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उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को ध्वस्त करने की योजना पर विरोध, पुलिस‑प्रदर्शन में टकराव, 5,000 प्रदर्शनकारियों ने वैकल्पिक मार्ग की माँग

उज्जैन में शाही मस्जिद के एक हिस्से को सड़क‑विस्तार परियोजना के तहत ध्वस्त करने के निर्णय पर विरोधी प्रदर्शन जारी है, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ टकराव किया, जिससे तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न हुआ। इस कार्य को 2028 के सिम्हास्था कुंभ मेले से पहले तेज़ी से पूरा करने की योजना का हिस्सा माना गया

है, जिससे स्थानीय मुस्लिम समुदाय को धार्मिक और सांस्कृतिक हानि का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने विरोधियों को बिखेरने हेतु जल तोड़ और बिंदु दागी, जबकि कई नागरिकों ने इस कार्य को असंवैधानिक तथा अनैतिक कहा।

शाही मस्जिद, जो 18वीं सदी की मुगल शैली में निर्मित है, उज्जैन के पुरानी शहर के

केंद्र में स्थित है और इतिहासिक वधुता के कारण राज्य संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल है। पिछले दो दशकों में शहर में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने इस धरोहर को जोखिम में डाल दिया था, परन्तु इस बार सड़क‑विस्तार की योजना विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत हुई थी। स्थानीय प्रशासन का

कहना है कि इस परियोजना से शहरी ट्रैफ़िक जाम में उल्लेखनीय कमी आएगी और कुंभ मेले के दौरान भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी।

विरोध का मूल कारण यह है कि मस्जिद के प्रमुख भाग को हटाने से 2,500 से अधिक वार्षिक तीर्थयात्रियों की सुविधाएं बाधित होंगी, जो धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान मस्जिद में प्रार्थना

करते हैं। स्थानीय मुस्लिम प्रतिनिधियों ने कहा कि यह कदम धार्मिक अधिकारों के उल्लंघन के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत की अनादर भी है। उन्होंने अदालत में याचिका दायर करने के साथ ही सामाजिक संगठनों से समर्थन की अपील की। इस बीच, कुछ नागरिक समूहों ने यह भी कहा कि शहरी विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच

संतुलन बनाना आवश्यक है।

प्रदर्शन के दिन, लगभग 5,000 लोग शाही मस्जिद के सामने इकट्ठा हुए, जिसमें युवा छात्र, बुजुर्ग और धार्मिक नेता शामिल थे। उन्होंने शांति पूर्ण मार्च करने का संकल्प लिया, परन्तु पुलिस द्वारा स्थापित रॉक बाधाओं और जल तोड़ने के कारण भीड़ में उथल‑पुथल हुई। कई रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों

ने रासायनिक पिचकारी और ध्वनि उपकरणों का उपयोग किया, जबकि पुलिस ने लाइट गैस और बैरिकेड तोड़ने वाले उपकरणों का प्रयोग किया। इस टकराव में दो लोगों को हल्के चोटों की पुष्टि हुई, जिन्हें स्थानीय अस्पतालों में उपचारित किया गया।

शहरी प्रशासन ने कहा कि इस परियोजना को राष्ट्रीय राजमार्ग नियोजन के तहत स्वीकृति

मिली है और यह सार्वजनिक सुरक्षा तथा आर्थिक लाभ के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मस्जिद के हिस्से को हटाने के बाद पुनर्निर्माण हेतु विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए योजना में मौलिक संरचना को संरक्षित रखा जाएगा। प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी कर ली गई हैं और यह

कार्य कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को भीड़ नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने पड़े, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे।

दूसरी ओर, स्थानीय मुस्लिम परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि शाही मस्जिद को संरक्षित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग की संभावनाओं को अभी तक नहीं

देखा गया है। उन्होंने कहा कि यदि सड़क‑विस्तार की आवश्यकता है, तो किनारा हटाने के बजाय उन्नत ट्रैफ़िक प्रबंधन तकनीक अपनाई जा सकती है। इस संदर्भ में उन्होंने कई नगर योजना विशेषज्ञों को सलाहकार के रूप में बुलाया और वैकल्पिक योजनाओं की माँग की। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को हल करने के

लिए राष्ट्रीय धार्मिक मामलों के मंत्रालय को शामिल किया जाना चाहिए।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ भी विविध रही हैं। राज्य के मुख्य मंत्री ने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं और इस परियोजना से राज्य की आर्थिक प्रगति में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी हो चुकी हैं और

प्रशासनिक निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, विपक्षी दल के नेता ने इस निर्णय की कड़ाई से आलोचना की, उन्हें इसे धार्मिक असहिष्णुता का उदाहरण बताया और सरकार से मांग की कि वे परियोजना को स्थगित कर वैकल्पिक मार्ग पर विचार करें।

वित्तीय विश्लेषकों ने कहा कि सड़क‑विस्तार परियोजना से अनुमानित राजस्व

में 15 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है, मुख्यतः पर्यटन और कुंभ मेले के दौरान बेहतर पहुँच के कारण। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार के बुनियादी ढांचा निवेश से स्थानीय रोजगार में वृद्धि और वस्तु तथा सेवाओं के मूल्य में स्थिरता आएगी। लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि सामाजिक असंतोष और ध्वस्त कार्यों से

उत्पन्न कानूनी मुकदमों के कारण दीर्घकालिक लागत में वृद्धि हो सकती है।

सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे को धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि अगर विकास कार्यों को धार्मिक स्थलों के साथ समझ

Updated: September 28, 2026


Protesters clashed with police in Ujjain as authorities pushed ahead with a road‑expansion that would demolish part of the 18th‑century Shahi Mosque, a heritage site protected for its historic value. Officials argue the project will ease traffic and boost the upcoming Kumbh fair, while Muslim groups and opposition parties decry the move as an attack on religious rights and cultural heritage.

Insight: The demolition of a historic mosque for a highway shows how quick‑turn infrastructure projects can be weaponized against cultural identity, turning heritage sites into flashpoints for civic unrest. It reveals a growing rift where state priorities of traffic efficiency clash with grassroots demands for religious and historical preservation, risking long

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