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सूर्यवाणी आवासीय सोसायटी में वरिष्ठ व विशेष आवश्यकताओं वाले निवासियों के लिए हैंडरेल‑लिफ्ट जैसे पहुंच‑सुविधा की कमी

शहर के मध्य स्थित “सूर्यवाणी आवासीय सोसायटी” में पिछले महीने आयोजित एक विशेष सर्वेक्षण ने यह उजागर किया कि अपार्टमेंट के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध पहुंच-सुविधाओं की कमी वरिष्ठ नागरिकों और विशेष आवश्यकताओं वाले निवासियों के दैनिक जीवन को कैसे प्रभावित कर रही है। सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, केवल 37

प्रतिशत अपार्टमेंट में हाथों के लिए अनुकूल हैंडरेलों की पर्याप्त व्यवस्था है, जबकि पूल क्षेत्र में लिफ्ट की अनुपलब्धता ने कई वरिष्ठ नागरिकों को नियमित जल कसरत से वंचित कर दिया है। इस रिपोर्ट ने सोसायटी के प्रबंधन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का आह्वान किया।

सूर्यवाणी सोसायटी की निर्माण योजना 1998

में शुरू हुई थी, जब भारत में वृद्धावस्था के सामाजिक सुरक्षा के बारे में जागरूकता अभी शुरुआती चरण में थी। उस समय के नियमन में विशेष रूप से दिव्यांग या बुज़ुर्ग निवासियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं थे। समय के साथ कई अन्य आवासीय परियोजनाओं

ने रैम्प, एलेवेटर और टॉइलेट में अनुकूलन जोड़ना शुरू किया, परंतु सूर्यवाणी ने मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े परिवर्तन किए बिना केवल सतही सुधार किए। इस पृष्ठभूमि ने आज की समस्या को और जटिल बना दिया है।

पिछले साल के शहरी विकास प्राधिकरण (UDA) द्वारा जारी “सुलभ आवास” मानक में बताया गया है

कि सभी सार्वजनिक और निजी आवासीय इकाइयों को न्यूनतम पहुंच मानकों को पूरा करना अनिवार्य है। इन मानकों में रैंप, हैंडरेल, बाथरूम में ग्रैब बार, और स्विमिंग पूल में लिफ्ट जैसी सुविधाओं का समावेश अनिवार्य किया गया है। हालांकि, कई मौजूदा संरचनाओं को इन मानकों के अनुरूप बनाना कठिन माना जाता

है, क्योंकि निर्माण की मूल योजना में इन सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा गया था। यह ही कारण है कि कई सोसायटी, विशेषकर पुरानी, इन नियमों को पूरी तरह अपनाने में हिचकिचा रही हैं।

सूर्यवाणी सोसायटी में पिछले दो हफ्तों के दौरान आयोजित “पहुंच सर्वेक्षण” में 120 वरिष्ठ नागरिकों और 45 विशेष

आवश्यकताओं वाले परिवारों से साक्षात्कार किया गया। सर्वेक्षण में अधिकांश ने बताया कि सीढ़ियों के बिना एलेवेटर की कमी, बाथरूम में ग्रिपर की अनुपस्थिति, और लिफ्ट के अभाव ने उन्हें दैनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करवा दिया। कुछ ने यह भी बताया कि इन बाधाओं के कारण उन्होंने सामाजिक गतिविधियों

में भाग लेना छोड़ दिया, जिससे सामाजिक अलगाव बढ़ा। सर्वेक्षण डेटा के अनुसार, 68 प्रतिशत respondents ने कहा कि यदि ये सुविधाएँ उपलब्ध हों तो वे अपनी जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखेंगे।

सोसायटी के प्रबंधक, श्रीमती रजनी शेट्टी ने इस सर्वेक्षण के परिणामों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “हमारी सोसायटी

ने हमेशा निवासियों की सुरक्षा और सुख-समृद्धि को प्राथमिकता दी है, परंतु इस बार हमें अपनी कमियों का सामना करना पड़ रहा है। हम तत्काल उपायों पर विचार कर रहे हैं, जैसे कि मुख्य द्वार पर रैंप स्थापित करना और पूल क्षेत्र में लिफ्ट के लिए तकनीकी अध्ययन शुरू करना।” उन्होंने

यह भी कहा कि बजट सीमाओं और संरचनात्मक बाधाओं को देखते हुए, सुधार कार्यों में चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ा जाएगा।

सोसायटी के प्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिकों की वकालत करने वाले “वृद्ध सशक्तिकरण मंच” के अध्यक्ष, श्याम सिंह ने भी इस पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि “वृद्ध नागरिकों के लिए

सुरक्षा और सुविधा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अधिकार है। यदि सोसायटी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाती, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध जाता है।” मंच ने सोसायटी को 30 दिन के भीतर एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने का अनुरोध किया, जिसमें वित्तीय स्रोत और

समय-सारिणी स्पष्ट रूप से दर्शाए जाएँ।

विकासकर्ता “नवधारा कंस्ट्रक्शन” के मुख्य अभियंता, अभिषेक वर्मा ने तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मौजूदा संरचना में पूल लिफ्ट स्थापित करने के लिए मुख्यतः दो विकल्प हैं: एक तो मौजूदा पूल किनारे पर हल्का लिफ्ट सिस्टम स्थापित करना, या फिर पूल के नीचे

एक नई एलेवेटर शाफ्ट बनाना। दोनों ही विकल्पों में अतिरिक्त लागत और समय लगेगा, परंतु दीर्घकालिक लाभ अधिक होगा। वर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि हैंडरेलों और ग्रैब बार की स्थापना में विशेष सामग्री की आवश्यकता नहीं है, और यह काम कुछ हफ्तों में पूर्ण किया जा सकता है।

सरकारी योजना

“स्मार्ट सीनियर हाउसिंग” के तहत, वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर में सुधार हेतु सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत, यदि सोसायटी इन सुधारों को लागू करती है, तो वह लगभग 40 प्रतिशत तक की लागत सरकारी अनुदान के रूप में प्राप्त कर सकती है। इस पहल के

Updated: October 10, 2026

The survey exposes a silent crisis: without basic accessibility tweaks, aging residents are being nudged out of community life, turning their homes into subtle prisons.
If the society taps into the “Smart Senior Housing” subsidy, a modest retrofit could flip the script—from exclusion to a model of

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