Press "Enter" to skip to content

लेह‑लद्दाख में जनगणना कार्य की समीक्षा, डिजिटल एप्लिकेशन व हेलीकॉप्टर‑सहायता से कवरेज बढ़ा।

मृतुंजय कुमार नारायण, राष्ट्रीय जनगणना सूचना (RGI) के प्रमुख, ने लेह-लद्दाख क्षेत्र में जनगणना कार्य की व्यापक समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से दुर्गम और बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना कवरेज, जनगणना एप्लिकेशन की कार्यक्षमता और फील्ड स्तर के स्टाफ की तत्परता पर प्रकाश डाला। समीक्षा का उद्देश्य डेटा संग्रह की सटीकता,

समयबद्धता और तकनीकी समर्थन का मूल्यांकन करना था, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या आँकड़े विश्वसनीय बने रहें। इस बैठक में कई विभागीय अधिकारी, क्षेत्रीय अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित थे, जो इस महत्वपूर्ण कार्य की जटिलताओं को समझते हुए समाधान की दिशा में चर्चा करते रहे।

लेह-लद्दाख का भौगोलिक परिदृश्य अत्यधिक विविध

है; ऊँचे पहाड़, ग्लेशियर और अत्यधिक ठंडे मौसम इसे जनगणना के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक बनाते हैं। पिछले दशकों में इस प्रदेश में जनगणना कार्य अक्सर मौसम संबंधी बाधाओं, अस्थिर संचार नेटवर्क और सीमित पहुँच के कारण अधूरा रह गया था। 2021‑2022 की जनगणना में भी इन कठिनाइयों के कारण

कई घरों का डेटा संग्रह नहीं हो सका, जिससे राष्ट्रीय आँकड़ों में इस क्षेत्र की प्रतिनिधित्व कम रह गई। इसलिए, इस बार की समीक्षा में इन समस्याओं को दूर करने के लिये नई रणनीतियों को अपनाने पर बल दिया गया।

समीक्षा से पहले, RGI ने विशेष रूप से लद्दाख में मोबाइल एप्लिकेशन

के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिये एक प्रोटोटाइप विकसित किया था। यह एप्लिकेशन डेटा एंट्री, रीयल‑टाइम वैलिडेशन और भू‑स्थान टैगिंग को सहज बनाता है, जिससे दूरस्थ गांवों में भी सटीक जानकारी एकत्रित हो सके। साथ ही, फील्ड कार्यकर्ताओं को मौसम पूर्वानुमान और स्थानीय मार्गों की विस्तृत जानकारी प्रदान करने के लिये डिजिटल

मैपिंग टूल्स का समावेश किया गया। इन तकनीकी उपायों को लागू करने से पहले, कई परीक्षण अभियान चलाए गये, जिनमें एप्लिकेशन की स्थिरता, बैटरी जीवन और नेटवर्क कवरेज की जाँच शामिल थी।

समीक्षा बैठक में नारायण ने कहा कि एप्लिकेशन ने कई क्षेत्रों में डेटा संग्रह को तेज़ किया है, परंतु अभी

भी कुछ बर्फीले ऊँचाइयों में सिग्नल की कमी के कारण डेटा अपलोड में देरी हो रही है। उन्होंने फील्ड टीमों को स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त बैक‑अप डिवाइस और सौर पैनल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा, जिससे निरंतर कार्य सुनिश्चित हो सके। साथ ही, उन्होंने डेटा सत्यापन के लिये दोहरा चेक‑पॉइंट प्रणाली अपनाने की

सलाह दी, जिससे त्रुटियों को न्यूनतम किया जा सके।

फील्ड स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने स्थानीय समुदायों से सहयोग प्राप्त करने के लिये पूर्व सूचना और जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं। इस प्रक्रिया में ग्रामीण नेता, विद्यालय प्रधान और महिला समूहों को शामिल किया गया, जिससे जनगणना के महत्व को

समझाया गया और डेटा प्रदान करने में उनकी भागीदारी बढ़ी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ अत्यधिक ऊँचे बस्ती में पहुंचने के लिये हेलीकॉप्टर और स्नोमोबाइल का उपयोग किया गया, जिससे समयबद्ध डेटा संग्रह संभव हुआ। इस प्रकार की लॉजिस्टिक सहायता ने जनगणना कवरेज में महत्वपूर्ण सुधार किया है।

एक अन्य

प्रमुख चर्चा बिंदु था फील्ड स्टाफ की तैयारियों का मूल्यांकन। नारायण ने बताया कि सभी कार्यकर्ताओं को नई एप्लिकेशन के उपयोग पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें वास्तविक समय में डेटा एंट्री, त्रुटि सुधार और बैटरी प्रबंधन शामिल था। साथ ही, उन्होंने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिये आवश्यक विश्राम और सुरक्षा उपायों

को भी उजागर किया, क्योंकि कठोर मौसम में कार्य कठिन होता है। इस संदर्भ में, स्टाफ को पर्याप्त पोषण, गर्म कपड़े और आपातकालीन चिकित्सा किट प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

समीक्षा के बाद, केंद्र सरकार के प्रमुख अधिकारी ने जनगणना में डिजिटल तकनीक के प्रयोग को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने

की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लद्दाख में प्राप्त अनुभव को अन्य पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में लागू किया जाएगा, जिससे संपूर्ण राष्ट्रीय जनगणना प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। साथ ही, उन्होंने डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे नागरिकों का विश्वास बना रहे।

विरोधी दल के प्रतिनिधियों ने इस

पहल को सकारात्मक रूप से सराहा, परन्तु उन्होंने डेटा की शुद्धता और स्थानीय अधिकारों के सम्मान की मांग की। उन्होंने कहा कि डिजिटल उपकरणों के प्रयोग से व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए कड़ी निगरानी और पारदर्शिता आवश्यक है। इन चिंताओं को दूर करने हेतु, एक स्वतंत्र ऑडिट समिति

के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने लद्दाख के जनगणना मॉडल को वैश्विक स्तर पर एक केस स्टडी के रूप में माना। उन्होंने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी तकनीकी नवाचार और सामुदायिक सहभागिता से डेटा संग्रह संभव है। इस संद

Updated: September 25, 2026

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from खबर बिहार कीMore posts in खबर बिहार की »