माना जा रहा है, जहाँ कलाकारों ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर स्थानीय जनता के साथ संवाद स्थापित किया। इस अवसर पर दोनों सितारों ने छठ पूजा के पावन माहौल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे सामाजिक‑सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना को बढ़ावा मिला।
‘द वन’ की कहानी एक युवा उद्यमी के संघर्ष और सफलता की यात्रा को दर्शाती
है, जिसके लिए फिल्म निर्माताओं ने कई शहरों में टूर किया है। पटना में इस प्रमोशन को लेकर कई मीडिया हाउस और स्थानीय दिग्गजों ने पहले से ही योजना बनाई थी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कार्यक्रम का आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव अधिकतम हो। गंगा आरती का मंचन, जो प्रतिवर्ष छठ पूजा के दौरान बड़े उत्साह
से आयोजित होता है, इस बार विशेष रूप से फिल्म‑प्रचार के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे स्थानीय सांस्कृतिक परम्परा और बॉलीवुड के व्यापारिक मॉडल का समन्वय स्पष्ट हुआ।
सिद्धार्थ मल्होत्रा ने आरती के बाद उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा, “छठी मैया की जय। हम यहाँ आपके बीच उपस्थित होकर बहुत प्रसन्न हैं। हमारी नई फ़िल्म
‘द वन’ एक ऐसी कहानी पेश करती है जो आज की युवा पीढ़ी के संघर्ष को दर्शाती है।” उन्होंने फिल्म की थीम को सामाजिक उद्यमिता और नवाचार के साथ जोड़ा, जिससे दर्शकों को फिल्म के सामाजिक संदेश की ओर इशारा किया गया। तमन्ना भाटिया ने भी इसी स्वर में अपने विचार रखे, उन्होंने कहा, “यह फ़िल्म सिर्फ
मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रेरणा भी देती है। हम आप सभी के समर्थन के लिए आभारी हैं।” दोनों ने दर्शकों से उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया प्राप्त की।
गंगा आरती के दौरान कलाकारों की उपस्थिति ने स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ पहुँचाया। मरीन ड्राइव के आसपास के स्टालों और खानपान की दुकानों में भीड़ में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई। स्थानीय होटल एवं
ट्रांसपोर्ट सेवा प्रदाताओं ने इस बड़े आयोजन के कारण अपनी आय में 20‑30 प्रतिशत तक वृद्धि की सूचना दी। इस तरह के बड़े‑स्तर के प्रचार कार्यक्रम अक्सर शहर के पर्यटन और आतिथ्य उद्योग को सक्रिय बनाते हैं, जिससे अल्पावधि में आर्थिक लाभ की आशा बढ़ती है।
पटना के नागरिकों ने भी इस कार्यक्रम को अत्यंत सराहनीय माना।
कई दर्शकों ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के सितारे अपने घर के निकट देखना उनके लिए गर्व का कारण है। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो और फोटो ने जल्दी ही वायरल हो कर व्यापक चर्चा उत्पन्न की, जिससे फिल्म के प्रचार में अतिरिक्त डिजिटल प्रभाव मिला। इस प्रकार की सामुदायिक भागीदारी स्थानीय सांस्कृतिक पहचान
को सुदृढ़ करती है और राष्ट्रीय स्तर पर पटना को एक प्रमुख प्रमोशन स्थल के रूप में स्थापित करती है।
फिल्म के निर्माता और वितरण कंपनी के प्रवक्ताओं ने इस अवसर को व्यवसायिक दृष्टिकोण से भी महत्व दिया। उन्होंने बताया कि गंगा आरती जैसे धार्मिक कार्यक्रमों में कलाकारों की भागीदारी से फ़िल्म को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ
जोड़ा जा सकता है, जिससे दर्शकों के मन में सकारात्मक छवि बनती है। वितरण रणनीति में उन्होंने कहा कि इस तरह के स्थानीय कार्यक्रमों को डिजिटल मार्केटिंग के साथ संयोजित कर, टिकट बिक्री में 15‑20 प्रतिशत की संभावित वृद्धि देखी जा सकती है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा की टीम ने कार्यक्रम के बाद स्थानीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि
पटना के दर्शकों ने उन्हें गर्मजोशी से स्वीकार किया और यह शहर फ़िल्म के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पटना के युवाओं का उत्साह और ऊर्जा फिल्म की कहानी से जुड़ी हुई है, जिससे दोनों पक्षों के बीच एक सुदृढ़ संबंध स्थापित हुआ। तमन्ना भाटिया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर
इस कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए फ़ॉलोअर्स को धन्यवाद किया और कहा कि वह भविष्य में भी इस तरह के सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेती रहेंगी।
राजनीतिक पक्ष से इस कार्यक्रम पर कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं मिली, परन्तु राज्य सरकार की संस्कृति विभाग ने इस प्रकार के बड़े‑पैमाने पर आयोजित कार्यक्रमों को स्थानीय संस्कृति
के संवर्धन के रूप में सराहा। उन्होंने बताया कि पटना में इस तरह के इवेंट्स से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलता है बल्कि स्थानीय कलाकारों और व्यवसायियों को भी नई संभावनाएँ मिलती हैं। आर्थिक दृष्टिकोण से यह कहा जा सकता है कि इस प्रकार के बड़े प्रमोशन से स्थानीय अर्थव्यवस्था में अस्थायी लेकिन महत्वपूर्ण उछाल आता
है।
समाजशास्त्रियों ने इस घटना को सामाजिक सामंजस्य के एक उदाहरण के रूप में विश्लेषित किया। उन्होंने कहा कि जब फिल्मी सितारे धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं, तो यह सामाजिक वर्गों के बीच की दूरी को घटाता है और सांस्कृतिक एकीकरण को प्रोत्साहित करता है। इस प्रकार की घटनाएँ मीडिया की भूमिका को
Updated: September 20, 2026
The stunt shows how Bollywood now treats sacred festivals as high‑impact ad‑spaces, turning devotional gatherings into launchpads that fuse regional pride with national box‑office ambitions.
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