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भागलपुर स्मार्ट सिटी के टेंडर को लेकर हाईकार्ट सख्त सरकार से मॉगी रिपोर्ट

पटना हाई कोर्ट ने भागलपुर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत इंटग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेन्टर के संबंध में टेंडर के कागजात को पेश करने समेत अन्य मुद्दों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की।जस्टिस मोहित कुमार शाह ने इस मामले पर सुनवाई करते मेसर्स भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड, भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक/ सी ई ओ, टेंडर कमेटी और मेसर्स शपूरजी पलोनजी एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया है।

हाईकोर्ट ने टेलिकम्युनिकेशनस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि उक्त मामले में निविदा प्रक्रिया का अंतिम निष्कर्ष इस रिट याचिका के फलाफल पर निर्भर करेगा।

याचिका में 25 मार्च, 2021 के टेंडर नंबर – बी एस सी एल/ आई सी सी सी एस / 2024/48 से संबंधित सभी कागजातों को पेश करने को लेकर आदेश देने के लिए कोर्ट से आग्रह किया गया है।साथ ही याचिका में टेंडर देने के संबंध में टेंडर कमेटी द्वारा लिये गए निर्णय को रद्द करने का भी आग्रह किया गया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया को पक्षपात तरीके से मैनेज किया गया है और याचिकाकर्ता कंपनी को अयोग्य ठहराया गया है,जो संचार मंत्रालय के अधीन सेंट्रल गवर्नमेंट पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेज है।

दुर्गापूजा की छुट्टी के बाद आज से हाईकोर्ट में कामकाज शुरू

दुर्गापूजा की छुट्टी के बाद आज से पटना हाईकोर्ट में कामकाज शुरू हो रहा हैं।कल 7 जजों ने पटना हाईकोर्ट के जज के रूप मे शपथ ग्रहण किया था।

आज चीफ जस्टिस संजय करोल के साथ जस्टिस राजन गुप्ता डिवीजन बेंच में बैठ कर मामलों की सुनवाई करेंगे।जस्टिस अश्वनी कुमार सिंह के साथ जस्टिस ए एम बदर डिवीजन बेंच में क्रिमिनल मामलों पर सुनवाई करेंगे।जस्टिस विकास जैन के साथ जस्टिस पी बी बजनथ्री डिवीजन बेंच में मामलों की सुनवाई करेंगे।

छह नए जज जस्टिस नवनीत कुमार पांडे,जस्टिस सुनील कुमार पंवार,जस्टिस संदीप कुमार, जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह, जस्टिस सत्यव्रत वर्मा और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की सिंगल बेंच अग्रिम जमानत व अन्य जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
अभी तक पटना हाईकोर्ट में 19 जज कार्यरत थे,जबकि इन 7 जजों के आने के बाद कार्यरत जजों की संख्या 26 हो गई हैं।अभी पटना हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 हैं।

पटना हाईकोर्ट में सात जज लेगें शपथ

पटना हाई कोर्ट में सात जजों का शपथ ग्रहण 20 अक्टूबर,2021 को होगा । चीफ जस्टिस संजय करोल पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से स्थानांतरित जज जस्टिस राजन गुप्ता,कर्नाटक हाईकोर्ट से स्थानांतरित जज जस्टिस पी वी बजनथ्री और केरल हाईकोर्ट से स्थानांतरित जज जस्टिस ए एम बदर को 11 बजे दिन में शपथ दिलाएंगे।इसके साथ ही चार नवनियुक्त हुए जजों, संदीप कुमार, पूर्णेन्दु सिंह,सत्यव्रत वर्मा एवं राजेश कुमार वर्मा को पटना हाई कोर्ट के जज के रूप में शपथ दिलाएंगे।
दशहरा छुट्टी खत्म होने के बाद 21अक्तुबर,2021 को पटना हाई कोर्ट के खुलते ही ये सभी जज भी अपना कार्य प्रारंभ कर देंगे।

पटना हाई कोर्ट में पूजा अवकाश के ठीक पहले न्यायिक सेवा कोटे से दो जज पटना हाई कोर्ट में शपथ ग्रहण किये थे ।
इन चार इस सभी जजों के आने से पटना हाईकोर्ट में जजों की कुल संख्या 26 हो जाएगी,जबकि यहां जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 हैं।इस तरह अभी भी 27 जजों के पद रिक्त पड़े रहेंगे।

संदीप कुमार जज बनने के पटना हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट थे एवम कुछ वर्षों तक बिहार सरकार के वकील के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

पूर्णेंदु सिंह जज बनने से पहले वे पटना हाई कोर्ट में बिहार सरकार, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ,नेशनल इंश्योरेंस कंपनी व सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के वकील रहे।

सत्यव्रत वर्मा जज नियुक्त होने से पूर्व पटना हाई कोर्ट में झारखंड सरकार के रह चुके हैं ।

राजेश कुमार वर्मा जज बनने से पहले पटना हाई कोर्ट में बिहार एवं केंद्र सरकार दोनों के वकील रह चुके हैं।

हाईकोर्ट ने टीईटी एसटीईटी उतीर्ण नियोजित शिक्षकों को प्रधान शिक्षक की परीक्षा में शामिल होने कि दी अनुमति

टीईटी /एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षको को अंतरिम राहत देते हुए पटना हाईकोर्ट ने उन्हें शर्तो के साथ प्रधान शिक्षक की परीक्षा देने की अनुमति दे दी है | टीईटी /एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया |

याचिकाकर्ता संघ द्वारा प्रधान शिक्षक नियुक्ति नियमावली को भ्रामक बता कर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। साथ ही इस नियमावली में सुधार की मांग की है |

याचिकाकर्ता संघ ने प्रधान शिक्षक की नियुक्ति के लिए टीईटी को अनिवार्य करने की मांग करते हुए कहा है कि जब शिक्षक बनने के लिए भी टीईटी अनिवार्य है, तो देश के अन्य राज्यों की भांति प्रधान शिक्षक बनने के लिए भी टीईटी लागू करना चाहिए ।

मामले पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने टीईटी एसटीईटी उतीर्ण नियोजित शिक्षकों संघ को अंतरिम राहत देते हुए याचिकाकर्ताओं को प्रधान शिक्षक की परीक्षा देने की इस शर्त के साथ अनुमति दे दी है कि परीक्षा का परिणाम इस याचिका पर कोर्ट के अंतिम फैसले पर लागू होगा। याचिकाकर्ता कोर्ट के फैसले से पहले किसी भी अधिकार का दावा नहीं कर सकेंगे।

कोर्ट ने राज्य सरकार को।तीन सप्ताह मे हलफनामा दायर कर जवाब देने का निर्देश दिया है। इस मामले।पर 2 नवंबर,2021 को फिर सुनवाई की जाएगी।

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के ट्रिब्यूनल्स में खाली पड़े पदों को लेकर राज्य सरकार को जमकर लगायी फटकार

पटना हाई कोर्ट ने राज्य के ट्रिब्यूनल्स में खाली पड़े पदों के मामले पर सुनवाई करते हुए भारत सरकार से डी आर टी के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजय करोल खंडपीठ को राज्य में ट्रिब्यूनल्स में रिक्त पड़े पदों को भरे जाने के सम्बन्ध में महाधिवक्ता ने बताया कि दो सप्ताह में सभी रिक्त पदों को भर दिया जाएगा।

इस मामले में कोर्ट का सहयोग देने के लिए कोर्ट ने आशीष गिरि को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया हैं। आशीष गिरि ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की ओर से यह बताया गया है कि राज्य सरकार ट्रिब्यूनल्स में सभी खाली पड़े पदों को शीघ्र भर दिया जाएगा

इसके पूर्व 20 सितंबर, 2021 के कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि पब्लिक वर्क्स कॉट्रेक्ट डिस्प्यूट्स आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के बारे में बताया गया था कि इस ट्रिब्यूनल में चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया प्रगति पर है।
इसे सकारात्मक रूप से 30 सितंबर तक पूरा कर लिया जायेगा।

debt रिकवरी ट्रिब्यूनल (डी आर टी) के बारे में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल द्वारा जानकारी दी गई थी कि debt रिकवरी ट्रिब्यूनल के लिए पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति हेतु चयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
इसी प्रकार से कमर्शियल टैक्स ट्रिब्यूनल को लेकर ट्रिब्यूनल के अधिवक्ता द्वारा जानकारी दी गई थी कि इस ट्रिब्यूनल के लिए सरकार द्वारा आवश्यक रिक्त पदों को सूचित कर दिया गया है और अब ट्रिब्यूनल पूरी तौर से काम कर रहा है।

लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलेमेंट ऑथोरिटी, पटना, दरभंगा व भागलपुर के बारे में जानकारी दी गई थी कि हाई कोर्ट के स्तर पर चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मामला अभी राज्य सरकार के समक्ष लंबित है।
बिहार लैंड ट्रिब्यूनल, पटना के बारे में जानकारी दी गई थी कि नियुक्ति हेतु चयन की प्रक्रिया प्रगति पर है और सकारात्मक रूप से 30 सितंबर, 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा।

बिहार स्टेट स्कूल टीचर्स एंड एम्प्लाइज डिस्प्यूट्स रिड्रेसल रूल्स, 2015 के तहत गठित डिस्ट्रीक्ट अपीलेट अथॉरिटीज को लेकर जानकारी दी गई थी कि नियुक्ति हेतु चयन की प्रक्रिया प्रगति पर है और इसे अगले हफ्ते पूरा कर लिया जाएगा।
अब इस मामले पर आगे की सुनवाई आगामी 15 नवंबर को की जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी व निजी 27 लॉ कालेजों की संबद्धता के मामले की सुनवाई की।

पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी व निजी 27 लॉ कालेजों की संबद्धता के मामले की सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने कुणाल कौशल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को inspection रिपोर्ट तीन सप्ताह में पेश करने का निर्देश दिया।

साथ ही कोर्ट ने कॉउन्सिल को जिन कॉलेजो को पढ़ाई जारी करने की अनुमति दी है, वहां व्यवस्था सम्बन्ध व सुविधाओं के सम्बन्ध में हलफनामा दायर करने को कहा है।

पिछ्ली सुनवाई में कोर्ट ने सभी लॉ कालेजों को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष एक सप्ताह में निरीक्षण हेतु आवेदन देने का निर्देश दिया था। साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया इन कालेजों का वर्चुअल या फिजिकल निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निरीक्षण कमेटी का रिपोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया के संबंधित कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना था। यह कमेटी इनके रिपोर्ट पर निर्णय लेगी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया यह देखेगी कि विधि शिक्षा, 2008 के नियमों का पालन इन शिक्षण संस्थानों में किया जा रहा है या नहीं। इन लॉ कालेजों को पुनः चालू करने के लिए अस्थाई अनुमति देते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया किसी प्रकार के नियमों में ढील नहीं देगी।

पिछली सुनवाई में पटना हाईकोर्ट ने राज्य के सभी सरकारी व निजी लॉ कालेजों में नामांकन पर रोक लगा दिया था। इससे पूर्व चांसलर कार्यालय, राज्य सरकार, संबंधित विश्वविद्यालय व अन्य से जवाब तलब किया गया था।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट पेश किया था, जिसमें यह कहा गया था कि राज्य में जो लॉ कालेज हैं, उनमें समुचित व्यवस्था नहीं है। योग्य शिक्षकों व प्रशासनिक अधिकारियों की भी काफी कमी हैं। इसका असर लॉ की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

साथ ही साथ बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। याचिकाकर्ता के वकील दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि राज्य के किसी भी सरकारी व निजी लॉ कालेजों में रूल्स ऑफ लीगल एजुकेशन, 2008 के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है।

राज्य में सरकारी व निजी लॉ कालेज 27 हैं, लेकिन कहीं भी पढ़ाई की पूरी व्यवस्था नहीं होने के कारण लॉ की पढ़ाई का स्तर लगातार गिर ही जा रहा है।इस मामले पर 3 सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

पटना हाई कोर्ट सेवानिवृत जजों को मकान खाली करना पड़ सकता है हाईकोर्ट में याचिका दायर

पटना हाई कोर्ट के जजों के सेवानिवृत होने के कई महीनों बाद भी अपने सरकारी आवास खाली नहीं करने के मामलें में पटना हाई कोर्ट ने सुनवाई की। अधिवक्ता दिनेश कुमार की जनहित याचिका चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ मे सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल ने राज्य सरकार से निर्देश लेने के लिए 15 नवंबर,2021 तक की मोहलत ली।

अधिवक्ता दिनेश कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया गया है कि सेवानिवृत जज जस्टिस दिनेश कुमार सिंह, जस्टिस अंजना मिश्रा,जस्टिस पी सी जायसवाल और जस्टिस ए के त्रिवेदी कई माह पहले सेवा निवृत हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने अब तक सरकारी आवास खाली नहीं किया है।


उन्होंने बताया कि जस्टिस दिनेश कुमार सिंह अक्टूबर, 2020,जस्टिस पी सी जायसवाल दिसम्बर, 2019 और जस्टिस ए के त्रिवेदी अगस्त,2020ं में अपने पद से सेवानिवृत हो चुके हैं। पर वे अभी भी सरकारी आवास में बने हुए हैं।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि जजों के सेवानिवृत होने के एक महीने के भीतर उन्हें सरकारी आवास खाली करने का प्रावधान है।अगर वे एक महीने के बाद भी सरकारी आवास में रहते हैं,तो उन्हें आवास में रहने के लिए प्रावधान के अनुसार किराया देना होगा।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि अगर कोई राजनीतिज्ञ या नौकरशाह अपना सरकारी आवास खाली नहीं करते है, तो कोर्ट उन्हें सरकारी आवास खाली करने का आदेश देता है। लेकिन उनके द्वारा सेवानिवृत होने के बाद सरकारी आवास खाली नहीं किया जाना गंभीर मामला है।

उन्होंने कोर्ट से इस सम्बन्ध में उचित आदेश पारित करने का अनुरोध किया है, ताकि सेवानिवृत जज अपने सरकारी आवास को खाली कर दे।इस मामले पर 15 नवंबर, 2021 को फिर सुनवाई होगी।

अमीन बहाली में धांधली को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर

पटना हाईकोर्ट ने राज्य में अमीन के पद पर की जाने वाली नियुक्ति के लिये बनाये गए सूची को निरस्त करने के लिये दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने नारायण चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के साथ साथ राजस्व एवम भूमि सुधार बिभाग के प्रधान सचिव और बिहार संयुक्त तकनीकी परीक्षा सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जबाब देने के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राज कुमार राजेश ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने सूबे में अमीनों के 1767 पदों पर नियुक्ति के लिए 21 दिसंबर 2019 को एक विज्ञापन निकाला था। विज्ञापन के बाद इस पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारों ने अपना आवेदन जमा किया।

सरकार द्वारा नियुक्ति के हेतु आवेदनों की छंटनी कर एक सूची वेवसाईट पर डाली गई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि जो सूची वेवसाईट पर अपलोड किया गया, उसमे ज्यादातर वैसे लोगों का नाम शामिल था, जिनके पस इस पद पर नियुक्त होने के लिए निर्धारित तकनीकी योग्यता नही थी।

जिन लोगों के पास इस पद के लिये निर्धारित तकनीकी योग्यता था ,उनका नाम इस सूची में शामिल नही था।

याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि इस तरह के गैर तकनीकी लोगों की नियुक्ति करने के लिये सरकार ने पहले भी प्रयास किया था। इसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया था।।
इसके बाद भी फिर उसी प्रकार का लिस्ट सरकार बना रही है ,जो कि गलत और प्रावधानों का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि सरकार द्वारा बनाये गए सूची को निरस्त कर अमीन पद पर नियुक्ति के लिए तकनीकी योग्यता रखने वाले लोगों की सूची बनाने का निर्देश राज्य सरकार को दे।

उनकी योग्यता और सर्वे सेटलमेंट एक्ट में निर्धारित योग्यता के अनुसार बनाने का निर्देश सरकार को दिया जाय।इस मामले पर अगली सुनवाई फिर चार सप्ताह बाद होगी।

बिहार स्टेट फूड कमीशन के चेयरमैन की नियुक्ति पर उठा सवाल हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस

पटना हाई कोर्ट ने बिहार स्टेट फूड कमीशन के चेयरमैन की नियुक्ति मामले पर सुनवाई करते हुए कमीशन के चेयरमैन को नोटिस जारी किया है।चीफ जस्टिस संजय करोल की संजय करोल की खंडपीठ ने वेटरन्स फोरम फोर ट्रांसपेरेंसी इन पब्लिक लाइफ की जनहित याचिका पर सुनवाई की।कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए याचिका को स्वीकार कर लिया।

याचिका में राज्य सरकार के खाद्य व उपभोक्ता संरक्षण विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी के हस्ताक्षर से जारी उस अधिसूचना को रद्द करने का आग्रह किया गया है।इसके तहत ही राज्यपाल के आदेश से चेयरमैन के पद पर नियुक्त किया गया है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार का उक्त मामले में कहना है कि बिहार स्टेट फूड कमीशन रूल, 2014 के सेक्शन 7 के तहत की गई नियुक्ति नेशनल फूड कमीशन एक्ट, 2013 के सेक्शन 16 और बिहार स्टेट फ़ूड कमीशन रूल, 2014 के सेक्शन 7 की पूरी तरह से उपेक्षा करके किया गया है।

अधिवक्ता दीनू कुमार ने कहा कि इस प्रकार से नियुक्ति करना सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा दिये गए निर्णयों के विपरीत भी है। इसलिए चेयरमैन के पद पर की गई नियुक्ति गैरकानूनी, अनुचित और मनमाना है। चेयरमैन की नियुक्ति के लिए राज्यपाल के आदेश से राज्य सरकार के विशेष सचिव के हस्ताक्षर से 6 अप्रेल, 2017 को जारी अधिसूचना किया गया।

जबकि इसे अमल में लाने के लिए तीन सदस्यीय चयन कमेटी को बिहार स्टेट फ़ूड कमीशन के चेयरमैन मेम्बर की नियुक्ति हेतु अनुशंसा करनी थी। इस तरह ये नियुक्ति प्रावधान के विरूद्ध हैं।इस मामले पर आगे भी सुनवाई की जाएगी।

छपरा नगर निगम द्वारा आवंटित दुकानों को खाली करने के आदेश पर हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस

पटना हाई कोर्ट ने छपरा नगर निगम द्वारा आवंटित दुकानों के एग्रीमेंट को रद्द करने व दुकानों को खाली करने के निगम आयुक्त के आदेश को रद्द करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने छपरा के डी एम व निगम आयुक्त को नोटिस जारी किया। जिलाधिकारी और निगम के कमिश्नर को नोटिस जारी किया है।

साथ ही कोर्ट ने यथास्थिति बनाये रखने का आदेश देते हुए राज्य सरकार, निगम और जिलाधिकारी से जवाब तलब किया है। छपरा निगम क्षेत्र स्थित खनुआ ड्रेनेज को स्थानीय लोगों द्वारा ढकने का अनुरोध किया गया था।

उसके बाद ढके गए ड्रेनेज पर वर्ष 1997 में दुकान का निर्माण प्रारंभ किया गया, जो वर्ष 2000 में पूरा हुआ। याचिकाकर्ताओं को दुकान आवंटित किया गया और उनके साथ करार भी हुआ।

छपरा के नगरपालिका द्वारा द्वारा वर्ष 2011 में अखबार में यह समाचार प्रकाशित करवाया गया कि ड्रेनेज पर किये गए अवैध अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इसके बाद वर्ष 2011 में ही पटना हाई कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया। याचिका के निष्पादित होने की तिथि पांच दिन के भीतर दुकानदारों के अभ्यावेदन को निष्पादित करने का आदेश दिया।

वर्ष 2017 में फिर से दुकानों को खाली करने को लेकर समाचार प्रकाशित किया गया।
वर्ष 2017 में कुछ याचिकाकर्ताओं समेत अन्य लोगों ने पटना हाई कोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर किया, जोकि अभी भी लंबित है। याचिका के लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ताओं को परेशान नहीं किया गया।

वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि निगम आयुक्त के हस्ताक्षर से 25 अगस्त, 2021 को आवंटित किये गए दुकानों का करार को रद्द करते हुए नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर दुकानों खाली करने का आदेश दिया गया।
इसी मामले में कोर्ट ने आदेश पारित करते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी जवाब माँगा गया। इस मामले पर अब तीन सप्ताह बाद सुनवाई की जाएगी।

मुंगेर गोली कांड मामले की जांच एडीजी लां एंड आँर्डर विनय कुमार ही करेंगे।

पटना हाईकोर्ट ने मुंगेर में दुर्गा विसर्जन दौरान हुए गोलीकांड की सीआईडी जांच की मॉनिटरिंग कर रहे एडीजी के हुए स्थानांतरण को सशर्त मंजूरी दी है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद ने अमरनाथ पोद्दार की आपराधिक रिट याचिका में राज्य सरकार की तरफ से दायर अर्ज़ी को मंज़ूर करते हुए यह आदेश दिया ।

कोर्ट ने यह अनुमति राज्य सरकार के इस आश्वासन पर दिया है कि एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के पद पर रहते हुए भी , एडीजी विनय कुमार इस स्थिति में रहेंगे कि वह इस गोलीकांड के जांच की निगरानी को देखते रहें । इस बारे में वे सीआईडी के नए एडीजी से आवश्यक सलाह मशविरा कर सकते हैं ।

गौरतलब है कि 7 अप्रैल 2021 को राज्य सरकार की तरफ से एड्वोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट को यह आश्वासन दिया था कि बगैर हाई कोर्ट की अनुमति के विनय कुमार का बतौर एडीजी , सीआईडी के पद से कहीं भी स्थानांतरित नही किया जाएगा। चूंकि एडीजी विधि व्यवस्था केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए हैं और उस महत्वपूर्ण पद पर विनय कुमार का स्थानांतरण प्रशासनिक तौर पर आवश्यक था, इसलिए राज्य सरकार की तरफ से याचिका दायर की गई थी ।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के आश्वासन पर बाद इस स्थानांतरण की मंजूरी दी हैं।

हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेन्द्र कुमार मिश्रा के सेवा काल का कल होगा आखरी दिन

पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस राजेंद्र कुमार मिश्रा सेवानिवृत हो रहे हैं।इनके सेवानिवृत होने पर पटना हाईकोर्ट में विदाई समारोह आयोजित किया गया।इस अवसर पर चीफ जस्टिस व अन्य जज उपस्थित रहे।

इनके सेवानिवृत होने की बाद पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस समेत कुल जजों की अठारह रह जाएगी।पटना हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत पदों की संख्या 53 है,लेकिन अब तक इस संख्या तक जजों के पद नहीं भरे जा सके है।

बिहार के जनसंख्या के अनुपात में जजों की वर्तमान जजों की स्वीकृत संख्या 53 की जगह कम से कम 75 जज होने चाहिए थे,परंतु अभी वर्तमान स्वीकृत जजों की संख्या के एक तिहाई जज ही कार्यरत हैं।

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने अभी हाल में पटना हाईकोर्ट के जज जस्टिस ए अमानुल्लाह को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की अनुशंसा की हैं।दूसरी ओर दूसरे हाईकोर्ट से चार जजों के पटना हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की भी अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर दी है।

इनमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस राजन गुप्ता,कर्नाटक हाईकोर्ट से जस्टिस पी बी बजनथ्री,राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और केरल हाईकोर्ट से जस्टिस ए एम बदर के नाम शामिल हैं।

इनके अतिरिक्त पटना हाईकोर्ट के वकील कोटा से 6 वकीलों के नाम और बिहार न्यायिक सेवा से दो लोगों के नाम जज की बहाली के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अनुशंसित किया है।

वकील कोटा से पटना हाईकोर्ट के जज नियुक्त करने के लिए जिनकी अनुशंसा की गई है,उनके नाम खातीम रजा, संदीप कुमार,अंशुमान पांडे,पूर्णेंदु कुमार सिंह,सत्यव्रत वर्मा और राजेश कुमार वर्मा है।न्यायिक सेवा से पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल नवनीत कुमार पांडे और सुनील कुमार पंवार के नाम की अनुशंसा की गई है।

अगर ये सभी जज के रूप में अपना योगदान दे देते हैं, तो जजों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ेगी,लेकिन फिर भी जजों के स्वीकृत पदों की संख्या के लगभग आधे पद रिक्त पड़े रहेंगे।

गंगा नदी के कारण विस्थापित महादलित परिवारों के पुनर्वास को लेकर हाईकोर्ट ने दिया आदेश

पटना हाईकोर्ट ने पटना के पानापुर दियारा की ज़मीन गंगा के बढ़े जलस्तर कारण बेघर हुए महादलित परिवारों का जल्द पुनर्वास कराने का राज्य सरकार को प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया । रंजीत राम की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

कोर्ट ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते से हुए आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव व पटना के जिलाधिकारी को संयुक्त बैठक करने का निर्देश दिया।

गंगा नदी के बाढ़ से विस्थापित हुए 159 महादलित परिवारों के प्रतिनिधियों से बातचीत कर उन्हें प्रति परिवार चार डिसमल भूमि पुनर्वास हेतु मुहैय्या कराने का निर्देश दिया है ।

याचिकाकर्ता के वकील डॉ रंजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि प्राकृतिक आपदा से विस्थापित या बेघर हुए महादलितों के पुनर्वास हेतु राज्य सरकार खुद की बनाई नीति पर अमल नही कर रही है । राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वास्त किया गया कि इस मामले पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

पटना के मछुआटोली कूड़ा डपिंग यार्ड को हटाने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर।

पटना हाई कोर्ट ने पटना के मछुआटोली स्थित घनी आबादी वाले क्षेत्र में कूड़ा (गारबेज ट्रांसफर सेंटर व गारबेज प्रोसेसिंग) नष्ट के कार्यों को अन्य स्थान पर शिफ्ट करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पटना नगर निगम से जवाबतलब किया। हलफनामा दाखिल करने को कहा है। यह जनहित याचिका मोहन प्रसाद व अन्य द्वारा दायर की गई।

इस जनहित याचिका में स्थानीय लोगों के असुविधाओं व स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मद्देनजर क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। ये जनहित याचिका दायर करने वाले मछुआटोली क्षेत्र के निवासी है।
इस याचिका में कहा गया है कि उक्त जमीन पर मिडिल स्कूल चल रहा था। शेष बचे जगह पर स्थानीय लोग उस खुले जगह का इस्तेमाल घूमने टहलने के लिए करते थे।

वहाँ बांकीपुर अंचल मयूनिसिपल ऑफिस भी था, जिसे बाद में कही और स्थानांतरित कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने इस स्थान को चिल्ड्रेन पार्क के तौर पर विकसित करने का आग्रह संबंधित अधिकारियों से किया।

अंततः अधिकारियों ने उक्त जमीन पर मॉल बनाने का निर्णय लिया। निर्माण भी शुरू हुआ, लेकिन पूरा नहीं किया जा सका। जिसके परिणामस्वरूप आसामाजिक तत्वों का उक्त स्थान पर प्रवेश हुआ।

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से मॉल का निर्माण करने का अनुरोध किया, ताकि क्षेत्र साफ सुथरा रह सके। लेकिन, कुछ भी नही हो सका और अभी उस स्थान पर कूड़ा केंद्र और व्यवसाय के लिए खाद उत्पादन यूनिट की स्थापना कर दी गई है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजित कुमार ने बताया कि इस प्रकार का कार्य मयूनिसिपल लॉ, पर्यावरण लॉ व जनसंख्या से जुड़े कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है। इतना ही नहीं भारत के संविधान में वर्णित शालीनता के साथ रहने के अधिकार का भी उल्लंघन है। इस मामले पर आगे सुनवाई की जाएगी।

हर्ष फायरिंग पर लग सकती है रोक, हाईकोर्ट ने सरकार से माँगी रिपोर्ट ।

पटना हाई कोर्ट ने शादी।समारोहों में लाइसेंसी/बिना लाइसेंसी बंदूको से अंधाधुध फायरिंग कर मानव जीवन को खतरे में डालने पर दायर एक लोकहित याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राजीव रंजन सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 3 सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है |

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि हर साल कई सारे लोग शादी समारोहों में लाइसेंसी/बिना लाइसेंसी बंदूको से हुए अंधाधुध फायरिंग का शिकार हो कर जान से हाथ धोते हैं |

याचिकाकर्ता ने वैशाली जिला स्थित चंडी धनुष के ऐसे ही वारदात का हवाला देते हुए विवाह कार्यक्रमों में हवाई फायरिंग पर रोक लगाये जाने पर याचिका दायर की थी |

इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह के अन्दर जवाब देने के लिए कहा है | मामले पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी |

कदमकुआं वेंडिंग जोन के निर्माण को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लगायी फटकार

पटना हाईकोर्ट ने कदमकुआं वेंडिंग जोन के निर्माण बंद होने के मामले पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को बताने को कहा कि कब तक टेंडर निकालने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। डा आशीष कुमार सिन्हा की जनहित याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को ये बताने कहा कि वेडिंग जोन निर्माण कब तक पूरा हो जाएगा।

कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जानना चाहा था कि राज्य के नगर विकास और आवास विभाग ने इस योजना को कैसे रोक दिया।कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नगर निगम स्वायत्त संस्था हैं,जिसे संवैधानिक दर्जा प्राप्त है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को बताने को कहा कि कदमकुआं वेंडिंग जोन के लिए फिर कब टेंडर जारी किया जाएगा और ये कब तक पूरा हो जाएगा।

पटना नगर निगम ने कदमकुआं वेंडिंग जोन के निर्माण रोके जाने के मामले में एक हलफनामा दायर किया।इस हलफनामा में यह बताया गया कि नगर निगम को दो करोड़ रुपए से अधिक का टेंडर जारी करने का अधिकार नहीं है।

साथ ही इस तरह के निर्माण के लिए बुडको से सहमति लेना आवश्यक है।कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि इन सरकारी विभागों ने निगम के टेंडर को कैसे रद्द कर दिया,जबकि नगर निगम संवैधानिक दर्जा प्राप्त स्वायत संस्था हैं।

साथ ही नगर निगम को बुडको की सहमति क्यों लेने की जरूरत है।हाईकोर्ट ने जानना चाहा कि जब नगर निगम स्वायत्त संस्था हैं और उसकी वित्तीय स्वतंत्रता हैं,इन सरकारी विभागों को टेंडर रद्द करने का क्या अधिकार हैं।

अधिवक्ता मयूरी ने याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया कि इन दोनों सरकारी विभागों न सिर्फ कदमकुआं वेंडिंग जोन परियोजना को रद्द किया,बल्कि आठ अन्य परियोजनाओं को भी रद्द किया है।
इस मामले अगली सुनवाई फिर दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अपना अधिवक्ता बदला

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अब पटना हाई कोर्ट का पक्ष सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गौरव अग्रवाल रखेंगे। यह नियुक्ति पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के आदेश के बाद की गई है। इनकी नियुक्ति मेसर्स पारेख एंड कंपनी के स्थान पर की गई है।

श्री अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पटना हाई कोर्ट से जुड़े सभी मुकदमों का पक्ष रखेंगे। यह सूचना पटना हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा दी गई है।

श्री अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड भी हैं।

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से कानूनी शिक्षा प्राप्त करने के बाद गौरव अग्रवाल ने 1999 से सुप्रीम कोर्ट में वकालत करना शुरू किया । वे भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मिलन बैनर्जी के भी सहयोगी वकील रहे हैं।

कोरोना के बाद पहली बार 27 सितंबर से शुरु होगा फिजिकल कोर्ट

पटना हाई कोर्ट में 27 सितंबर से पहले की तरह सामान्य फिजिकल अदालती कामकाज शुरू होगी। पटना हाई कोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघों के समन्वय समिति के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने ये जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि पटना हाई कोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघों के समन्वय समिति की पूरी टीम हाई कोर्ट के सुरक्षा समिति से मिला ,जिसमें जस्टिस ए अमानुल्लाह,जस्टिस आशुतोष कुमार, जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद व जस्टिस अरविंद श्रीवास्तव शामिल रहे।

सुरक्षा समिति के साथ बैठक के बाद चीफ जस्टिस संजय करोल ने घोषणा किया कि आगामी 27 सितंबर से फिजिकल कोर्ट शुरू होगा। पूरे मामले में चीफ जस्टिस का भी सकारात्मक रुख रहा।

यह भी तय हुआ है कि कोर्ट के पांच दिनों के कार्य दिवस में चार दिन फिजिकल और एक दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से वर्चुअल कोर्ट चलेगा।

कोर्ट में प्रवेश के लिये हाई कोर्ट परिसर का तीन मुख्य गेट को खोला जाएगा। वकील संघों को भी दस – दस वकिलों के नाम सुझाने को कहा गया है, जो प्रवेश द्वार पर वकीलों की पहचान करेंगे, ताकि सभी लोग नियंत्रित रहे।

यह भी तय हुआ है कि संक्रमण फैलने की स्थिति में चीफ जस्टिस उचित कार्रवाई करेंगे। उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व हाई कोर्ट के एडवोकेट्स एसोसिएशन, लॉयर्स एसोसिएशन और बार एसोसिएशन के अध्यक्षों ने पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से मिलकर हाई कोर्ट में फिजिकल कामकाज शुरू करने का अनुरोध किया था। इसके बाद चीफ जस्टिस ने उक्त मामले में इन्हें हाई कोर्ट की सुरक्षा कमेटी से मिलने को कहा है।

अधिवक्ता संघों की समन्वय समिति में एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सह समन्वय समिति के अध्यक्ष वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा, लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, अजय कुमार ठाकुर, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह व् अन्य सदस्य शामिल थे।

हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज को सरकारी आवास खाली कराने को लेकर जनहित याचिका दायर

पटना हाई कोर्ट के जजों के सेवानिवृत होने के कई महीनों बाद भी अपने सरकारी आवास खाली नहीं करने के मामलें में पटना हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।अधिवक्ता दिनेश कुमार सिंह ने ये जनहित याचिका दायर की हैं।

इस जनहित याचिका में यह बताया गया है कि सेवानिवृत जज जस्टिस दिनेश कुमार सिंह, जस्टिस अंजना मिश्रा,जस्टिस पी सी जायसवाल और जस्टिस ए के त्रिवेदी कई माह पहले सेवा निवृत हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने अब तक सरकारी आवास खाली नहीं किया है।

याचिकाकर्ता दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि जस्टिस दिनेश कुमार सिंह अक्टूबर, 2020,जस्टिस पी सी जायसवाल दिसम्बर, 2019 और जस्टिस ए के त्रिवेदी अगस्त,2020ं में अपने पद से सेवानिवृत हो चुके हैं, लेकिन वे अभी सरकारी आवास में बने हुए हैं।

उन्होंने अपनी याचिका में बताया है कि जजों के सेवानिवृत होने के एक महीने के भीतर उन्हें सरकारी आवास खाली करने का प्रावधान है।अगर वे एक महीने के बाद भी सरकारी आवास में रहते हैं,तो उन्हें आवास में रहने के लिए प्रावधान के अनुसार किराया देना होगा।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि अगर कोई राजनीतिज्ञ या नौकरशाह अपना सरकारी आवास खाली नहीं करते है, तो कोर्ट उन्हें सरकारी आवास खाली करने का आदेश देता है, लेकिन उनके द्वारा सेवानिवृत होने के बाद सरकारी आवास खाली नहीं किया जाना दुखद है।

उन्होंने कोर्ट से इस सम्बन्ध में उचित आदेश पारित करने का अनुरोध किया है, ताकि सेवानिवृत जज अपने सरकारी आवास को खाली कर दे।

हजारों वकील के बैंक खाते का डाटा हुआ लीक मचा अफरातफरी।

पटना हाईकोर्ट कैंपस स्थित एस बी आई ब्रांच से कथित तौर पर वकीलों के बैंक खातों की डिटेल्स लीक होने की आशंका के वकीलों मैं अफरातफरी मच गई। आज पटना हाई कोर्ट के कई वकीलों ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये शिकायत की गई कि उन्हें अनजान नंबर से कॉल आया।

वकीलों ने बताया कि पटना हाई कोर्ट कैम्पस स्थित सबीआई शाखा में ऑनलाइन केवाईसी कराने को कहा गया । इस फोन पर उन्हें यह भी चेतावनी दी गयी कि अगर वकील लोग फोन के जरिये केवाईसी की जानकारी (रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर , आधार नम्बर व पैन नम्बर ) नही देंगे, तो तत्काल प्रभाव से उनका एकाउंट को ब्लॉक हो जाएगा ।

वकीलों ने इसे साइबर क्राइम का दर्जा देते हुए प्रशासन से इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने की गुहार लगाई है | हाई कोर्ट के एक अधिवक्ता पतंजलि ऋषि ने इस मामलें साइबर थाने में एक शिकायत भी दर्ज किया है ।

कई अधिवक्ताओं ने संदेह जाहिर किया है कि यह काम बैंक कर्मियों की मिलीभगत से हो रहा है | अधिकांश वकीलों को ऐसे कॉल पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच मिले ।

उनमे से अधिकांश वकीलों का खाता हाई कोर्ट ब्रांच में तो कुछ वकीलों का खाता एसबीआई की अन्य शाखा में है ।