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पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ ने ट्रंप को बताया शांति का मध्यस्थ, नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की जताई उम्मीद

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरिफ ने हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिये समर्थन दिया, यह दावा करते हुए कि उनके हस्तक्षेप ने भारत‑पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष‑विराम को संभव बनाया।
शरिफ ने यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मंच पर की, जहाँ उन्होंने ट्रम्प को शांति के मध्यस्थ का श्रेय दिया और कहा कि उनके कूटनीतिक दबाव ने दोनों परमाणु‑सशस्त्र देशों के बीच तनाव को घटाने में अहम भूमिका निभाई। इस बयान ने विश्व स्तर पर ट्रम्प के स्वयं के दावों को फिर से उजागर किया, जो पहले भी विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सामने आए थे।पिछले कुछ महीनों में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर सशस्त्र टकराव की संभावना बढ़ गई थी, जब दोनों पक्षों ने सीमा पर हथियारबंद सैनिकों की तैनाती की थी और हवाई हमलों के संकेत दिखे थे। इस तनाव की पृष्ठभूमि में कश्मीर मुद्दा, जल संसाधन विवाद और राजनीतिक रैलीज प्रमुख कारण माने जा रहे थे। भारत ने पहले ही कश्मीरी जल संसाधन पर अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराया था, जबकि पाकिस्तान ने इसे भारतीय आक्रमण का एक हिस्सा बताया। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों ने कई बार सीमावर्ती क्षेत्रों में गोलीबारी की सूचना दी, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ी।

संधि‑विराम की प्रक्रिया में कई कूटनीतिक प्रयास हुए, जिनमें संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और दोनो देशों के सैन्य कमांडरों के बीच सीधी बातचीत शामिल थी। इस दौरान, कई पश्चिमी देशों ने दोनों पक्षों से शांति की पुकार की, परंतु कोई भी ठोस मध्यस्थता नहीं की गई। इस माहौल में, ट्रम्प ने कई अंतरराष्ट्रीय टॉक शो और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने भारत‑पाकिस्तान के बीच समझौते को प्रेरित किया, और दोनों देशों के प्रमुखों को संवाद की दिशा में ले जाने का प्रयास किया।

हालांकि ट्रम्प के दावे कई बार विवादास्पद रहे हैं, शरिफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका सकारात्मक प्रभाव इस समझौते के मूल में था। शरिफ ने यह भी कहा कि ट्रम्प के माध्यम से दोनो देशों को संयुक्त शांति‑स्थिरता की दिशा में धकेलना संभव हुआ, और इस प्रक्रिया में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शांति को सुदृढ़ करने का इरादा दर्शाया। इस टिप्पणी के बाद, पाकिस्तान की सरकारी प्रवक्ता कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिये समर्थन देने का बयान जारी किया।

इसी बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार द्विपक्षीय संवाद को प्राथमिकता देता है और किसी भी तृतीय पक्ष को मध्यस्थ के रूप में मान्यता नहीं देता। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि भारत‑पाकिस्तान के संबंधों में कोई भी शांति प्रक्रिया भारत की संप्रभुता और सुरक्षा के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए, और यह स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी बाहरी दबाव के बिना समझौते को स्वेच्छा से अपनाया।

दूसरी ओर, अमेरिकी विदेश विभाग ने इस मुद्दे पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की, परन्तु अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों ही शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार, अमेरिकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर ट्रम्प के व्यक्तिगत दावों को समर्थन नहीं दिया, जबकि सार्वजनिक रूप से शांति के संदेश को दोहराया।

ट्रम्प के समर्थकों ने इस समर्थन को एक बड़े राजनीतिक पहलू के रूप में देखा, जहाँ पूर्व राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय सम्मान के माध्यम से अपनी विदेश नीति की वैधता को पुनः स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। कई अमेरिकी राजनयिक विश्लेषकों ने कहा कि ट्रम्प ने कभी भी औपचारिक तौर पर इस समझौते में मध्यस्थता नहीं की, बल्कि वह अपने निजी प्रभाव का उपयोग कर रहे हैं।

पाकिस्तानी सर्किट में, शरिफ के इस बयान को कुछ राजनीतिक दलों ने सराहा, जबकि अन्य ने इसे राष्ट्रवादी रुख के रूप में आलोचना की। पाकिस्तान की एक प्रमुख विपक्षी पार्टी ने कहा कि शरिफ को अपने देश के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि विदेशियों को सम्मान दिलाने के लिए। इस बीच, पाकिस्तान के कुछ रणनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि ट्रम्प के इस प्रकार के दावे पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रयोजनों को कमजोर कर सकते हैं, यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे असत्यापित मानता है।

इसी तरह, भारतीय राजनीति में भी इस घटना ने विभिन्न प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कीं। कई राष्ट्रीय राजनेता ने ट्रम्प के दावों को बिना सबूत के कहा और इसे भारत की कूटनीतिक शक्ति के लिए एक चुनौती के रूप में देखा। वहीं, कुछ स्वतंत्र टिप्पणीकारों ने कहा कि इस तरह के दावे अंतरराष्ट्रीय शांति प्रक्रियाओं को वैधता की कमी की ओर धकेल सकते हैं, जिससे भविष्य में अधिक जटिल मध्यस्थता की आवश्यकता बढ़ेगी।

Updated: October 9, 2026


Pakistan’s prime minister lauded former US President Donald Trump, claiming his diplomatic push helped broker a cease‑fire with India and urging the Nobel Committee to honor him, while New Delhi dismissed the claim and insisted any peace talks remain wholly its own. The endorsement sparked mixed reactions in both countries, with some seeing it as political posturing and others warning it could undermine genuine diplomatic efforts.

भारत ने नेपाल में बाढ़‑ग्रस्त लोगों को 10 टन मानवीय सहायता भेजी, वायुसेना के C‑130J विमान से रवाना की गई पहली खेप काठमांडू में पहुँची।

नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्य तेज़ कर दिया है। भारतीय वायुसेना के C‑130J परिवहन विमान ने काठमांडू के हवाई अड्डे से 10 टन मानवीय सहायता सामग्री की पहली खेप रवाना की, जिसमें बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक वस्तुएँ और दवाइयाँ शामिल हैं। यह कदम दो देशों के पारस्परिक सहयोग के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है, जहाँ भारत ने आपदा के समय तुरंत मदद की पेशकश की है।

बाढ़ का प्रकोप पिछले दो हफ्तों में नेपाल के कई जिलों में धारा‑भरी नदियों के जल स्तर में अचानक वृद्धि के कारण हुआ। हिमालयी पहाड़ों से बहते पिघले हुए हिम के साथ भारी वर्षा ने जलस्रोतों को अतिप्रवाहित कर दिया, जिससे काली नदी, नारायणी और बर्दिया जैसे प्रमुख नदियों के किनारे बस्ती‑बिजली कट गई। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, अब तक 2,500 से अधिक लोग बाढ़ में फँसे और 150 से अधिक घर बर्बाद हो चुके हैं।

नेपाल सरकार ने आपदा प्रबंधन विभाग को आपातकालीन स्थिति घोषित कर दिया, और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया टीम को तैनात कर दिया। विभिन्न प्रदेशों में राहत शिविर स्थापित किए गए, जहाँ आश्रित लोगों को तात्कालिक भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में निकासी कार्य तेज़ी से करने के लिए सेना, पुलिस और स्वयंसेवकों को मिलाकर एक संयुक्त दल बनाया।

भारत ने इस आपदा के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए, विदेश मंत्रालय के माध्यम से सहायता का संकल्प प्रकाशित किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने पहले ही 10 टन मानवीय सामग्री की पहली खेप भेजी है, जिसमें टेंट, कंबल, सैंटिन बिस्तर, साफ़ पानी के कंटेनर और आवश्यक दवाइयाँ शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आगे और अधिक सामग्री और विशेषज्ञ टीमों को बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में भेजने की तैयारी चल रही है।

भेजे गए सामग्री में विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए आवश्यक पोषण सप्लीमेंट, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाइयाँ, साथ ही प्राथमिक चिकित्सा किटें भी शामिल हैं। इस सामग्री का उद्देश्य तत्काल स्वास्थ्य जोखिम को कम करना और पीड़ित परिवारों को बुनियादी जीवन‑स्तर प्रदान करना है। भारतीय वायुसेना के प्रवक्ता ने बताया कि C‑130J विमान ने सुरक्षित रूप से काठमांडू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर कर, स्थानीय अधिकारियों को सौंप दिया।

नेपाल के प्रमुख सरकारी अधिकारी, आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक ने भारत की मदद के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सामग्री बाढ़‑पीड़ित लोगों को शीघ्र राहत प्रदान करेगी और बचाव कार्य में सहयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत के साथ नियमित आपदा‑प्रतिक्रिया अभ्यास ने इस सहयोग को और प्रभावी बना दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ा है।

भारतीय राजदूत, नेपाल में स्थित दूतावास ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि भारत ने पहले भी नेपाल की कई आपदाओं में सहायता प्रदान की है, जैसे 2015 का भूकंप और 2021 की बाढ़। इस बार भी, भारत ने तुरंत सहायता भेज कर, दो देशों के बीच आपदा‑प्रबंधन सहयोग को नई दिशा दी है। दूतावास ने यह संकेत दिया कि भविष्य में भी समान स्थितियों में सहयोग जारी रहेगा।

नेपाली जनसंख्या के बीच इस सहायता को लेकर आशावाद का माहौल बन गया है। कई बाढ़‑पीड़ित परिवारों ने बताया कि भारत द्वारा भेजी गई सामग्री ने उनके जीवन को थोड़ा स्थिर किया है। स्थानीय स्वयंसेवक और NGOs ने भी इस मदद को सराहा, और कहा कि यह समय पर उपलब्ध सहायता से बचाव कार्य में गति आई है।

विपरीत रूप में, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल त्वरित सामग्री नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बाढ़‑ग्रस्त क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा, जल निकासी प्रणाली और स्वास्थ्य सुविधाओं को पुनः निर्मित करने के लिए बहुप्रमुख योजना बनानी चाहिए। इसके बिना भविष्य में समान आपदाओं से निपटना कठिन रहेगा।

राजनीतिक दृष्टिकोण से यह सहयोग दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करता है। भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि मानवीय सहायता भारत‑नेपाल मित्रता का अभिन्न हिस्सा है और इस तरह के कदम दोनों राष्ट्रों के बीच विश्वास को गहरा करते हैं। नेपाल की सरकार ने भी इस सहायता को अंतरराष्ट्रीय सहयोग

Updated: August 27, 2026


India’s air force has dispatched 10 tonnes of emergency aid to Kathmandu after Nepal’s sudden floods, delivering tents, blankets, medicines and water to the affected population. The rapid response underscores the long‑standing disaster‑management partnership between the two Himalayan neighbours and bolsters confidence in their bilateral ties.

The Indian Air Force’s rapid delivery of 10 tonnes of humanitarian supplies to Nepal reduces immediate food, water and medical shortages in flood‑affected areas.
This assistance strengthens regional disaster‑management cooperation and supports ongoing rescue and recovery efforts.