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आंध्र प्रदेश में अनुबंधित स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल, सरकार‑संकाय ने संवाद‑आधारित अस्थायी रोक का ऐलान किया

आंध्र प्रदेश में अनुबंधित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा आयोजित हड़ताल को सरकार के साथ हुए मध्यस्थता बैठक के बाद अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस कदम से अस्पतालों में सेवाओं का सामान्य संचालन जारी रहेगा, जबकि कर्मचारियों की प्रमुख मांगें अभी भी बरकरार हैं। इस निर्णय को स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख ने “संवाद की दिशा में एक सकारात्मक कदम” कहा, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर संभावित व्यवधान को न्यूनतम किया जा सके।

पिछले दो हफ्तों से अनुबंधित स्वास्थ्य कर्मी, जो मुख्यतः सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत हैं, ने वेतन वृद्धि, नियत कार्यकाल और सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग करते हुए हड़ताल शुरू की थी। उन्होंने बताया कि मौजूदा अनुबंध शर्तें आर्थिक दबाव और नौकरी की असुरक्षा को बढ़ा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। इस हड़ताल ने कई जिलों में रोगी भर्ती प्रक्रियाओं में बाधा उत्पन्न की थी।

वर्ष 2022 में आंध्र प्रदेश ने सार्वजनिक स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या को 15 प्रतिशत बढ़ाने की योजना घोषित की थी, लेकिन अनुबंधित कर्मियों के लिए नई नीति अभी तक स्पष्ट नहीं हुई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में अनुबंधित कर्मचारियों का प्रतिशत 30 प्रतिशत से अधिक है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। इस संदर्भ में, कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें स्थायी पदों की कमी और अनुचित कार्य शर्तों का सामना करना पड़ रहा है।

हड़ताल की पहली तारीख 5 जुलाई को निर्धारित की गई थी, जब लगभग 3,500 अनुबंधित कर्मी विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं में कार्य रोकने की तैयारी कर रहे थे। हड़ताल की घोषणा के बाद, रोगी संख्या में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही सीमित थीं। कई निजी अस्पतालों ने भी अस्थायी रूप से अतिरिक्त रोगियों को स्वीकार करने के लिए अपनी क्षमता बढ़ा दी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव बना।

अधिकारियों ने कहा कि हड़ताल का आर्थिक प्रभाव व्यापक रूप से महसूस किया जाएगा, विशेषकर छोटे नगरों और गाँवों में जहां स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भरता अधिक है। राज्य आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र का योगदान राज्य की GDP में लगभग 4.5 प्रतिशत है, और इस प्रकार की हड़ताल से आर्थिक उत्पादन में संभावित गिरावट 0.2 प्रतिशत तक हो सकती है। इसके अतिरिक्त, रोगी प्रवाह में व्यवधान के कारण अस्पतालों के राजस्व में भी कमी आ सकती है।

हड़ताल को रोकने के लिए सरकार ने कई चरणों में बातचीत का प्रस्ताव रखा। पहले चरण में, स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों को अस्थायी वेतन वृद्धि और कार्यकाल की स्पष्टता देने का आश्वासन दिया। दूसरे चरण में, सामाजिक सुरक्षा लाभों के विस्तार पर चर्चा करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें स्वास्थ्य बीमा और पेंशन योजना का समावेश था। इन प्रस्तावों को कर्मचारियों के प्रतिनिधि समूह ने “विचाराधीन” कहा, जबकि हड़ताल रोकने की इच्छा स्पष्ट की।

ज्यूरिडिकल एडवाइजरी कमिटी (JAC) के प्रमुख ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य कर्मचारियों की मूलभूत मांगों को पूरी तरह से पूरा करना है, न कि केवल अस्थायी समाधान देना। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हड़ताल को रोकना “विचार विमर्श का अवसर” है, न कि मांगों से समझौता। JAC ने कहा कि वे सरकार को “सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक समाधान” प्रदान करने की उम्मीद करते हैं, और इस दिशा में आगे की चर्चा का आह्वान किया।

विराम के बाद भी, कई स्वास्थ्य कर्मी ने अपने अनुबंध की शर्तों में स्थायी परिवर्तन की माँग को दोहराया। उन्होंने कहा कि केवल अस्थायी वेतन वृद्धि से समस्या का मूल समाधान नहीं होगा। कर्मचारियों के समूह ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि “सभी अनुबंधित कर्मचारियों को स्थायी पद में परिवर्तित करने की नीति को तुरंत लागू किया जाए”। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता के लिए कर्मचारियों की स्थिरता अनिवार्य है।

राज्य सरकार ने प्रतिक्रिया में कहा कि वे “सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वित रूप से काम करेंगे” और “सभी मांगों को समझते हुए उचित समाधान खोजेंगे”। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में निरंतरता और रोगियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी, और “किसी भी प्रकार के सामाजिक असंतोष को रोकने के लिए संवाद को जारी रखा जाएगा”। उन्होंने यह भी कहा कि “राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए, सभी प्रस्तावों का संतुलित मूल्यांकन किया जाएगा”।

वित्त विभाग के अधिकारी ने कहा कि अनुबंधित कर्मियों की वेतन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए अतिरिक्त बजट आवंटन की आवश्यकता होगी, जिससे राज्य के वित्तीय संतुलन पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह संकेत दिया कि 2027 के वित्तीय योजना में इस दिशा में अतिरिक्त निधि शामिल करने की संभावना है, लेकिन इसका निर्धारण वार्षिक बजट प्रक्रिया के बाद ही होगा।

सामाजिक संगठनों और रोगी अधिकार समूहों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कई NGOs ने कहा कि अनुबंधित कर्मियों की स्थाय


A temporary truce was reached after talks with the Andhra Pradesh government, halting the strike by contract health workers and keeping hospital services running, while their demands for higher pay, job security and social‑security benefits remain unresolved. The episode highlighted the state’s reliance on contract staff—over 30% of the workforce—and underscored the need for a long‑term policy to convert these workers to permanent posts.

The temporary halt signals a cautious compromise, but the real test lies in how quickly the state can translate talks into lasting contracts—otherwise, the cycle of unrest will simply reset. If the government truly commits to permanent status for these workers, it could stabilize rural health delivery and prevent the next round of service disruptions that erode

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