प्रस्तावित प्री‑SIR रोल का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को निरंतर अद्यतन रखना है। इसके तहत प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में जनसंख्या परिवर्तन, प्रवासन और वयोवृद्ध मतदाता वर्ग को ध्यान में रखते हुए सूची को समय‑समय पर अपडेट किया जाएगा। यह प्रणाली अब तक के डिजिटल रोल‑ऑफ़ की तुलना में अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित मानी जा रही है। यदि इसे लागू किया जाता है, तो चुनाव आयोग को मतदान प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सटीक डेटा उपलब्ध कराना संभव हो सकेगा, जिससे मतगणना में कमी, गड़बड़ी और अनुचित प्रभाव को रोका जा सकेगा।
खरगे ने आज के मंच में बताया कि प्री‑SIR रोल के साथ बैलेट मतदान प्रणाली को अपनाने से मतदाता की पहचान प्रक्रिया मजबूत होगी। कागज बैलेट को इलेक्ट्रॉनिक डेटा के साथ मिलाकर दोहरी पुष्टि की जा सकेगी, जिससे चुनाव परिणामों में हेरफेर की संभावना घटेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल तकनीकी त्रुटियों को न्यूनतम करेगा, बल्कि मतदाता को उनके मतदान अधिकार के बारे में स्पष्ट जानकारी भी प्रदान करेगा।
इंडिया ब्लॉक के अन्य प्रमुख नेताओं ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन जताया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनीता अय्यर ने कहा कि बैलेट प्रणाली मतदाता के अधिकारों को संरक्षित करती है और इसे लागू करने से चुनाव में सार्वजनिक भरोसा पुनः स्थापित होगा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम है।
बजट 2024‑25 में इस योजना के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधानों का भी उल्लेख किया गया। चुनाव आयोग ने बताया कि बैलेट प्रणाली के लिए आवश्यक मशीनरी, कागज सामग्री और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाएगा। इस प्रक्रिया में विभिन्न राज्यों के चुनाव अधिकारी, सुरक्षा बल और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को मिलकर काम करना होगा, जिससे समुचित निगरानी और निष्पादन संभव हो सके।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है, परन्तु सरकार की मौजूदा नीति दस्तावेज़ों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग पर भरोसा दर्शाया गया है। विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, विशेषकर भाजपा के मुख्य कार्यकारियों ने कहा कि बैलेट प्रणाली को अपनाना अनावश्यक खर्च और समय की बर्बादी है। उन्होंने इस प्रस्ताव को राजनीतिक रणनीति का हिस्सा कहा, जो चुनावी माहौल को उकसाने के लिए किया गया है।
बजट प्रक्रिया के दौरान वित्त मंत्रालय ने बताया कि यदि बैलेट प्रणाली को अपनाया जाता है तो यह 2026 के लोकसभा चुनावों तक पूर्ण रूप से लागू हो सकेगा। इस दौरान विभिन्न राज्य चुनाव आयोगों को प्री‑SIR रोल को अपडेट करने की प्रक्रिया में सहयोग देना होगा। इसके अलावा, निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए स्वतंत्र निरीक्षण टीमों की नियुक्ति भी प्रस्तावित है।
विपक्षी दलों ने इस पर अपने-अपने विशिष्ट बिंदु रखे। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ने पहले ही कई बार सफलतापूर्वक काम किया है और इसके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं है। अन्य छोटे दलों ने इस प्रस्ताव को आवश्यक सुधार कहा और इसे जल्द लागू करने की मांग की।
आर्थिक विश्लेषकों ने इस कदम के संभावित प्रभाव पर प्रकाश डाला। यदि बैलेट प्रणाली अपनाई जाती है तो कागज की लागत, प्रिंटिंग और लॉजिस्टिक खर्चों में वृद्धि हो सकती है। साथ ही, मतगणना में समय बढ़ने की संभावना है, जिससे चुनाव परिणाम की घोषणा में देरी हो सकती है।
Updated: September 30, 2026
Insight: The proposal seeks to update voter lists continuously and introduce paper ballots, aiming to enhance verification and reduce procedural errors. Implementing these measures could increase transparency and accountability in India’s electoral process.
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