूल की दयनीय अवस्था पर सुनवाई की

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के पश्चिम चम्पारण ज़िला स्थित हारनाटांड स्थित अनुसूचित जनजाति के बालिकाओं के लिए एकमात्र स्कूल की दयनीय अवस्था पर सुनवाई की चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की।कोर्ट ने पूर्व में गठित वकीलों की कमिटी को राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारियों से शिक्षा की समस्याओं पर विचार विमर्श करने का निर्देश दिया।

वकीलों की कमिटी इस सम्बन्ध में अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।साथ ही हारनाटांड स्थित अनुसूचित जनजाति के लड़कियों के लिए एकमात्र स्कूल के स्थिति के बारे में भी रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश किया जाएगा।

इस सम्बन्ध में आज राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर कोर्ट ने असंतोष जाहिर किया।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के निदेशक और समाज कल्याण विभाग के निदेशक को स्थिति स्पष्ट करने के लिए तलब किया था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास पंकज ने कोर्ट को बताया कि बिहार में अनुसूचित जनजाति की बालिकाओं के लिए पश्चिम चम्पारण के हारनाटांड ही एकमात्र स्कूल है।उन्होंने कोर्ट को बताया कि पहले यहाँ पर कक्षा एक से ले कर कक्षा दस तक की पढ़ाई होती थी।

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लेकिन जबसे इस स्कूल का प्रबंधन सरकार के हाथों में गया,इस स्कूल की स्थिति बदतर होती गई।उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि कक्षा सात और आठ में छात्राओं का एडमिशन बन्द कर दिया गया।साथ ही कक्षा नौ और दस में छात्राओं का एडमिशन पचास फीसदी ही रह गया।

यहाँ पर सौ बिस्तर वाला हॉस्टल छात्राओं के लिए था,जिसे बंद कर दिया गया।इस स्कूल में पर्याप्त संख्या में शिक्षक भी नहीं है।इस कारण छात्राओं की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।

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कोर्ट ने जानना चाहा कि इतनी बड़ी तादाद में छात्राएं स्कूल जाना क्यों बंद कर दे रही है।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि जब इस स्कूल के लिए केंद्र सरकार पूरा फंड देती है,तो सारा पैसा स्कूल को क्यों नहीं दिया जाता हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 23 जनवरी,2023 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के बारह शहरों सहित तीन शहरों का वायु प्रदूषित व जहरीली होने की जानकारी देने के मामलें मे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जबाब तलब किया

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के बारह शहरों सहित तीन शहरों का वायु प्रदूषित व जहरीली होने की जानकारी देने के मामलें मे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जबाब तलब किया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस मामलें पर स्वयम संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया।

कोर्ट की ओर से नियुक्त कोर्ट मित्र अधिवक्ता शम्भू शरण सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य के बारह शहरों का वायु प्रदूषण रेखा मानक के काफी ऊपर है।वही तीन शहरों में सबसे ज्यादा जहरीली और प्रदूषित वातावरण छपरा,बेगूसराय तथा राजगीर का हैं।

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उनका कहना था कि प्रदूषण नियंत्रण परिषद ने कोर्ट में अपना जबाबी हलफनामा दायर कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने की बात कही थी।लेकिन अब तक विस्तृत हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण परिषद को वायु प्रदूषण के बारे में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।

इस मामलें पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाइकोर्ट ने बेली रोड स्थित एल एन मिश्र इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड सोशल चेंज, पटना के भवन को स्थानांतरित करने से सम्बंधित लोकहित याचिका पर सुनवाई की

पटना हाइकोर्ट ने बेली रोड स्थित एल एन मिश्र इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड सोशल चेंज, पटना के भवन को स्थानांतरित करने से सम्बंधित लोकहित याचिका पर सुनवाई की । चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने बताया कि मौजूदा परिस्थितों के मद्देनजर हाईकोर्ट कैंपस का विस्तार ज़रूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि इसलिए एलएन मिश्र इंस्टीट्यूट को अन्यत्र स्थानांतरित किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वकीलों, उनके स्टाफ और हाईकोर्ट में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या काफी बढ़ी है। राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह न्यायपालिका के विस्तार से संबंधित उचित कदम उठाये ।

गौरतलब है कि एलएन मिश्रा इंस्टीट्यूट के अधिवक्ता आरके शुक्ला ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा था।उन्होंने कहा कि इससे एलएन मिश्र इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर रहे छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा ।

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उन्होंने कोर्ट को बताया था कि जो पूर्वी सीमा पर मूल रूप से हाईकोर्ट को भूमि आवंटित की गई थी, राज्य सरकार ने उस पर एमएलए और सरकारी अधिकारियों के फ्लैट निर्माण कर लिया है। ऐसे में इंस्टीट्यूट को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाना एक मुश्किल फ़ैसला है।

इस इंस्टिट्यूट के पदेन अध्यक्ष माननीय मुख्यमंत्री हैं। उनके समक्ष इस पूरे मामले को रखना जरूरी है ताकि कोई फ़ैसला लिया जा सके ।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ललित किशोर ने बताया कि राज्य को अपना पक्ष रखने के लिए फिलहाल 2 सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए । इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी ।