ध्रुव रथी, जो यूरोपीय संघ के देश में रहने वाले भारतीय मूल के यूट्यूबर्स में से एक हैं, अपने चैनल पर अक्सर भारत की सरकार की नीतियों की आलोचना करते आए हैं। उनका जन्म भारत में हुआ था, परन्तु उन्होंने उच्च शिक्षा के बाद यूरोप में स्थायी निवास स्थापित किया, जहाँ वे अपने वाणिज्यिक और शैक्षिक गतिविधियों को जारी रखते हैं। रथी का वीज़ा प्रकार, अवधि तथा शर्तें सार्वजनिक नहीं हैं, परन्तु उनके अनुयायियों के अनुसार वह यूरोपीय शैक्षिक व कार्य वीज़ा पर रह रहे हैं।
भास्कर राव ने अपने आवेदन में कहा है कि रथी की नागरिकता एवं वीज़ा की वैधता पर संदेह होने पर, गृह मंत्रालय को तुरंत जांच शुरू करनी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रथी के वीडियो में प्रस्तुत तथ्यों की सत्यता पर प्रश्न उठते हैं, जिससे भारतीय जनता के बीच असहजता उत्पन्न हो रही है। राव ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसी जांच से न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा होगी, बल्कि सामाजिक सुसंस्कृति को भी बचाया जा सकेगा।
पृष्ठभूमि में देखा जाए तो भारत में विदेशी नागरिकता या द्वि-नागरिकता रखने वाले व्यक्तियों की सार्वजनिक रूप से राजनैतिक या सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी करने को लेकर कई बार विवाद उत्पन्न हुए हैं। 2020 में एक समान मामले में एक विदेश में रह रहे भारतीय ब्लॉगर पर आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी, लेकिन उस मामले में कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी। इसी प्रकार, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर राष्ट्रीय मुद्दों पर टिप्पणी करने वाले कई प्रवासी भारतीयों को सरकार द्वारा निगरानी का सामना करना पड़ा है।
ध्रुव रथी ने पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक नीतियों, जलवायु परिवर्तन, और सामाजिक विविधता से जुड़ी कई वीडियो प्रकाशित की हैं। उनके कई वीडियो में भारत के आर्थिक विकास के आंकड़ों को कम करके दिखाया गया है और सरकारी योजनाओं को असफल बताया गया है। रथी के अनुयायी मानते हैं कि वह स्वतंत्र विचारधारा के समर्थक हैं, जबकि कुछ आलोचकों का कहना है कि उनका दृष्टिकोण अक्सर देशभक्ति के प्रति अनादरपूर्ण होता है।
गृह सचिव को भेजे गये आवेदन में राव ने उल्लेख किया कि रथी के वीडियो में कई बार तथ्यात्मक त्रुटियां पाई गई हैं, जिससे जनता में भ्रम उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रथी ने कभी भारत की राष्ट्रीय पहचान या संविधान के सिद्धांतों का सम्मान नहीं दिखाया है, और इस प्रकार उनकी उपस्थिति भारत के बाहर से राष्ट्रीय मुद्दों पर प्रभाव डाल रही है। राव ने यह स्पष्ट किया कि जांच का उद्देश्य रथी की वैधता की पुष्टि करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा है।
रथी के समर्थन करने वाले कई अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस आवेदन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ एक कदम माना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में बहुराष्ट्रीय नागरिकों को अपने विचार साझा करने का अधिकार है और किसी भी सरकारी जांच को राजनीतिक दबाव के रूप में देखा जाना चाहिए। इन संगठनों के प्रवक्ता ने कहा कि यदि जांच में कोई अनैतिक या अवैध गतिविधि सामने आती है, तो ही उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
विपरीत रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने इस मामले को राजनीतिक दुरुपयोग कहा और राव के कदम को ध्रुवीकरण की ओर ले जाने वाली राजनीति कहा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामले में सरकार को पहले सार्वजनिक संवाद को बढ़ावा देना चाहिए, न कि व्यक्तिगत अभियोग को। कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि ध्रुव रथी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए और इस प्रकार के कदम से लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुँचता है।
भास्कर राव के पक्ष में कुछ राष्ट्रीयवादी समूहों ने उनका समर्थन किया और कहा कि विदेशी नागरिकता वाले व्यक्तियों को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि रथी की नागरिकता या वीज़ा में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो कड़ी सजा अनिवार्य है। इन समूहों ने सरकार से तेज़ कार्यवाही की मांग की और सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन जुटाया।
इस आवेदन के बाद भारत के आर्थिक विशेषज्ञों ने कहा कि यदि रथी जैसे प्रवासी भारतीयों की आवाज़ को दबाने की नीति अपनाई जाती है, तो भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विदेशी निवेशकों
Updated: October 11, 2026
The request prompts a formal review of a foreign‑resident Indian influencer’s citizenship and visa status, linking his online commentary to national‑security considerations.
The outcome could set a precedent for how Indian authorities vet overseas citizens commenting on domestic policy.
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