पी. श्रीनिवास के परिवार की आर्थिक स्थिति भी इन व्यापक समस्याओं से अलग नहीं थी। स्थानीय स्रोतों के अनुसार, श्रीनिवास ने पिछले दो सालों में तीन बार बैंकों से ऋण लिया, लेकिन निरंतर खराब फसल और बाजार में कीमतों में गिरावट के कारण वह ऋण चुकाने में असमर्थ रहा। कई बार वह अतिरिक्त काम करने के लिए पड़ोस के घरों में मजदूरी भी करता रहा, परंतु आय में स्थायी सुधार नहीं आया। इन आर्थिक कठिनाइयों ने परिवार के भीतर तनाव को बढ़ा दिया, जिसके परिणामस्वरूप इस हृदय विदारक घटना का उत्पन्न होना संभव हो सका।
रात 22 अक्टूबर को गांव में हुई इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। चिल्लाकल्लु पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने बताया कि श्रीनिवास ने घर के भीतर एक हीरोइन के प्रयोग के बाद बच्चों को चोट पहुंचाई और फिर खुद पर आत्मघाती प्रयास किया। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूदा सबूत, जैसे रक्त के धब्बे, फायरआर्म के निशान और मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड को सुरक्षित किया है। जांच के शुरुआती चरण में यह भी जांचा जा रहा है कि क्या श्रीनिवास ने कोई मानसिक स्वास्थ्य सहायता लेने की कोशिश की थी।
स्थानीय चिकित्सालय में पहुंचाए गए बच्चों की चिकित्सा रिपोर्ट में बताया गया कि पुत्री की मृत्यु का कारण सिर में गंभीर चोटें और रक्तस्राव था, जबकि पुत्र को कई हड्डियों में फ्रैक्चर और मस्तिष्क में रक्तस्राव के कारण इंटेंसिव केयर यूनिट में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलती तो दोनों मामलों में परिणाम भिन्न हो सकते थे। यह तथ्य पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सबूत बन सकता है, जिससे श्रीनिवास के इरादों और कार्रवाई के क्रम को स्पष्ट किया जा सके।
पुलिस ने श्रीनिवास को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी रखी है। प्रारम्भिक बयान में श्रीनिवास ने कहा कि वह आर्थिक दबाव और अपने बच्चों की भविष्य की असुरक्षा से अभिभूत था, जिससे उसने यह अत्याचार किया। हालांकि, इस बयान की सत्यता को जांच के दौरान पुष्टि करने की आवश्यकता है। पुलिस ने स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और पड़ोसियों से भी पूछताछ की है, ताकि यह समझा जा सके कि क्या पहले से कोई चेतावनी संकेत या तनाव के लक्षण दिखे थे।
गांव के वरिष्ठ पंछी (वृद्ध) ने कहा कि श्रीनिवास पहले भी अक्सर तनावग्रस्त दिखते थे, लेकिन वह कभी हिंसा की ओर नहीं मुड़ते थे। उन्होंने यह भी बताया कि श्रीनिवास ने कई बार गांव के सामाजिक क्लब में आर्थिक मदद की माँग की थी, परंतु कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई। यह बात स्थानीय सामाजिक संगठनों के लिए चिंताजनक संकेत है, जो अक्सर ग्रामीण स्तर पर आर्थिक सहायता की कमी को लेकर आलोचना की जाती है।
स्थानीय प्रशासन ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि ऐसी त्रासदी को रोकने के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल को सुदृढ़ करने की जरूरत है। जिलाधिकारी ने बताया कि ग्राम पंचायत के माध्यम से किसानों को ऋण माफी, कर्ज पुनर्संरचना और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवाएं प्रदान करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए तत्कालिक उपायों की आवश्यकता है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में सायकॉलॉजिकल काउंसिलिंग सेंटर्स की स्थापना शामिल है।
राज्य सरकार के कृषि विभाग ने कहा कि इस वर्ष से किसानों को सस्ते बीज, सिचाई सुविधाएँ और बाजार मूल्य स्थिरीकरण के लिए नई नीतियां लागू की जा रही हैं। हालांकि, इन नीतियों की कार्यान्वयन गति और वास्तविक लाभ किसानों तक पहुँचाने में अभी कई चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नीतियों का प्रभावी कार्यान्वयन तभी संभव है जब जमीन मालिक, किरायेदार किसान और राज्य के बीच स्पष्ट संवाद स्थापित हो और ऋण चक्र को तोड़ा जा सके।
Insight: The tragedy underscores how chronic agrarian debt can push desperate farmers from silent suffering into catastrophic violence, turning personal ruin into a public health crisis. Unless rural credit reforms are paired with accessible mental‑health networks, such isolated breakdowns will keep resurfacing across India’s farming heartland.