है, जिसमें भारतीय सेना और UAE सेना के प्रत्येक 46 जवान शामिल हैं। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच तालमेल को सुदृढ़ करना, विविध युद्ध कौशल को निखारना और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में तैनाती की क्षमता को परखना है। इस चरण में विभिन्न शारीरिक और तकनीकी चुनौतियों
को सिमुलेट किया जा रहा है, जिससे दोनों सेनाओं के बीच रणनीतिक सहयोग की नींव मजबूत हो रही है।
माउंटेन गार्जियन का इतिहास 2014 में शुरू हुआ, जब पहली बार भारत‑UAE सैन्य सहयोग के तहत एक छोटा पैमाना अभ्यास आयोजित किया गया था। तब से दोनों देशों ने कई बार
मिलकर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं, मुख्य रूप से जलवायु‑अनुकूलता, पर्वतीय युद्ध और सीमा सुरक्षा के क्षेत्रों में। उत्तराखंड, जिसकी भू‑रचना में ऊँचे पहाड़, घाटी और अत्यधिक जलवायु परिवर्तन शामिल हैं, इस अभ्यास के लिए आदर्श स्थल माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में यहाँ भारत ने कई राष्ट्रीय
और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों का आयोजन किया, जिससे स्थानीय बुनियादी ढाँचा और लॉजिस्टिक सपोर्ट में उल्लेखनीय सुधार आया है।
पिछले दशक में भारत‑UAE रक्षा संबंधों में तेजी आई है, दोनों देशों ने कई उच्च‑स्तरीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। 2022 में दो देशों ने एक सामरिक साझेदारी समझौते (Strategic Partnership
Agreement) पर हस्ताक्षर किए, जिसके अंतर्गत संयुक्त प्रशिक्षण, तकनीकी विनिमय और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने का प्रावधान है। इस संदर्भ में माउंटेन गार्जियन को दोनों पक्षों की रणनीतिक प्राथमिकताओं का प्रतिबिंब माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल सैन्य कौशल को बढ़ाता है, बल्कि आपसी विश्वास और
सूचना‑साझाकरण को भी सुदृढ़ करता है।
अभ्यास के दौरान भारतीय बटालियन ‘भैरव’ के जवान विभिन्न प्रकार की कठिनाईयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने जिउ‑जित्सु आधारित आत्मरक्षा, रॉक क्लाइंबिंग, हाई‑एलीवेशन पैरेट्रॉल, और अत्यधिक ठंड में जीवित रहने की तकनीकें अभ्यास में लागू की हैं। इन शारीरिक परीक्षणों को पर्वतीय वातावरण
में सटीकता से पूरा करना सैनिकों की शारीरिक क्षमताओं और मानसिक सहनशक्ति की कसौटी बनता है। साथ ही, दोनों देशों के प्रशिक्षकों ने नई डिजिटल मैपिंग और ड्रोन‑सहायता वाली रीकॉन्सेस तकनीकों को भी सम्मिलित किया, जिससे आधुनिक युद्ध में सूचना‑प्रौद्योगिकी का महत्व स्पष्ट हुआ।
UAE की सैन्य प्रतिनिधि दल ने
भी इस अभ्यास में कई नवाचारी विधाओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने ‘डेजर्ट ट्रेकिंग’ मॉड्यूल को ऊँचाई पर अनुकूलित किया, जिससे भारतीय सैनिकों को रेगिस्तानी और पहाड़ी दोनों प्रकार के कठिन परिदृश्यों में प्रशिक्षण मिला। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उन्नत स्नाइपर तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक जामिंग और साइबर सुरक्षा के अभ्यास को
शामिल किया, जिससे दोनों सेनाओं के बीच तकनीकी ज्ञान का आदान‑प्रदान हुआ। इस प्रकार की विविधता दोनों पक्षों को विविध भू‑राजनीतिक परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है।
पहले दो दिनों में संयुक्त टास्क‑फ़ोर्स ने एक सिम्युलेटेड ‘टेररिस्ट हाइजैक’ परिदृश्य को संभाला, जिसमें दोनों पक्षों के स्नाइपर, इंटेलिजेंस
और मेडिकल टीमों ने मिलकर कार्य किया। इस परिदृश्य में गुप्तचर संकलन, लक्ष्य पहचान और त्वरित बचाव कार्य प्रमुख थे। भारतीय सैनिकों ने स्थानीय भाषा में संवाद स्थापित करने के लिए बेसिक अरबी शब्दावली का अभ्यास किया, जबकि UAE के सैनिकों ने हिंदी और उर्दू के मूलभूत शब्द सीखे।
इस प्रकार की भाषा‑अधारित सहयोगी अभ्यास दोनों सेनाओं की सांस्कृतिक समझ को भी बढ़ावा देता है।
व्यापारिक और सामरिक रूप से इस अभ्यास का महत्व केवल सैन्य कौशल तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड के स्थानीय प्रशासन ने अभ्यास के दौरान सुरक्षा उपायों को कड़ाई से लागू किया, जिससे नागरिकों के
दैनिक जीवन में न्यूनतम व्यवधान रहा। इसके अलावा, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के लिए कई छोटे एवं मध्यम उद्यमों को अनुबंध दिया गया, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिला। इस प्रकार के बड़े‑पैमाने के अंतर्राष्ट्रीय अभ्यास अक्सर स्थानीय विकास के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते
हैं।
अभ्यास के मध्य में, भारतीय सेना के प्रमुख कमांडर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “माउंटेन गार्जियन 2026 हमारे दोनो देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह
Updated: October 10, 2026
The exercise strengthens joint operational capabilities between India and the UAE, improving coordination in mountainous environments.
It also generates economic activity for Uttarakhand through contracts with local businesses.
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