जांच दल ने मड़वा पहाड़ी के आसपास घेराबंदी की, जहाँ नंदन यादव को छुपते देखे जाने की सूचना मिली। घेराबंदी के दौरान नंदन ने भागने की कोशिश की, जिससे उसके और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ के दौरान नंदन ने हथियार निकालने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने चेतावनी के बाद गोलीबारी की। रिपोर्टों के अनुसार, गोली नंदन के बाएं पैर में लगी, जिससे वह गिर गया और तुरंत गिरफ़्तार किया गया।
पुलिस ने नंदन को तुरंत गिरफ्तार कर स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार हेतु ले जाया। अस्पताल में उसकी पैर की चोट का इलाज किया गया और उसे सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखी गई जेल में भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि नंदन के खिलाफ अब तक दर्ज कई FIRs हैं, और इस एन्काउंटर के बाद अतिरिक्त साक्ष्य एकत्रित करने की प्रक्रिया चल रही है। स्थानीय लोगों ने इस कदम को सराहा, लेकिन कुछ ने एन्काउंटर की वैधता पर प्रश्न उठाए।
घटना स्थल पर मौजूद स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने एन्काउंटर के दौरान शोर और गोलीबारी की आवाज़ सुनी, लेकिन कोई भी स्पष्ट दृश्य नहीं देख पाए। उन्होंने कहा कि नंदन अक्सर रात के समय इस क्षेत्र में घूमता था और कई बार स्थानीय युवाओं को धमकाता था। कई महिलाओं ने इस क्षेत्र में उसकी उपस्थिति को डरावना बताया और पुलिस की कार्रवाई को समर्थन दिया।
पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि एन्काउंटर के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और कोई अनावश्यक बल प्रयोग नहीं किया गया। विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि नंदन के खिलाफ अब तक की जांच में कई गवाहों के बयान और फोरेंसिक रिपोर्टें शामिल हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एन्काउंटर के बाद नंदन के सहयोगियों की पहचान कर उन्हें भी गिरफ्तार करने की प्रक्रिया चल रही है।
राज्य सरकार ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के मामलों में कोई भी लापरवाही नहीं सहन की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस पर एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने स्थानीय पुलिस को सराहा और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की आशा व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
विरोधी दलों ने एन्काउंटर को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया हो सकता। उन्होंने मांग की कि नंदन के खिलाफ सभी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए जाएँ और न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाए। कुछ मानवाधिकार संगठनों ने भी एन्काउंटर की वैधता पर जांच की माँग की, यह तर्क देते हुए कि नाबालिग के साथ अपराध के मामले में न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आर्थिक दृष्टिकोण से, इस घटना ने स्थानीय व्यापारियों को भी प्रभावित किया। एन्काउंटर के बाद इलाके में सुरक्षा बलों की उपस्थिति बढ़ गई, जिससे यात्रियों की संख्या में गिरावट आई। स्थानीय बाजार में ग्राहकों की कमी के कारण कई दुकानें अस्थायी रूप से बंद हो गईं। यह दर्शाता है कि सामाजिक असुरक्षा के मुद्दे आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
समाजिक स्तर पर, इस घटना ने महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर किया। कई नारी संगठनों ने इस घटना को एक चेतावनी के रूप में देखा और महिलाओं के खिलाफ किसी
Updated: September 22, 2026
The rapid “encounter” underscores how frontline police now lean on lethal force to signal zero‑tolerance, but it also fuels a legitimacy crisis that could erode public trust if judicial scrutiny is bypassed. Meanwhile, the lingering economic slowdown in Jamui shows that even decisive crackdowns can backfire locally