Press "Enter" to skip to content

Posts tagged as “#sushilkumarmodi”

बिहार के आठ मेडिकल कांलेज के निर्माण में केन्द्र सरकार कर रही है सहयोग–सुशील मोदी

बिहार के 8 मेडिकल कॉलेजों के लिए केंद्र 1090 करोड़ बिहार को उपलब्ध करा चुकी है
• पूर्णिया, छपरा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सीवान, बक्सर, जमुई में मेडिकल कॉलेज केंद्र के सहयोग से
• राज्यसभा में सुशील कुमार मोदी के प्रश्न पर सरकार का जवाब

राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी के एक प्रश्न के उत्तर में भारत सरकार की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डाक्टर भारती प्रविण पवार ने बताया कि बिहार में कुल 8 मेडिकल कॉलेज पूर्णिया, छपरा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, झंझारपुर, सीवान, बक्सर, जमुई में केंद्र की सहायता से खोलने की स्वीकृति दी गई है।

इसमें प्रथम चरण में पूर्णिया, छपरा एवं समस्तीपुर हेतु 189 करोड़ प्रति मेडिकल कॉलेज की दर से कुल 567 करोड़ की स्वीकृति दी गई है जिसमें 340 करोड़ केंद्र ने अपना हिस्सा बिहार सरकार को उपलब्ध करा दिया है।

दूसरे चरण में सीतामढ़ी, झंझारपुर, सीवान, बक्सर, जमुई हेतु प्रति मेडिकल कॉलेज 250 करोड़ की लागत से कुल 1250 करोड़ की स्वीकृति दी गई है जिसमें से 750 करोड़ केंद्रीय हिस्सा राज्य को उपलब्ध करा दिया गया है।

यानी कुल 8 मेडिकल कॉलेज हेतु केंद्र ने अपना हिस्सा 1090 करोड़ राज्य को दे दिया गया है। निर्माण का कार्य राज्य सरकार को कराना है।

कृषि कानून वापस लेने का फैसला अन्नदाता का दिल जीतने वाला सुशील कुमार मोदी

कृषि कानून वापस लेने का फैसला अन्नदाता का दिल जीतने वाला

  • सुशील कुमार मोदी
  • प्रधानमंत्री के बड़प्पन ने उन्हें स्टेट्समैन बनाया
  • विपक्ष इसे हार-जीत के
    क्षुद्र नजरिये से न देखे
  • दिल्ली में बिना शर्त धरना
    समाप्त कर घर लौटें किसान
  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब,हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों के एक वर्ग की भावना का सम्मान करते हुए संसद से पारित कृषि कानून वापस लेने की घोषणा कर बड़प्पन दिखाया।
    यह गुरु परब पर सद्भाव का प्रकाश फैलाने वाला ऐसा निर्णय है, जो प्रधानमंत्री मोदी को चुनावी राजनीति से ऊपर उठता हुआ कद्दावर स्टेट्समैन सिद्ध करता है।
    इस ऐतिहासिक पहल को किसी की जीत-हार के रूप में लेने की क्षुद्रता नहीं होनी चाहिए।
  2. हालांकि तीनों कृषि कानून किसानों के हित में थे, सरकार किसान प्रतिनिधियों से 11 चक्र में बातचीत कर इसमें और सुधार करने पर सहमत थी और सुप्रीम कोर्ट ने इनके क्रियान्वयन को स्थगित भी कर दिया था, फिर भी इन कानूनों को एक झटके में वापस लेना राजनीतिक नफा-नुकासान, दलगत मान-अपमान और तर्क-वितर्क से ऊपर उठकर अन्नदाता का दिल जीतने वाला निष्कपट कदम है।
    अब आंदोलनकारियों को अपना हठ छोड़कर बिनाशर्त धरना समाप्त कर घर लौटना चाहिए।

जहरीली शराब से मौत दुखद, दोषियों को मिले फाँसी की सजा

सुशील कुमार मोदी

  1. बिहार के गोपालगंज सहित तीन जिलों में जहरीली शराब पीने से 30 से ज्यादा लोगों के मरने की अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद प्रशासन को दोषियों की पहचान कर तुरंत कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
    ऐसे मामले में स्पीडी ट्रायल के जरिये मौत के सौदागरों को फाँसी की सजा दिलायी जानी चाहिए।
  1. वर्ष 2016 में गोपालगंज के खजूरबन्ना में जहरीली शराब से 19 लोगों की मृत्यु के बाद दोषी पाए गए 9 को फाँसी और 4 महिलाओं को उम्र कैद की सजा सुनायी गई थी।
    ऐसी घटना में मृतक के परिवार का कोई दोष नहीं होता, इसलिए सरकार ने उस समय हर आश्रित परिवार को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा दिया था।
    इस बार भी सरकार को पीड़ित आश्रितों को 4 – 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का विचार करना चाहिए।
  2. जहरीली शराब से मौत की घटनाएँ उन राज्यों में भी हुईं, जहां मद्यनिषेध लागू नहीं है, इसलिए ऐसी दुखद घटनाओं के बहाने शराबबंदी हटाने की दलील नहीं दी जानी चाहिए।
    बिहार की जनता और विशेष कर आधी आबादी ने शराबबंदी को सहर्ष स्वीकार कर लिया है।
  3. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र भाई मोदी ने मद्यनिषेध लागू रखा और बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पाड़ित महिलाओं की एक आवाज पर इसे सख्ती से लागू किया।
    शराबबंदी लागू होने से घरेलू हिंसा और स्कूल-कालेज जाने वाली लड़कियों पर भद्दी छींटाकशी की घटनाएँ काफी कम हुईं।
    राज्य सरकार को शराबबंदी के फैसले पर दृढ रहना चाहिए।

राजनीति के गब्बर सिंह हैं लालू, सभी वर्गों को डरा कर किया राज -सुशील कुमार मोदी

राजनीति के गब्बर सिंह हैं लालू, सभी वर्गों को डरा कर किया राज

  • सुशील कुमार मोदी
  • राबड़ी देवी ने मुखिया, प्रमुख के पदों पर बिना आरक्षण दिये कराये थे चुनाव
  • एनडीए ने खत्म किया दहशत का राज, आरक्षण का अधिकार लौटाया
  1. लालू प्रसाद राजनीति के गब्बर सिंह हैं। इनके नाम से अतिपिछड़ा, दलित और व्यवसायी काँपते हैं, क्योंकि उन्हें फिरौती के लिए अपहरण-हत्या, रंगदारी वसूली और नरसंहार की घटनाएँ नहीं भूली हैं।
    बिहार में सियासी गब्बर के डर से शाम होते दुकानों के शटर गिर जाते थे, सिनेमा के नाइट-शो बंद हो गए और रात की शादियों का चलन खत्म हो गया था।
  1. लालू प्रसाद ने “भूरा बाल साफ करो” का नारा देकर ऊँची जाति के लोगों को डराया और जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस वर्ग के गरीबों को 10 फीसद आरक्षण दिया, तब इसका विरोध किया।
    उन्होंने जनता को बाँट कर और डरा कर राज किया। लाठी में तेल पिलावन रैली डर पैदा करने के लिए ही की गई थी।
  2. लालू प्रसाद के लिए सारे दलित भकचोन्हर हैं, इसलिए उन्होंने इस वर्ग को सामाजिक न्याय से वंचित रखा।
    2003 में लालू-राबड़ी राज के दौरान मुखिया, प्रमुख, जिप अध्यक्ष जैसे एकल पदों पर दलितों-अतिपिछड़ों को अारक्षण दिये बिना ही चुनाव कराये गए थे।
  3. वर्ष 2008 में एनडीए सरकार ने पहली बार पंचायतों में एससी-एसटी को 17 फीसद और अतिपिछड़ों के 20 फीसद आरक्षण दिया।
    लालू प्रसाद ने जिन वर्गों के आरक्षण का अधिकार छीन लिया था, उन्हें एनडीए सरकार ने वापस दिलाया।

सुशील मोदी ने लालू पर साधा निशाना कहां सभी मोर्चे पर फेल लालू विकास का हिसाब मांग रहा है

पूर्व उप मुख्यमंत्री और बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने लालू प्रसाद पर एक बार फिर साधा निशाना कहा

पहले सड़कें थीं जर्जर, हास्पीटल बेड पर सोते थे कुत्ते, गांव अँधेरे में

लालू प्रसाद 15 साल के भकचोंधर राज का हिसाब दें

  • सुशील कुमार मोदी
  1. लालू प्रसाद बतायें कि उनके राज में सड़कें जर्जर क्यों थीं और विकास ठप क्यों था?
    उनके मंत्री क्या ‘भकचोंधर’ थे कि कोई बिना सड़क बनवाये अलकतरा घोटाला कर खजाना लूट रहा था, तो कोई बीएड डिग्री घोटाला कर रहा था?
  1. राजद बताये कि उसके समय सरकारी अस्पतालों में गरीबों को डाक्टर-दवाई क्यों नहीं मिलते थे और मरीज के बेड पर कुत्ते क्यों सोते थे?
    लालू-राबड़ी सरकार कितने मेडिकल कालेज, प्रबंधन संस्थान खोलवा पायी और कितने डाक्टरों-नर्सों को नौकरी मिली?
  2. जिनके राज में शहरों को पूरी बिजली नहीं मिलती थी, गांव लालटेन-ढिबरी युग के अँधेरे में डूबे थे और अपराधियों के डर से बाजार शाम के बाद बंद होते थे, उन्हें एनडीए सरकार के विकास पर सवाल उठाने से पहले अपने चौपट भकचोंधर राज का हिसाब देना चाहिए।