एलपीयू में मार्च 2024 के शुरुआती सप्ताह में छात्रों ने एक बड़े यौन उत्पीड़न के आरोप को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने कक्षाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इस घटना ने छात्र समुदाय के भीतर तीव्र असंतोष पैदा किया और कई छात्रों ने संस्थान छोड़कर दिल्ली के विभिन्न होस्टलों में शरण ली। इस दौरान छात्रों के बीच जानकारी का अभाव और प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
पिनरायी विजयन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए कहा कि केरल सरकार ने पहले भी अपने छात्रों की सुरक्षा के लिए कई बार कदम उठाए हैं, परन्तु इस बार केरल के विद्यार्थियों को विदेश में नहीं, बल्कि भारत के भीतर ही असुरक्षित स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विश्वविद्यालय की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शैक्षिक नीति और छात्र सुरक्षा के व्यापक ढाँचे की कमी को दर्शाता है।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के प्रवर्तक ने पहले कहा था कि वे इस आरोप की स्वतंत्र जांच करेंगे और पीड़ित छात्रों को आवश्यक सहायता प्रदान करेंगे। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और प्रारंभिक जांच जारी है, परन्तु छात्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कई बार शिकायतों को अनदेखा किया।
केरल की छात्र संघों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए दिल्ली पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की और कहा कि छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशेष टीम बनायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई छात्रों को रात के समय भी सुरक्षित आवास नहीं मिल पा रहा है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएँ। हालांकि, इस बयान में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया कि कब और कैसे छात्रों को केरल वापस भेजा जाएगा।
केरल विधानसभा के विपक्षी नेता ने भी इस मुद्दे पर तीखी टकराव की लहरें उठाई, उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की निष्क्रियता के कारण ही छात्रों को इस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने केरल सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाए और छात्रों की वापसी के लिये एक सटीक योजना बनाये।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि उन्होंने एलपीयू परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी है और छात्रों के लिये हॉटलाइन स्थापित की है। पुलिस ने यह भी कहा कि वे छात्रों को सुरक्षित आवास प्रदान करने हेतु निजी होस्टलों के साथ सहयोग कर रहे हैं, परन्तु इस प्रक्रिया में कई बार बुकिंग में देरी हो रही है।
केरल सरकार ने इस बीच एक विशेष कमेटी का गठन किया है जिसमें शिक्षा विभाग, पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं, जिसका काम छात्रों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास की योजना बनाना है। इस कमेटी ने कहा कि वे छात्रों के लिये परिवहन, मेडिकल सहायता और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग का प्रावधान करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यह मामला केरल-केन्द्रीय संबंधों में नई जटिलताएँ जोड़ रहा है, क्योंकि केरल सरकार ने पहले भी छात्र सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्र सरकार से समर्थन की मांग की थी। वे यह भी जोड़ते हैं कि यदि इस समस्या का समाधान समय पर नहीं हुआ तो यह अगले चुनाव में विरोधी पार्टियों द्वारा उपयोग किया जा सकता है।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखते हुए, इस घटना ने छात्रवृत्ति और शिक्षण संस्थानों में निवेश के प्रश्न उठाए हैं। कई निजी विश्वविद्यालयों पर अब वित्तीय जांच का दायरा बढ़ सकता है, क्योंकि अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं। इस कारण से उच्च शिक्षा क्षेत्र में निवेशकों की रुचि में कमी आ सकती है।
सामाजिक रूप से, इस मुद्दे ने युवा वर्ग में असुरक्षा की भावना को उजागर किया है, विशेषकर
Updated: September 28, 2026
Insight: The case highlights gaps in campus safety protocols, prompting coordinated action among state, central and law‑enforcement agencies.
It may influence future policies on student protection and oversight of private higher‑education institutions.
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