हाईकोर्ट ने दिशा की मृत्यु पर नई सीबीआई जाँच का आदेश देते हुए कहा कि मौजूदा तथ्यों में कई संदेहास्पद बिंदु हैं, जिनकी गहरी जाँच आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखना अनिवार्य है, जिससे सभी संबंधित पक्षों को संतोषजनक उत्तर मिल सके। इस आदेश के बाद, कई वकील और सामाजिक संगठनों ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया और इसे एक सकारात्मक कदम बताया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी में, न्यायालय की ओर से नियुक्त प्रतिनिधियों ने बताया कि यह आयोजन सभी प्रमुख मीडिया संस्थाओं को आमंत्रित करेगा, ताकि जनता को सीधे अद्यतन जानकारी प्रदान की जा सके। इस दौरान, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य केवल तथ्यों की पुष्टि नहीं, बल्कि आगे की जाँच के दिशा‑निर्देशों को स्पष्ट करना भी होगा। इस पहल को न्यायिक प्रणाली की पारदर्शिता को बढ़ावा देने के रूप में देखा गया।
हालांकि, अचानक कॉन्फ्रेंस को रद्द करने का निर्णय कई सवाल उठाने लगा। अदालत के स्रोतों ने बताया कि इस निर्णय के पीछे कुछ तकनीकी और सुरक्षा कारण हो सकते हैं, लेकिन स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किए गए। इससे मीडिया में अफवाहें फैलीं कि शायद नई जाँच के दौरान कुछ संवेदनशील साक्ष्य सामने आए हैं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से उजागर करने से पहले सावधानी बरतनी आवश्यक है।
दिशा की मृत्यु के मामले में कई प्रमुख गवाहों ने पहले ही अपनी गवाही दी थी, परन्तु नई जाँच के तहत उन गवाहियों की पुनःप्रमाणिकता की माँग की गई है। इस प्रक्रिया में कुछ गवाहों ने अपने बयान को बदलते हुए नई जानकारी प्रदान की, जिससे पूर्वी जाँच की निष्कर्षों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता उत्पन्न हुई। इन परिवर्तनों ने न्यायालय को और अधिक विस्तृत जांच करने के लिए प्रेरित किया।
सुशांत के परिवार ने कोर्ट के आदेश को ‘आशा की किरण’ कहा और उन्होंने कहा कि इस पुनःजाँच से अंततः सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव या हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे और न्याय की प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से चलाने की मांग की। परिवार के spokesperson ने कहा कि वे सभी कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान करेंगे और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार सहयोग करेंगे।
दिशा की मृत्यु से जुड़े कई राजनीतिक दलों ने इस मामले को अपने एजेंडे में शामिल किया है। कुछ प्रमुख विपक्षी नेता ने इस अवसर पर न्यायालय के आदेश की सराहना की, जबकि उन्होंने सरकार पर दबाव डाला कि वह इस मामले में पूरी पारदर्शिता बनाए। वहीं, सरकार की ओर से यह कहा गया कि सभी प्रक्रियाएँ कानून के दायरे में चल रही हैं और कोई भी राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होगा।
अर्थशास्त्री और सामाजिक विश्लेषकों ने कहा कि इस प्रकार की उच्च प्रोफ़ाइल जाँचें भारतीय न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता को परीक्षण में लाती हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि इस मामले में निष्पक्षता बनी रहती है, तो यह अन्य समान मामलों में भी एक मानक स्थापित कर सकता है। साथ ही, उन्होंने आर्थिक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला, क्योंकि इस प्रकार की घटनाएँ फिल्म उद्योग के निवेशकों के मनोबल को प्रभावित कर सकती हैं।
Updated: September 22, 2026
The Bombay High Court, after ordering a fresh CBI probe into former manager Disha Salian’s 2020 death, slated a press conference that was abruptly cancelled for undisclosed technical or security reasons, prompting speculation about new evidence. Sushant’s relatives hailed the court’s directive as a hopeful sign of justice, while political parties and analysts stressed the need for transparency in the high‑profile investigation.
The abrupt shelving of the press briefing hints that the new CBI probe may have uncovered evidence too explosive for a public rollout, turning the courtroom into the real arena of truth‑seeking.