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जामुई में नाबालिग शोषण वीडियो के बाद पुलिस ने जांच शुरू, तेज प्रताप यादव ने सरकार से जवाब की मांग की।

बिहार के जमुई जिले में 19 सितंबर को दो नाबालिग छात्रों के साथ कथित दुरुपयोग का वीडियो सोशल मीडिया पर 20 सितंबर को वायरल होने के बाद, मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। तत्कालीन घटनास्थल से प्राप्त फुटेज ने व्यापक प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जिससे पुलिस ने तुरंत जांच प्रारम्भ कर ली। इस बीच जनशक्ति जनता दल (जेजे) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने सरकार को स्पष्ट उत्तर देने का अनुरोध किया, अन्यथा भूख हड़ताल का इशारा किया।

जमुई में इस प्रकार के सामाजिक अपराधों की पृष्ठभूमि पहले भी कई बार उजागर हुई है। पिछले दो दशकों में जिले में बाल यौन शोषण के मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया प्रमुख कारण रही है। सामाजिक संगठनों ने कहा है कि जागरूकता की कमी, शिक्षा का अभाव और आर्थिक तंगी ने इस तरह के अपराधों को जन्म दिया है।

वर्तमान वीडियो के प्रसारण से पहले भी स्थानीय मीडिया ने इस जिले में समान घटनाओं की रिपोर्टिंग की थी, परन्तु अक्सर पुलिस कार्रवाई में देरी या निष्क्रियता की ही आलोचना सामने आई। इस संदर्भ में, राज्य सरकार ने 2019 में बाल सुरक्षा बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी, लेकिन इस बोर्ड की प्रभावशीलता को लेकर अब भी सवाल उठते रहे हैं।

जमा हुआ वीडियो स्पष्ट रूप से दो नाबालिग छात्रों को एकान्त स्थान पर ले जाता दिखाता है, जहाँ उनके साथ अनुचित शारीरिक संपर्क के संकेत मिलते हैं। वीडियो में दिखाए गए अभिव्यक्तियों और शारीरिक भाषा से यह स्पष्ट है कि दोनों बच्चे अत्यधिक भय और असहजता का अनुभव कर रहे थे। इस घटना को लेकर स्थानीय पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर लिया और प्राथमिक जांच के तहत संदिग्ध को हिरासत में ले लिया।

जिला प्रशासन ने बताया कि वीडियो के प्रसार के बाद स्थानीय स्तर पर कई नागरिक समूहों ने समर्थन सभा आयोजित की, जिसमें पीड़ित के परिवार को नैतिक समर्थन और न्याय की मांग करने का आग्रह किया गया। इसके अतिरिक्त, सामाजिक नेटवर्क पर कई उपयोगकर्ताओं ने इस घटना को ‘सुरक्षा लापरवाही’ और ‘कानून की अंमलबजारी में चूक’ के रूप में लेबल किया।

पुलिस ने कहा कि जांच के प्रारम्भिक चरण में कई गवाहों से बयानों की गवाही ली जा रही है और वीडियो के स्रोत को ट्रैक करने के लिए फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि वीडियो में दिखाए गए आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपी पर बाल यौन शोषण के तहत सख्त सजा लागू की जाएगी। इस बीच, पुलिस ने स्थानीय मीडिया को अनावश्यक अटकलें लगाने से बचने का निर्देश भी जारी किया।

तेज प्रताप यादव ने इस घटना पर सार्वजनिक रूप से सरकार से तुरंत जवाब देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं करती, तो हम जनता को भूख हड़ताल के लिए प्रेरित करेंगे, जिससे सामाजिक असंतोष को और बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जनता दल ने इस मुद्दे को लेकर एक विशेष दलील तैयार की है, जिसमें बाल सुरक्षा के लिए कड़े कदमों की माँग की गई है।

सरकार के प्रवक्ता ने तेज प्रताप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य ने पहले ही इस मामले में कार्रवाई कर ली है और जांच को तेज़ी से आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी भी प्रकार की अनैतिक घटना को गंभीरता से लेती है और दोषी को न्याय के कटघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

विरोधी दलों ने भी इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए उठाते हुए कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में बाल सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी है। कुछ सांसदों ने संसद में इस केस को लाने का प्रस्ताव रखा, जबकि अन्य ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य स्तर पर विशेष विधायी उपायों की जरूरत है।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो इस तरह की सामाजिक समस्याएँ सामाजिक कल्याण के खर्चे में वृद्धि का कारण बनती हैं। बाल यौन शोषण के मामलों में पीड़ितों को दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक उपचार की आवश्यकता होती है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट पर अतिरिक्त बोझ डालता है। इसके अलावा, सामाजिक अस्थिरता और सार्वजनिक विश्वास में कमी से निवेशकों की रुचि कम हो सकती है, जिससे स्थानीय विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

सामाजिक प्रभाव की बात करें तो ऐसे मामलों से सामाजिक विश्वास का क्षरण होता है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में। माता‑प

Updated: September 22, 2026


A video of alleged sexual abuse of two minor students in Jamui went viral, prompting immediate police action, a pending investigation and public outcry, with JD(U) chief Tej Pratap Yadav demanding a swift government response or threatening a hunger strike. The case highlights a rise in child‑sex crimes in the district, long‑standing policing lapses and calls for stronger child‑protection measures.

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