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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर पावर ग्रिड में विदेशी उपकरणों पर प्रतिबंध लगाया है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से संयुक्त राज्य की पावर ग्रिड पर विदेशी निर्मित उपकरणों के उपयोग को रोकने का आदेश जारी किया। इस आपातकालीन घोषणा के तहत सरकार ने उन कंपनियों को प्रतिबंध लगा दिया है जो विशिष्ट विदेशी घटकों को खरीदने, आयात करने या स्थापित करने की कोशिश करती हैं, जिससे देश के बड़े पैमाने पर बिजली वितरण प्रणाली, जिसे “बुल्क‑पावर सिस्टम” कहा जाता है, को संभावित खतरों से बचाया जा सके। इस कदम को ट्रम्प प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर जोखिमों के रूप में प्रस्तुत किया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी पावर ग्रिड पर विदेशी आपूर्ति श्रृंखला की निर्भरता बढ़ती रही है। चीन, रूस और अन्य एशियाई देशों के निर्माताओं से कई प्रमुख घटक, जैसे ट्रांसफ़ॉर्मर, स्विचगियर और नियंत्रण सॉफ्टवेयर, बड़े पैमाने पर खरीदे जा रहे थे। इन उपकरणों की तकनीकी जटिलता और लागत‑प्रभावशीलता को देखते हुए अमेरिकी यूटिलिटीज़ ने अक्सर विदेशी विकल्प अपनाए। हालांकि, साइबर‑सुरक्षा विशेषज्ञों ने इन उपकरणों में संभावित बिंदुओं को उजागर किया, जो राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं।

उसी समय, अमेरिकी कांग्रेस ने कई बार विदेशी उपकरणों के उपयोग पर जांच का आदेश दिया, विशेषकर 2022 में चीन‑निर्मित ट्रांसफ़ॉर्मर के संभावित बैकडोर की रिपोर्ट के बाद। कई विधायी सत्रों में ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने की मांग भी प्रमुख रही। इस पृष्ठभूमि में ट्रम्प का आदेश एक राजनीतिक और रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो दीर्घकालिक सुरक्षा नीति में बदलाव की संकेत देता है।

आदेश के तहत, अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DOE) ने एक व्यापक सूची जारी की जिसमें 150 से अधिक विदेशी निर्माताओं के नाम शामिल हैं। इन कंपनियों को अब अमेरिकी पावर ग्रिड में कोई भी नया उपकरण स्थापित करने से प्रतिबंधित किया गया है, और मौजूदा स्थापित उपकरणों की जांच भी अनिवार्य की गई है। DOE ने कहा है कि यह प्रक्रिया अगले तीन महीने में पूरी होनी चाहिए, और यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है तो दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इसमें विशेष रूप से चीन की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक कंपनी, ह्वा‍जियांग इलेक्ट्रिकल, और रूस की बड़े पैमाने पर ट्रांसफ़ॉर्मर आपूर्ति करने वाली कंपनी, एएलएसी ग्रुप, को लक्ष्य बनाया गया है। इन कंपनियों के उत्पादों को अब अमेरिकी ग्रिड में उपयोग या प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, कई यूरोपीय और जापानी कंपनियों को भी इस सूची में शामिल किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में जटिलता बढ़ गई।

अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा एजेंसी (EIA) ने कहा कि इस आदेश के कारण अगले दो वर्षों में घरेलू उत्पादन में 20 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। DOE ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए नई फंडिंग की घोषणा भी की, जिससे अमेरिकी निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उपकरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इस बीच, कई अमेरिकी यूटिलिटीज़ को अपने मौजूदा अनुबंधों की पुनर्समीक्षा करनी पड़ेगी और वैकल्पिक सप्लाई चैन विकसित करनी पड़ेगी।

न्यू यॉर्क स्थित इलेक्ट्रिक यूटिलिटी कंपनी, एपीएएन, ने इस निर्णय का स्वागत किया, कहता है कि “देश की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है” और “स्थानीय निर्माताओं को समर्थन मिलने से उद्योग को स्थिरता मिलेगी”। इसके विपरीत, अमेरिकी ट्रेड एसोसिएशन ने इस कदम को “अप्रत्याशित व्यापारिक बाधा” करार दिया और कहा कि इससे कंपनियों को अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ेगा।

चीन के विदेश मंत्रालय ने इस आदेश पर “अमेरिका द्वारा आर्थिक सुरक्षा का आड़ लेकर भू-राजनीतिक दबाव बढ़ाने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नीतियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान पहुंचाएगी और दोनो देशों के व्यापारिक संबंधों में तनाव को बढ़ाएगी। रूसी विदेश मंत्रालय ने भी समान रूप से प्रतिक्रिया दी, यह दावा करते हुए कि यह कदम “अमेरिकी नीतियों की असंगति को दर्शाता है”।

यूरोपीय यूनियन के ऊर्जा आयोग ने इस निर्णय को “अमेरिका की ऊर्जा नीति में स्वदेशीकरण की ओर एक कदम” कहा, परन्तु साथ ही कहा कि “अंतरराष्ट्रीय मानकों और सहयोग को बनाए रखना आवश्यक है”। जापान की ऊर्जा एजेंसी ने कहा कि “उद्योग को नई नियमावली के अनुसार समायोजन करना होगा, लेकिन सहयोगी देशों के साथ तकनीकी साझेदारी जारी रखी जाएगी”।

आर्थिक दृष्टिकोण से, इस आदेश के परिणामस्वरूप अमेरिकी पावर ग्रिड में निवेश की दिशा में बदलाव आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निर्माताओं को लाभ होगा, परन्तु अल्पकालिक अवधि में लागत में वृद्धि और ग्रिड विश्वसनीयता में संभावित गिरावट देखी जा सकती है। साथ ही, विदेशी कंपनियों के निर्यात में कमी आएगी, जिससे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा में बदलाव आएगा।

सामाजिक प्रभाव के पहलू से, उपभो

Updated: August 26, 2026

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