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पटना नगर निगम के कर्मचारी संघो की कई दिनों से चल रहे हड़ताल मामलें पर सुनवाई पटना हाईकोर्ट में हुई

पटना हाईकोर्ट में पटना नगर निगम के कर्मचारी संघो ने कई दिनों से चल रहे हड़ताल के मामलें पर सुनवाई की गई।चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ ने इस मामलें की सुनवाई की।

निगमकर्मी कर्मचारी संघों की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चन्द्र वर्मा ने कोर्ट को जानकारी दी कि कल ही संघ के पदाधिकारियों ने कोर्ट के निर्देश के आलोक में हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया।

सीनियर एडवोकेट विध्यांचल सिंह ने एक याचिका हाईकोर्ट में दायर कर निगमकर्मियों के हड़ताल से उत्पन्न स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया।उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस हड़ताल के कारण न सिर्फ पूरे शहर में गन्दगी का अम्बार लगा है, बल्कि आम आदमी के स्वास्थ्य भी खतरे में हैं।

पिछली सुनवाई मे कोर्ट ने निगमकर्मियों को तत्काल हड़ताल समाप्त करने का निर्देश दिया था।साथ ही सम्बंधित अधिकारियों को उनके साथ बैठक कर उनके न्यायसंगत मांगों पर विचार विमर्श करने को कहा।

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संघो के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि उनके मांगों पर कोई विचार विमर्श नहीं किया गया।कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।आज कोर्ट में एडवोकेट जनरल ने कहा कि वे कर्मचारियों और सरकार के बीच सकारात्मक और प्रभावी वार्ता कराने में सहयोग करेंगे।

इस मामलें की सुनवाई अगले माह की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 07 सितंबर 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1.पटना हाईकोर्ट में राज्य के पुलिस द्वारा सही ढंग और स्तरीय जांच नहीं किये जाने के कारण अपराधियों को सजा से बच जाने के मामलें पर सुनवाई होगी।जस्टिस अश्विनि कुमार सिंह की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई कर रही है।पूर्व में कोर्ट ने सुनवाई करते राज्य सरकार को बताने को कहा कि पुलिस के जांच की स्तर सुधारने के लिए क्या हो रहा हैं।

2. पटना हाई कोर्ट में पटना नगर निगम में चल रही सफाई कर्मियों की हड़ताल से सम्बंधित याचिका पर आज सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ द्वारा इस मामलें पर सुनवाई की जा रही है।

निगमकर्मियों के संघों की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कल ही जानकारी दी कि निगमकर्मियों के संघ द्वारा हाईकोर्ट के रुख को देखते हुए हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया है।

3. पटना हाईकोर्ट में बिहार के गर्भाशय घोटाले के मामलें पर सुनवाई की जाएगी।इससे पूर्व कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के मुख्य सचिव को इस मामलें में अब तक की गई कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया था।जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह की खंडपीठ वेटरन फोरम की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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4. पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता कन्हैया प्रसाद सिंह के निधन पर पटना हाई कोर्ट में आज शोक सभा आयोजित की गई हैं।

पटना हाई कोर्ट के जज,अधिवक्ता व अधिवक्ता संघ के पदाधिकारीगण उपस्थित रहेंगे। चीफ जस्टिस के कोर्ट रूम में साढ़े ग्यारह बजे सुबह शोक सभा का आयोजन किया गया है। उसके बाद हाई कोर्ट के सभी न्यायिक कार्य स्थगित हो जायेंगे।

पटना हाईकोर्ट ने गया के अनुग्रह नारायण लॉ कॉलेज और बक्सर के जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज को सत्र 2023-24 में छात्रों का एडमिशन लेने की अनुमति दे दी

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अगर कालेज बीसीआई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है, तभी छात्रों का एडमिशन होगा।

कोर्ट ने इन कालेजों को बीसीआई के समक्ष निरीक्षण हेतु आवेदन करने को कहा।यदि बीसीआई कालेजों की निर्धारित मानकों को पूरा करता है,तभी उसे कालेज चालू करने व छात्रों के एडमिशन की अनुमति प्रदान किया जाएगा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गया के अनुग्रह नारायण कालेज और बक्सर के जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज के सम्बन्ध में बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से जवाब माँगा था।आज बीसीआई ने इस सम्बन्ध में कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत किया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य के सरकारी और निजी लॉ कालेजों की स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ है।बीसीआई के निरीक्षण के बाद भी बहुत सारे कालेज निर्धारित मानकों को नहीं पूरा कर रहे है ।

उन्होंने इन कालेजों की जांच स्वतन्त्र एजेंसी से कराने का कोर्ट से अनुरोध किया।कोर्ट ने कहा कि अगर निर्धारित अवधि में इन कालेजों की स्थिति में सुधार नही किया जाता, तो जांच कराई जा सकती हैं।

इससे पूर्व कोर्ट ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण 2021- 22 की सत्र के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को दाखिले के लिए अनुमति दी थी।

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हाई कोर्ट ने पिछले 23 मार्च 2021 के उस आदेश , जिसके अंतर्गत बिहार के सभी 27 सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों में नए दाखिले पर रोक लगा दी गयी थी। इस आदेश में आंशिक संशोधन किया गया। इसके तहत इन 17 कॉलेजों में सशर्त दाखिले की मंजूरी दे दी ।

हाई कोर्ट ने साफ किया कि नया दाखिला सिर्फ 2021-22 के लिए ही होगा। अगले साल के सत्र के लिए बार काउंसिल से फिर मंजूरी लेनी होगी । पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने इन कालेजों का निरीक्षण कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को तीन सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जिन लॉ कालेजों को पढ़ाई जारी करने की अनुमति दी गई थी, वहां की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं को भी देखा जाए।

इस मामलें पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 06 सितंबर 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1. पटना हाईकोर्ट ने बिहार राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाओं से सम्बंधित मामलें पर सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने इस मामलें सुनवाई करते हुए पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को प्रगति रिपोर्ट दो सप्ताह में देने का निर्देश दिया था। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ आकांक्षा मालवीय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

2. पटना हाईकोर्ट में राज्य के सरकारी व निजी लॉ कालेजों से सम्बंधित जनहित याचिका पर सुनवाई की जाएगी।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने गया के अनुग्रह नारायण लॉ कॉलेज और बक्सर के जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज के स्थिति के सम्बन्ध में बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को जवाब देने का निर्देश दिया था। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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3. सासाराम के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे बुचडखाने से होने वाले प्रदूषण और आम नागरिकों के स्वास्थ्य के खतरे के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ धर्मदेव पासवान की याचिका पर सुनवाई करेगी।

राज्य में पटना नगर निगम समेत स्थानीय निकायों के चुनाव पर रोक लगाने सम्बंधित याचिका पर पटना हाईकोर्ट मे सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनील कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से फिलहाल इंकार किया।

कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मुद्दे पर हलफनामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने पक्ष प्रस्तुत किया।राज्य चुनाव आयोग के पत्र के आलोक में राज्य सरकार के शहरी विकास और आवास विभाग ने बताया कि विधि विभाग के सलाह के अनुसार स्थानीय निकाय चुनाव प्रक्रिया शुरू करने में कोई बाधा नहीं है।ये भी कहा गया कि उक्त सलाह के अनुसार स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया जारी हैं।

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याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बगैर संवैधानिक प्रावधानों व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन किए स्थानीय निकायों के चुनाव प्रक्रिया कैसे शुरू हो सकती है।इसमें बैकवर्ड व अन्य वर्गों के आरक्षण का मसला शामिल हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 29 सितम्बर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बच्ची को नौ महीने तक बेगूसराय स्थित बालिका गृह में रखने के मामले पर सुनवाई की

जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह ने मामलें को गंभीरता से लेते हुए बेगूसराय के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि इस संवेदनशील मामले पर किशोर न्याय अधिनियम और पोक्सो अधिनियम के प्रावधान और अभिलेखों के आधार पर उचित कार्रवाई करें ।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि यह प्रथम दृष्टया मामला बनता है ,तो जिला बाल कल्याण के सदस्यों ,बालिका गृह के पदाधिकारी, बच्ची की जांच करने वाली चिकित्सक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने कहा कि अभिलेखों से स्पष्ट होता है कि इस मामले में संस्थान के पदाधिकारी जिम्मेदार थे ।

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कोर्ट ने अधिवक्ता विक्रम देव सिंह को पीड़ित बच्चे के हित में न्यायालय को उचित सहायता प्रदान करने के लिए “एमिकस क्यूरी” के रूप में नियुक्त किया है । इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितम्बर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के उत्पाद कोर्ट में बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने के मामले पर सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा कि किन तथ्यों राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में रखा गया है ।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उत्पाद कोर्ट समेत अन्य कोर्ट में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सख्त रुख अपनाया था।कोर्ट ने कहा था कि राज्य में उत्पाद क़ानून से सम्बंधित मामलें बड़ी संख्या में सुनवाई के लिए लंबित हैं,लेकिन उत्पाद कोर्ट के गठन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की रफ्तार धीमी हैं।

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि उत्पाद कोर्ट के गठन,जज,कर्माचारियों की नियुक्ति और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातर कार्रवाई कर रही है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से जानना चाहा था कि सीबीआई, श्रम न्यायलयों व अन्य कोर्ट के लिए अलग अलग भवन की व्यवस्था है,तो उत्पाद कोर्ट के लिए अलग भवन की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।

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महाधिकवक्ता ललित किशोर ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया था कि सभी 74 उत्पाद कोर्ट के लिए जजों की बहाली हो चुकी हैं।साथ ही 666 सहायक कर्मचारियों की बहाली के लिए स्वीकृति दे दी गई हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 7 सितंबर,2022 को होगी।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई की

जस्टिस संदीप कुमार ने बिहार राज्य आवास बोर्ड को बताने को कहा है कि अब तक पटना में उसने कितनी कॉलोनियों का निर्माण और विकास किया हैं।

साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को एमिकस क्यूरी संतोष सिंह द्वारा प्रस्तुत दलीलों का अगली सुनवाई में जवाब देने का निर्देश दिया है।

पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया था कि नीति में कोई परिवर्तन नहीं होगा।कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि गलत तरीके से बने मकानों को तोड़े जाने की नीति जारी रहेगी।

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार राज्य आवास बोर्ड के दोषी अधिकारियों और जिम्मेवार पुलिस वाले के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई की कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा था।कोर्ट ने कहा कि इनके रहते इस क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन कर मकान बना लिए गए।इस सम्बन्ध में हलफनामा दायर कर कार्य योजना पेश करने का निर्देश दिया था।

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इससे पहले की सुनवाई में बिहार राज्य आवास बोर्ड की ओर से वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बहस की थी।उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो भी मकान बने है,उनका निर्माण वैध ढंग से नहीं किया गया है।

कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी संतोष कुमार सिंह ने कोर्ट के समक्ष बहस किया।उन्होंने कहा कि राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में हटाने की कार्रवाई सही नहीं थी।हटाने के पूर्व संचार माध्यमों में उन्हें नोटिस दे कर जानकारी देना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि या तो उन्हें उचित मुआवजा
दिया जाए या उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 15,सितम्बर,2022 को की जाएगी।

गया के ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर से सटे फाल्गु नदी प्रदूषित होने के मामलें पर पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करने वाली कंपनी ने बताया कि निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए गया में निर्माण करने वाली कंपनी को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की सीमा के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को जानकारी दी गई थी कि बूडको ने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने हेतु चुनी हुई कम्पनी से अग्रीमेंट किया जा चुका हैं।

कोर्ट को बताया गया था कि एग्रीमेंट में ये तय हुआ है कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम तीन महीने में पूरा हो जाएगा।

ये जनहित याचिका गौरव कुमार सिंह की ओर से दायर की गई थी। पहले की सुनवाई में कोर्ट ने बुडको से यह भी कहा कि यदि वह चुनिंदा कम्पनी के काम करने से संतुष्ट है, तो अग्रीमेंट की प्रक्रिया जल्द पूरा करे ।

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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुमित कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि ऐतिहासिक फाल्गु नदी कचरे से भर रही ऊन्होने बताया कि सारे गया शहर की गन्दगी और कचडा फल्गु नदी में जाता है,जिस कारण नदी का पानी काफी प्रदूषित हो गया।

अगली सुनवाई 20सितम्बर, 2022 को होगी ।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें पर सुनवाई की जाएगी।जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई करेंगे। राज्य सरकार और बिहार राज्य आवास बोर्ड ने जवाब दायर कर दिया था।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार राज्य आवास बोर्ड और पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के सम्बन्ध में जवाब माँगा था, जिनके रहते हुए राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हुए।

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पटना हाईकोर्ट में राज्य के उत्पाद कोर्ट के बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने और विकास के मामले पर सुनवाई की जाएगी ।जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करेगी।

उत्पाद कोर्ट समेत अन्य कोर्ट में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर कड़ा रुख अपनाया था।

पटना हाईकोर्ट में पटना के जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के विस्तार और विकास के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य के हवाईअड्डों की समस्यायों के मामलें पर अगली सुनवाई में केंद्र सरकार को जवाब देने का निर्देश दिया है।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बिहार के विभिन्न हवाईअड्डों के विकास और विस्तार से जुड़ी समस्यायों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया।इनमेंं भूमि से सम्बंधित मामलें थे।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को राज्य में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें में स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया था।ये जनहित याचिकाएं गौरव सिंह व अन्य द्वारा की गई हैं।

एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री व पायलट राजीव प्रताप रूडी ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया था।उन्होंने राज्य में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने के मुद्दे को उठाया था।

उन्होंने कहा कि कई राज्यों में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि बिहार में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाया जाना चाहिए।

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याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अर्चना शाही ने बताया था कि गया एयरपोर्ट के विकास के लिए एक बड़ी धनराशि आवंटित की गई है।लेकिन अभी तक गया एयरपोर्ट का विकास कार्य प्रारम्भ नहीं हुआ है।

कोर्ट को बताया गया था कि राज्य में पटना के जयप्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के अलावा गया, मुजफ्फरपुर,दरभंगा,भागलपुर,फारबिसगंज , मुंगेर और रक्सौल एयरपोर्ट हैं।लेकिन इन एयरपोर्ट पर बहुत सारी आधुनिक सुविधाओं के अभाव एवं सुरक्षा की समस्याएं हैं।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 12 सितम्बर 2022 को होगी।

हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता के साथ हाथापाई एवं दुर्व्यवहार किए जाने के मामले पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई में कार्रवाई रिपोर्ट भी हलफनामा दायर कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने वकीलों के विरुद्ध सम्बंधित पुलिसकर्मियों दायर प्राथमिकी पर भी रोक रोक दिया है।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इस मामलें को गम्भीरता से लेते हुए शास्त्री नगर थाना के पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी किया था।

इसके साथ साथ कोर्ट ने थाने की सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।हाईकोर्ट के अधिवक्ता साकेत गुप्ता ने आरोप लगाया था कि वह 03, अगस्त,2022 की शाम को अपने परिचित अभिषेक कुमार एवं अन्य अधिवक्ताओं के साथ एक केस के सिलसिले में शास्त्री नगर थाना गए थे।

उनके परिचित अभिषेक कुमार को शास्त्री नगर थाने में पदस्थापित एसआई स्मृति ने पूछताछ के लिए बुलाया था। थाने में पूछताछ के दौरान एसआई स्मृति एवं लाल बाबू अभिषेक के साथ बदतमीजी और गाली गलौज करने लगे।

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इसी दौरान जब अधिवक्ता साकेत ने उन्हें ऐसा करने से रोका ,तो इन दोनों एसआई ने अधिवक्ता साकेत, अधिवक्ता मयंक शेखर ऐवं अधिवक्ता रजनीकांत सिंह के साथ धक्का मुक्की करने लगे।

इसका विरोध किए जाने पर एसआई लाल बाबू ने अधिवक्ता को पिस्तौल दिखा कर जान से मारने की धमकी दी और उन पर हाथ उठाया।

इस बात की शिकायत अधिवक्ता ने पटना के सिटी एसपी से भी की । हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इन पुलिस कर्मियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्यवाही करने हेतु नोटिस जारी किया था।

इस मामले की अगली सुनवाई 12 सितम्बर,2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार – I पर किये गए कथित आक्रमण और मारपीट के मामले की सुनवाई की

जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि दर्ज एफआईआर के सम्बंधित कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश किया जा चुका हैं।कोर्ट ने इस मामलें पर सुनवाई करते हुए 5 सितम्बर,2022 तक सम्बंधित कोर्ट को अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया।

साथ ही निचली अदालतों में जजों की सुरक्षा पर विचार करने के लिए चीफ जस्टिस से एक कमिटी गठित करने का आग्रह किया गया है।

पिछली सुनवाई कोर्ट को बताया गया था कि डी जी पी, बिहार ने ए डी जे अविनाश कुमार के विरुद्ध दायर प्राथमिकी के कार्रवाई पर रोक लगा दिया था।

पिछली सुनवाई में ही कोर्ट ने राज्य सरकार को अविनाश कुमार के विरुद्ध दायर एफ आई आर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।

पूर्व की सुनवाई में एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को बताया था कि ये गलत ढंग से समझने के कारण ए डी जे अविनाश कुमार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया गया।इसे वापस लेने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारम्भ की जाएगी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार किसी न्यायिक पदाधिकारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के पहले चीफ जस्टिस की अनुमति जरुरी होती हैं।इस मामलें में इस प्रक्रिया का पालन गलतफहमी में नहीं किया जा सका।

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कोर्ट ने इस मामले मे सुनवाई में मदद करने के लिए वरीय अधिवक्ता मृगांक मौली को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था।उल्लेखनीय है कि मधुबनी के डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज द्वारा 18 नवंबर, 2021 को भेजे गए पत्र पर हाई कोर्ट ने 18 नवंबर को ही स्वतः संज्ञान लिया था।

साथ ही साथ कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, राज्य के डी जी पी, राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव और मधुबनी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया था।

मधुबनी के प्रभारी डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज द्वारा अभूतपूर्व और चौंका देने वाली इस घटना के संबंध में भेजे गए रिपोर्ट के मद्देनजर राजन गुप्ता की खंडपीठ ने 18 नवंबर, 2021 को सुनवाई की थी।

ज़िला जज ,मधुबनी के द्वारा भेजे गए रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन तकरीबन 2 बजे दिन में एस एच ओ गोपाल कृष्ण और घोघरडीहा के पुलिस सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्मा ने जज अविनाश के चैम्बर में जबरन घुसकर गाली दिया था।

उनके द्वारा विरोध किये जाने पर दोनों पुलिस अधिकारियों ने दुर्व्यवहार करने और हाथापाई किया था। इतना ही नहीं, दोनों पुलिस अधिकारियों ने उनपर हमला किया और मारपीट किया है।साथ ही अपना सर्विस रिवॉल्वर भी निकाल लिया।

इस मामलें में पुलिसकर्मियो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया गया।पुलिस ने भी जज के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर दिया,लेकिन इसमें प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।

इस मामलें पर अगली सुनवाई सुनवाई ,7 सितम्बर,2022 को होगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 31 अगस्त 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1. पटना हाईकोर्ट में पटना के जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा समेत राज्य के अन्य एयरपोर्ट के मामले पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ इन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को राज्य में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाए जाने के मामलें में स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का निर्देश दिया था।ये जनहित याचिकाएं गौरव सिंह व अन्य द्वारा की गई है।

2. हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता के साथ हाथापाई एवं दुर्व्यवहार किए जाने के मामले पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई की जाएगी।पिछली सुनवाई में जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ ने इस मामलें को गम्भीरता से लेते हुए शास्त्री नगर थाना के पुलिस कर्मियों को नोटिस जारी किया है।

इसके साथ साथ कोर्ट ने थाने की सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था ।

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3. पटना हाईकोर्ट में झंझारपुर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार – I पर किये गए कथित आक्रमण और मारपीट के मामले की सुनवाई की जाएगी।पिछली सुनवाई मै जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि डी जी पी, बिहार ने ए डी जे अविनाश कुमार के विरुद्ध दायर प्राथमिकी के कार्रवाई पर रोक लगा दिया हैं।

पटना हाईकोर्ट में पटना के राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामलें राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नीति में कोई परिवर्तन नहीं होगा

कोर्ट को राज्य सरकार की ओर कुछ बताया गया कि गलत तरीके से बने मकानों को तोड़े जाने की नीति जारी रहेगी।

पिछली सुनवाई में जस्टिस संदीप कुमार इस मामलें पर सुनवाई करते हुए जानना चाहा कि बदली राज्य सरकार की इस सम्बन्ध में क्या नीति है।हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस सम्बन्ध में हलफनामा दायर कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।

कोर्ट ने राज्य सरकार को बिहार राज्य आवास बोर्ड के दोषी अधिकारियों और जिम्मेवार पुलिस वाले के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई की कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा।कोर्ट ने कहा कि इनके रहते इस क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन कर मकान बना लिए गए।इस सम्बन्ध में हलफनामा दायर कर कार्य योजना पेश करने का निर्देश दिया।

इससे पहले की सुनवाई में बिहार राज्य आवास बोर्ड की ओर से वरीय अधिवक्ता पी के शाही ने बहस की थी।उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जो भी मकान बने है,उनका निर्माण वैध ढंग से नहीं किया गया है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि आवास बोर्ड ने जो भी नियमों के उल्लंघन मकान बने है,उन्हें अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया,लेकिन वे नहीं आवास बोर्ड के समक्ष नहीं आए।

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आज कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी संतोष कुमार सिंह ने कोर्ट के समक्ष बहस किया।उन्होंने कहा कि राजीवनगर/नेपालीनगर क्षेत्र में हटाने की कार्रवाई सही नहीं थी।हटाने के पूर्व संचार माध्यमों में उन्हें नोटिस दे कर जानकारी देना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि या तो उन्हें उचित
दिया जाए या उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

इस मामलें पर अगली सुनवाई 1सितम्बर,2022 को की जाएगी।

इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने पक्ष प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया था कि ये मामला सुनवाई योग्य नहीं हैं।साथ ही उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता है।

पटना हाईकोर्ट ने पटना के गाय घाट स्थित आफ्टर केअर होम की घटना के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि आफ्टर केयर की अधीक्षिका को गिरफ्तार किया जा चुका हैं।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अनुसंधान को डी एस पी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया था। जांच रिपोर्ट भी तलब किया था।

कोर्ट का यह भी कहना था इस कि बिहार स्टेट लिगल सर्विसेज ऑथोरिटी, यदि पीड़िता को जरूरत हो ,तो जो मदद हो सके पीड़िता को उपलब्ध करवाए। कोर्ट ने राज्य के समाज कल्याण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को अपने अपने हलफनामा को रिकॉर्ड पर लाने को भी कहा था, जिसमें पीड़िता द्वारा 4 फरवरी, 2022 का बयान भी शामिल हो।

राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि दोनों पीडितों की ओर से महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज हो गई है।पीड़िता की संबंधित अधिकारियों के समक्ष जांच भी की गई।

महाधिवक्ता ने पीड़िता द्वारा दिये गए बयान के उद्देश्य पर संदेह भी जताया था। उनका कहना था कि पीड़िता ने केअर होम को वर्ष 2021 के अगस्त महीने में ही छोड़ दिया था, लेकिन वह पहली बार जनवरी, 2022 में आरोप लगा रही है।

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पीड़िता की अधिवक्ता मीनू कुमारी ने कोर्ट को बताया था कि कोर्ट ने महिला विकास मंच द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका को भी सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया है। हाई कोर्ट इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई करते रहा है।

हाई कोर्ट ने इस याचिका को पटना हाई कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस मोनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रजिस्टर्ड किया है। कमेटी में जस्टिस आशुतोष कुमार चेयरमैन हैं, जबकि जस्टिस अंजनी5 कुमार शरण और जस्टिस नवनीत कुमार पांडेय इसके सदस्य हैं।

कमेटी ने इस मामले में 31 जनवरी को अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट को गंभीरता से लिया है। केअर होम में 260 से भी ज्यादा महिलाएं वास करती हैं।इस मामलें आगे सुनवाई की चार सप्ताह बाद की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने शादी समेत अन्य समारोहों में राज्य भर में किये जाने वाले हर्ष फायरिंग के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने इस जनहित याचिकाएं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा है कि कितने केसों में अनुसंधान पूरा किया गया है। राजीव रंजन सिंह ने जनहित याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि हर्ष फायरिंग में कई निर्दोष लोगों घायल हो जाते हैं और कितने की तो जान भी चली जाती है।इसलिए इस मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई सख्त ढंग की जानी चाहिए।

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याचिकाकर्ता का कहना है कि इस मामले में एक सख्त गाइडलाइंस जारी की जानी चाहिए। जनहित याचिका में राज्य के मुख्य सचिव व डी जी पी समेत कई अन्य को पार्टी बनाया गया है।

इस मामले पर अगली सुनवाई अब आगामी 27 सितम्बर, 2022 को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने गया के अनुग्रह नारायण लॉ कॉलेज और बक्सर के जननायक कर्पूरी ठाकुर लॉ कॉलेज के स्थिति के सम्बन्ध में बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को जवाब देने का निर्देश दिया

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई की।

इससे पूर्व कोर्ट ने बीसीआई के अनुमति/ अनापत्ति प्रमाण 2021- 22 की सत्र के लिए राज्य के 17 लॉ कालेजों को दाखिले के लिए अनुमति दी थी।

हाई कोर्ट ने पिछले 23 मार्च 2021 के उस आदेश , जिसके अंतर्गत बिहार के सभी 27 सरकारी व निजी लॉ कॉलेजों में नए दाखिले पर रोक लगा दी गयी थी, इस आदेश में आंशिक संशोधन किया गया। इसके तहत इन 17 कॉलेजों में सशर्त दाखिले की मंजूरी दे दी । हाई कोर्ट ने साफ किया कि नया दाखिला सिर्फ 2021-22 के लिए ही होगा। अगले साल के सत्र के लिए बार काउंसिल से फिर मंजूरी लेनी होगी ।

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पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने इन कालेजों का निरीक्षण कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को तीन सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश दिया था।कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि जिन लॉ कालेजों को पढ़ाई जारी करने की अनुमति दी गई थी, वहां की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं को भी देखा जाए।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से अधिवक्ता विश्वजीत कुमार मिश्रा ने सुनवाई में पक्ष प्रस्तुत किया।

पटना हाईकोर्ट ने पटना मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमणकारियों द्वारा किये गए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजकिशोर श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई तक अतिक्रमण हटाने का सख्त आदेश दिया है।

राज्य सरकार के अधिवक्ता द्वारा अतिक्रमण का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया गया।अधिवक्ता सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि इस नहर बांध व चार्ट भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है।

दानापुर के अंचलाधिकारी द्वारा दिये गए वादा करने के बाद अभी तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। सोन नहर प्रमंडल, खगौल, पटना द्वारा अतिक्रमण वाद दायर करने के लिए दानापुर के अंचलाधिकारी को लिखा गया है, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं कि गई है।

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सोन नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता द्वारा दानापुर के अंचलाधिकारी को अतिक्रमणकारियों की सूची भी अंचलाधिकारी को दी गई है। कार्यपालक अभियंता ने अपने पत्र में विभागीय मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर किये गए अतिक्रमण को अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध अतिक्रमण वाद दायर कर ठोस अग्रेतर कार्रवाई करने हेतु अनुरोध किया था, ताकि विभागीय भूमि अतिक्रमणकारियों से मुक्त हो सके। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

इस मामलें पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।

आज पटना हाईकोर्ट में क्या है खास; इन मामलों की होगी सुनवाई

पटना, 29 अगस्त 2022। पटना हाईकोर्ट में आज इन मामलों की होगी सुनवाई :

1. पटना हाईकोर्ट में राज्य के उत्पाद कोर्ट के बुनियादी सुविधाओं के नहीं होने और विकास के मामले पर सुनवाई की जाएगी ।जस्टिस राजन गुप्ता की खंडपीठ इस मामलें पर सुनवाई करेगी। उत्पाद कोर्ट समेत अन्य कोर्ट में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर कड़ा रुख अपनाया था।

2. पटना हाईकोर्ट में पटना मुख्य नहर के बांध व चार्ट भूमि पर अतिक्रमणकारियों द्वारा किये गए अतिक्रमण के मामले पर सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ राज किशोर श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दानापुर के अंचलाधिकारी व दानापुर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को तलब किया था।कोर्ट ने इन अधिकारियों को कार्रवाई रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

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3. राज्य में लॉ कालेजों की स्थिति ,बुनियादी सुविधायों की कमी और शिक्षण स्तर के मामलें में दायर जनहित याचिकाओं पर पटना हाईकोर्ट में सुनवाई की जाएगी।चीफ जस्टिस संजय क़रोल की खंडपीठ कौशल किशोर की जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी।