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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की गणना में ABVP ने 45% वोटों से अग्रिम बढ़त हासिल की,

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के केंद्रीय पैनल के लिए 2026‑27 शैक्षणिक सत्र की गणना आज सुबह शुरू हुई, जिससे विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति में नई दिशा तय होगी। मतदान प्रक्रिया को विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कड़ाई से निगरानी में रखा, जबकि विभिन्न छात्र संगठनों के बीच प्रतिस्पर्धा ने माहौल को तीव्र बना दिया। परिणामों का निर्धारण अगले दो दिनों में किया जाएगा, जिससे छात्र संघ की कार्यसूची और नीतियों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है, जहाँ ABVP, NSUI तथा AISA‑SFI गठबंधन ने प्रमुख स्थान हासिल किया है। 2023 के चुनाव में भी इन तीन समूहों के बीच तीव्र मुकाबला देखने को मिला था, जहाँ ABVP ने बहुमत हासिल कर केंद्र पैनल को नेतृत्व दिया था। इस बार की गणना पूर्ववर्ती चुनावों की तुलना में अधिक सावधानीपूर्वक की जा रही है, क्योंकि पिछले वर्षों में कुछ मतगणना irregularities की खबरें सामने आई थीं।

पिछले वर्ष के चुनाव में चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई विवाद उत्पन्न हुए थे, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन ने नई इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) प्रणाली अपनाने का फैसला किया। इस तकनीकी बदलाव के साथ ही मतदाता सूची को सटीक बनाने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण किया गया, जिससे लगभग 55,000 नामांकित छात्रों ने भागीदारी दर्ज की। इन उपायों को चुनाव की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया, और आज की गणना में इन्हीं मानकों का पालन किया गया।

गणना के दौरान, विश्वविद्यालय के चुनावी अधिकारी ने बताया कि सभी मतपत्रों की डिजिटल स्कैनिंग पूरी हो गई है और डेटा को दोहराव जांच के बाद सत्यापित किया गया है। इस प्रक्रिया में दो स्वतंत्र निरीक्षकों की टीम ने भाग लिया, जो राष्ट्रीय छात्र संघों द्वारा नियुक्त किए गए थे। परिणामों के प्रारम्भिक संकेत दिखाते हैं कि ABVP ने लगभग 45 प्रतिशत वोटों के साथ अग्रणी स्थिति बनाई है, जबकि NSUI ने 30 प्रतिशत और AISA‑SFI गठबंधन ने 25 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं।

परिणामों की आधिकारिक घोषणा के बाद, ABVP के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को सुधारना और छात्र कल्याण को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वे सभी छात्र वर्गों के साथ मिलकर काम करेंगे, जिससे विश्वविद्यालय की नीति निर्माण प्रक्रिया में विविधता बनी रहे। दूसरी ओर, NSUI के प्रतिनिधि ने परिणामों को अनिश्चित कहा और कहा कि वे अगली चरण में भी अपनी नीतियों को लागू करने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

AISA‑SFI गठबंधन ने भी अपने आंकड़े प्रस्तुत किए, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके पास युवा वर्ग के बीच व्यापक समर्थन है, विशेषकर सामाजिक न्याय और शैक्षणिक स्वायत्तता के मुद्दों पर। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं और विश्वविद्यालय के प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता लाने का वचन दिया। सभी प्रमुख छात्र समूहों ने परिणामों को स्वीकार करने के बाद अपने-अपने कार्यक्रमों को लागू करने की तैयारी जताई।

राजनीतिक रूप से, इस चुनाव का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी देखे जा रहा है, क्योंकि कई छात्र संगठनों के साथ प्रमुख राजनीतिक दलों के संबंध हैं। ABVP, जो भारतीय युवा मोर्चा का छात्र विभाग है, के जीतने से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शैक्षणिक नीतियों के प्रति समर्थन का संकेत माना जा रहा है। इसी समय, NSUI, जो कांग्रेस पार्टी के छात्र मोर्चे से जुड़ा है, की घटती लोकप्रियता को विपक्षी दलों की रणनीति में परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।

आर्थिक दृष्टिकोण से, छात्र संघ के निर्णय विश्वविद्यालय की बजट वितरण, छात्रवृत्ति योजनाओं और इंटर्नशिप कार्यक्रमों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालेंगे। यदि ABVP के प्रस्तावित योजनाओं को कार्यान्वित किया जाता है, तो छात्र सहायता फंड में 15 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को लाभ मिलेगा। वहीं, NSUI और AISA‑SFI ने छात्र रोजगार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त संसाधन आवंटित करने की मांग की है।

सामाजिक प्रभाव के संदर्भ में, छात्र संघ की नीतियों से कैंपस में लैंगिक समानता, पर्यावरणीय सततता और समावेशी शिक्षा को लेकर नई पहलें सामने आ सकती हैं। ABVP ने अपने मंच में लैंगिक समानता के लिए विशेष कार्यसमिति बनाने की बात कही, जबकि AISA‑SFI ने पर्यावरणीय जागरूकता अभियानों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इन पहलों से विश्वविद्यालय के सामाजिक ताने‑बाने में परिवर्तन की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव का परिणाम दिल्ली विश्वविद्यालय के शैक्षणिक नीति निर्माण में दीर्घकालिक बदलाव लाएगा। राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थान (NEP) के विश्लेषक प्रोफेसर अजय शर्मा ने कहा कि छात्र संघ की संरचना में विविध प्रतिनिधित्व शैक्षणिक सुधारों को तेज कर सकता है, विशेषकर पाठ्यक्रम पुनरुद्धार और डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सभी प्रमुख छात्र समूह सहयोगात्मक ढंग से काम


Delhi University’s central student‑union count for the 2026‑27 session began today under tight administrative oversight, with electronic voting and dual‑inspector verification aimed at boosting transparency. Early tallies show ABVP leading with about 45% of votes, positioning it to steer campus policy on academics, welfare and gender initiatives, while rivals NSUI and the AISA‑SFI alliance prepare to push their own reform agendas.

The tight vote count hints that Delhi University’s next student council will lean toward a pragmatic, bipartisan agenda—ABVP’s lead is unlikely to translate into outright dominance, forcing it to negotiate with the more radical AISA‑SFI and the cautious NSUI for any lasting reforms. This balancing act could, in turn,

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