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आरटीआई कार्यकर्ता के पुत्र आत्महत्याकांड में मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, डीजीपी से जवाब तलब

पूर्वी चंपारण चंपारण जिले के हरसिद्धि निवासी दिवंगत आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल के पुत्र रोहित अग्रवाल आत्महत्याकांड मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान में लिया है। इस बाबत आयोग ने सूबे के डीजीपी से चार सप्ताह का समय देकर जवाब तलब किया है। इसको लेकर पटना की बुद्धा कॉलोनी अंतर्गत पहलवान घाट निवासी पत्रकार प्रभाष चंद्र शर्मा ने आयोग में शिकायत की थी। इसमें उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए बताया था कि रोहित अग्रवाल (14 वर्ष) ने आरटीआई कार्यकर्ता पिता की हत्या मामले में लगातार पुलिस अधिकारियों से इंसाफ की गुहार लगाते रहा। इसके बावजूद लगाते न्याय मिलने के कारण क्षुब्ध होकर उसने आत्महत्या कर ली। इस मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिले।

क्या है मामला

बता दें कि 24 सितंबर 2021 को हरसिद्धि प्रखण्ड कार्यालय गेट के पास आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की दिनदहाड़े अपराधियों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। परिजनों ने अज्ञात अपराधियों के विरुद्ध हरसिद्धि थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के बाद पुलिस अनुसंधान में कई लोगों के नाम सामने आए। 15 आरोपितों पर केस सत्य पाया गया। 11 आरोपितों को जांच में रखा गया है। इसमें आठ लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जबकि फरार सात आरोपितों के खिलाफ न्यायालय से वारंट जारी है।

घर पर हमला कर पत्नी से भी हुई थी बदसलूकी

दरअसल, आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल हरसिद्धि बाजार की कई एकड़ सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। इस कारण भू-माफिया समेत कई सफेदपोश विपिन अग्रवाल को टारगेट किए हुए थे। इस दौरान विपिन अग्रवाल पर कई झूठे मुकदमे कराये गए। अतिक्रमणमुक्त करने के दौरान ही थाना से बिल्कुल सटे उनके घर पर असामाजिक तत्वों ने हमला कर तोड़फोड़ किया। वहीं पत्नी की पिटाई कर घसीटते हुए ब्लॉक कार्यालय से सटे स्थल पर ले गए थे। इस दौरान पुलिस मूक दर्शक बनी रही।

मुख्य हत्यारोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर उठाया आत्मघाती कदम

विपिन अग्रवाल के परिजन हरसिद्धि बाजार निवासी सात मुख्या हत्यारोपितों के साथ ही कुछ अन्य भू-माफिया व एक सफेदपोश की गिरफ्तारी की लगातार मांग कर रहे थे। कई बार परिजन अधिकारियों के यहां गुहार लगा चुके थे और सड़क पर भी उतरे थे। हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता था। एक दफे आरटीआई कार्यकर्ता की पत्नी मोनिका देवी ने कलाई की नस काटकर जान देने के प्रयास भी किया था। और घटना के ठीक छह माह बाद 24 मार्च को न्याय की गुहार लगाते-लगाते पुलिस की कार्यशैली से आजिज आकर किशोर रोहित ने आत्मदाह कर लिया।

आग लगाकर छत से कूदा बिजली करेंट से भी झुलसा

घटना के बाद चम्पारण प्रक्षेत्र के डीआईजी, डीएम व एसपी पीड़ित परिवार से मिलने आए थे। इसी दौरान रोहित की मां मोनिका देवी ने डीआईजी को दिए आवेदन में बताया कि गुरुवार को एसपी से मिलने के लिये सुबह में ही एसपी कार्यालय पहुंचा था। वहां एसपी के नहीं मिलने पर कार्यालय कर्मियों से उसकी बहस हो गई। इसी कारण नाराज होकर घर लौटे रोहित ने पुलिस को फोन करके 15 मिनट में कार्रवाई नहीं करने पर आत्मदाह की धमकी दी थी। लेकिन पुलिस की कार्रवाई 15 मिनट में पूरा नहीं होने पर उसने शरीर पर किरासन तेल छिड़क लिया। माचिस से आग लगाकर तीन मंजिले भवन की छत से कूद गया। छत से कूदने के पहले उसने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे भी लगाये थे। छत से कूदने पर वह बिजली प्रवाहित हाई टेंशन तार पर गिरा। इस कारण वह वह बुरी तरह झुलस गया। देर रात मोतिहारी के एक निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

दादा का वीडियो हुआ था वायरल

जिस अस्पताल में इलाज के दौरान देर रात रोहित की मौत हुई थी। वहीं से अहले सुबह वीडियो जारी कर दादा विजय अग्रवाल ने बताया था कि पुलिस बयान बदलने के लिए उन पर दबाव बना रही है। यह वीडियो वायरल होने के बाद काफी हंगामा मचा था।

एसपी ने की है सीआईडी जांच की मांग

घटना के बाद विपिन के परिजन पुलिसिया कार्रवाई से असंतुष्ट दिखे। उनका बार-बार एक ही जवाब था कि मुख्य हत्यारोपित पकड़ से बाहर हैं। उन्हें बचाया जा रहा है। इस आधार पर एसपी डॉ. कुमार आशीष ने डीजीपी से सीआईडी जांच की सिफारिश की है। इधर मामले में गिरफ्तार आठ आरोपितों का जिला अदालत में ट्रायल भी शुरू हो चुका है।

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