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गया के इस्माइलपुर‑गुरारू सेक्शन में दो 12‑साल के छात्र तेज गति वाली ट्रेन से टकराकर मार गए; ट्रैक पर सुरक्षा उपायों की कमी पर सवाल

गया जिले के इस्माइलपुर–गुरारू रेलवे सेक्शन में शनिवार को एक दुखद हादसा घटा, जहाँ दो किशोर छात्रों को तेज गति से चल रही एक्सप्रेस ट्रेन ने टक्कर मार दी और दोनों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। दुर्घटना डुमरा रेलवे गुमटी के पास स्थित ट्रैक पर हुई, जब दोनों छात्र अपनी ट्यूशन समाप्त कर के खेल के मैदान की ओर जा रहे थे। यह घटना स्थानीय समुदाय में गहरी शोक भावना पैदा कर रही है और सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाने को मजबूर कर रही है।

घटनास्थल के पास की स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, दो किशोर, बिंदेश्वर यादव के पुत्र प्रतीक कुमार (12 वर्ष) और नीरज रवानी के पुत्र शिवम कुमार (12 वर्ष), दोनों ही डुमरा गांव के ज्ञान भारती स्कूल में पाँचवीं कक्षा के छात्र थे। वे ट्यूशन समाप्त कर के स्कूल के बाद घर वापस जा रहे थे, जब अचानक उन्होंने रेलवे लाइन को पार करने का निर्णय लिया। इस दौरान दो तेज गति वाली एक्सप्रेस ट्रेनों में से एक ने उन्हें मार दिया।

स्थानीय पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के समय ट्रेन की गति लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे थी और दृश्य में कोई चेतावनी संकेत नहीं था। ट्रेन चालक को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि ट्रैक पर कोई पैदल यात्री है। दुर्घटना स्थल पर मौजूद प्रथम उपचारकर्ता और स्थानीय चिकित्सकों ने तुरंत घायलों को बचाने का प्रयास किया, परंतु चोटों की गंभीरता के कारण दोनों बच्चों की मृत्यु हो गई।

पुलिस की प्रारम्भिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ट्रैक के पास कोई सुरक्षित पादचारी पुल या ओवरब्रिज नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों को रेलवे लाइन को स्वयं ही पार करना पड़ता है। इस क्षेत्र में कई बार समान घटनाएँ घटती रही हैं, परंतु अब तक कोई ठोस सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए। पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया और संभावित लापरवाही के बारे में रिपोर्ट तैयार की।

स्थानीय प्रशासन ने दुर्घटना के बाद तुरंत राहत कार्य शुरू किया। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया और स्कूल में शोकसभा आयोजित की। साथ ही, प्रशासन ने इस घटना को रोकने के लिए त्वरित उपायों की मांग की, जिसमें ट्रैक के पास संकेतक लाइट्स और पादचारी पुल बनवाना शामिल है।

डुमरा गांव के ग्राम प्रधान ने कहा कि यह दुर्घटना गांव के लिए एक बड़ी चेतावनी है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अनुरोध किया कि वे बच्चों को रेलवे लाइन पार करने से रोकें और सुरक्षित मार्गों का उपयोग करें। प्रधान ने यह भी उल्लेख किया कि गांव में कई बार इसी प्रकार के छोटे-छोटे हादसे हुए हैं, परंतु कभी भी सरकारी ध्यान नहीं मिला।

गया जिले के शिक्षा विभाग ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्कूलों को छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूल की निकटता में स्थित रेलवे ट्रैक पर विशेष निगरानी की जानी चाहिए और छात्रों को इस प्रकार के खतरों से बचाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।

रेलवे विभाग ने मामले की त्वरित जांच का आश्वासन दिया। एक अधिकारी ने कहा कि दुर्घटना के बाद ट्रैक की सुरक्षा जाँच की जाएगी और आवश्यक सुधार कार्य तुरंत शुरू किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ट्रैक के पास चेतावनी संकेतकों और पादचारी पुल की योजना बनाई जाएगी।

राज्य सरकार ने भी इस दुर्घटना को गंभीरता से लिया है और जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह तुरंत सभी रेलवे पार्सल क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों का आकलन करे। सरकार ने कहा कि इस प्रकार के हादसों को रोकने के लिए व्यापक नीति बनानी होगी, जिसमें स्थानीय समुदाय, स्कूल और रेलवे विभाग की सहयोगिता शामिल होगी।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस दुर्घटना से प्रभावित परिवारों को तत्काल वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। स्थानीय बैंक और सामाजिक संगठन ने मदद का हाथ बढ़ाया है, परंतु लंबी अवधि की सहायता के लिए सरकारी योजना की जरूरत होगी। सामाजिक स्तर पर, इस घटना ने गांव में बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ा दी है, जिससे भविष्य में माता-पिता अधिक सतर्क रहने की संभावना है।

सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में, इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में पादचारी सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता दी है। कई NGOs ने इस पर कार्य करने की इच्छा जताई है, जिसमें सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम, स्वयंसेवी ट्रैक निगरानी समूह और सुरक्षित मार्ग निर्माण शामिल हैं। यह पहल स्थानीय समुदाय में सुरक्षा संस्कृति को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे ट्रैक के पास पादचारी पुल और चेतावनी संकेतकों की कमी ही इस प्रकार के हादसों का मुख्य कारण है। एक सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि भारत में कई ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक के पास पादचारी सुरक्षा के मानकों की अनुपस्थिति है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य और केंद्र दोनों स्तर पर एक व्यापक योजना बनाकर इन क्षेत्रों में तत्काल सुधार करना आवश्यक है।

आगे क्या हो सकता है, इस प्रश्न पर विभिन्न पक्षों के विचार अलग हैं। पुलिस और रेलवे विभाग की त्वरित कार्रवाई से उम्मीद है कि जल्द ही ट्रैक के पास सुरक्षा उपाय लागू होंगे। साथ ही, स्थानीय प्रशासन और समुदाय मिलकर पादचारी पुल और

Updated: October 4, 2026


A high‑speed express train struck two 12‑year‑old schoolchildren crossing the Dumra track in Gaya district, killing them instantly and sparking grief and calls for urgent safety measures. Authorities have pledged aid to the families and vowed to install warning signals and pedestrian bridges to prevent similar tragedies.

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