Press "Enter" to skip to content

बिहार‑बंगाल सीमा में पाकिस्तानी फ़ेयरनेस क्रीमों की बिक्री में 35 % वृद्धि, स्वास्थ्य सुरक्षा पर चिंता बढ़ी

बिहार‑बंगाल की सीमा क्षेत्रों में पाकिस्तानी निर्मित फ़ेयरनेस क्रीमों की बिक्री में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है, जिससे स्थानीय उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चिंता का माहौल बना है। व्यापारियों के अनुसार, पिछले छह महीनों में इन क्रीमों की मांग में 35 % की बढ़ोतरी हुई है, जबकि आयात डेटा से पता चलता है कि इस अवधि में सीमा पार लदान की मात्रा लगभग दो गुना हो गई है।
इस प्रवृत्ति के कारण भारतीय उपभोक्ता वस्तु बाजार (स्मॉल‑कैप) में नई प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हो रही है, साथ ही स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रश्न भी उठ रहे हैं।पिछले दो दशकों में भारतीय सौंदर्य प्रसाधन बाजार में रंग‑रोगन और फ़ेयरनेस उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती रही है। इस माँग को पूरा करने के लिए कई घरेलू कंपनियों ने अपने उत्पाद पोर्टफ़ोलियो में क्रीम, लाइटनिंग सीरम और टिंटेड मोइस्चराइज़र शामिल किए हैं। हालांकि, किफ़ायती मूल्य और आकर्षक पैकेजिंग के कारण सीमा क्षेत्रों में पाकिस्तान‑निर्मित

क्रीमों को विशेष लाभ मिला है। इन क्रीमों का मूल उत्पादन पाकिस्तान के सर्दार नगर में होता है, जहाँ कच्चे माल की लागत भारतीय स्तर से 20 % कम है, जिससे विक्रेताओं को मार्जिन बढ़ाने में सहायता मिलती है।

पार्श्वभूमि में देखा जाए तो 2022 में भारत‑पाकिस्तान के बीच सीमा शुल्क नियमों में कुछ ढील दी गई थी, जिससे छोटे‑छोटे व्यापारियों को सीमा पार सामान ले जाना आसान हो गया। साथ ही, डिजिटल भुगतान और मोबाइल ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म की बढ़ती पहुँच ने अनौपचारिक बाजार को व्यवस्थित किया, जिससे उपभोक्ताओं को सीधे आयातकों से क्रीम खरीदने का विकल्प मिला। इस प्रकार, किफ़ायती मूल्य,

आसान उपलब्धता और सामाजिक सौंदर्य मानकों के संगम ने इस उत्पाद वर्ग को तेज़ी से लोकप्रिय बना दिया है।

हाल ही में, बक्सर, पटना और कोलकाता के निकटवर्ती कस्बों में कई छोटे खुदरा दुकानों ने पाकिस्तानी फ़ेयरनेस क्रीमों को प्रमुख प्रोडक्ट के रूप में प्रदर्शित किया। इन दुकानों में बिक्री रिकॉर्ड

दर्शाते हैं कि सप्ताह के अंत में क्रीम की बिक्री में 40 % तक की बढ़ोतरी देखी गई। कुछ व्यापारियों ने यह भी बताया कि ग्राहकों ने विशेषकर महिलाओं से त्वचा की रंगत में सुधार और उत्पाद का हल्का महक को प्रमुख आकर्षण बताया। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर स्थानीय समूहों

में इस प्रकार की क्रीमों की समीक्षाएँ सकारात्मक रूप से साझा की जा रही हैं, जिससे उपभोक्ता विश्वास बढ़ रहा है।

वहीं, स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इन क्रीमों के घटकों पर गंभीर आशंकाएँ जताई हैं। कई फ़ेयरनेस क्रीमों में हाईड्रोक्विनोन, बेंज़िल पेरॉक्साइड या स्टेरॉयड जैसी रसायनों का मिश्रण पाया गया

है, जो त्वचा पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। भारतीय फार्मास्यूटिकल नियामक (CDSCO) ने पहले भी इन घटकों के उपयोग को सीमित करने की चेतावनी जारी की थी, लेकिन सीमा पार आयातित क्रीमों में इन नियमों की अनदेखी की जा रही है। डर्मेटोलॉजिस्टों ने बताया कि इन रसायनों के अत्यधिक

उपयोग से त्वचा में दाग‑धब्बे, एलर्जिक रिएक्शन और कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

उसी समय, उपभोक्ता संघों ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा शुरू की है। बिहार के एक प्रमुख उपभोक्ता मंच के प्रवक्ता ने कहा, हमारा कर्तव्य है कि उपभोक्ता को सुरक्षित उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित

की जाए। यदि अनधिकृत रसायनयुक्त क्रीमें बाजार में घुस रही हैं, तो नियामक निकायों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने साथ ही सीमा क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और उत्पाद लेबलिंग के कड़े मानकों की मांग की। इसी तरह, पश्चिम बंगाल के एक उपभोक्ता अधिकार समूह ने भी अपने सदस्यों को

इन क्रीमों के सेवन से बचने की सलाह दी है, क्योंकि इनका नियामक परीक्षण अभी तक नहीं हुआ है।

फैशन और सौंदर्य उद्योग के प्रतिनिधियों ने इस विकास को व्यावसायिक अवसर के रूप में देखा है। एक प्रमुख भारतीय कॉस्मेटिक कंपनी के प्रबंधक ने कहा कि बाजार में नई प्रवृत्तियों का

उदय प्रतिस्पर्धा को तीव्र बनाता है, जिससे हमें अपने उत्पादों में नवाचार और सुरक्षा दोनों पर ध्यान देना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अपने मौजूदा फ़ेयरनेस रेंज में प्राकृतिक घटकों का उपयोग बढ़ा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित विकल्प मिल सकें। वहीं, सीमा व्यापारियों के एक संघ

के अध्यक्ष ने बताया कि उपभोक्ताओं की मांग के अनुसार हम अपने स्टॉक्स को विविधता प्रदान कर रहे हैं, लेकिन हम भी नियामकों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं ताकि उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।

Updated: October 12, 2026

The surge in cheap, cross‑border fairness creams is turning price‑sensitivity into a health gamble, exposing how regulatory loopholes can weaponize beauty standards.
If unchecked, this informal market will pressure Indian brands to either raise safety standards or compete on unsafe cost advantages, reshaping the cosmetics landscape.

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from खबर बिहार कीMore posts in खबर बिहार की »
More from बिहार ब्रेकिंग न्यूज़More posts in बिहार ब्रेकिंग न्यूज़ »

Be First to Comment

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *