रहे हैं। घोषणा के साथ ही 30 करोड़ रुपये से अधिक के बजट को मंजूरी मिली है, जिससे टोल प्लाज़ा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीद और रखरखाव कार्यों को वित्तीय समर्थन मिलेगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और सड़क सुरक्षा में सुधार करना है।
बिहार में टोल वसूली
के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि कई साल पुरानी है। पिछले वर्ष राज्य में सड़क अवसंरचना के अभाव और रखरखाव की कमी के कारण दुर्घटनाओं में वृद्धि देखी गई थी। वहीं, राज्य की राजस्व कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त स्रोत खोजने की आवश्यकता थी। ऐसी ही परिस्थितियों में सरकार
ने टोल टैक्स को संभावित समाधान के रूप में चुना। इस दिशा में प्रारम्भिक सर्वेक्षण में 47 पुलों को प्रमुख मानते हुए चयन किया गया, जो 250 मीटर से अधिक लंबाई के हैं और राज्य के प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर स्थित हैं।
विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार, चयनित 55 स्टेट हाईवे
भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण माने गए हैं। इन सड़कों पर औसत दैनिक व्यावसायिक ट्रैफ़िक 12,000 टन से अधिक दर्ज किया गया है, जिससे टोल संग्रहण से राजस्व की संभावनाएँ अधिक हैं। इन हाईवे के माध्यम से कृषि उत्पादन, निर्माण सामग्री और औद्योगिक वस्तुओं का परिवहन होता है, जो
राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। सरकार ने इन मार्गों को “आर्थिक धारा” के रूप में वर्गीकृत किया है और टोल संग्रहण को इन्हें बेहतर बनाए रखने की दिशा में एक कदम माना है।
नई नीति के कार्यान्वयन की तैयारी तेज़ी से चल रही है। सरकार ने
एक विशेष टीम का गठन किया है, जिसमें राजमार्ग विभाग, वित्त विभाग और सार्वजनिक कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इस टीम को टोल प्लाज़ा की साइट चयन, निर्माण कार्य, इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम की खरीद और संचालन प्रोटोकॉल तय करने का कार्य सौंपा गया है। टीम ने
पहले ही 12 प्रमुख पुलों पर टोल प्लाज़ा की प्रारम्भिक डिजाइन तैयार कर ली है, जिसमें लेन‑लेन के अनुसार अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए जाएंगे। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन के लिए RFID टैग और कैमरा‑आधारित लाइसेंस प्लेट पहचान प्रणाली को अपनाने का प्रस्ताव है।
टोल प्लाज़ा निर्माण में लागत को
कम रखने के लिए सरकार ने ‘लो‑कोस्ट’ मॉडल अपनाने का फैसला किया है। इस मॉडल के तहत स्थानीय कारीगरों और सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जिससे रोजगार सृजन भी होगा। निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा, पहले 20 पुलों और 15 हाईवे पर कार्य आरंभ किया
जाएगा। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम के लिए सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) मॉडल पर चर्चा चल रही है, जिससे तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय बोझ दोनों को संतुलित किया जा सके। कार्यकाल में टोल दरों का निर्धारण भी राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा।
सरकार ने टोल संग्रहण के लिए विभिन्न
शुल्क संरचनाएँ तैयार की हैं। भारी वाहनों पर अधिक टोल, हल्की व्यावसायिक वाहनों पर मध्यम, और छोटे वाणिज्यिक वाहन पर न्यूनतम शुल्क तय किया गया है। टोल दरों का निर्धारण ट्रैफ़िक वॉल्यूम, पुल की संरचनात्मक स्थिति और रखरखाव लागत को ध्यान में रख कर किया गया है। इसके अलावा,
डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन और ई‑वॉलेट के माध्यम से रियायती दरें प्रदान की जाएँगी। यह प्रणाली टोल संग्रहण को पारदर्शी और तेज़ बनाने में मदद करेगी, जिससे यात्रियों के समय की बचत भी होगी।
नई व्यवस्था पर विभिन्न हितधारकों ने प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं। व्यापारी
संघों ने कहा कि टोल शुल्क से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे माल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। वहीं, रोड ट्रांसपोर्ट यूनियन ने टोल प्लाज़ा की सुरक्षा और प्रभावी संचालन की मांग की है, ताकि ट्रैफ़िक जाम न हो। कुछ स्थानीय निकायों ने कहा कि टोल संग्रहण से
मिलने वाले राजस्व को सीधे स्थानीय विकास कार्यों में उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे समुदाय को सीधे लाभ मिले। इन सभी प्रतिक्रियाओं को सुनने के बाद सरकार ने कहा कि टोल दरों का पुनर्मूल्यांकन नियमित अंतराल पर किया जाएगा।
राजनी
Updated: October 11, 2026
Bihar will start toll collection on 47 major bridges and 55 state highways, earmarking over ₹30 crore for toll plazas and electronic payment systems to boost revenue and road safety. The rollout, modeled on Rajasthan, will use low‑cost construction, RFID and camera‑based tracking, and a tiered fee structure for commercial vehicles.
By tapping the freight‑heavy arteries of Bihar, the state is not just raising revenue but also engineering a feedback loop that ties maintenance to usage—making every truck’s toll a contribution to the very road it relies on. This could curb the “price‑push” backlash if the government transparently channels
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