Press "Enter" to skip to content

Posts published in “सियासी संग्राम”

post about सियासी संग्राम

जन सुराज की सोच को लेकर प्रशांत किशोर का तूफानी दौरा जारी; जहानाबाद में युवाओं, महिलाओं और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ किया संवाद

प्रशांत किशोर जन सुराज की सोच को लेकर बिहार के अलग अलग जिलों में जा रहे हैं। इसी क्रम में आज वे जहानाबाद पहुंचे। यहां पहुंचने से पहले पटना जिले के धनरुआ में युवाओं द्वारा उनका स्वागत व अभिनंदन किया गया। इसके बाद जहानाबाद में अलग अलग कई कार्यक्रमों में उन्होंने प्रबुद्ध नागरिकों, महिलाओं और युवाओं से जन सुराज की सोच को लेकर संवाद किया और लोगों के सभी सवालों के जवाब दिए।

जन सुराज का अगर कोई दल बनेगा तो, वो बिहार के सभी सही लोगों का दल होगा
प्रशांत किशोर ने जन सुराज के विचार को रेखांकित करते हुए बताया कि जन सुराज के माध्यम से वह लोगों के साथ संवाद स्थापित करना चाहते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा, “उद्देश्य है बिहार में एक नई राजनीतिक व्यवस्था बनाना। सत्ता परिवर्तन हमारा मकसद नहीं है। अगर पदयात्रा के बाद सब लोगों की सहमति से कोई दल बनता भी है तो वो बिहार के सभी सही लोगों का दल होगा, प्रशांत किशोर का दल नहीं होगा। सब मिलकर अगर तय करेंगे तो दल बनाया जाएगा। मैं अभी लोगों से बात करने, उनकी समस्याओं को समझने में अपना पूरा वक्त लगा रहा हूं।”

बिहार को विकसित बनाना है तो यहां के लोगों को साथ मिलकर प्रयास करना होगा
बिहार की बदहाली पर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जो लोग विकास का दावा कर रहे हैं अगर उनको सच मान भी लिया जाए तो भी देश में सबसे ज्यादा अशिक्षित लोग, बेरोजगार लोग, गरीब लोग बिहार में रहते हैं। बिहार के विकास के लिए सही लोग, सही सोच और सामूहिक प्रयास पर बल देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि देश के अग्रणी राज्यों में अगर बिहार को खड़ा करना है तो बिहार के लोगों को मिलकर प्रयास करना होगा।

समाज में रहेंगे, समाज को समझने का प्रयास करेंगे
प्रशांत किशोर ने कहा की वह 2 अक्तूबर से पाश्चिम चंपारण के गांधी आश्रम से पदयात्रा शुरू करेंगे। इस पदयात्रा के माध्यम से वो बिहार के हर गली-गांव, शहर-कस्बों के लोगों से मुलाकात करेंगे और उनकी समस्याओं को सुनेंगे। उनसे समझेंगे कि कैसे बिहार को बेहतर बनाया जा सकता है। पदयात्रा में जब तक पूरा बिहार पैदल न चल लें तब तक वापस पटना नहीं जाएंगे, समाज में रहेंगे, समाज को समझने का प्रयास करेंगे। इसका एक ही मकसद है कि समाज को मथ कर सही लोगों को एक साथ एक मंच पर लाना।

प्रशांत किशोर की अपील – हिंसा नहीं करें आंदोलनकारी छात्र
अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे आंदोलनकारी युवाओं से प्रशांत किशोर ने अपील करते हुए कहा कि अगर आंदोलन को सफल बनाना है तो विरोध प्रदर्शन का अहिंसात्मक तरीका अपनाएं और मजबूती से अपनी बात रखें।

ये तस्वीर जता रहा है कि बिहार की राजनीति किस दिशा की ओर बढ़ रहा है

राजनीति में बयान और तस्वीर बेमतलब कभी नहीं होता हर बयान और तस्वीर के पीछे कोई ना कोई संदेश जरुर छिपा रहता है । मुख्यमंत्री के आधिकारिक ग्रुप से कल एक तस्वीर जारी हुई है मौका था इन्वेस्टर्स मीट सह वस्त्र एवं चर्म नीति 2022 के लोकार्पण समारोह का जहां नीतीश कुमार उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन का पीठ थपथपा रहे हैं बिहार में मेरी जानकारी में ये पहली ऐसी तस्वीर है जिसमें नीतीश कुमार किसी मंत्री के काम की तारीफ इस तरह से सार्वजनिक रूप से किये हो।

वैसे शाहनवाज हुसैन जब से उद्योग मंत्री बने हैं विभाग की सक्रियता बढ़ी है इसमें भी कोई शक नहीं है लेकिन नीतीश कुमार कुछ दिन पहले तक शाहनवाज को लेकर सहज नहीं थे ये भी सार्वजनिक रूप से कई मौके पर देखने का मिला है तो फिर ऐसा क्या हुआ जो नीतीश के इतने चहेते बन गये ।

नीतीश के निशाने पर हैं अमित शाह
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग के सहारे जो कुछ भी हुआ उसको लेकर नीतीश अभी भी सहज नहीं है जिस वजह से बीजेपी के साथ रहने के बावजूद भी हमेशा दाव लगाते रहते हैं ।

एक बड़ी चर्चित गीत है ना कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना बस इसी अंदाज में नीतीश बिहार की राजनीति का साध रहे हैं और इसके लिए जब जब दिल्ली बीजेपी नीतीश कुमार पर दबाव बनाने कि कोशिश करता है लालू प्रसाद के परिवार से नजदीकी बढ़ाने का प्रयास ये तेज कर देते हैं ।

वही बीजेपी के अंदर मोदी और शाह के खिलाफ जो गोलबंदी शुरू हुई है उसका लाभ कैसे मिले इस पर नीतीश काम शुरु कर दिये हैं और यही वजह है कि नीतीश का रिश्ता कभी भी शाहनवाज और गडकरी से अच्छा नहीं रहा है क्यों कि दोनों नेता नीतीश की आलोचना कई मौके पर मुखर होकर कर चुके हैं ।

गांधी सेतु के दूसरे लेन के उद्घाटन समारोह के दौरान नीतीश और गडकरी की जो मुलाकात हुई देखने से ऐसा ही लग रहा था कि जैसे की वर्षो बाद बिछड़ा हुआ भाई मिल रहा हो।

इतना ही नहीं इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मंत्री नित्यानंद राय बिहार विधानसभा की घटना के बाद कार्यक्रम के दौरान दूरी बनाते हुए दिखे क्यों कि राज्यसभा चुनाव के दौरान जिस अंदाज में उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने नित्यानंद को झिड़की लगाये थे उससे साफ हो गया था कि फिलहाल बिहार में शाह की नुमाइंदगी को तवज्जो मिलने वाली नहीं है और इस राजनीति को नीतीश का भी समर्थन प्राप्त है।

वैसे दिल्ली से होने वाले निर्णय में अभी भी टीम शाह भारी है लेकिन नहीं चाहते हुए भी नीतीश इसी रणनीति के सहारे पहले भूपेन्द्र यादव को बिहार से बाहर का रास्ता दिखाया दिया और फिर बिहार विधान परिषद में संख्या बल नहीं होने के बावजूद दो सीट देने पर बीजेपी को मजबूर कर दिये।

शाहनवाज और गडकरी

आने वाले समय में इस तरह की चौकाने वाली तस्वीरे और देखने को मिले तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्यों लम्बें वक्त के बाद बीजेपी के केन्द्रीय टीम में नीतीश की पहुंच मजबूत होते दिख रही है।

तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि सम्पूर्ण क्रांति के अवसर पर हमें संकल्प लेना है कि इस निक्कमी सरकार को उखाड़ फेंकना है

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को कहा कि सम्पूर्ण क्रांति के अवसर पर हमें संकल्प लेना है कि इस निक्कमी सरकार को उखाड़ फेंकना है। महंगाई का प्रकोप है, भ्रष्टाचार चरम पर है। शिक्षा का बंटाधार है, स्वास्थ्य व्यवस्था गर्त में है।

सम्पूर्ण क्रांति दिवस पर महागठबंधन की ओर से राजधानी पटना के बापू सभागार में प्रतिनिधि सम्मेलन के मौके पर तेजस्वी यादव ने यह बातें कहीं। विपक्ष द्वारा जारी सरकार के खिलाफ आरोप पत्र को लेकर सीएम नीतीश कुमार ने कहा है कि सबको अपना-अपना काम करने का अधिकार है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि जेल से डरो नहीं, जेल को भरो। तेजस्वी ने जातीय जनगणना की जीत को सम्पूर्ण विपक्ष की जीत बताया और इसके लिए महागठबंधन के साथी लेफ्ट को बधाई दी। इसके पूर्व महागठबंधन की ओर से आरोप पत्र जारी किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्ष तेजस्वी ने किया जबकि मंच का संचालन आलोक मेहता ने किया।

जातिय गणना पेपर सर्वे के बजाय ई-सर्वे टेबलेट के माध्यम से कराया जाना चाहिए – सुशील मोदी

जातिय गणना पेपर गणना नहीं बल्कि ई-गणना टेबलेट के माध्यम से कराई जाए
• आर्थिक और जातिय के साथ-साथ सामाजिक मुद्दे से जुड़े प्रश्नों के आधार पर सर्वेक्षण हो
• राजनैतिक दबाव में जल्दबाजी नहीं बल्कि पूरी तैयारी के साथ सर्वे किया जाए

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्यसभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने एक बयान जारी कर बिहार सरकार को सुझाव दिया है कि प्रस्तावित जातिय गणना पेपर सर्वे के बजाय इलोक्ट्रोनिक सर्वे या ई-सर्वे के माध्यम से कराया जाना चाहिए जिसमें प्रगणक टेबलेट के माध्यम से सारी सुचना एकत्र करेंगे ताकि रियल टाइम आंकड़े अपलोड किया जा सके । साथ ही जनगणना 2022 एवं बिहार की जातिय गणना एक समय में न हो।

श्री मोदी ने कहा कि 2021 कि जनगणना ई – सेन्सस होने जा रही है । उसी तर्ज पर प्रत्येक जिले कि जातियों – उप जातियों को कोडिंग कर, ड्राप डाउन मेनू के माध्यम से जातिय गणना करने के लिए साफ्टवेयर विकसित किया जाय ताकि मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो सके ।

श्री मोदी ने कहा कि यह सर्वे केवल आर्थिक और जातिय ही नही बल्कि सामाजिक भी होना चाहिए । प्रत्येक जाति कि स्थिति का आकलन करने के लिए प्रत्येक परिवार कि शिक्षा, दिव्यांगता, ग्रसित बीमारियाँ , पशु-धन , चल -अचल सम्पति , रोजगार, भूमि की उपलब्धता, स्वास्थ्य आदि से जुड़े प्रश्नों की सूची तैयार कर पूछा जाना चाहिए।

श्री मोदी ने कहा कि अन्य दलों के दबाव में जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है बल्कि पूरी तैयारी, प्रशिक्षण, मार्गदर्शिका निर्माण, प्रश्न-सूची, सोफ्टवेयर, टेबलट की व्यवस्था कर ही सर्वे किया जाना चाहिए।

कटिहार में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति बैठक के दौरान लिये गये राजनीतिक प्रस्ताव

स्वाधीनता के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हम सभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं| 75 वर्षों के इस कालखंड में भारत ने एक राष्ट्र के रूप में उल्लेखनीय उपलब्धियों को हासिल किया है और आज जब देश कर्मशील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है तो हम यह कह सकते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के मानचित्र पर अपनी वह छाप छोड़ेगा जिसकी कल्पना आजादी के लड़ाई में भाग लेने वाले सभी क्रांतिकारियों ने की थी |

राष्ट्र जीवन की दिशा नामक पुस्तक में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने राष्ट्र को किसी कालखंड की गणनात्मक इकाई की जगह एक शाश्वत इकाई माना है। वास्तविकता भी यही है। राष्ट्र की संकल्पना विशेषकर इस धरा भारत के संदर्भ में अनादि काल से विद्यमान रहा है । इसकी झलक सांस्कृतिक रूप से देश के जन-जन में हमेशा से विद्यमान रही है और यह राजनीतिक रूप से हमारे राजा महाराजाओं में चक्रवर्ती सम्राट बनने की लालसा में दृष्टिगोचर होती है। यूरोपीय नूतन राष्ट्रवाद से इसकी तुलना बिल्कुल बेतुकी है। भारत में कांग्रेस तथा उसके वित्त पोषित वामपंथ के द्वारा वर्तमान में राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद के संदर्भ में जिस विरोधाभास को प्रतिस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है , वह वास्तव में नेहरूवियन आइडिया ऑफ इंडिया के विफल होने का ही प्रमाण है।

राम मंदिर तथा काशी विश्वनाथ का निर्माण हमारे पूर्वजों के संघर्ष तथा बलिदान की क्षतिपूर्ति मात्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। वास्तव में इन्हें देश के ऐतिहासिक कालखंड में एक ऐसे मोड़ के रूप में देखा जा सकता है जहां से भारत अपनी सांस्कृतिक एवं आत्मिक आइडिया ऑफ भारत को अंगीकार करने की दिशा में बढ़ चला है। इस दृष्टि से पीढ़ियों को जोड़ने तथा माननीय नरेंद्र मोदी जी जैसे विराट नेतृत्व में अपने सभी पुरोधाओं को नमन करते हुए राष्ट्र को विकसित व पल्लवित करने में तन मन धन से खुद को समर्पित करने का वक्त आ गया है।

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी ,प्रभावी एवं साहसी नेतृत्व एवं देश भर के कार्यकर्ताओं के अटूट मेहनत का नतीजा है कि आज भाजपा एक सबल भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है | विश्व के मानचित्र पर भारत का नाम अब गौरव से लिया जाता है क्योंकि नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर के महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर जिस प्रकार अपना प्रामाणिक हस्तक्षेप किया है वह अभिनंदनीय है | विगत एक महीने में सम्पन्न हुए संयुक्त राष्ट्र, क्वाड, जी-23 सहित दुनिया के तेल उत्पादक देशों के संघ के बीच भारत ने अपनी स्थिति को मजबूत किया है तथा चीन एवं पाकिस्तान द्वारा भारत की सीमाओं पर लगातार किए जा रहे कुत्सित प्रयासों से दुनिया को अवगत कराकर उन्हे अलग-थलग करने में उल्लेखनीय सफलता पायी है |

आजादी के बाद 70 वर्षों तक कॉंग्रेस, वामपंथ तथा समाजवाद के नाम पर गैर-यथार्थवादी, सांप्रदायिक, परिवार केंद्रित नेतृत्व ने विकास की संभावनाओं को कुंद करने में कोई कसर नहीं छोड़ा | लोकतंत्र की हत्या करके इमरजेंसी लगाई गई । कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों को लगभग 90 बार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया । कॉंग्रेस ने जहां देश में निर्भर अर्थव्यवस्था को खड़ा किया, वामपंथियों ने भारत के मौलिक चिंतन धारा को कुंद करने का कुत्सित प्रयास किया वहीं तथाकथित समाजवादियों ने जातिवाद, भ्रष्टाचार तथा परिवारवाद को पोषित किया है | लोकतंत्र की हत्या करके इमरजेंसी लगाई गई । कांग्रेस ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों को लगभग 90 बार बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन क्या यह सच्चाई नहीं है इन्हीं दलों ने जयप्रकाश नारायण, लोहिया, कर्पूरी ठाकुर जैसे नेताओं के विचारों को तिलांजलि देकर अपने परिवार को मजबूत किया है और भ्रष्टाचार के प्रतिमान गढ़े ।जबकि भाजपा की आधारशिला लोकतंत्र , सांस्कृतिक राष्ट्रवाद , लोक कल्याण , सामाजिक समरसता तथा अंत्योदय के लक्ष्यों में निहित है । श्री नरेंद्र मोदी ने इन्हीं उद्देश्यों को अंगीकार करते हुए सबका साथ , सबका विकास , सबका विश्वास और सब का प्रयास को अपने शासन का मूल मंत्र बनाया ।

कटिहार में भारतीय जनता पार्टी1

हमे विश्वास है कि धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी राज्य और केंद्र सरकार गंभीरता से विचार करेगी ।
देश ने केंद्र में कॉंग्रेस नीत यूपीए सरकार तथा बिहार में राजद के शासनकाल को देखा है और उसके दंश को झेला है | यूपीए 1 एवं 2 में राजद कॉंग्रेस पार्टी का साझीदार था | इस सरकार के भ्रष्टाचार के कारनामों ने दुनियाभर में भारत को शर्मसार किया था | राजद के पंद्रह साल के कालखंड में अलकतरा घोटाला,चारा घोटाला , पैसों का गबन, नौकरियों के बदले जमीन या मकान लिखवाना साथ-साथ अपराध का वह सिलसिला जिसमें हत्या, लूट, नक्सलवादी आंदोलन, जातीय हिंसा जैसे कारनामें रोजमर्रा की बातें हो गई थी | शाम ढलते ही सड़कों के सुनसान होने की बात आज भी लोगों के रोंगटे खड़ा कर देता है।

आज श्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार हो या बिहार में एनडीए की सरकार भ्रष्टाचार का कहीं नाम नहीं है | प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा है कि हमने 8 वर्षों के गरीब कल्याण, सेवा और सुशासन को समर्पित कार्यकाल में एक भी ऐसा काम नहीं किया है जिससे हमारा देश या देशवासियों का सर झुके | यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि इस अवधि मे इस सरकार पर भ्रष्टाचार का कोई आरोपनहीं लगा |माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जो विषय 8 वर्ष पहले कहा था कि ना खाऊँगा ना खाने दूंगा आज उसको चरितार्थ कर दिया है | आज जब विरोधियों पर भ्रष्टाचार सम्बन्धी कोई कार्यवाई होती है तो वे अपने काले कारनामों पर से लोगों का ध्यान हटाने के लिए स्वयं को सताये जाने का आरोप लगते हैं ।

रामधारी सिंह दिनकर ने परशुराम की प्रतीक्षा में इनके जैसे हीं नेताओं के काले कारनामों को देखकर लिखा था –
घातक है जो देवता-सदृश दिखता है
लेकिन, कमरे में गलत हुक्म लिखता है।
जिस पापी को गुण नहीं गोत्र प्यारा है
समझो उसने ही हमें मारा है।

हलांकि ये पंक्तियाँ उन्होंने कॉंग्रेस के कार्यशैली पर लिखी थी जो आज भी काँग्रेस और राजद जैसी दलों पर सटीक बैठती है ।

समाज के सभी वर्गों, जातियों के लिए भाजपा तथा एनडीए की सरकार ने श्रेष्ठ प्रयास किए हैं | पिछड़े वर्ग को संवैधानिक दर्जा देना एक ऐसा कदम है जिसे राजद ने वर्षों तक यूपीए सरकार के वक्त दबाकर रखा था ।बाबा साहब अंबेडकर के जन्म स्थली , शिक्षा स्थान सहित पांच स्थानों को पंच तीर्थ स्थल के रूप में विकसित कर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यथोचित सम्मान दिया । उनके व्यक्तित्व को पूर्ववर्ती सरकारों ने मान्यता नहीं दी थी । माननीय प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटा कर वहां के कमजोर वर्ग विशेषकर बाल्मीकि और बक्करवाल समाज को आरक्षण उपलब्ध करा कर सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर दी है।नीट में ओबीसी को 27% एवं सामान्य वर्ग के गरीबों को 10% आरक्षण का प्रावधान इसी दिशा मे उठाए गए कदमहैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने “प्रधानमंत्री मतस्य संपदा योजना” के माध्यम से निषाद समुदाय के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं | इस योजना के अंतर्गत 20,050 करोड़ रुपए निषाद समुदाय की आर्थिक उन्नति के लिए दिए गए हैं बिहार मीठे पानी में मछली उत्पादन में देश में अव्वल राज्य बन चुका है | आज बिहार में 2005की तुलना मे मछली का उत्पादन लगभग 3 गुना बढ़ चुका है |

कटिहार-में-भारतीय-जनता-पार्टी2

स्वास्थ्य, सड़कें-हाइवे, बिजली, पानी, उद्योग, कृषि, शिक्षा, शुद्ध पेयजल सहित अन्य सभी महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं के क्षेत्र में हमने तेजी से काम संपादित किए है | राज्य में प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2005 के 8000 रुपए के मुकाबले आज 48000 रुपए तक पहुँच गयी है और जीडीपी की दर जो 2005 के पूर्व 3% के आसपास थी वह आज 11% पार कर चुकी है | आज हमें इस बात की खुशी है की विगत वर्षों में राज्य में मँझले कद के उद्योगों का संजाल विकसित हो रहा है

आज देश अपने सांस्कृतिक विरासतों तथा उसके वैभव को पुनः स्थापित कर रहा है | नेहरू के छद्म-सेक्युलरवाद का दर्शन जिसे हम वामपंथ का भी साझा दर्शन कह सकते हैं उसने हिंदुओं के सांस्कृतक अधिष्ठानों, उसके प्रामाणिक जीवनशैली तथा उसके परम्पराओं के संदर्भ में लगातार दुष्प्रचार किए हैं | क्या यह सच्चाई नहीं है कि भारत का समाज हिंदुओं की बहुलता की वजह से सहिष्णु है और हमने भारत के साझी विरासत में सभी को स्थान दिया है ? आज आतंकवाद केवल कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों मे सिमट के रह गया है ।कॉंग्रेस तथा राजद के युवराज पाकिस्तान समर्थक तथाकथित सेमिनारों में भारत-विरोध की भाषा बोल रहे हैं | कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के जिस प्रांगण में वो भारत विरोधी “आइडिया ऑफ इंडिया” सेमीनार का हिस्सा बनने गए थे उससे उन्हें वामपंथीयों की मान्यता तो जरूर मिल सकती है परंतु देश की जनता उन्हे कभी माफ नहीं करेगी |

भारत प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इतिहास से सबक लेकर एक सबल-सक्षम तथा क्रियाशील राष्ट्र के रूप में समावेशी सांस्कृतिक अधिष्ठान वाली पहचान को पुनर्जीवित कर रहा है | काशी का ज्ञानवापी हो या कश्मीर घाटी में फैले सूर्य मंदिर के अवशेष सभी राम मंदिर और काशी विश्वनाथ की तरह वापस जीवंत हो उठने को तत्पर हैं । राजनीति की तमाम चुनौतियों के बीच भाजपा ने देश की जनता के बीच नई आशा और विश्वास का संचार किया हैऔर भारत श्री नरेंद्र मोदी के साहसी और कुशल नेतृत्व में विश्व गुरु बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

सुशील मोदी का लालू पर सीधा हमला, कहा परिवार की पार्टी है राजद

पटना । 27.05.2022 । बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है राजद के लिए भ्रष्टाचार, परिवारवाद, नैतिकता तो कोई मुद्दा ही नहीं है। राजद परिवार से बाहर निकल ही नहीं सकता है। परिवार में ही किसी दूसरी बहन को देते, परन्तु भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जिन पर हैं उन्हें पुनः राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया।

• ए टू जेड की बात करने वाले माई समीकरण से बाहर नहीं निकल सकते
• राजद के राज्यसभा में अब छह में से तीन जेल रिटर्न और एक बेल पर
• ऐसी पार्टी सत्ता में आ गई तो बिहार का क्या होगा?

मोदी ने कहा कि राजद लाख ए टू जेड की बात कर ले, परंतु न तो वह माई से बाहर निकल सकता है और ना ही परिवार
से। राज्यसभा में टिकट का मौका आया तो बाबा और जगता बाबू को दरकिनार कर परिवार और माई को ही तरजीह मिली।

मोदी ने कहा कि बाबा को नहीं बनाया तो समझ में आ सकता है क्योंकि लालू जी की दुर्दशा के लिए बाबा ही जिम्मेवार हैं। परंतु जगता बाबू जिन्होंने लालू जी के जेल जाने के बाद खडाऊं को ईमानदारी से संभाल कर रखा और जो पार्टी का अध्यक्ष के रूप में बेहतर काम कर रहे हैं उन को अपमानित कर राज्यसभा नहीं भेजा।

मोदी ने कहा कि 2020 के विधानसभा चुनाव में राजद ने 144 में 76 टिकट माई समीकरण को दिया। भूमिहार को एक और कुर्मी को भी मात्र एक टिकट दिया। वही माई के एम को 18 और वाई को 58 टिकट दिया।

मोदी ने कहा कि अब लालू परिवार के 4 सदस्य संसद और विधान मंडल में है। राज्यसभा के 6 में से तीन सदस्य जेल रिटर्न (प्रेमचंद गुप्ता, अशफाक करीम, अमरेंद्र धारी सिंह) है, एक चार्जशीटेड हैं और बेल पर हैं और 4 धन पशु हैं जिनकी योग्यता केवल धन है।

मोदी ने कहा कि ऐसी पार्टी 15 साल सत्ता में थी तो लोगों ने देखा है और यदि पुनः गलती से लौट आए तो बिहार का क्या होगा?

नीतीश के पजल गेम में उलझा बिहार आरसीपी सिंह के राज्यसभा जाने पर अभी भी संशय बरकरार

समझें तो जाने जी है इस समय बिहार जिस राजनीति के दौर से गुजर रहा है वो किसी पजल गेम से कम नहीं है ।
बिहार के सामने आरसीपी सिंह राज्यसभा जायेंगे या नहींं जायेंगे यही पजल गेम है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब पजल गेम के एक से एक माहिर खिलड़ी भी दो राहे पर आकर खड़े हो जा रहे हैं और तय नहीं कर पा रहे हैं कि आरसीपी सिंह जायेंगे या नहीं जायेंगे मैं तो यह दावे के साथ कह सकता हूं कि आरसीपी सिंह जायेंगे या नहीं जायेंगे ये बात ललन सिंह और उपेन्द्र कुशवाहा को भी पता नहीं है ।

हां अटकल जरुर लगा सकते हैं पिछले 24 घंटे के दौरान इस पजल गेम को साँल्भ करने की दिशा में इस तीन तस्वीर की सहायता ली जा सकती है ।

1–पहली तस्वीर है आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के बीच मुलाकात की आरसीपी सिंह पीले रंग के फाइल के अंदर लिखी गयी मजमून को पढ़ रहे हैं और नीतीश कुमार सुन रहे हैं नीतीश के चेहरे के भाव से आप कयास लगाइए क्या पढ़ रहे थे आरसीपी सिंह

2–दूसरी तस्वीर है मंंत्री विजय चौधरी के बेटे के शादी समारोह का मुख्यमंत्री सहित जदयू के अधिकांश मंत्री जब चले गये तब आरसीपी सिंह पहुंचे थे और हाल यह था कि जदयू का कार्यकर्ता भी साथ चलने से कतरा रहे थे।

3–तीसरी तस्वीर पंडित जवाहरलाल नेहरू के पूण्यतिथि पर आयोजित राजकीय समारोह का है इस कार्यक्रम में मंत्री शीला मंडल मुख्यमत्री नीतीश कुमार के बगल में बैठी हैं ,शीला मंडल आरसीपी सिंह के खासे करीब हैं उन्हें के कहने पर टिकट दिया गया था और पहली बार विधायक बनने के बाद मंत्री भी आरसीपी सिंह के ही कोटे से बनी थी। शीला पहली बार किसी राजकीय कार्यक्रम में नीतीश के साथ मंच पर देखी गयी है इस का तस्वीर मतलब निकाले पजल गेम साँल्भ करो ।

इस पजल गेम को लेकर कुछ इनपुट भी है शायद आपको साँल्फ करने में मदद करे
1–इधर राज्य सरकार के सीनियर अधिकारियों का मानना है कि आरसीपी सिंह राज्यसभा जरुर जायेंगी ज्यादा उड़ने लगे थे हैसियत बता दिया गया ।

2–आज आरसीपी सिंह चुनाव आयोग के रिटायर उप निर्वाचन पदाधिकारी बैजनाथ कुमार मिलने पहुंचे हैं कहा जा रहा है कि नॉमिनेशन फॉर्म भरने आये हैं ।

हाहहाहहाहाहा मजा आ रहा है ना आरसीपी पजलगेम को साँल्भ करने में ।वैसे इस खेल में अब बचा कुछ नहीं है बस देखना यही है कि इस गेम के निर्माता के रीढ़ में ताकत बची है की नहीं ।

आरसीपी सिंह नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुंचे

आप खुद कयास लगाये आरसीपी सिंह नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुँचते हैं पहले से आरसीपी सिंह के ललन बाबू मौजूद थे। 45 मिनट की मुलाकात के बाद आरसीपी सिंह बाहर निकले उनके चेहरे का भाव देख कयास लगाये।

आरसीपी सिंह मीडिया को पत्र भेजे है आप पढ़ कर खुद कयास लगा ले:-

केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह की तरफ से एक प्रेस रिलीज जारी हुआ है जिसमें यह कहा गया है कि हमने जदयू कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए जदयू में काम किया है ।
हमने जदयू में आरंभ से ही संगठन के विस्तार के लिए काम किया हर समय कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए प्रयास किए। पार्टी को कैसे बूथ स्तर तक पहुंचाया जाए इसको लेकर पूरी लगन से काम किया ।
अब पार्टी को फैसला करना है कि उन्होंने जदयू के लिए क्या किया है ।

जातीय जनगणना को लेकर शिवानंद तिवारी ने ली चुटकी कहा नीतीश के सामने बीजेपी ने टेका घुटना

नीतीश कुमार ने अपना मक़सद पुरा कर लिया. देश में अमीर और गरीब, दो ही जातियाँ हैं, यह बोलने वाली भाजपा अब नीतीश जी के साथ जातियों की गिनती करायेगी.

यही तो नीतीश चाहते थे. ऐसा नहीं है कि भाजपा का हृदय परिवर्तन हो गया है इसलिए वह जातिय जनगणना के लिए तैयार हो गई है. दरअसल भाजपा के सामने 2024 का लोकसभा चुनाव है. उसके लिए अभी से उसकी गोलबंदी शुरू हो चुकी है.

नीतीश कुमार ने बहुत चतुराई से इसका लाभ उठाया. इफ़्तार पार्टी ने अनुकूल मौक़ा दे दिया. संदेश चला गया कि ग़लतफ़हमी में मत रहिए. मेरे पास बना बनाया विकल्प है . 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नीतीश और लालू के संयुक्त ताक़त का परिणाम देख चुकी है.

आलाकमान का निर्देश आया और सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का फ़ैसला हो गया. भाजपा ने एक कदम आगे और दो कदम पिछे नहीं बल्कि दो कदम आगे और एक कदम पिछे की रणनीति के तहत सर्वदलीय बैठक में शामिल होने का फ़ैसला किया. नीतीश जी को सिर्फ़ इसी से मतलब था. जातीय जनगणना के सवाल पर पिछले कुछ दिनों से चल रहे नाटक को देख कर जो लोग नई सरकार बनने की उम्मीद लगाए बैठे थे वे ज़रूर निराश हुए होंगे।

शिवानंद तिवारी और सुशील मोदी के बीच चुनावी जंग जारी

सुशील मोदी की राजनीति अभी तक बालिग नहीं हो पाई. संभवतः इसीलिए इनकी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार की राजनीति से उनको अलग किया था।

जब दिल्ली ले जाए गए तो उनके भक्तों को उम्मीद थी कि बिहार में इतने लंबे समय तक वित्त विभाग को इन्होंने कुशलता से संभाला है. अब निर्मला सीतारमण की कुर्सी पर सुशील जी का बैठना तो पक्का ही है. लेकिन दिल्ली वालों ने तो इनके हल्केपन को पहचान कर ही बिहार को इनसे मुक्त कराया था. इसीलिए बिहार के मीडिया में बयान देने के लिए ही इनको छुट्टा छोड़ दिया है।

Modi-Tiwari

लालू जी के यहां छापेमारी के मामले में अपने को काबिल साबित करने की हड़बड़ी में सुशील जी अपनी दिल्ली सरकार को ही नाकाबिल साबित कर रहे हैं. उनका दावा है कि लालू जी के खिलाफ सीबीआई जाँच की माँग को मनमोहन सिंह ने दबा दिया था. लेकिन मनमोहन सिंह की सरकार तो 2014 में ही चली गई थी. उसके बाद से अब तक तो यानी आठ वर्षों से तो दिल्ली में बड़े मोदी जी की ही सरकार है. यह सरकार इतनी नाकाबिल है कि छह वर्षों दबे उस ज्ञापन को खोज निकालने में उसको आठ वर्ष लग गए. वह भी कब ! जब नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के बीच दूरी घटती हुई नज़र आ रही है।

हमारा सवाल तो यही था. लालू यादव के यहाँ सीबीआई की छापेमारी कहीं नीतीश जी के लिए चेतावनी तो नहीं थी शिवानन्द

मोदी ने शिवानंद तिवारी को लिया आड़े हाथ, कहां दूम हिलाते है तिवारी

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सम्प्रति राज्य सभा सांसद श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री शिवानंद तिवारी जी ने कम से कम यह स्वीकार तो किया कि श्री ललन सिंह जी के साथ मिलकर लालू जी के ‘नौकरी के बदले जमीन’ घोटाले का उन्होंने ही पर्दाफाश किया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह से मिलकर सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने पहले यह भी स्वीकार किया था कि उनकी पीआईएल पर ही पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था जिसके पांच मामलों में लालू जी को सजा हो चुकी है।

श्री मोदी ने कहा कि जहां तक 14 साल विलंब से कार्रवाई का सवाल है, तो उस समय राजद के समर्थन से मनमोहन सिंह जी की सरकार चल रही थी। प्रधानमंत्री की हिम्मत नहीं थी कि सहयोगी दल के नेता पर कार्यवाही करते। उन्होंने ज्ञापन को ठंडे बस्ते में ही नहीं डाला बल्कि लालू के लोगों ने ज्ञापन को ही फाइल से हटवा दिया।

श्री मोदी ने कहा कि शिवानंद जी भूल गए कि मामला भले ही 14 वर्ष पुराना हो परंतु 2017 में जब मैंने ‘नौकरी के बदले जमीन’ सहित दर्जनों लालू परिवार के भ्रष्टाचार को सबूतों के साथ उजागर किया था तो आप की सरकार चली गई थी। सीबीआई ने प्रारंभिक जांच (Preleminary Inquiry) का मामला तो सितंबर 2021 में ही दर्ज कर लिया था।

श्री मोदी ने कहा कि फिर पांच मामलों में सजायाफ्ता और जिसका पूरा परिवार भ्रष्टाचार के मामले में बेल पर है उससे यदि कोई दोस्ती करना चाहेगा तो यह छोटा मामला कभी बाधक नहीं बन सकता है? लेकिन गलतफहमी दूर कर ले अब कभी राजद-जदयू की दोस्ती नहीं हो सकती है?

श्री मोदी ने कहा कि आज अगर लालू जी की दुर्दशा है तो वही लोग जिम्मेवार है जिन्होंने पहले मुकदमा दायर किया, ज्ञापन दिया और अब राजनीतिक लाभ के लिए उनके सामने दुम हिला रहे हैं।

शिवानंद तिवारी का बड़ा बयान लालू को तेजस्वी को गद्दी सौप देना चाहिए

जब लालू यादव ने अपने राजनीतिक वारिस के रूप में तेजस्वी यादव को चुना तो राष्ट्रीय जनता दल ने संपूर्ण हृदय से इसको स्वीकार किया. यह जरूरी भी था. इसलिए भी कि बिहार देश का सबसे युवा प्रदेश है. बिहार की पूरी आबादी में 58 फीसद आबादी 25 बरस से नीचे वालों की है. इस आबादी के सपनों और आकांक्षाओं को लालू यादव सहित हम पुरानी पीढ़ी के लोग नहीं समझते हैं, वक्त बदला है. यह आबादी गांवों के उन पुराने मुहावरों और कहावतों को नहीं समझती है जिसके महारथी लालू जी हैं. लेकिन इस युवा आबादी ने तेजस्वी यादव को स्वीकार किया है. इसका आकलन दो चुनाव के परिणामों से समझा जा सकता है. 2010 का विधानसभा चुनाव राजद ने लालू जी के नेतृत्व में लड़ा था. उस चुनाव में राजद के महज 22 विधायक जीत पाये थे.

उसके बाद विधानसभा का दूसरा चुनाव 2015 में हुआ. उस चुनाव में लालू ज़ी और नीतीश कुमार एक साथ हो गये थे. महागठबंधन की सरकार बन गई थी. उस चुनाव नतीजे से लालू यादव और नीतीश कुमार के संयुक्त ताकत का आकलन किया जा सकता है लेकिन स्वतंत्र रूप से राजद की ताकत का आकलन का वह नतीजा आधार नहीं हो सकता है। इसलिए उस चुनाव के परिणाम को यहां नजीर के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. लेकिन उसके बाद 2020 के चुनाव में गठबंधन बनाने से लेकर नेतृत्व तक शुद्ध रूप से तेजस्वी यादव ने किया था. उस चुनाव में राजद विधानसभा में न सिर्फ सबसे बड़े दल के रुप में उभरा बल्कि प्राप्त वोटों के प्रतिशत के हिसाब से भी सबसे बड़ा दल बना. वह चुनाव एक मामले में अनूठा था. देश के राजनीतिक क्षितिज पर नरेंद्र मोदी के उभार के बाद बिहार के विधानसभा का 2020 का चुनाव ऐसा पहला चुनाव था जिस के चुनाव अभियान में भाजपा सांप्रदायिकता को मुद्दा नहीं बना पाई. बल्कि तेजस्वी यादव ने रोजगार के सवाल को 2020 के चुनाव अभियान का प्रमुख मुद्दा बना दिया और नरेंद्र मोदी सहित तमाम पार्टियों को उसी मुद्दे पर चुनाव लड़ने के लिए बाद्धय किया. युवा तेजस्वी की यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी. इस प्रकार वे देश की नजर में आ गये.

इसलिये उम्मीद की जा रही थी कि लालू जी तेजस्वी के हाथों में दल का संपूर्ण दायित्व सौंप देंगे. विधानपरिषद हो या राज्य सभा, इन सदनों में कौन जाएगा यह तय करने की छूट तेजस्वी को देंगे ताकि वे भविष्य के लिये अपनी टीम का निर्माण कर सकें लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है.

इसलिए एक वरीय साथी होने के नाते मैं लालू जी को सलाह देना चाहूंगा के राज्यसभा के इसी चुनाव में वे तेजस्वी के हाथ में दल की संपूर्ण कमान सौंप दें. लालू जी को स्मरण होगा कि पूर्व में भी अनेक अवसरों पर एक से अधिक मर्तबा मैंने उनको सलाह दी होगी. लेकिन उन्होंने उनकी अनदेखी की. उसके फलस्वरूप उनका तो नुकसान हुआ ही, सामाजिक न्याय आंदोलन को भी नुकसान पहुंचा है. मैं उम्मीद करता हूं कि लालू जी मेरी सलाह का आदर करेंगे.

शिवानन्द
24 मई

सांसद सुशील मोदी ने लालू परिवार से पूछे पांच सवाल

नौकरी के बदले जमीन नहीं ली गई, तो शिवानंद ने जांच के लिए मनमोहन सिंह को क्यों दिया था ज्ञापन ?

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री तथा सांसद सुशील कुमार मोदी ने नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू परिवार और राजद से पांच सवाल पूछे हैं।

उन्होंने पूछा कि अगर लालू प्रसाद ने रेलवे में नौकरी देने के बदले लाभार्थी से जमीन नहीं लिखवायी थी, तो शिवानंद तिवारी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन देकर सीबीआई जांच की मांग क्यों की थी ?

श्री मोदी ने पूछा- क्या यह सही नहीं कि कांति सिंह ने पटना का अपना करोड़ों का मकान और रघुनाथ झा ने गोपालगंज का अपना कीमती मकान केंद्रीय मंत्री बनवाने के बदले लालू परिवार को गिफ्ट किया था ?

श्री मोदी ने कहा, लालू प्रसाद बतायें कि उनका परिवार 141 भूखंड, 30 से ज्यादा फ्लैट और पटना में आधा दर्जन से ज्यादा मकानों का मालिक कैसे बन गया ?

श्री मोदी ने पूछा कि लालू प्रसाद ने पटना हवाई अड्डा के पास स्थित टिस्को के गेस्ट हाउस का स्वामित्व कैसे हासिल कर लिया ?

श्री सुशील मोदी ने पूछा कि लालू प्रसाद के खटाल में काम करने वाले ललन चौधरी और हृदयानंद चौधरी के पास करोड़ों की जमीन कहां से आयी और फिर इन लोगों ने ये कीमती भूमि राबड़ी देवी और हेमा यादव को क्यों दान कर दी?

विधान परिषद के चतुर्थवर्गीय कर्मचारी ललन चौधरी और रेलवे के ग्रुप-डी कर्मचारी हृदयानंद चौधरी के नाम सीबीआई की प्राथमिकी में दर्ज है।

श्री मोदी ने कहा कि शिवानंद तिवारी ने ही 2008 में लालू प्रसाद के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की थी और जब सबूत के आधार पर कार्रवाई हो रही है, तब वे इसे राजनीतिक रंग दे रहे हैं।

लालू प्रसाद के ठिकानों पर छापे से आरजेडी में गुस्सा, सुरेन्द्र यादव ने साधा निशाना

जहानाबाद के पूर्व सांसद और मंत्री सुरेंद्र प्रसाद यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। लालू प्रसाद के गोपालगंज समेत कई ठिकानों पर छापेमारी को उन्होंने प्रताड़ित करने का उपाय बताए।

सुरेंद्र यादव ने कहा कि लालू प्रसाद बीमार आदमी हैं और उनको जांच के नाम पर बैठा कर रखना इसे कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता। पूर्व मंत्री ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से राजद डरने वाली नहीं है। साथ ही उन्होंने दूसरे कई दलों से यह अपील की कि ईडी और इनकम टैक्स जैसी संस्थाओं के खिलाफ एकजुट हो।

सुरेंद्र प्रसाद ने जातीय जनगणना को लेकर भी बयान दिया और कहा कि तेजस्वी ही नहीं नीतीश कुमार भी यही चाहते हैं, बाकी दल भी यही चाहता है की जातीय जनगणना हो। लेकिन बीजेपी को डर है कि कहीं जातीय जनगणना हुआ तो आंकड़े सामने आने के बाद सत्ता से दूर होना पड़ सकता है।

सुरेंद्र प्रसाद यादव आरजेडी के नेता रहे स्वर्गीय श्याम नारायन यादव के पुण्य तिथि तिथि समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी यादव की बैठक खत्म

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ तेजस्वी यादव की बैठक खत्म । तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनको आश्वासन दिया है कि जातीय जनगणना किसी भी हालत में कराएंगे और जल्द ही सदन की बैठक बुलाकर जातीय जनगणना को लेकर काम शुरू किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनको आश्वासन दिया है इसीलिए फिलहाल पैदल मार्च की संभावना नहीं है । उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना बहुत अच्छे तरीके से बिहार में कराया जाना है इसलिए उसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने उनको आश्वासन दिया है कि जल्द ही कैबिनेट में भी प्रस्ताव लाया जाएगा और जाति जनगणना बिहार में होगी।

कोलकाता से पटना पहुंचे तेजस्वी यादव, कहा NRC-CAA पर हमारा स्टैंड क्लियर है, जदयू ने पक्ष में वोट दिया है अब क्या फायदा

पटना । तेजस्वी यादव कोलकाता से पटना पहुंचे । पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि एनआरसी पर हमारा स्टैंड क्लियर है और हम इसके विरोध में है । उन्होंने कहा कि जदयू ने CAA के पक्ष में वोट दिया है अब बोल कर क्या फायदा है।

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव के पटना आने का अभी फिलहाल कोई कार्यक्रम नहीं है अभी वह डिस्चार्ज होकर लौटे हैं देखते हैं कब आते हैं।

उनसे प्रशांत किशोर के लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा उनकी मैं खबर नहीं लेता हूं कब आते हैं कहां जाते हैं इनके साथ उठते बैठते हैं और उनका खबर लेने का मतलब क्या है ।

उनके आने होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है आज तक कहीं कोई फैक्चर रहे ही नहीं है उन्होंने मीडिया पर ही कहा कि पता नहीं आप लोग पता नहीं क्यों इतना बड़ा कीर्तिमान बना रहे हैं।

प्रशांत किशोर पर जद यू का बड़ा हमला

फ्टना । जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजेंद्र यादव ने जमकर हमला बोला है । विजेंद्र यादव ने साफ तौर पर कहा कि इस लोकतंत्र में किसी को भी पार्टी बनाने, यात्रा करने, नाचने और गाने की पूरी आजादी है। कौन व्यक्ति क्या कर रहा है इससे हम सभी को फर्क नहीं पड़ता है।

हम सभी बिहार के विकास के प्रति समर्पित हैं मुख्यमंत्री कुमार ने कभी भी यह दावा नहीं किया है कि बिहार विकसित राज्य है बल्कि बिहार के लिए लगातार मुख्यमंत्री 30 कुमार चिंतित रहते हैं और काम भी करते हैं।

प्रशांत किशोर ने बिहार के बदलाव के लिए युवाओं से साथ आने की कि अपील

पटना । प्रशांत किशोर ने बिहार के बदलाव के लिए युवाओं से साथ आने की कि अपील, मैं कोई राजनीतिक मंच नहीं बना रहा हूं मेरी भूमिका यह होगी कि जो जहां से जुड़े हुए हैं उनमें से एक बड़ा तबका से मिलना उनको एक साथ एक प्लेटफार्म पर लाकर खड़ा करना यही मेरी भूमिका होगी।

पिछले 4 महीनों में हमने 17000 से ज्यादा लोगों को चिन्हित किया है आने वाले 4 महीनों में मैं व्यक्तिगत तौर पर इनमें से ज्यादातर लोगों से मिलूंगा बात करूंगा और जो जन सुराज की सोच है गुड गवर्नेंस की सोच है उसको बिहार की धरती पर उतारने का प्रयास करूंगा।

पिछले 3 दिनों में हमने कई लोगों से मुलाकात की है उसमें अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग हैं राजनीति का गैर राजनीतिक लोग भी हैं बिहार में एक सामूहिक सोच की जरूरत है।

अगले 4 महीनों में 17000 लोगों के साथ संवाद स्थापित करूंगा अगर उनकी सहमति होगी तो इन लोगों को जन सुराजसे जोड़ा जाएगा।

प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर 4 महीने के अंदर इन लोगों से बातचीत के बाद अगर सोच बनती है तो किसी पार्टी की घोषणा की जा सकती है।

लोगों को आने वाले दिनों में जन सुराज को लेकर बताने का काम करूंगा 2 अक्टूबर से पश्चिम चंपारण से 3000 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू करूंगा।

मैं बिहार की जनता को आज इस मंच से आश्वासन देना चाहता हूं कि मैं आज से अपने आप को बिहार के जनता के लिए समर्पित कर रहा हूं मैं किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटूंगा।

मेरा लक्ष्य चुनाव लड़ना नहीं है बिहार में कोई चुनाव नहीं है मुख्यमंत्री बनना और जितना लोकतंत्र की एक प्रक्रिया है अगर मैं पार्टी बनाऊंगा भी तो वह प्रशांत किशोर की पार्टी नहीं होगी।

नीतीश के लिए सॉफ्ट तो तेजस्वी और बीजेपी के लिए हार्ड हुए पप्पू यादव

जहानाबाद पहुंचे पप्पू ज्यादा ने कई मुद्दों पर खुलकर बातचीत की। यूपी और राजस्थान में चल रहे लाउडस्पीकर विवाद पर भी उन्होंने नाम लेकर गिरिराज सिंह और राज ठाकरे जैसे नेताओं पर हमला बोला।

जाप अध्यक्ष ने कहा कि प्रतिबंध करने की जरूरत है ऐसे लोगों को है जो बेवजह बयानबाजी करते हैं। परशुराम जयंती को लेकर हुए आयोजन में जिसमें तेजस्वी यादव पहुंचे थे पप्पू यादव ने निशाना साधा।

बिना नाम लिए उन्होंने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और भूमिहार नेता आशुतोष के ऊपर समाज में जातीय वैमनस्य फैलाने का आरोप लगाया। पप्पू यादव ने कहा कि जो लोग जयंती मना रहे हैं उनको इस से कोई मतलब नहीं यह वह लोग हैं जिन्होंने समाज में वैमनस्य फैलाने का काम किया है।

वही जाती है जनगणना को लेकर कुछ दिन पहले आए तेजस्वी के बयान को लेकर भी उन्होंने जवाब दिया। पप्पू यादव ने कहा कि जब केंद्र में लालू प्रसाद सत्ता में थे तब उन्होंने जातीय जनगणना क्यों नहीं कराई। बीपी सिंह इंद्र कुमार गुजराल और देवगौड़ा का उदाहरण देते हुए बताया कि जब यह लोग पीएम थे तब तेजस्वी के पिता ने यह मांग क्यों नहीं रखी?

जातीय जनगणना को लेकर राजद बड़े आन्दोलन की तैयारी में जुटा

पटना । राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने एक बार फिर जाति जनगणना को कराने की मांग की है । वहीं उन्होंने कहा कि जाति जनगणना होने से सभी जीव जंतु और जातियों के बारे में आंकड़ा आ जाएगा इससे संविधान में योजना बनाने में काफी सहूलियत होगी।

हम लगातार संसद से लेकर विधानमंडल में भी उठाते रहे हैं लेकिन केंद्र की सरकार इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसलिए सरकार को जल्द से जल्द इस पर निर्णय लेनी होगी और जाति जनगणना करानी होगी।

हमारे नेता तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव जाति जनगणना के पक्ष में है और इसको लेकर केंद्र की सरकार के लोगों से मुलाकात भी करते रहे।