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बिहार के मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक रसोई‑बाल केंद्र का निरीक्षण, त्वरित सहायता की मांग की।

पटना – बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को जेपी गंगा पथ के बिन्द टोली में बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिये स्थापित सामुदायिक रसोई तथा बाल केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राहत सामग्री, भोजन वितरण और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और त्वरित कार्यवाही की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ से पीड़ित नागरिकों को आवश्यक सहायता शीघ्रता से प्रदान की जानी चाहिए।

बाढ़ के बाद से पटना एवं आसपास के जिलों में कई गांव जलमग्न हो गए हैं, जिससे हजारों परिवारों को अस्थायी शरणस्थली की जरूरत पड़ी है। राज्य सरकार ने पहले ही आपदा प्रबंधन योजना के तहत कई सामुदायिक रसोई स्थापित कर भोजन एवं जल की व्यवस्था शुरू कर दी थी। इन रसोईयों में दिन में दो बार पौष्टिक भोजन दिया जाता है, जबकि बाल केंद्र में बच्चों को शैक्षणिक सहायता और पोषण प्रदान किया जाता है।

सम्राट चौधरी ने निरीक्षण के दौरान केंद्र में उपलब्ध खाद्य सामग्री, किचन उपकरण और स्वच्छता व्यवस्था की जांच की। उन्होंने कहा कि रसोई में तैयार किए जाने वाले भोजन में स्थानीय खाद्य पदार्थों का प्रयोग किया जाए ताकि पोषण मूल्य अधिक हो। साथ ही, उन्होंने बताया कि अगले दो दिनों में अतिरिक्त खाद्य सामग्री भेजी जाएगी और वितरण नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा।

सामुदायिक रसोई का संचालन स्थानीय स्वयंसेवी समूहों और सरकारी एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से हो रहा है। केंद्र में 1500 से अधिक बाढ़ प्रभावित लोगों को दैनिक भोजन मिलता है। इस दौरान कुछ तकनीकी समस्याओं की सूचना मिली, जैसे कि किचन में गैस सिलेंडर का समय पर बदलना न हो पाना। मुख्यमंत्री ने तुरंत उपाय करने का आदेश दिया।

बाल केंद्र में 200 से अधिक बाढ़ पीड़ित बच्चों को शैक्षिक सामग्री, खेल के उपकरण और पोषक आहार दिया जा रहा है। केंद्र के प्रबंधक ने बताया कि बच्चों की मनोवैज्ञानिक स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक शिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की बात दोहराई और स्थानीय NGOs को सहयोग बढ़ाने का निर्देश दिया।

सम्राट चौधरी ने स्थानीय प्रशासन को सभी राहत कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री के वितरण में किसी भी प्रकार की अनुचित लाभप्रदता नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने जिला स्तर पर एक विशेष निगरानी टीम बनाकर दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

बिहार के मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में 250 करोड़ रुपये की आपातकालीन फंडिंग सुनिश्चित की है। इस फंड का उपयोग प्राथमिक चिकित्सा, जल शोधन और अस्थायी आवास निर्माण में किया जाएगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अगले सप्ताह तक सभी प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी शिविर स्थापित किए जाएंगे।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भी राहत कार्यों में सहयोग करने का निर्देश मिला है। उन्होंने बताया कि कूटनीतिक व्यवस्था, ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा व्यवस्था को एकीकृत कर कार्यक्षमता बढ़ाई जा रही है। इस पहल से वितरण में देरी को कम करने की उम्मीद है।

मुख्य विपक्षी नेता ने इस अवसर पर सरकार की त्वरित कार्रवाई की प्रशंसा की, परन्तु उन्होंने कहा कि भविष्य में बाढ़ प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे में निवेश अधिक होना चाहिए। उन्होंने जल निकासी प्रणाली की खराबी और शहरी नियोजन में लापरवाही की ओर इशारा किया। यह टिप्पणी मीडिया में व्यापक चर्चा का कारण बनी।

वाणिज्य मंडल के प्रमुख ने बताया कि स्थानीय व्यापारियों को भी राहत कार्य में सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में स्थानीय बाजारों को प्राथमिकता दी गई है। इस सहयोग से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी समर्थन मिलने की संभावना है।

समाजसेवी संगठनों ने राहत कार्य में स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य जांच, शौचालय सुविधा और बच्चों के खेल के मैदान निर्माण में अतिरिक्त संसाधन आवश्यक हैं। इन संगठनों ने मुख्यमंत्री को आगे के चरणों में सहयोग करने का प्रस्ताव रखा।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र राहत नीतियों से आर्थिक पुनरुत्थ

Updated: September 17, 2026


Summary: Chief Minister Samrat Chaudhary inspected flood‑relief kitchens and child‑care centres in Patna’s Binda Toli, urging swift distribution of food, health services and additional supplies for thousands of displaced families. The state has earmarked ₹250 crore for emergency aid, expanding communal kitchens, temporary shelters and support to NGOs while warning against any misuse of relief resources.

The inspection highlights the scale of relief infrastructure needed for flood‑displaced families, confirming that over 1,500 people receive daily meals and 200 children receive educational and nutritional support.

It also signals the state’s allocation of ₹250 crore for emergency services, temporary shelters, and health and water‑sanitation measures.

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