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बिहार में अफगान नागरिकों के फर्जी पासपोर्ट के 31 मामलों की जांच, पासपोर्ट कार्यालय को अस्थायी रूप से बंद कर विस्तृत पूछताछ शुरू

बिहार में पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई, जहाँ 31 अफगान नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने के आरोपों पर स्थानीय पुलिस ने एक व्यापक जांच शुरू कर दी है।
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अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो विदेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट दिलाने के लिए विभिन्न दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ कर रहा था। इस घोटाले की शुरुआती जाँच में पता चला है कि कई पासपोर्ट आवेदन में झूठे पते, फर्जी दस्तावेज़ और अवैध हस्ताक्षर शामिल थे, जिससे पासपोर्ट के सुरक्षा मानकों पर प्रश्न उठे हैं।घटना की पृष्ठभूमि में बिहार के पासपोर्ट कार्यालयों में कार्यकुशलता की कमी और कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव को देखा गया है।
पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में पासपोर्ट आवेदन में 35 % की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि संसाधनों का विस्तार नहीं हुआ। इस कारण से कई मामलों में प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ और अनियमितताएँ सामने आईं। साथ ही, कुछ छोटे शहरों में पासपोर्ट केंद्रों की निगरानी में अंतराल ने असामान्य लेन‑देनों को बढ़ावा दिया। यह संदर्भ इस बात को स्पष्ट करता है कि किस प्रकार प्रणालीगत समस्याएँ इस प्रकार के बड़े घोटाले के लिए मंच तैयार कर देती हैं।पहले संकेत तब मिले जब पासपोर्ट कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक अनाम सूचना प्राप्त की, जिसमें अफगान नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने का जिक्र था। सूचना के बाद एक विशेष टीम ने फाइलों की समीक्षा की और पाया कि 31 आवेदन में समान पैटर्न दिख रहा था—जैसे एक ही फॉर्मेट, समान हस्ताक्षर शैली और समान पता प्रमाण। इन असंगतियों ने जांच को तेज़ कर दिया और तुरंत अधिकारियों को इस मामले की गंभीरता का एहसास हुआ।

परिणामस्वरूप, प्रभावित पासपोर्ट कार्यालय को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया और सभी संबंधित कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया।

जांच के प्रारंभिक चरण में पता चला कि इस घोटाले के पीछे एक मध्यस्थ दल कार्य कर रहा था, जिसने अफगान नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट के लिए आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करवा कर पेश किया। इस दल ने स्थानीय एजेंटों के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया को सरल बना दिया, जिससे कई आवेदकों ने बिना सत्यापित पहचान के पासपोर्ट प्राप्त किया। इस बीच, पासपोर्ट कार्यालय में कुछ कर्मचारियों ने इन फर्जी दस्तावेज़ों को मंजूरी देने में मदद की, जिससे यह संकेत मिलता है कि भ्रष्टाचार का स्तर अपेक्षाकृत गहरा हो सकता है।

जांच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि इस नेटवर्क ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों का उपयोग करके अफगान समुदाय तक पहुँच बनाई थी। वे अपने ग्राहकों को भारतीय पासपोर्ट के लाभ—जैसे यात्रा की सुविधा, विदेश में कार्य करने की संभावना और सुरक्षा—के बारे में आकर्षक जानकारी देते थे। इस प्रकार की जानकारी ने कई प्रवासियों को आकर्षित किया, जो वैध प्रक्रिया को बायपास

करके तेज़ी से पासपोर्ट चाहते थे। इस पहलू ने यह स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का दुरुपयोग भी इस प्रकार के घोटालों को बढ़ावा दे रहा है।

पुलिस ने इस घोटाले में शामिल मुख्य मध्यस्थों को हिरासत में ले लिया है और उनके साथ विस्तृत पूछताछ कर रही है। साथ ही, पासपोर्ट कार्यालय के प्रमुख को

भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है, ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने इस मामले में क्या भूमिका निभाई। इस बीच, पुलिस ने सभी 31 फर्जी पासपोर्टों को रद्द कर दिया है और उनके धारकों को वैध पहचान दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए एक महीने की समय सीमा दी है। यह कदम सार्वजनिक भरोसा बहाल करने के लिए उठाया गया है।

बिहार के मुख्य मंत्री ने इस मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सभी पासपोर्ट केंद्रों में कड़ी निगरानी लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने और प्रक्रियात्मक कड़ाई को सुदृढ़ करने के लिए विशेष आदेश जारी किए जाएंगे।

साथ ही, उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि सभी प्रभावित विभागों को पुनः प्रशिक्षित किया जाएगा और नई सुरक्षा तकनीकों को लागू किया जाएगा।

केंद्रीय पासपोर्ट विभाग ने भी इस घटना पर टिप्पणी कर, कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर जांच को तेज़ करने के लिए एक विशेष टीम स्थापित की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की घोटालों को रोकने के लिए पासपोर्ट आवेदन के डिजिटल सत्यापन को और सुदृढ़ किया जाएगा। विभाग ने सभी पासपोर्ट कार्यालयों को तुरंत सॉफ़्टवेयर अपडेट करने और नई बायोमेट्रिक मानकों को लागू करने का निर्देश दिया है।

संबंधित विदेश मंत्रालय ने भी इस घोटाले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की इमेज को नुकसान पहुंचाने वाला माना है। उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने में कोई भी अनियमितता गंभीर अंतरराष्ट्रीय परिणाम ले सकती है और इस दिशा में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Bihar police have launched a probe after uncovering a coordinated scheme that forged documents and signatures to issue Indian passports to 31 Afghan nationals, prompting the temporary shutdown of the implicated passport office and the cancellation of the counterfeit passports. State and central authorities say the racket exposed systemic lapses and will trigger tighter oversight, biometric upgrades and digital verification across all passport centres.

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