योजना की रूपरेखा के अनुसार, मध्य प्रदेश के 25 जिलों में स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित लगभग 50 लाख निजी संपत्तियों को लक्षित किया गया है। इन संपत्तियों में स्वामित्व प्रमाणपत्र, बंधक‑रहित भूमि, छोटे मकान‑प्लॉट और कृषि‑उपयोगी भू‑खंड शामिल हैं, परंतु शहरी निकायों के भीतर स्थित बड़ी संपत्तियों या औद्योगिक भूमि को इस योजना से बाहर रखा गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल वही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे जिनके पास वैध बंधन‑रहित दस्तावेज़ और आय प्रमाणपत्र उपलब्ध हो।
पिछले वर्षों में मध्य प्रदेश में भूमि‑पंजीकरण की प्रक्रिया में उच्च शुल्क और जटिल कागजी कार्यवाही के कारण कई गरीब परिवारों को अपने अधिकारों को सुरक्षित करने में कठिनाइयाँ आती रही थीं। 2022 में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 35 प्रतिशत संपत्तियों का पंजीकरण हुआ था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह प्रतिशत 78 प्रतिशत तक था। इस अंतर को कम करने के उद्देश्य से सरकार ने इस नई योजना को तैयार किया, जिससे न केवल कागजी कार्य में गति आएगी बल्कि वित्तीय बोझ में भी राहत मिलेगी।
अभी इस योजना के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों को ऑनलाइन पोर्टल “MP Land Register” पर अपना बुनियादी विवरण भरना होगा। पोर्टल पर उपयोगकर्ता को अपना आधार कार्ड, आय प्रमाणपत्र तथा मौजूदा जमीन‑पर्चा या किरायेदारी दस्तावेज़ अपलोड करने की सुविधा उपलब्ध होगी। जमा किए गए दस्तावेज़ों की सत्यता की पुष्टि के बाद, 15 कार्यदिवस के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस प्रक्रिया में स्थानीय तहसील कार्यालयों को भी सहयोगी भूमिका निभानी होगी।
सरकारी अधिकारी ने बताया कि पंजीकरण के बाद प्रत्येक संपत्ति को एक डिजिटल अभिलेख प्रदान किया जाएगा, जिसमें मालिक का नाम, भू‑खंड संख्या, आकार तथा सीमाएँ स्पष्ट रूप से दर्शाई जाएँगी। इस डिजिटल अभिलेख को भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद या बैंकिंग ऋण प्रक्रिया में प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही, इस योजना के तहत राज्य द्वारा स्थापित “ग्रामीण भूमि सहायता केंद्र” भी कार्यरत होंगे, जहाँ ग्रामीणों को पंजीकरण प्रक्रिया की पूरी जानकारी एवं सहायता प्रदान की जाएगी।
स्थानीय तहसील कार्यालयों में इस योजना के कार्यान्वयन के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों को आवेदन की जाँच, दस्तावेज़ सत्यापन तथा डिजिटल अभिलेख निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीमों को क्षेत्रीय रूप से विभाजित करके कार्य सौंपा गया, जिससे ग्रामीणों को निकटतम केंद्र से ही सेवाएँ प्राप्त होंगी। इस पहल के साथ ही, सरकार ने पंजीकरण शुल्क की पूरी राशि को राज्य के ग्रामीण विकास निधि से आवंटित किया है, जिससे वित्तीय बोझ का कोई असर नहीं पड़ेगा।
योजना की घोषणा पर मध्य प्रदेश के कई किसान संगठनों ने स्वागत किया। किसान प्रतिनिधि रवींद्र सिंह ने कहा, “पहले जब हमें भूमि‑पंजीकरण करवाना होता तो लाखों रुपये की स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क की वजह से बहुत दिक्कत होती थी। अब यह योजना हमारे लिये एक बड़ी राहत है और इससे भूमि‑संघर्ष भी कम होंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस योजना से छोटे किसान बैंक ऋण के लिये आसानी से कागजी प्रक्रिया पूरी कर पाएँगे।
दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों के रियल एस्टेट डीलरों ने इस योजना के संभावित प्रभावों को लेकर सतर्कता दर्शायी। उन्होंने कहा, “जब ग्रामीण क्षेत्रों में मुफ्त पंजीकरण होगा तो बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी, परन्तु इससे रियल एस्टेट लेन‑देन में नई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ेगा। सरकार को उचित निगरानी और नियमन की आवश्यकता होगी।”
राजनीतिक विश्लेषकों ने इस कदम को मध्य प्रदेश सरकार की सामाजिक‑आर्थिक नीति के एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल ग्रामीण वर्ग के लिए आर्थिक राहत प्रदान करेगी, बल्कि भूमि‑संबंधी विवादों में कमी लाकर सामाजिक स्थिरता भी सुनिश्चित करेगी। साथ ही, इससे राज्य की राजस्व संरचना में परिवर्तन आएगा, क्योंकि स्टांप ड्यूटी से मिलने वाला राजस्व अब घटेगा, परन्तु इससे जुड़ी प्रशासनिक लागत को भी ध्यान में रखना आवश्यक होगा।
आर्थिक दृष्टिकोण से, इस योजना के कारण राज्य को प्रारम्भिक चरण में लगभग 400 करोड़ रुपये का खर्च उठाना पड़ेगा, जिसे वार्षिक बजट में आवंटित किया गया
Updated: September 17, 2026
Summary: Madhya Pradesh announced a free‑of‑charge rural property‑registration scheme covering about five million households, waiving stamp duty and fees for eligible farmers, small traders and low‑income families in 25 districts. The government will bear the cost, streamline digital records and aim to curb land‑related disputes while easing credit access for the rural poor.
The scheme provides free registration for 5 million rural properties, removing stamp duty and fee barriers for eligible owners.
By digitizing records, it aims to improve land‑rights security and reduce dispute resolution costs in Madhya Pradesh.