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स्वास्थ्य मंत्री ने अतीपट्टु में नई एबीसी (अस्तर बधाई केंद्र) का उद्घाटन किया, दैनिक 35 कुत्तों की नसबंदी एवं रोगन

आज राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के माननीय मंत्री ने अतीपट्टु में स्थित नई एबीसी (अस्तर बधाई केंद्र) का अनावरण किया और साथ ही मानसून की तैयारी हेतु व्यापक जांच की। इस अवसर पर मंत्री ने केंद्र की सुविधाओं, विशेषकर 35 कुत्तों तक की दैनिक नसबंदी एवं स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को रेखांकित

किया, यह कहते हुए कि यह पहल शहर के जमीनी स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इस उद्घाटन कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इस परियोजना में बहु‑स्तरीय सहयोग का महत्व है।

अतीपट्टु, जो

उपनगर में स्थित एक तेज़ी से विकसित होती जनसंख्या वाला क्षेत्र है, पिछले कुछ वर्षों में कुत्तों की संख्या में वृद्धि के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा था। विशेषकर मानसून के मौसम में जलजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है, और कुत्तों द्वारा फैलने वाले रेबीज़ तथा अन्य संक्रमणों का

जोखिम भी उल्लेखनीय हो जाता है। इन समस्याओं के समाधान हेतु राज्य सरकार ने पहले भी कई पशु कल्याण योजनाओं की घोषणा की थी, लेकिन कार्यान्वयन में ढील और संसाधन अभाव के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए थे।

इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, पिछले वर्ष के अंत में राज्य ने एक व्यापक

सर्वेक्षण किया, जिसमें अतीपट्टु सहित कई शहरी क्षेत्रों में कुत्तों की जनसंख्या, उनकी स्वास्थ्य स्थिति और मानव‑पशु संपर्क के पैटर्न को दस्तावेज़ किया गया। सर्वेक्षण में यह उजागर हुआ कि लगभग 40 % कुत्तों को नियमित नसबंदी नहीं मिली थी, और कई क्षेत्रों में कुत्तों की अनियंत्रित प्रजनन से सार्वजनिक स्थानों में गंदगी और असुविधा

बढ़ रही थी। इन आँकड़ों ने सरकार को एक केंद्रित, वैज्ञानिक‑आधारित हस्तक्षेप की आवश्यकता का एहसास कराया, जिससे एबीसी केंद्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।

केंद्र का निर्माण एक उच्चस्तरीय भवन में किया गया है, जिसमें पूर्णतः सुसज्जित ऑपरेशन थियेटर, आधुनिक लैबोरेटरी, फार्मेसी और रोगी देखभाल कक्ष शामिल हैं। दैनिक 35 कुत्तों

की नसबंदी और अन्य शल्यक्रियाओं को सहजता से पूरा करने के लिए यहाँ अत्याधुनिक एनेस्थीसिया और सर्जिकल उपकरण उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र में एक व्यापक रोगनिदान प्रणाली स्थापित की गई है, जो रेबीज़, लीश, टाइफस जैसी बिमारियों की शीघ्र पहचान और उपचार को संभव बनाती है।

केंद्र के भीतर एक विस्तृत केनल

सुविधा भी तैयार की गई है, जिसमें अलग‑अलग वर्गीकरण के अनुसार रोगी कुत्तों को रखने की व्यवस्था है। यह व्यवस्था न केवल पशु कल्याण को सुनिश्चित करती है, बल्कि संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी मददगार सिद्ध होती है। केंद्र के प्रबंधक ने बताया कि केनल में प्रत्येक कुत्ता को दैनिक स्वास्थ्य जांच,

पोषणीय आहार और आवश्यक दवाओं का प्रावधान किया जाता है, जिससे उनके पुनरुद्धार की संभावना बढ़ती है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने इस पहल को मानव‑पशु संबंधों की नई दिशा कहा और कहा कि मानसून के दौरान संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए यह केंद्र एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह

भी उल्लेख किया कि भविष्य में इस मॉडल को अन्य जिलों में दोहराने की योजना है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार हो सके। इस वक्तव्य ने उपस्थित श्रोताओं में आशावाद और भरोसा उत्पन्न किया।

उद्घाटन पर स्थानीय पशु कल्याण संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस परियोजना को सराहा और कहा कि

इससे कुत्तों की जीवन स्थितियों में सुधार के साथ ही मानव समुदाय को भी सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अब वे अधिक संगठित रूप से स्वयंसेवकों की भर्ती कर सकते हैं और केंद्र के साथ मिलकर जागरूकता अभियानों को बढ़ा सकते हैं। इस बीच, नगर निगम के आयुक्त ने कहा कि

वे केंद्र की गतिविधियों को मॉनिटर करेंगे और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त संसाधन प्रदान करेंगे।

दूसरी ओर, अतीपट्टु के कुछ निवासी, जो लंबे समय से कुत्तों की उपस्थिति को लेकर चिंतित थे, ने इस पहल को एक सकारात्मक कदम के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने बच्चों को खुले मैदानों में

सुरक्षित रूप से खेलने की अनुमति देंगे, क्योंकि नसबंदी और स्वास्थ्य जांच से कुत्तों के अस्वस्थ व्यवहार में कमी आएगी। कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि अब वे अपने दैनिक चलने‑फिरने के रूटीन को बिना डर के जारी रख पाएँगे।

विरोधी समूहों ने हालांकि इस परियोजना की लागत और संसाधन वितरण पर प्रश्न

उठाया। कुछ स्थानीय व्यापारी ने कहा कि केंद्र के निर्माण में बड़ी राशि खर्च हुई, जिसे वे अन्य बुनियादी सेवाओं जैसे जल, सड़क या शौचालय सुधार में उपयोग कर सकते थे। इस पर मंत्री ने उत्तर दिया कि स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दे प्राथमिकता हैं, और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ इन

Updated: October 14, 2026


State health minister inaugurated a new Animal Birth Control centre in Athipattu, highlighting its capacity to sterilise up to 35 dogs daily and diagnose rabies and other diseases ahead of the monsoon. Officials said the facility, built with modern labs and a dedicated kennel, aims to curb stray‑dog proliferation and related health risks in the fast‑growing suburb.

Insight: This new dog‑health hub signals a shift from reactive to proactive public health—by curbing rabies vectors before the monsoon’s flood‑risk spike, it turns a local nuisance into a preventative safety net. If replicated, it could re‑balance municipal budgets toward long‑term disease control rather

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