ने बिना पूर्व सूचना के उसके निकट आकर तेज़ी से ओवरटेक करने का प्रयास किया, जिससे दोनोँ जहाज़ों के बीच टक्कर हुई। टक्कर के परिणामस्वरूप भारतीय जहाज़ को मामूली क्षति हुई, जबकि पाकिस्तानी पनडुब्बी‑सहायक को गंभीर क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली। इस घटना पर भारत ने कूटनीतिक स्तर पर कड़ा विरोध
दर्ज किया और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
INS कोलकाता, भारत के सबसे आधुनिक वर्ग के डेस्टॉयरों में से एक, 6000 नॉटिकल मील की रेंज और 98 मीटर की लंबाई के साथ विस्तृत समुद्री सतह पर परिचालन करने के लिए तैयार है। इसका निर्माण भारतीय नौसेना की स्वायत्तता
को सुदृढ़ करने हेतु किया गया है और इसमें एंटी‑एयर, एंटी‑सतह और एंटी‑सबमरीन क्षमताओं का समन्वय है। वहीं PNS हुनैन, पाकिस्तान की नई पनडुब्बी‑सहायक परियोजना का हिस्सा है, जिसकी रेंज और शस्त्रागार भी उल्लेखनीय माना जाता है, परन्तु सार्वजनिक तौर पर इसकी तकनीकी विशिष्टताओं पर सीमित जानकारी उपलब्ध है। दोनों जहाज़ों के
तकनीकी मानकों की तुलना से पता चलता है कि दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में उच्चस्तरीय समुद्री क्षमताओं का विकास किया है।
समुद्री क्षेत्र में भारत‑पाकिस्तान के बीच पहले भी कई तनावपूर्ण घटनाएँ दर्ज हुई हैं, परन्तु 2000 के दशक के बाद इस प्रकार की सीधी टक्कर दुर्लभ रही है। 1999
के कश्मीर युद्ध के बाद समुद्री सीमाओं के सटीक निर्धारण और समुद्री सुरक्षा समझौतों का पालन दोनों देशों द्वारा किया गया था। इस टक्कर से पहले, 2022 में भारतीय नौसेना ने दक्षिण‑पूर्व एशिया में एक समान घातक टक्कर से बचने के लिए सतत रडार प्रणाली को उन्नत किया था। ऐसे संदर्भ
में वर्तमान घटना दोनों देशों के बीच समुद्री मानदंडों के पालन पर गंभीर प्रश्न उठाती है।
घटना के तुरंत बाद, भारतीय नौसेना ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि INS कोलकाता का मिशन किसी भी प्रकार के खतरे को रोकने और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए था।
उन्होंने कहा कि PNS हुनैन ने अनधिकृत निकटता बरती और जबरन ओवरटेक करने की कोशिश की, जिससे टक्कर अनिवार्य हो गया। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने इस घटना को “अत्यधिक अनियमित” कहा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया।
पाकिस्तान के नौसैनिक कमान ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए
कहा कि उनका जहाज़ समुद्री ट्रैफ़िक के सामान्य प्रवाह को बाधित नहीं कर रहा था और टक्कर का कारण भारतीय जहाज़ की अति‑सतर्कता के कारण हुआ। उन्होंने कहा कि PNS हुनैन ने केवल सुरक्षित दूरी बनाए रखने के प्रयास में ही गति बदल दी, जिससे अनपेक्षित टकराव हुआ। इस बयान में उन्होंने
किसी भी प्रकार की कूटनीतिक टिप्पणी से बचते हुए कहा कि दोनों पक्षों को इस घटना की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मंच का सहारा लेना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत, समुद्र में जहाज़ों को एक-दूसरे की गति, दिशा और दूरी का सम्मान करना अनिवार्य है। संयुक्त राष्ट्र
समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के अनुच्छेद 17 और 20 में जहाज़ों को “सुरक्षित दूरी” बनाए रखने की आवश्यकता स्पष्ट की गई है। भारत और पाकिस्तान दोनों ने इस संधि के सदस्य हैं, इसलिए इस टक्कर को अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे में जांचना आवश्यक माना जा रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है
कि यदि इस घटना का स्वतंत्र जांच नहीं किया गया तो भविष्य में समुद्री संघर्ष की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं।
इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान को औपचारिक प्रोटोकॉल नोटिस भेजा, जिसमें टक्कर के सभी तथ्यों को दर्ज कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की मांग की गई।
भारत की कूटनीतिक टीम ने कहा कि यह नोटिस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानदंडों के उल्लंघन पर आधारित है और इसमें क्षतिपूर्ति तथा औपचारिक माफ़ी की माँग भी शामिल है। पाकिस्तान की कूटनीतिक टीम ने अभी तक इस नोटिस का औपचारिक जवाब नहीं दिया, लेकिन एक स्रोत ने कहा कि वे आंतरिक जांच
प्रक्रिया में हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मंच पर चर्चा की संभावना है।
राजनीतिक रूप से इस टक्कर ने दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव को और बढ़ा दिया है। भारत‑पाकिस्तान संबंधों में 2024 के बाद से कई कूटनीतिक कदम
Updated: September 19, 2026
The collision highlights operational risks as both navies operate advanced warships in a contested maritime zone, prompting scrutiny under international maritime law.
It may affect future protocols for vessel separation and de‑confliction between India and Pakistan.