सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया, जैसा कि प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक बयान में बताया गया है। इस वार्ता में दो देशों के बीच मौजूदा समझौतों को पुनर्स्थापित करने और नई पहलें शुरू करने की योजना पर भी चर्चा हुई, जो दोनों राष्ट्रों की आर्थिक और रक्षा‑संबंधी निकटता को और गहरा करेगी।
पिछले
पाँच दशकों में भारत‑यूएई संबंधों ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। 1971 में स्थापित द्विपक्षीय संबंधों ने 2000 के दशक में रणनीतिक साझेदारी का रूप ले लिया, विशेषकर ऊर्जा आयात और निवेश के क्षेत्रों में। 2010 में दो देशों के बीच रक्षा सहयोग को औपचारिक रूप देने के बाद,
2020 में द्विपक्षीय व्यापार ने 70 अरब डॉलर का स्तर पार कर लिया, जबकि संयुक्त पहलें जैसे “इंडो‑ग्लोबल एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट” ने कृषि तकनीक में सहयोग को बढ़ावा दिया।
इन पृष्ठभूमियों को देखते हुए, इस वर्ष की शुरुआत में दो देशों के बीच कई उच्च‑स्तरीय बैठकों ने सहयोग के नए आयामों को उजागर किया। जनवरी
में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मध्य‑पूर्व की स्थितियों पर दोनों देशों ने समान रुख अपनाया, जबकि मार्च में दुबई में आयोजित आर्थिक मंच में भारतीय कंपनियों ने यूएई में निवेश के अवसरों का विस्तार किया। इस संदर्भ में, आज की फोन वार्ता को दोनों पक्षों की दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि के साथ संरेखित माना जा
रहा है।
वार्ता के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के प्रति चिंता व्यक्त की और यूएई से इस क्षेत्र में शांति‑बढ़ाने वाले कदमों में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ स्थायी शांति के लिए एक विश्वसनीय भागीदार बनना चाहता है, और इस दिशा
में यूएई की भूमिका अहम है। राष्ट्रपति अल नाहयान ने भारत के इस दृष्टिकोण का स्वागत किया और कहा कि दुबई, विशेषकर अपने रणनीतिक स्थान के कारण, इस दिशा में सहयोग को और गहरा करने के लिए तैयार है।
दोनों नेताओं ने व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने की योजना पर भी चर्चा की।
विशेष रूप से, एवीसी (ऑटोमोबाइल, वैक्यूम, क्लीनर) क्षेत्रों में संयुक्त उत्पादन और ऊर्जा में नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि दुबई और अबू धाबी में स्थित भारतीय कंपनियों को स्थानीय नियमों के अनुकूल बनाते हुए निवेश को आसान बनाने के लिए विशेष आर्थिक ज़ोन स्थापित किए जाएंगे।
यह पहल न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक स्थिरता में भी योगदान देगी।
रक्षा‑सहयोग के क्षेत्र में भी वार्ता ने नई दिशा ली। भारत ने यूएई को अपने नवीनतम युद्धक विमानों और समुद्री सुरक्षा प्रणालियों के परीक्षण में भाग लेने का प्रस्ताव रखा, जबकि दुबई ने भारतीय नौसेना को अपने बंदरगाहों
में प्रशिक्षण सुविधाओं के उपयोग की अनुमति देने का संकेत दिया। इस सहयोग से दोनों देशों की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ावा मिलने की आशा है, जो पश्चिम एशिया के प्रमुख जल मार्गों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वार्ता के बाद दोनों देशों के प्रवक्ता ने संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें
कहा गया कि इस वार्ता ने द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की ठोस नींव रखी है। प्रवक्ता ने यह भी उल्लेख किया कि दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय संगठनों जैसे GCC और SAARC में पारस्परिक समर्थन को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में नियमित उच्च‑स्तरीय संपर्क
बनाए रखने के लिए वार्षिक रणनीतिक संवाद स्थापित किया जाएगा।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए, भारत‑यूएई संबंधों को अक्सर भू‑राजनीतिक संतुलन के एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाता है। इस वार्ता के बाद, अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को मध्य‑पूर्व में एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप
में मान्यता देने की संभावना को उजागर किया, जबकि चीन ने इस विकसित होते गठबंधन पर सतर्कता जताई। इस संदर्भ में, दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को पुनः आकार दे सकता है।
आर्थिक दृष्टिकोण से, इस वार्ता के परिणामस्वरूप भारतीय निर्यातकों को यूएई के बड़े बाजार में नई संभावनाएँ मिलेंगी।
विशेषकर फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और रिन्युएबल ऊर्जा के क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, दुबई के स्टॉक एक्सचेंज ने भारतीय कंपनियों के लिए विशेष लिस्टिंग विकल्प प्रदान करने की योजना घोषित की, जिससे दोनों देशों के बीच पूँजी प्रवाह में वृद्धि हो सकती है।
Modi‑Abu Dhabi talks signal a deliberate pivot: India is using UAE’s Gulf foothold to stitch a security‑economic lattice that can counterbalance both Chinese outreach and U.S. pressure in West Asia.
If the promised joint shipyard drills and renewable‑sector hubs materialize, the duo could reshape