पिछले वर्ष के डेटा के अनुसार, भारत में कुल लगभग 8.5 लाख उज्ज्वला लाभार्थियों को इस सब्सिडी का लाभ मिला, परंतु वितरण की सटीकता और पारदर्शिता को लेकर कई प्रश्न उठे। विशेष रूप से उत्तराखण्ड, झारखंड और बिहार जैसे राज्यों में लाभार्थियों ने बताया कि उन्होंने अपने बैंक खातों में इस राशि का एंट्री नहीं देखा, जबकि रिफिल काउंटर पर यह राशि घटा दी जा रही थी। इस समस्या ने सरकार को तुरंत जांच करने और तकनीकी त्रुटियों को सुधारने का दबाव बनाया।
वित्तीय वर्ष 2025‑26 के अंतर्गत, मंत्रालय ने एक विशेष डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया, जहाँ लाभार्थी अपना LPG कनेक्शन नंबर, आधार संख्या और बैंक खाते की जानकारी भरकर सब्सिडी की स्थिति को रियल‑टाइम में देख सकते हैं। इस पोर्टल के माध्यम से उपयोगकर्ता यह जाँच सकते हैं कि उनका भुगतान बैंक खाते में जमा हो चुका है या नहीं, तथा यदि नहीं तो किस कारण से देरी हो रही है। पोर्टल पर उपलब्ध डेटा के अनुसार, यदि रिफिल के बाद 48 घंटे के भीतर राशि नहीं दिखती, तो उपयोगकर्ता को तुरंत एपीएस (ऑटोमैटिक पेमेंट सिस्टम) के माध्यम से पुनः ट्रांसफर की मांग कर सकती है।
इसी दौरान, कई रिफिल एजेंटों ने भी कहा कि उन्होंने ग्राहक को सब्सिडी का भुगतान रिफिल बिल पर सीधे घटा दिया है, और यह राशि तुरंत लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर होनी चाहिए। हालांकि, कुछ एजेंटों ने यह भी बताया कि रिफिल काउंटर पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण सब्सिडी कटौती नहीं हो पा रही थी, जिससे ग्राहक को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा था। इस संदर्भ में, पोर्टल पर उपलब्ध शिकायत रजिस्ट्री में इस प्रकार की समस्याओं की संख्या पिछले महीने की तुलना में 12 प्रतिशत बढ़ी हुई दर्ज की गई।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकी चुनौतियों का समाधान करने के लिए सरकार को अधिक सशक्त आईटी बुनियादी ढांचा और विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम की आवश्यकता होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि रिफिल एजेंटों को नियमित रूप से डिजिटल टूल्स के प्रयोग में प्रशिक्षित किया जाए, जिससे सब्सिडी का भुगतान सुचारु रूप से हो सके। इसी दिशा में, पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि आगामी महीनों में एजेंटों के लिए मोबाइल एप्लिकेशन जारी किया जाएगा, जिससे रिफिल प्रक्रिया में रियल‑टाइम सब्सिडी कटौती संभव हो सकेगी।
उज्ज्वला लाभार्थियों के बीच इस सब्सिडी को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखी गईं। कुछ लाभार्थियों ने बताया कि उन्होंने पहले चार रिफिल में ही सब्सिडी की राशि अपने बैंक खाते में देखी, जिससे उन्हें आर्थिक राहत मिली। वहीं, कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उपयोगकर्ता ने कहा कि वे अभी तक अपनी खाते में इस राशि को नहीं देख पाए हैं, और उन्हें रिफिल बिल पर ही कटौती दिखती है। कई लाभार्थियों ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने अपने स्थानीय LPG डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (LPG डिस्ट्रिब्यूशन) के प्रतिनिधि से संपर्क करके समस्या का समाधान करवाया, लेकिन प्रक्रिया में कई दिनों तक देरी हो गई।
राजनीतिक पक्ष से इस मुद्दे पर टिप्पणी में स्पष्टता मिली। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सरकार ने उज्ज्वला योजना को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सब्सिडी वितरण को डिजिटल रूप में बदल दिया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लाभार्थियों को शीघ्र भुगतान मिलेगा।
Updated: September 18, 2026
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